Saturday, 1 February 2025

India's Heritage : प्राकट्य, माँ सरस्वती का

प्राकट्य, माँ सरस्वती का


बात उस समय की है जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण किया।

पेड़-पौधे, पशु-पक्षी आदि बनाने के पश्चात् उन्होंने मनुष्य की रचना की...

जब सम्पूर्ण सृष्टि का निर्माण हो गया, तो वह धरती पर भ्रमण करने के लिए आए।

उन्हें अपनी हर कृति पर बहुत नाज़ हो रहा था। लहलहाती हुई प्रकृति, झूमते हुए पशु-पक्षी, सब वैसे ही थे, जैसी उन्होंने कल्पना की थी।

अंत में वो वहां गए, जहां मनुष्य थे। पर मनुष्यों को देख कर उन्हें बहुत ही ग्लानि हुई। 

क्योंकि मनुष्य को बनाकर उन्हें लगा था कि उन्होंने बहुत ही सर्वश्रेष्ठ कृति की रचना की है, पर ऐसा कुछ नहीं था। क्योंकि मनुष्यों और पशुओं में कोई विशेष अंतर नहीं था।

मनुष्य भी पशुओं के समान ही बुद्धिहीन और मूकबधिर सा प्रतीत हुआ...

क्षुब्ध होकर ब्रह्म देव, वापस ब्रह्मलोक में लौट आए।

उन्हें व्यथित देखकर भगवान श्री हरि बोले, “हे ब्रह्म देव! आप के दुःख का निवारण आपके अंदर ही निहित है।”

श्री हरि के इतना कहते ही ब्रह्म देव ने आह्वान किया तो एक अत्यन्त तेज़ और ओज से परिपूर्ण श्र्वेत वस्त्र को धारण किए हुए हंस पर विराजमान देवी प्रकट हुई। उनके हाथों में वीणा और अक्ष माला थी।

ब्रह्म देव, उन्हें देख कर बहुत प्रसन्न हुए।‌ देवी का रूप और गुण देखकर उनका नाम माता सरस्वती रखा गया।

भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु की आज्ञा का पालन करते हुए, सरस्वती माता ने धरती पर विचरण किया, और सभी मनुष्यों को वो प्रदान किया जो उन्हें पशु प्रवृत्ति से भिन्न करती थी। अर्थात् उनके भीतर ज्ञान और विवेक का संचार किया।

मनुष्य के अंदर का ज्ञान और विवेक ही है, जो मनुष्य को मनुष्य बनाता है। अर्थात् देवी सरस्वती के प्राकट्य के पश्चात् ही मनुष्य को अपना अस्तित्व मिला।

मां सरस्वती को अपने अस्तित्व को प्रदान करने के लिए, उनका पूजन, ध्यान करना। पीला प्रसाद तैयार करना, पीले पुष्प अर्पित करना पीले वस्त्र धारण करना... बस यही है, बसंत पंचमी पर्व का त्यौहार... और यही है कारण है कि बसंत पंचमी पर्व को सनातन धर्म में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

Wednesday, 29 January 2025

India's Heritage : अमृत स्नान - मौनी अमावस्या

महाकुंभ महोत्सव अपने चरम पर है। फिर चाहे वहां हो रहे विभिन्न क्रियाकलापों की बात हो, वहां इकट्ठा भीड़ की बात हो, वहां हो रहे लोगों के लाभ की बात हो या आने वाले अमृत स्नान की बात हो... 

प्रयागराज अपने अलग ही स्वरूप में नजर आ रहा है। 

चलिए, जब बात चल ही रही है, तो आपको आज के दूसरे स्नान के विषय में सम्पूर्ण जानकारी दे देते हैं। 

अमृत स्नान - मौनी अमावस्या 


कब होगा दूसरा स्नान? क्या है स्नान के शुभ मुहूर्त? मौनी अमावस्या में मौन रहने का कारण? क्या खासियत है इस दिन डुबकी लगाने में? क्या हैं मौनी अमावस्या व्रत के नियम?


1) महाकुंभ 2025 - दूसरा शाही स्नान :

महाकुंभ 2025 का दूसरा शाही स्नान 29 जनवरी 2025 मौनी अमावस्या के दिन होगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 28 जनवरी की शाम 7:35 बजे शुरू होकर 29 जनवरी की शाम 6:05 बजे खत्म होगी। ऐसे में उदया तिथि के हिसाब से स्नान 29 जनवरी को किया जाएगा। इस दिन संगम पर भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। आपको बता दें कि इसके बाद तीसरा शाही स्नान 3 फरवरी 2025 को बसंत पंचमी के दिन किया जाएगा।


2) स्नान-दान का शुभ मुहूर्त :

हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या के दिन स्नान-दान का बेहद महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार, 29 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:25 बजे से 6:19 बजे तक रहेगा। ऐसे में इस दौरान स्नान और दान को बेहद शुभ माना गया है। अगर इस समय में स्नान नहीं कर पाएं, तो सूर्योदय से सूर्यास्त तक कभी भी स्नान और दान कर सकते हैं।


3) मौन रखने का कारण :

मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखने का विधान है। साधक इस दिन मौन रहकर व्रत करते हैं, जो मुख्यतः आत्मसंयम और मानसिक शांति के लिए किया जाता है। यह व्रत साधु-संतों के द्वारा भी किया जाता है, क्योंकि मौन रहकर मन को नियंत्रित करना और ध्यान में एकाग्रता लाना सरल हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार, मौन व्रत से व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक उन्नति होती है। इसके माध्यम से वाणी की शुद्धता और मोक्ष की प्राप्ति संभव है। यह व्रत आत्मिक शांति और साधना में गहराई लाने का एक सशक्त माध्यम है। 

और साधु-संत लोग की महान उपलब्धि होती है, वाणी की शुद्धता, आत्मिक शांति और साधना में गहराई लाने, तथा उनकी साधना तब पूर्ण समझी जाती है, जब मोक्ष की प्राप्ति संभव हो। तो बस यह व्रत एक सशक्त माध्यम है, उसी महान उपलब्धि का...


4) डुबकी लगाना क्यों खास :

मौनी अमावस्या का दिन खास इसलिए है, क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि इस दिन पितृ धरती पर आते हैं। अगर इस दिन संगम में स्नान के साथ पितरों का तर्पण और दान किया जाए, तो उनकी आत्मा तृप्त होती है और उन्हें मोक्ष मिलता है। इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और परिवार पर पितरों का आशीर्वाद बना रहता है। सिर्फ पितरों के लिए ही नहीं, मौनी अमावस्या का स्नान हर व्यक्ति के लिए खास माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन गंगा में डुबकी लगाने से सारे पाप धुल जाते हैं। यह दिन आत्मिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। 


मौनी अमावस्या का व्रत हर वर्ष माघ मास की अमावस्या तिथि पर रखा जाता है। इसे माघी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2025 में यह व्रत 29 जनवरी को रखा जाएगा, और इसी दिन महाकुंभ मेले में दूसरा अमृत स्नान भी होगा। धार्मिक ग्रंथों में अमावस्या तिथि को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह दिन गंगा स्नान, दान और पितरों की पूजा के लिए समर्पित होता है। प्रत्येक अमावस्या का अपना विशेष महत्व होता है, लेकिन मौनी अमावस्या को इनमें सबसे खास माना गया है। इस दिन मौन रहकर व्रत करने की परंपरा है। इसे जप, तप और साधना के लिए सबसे उपयुक्त समय माना गया है।


5) मौनी अमावस्या व्रत के नियम :

  • इस दिन प्रातःकाल गंगा स्नान करना आवश्यक है। यदि गंगा स्नान संभव न हो, तो पवित्र नदी के जल से स्नान करने का प्रयास करें।
  • पूरे दिन मौन रहकर ध्यान और जप करें।
  • व्रत के दौरान किसी प्रकार का बोलना वर्जित है। तिथि समाप्त होने के बाद व्रत पूर्ण करें।
  • व्रत खोलने से पहले भगवान राम या अन्य इष्ट देव का नाम अवश्य लें।

तो अब आपको पता चल गया होगा कि मौनी अमावस्या क्यों इतनी विशेष होती है और क्यों मौनी अमावस्या पर किए जाने वाला अमृत स्नान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

Tuesday, 28 January 2025

Recipe : Maharashtrian Palak Dal Bhaji

शरद ऋतु चल रही है, और इस ऋतु में सब्जियों की बहार होती है।

उनसे बनने वाली dishes जितनी tasty होती हैं, उतनी ही healthy भी...

तो आज एक ऐसी ही मराठी recipe share कर रहे हैं, जो healthy होने के साथ ही tasty भी होती है।

और for a change, एक अच्छा option भी है... इसका मराठी नाम, 'पालकाची पातळ भाजी' है, means पालक की दाल भाजी...

महाराष्ट्रीयन पालक दाल भाजी




I. Ingredients :

  • Spinach leaves - 250 grams
  • Gram pulses - handful
  • Ground nut - handful 
  • Jaggery -  1" (cubic)
  • Buttermilk - 1 cup
  • Gram flour - 1 tbsp.
  • Clarified butter (ghee) - 2 tbsp.
  • Green chilli - 2 or as per taste 
  • Garlic cloves - 4 to 6
  • Ginger - 1"
  • Cumin seeds - 1 tsp.
  • Asafoetida - ½ tsp.
  • Turmeric powder - ½ tsp.
  • Salt - as per taste 


II. Method :

  1. चना दाल और मूंगफली को 3 to 4 hours के लिए भिगो दें।
  2. पालक को लम्बा-लम्बा महीन काट लें। 
  3. छाछ में बेसन मिलाकर अच्छे से mix कर लीजिए।
  4. Pressure cooker में पालक, चना दाल, मूंगफली, नमक, हल्दी, 1 cup पानी डालकर 2 high flame पर, और 1 slow flame पर whistle लगा लीजिए।
  5. जब cooker का pressure down हो जाए, तो उसमें छाछ-बेसन का घोल डालकर अच्छे से mix करके 2 boil आने तक पका लीजिए। 
  6. अब इसमें गुड़ का ढेला डालकर गलने तक मिला दीजिए।
  7. अदरक-लहसुन और हरी मिर्च को कूट लें। 
  8. एक wok में घी डालकर गर्म कीजिए।
  9. अब इसमें हींग और जीरा डालकर चटकाएं।
  10. फिर इसमें अदरक-लहसुन, हरी मिर्च का paste डालकर भून लें। 
  11. तैयार छौंक को पालक दाल भाजी में डाल दीजिए।

गर्मागर्म पालक दाल भाजी को चावल के साथ enjoy कीजिए।


III. Tips and tricks :

  • चने की दाल और मूंगफली को भिगोकर रखें, इससे यह जल्दी गल जाते हैं।
  • इस recipe में चने की दाल थोड़ी खड़ी रखी जाती है, पर अगर आप को चने की ठीक से गली हुई दाल पसंद है तो slow flame पर 2 to 3 whistle लगा लीजिएगा।
  • Maharashtrian cuisine की recipe है, इसलिए इसमें मूंगफली, छाछ और गुड़ डाला जाता है, अगर आप को कोई खास ingredients न पसंद हो तो discard कर सकते हैं। वैसे authentic flavour, यह सब डालकर ही आएगा।
  • अगर आप लहसुन नहीं खाते हैं तो उसे avoid कर सकते हैं।
  • आप अपने taste के according मिर्च घटा-बढ़ा सकते हैं, चाहे तो हटा भी सकते हैं। 
  • हमारे यहां कुछ लोग तीखा नहीं खाते हैं, इसलिए हमने हरी मिर्च‌ नहीं कूटी थी, बल्कि boil करते समय डाली थी।
  • Boiled हरी मिर्च को serve करते समय केवल उन servings में mash करके डाल दें, जिन्हें तीखा पसंद है।
  • इसमें किसी भी तरह के dry मसाले नहीं पड़ते हैं, सारा flavour fresh ingredients से आता है, जो इसको बहुत ही unique taste देता है। एक बार जरूर से बना कर खाएं...