Thursday, 22 June 2023

Article: Sunil chhetri.. बस नाम ही काफी है

Sunil chhetri - बस नाम ही काफी है 


भारत का हर field में चमकता हुआ नाम, हम सब भारतीयों को गर्व से ओत-प्रोत कर रहा है। 

चाहे वो हमारे प्रधानमंत्री की बात हो, soldiers की बात हो, scientists की बात हो, बढ़ती हुई GDP की बात हो, या players, आदि की... हमारा भारत एक नया भारत बन चुका है, जिसकी शीर्ष पर रहने की आदत बनती जा रही है।

कल भी भारत ने एक बड़ी जीत हासिल की, SAFF championship 2023 में भारत ने पाकिस्तान को 4-0 से हरा दिया।

यह जीत जिसने दिलाई है, वो हैं हमारी football team के captain, सुनील छेत्री... 

सुनील ने hat-trick goal मारे और उदांता सिंह ने एक गोल मारा, जिसके कारण पाकिस्तान को करारी हार का सामना करना पड़ा।

Football matches में भारत की यह कोई पहली जीत नहीं है, और ना ही हम ऐसे, किसी भी player पर article लिखते हैं। 

पर बात जब किसी ऐसे player की होती है, जो देश की आन बन जाता है, तो उसके लिए तो कलम अपने आप चलने लगती है। 

बस वही spark है (सिकंदरा बाद) आंध्रप्रदेश के सुनील छेत्री में...

Football के दीवाने, पुर्तगाल के रोनाल्डो और अर्जेंटिना के मेस्सी को सातवें आसमान पर बैठा कर रखते हैं। तो आप सबको बता दें कि हमारे सुनील छेत्री, उन्हें टक्कर दे रहे हैं।

उन्हें Indian football GOAT भी कहा जा रहा है (GOAT (or G.O.A.T.) is an acronym which stands for 'greatest of all time'. It is a tag which is reserved for the individual who is deemed to be the undisputed master of their sport.)

International football players में सुनील छेत्री चौथे स्थान पर पहुंच गये हैं, सक्रिय खिलाड़ियों में तीसरे स्थान पर हैं। और वो दिन दूर नहीं जब, पहले स्थान पर भी पहुंच जाएंगे। 



Football में FIFA में position बनाना सबसे बड़े गर्व की बात होती है, जो सुनील छेत्री ने बना ली है। अभी हाल में ही उनके goals की संख्या 92 हो गई है। अतः FIFA ने उन्हें honour किया है।
वो दिन दूर नहीं कि वो प्रथम पर स्थान भी आ जाएं।

लेकिन सुनील के इस सपने को पूरा करने में, उनकी मेहनत के साथ ही हम भारतीयों को भी सहयोग देना होगा... आप बोलेंगे, हम क्या कर सकते हैं इसके लिए?? 

बिल्कुल कर सकते हैं, पहला यह कि cricket match के अलावा दूसरे matches and games भी देखिए। जिससे बाकी खेलों के खिलाड़ियों को भी लगे कि उनकी भी अहमियत है। 

दूसरा, जो अच्छे खिलाड़ी हैं, उनका उत्साह बढ़ाएं, उनके अंदर उम्मीद भरिए, जिससे वो अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें, और भारत के लिए जीत का परचम लहराएं।

जो सम्मान और प्रेम, कपिल देव, लेंडरपेस, विश्वनाथन आंनद, महेंद्र सिंह धोनी, पीवी सिंधु, और नीरज चोपड़ा, आदि.. को दिया गया है, उसी के हकदार हैं सुनील छेत्री...

सुनील छेत्री, हमें गर्व है आप पर।

भारत के लिए Football में जो मुकाम,‌ बाइचुंग भूटिया ने बनाया था, सुनील छेत्री उसे बहुत आगे ले गए हैं। 

Football match बहुत interesting होता है, पर जब सुनील छेत्री खेल रहे हों तो match, super exciting हो जाता है। 

इसलिए आज से ही, international football matches देखना शुरू कर दीजिए, जिसमें India खेल रही हो। यकीन मानिए, match ख़त्म होने से पहले आप उठ नहीं पाएंगे और अगर आप nail biter हैं, तब तो आपके नाखूनों की खैर नहीं...

साथ ही सरकार से भी यह अनुरोध है कि, भारत के football players, FIFA world cup में भी खेल सकें, इस ओर भी ध्यान केंद्रित किया जाए🙏🏻

खेलो इंडिया, 

जीतो इंडिया, 

जीत का परचम लहराओ, 

भारत को विश्व-विजयी बनाओ..


जय हिन्द जय भारत 🇮🇳

Wednesday, 21 June 2023

Short Story: प्रसन्नता का योग

 प्रसन्नता का योग


एक ऊंची काली पहाड़ी थी, वहां पर एक बहुत ही मस्त बाबा रहा करते थे।

उनको किसी ने कभी दुखी नहीं देखा था, वो हर हाल में प्रसन्न ही रहते थे। 

उनसे बहुत लोग जुड़े हुए थे, क्योंकि वो यथासंभव सबकी मदद किया करते थे। बहुत से लोग उन्हें बहुत मान देते थे और उनकी तारीफ करते हुए नहीं थकते थे,पर वहीं उनसे जुड़े हुए कुछ लोग ऐसे भी थे, जो उनको फूटी आंख नहीं पसंद करते थे। 

उन्हें लगता था कि, उन्हें बस सुख ही सुख है, इसलिए ही वो इतने प्रसन्न रहते हैं। हर किसी को तो, दूसरे का सुख बर्दाश्त नहीं होता। 

उनकी प्रसन्नता की ख्याति दूर-दूर तक फैलने लगी, एक दिन उन बाबा के पास, कुछ media के लोग पहुंच गए।

और उनसे पूछने लगे, बाबा जी, एक बात बताएं हमारे सभी दर्शकों को, कि आप की प्रसन्नता का क्या कारण है? क्या आप को कोई दुःख नहीं है या अपने योग-ध्यान इत्यादि से इतनी सिद्धी प्राप्त कर ली है?

बाबा जी ने एक मीठी सी मुस्कान के साथ बात शुरू की।

भाई, इस दुनिया में कहीं कोई ऐसा नहीं है, जिसे कोई, दुःख, कष्ट, रोग, व्याधि ना हो...  यहां तक कि जब प्रभु श्रीराम और श्रीकृष्ण जी ने मानव शरीर धारण किया था, तो उन्होंने भी सुख-दुख सब भोगा था। तो मैं जीवन के सुख-दुख से कैसे वंचित रह सकता हूं? मुझे भी दुःख, कष्ट, रोग सब हैं...

तो क्या बाबा जी आप रोज़ योग-ध्यान इत्यादि करते हैं? बहुत सी चीजों का परहेज करते हैं?

नहीं बेटा, मैं ऐसा कुछ भी नहीं करता हूँ, मैं बस यह करता हूं कि, कोई भी बुरे व्यसन, जैसे शराब, सिगरेट, गुटखा, तम्बाकू, मांस-मछली आदि का सेवन नहीं करता हूँ। मैं सभी तरह का पौष्टिक भोजन करता हूं। 

घी, तेल, दूध, दही सब?

हां, भाई हमारे शरीर को यह सब चाहिए। पर एक चीज़ और है कि मैं अल्पाहारी हूं और भरपूर मेहनत करता हूं। 

अल्पाहारी होने से क्या होता है?

जब आप अल्पाहारी होते हैं, तो कोई भी भोजन अधिक नहीं खाते हैं, और जब कुछ भी अधिक नहीं खाएंगे तो, कुछ नुकसान भी नहीं करता है। और मेहनत करने से सब अच्छे से digest भी हो जाता है। 

अच्छा हाँ, तुमने योग की बात की थी, तो याद आया कि, एक योग तो मैं भी करता हूं...

Media वाले की आंखें चमक गई, अरे उसे ही तो हम जानने आए हैं...

वो योग है प्रसन्नता का योग...

प्रसन्नता का योग?

यह क्या है?

मुझे कोई भी दुःख हो, कष्ट हो, रोग हो, कोई मेरा साथ दे कि ना दे, मैं हर हाल में प्रसन्न रहता हूं। 

हर हाल में?

ईश्वर ने इतनी अनमोल जिंदगी दी है, कोई दुःख पड़ने से प्रसन्नता योग छोड़ देना ही सबसे बड़ी भूल है, जिसने इस योग को अपनाया, उसी ने सच्चा जीवन पाया है, जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी...

जिंदगी के बाद भी मतलब?

जो प्रसन्नता योग का पालन करता है, वो दूसरों से जलन भाव नहीं रखता है, बल्कि सदैव दूसरों की यथासंभव मदद भी करता है, समझे? 

जब वो जीवित रहता है तो प्रसन्न रहता है और मृत्यु के पश्चात् भी लोग उसके अच्छे गुण और कर्म के लिए याद करते हैं। अतः वह मृत्यु के पश्चात् भी सबके बीच में अच्छी याद बनकर रहता है। अमर हो जाता है।

सही कहा आपने बाबा‌ जी, हम जो भी योग करें, सभी अच्छे हैं, पर प्रसन्नता योग सबसे ऊपर है और जो सुख-दुःख दोनों में ही प्रसन्न रहें, उसे मोक्ष अवश्य मिलेगा, क्योंकि ऐसे व्यक्ति तो ईश्वर को भी सर्वप्रिय हैं।

आप सभी को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏻

स्वस्थ रहिए, प्रसन्न रहिए, सुखी रहिए 🏃🤸😊

Tuesday, 20 June 2023

Article : जगन्नाथ रथयात्रा प्रारंभ और विशेषता

जगन्नाथ रथयात्रा प्रारंभ और विशेषता  


आज से रथयात्रा प्रारंभ हो रही है, तो सोचा अपने अनुभव व रथयात्रा की विशेषता को ही साझा किया जाए।

आज का लेख, भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा के पावन पवित्र उत्सव को समर्पित 🙏🏻

जैसा कि आप सभी जानते हैं, भगवान श्रीकृष्ण जी के साथ हमेशा से राधा जी का नाम ही लिया जाता है, उनका ही एक साथ मंदिर होता है और एक साथ पूजा की जाती है।

केवल महाराष्ट्र के पंढरपुर में भगवान श्रीकृष्ण जी के साथ रुक्मिणी जी की पूजा की जाती है। 

ऐसे ही उड़िसा में भगवान श्रीकृष्ण जी की पूजा, बलराम व सुभद्रा जी के साथ की जाती है। 

पुरी की जगन्नाथ यात्रा विश्व प्रसिद्ध है। हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि से रथ यात्रा निकलती है।

इस साल जगन्नाथ रथ यात्रा 20 जून 2023 को शुरू होगी।

इस रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ जी के अलावा उनके बड़े भाई बलराम जी और बहन सुभद्रा जी रथ पर सवार होकर जनता का हाल जानने निकलते हैं।

उड़ीसा और बंगाल में इस समय अजब छटा के दर्शन होते हैं। वहां रहने वाले सभी रथ की ओर उमड़ पड़ते हैं, एक अलग ही भक्तिमय माहौल रहता है। रथ की डोर को क्षणभर भी पकड़ने का अवसर मिल जाए, तो लगता है मानो साक्षात जगन्नाथ भगवान के ही दर्शन हो गए। 

मान्यता है कि जगन्नाथ रथ यात्रा के दर्शन मात्र से व्यक्ति के समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं।

इस दिन तीन विशालकाय रथ निकलते हैं। जगन्नाथ रथ यात्रा में इन विशालकाय रथों की एक अपनी विशेषता होती है।

आइए जानते हैं कि जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? और क्या है, इन रथों की विशेषता - 

पर पहले जान लेते हैं, रथ यात्रा के प्रारंभ व समापन के समय को -

जगन्नाथ जी की रथ यात्रा आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 20 जून 2023 को रात्रि 10.04 मिनट पर शुरू होगी और यात्रा का समापन 21 जून 2023 को शाम 07.09 मिनट पर होगा। 

नगर भ्रमण के बाद इस दिन भगवान जगन्नाथ जी, बलराम जी और सुभद्रा देवी गुड़िचा मंदिर में अपनी मौसी के घर विश्राम करेंगे। 

जगन्नाथ रथयात्रा प्रारंभ (शुरुआत) -

जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत को लेकर कई कथाएं प्रचलित है, एक कथा के अनुसार एक बार देवी सुभद्रा ने अपने भाई श्रीकृष्ण और बलराम से द्वारका दर्शन की इच्छा जाहिर की। जिसे पूरी करने के लिए तीनों रथ पर सवार होकर द्वारका नगर भ्रमण पर निकले तभी से रथयात्रा हर साल होती है.

जगन्नाथ रथ की खासियत

भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा देवी के रथ नीम की पवित्र और परिपक्व लकड़ियों से बनाये जाते है. इन रथों के निर्माण में किसी भी प्रकार के कील या कांटे या अन्य किसी धातु का प्रयोग नहीं होता है। सभी रथ में इतनी हल्की लकड़ियां होती है कि रथ को आसानी से खींचा जा सकता है..

श्रीकृष्ण के रथ की विशेषता

832 लकड़ी के टुकड़ों से बना जगन्नाथ जी का रथ 16 पहियों का होता है, जिसकी ऊंचाई 13 मीटर तक होती है, इसका रंग लाल और पीला होता है। गरुड़ध्वज, कपिध्वज, नंदीघोष ये भगवान जगन्नाथ के रथ के नाम हैं।

रथ की ध्वजा यानी झंडा त्रिलोक्य वहिनी कहलाता है। रथ को जिस रस्सी से खींचा जाता है, वह शंखचूड़ नाम से जानी जाती है। भगवान जगन्नाथ रथ के रक्षक भगवान विष्णु के वाहन पक्षीराज गरुड़ हैं।

सुभद्रा देवी का रथ

सुभद्राजी के रथ पर देवी दुर्गा का प्रतीक होता है। देवी सुभद्रा के रथ का नाम देवदलन है. लाल और काले रंग का ये रथ 12.9 मीटर ऊंचा होता है। रथ के रक्षक जयदुर्गा व सारथी अर्जुन होते हैं। इसे खींचने वाली रस्सी को स्वर्णचुड़ कहते हैं.

बलरामजी का रथ

भगवान बलभद्र को महादेवजी का प्रतीक माना गया है। रथ का नाम तालध्वज है। रथ के रक्षक वासुदेव और सारथी मताली होते हैं। 13.2 मीटर ऊंचा और 14 पहियों का ये रथ लाल, हरे रंग का होता है। 

आज इतना ही...

कान्हा जी सब पर अपनी कृपा दृष्टि बनाएं रखें

आप सभी को जगन्नाथ रथयात्रा शुभ हो 🙏🏻

जय श्री कृष्णा 🚩