Thursday, 28 April 2022

Article : हर प्रदेश चाहे, योगी सरकार

 हर प्रदेश चाहे, योगी सरकार... 




अभी कुछ दिन पहले ही उत्तर प्रदेश में चुनाव हुए, जिसमें भारी मतों से (बीजेपी) भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की, और उत्तर प्रदेश में एक बार पुनः योगी आदित्यनाथ जी, मुख्यमंत्री के रूप में चयनित हुए।

योगी जी, जब पहली बार उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री बने थे, उस समय जीत का सारा श्रेय मोदी जी का था। लेकिन इस बार के चुनाव के परिणाम, उनके द्वारा किए गए कार्यों के आंकलन पर भी होने थे। अर्थात् इस बार, योगी जी के मुख्यमंत्री बनने में, मोदी जी के साथ ही योगी जी के द्वारा किए गए कार्यों को भी, हार-जीत की कसौटी में कसा जाना था।

लोगों ने उनके द्वारा किए गए कार्यों को पूरे मन से सराहा और उन्हें शानदार जीत का तोहफा दिया।

आज तक चुनाव को जीतने के लिए बहुत से मुद्दे रखे जाते थे। पर law and order को कभी चुनाव का मुद्दा नहीं बनाया जाता था। शायद इसीलिए कि आज तक कभी भी किसी भी नेता ने इतनी सख्ती और ईमानदारी से law and order संभाला ही नहीं था।

सख्ती इतनी, कि एक से बढ़कर एक गैंगस्टर की भी इतनी हिम्मत नहीं है, कि वो योगी जी के कार्यकाल में कोई ग़लत काम करने की सोच भी सके। उनके बुलडोजर से सब डरते हैं और दबदबा तो इतना कि उनका नाम ही बुलडोजर बाबा रख दिया गया है।

और ईमानदारी इतनी, कि कोई भी जाति, धर्म, ऊंच, नीच, अमीर-गरीब के साथ न्याय में कोई भेद भाव नहीं है। 

चुनाव होने से पहले किसान आंदोलन, चुनाव के दौरान, हिजाब पहनने का एजेंडा और अब लाउडस्पीकर का कांड।

एक के बाद एक समस्या सामने आ कर खड़ी होती रही।

बहुत से प्रदेशों में हिजाब पहनने और लाउडस्पीकर के विवादों पर ना जाने कितनी हिंसा, तोड़-फोड़ कर दी गई। हिन्दू मुस्लिम के दंगे भड़क गए। लोगों पर अत्याचार हुए, कुछ लोग लापता भी हो गये।

पर इसकी तुलना अगर उत्तर प्रदेश से की जाए, तो आप पाएंगे कि, हिजाब का मुद्दा तो कब सुलझ गया, पता ही नहीं चला।

और जो लाउडस्पीकर का मुद्दा था, वो इतने सौहार्द्रपूर्ण तरीके से भी सुलझ सकता है, कोई सोच भी नहीं सकता था।

पर इस मुद्दे को भी योगी जी ने सुलझा दिया है, बिना किसी हिंसा के, बिना किसी ज़ोर जबरदस्ती के।

पर यह हुआ कैसे?

क्योंकि जब योगी जी ने उत्तर प्रदेश में इस समस्या को सुलझाने वाली बात कही और कहा कि High court के नियम के अनुसार, हर किसी को लाउडस्पीकर उतारने होंगे, फिर वो मस्जिद हों, मंदिर हों या मठ हों । और जो लाउडस्पीकर लगे रहेंगे, उससे भी आने वाली आवाज़, इतनी धीमी होनी चाहिए कि वो परिसर के बाहर नहीं जाए।

और आप को पता है कि, किस मठ के लाउडस्पीकर सबसे पहले उतारे गए? कोई और नहीं, उनके खुद का गोरखपुर का मठ, जहाँ के वो मठाधीश हैं। और जो लाउडस्पीकर लगे हैं, उनकी आवाज़, 45 decibels से भी कम कर दी गई है, साथ ही उन लाउडस्पीकर का face, जो कि बाहर की तरफ था, उसे मंदिरों की तरफ कर दिया गया है, जिससे, उनकी आवाज़ सिर्फ परिसर में ही सुनाई दे रही है। 

जब सत्ता में आसीन ताकत, अपने होने का वर्चस्व नहीं दिखाती है, बल्कि ईमानदारी और कर्तव्य निष्ठा से काम करती है, तो जनता भी उसका साथ देने में तत्परता से लग जाती है।

दूसरा लाउडस्पीकर उतरा, गोरखपुर की सबसे बड़ी मस्जिद से जो कि मठ के नज़दीक ही है। पर उस मस्जिद से लाउडस्पीकर उतारने के लिए, ना तो हिंसा करनी पड़ी, ना ही ज़ोर जबरदस्ती करनी पड़ी। उन्होंने स्वतः ही कानून के दायरे को अपना लिया। इसके बाद पूरे उत्तर प्रदेश के सभी धार्मिक स्थलों में स्वतः लाउडस्पीकर के नियम का पालन किया गया। 

उत्तर प्रदेश में सभी धार्मिक स्थलों के मिलाकर, लगभग 22,000 लाउडस्पीकर उतारे गए और 35,000 लाउडस्पीकर की आवाज़ कम की गई।

आप ने देखा, किस तरह प्रेम और सौहार्द्र से पूरे प्रदेश में law and order को follow किया गया। कहीं कोई मतभेद नहीं, कोई भेदभाव नहीं, कहीं कोई हिंसा नहीं, कहीं कोई पथराव नहीं, किसी को जेल में भर्ती भी नहीं किया गया।  

वहीं, राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली हिंसा की आग में जल रहे हैं, क्योंकि वहाँ एक तरफा कार्यवाही हो रही है। रामनवमी और हनुमान जन्मोत्सव पर रैली पर पथराव, हिंसा, मंदिरों और हिन्दूओं के घरों का खंडन किया जा रहा है। 

शायद जिन्होंने अपने निजी स्वार्थों के चलते योगी जी को वोट नहीं दिया था, उन्हें भी लगा हो, कि अच्छा हुआ कि योगी जी की ही सरकार बनी है, और वह भी आगे से अपनी भूल को सुधारते हुए, हमेशा योगी जी को दी वोट दें।

योगी जी, law and order के साथ ही, अमृत सरोवर, पर्यटन व परिवहन विभाग, सड़क यातायात व्यवस्था, रोजगार के अवसर, संस्कृति और विरासत का विकास व प्रदेश के आधुनिकीकरण पर भी विशेष ध्यान दें रहे हैं।

योगी जी हों साथ, तो सुरक्षा और विकास एक साथ...

वो दिन दूर नहीं, जब उत्तर प्रदेश का नाम भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रदेश में लिया जाएगा।

कभी जो प्रदेश, सबसे अधिक गुंडागर्दी के लिए मशहूर था, वो आज law and order के नाम पर प्रसिद्धी प्राप्त कर रहा है।

अब आप खुद सोच लीजिए कि क्यों हर प्रदेश चाहे योगी सरकार…

Wednesday, 27 April 2022

Short Story: वरदान या श्राप

 वरदान या श्राप



एक बार की बात है कि तीन मित्र थे। वे चाहते थे कि उन्हें ज़्यादा मेहनत ना करनी पड़े, पर उन्हें सभी सुख-समृद्धि मिल जाए। 

एक दिन उनकी मुलाकात एक महात्मा से हुई। उन्होंने उन तीनों को कहा, ईश्वर से सर्वशक्तिशाली कोई नहीं है। अगर तुम लोग, पूरी आस्था और लगन से तपस्या करो और ईश्वर को खुश कर सको, तो तुम लोगों की मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होगी।

तीनों तपस्या में लीन हो गए। चंद महीनों की तपस्या के पश्चात, ईश्वर प्रसन्न हुए।

उन्होंने तीनों से कहा, मेरे पास तीन वरदान हैं, जिसको जो लेना हो, ले लो।

पहला - चारों तरफ बढ़िया खाना, खूब सारे लोग और सब लोग, चाह रहे हों कि तुम‌ उनके पास रहो।

दूसरा - बढ़िया आलीशान कमरा, जिसमें पूरे time, AC चलता रहे और खूब सारे आदमी-औरत तुम्हारी सेवा करें।

तीसरा - तुम्हारे चारों ओर, सोना-चांदी, हीरे-जवाहरात हों।

पहला बहुत चटोरा था, उसने सोचा, खूब सारा खाना पीना और सब चाहें कि वो ही सब के पास रहे। मतलब खाना-पीना और शोहरत, यही तो चाहिए थी उसे। उसने झट बढ़िया खाना रहे, वो वरदान मांग लिया।

दूसरा बहुत आलसी था, उसने सोचा, दिनभर आराम और आदमी-औरत उसकी सेवा करें। उसकी, ऐसी ही ज़िंदगी की कामना थी। उसने झट दूसरा वरदान ले लिया।

तीसरा बहुत लोभी था, उसने सोचा कि यह दोनों मूर्ख हैं, जिसके पास सोना-चांदी, हीरे-जवाहरात सब हों, उसे किस बात की कमी? अच्छा हुआ, दोनों ने अपने-अपने दुर्गुणों के कारण, असली चीज़ नहीं मांगी और उसने खुशी-खुशी तीसरा वरदान ले लिया। 

ईश्वर ने कहा, आज से ठीक चार दिन बाद, तुम लोगों की इच्छा पूरी हो जाएगी।

चौथे दिन, पहले मित्र को एक बड़े होटल में वेटर की नौकरी लग गई। उसके हर तरफ खाना-पीना था, खूब सारे लोग उसके चारों तरफ थे। सब उसे आवाज़ दे रहे थे और चाहते थे कि, सबसे पहले वो उनके पास आए।

काम बहुत ज़्यादा था, वो चक्करघिन्नी बना घूमता रहता, पर काम खत्म नहीं होता। उसे अपने खाना खाने का समय भी नहीं मिलता।

दूसरे मित्र का बहुत बड़ा accident हो गया, वो ICU में भर्ती हो गया। दिन भर बिस्तर पर लेटा रहता, पूरे time AC चलता और खूब सारे आदमी-औरत उसकी सेवा करते।

तीसरे मित्र को एक बहुत पुरानी बड़ी सी गुफा मिली, जहाँ सोना चांदी, हीरे जवाहरात सब थे। उसमें घुस तो वो गया, पर उससे बाहर निकलने का रास्ता उसे दिखाई नहीं दे रहा था। 

वहाँ, उसके अलावा कोई नहीं था, खाना-पीना भी नहीं था।

कुछ दिन पश्चात तीनों ही मृत्यु को प्राप्त हुए। तीनों ईश्वर के पास गए और बोले कि हे ईश्वर, यह कैसा वरदान था?

ईश्वर बोले, जब भी तुम चटोरे, आलसी और लोभी बनकर कोई भी कामना करोगे। वरदान, श्राप में ही बदल जाएगा।

जब भी परिश्रम, लगन और निष्ठा से काम करोगे, तभी तुम्हें सुख समृद्धि और प्रसिद्धी का वरदान मिलेगा।

इन सब को पाने का कोई shortcut नहीं है। जिसकी intention गलत होती है, उसके लिए वरदान भी श्राप बन जाता है...

Monday, 25 April 2022

Article : COVID, कितना डर, कितनी सच्चाई

 COVID, कितना डर, कितनी सच्चाई 




यह जो जिंदगी है, इसमें ना जाने कितने उतार- चढ़ाव देखने को मिलते हैं। कभी सुख तो कभी दुःख, कभी कठिनाई, कभी परेशानियांँ, कभी सफलताएं, कभी असफलताएं। पर यह है, तभी तो जीवन है। 

जब सुख में खुशी है तो दुःख से डरना क्या?

जी हाँ, नहीं डरना है, क्योंकि मंज़िल डरने से नहीं, आगे बढ़ने से मिलती है।

जीवन की एक ऐसी ही सच्चाई बन गया है कोरोना...

कोरोना, एक ऐसी सच्चाई है, जिसके होने से रोना-धोना नहीं है बल्कि दृढ़ता से उसका सामना करना चाहिए।

ऐसा नहीं है कि यह बात पीर पराई पर लिख रहे हैं। आप बीती पर लिख रहे हैं।  

हम लोग, पिछले ढाई साल से लगातार, सारे corona protocol, follow कर रहे हैं। Means, सामानों को 10 दिन, quarantine करना, social distancing रखना, means कहीं, किसी भी जगह unnecessary आना-जाना नहीं करना। जहाँ जाना ज़रूरी है, जैसे office, market, hospital etc. तो mask पहनकर निकलना, sanitizer use करना, घर आते से ही सबसे पहले shower लेना, सबके vaccination है, etc.

अभी कुछ दिन पहले‌ बेटे Advay का school खुल गया। वो 10 साल का है, इसलिए उसके vaccination नहीं हुआ है। 

बहुत से बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें cold, cough, fever, diarrhea, nausea, vomiting tendency etc. है, फिर भी school आ रहे हैं।

School में Advay दिन भर mask लगाता है, पर बहुत से बच्चे, दिन भर mask नहीं लगा रहे हैं। और parents उनके mask नहीं लगाने का support भी कर रहे हैं। 

शायद, यह 2 साल schools के online का after effects है कि कुछ parents को बच्चों की safety की कोई चिंता नहीं है। वो चाहते हैं कि बच्चा कुछ देर स्कूल में रहे और उन्हें शांति मिले।

और लोगों की लापरवाही से, फंस मेरा बेटा गया और उसे fever and cough हो गया।

उसके बाद हमें और बेटी को भी fever and cough हो गया।

Doctor को दिखाया, तो वो बोले कि दिल्ली में आजकल corona के case बहुत बढ़ गये हैं, और उनके भी symptoms URTI ही है। अगर आप कहें तो आप को RT PCR test लिख दें।

2 minute के लिए सोचा, कराएं कि नहीं?

फिर अगले ही पल सोचा कि अगर नहीं है तो डरना क्या? और अगर है, तो भी डरना क्या? सही diagnosis and treatment must है। और हमने test करा लिया।

Test positive आया!

जब test positive आ गया, तो हमें सोचना था कि हम इसे सबको बताएं या चुपचाप रहें। पर हमारे ज़मीर ने हमें इसकी इजाज़त नहीं दी कि हम चुप रहें और सब काम यथावत जारी रखें। और बाकी सब को हमारे कारण corona हो जाए।

मेरे पति ने, अपने office में, मेरे और बेटी की positive report के बारे में बता दिया, हमने बेटे के school में और maid को भी बता दिया।

उसके बाद हम लोग home quarantine हो गये। 

जितनी problem, हम लोगों को health regarding नहीं आयी, उससे ज्यादा home quarantine में आयी।

पर सोच लिया था कि एक responsible citizen behaviour रखेंगे, तो वही किया और सच मानिए, problem तो ज़रूर हुई पर मन में जो सुकून था कि हम से कोई और बीमार नहीं होगा, वो बहुत value रखता है।

आज-कल कहा जा रहा है कि corona अब mild हो गया है। पर ऐसा नहीं है, corona पहले भी mild था और आज भी mild है, पर सिर्फ उन लोगों के लिए जो पहले से पूर्णतया स्वस्थ हैं।

लेकिन जो पहले से ही किसी भी तरह की बीमारी से ग्रस्त हैं, जैसे high blood pressure, diabetes, heart problems, low haemoglobin, lungs problem or any such types of problems, उनके लिए corona कल भी धातक था और आज भी है। 

अगर आप, corona के पहले healthy हैं तो आप को सिर्फ fever and cough ही होगा, जो कि 2 से 3 दिन में ठीक भी हो जाएगा।

पर अगर आप पहले से ही किसी problem को face कर रहे हैं, जैसे BP, diabetes, low haemoglobin, lungs or heart problems etc. तो आप को fever and cough के साथ, weakness, dizziness, body ache, smell or taste का जाना, सांस फूलना etc. जैसी problem भी हो सकती है।

पर ऐसा नहीं है कि, जिन्हें इस तरह की problem है, उनका कोई treatment नहीं है, उनका भी treatment है, वो भी ठीक हो जाएंगे, बस उन्हें time थोड़ा ज़्यादा लगेगा। बशर्ते उनका सही diagnosis सही time से हो।

अब हम आपसे जो कहने जा रहे हैं, वो सबसे important है। जब भी आपको corona के symptoms लगें, जैसे cold, cough, fever, diarrhea, nausea, vomiting tendency, smell ना आना etc. तो RT PCR test ज़रुर कराएं, coz COVID positive होने से mild or severe नहीं होता है। वो healthy and unhealthy body पर depend करता है। पर अगर diagnosis सही नहीं होगा तो treatment सही कैसे होगा।

और आप सभी से यह अनुरोध भी है कि corona positive होने पर quarantine भी अवश्य रहें।

क्योंकि corona से पूरी तरह से निजात तभी मिलेगा, जब हम डरें नहीं बल्कि सच्चाई का डटकर मुकाबला करें। सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि दूसरों के लिए भी सोचें।

दूसरों के लिए सोचना, panic होना नहीं है, I repeat - जब हम कोरोना से डरेंगे नहीं, सच्चाई का डटकर सामना करेंगे। सारे protocol follow करेंगे। Symptoms होने पर test कराएं और positive होने पर quarantine हों। तभी सच में कोरोनामुक्त होगा India.

अपने लिए नहीं तो, अपने बच्चों के लिए ही सही, COVID, से डरें नहीं, बल्कि सच्चाई से उसका सामना करें।

जय हिन्द जय भारत 🇮🇳