Wednesday, 5 February 2020

Stories of Life : कमी- (भाग-2)

कमी (भाग - 1) के आगे...... 

कमी- (भाग-2) 

रास्ते भर वो मिलंद से गुस्सा होती रही, और अपनी किस्मत को 
कोसती रही। 

जब वो घर वापस आए, तब मात्र 10 बज रहे थे। वो lift में थे, lift चलती, उससे पहले एक झुर्री भरे हाथों ने लिफ्ट रोक दी, और 
लाठी टेकती एक बूढ़ी औरत लिफ्ट में आ गयी। 

कामिनी का घर 10th floor पर था, और वो बूढ़ी औरत 5th floor पर जा रही थी।

उसको देखकर कामिनी को उत्सुकता हुई, बोली- आप कौन हैं, मैंने आपको पहले कभी नहीं देखा?

हाँ बिटिया, मैंने आज से ही 505 में खाना बनाने का काम पकड़ा है।

इतनी उम्र में इतनी देर में आप खाना बनाने आयीं हैं?

हाँ बेटा, मेरी किस्मत अच्छी है, कि मेरे बनाए खाने के स्वाद में आज भी कोई कमी नहीं आई है, इसलिए आज भी लोग मुझे खाना बनाने के लिए बुलाते हैं।

आज भी में अपने दम पर पैसे कमा रही हूँ, मुझे अपनी जरूरत के लिए दूसरे का आसरा नहीं लेना होता है। ईश्वर बड़ा महान है, कि आज भी मुझे पैसे की कमी नहीं है। तभी 5th floor आ गया, और वो बुढ़िया लाठी टेकती निकल गयी।

पर जब वो जा रही थी, तो कामिनी उसे देख रही थी। एकदम मामूली सी साफ-सुथरी साड़ी पहने थी, हाथ में काँच की चूड़ी थी।

वो बुढ़ापे के कारण झुक भी गयीं थीं, जिस उम्र में सब आराम करना चाहते हैं, वो काम पर आयीं थीं। ठीक से चला नहीं जा रहा था, पर दो वक़्त की रोटी के लिए काम कर रहीं थीं। फिर भी ईश्वर का धन्यवाद दे रहीं थीं, कि उनको कोई कमी नहीं है।

कामिनी सोचने लगी, मिलंद ने उसे कितने सुख दिये हैं, घर के काम के लिए नौकर लगे हैं। अपना खुद का मकान है, गाड़ी है, महेंगे कपड़े और भारी जेवर भी हैं।

फिर भी वो अपनी किस्मत को कोस रही थी, कि उसकी ज़िन्दगी में कितनी कमी है। जिसके कारण जिस party का वो इतना इंतज़ार कर रही थी, उसमें से खाली दुखी होकर लौटी है। 

साथ ही जहाँ उसे पूरी रात बितानी थी, अपने गुस्से के कारण मिलंद को भी जल्दी ले आई।

पर अब उसका क्रोध पूरी तरह शांत हो चुका था, उसने घर पहुँच कर मिलंद को गले से लगा लिया, और ईश्वर को भी बहुत सारा धन्यवाद दिया, कि उसके जीवन में कोई कमी नहीं है।

Tuesday, 4 February 2020

Stories of Life : कमी

कमी


आज मिलंद और कामिनी एक party में जा रहे थे। कामिनी बहुत ही खुश थी, काफी दिन बाद, बहुत बड़े होटल में party में जा रही थी। 

उसने अपनी सबसे महँगी dress निकाली, और साथ में diamond की jewelry भी, वो सबसे अच्छी दिखना चाहती थी। 


मिलंद normal dress में ही था। तैयार होकर दोनों ही होटल में पहुँच गए। 


जब दोनों car से निकले तो कामिनी ने देखा, होटल में पहुँचने वाली सभी कारें बड़ी-बड़ी थीं, बस उसकी कार ही सबसे छोटी थी। कामिनी का मन उदास हो गया।

सभी आने वालों का दरबान बहुत अच्छे से welcome कर रहा था।पर उनके पहुँचने पर door मिलिंद ने ही खोला। कामिनी को बहुत गुस्सा आया।

क्या कामिनी, छोटी छोटी बात पर दिल छोटा करती हो, दरबान का हम पर ध्यान नहीं गया होगा?

कामिनी गुस्से से लाल-पीली होते हुए बोली - क्यों नहीं गया, वो पता है? क्योंकि तुम एकदम साधारण कपड़े में हो। कितनी बार कहा था, नयी style का coat ले लो। पर किसी को मेरी सुननी हो, तब ना....

तभी उसकी नज़र वहाँ खड़ी ladies पर गयी, सब एक से एक costly कपड़े में थी, और jewelry, वो तो बहुत ही heavy थी। 

उन सबको देखकर तो उसे लगने लगा, ईश्वर ने उसकी ही किस्मत में सबसे कमी कर रखी है। बस फिर क्या था, जितनी खुश वो आते time थी, उतनी अभी दुखी हो गयी थी।

अब तो जितने समय hotel में रही, उतनी देर तक अपनी हैसियत में कमी ही ढूंढती रही। उसे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था। जैसे-तैसे खाना खत्म करके वो जल्दी ही party से लौट आए।


रास्ते भर वो मिलंद से गुस्सा होती रही, और अपनी किस्मत को कोसती रही। 



जब वो घर वापस आए, तब मात्र 10 ही बज रहे थे। वो lift में थे, lift चलती, उससे पहले...... 



आगे पढ़ें कमी-(भाग-2) में

Monday, 3 February 2020

Kids' Story: Advay the Hero: नकल

Advay the Hero : नकल

Advay की class में तृषा भी पढ़ती थी, पढ़ने में अच्छी भी थी।

पर पिछले कुछ दिनों से वो स्कूल नहीं आ रही थी। Teacher ने कारण पूछा तो, उसकी मम्मी ने बताया कि, वो गिर गई थी, तो उसके fracture हो गया है, इसलिए वो 1 month तक school नहीं आ पाएगी। 

1 month बाद जब वो स्कूल आयी, तो उसकी पढ़ाई बहुत छूट गई थी।

अब उसका पढ़ाई में मन नहीं लगता था।

School में half yearly exam आ गये थे, और तृषा को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें।

Advay की class में ही तपन भी पढ़ता था, वो पढ़ने में कमजोर और शरारतों में बहुत तेज था।

उससे जल्दी कोई दोस्ती नहीं करता था।

उसने सोचा, तृषा आजकल कम पढ़ती है, पर पढ़ने में तेज है, तो exam के लिए उसके साथ मिलकर नकल की planning की जाए, तो कम मेहनत के काम बन जाएगा।

वो तृषा के पास गया, और उससे बोला, चोट लगने के कारण तुम कम पढ़ पायी हो, पर मेरे पास एक बहुत अच्छा idea है।

जिससे हम दोनों के बहुत अच्छे marks आ जाएंगे।

तृषा सुनकर बोली अच्छा, वो कैसे होगा?

आधा तुम पढ़ कर आना, आधा मैं पढ़कर आऊंगा, दोनों पास पास बैठेंगे, और एक दूसरे को बता देंगे।

यह तो नक़ल हुई ना?.... तृषा डरकर बोली।

अररे..... यह सब मत सोचो, ऐसे ही कम मेहनत में ज्यादा marks आएंगे।

ज्यादा marks के लालच में तृषा ready हो गई।

अब वो और तपन नकल के लिए आधी आधी पढ़ाई कर रहे थे।

पर तपन आधी पढ़ाई भी नहीं करना चाह रहा था, इसलिए वो Advay के साथ बैठने का मन बनाने लगा, क्योंकि Advay हमेशा first आता था।

तपन ने सोचा, अगर Advay की copy से नकल करने को मिल गई, तो बिना पढ़े, अच्छे marks मिल जाएंगे।

एक दिन तृषा को पता चला कि तपन Advay की copy से नकल करने की सोच रहा है, तो वो रोने लगी, क्योंकि वो तो आधी पढ़ाई ही कर रही थी।

Advay तृषा के पास गया और उससे पूछा, क्यों रो रही हो?

तो उसने तपन वाली सारी बात बता दी।

Advay बोला, तपन bad boy है। नकल से किसी के अच्छे marks नहीं आते हैं, तभी तो तपन के भी ख़राब marks आते हैं।

 तुम तो पढ़ने में तेज हो, सब पढ़ लोगी। अपनी मम्मी के साथ बैठकर ज्यादा मेहनत कर लो।

अपनी मम्मी से कहना, Ma'am से वो सब पूछ लें, जो तुम्हारा छूट गया है। फिर तुम पढ़कर हर बार की तरह अच्छे marks लाओगी।

तृषा ने वही करा, और उसके अच्छे marks आए।

तपन नकल करते हुए पकड़ा गया, उसे school से निकाल दिया गया।

तृषा Advay से बोली, आज तुम्हारे कारण मैंने नकल नहीं की, वरना मुझे भी तपन की तरह school से निकाल दिया जाता।

साथ ही तुम्हारे कहने से मैंने मेहनत भी की, तो मेरे marks भी अच्छे आए।

सच है, marks मेहनत करने से ही अच्छे आते हैं, ना कि नकल करने से।