Tuesday, 8 October 2024

Article : जलते देश

जलते देश 



आज कल, कुछ देश ऐसे जल रहें कि धीरे-धीरे उनका अस्तित्व ही खत्म होता जा रहा है। 

फिर चाहे बात करें, अफगानिस्तान पर तालिबानी हमले की, रुस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध की, या इजराइल- फिलस्तीन, फिर इजराइल- हमास या फिर अब इजराइल और ईरान के युद्ध की...एक के बाद एक देश जल रहें हैं। और इनके साथ ही, कुछ देश ऐसे भी हैं, जो इन्हें युद्ध के सामान देकर उनके लिए सहायक बन रहे हैं, युद्ध के भागीदार बन रहे हैं।

मतलब कहीं न कहीं इस प्रचंड तांडव में एक-एक करके सभी देश शामिल हो रहे हैं और कब यह युद्ध, विश्व युद्ध में बदल जाएगा, ईश्वर ही जाने....

इन हो रहे युद्ध में, जो नुकसान हो रहा है, प्रत्यक्ष रूप से, उस देश की जनता का, वहां की सम्पदा का, और अप्रत्यक्ष रूप से बाकी सभी देशों का... 

देश कोई भी जीते, पर हानि जीतने और हारने वाले, दोनों देशों की होती है। 

आज कल के युद्ध में मिसाइल तो ऐसे चलती है, मानो आतिशबाज़ी हो रही हों। 

हर तरफ़ से भय से चीखने-चिल्लाने वाली आवाजें आती रहती है, सिसकियां और रुदन की आवाजें भी हर ओर गूंजती रह रही है। 

ऐसे समय में जब हम अपने भारत को देखते हैं, तो पाते हैं कि भारत में न केवल शांति बरकरार हैं, बल्कि देश विकास की ओर अग्रसर है। देश GDP की race में आगे ही बढ़ता जा रहा है और वो दिन दूर नहीं, जब भारत number 1 position पर भी पहुंच जाएगा।

और ऐसा नहीं है कि केवल GDP में ही अग्रसर है, बल्कि खेलकूद में भी कमाल कर रहा है। फिर चाहे बात cricket की हो, Olympic games की हो या Chess की। हर तरफ़ Indian players सफलता हासिल कर रहे हैं।

अगर infrastructure की बात करें तो, road हो या hospital, colleges हो या company setups आदि, हर field में भारत पिछले कुछ सालों में बहुत तेजी से समृद्ध हो रहा है।

देश में education system में भी फेरबदल की जा रही है, जिससे मेधावी भारतीय छात्र और अधिक capable बने, और अधिक focus हों, जिससे उनका future और अधिक secure हो सके और देश और अधिक सुदृढ़...

Morden India बहुत तेजी से बदल रहा है, यह अधिक secure, अधिक सजग और सचेत हो चुका है। यह जितना तेजी से tecnical बन रहा है, उतनी ही तेज़ी से पुनः संस्कृति और संस्कार की ओर भी केन्द्रित हो रहा है। 

बहुत मुश्किल से भारत अपने सनातन स्वरूप में बदल रहा है, जहां वो सबसे सशक्त, सबसे समृद्ध और सबसे खुशहाल था। ईश्वर से प्रार्थना है कि हमारे भारत को किसी की नज़र न लगे। 

जैसा भारत, अब बनता जा रहा है, वो वैसे ही आगे भी बढ़ता हुए और सफलताओं के शिखर पर पहुंचे।

क्या आप भी यही चाहते हैं?

तो उसके लिए सरकार के साथ ही हम सब को भी प्रयास करना चाहिए और उचित सरकार को समर्थन और सहयोग प्रदान करना चाहिए।

साथ ही कामना है कि बाकी देश भी यूं युद्ध की आग में जल कर तबाह और बर्बाद न हो। क्योंकि यह चिर सत्य है कि कहीं भी युद्ध की आग जल रही हो, उसकी तपन से झुलसेंगे सभी... आज उनका नम्बर है, कल किसी और का भी नंबर लग सकता है। और सबसे बड़ी बात कि युद्ध की आग में और कोई झुलसे न झुलसे, मरेंगे मानव‌ ही और नष्ट होगी मानवता ही...

और किसी भी तरह की जान, मान की हानि क्यों हो? हर जगह सुख शान्ति और आनन्द भी तो रह ही सकता है...

हे ईश्वर, हमारा भारत सदैव सुरक्षित और सुदृढ़ रहे, साथ ही सम्पूर्ण विश्व भी...

जय हिन्द जय भारत 🇮🇳 💐 🙏🏻 

Friday, 4 October 2024

India's Heritage : दुर्गा माँ (त्र्यंबके)

कल से शारदीय नवरात्र आरंभ हो चुके हैं, तो आज India's Heritage segment में मांँ दुर्गा से जुड़ी हुई बात ही share कर रहे हैं।


सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते।। 


इस पवित्र और मंगल मंत्र के साथ आगे बढ़ते हैं। यहां त्र्यंबके कहकर, किस ईश्वर को संबोधित किया गया है और क्यों?

कभी सोचा है आपने?

माँ दुर्गा को संबोधित किया है और उन्हें त्र्यंबके भी कहा है..

क्या है इसकी वजह? माँ दुर्गा को क्यों कहा जाता है त्रयंबके? 

दुर्गा माँ (त्र्यंबके)

ईश्वरीय रुप में भगवान शिव जी के अलावा माँ दुर्गा को भी त्र्यंबके कहा जाता है।

त्र्यंबके का अर्थ होता है, तीन अंबक, अर्थात् तीन नेत्रों वाला...

जिस तरह से भगवान शिव के तीन नेत्र हैं, उसी तरह माँ दुर्गा की भी तीन आंखें हैं। 

माँ दुर्गा के यह तीन नेत्र सूर्य, अग्नि और चंद्रमा के प्रतीक माने जाते हैं। तीन नेत्र होने के कारण ही, माँ दुर्गा को त्र्यंबके कहा जाता है।

किसी देवी माँ का स्वरूप हैं, दुर्गा मांँ?


क) दुर्गा माँ का स्वरूप :

देवी दुर्गा आद्याशक्ति महामाया का पार्वती या अम्बिका रूप हैं। शक्तिरूपिणी दुर्गा मांँ, इस संसार की सभी ऊर्जाओं के केंद्र में स्थित हैं। 

वह स्वयं महादेव का अंश हैं। देवी माँ, बुरी ताकतों को हराने के लिए मनुष्यों के पास आती हैं। माँ दुर्गा के आगमन की कथा मार्कंड पुराण के भाग स्कंद पुराण में मिलती है।

देवों के देव महादेव की तरह, माँ दुर्गा के भी त्रिनेत्र हैं। जहाँ भी दुर्गा माँ की तीन आंखों का उल्लेख किया है, वहां उन्हें 'त्र्यम्बके' कहा गया है।

पुराणों के अनुसार, महादेव की तीसरी आँख, ज्ञान का प्रतीक है। 

मां दुर्गा की बाईं आंख में चंद्रमा है, जो मन की इच्छा का प्रतीक है, उनकी दाहिनी आंख में सूर्य है, जो क्रिया का प्रतीक है, और उनकी तीसरी आंख में अग्नि है, जो ज्ञान का प्रतीक है।


ख) क्यों रखते हैं नारियल, पूजा के कलश‌ में?

हिंदू धर्म में नारियल को बहुत पवित्र माना जाता है, इसलिए इसे श्रीफल कहा जाता है। क्योंकि नारियल में भी शिव-पार्वती के समान तीन नेत्र अंकित होते हैं।

नारियल पर तीन काले गोल निशान होते हैं, इसे नारियल की तीन आंखें भी कहा जाता है। नारियल की तीसरी आंख अहंकार को दूर करने का प्रतीक मानी गई है‌। तीसरी आंख मन की उच्च चेतना का प्रतिनिधित्व करती है।

शिव सिद्धांत के अनुसार तीसरी आंख मन की उच्चता और पवित्रता का स्वरूप व्यक्त करती है, यह तीसरा नेत्र ज्ञान का प्रकाश प्रकाशित करता है।


ग) त्रिनेत्र का महत्व :

एक बार महादेव जी अपनी समाधि में लीन थे। माँ पार्वती, शिव जी से विवाह करना चाहती थीं, अतः देवों ने कामदेव से शिव जी की तपस्या भंग करने को कहा।

तपस्या में विघ्न डालने पर महादेव ने अपना तीसरा नेत्र प्रकट कर कामदेव को भस्म कर दिया। अर्थात् तीसरी आँख मन की इच्छाओं को भस्म करने की शक्ति रखती है। 

अर्थात् तीसरी आँख, ज्ञान और पवित्रता की प्रतीक होती है और हम साधारण मनुष्य भी यत्न करें और अपने व्यवहार में पवित्रता और परहित ज्ञान को विकसित कर लें तो महादेव जी की असीम कृपा हम पर भी बन जाएगी। इससे हमारा भी त्रिनेत्र जाग्रत हो जाएगा, जिससे हम अपना जीवन यापन कर ईश्वर में लीन होकर मुक्ति को प्राप्त कर सकेंगे 🙏🏻 

जयकारा शेरावाली दा 🙏🏻

Thursday, 3 October 2024

Bhajan‌ (Devotional Song): आई है नवरात्रि

शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती हैं, पर हम में से कितने हैं, जिनको मां के हर रुप का नाम याद हों और वो भी सही क्रम में...

आज का यह भजन, माँ के नौ रूपों को लेकर उनके श्रीचरणों में अर्पित करते हैं।

आप सभी भजन का आंनद लेते हुए माँ के नौ रूपों के नाम क्रमवार याद कर लें।

आई है नवरात्रि

शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी -2

चंद्रघंटा कूष्मांडा -2

स्कंदमाता कात्यायनी -2

कालरात्रि महागौरी -2

सिद्धिदात्री -4

मां के यह नौ रूप हैं

आई है नवरात्रि -2

खुशियों से झूमो

आई है नवरात्रि

देने आशीष हमें

आई है नवरात्रि

माँ के नौ रूपों की

आई है नवरात्रि

हां नवरात्रि - 4


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