Friday, 11 April 2025

Story of Life: वो भयानक रात (भाग‌-5)

वो भयानक रात (भाग -1) ,

वो भयानक रात (भाग -2) , 

वो भयानक रात (भाग -3) व

वो भयानक रात (भाग - 4) के आगे....

वो भयानक रात (भाग -5) 




दरअसल, राकेश जी अपने कड़क स्वभाव के लिए पुलिस चौकी में प्रसिद्ध थे। 

अभी सब शांत पड़ना शुरू हुआ ही था कि पुलिस वाले कुछ और लोग भी आ गए। क्योंकि नीचे आते-आते राकेश जी फोन करते हुए आए थे।

पुलिस वाले तुरंत संजीव और दोनों गुंडों को अपने साथ ले गए, साथ ही आशा को अस्पताल चलने को कहने लगे।

पर आशा ने कहा कि उसको इतने घावों की आदत है, वो बस जल्द से जल्द अपने बच्चों को सुरक्षित करना चाहती है, अतः उसे गांव भेजने की व्यवस्था कर दी जाए।

राकेश जी ने order दिया कि इसके घावों की मरहम पट्टी करा के इसे गांव छोड़ आया जाए।

आशा ने सुनीता, सुरेश जी, बच्चों, पड़ोसी और विशेष रूप से राकेश जी का बारम्बार धन्यवाद दिया और गांव के लिए जाने लगी।

आशा के जाने के पहले, सुनीता ने उसे उस महीने की तनख्वाह के साथ 5 हजार ऊपर दे दिए।

आशा ने तनख्वाह के अलावा, बाकी रुपए लेने को मना किये, वो बोली दीदी, अब न जाने कब मिलना हो, शायद रुपए चुका भी न पाऊं...

सुनीता ने कहा कि, तुम्हें अभी रुपयों की बहुत आवश्यकता है, इन्हें रख लो...

अगर तुम लौट कर आ पाओगी, तो मुझे अच्छा लगेगा, पर तुम्हारी और बच्चों की सुरक्षा पहले है, तो अगर तुम न आ पाओ, तब इन्हें हमारे रिश्ते के अच्छे समय की सौगात समझ कर रख लेना। 

दीदी, मैं जरूर आऊंगी, इन्हें लौटाने, पर कब वो नहीं पता। एक बार सारी व्यवस्था हो जाए बस... तुम्हारे उपकार को मैं जिंदगी भर नहीं भूलूंगी... आशा की आंखें आंसुओं से भरी हुई थी और आवाज कंपकंपा रही थी... बेहद मार्मिक दृश्य बन गया था...

अपना सबका ध्यान रखना दीदी, मैं जरूर आऊंगी... यह कहते हुए वो घर से निकल गई...

थोड़ी देर में सब चले गए। 

आशा के आने से जो टूट-फूट हुई थी, उसे ठीक करने में सुरेश जी के हजारों रुपए ठुक गये।

आज इस बात को बहुत साल गुजर गए थे, पर सुनीता को आज भी वो भयानक रात सिहरन दे जाती थी।

उसे आज भी इंतजार था, आशा के लौटने का... रुपए वापस पाने की आस में नहीं, बल्कि इस बात को जानने की लालसा में कि, आशा और उसके बच्चे कैसे हैं?...

जबकि, सुरेश जी और बच्चे नहीं चाहते थे कि आशा, कभी भी लौट कर आए, क्योंकि उन्हें डर था कि अगर आशा, वापस लौटी, तो उसके पीछे संजीव भी आ सकता है...

और वो भयानक रात, उन्हें फिर से अपनी ज़िंदगी में कभी नहीं चाहिए थी।

Thursday, 10 April 2025

Story of Life: वो भयानक रात (भाग -4)

 वो भयानक रात (भाग -1) ,

वो भयानक रात (भाग -2)  व

वो भयानक रात (भाग -3) के आगे...

वो भयानक रात (भाग -4) 




सुरेश जी भी तंग आकर सोच रहे थे कि क्या करें? एक तरफ हद का मचता हुआ शोर, दूसरी ओर आशा का गिड़गिड़ाना...

इससे पहले कि वो निर्णय लेते, बहुत तेज़ भढाम से आवाज़ हुई...

क्योंकि घर का दरवाजा गिर गया था और उसके साथ ही संजीव, और दो मुस्टंडे से दिखने वाले लोग भी घर के भीतर थे।

फिर वही हुआ, जिसका आशा को डर था, संजीव लगा ताबड़तोड़ आशा को मारने...

सुरेश जी और सन्नी ने रोकने की कोशिश की, तो उन मुस्टंडों ने सुरेश और सन्नी को कसकर पकड़ लिया।

श्यामा तो घबरा कर रोने लगी, उसने आज तक ऐसा भयानक दृश्य नहीं देखा था, साथ ही वो अपने पापा और भैया के लिए भी डर रही थी।

थोड़ी ही देर में आशा के खून निकलना शुरू हो गया। उसके बच्चे भी बुरी तरह से रो रहे थे।

अजीब भयानक दृश्य बन गया था, जिसकी कल्पना, सुनीता, सुरेश और बच्चों ने कभी सपने में भी नहीं की थी। 

इतनी ज्यादा चिल्ल-पों की आवाजें सुनकर apartment से बहुत लोग भी अंदर आ गये। 

जिसमें सब-इंस्पेक्टर राकेश जी भी शामिल थे, जो अभी महीना भर पहले ही रहने आए थे।

उन्होंने एक भारी सी आवाज़ में कहा, ओय क्या गुंडागर्दी है? क्यों मार रहा है औरत को?...

उनकी आवाज सुनते ही संजीव के मुंह से निकल गया, अरे ये कहां से आ गये? इसके साथ ही उसके हाथ वहीं रुक गये। मुसटंडो ने सुरेश जी और सन्नी को भी छोड़ दिया।

दरअसल, राकेश जी अपने कड़क स्वभाव के लिए पुलिस चौकी में प्रसिद्ध थे। 

अभी...

Wednesday, 9 April 2025

Story of Life: वो भयानक रात (भाग -3)

व भयानक रात (भाग -1) व

वो भयानक रात (भाग -2) के आगे...

वो भयानक रात (भाग -3) 


सन्नी आगे दरवाजे की ओर बढ़ा, तभी आशा ने उसका हाथ ज़ोर से पकड़ लिया... अरे क्या कर रहे हो सन्नी बाबा? 

पीछे हट जाओ, दरवाजा खोलने की जरूरत नहीं है, मेरा मरद होगा.. पक्का मुझे लेने आया होगा... 

आपके पति आंटी? वो क्यों आएंगे इतनी रात में??? 

अरे मैं जानती हूं, अपने मरद को, वो ही होगा..

आशा का कहना सही था, वो आशा का पति संजीव ही था। 

वो ज़ोर ज़ोर से आशा का नाम लेकर बाहर बुला रहा था, शायद उसने बहुत अधिक शराब भी पी रखी थी... क्योंकि उसकी आवाज़ में लडखडाहट साफ सुनाई दे रहा था।

सुनकर सुरेश जी बोले, जब संजीव तुम्हें लेने आया है, तो दरवाजा भी खोलना चाहिए और तुम्हें उसके साथ जाना भी चाहिए।

आशा, सुनीता के पैरों से लिपट गई, दीदी, भैया को मना करो, वरना संजीव मुझे पीट-पीटकर अधमरा कर देगा। 

बस रात भर की बात है, सुबह होते ही मैं गांव चली जाऊंगी... तुम्हारे घर इतने दिन काम किया है, तुमने मेरा हमेशा साथ दिया है, एक आखिर बार और दे दो।

एक बार बच्चों को अपनी मां के पास गांव छोड़ आऊं, फिर ठीक से निपटूंगी संजीव से...

मुझे अपनी चिंता नहीं है, एक बार बच्चों की चिंता से मुक्त हो जाऊं, वरना यह नकारा इंसान शराब के लिए मेरे बच्चों को बेच देगा।

आशा, बिना सांस लिए बस बोले जा रही है, साथ ही वो बहुत बुरी तरह से कांप भी रही थी, न जाने डर से या क्रोध से...

उधर संजीव भी दरवाजा पीटे जा रहा था, साथ ही गाली-गलौज भी कर रहा था।

कुछ देर में उसने आशा के साथ-साथ सुनीता के घर के सब लोगों को भी गाली देना शुरू कर दिया और वो भी बहुत तेज़ स्वर में...

अब तो शोर शराबे से पूरे apartment के लोग जाग गये, कुछ के तो फोन भी आने लगे कि वो लोग आधी रात को क्या तमाशा करवा रहे हैं? दरवाजा खोलकर maid को भेज क्यों नहीं देते हैं?  

सुरेश जी भी तंग आकर सोच रहे थे कि क्या करें? एक तरफ हद का मचता हुआ शोर, दूसरी ओर आशा का गिड़गिड़ाना...

इससे पहले कि वो निर्णय लेते, बहुत तेज़ भढाम से आवाज़ हुई...

आगे पढ़े वो भयानक रात (भाग -4) में ...