Wednesday, 25 September 2019

Story Of Life : सास बहू और वो

सास बहू और वो


निखला जी ने अपने बेटे की शादी क्या तय कर दी, वे मान बैठी, कि बहू आ रही है तो उनके तो सुख के दिन शुरू हो गए। अब तो वो अपने आप को महारानी ही समझने लगीं। सोचने लगीं, अब वो सास बन जाएंगी, तो बरसों से कर रहीं बहुत सारे काम, अब बहू संभालेंगी।

इसमें उनकी कोई गलती भी नहीं थी, वो जब बहू बनकर आयीं थीं, तो उन्हें भी सारी बागडोर थमा कर उनकी सास भी महारानी बन गईं थी।

पर हाय रे! उनकी किस्मत... आज कल कहाँ ऐसी बहुएँ।

तो बस, उनकी भी ऐसी नहीं आई। 

बहू तो सपने सजा कर आई थी, कि अब अपने घर जा रही हूँ, तो रानी बनकर रहूँगी।

बस फिर क्या था, शुरू हो गया घमासान, कि घर के काम कौन करे? 

ना सास झुके ना बहू। बहुत सोच विचार कर, सलाह-मशविरा करके यह बात तय की गई कि एक maid रख ली जाए।

बस वहीं से सिलसिला शुरू हो गया, सास बहू और वो का...

उनके घर काम करने आई चतुरी, जस नाम-तस गुण, महा चालक।

आते ही वो बहुत जल्दी समझ गई, कि दोनों सास बहू में एकदम 
भी नहीं पटती है। उसने अपना खेल खेलना शुरू कर दिया।

जब kitchen में सास होती, वो बहू की खूब बुराई करती, और 
सास को खूब चढ़ाती, माता जी, आज कल की कैसी बहुएँ हो गई हैं।

अरे काम तो मैं सारे ही कर देती हूँ, पर भाभी से इतना भी ना 
होवे है, कि आपको थाली लगा कर दे दें। बताओ आपको वो भी इस उम्र में करना पड़ता है।

कभी कहती, क्या माता जी, कैसी बहू ले आयीं, आप हमारे सीधे-साधे भैया जी के लिए? पूछताछ नहीं कारवाई थी क्या?

उसकी ऐसी बातें सुनकर निखिला जी का दिमाग और गरम हो 
जाता। वो अपनी बहू से और ही खार खाने लगतीं।

जब कभी बहू kitchen में होती, तो कहती, क्या भाभी......

आगे पढ़े सास बहू और वो (भाग- 2) में 

Tuesday, 24 September 2019

Article: Trolling


Trolling






Trolling! आज कल ये शब्द इतनी तेज़ी से famous हो गया है, कि जरा सी कोई घटना हुई नहीं, कि trolling start.

कभी कभी तो ये लगता है, अपने को busy-busy कहने वाले, सब के पास बहुत समय है, तब ही तो सबको इंतज़ार रहता है, कोई issue मिले और troll करके बात का बतंगड़ बना दिया जाए।

आज कल whatsapp, facebook, twitter, instagram सब जगह एक ही बात का शोर है, कि सोनाक्षी सिन्हा ये नहीं बता पाई कि, “हनुमान जी किसके लिए संजीवनी बूटी लाये थे”।

पर आप ये बताइये, ऐसी बातों पर उँगली उठाना कहाँ तक सही है?

मेरी नज़र में तो बिल्कुल गलत है।

नहीं ये मत समझिएगा कि मैं सोनाक्षी की fan हूँ, इसलिए ऐसा बोल रही हूँ।

ऐसा कुछ भी नहीं है।

मेरा ऐसा बोलने का कारण यह है, कि किसी की कमी को इंगित आप तब करें, जब आप खुद सक्षम हैं।

चलिये बताइये, क्या आप सब, अपने दिल पर हाथ रखकर confidently यह बोल सकते हैं, कि आप के बच्चे इसे बता पाएंगे? बच्चों की छोड़िए, क्या हम सभी रामायण, महाभारत के सभी प्रश्नों के उचित जवाब दे सकते हैं?

मुझे पूर्ण विश्वास है, कि इसमें अधिकतर का जवाब “ना” ही होगा।

जानते हैं, इसका कारण क्या है?

बहुत दुख के साथ बोलना पड़ रहा है, हम सब।

आप कहेंगे, कैसे?

हम सभी अपने बच्चों को विदेशी बनाकर बहुत खुश हो रहे हैं, जब बच्चों को 3rd language select करनी होती है, तो option होता है, French, German और संस्कृत का।

सच सच बताइएगा, कितने अपने बच्चों को संस्कृत दिलाते हैं?

फिर बहाना ये बनाएँगे, कि संस्कृत हमे आती नहीं है, इसलिए नहीं दिलाई। तो French, Germen आपको आती है?

कुछ ये बोलेंगे, अरे कुछ दिन की संस्कृत से क्या होगा? तो कुछ दिन Germen, French पढ़ने से हो जाएगा क्या?

आइये बताते हैं, क्या होगा संस्कृत कुछ दिन ही पढ़ लेने से :

संस्कृत बहुत ही वैज्ञानिक भाषा है, इसे पढ़ने के लिए पूर्णत: सही ही पढ़ना होता है, वरना अर्थ का अनर्थ हो जाता है। जिससे आपका लिखना, पढ़ना, उच्चारण सब शुद्ध हो जाएगा। आप अपने महाग्रंथ, रामायण व महाभारत को पढ़ सकेंगे।

अंग्रेजों ने हमारे इतिहास के साथ बहुत बड़ी कूटनीति खेली।

उन्होंने हिन्दू इतिहास को mythology बना दिया। जिससे वो एक विषय की तरह ना पढ़ाया जाए, और उसका ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी आगे ना बढ़े।

ऐसा करके, वो कामयाब भी हो गए। आज हमारे बच्चे नहीं जानते, भगवान राम के सतयुग को, ना प्रभु कृष्णा के द्वापर युग को, ना ऋषि वशिष्ठ को, ना वाल्मीकि को, ना दधीचि को, ना अहिल्या को, ना शबरी को, ना चरक को, ना विश्वकर्मा को....... और किस किस को याद दिलाएँ?

सही बात है ना?

अब तो नहीं हैं अंग्रेज़, तो उनकी नीतियाँ अभी तक क्यों मानी जा रही है?

पर अभी भी हम अपने बच्चों को अँग्रेजी पढ़ाते हैं, वो पटर-पटर बोलने भी लगते हैं। उसके साथ ही दूसरी विदेशी भाषाओं का भी बोल बाला हो गया है। History में भी विदेशों का इतिहास पढ़ाया जा रहा है, तो विदेशों का इतिहास पूछिये, बच्चे आप से ज्यादा बता देंगे।

यही सोनाक्षी के साथ भी हुआ, वो और शत्रुघन सिन्हा हमसे इतर थोड़ी ना हैं। 

तो बंद कीजिये Troll करना बेकार की बातों को। अगर सच्चे हिंदुस्तानी हैं, तो बढ़ावा दीजिये, संस्कृत भाषा के लेने पर, और अपनी संस्कृति को बढ़ाने पर ज़ोर दीजिये।

Troll नहीं forward कीजिये, कि हिन्दुओं के इतिहास को mythology का नाम देकर आने वाली पीढ़ियों से वंचित ना किया जाए। उसे भी बच्चों को पढ़ाया जाए।

जब बच्चे जानेंगे, हमारा इतिहास, जो कि विश्व के सभी इतिहासों से सर्वोपरि है, तो वो भी गर्व करेंगे।

‘पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया’

जय भारत जय भारती।

Monday, 23 September 2019

Tip: Preserving Curry Leaves

After going through the Tip: Preserving Coriander Leaves, some of my readers asked me for some tip(s) on Preserving Curry Leaves (मीठा नीम). So, on this demand I'm here with a tip on how to preserve Curry Leaves, which nowadays aren't easily available.

Preserving Curry Leaves

  1. Wash fresh Curry Leaves, thoroughly.
  2. Pat dry the leaves with tissues or clean towels. See that there is no moisture left.
  3. Pluck the leaves.
  4. In a wok, heat oil. Note, that oil should be in appropriate quantity, so that the leaves are dipped in the oil. Also, maintain the temperature, as very hot oil may burn leaves.
  5. For 10-15 seconds, fry the leaves.
  6. Strain out all the oil from the leaves.
  7. Let the leaves cool down and then store them in an air-tight container.
  8. This process will make the leaves last for months. It would help in sustaining the refreshing fragrance of the leaves, too.
The strained oil (from Step 6) gets aromatic while frying. It can be used for cooking in future, especially South Indian recipes.

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Tip: Preseving Coriander Leaves ( https://shadesoflife18.blogspot.com/2019/08/tip-preserving-coriander-leaves.html?m=1 )