Wednesday, 3 July 2019

Story of Life : Maid चली गयी (भाग - 3)


Maid चली गयी (भाग - 3)


वह बोली, तुम तो एकदम बेवकूफ हो। तेरे सास-ससुर है ना, कितना काम भी करते हैं। तब तुझे maid की क्या जरूरत है? वह काम भी करेंगे, कोई पैसा भी नहीं लेंगे।

और तुम उन पर एहसान भी डाल देना कि, तुम उन्हें उनके पोते से दूर हुआ नहीं देख सकती हो। देखना सर के बल आएंगे, और तेरे सारे काम भी करेंगे, ये तेरे free के maid।

रेखा को idea जंच  गया, उसने रजत से बड़े दुखी होकर बोला, मां पापा अपने पोते से दूर रहकर कितने दुखी होंगे? मुझसे उनका दुख सहा नहीं जाता, उन्हें बुला लो ।

रजत को भी समझ नहीं आ रहा था, कि अचानक से रेखा को क्या हो गया?पर  उसने उन्हें बुला लिया वह भी पोते के लाड में चले आए। मां को जब पता चला,  रेखा ने बुलाया है तो,  रेखा पर वह  निहाल हो गईं।

मां-पापा दिन भर बच्चे के काम करते, उसके साथ खेलते थे। रेखा  जब ऑफिस से आ जाती  तो, उनसे काम तो सब करवाती, पर उन्हें बच्चे के साथ किसी ना किसी बहाने से खेलने नहीं देती थी।

कुछ दिन बाद, बच्चा स्कूल जाने लगा। रेखा ऑफिस से लौटते समय उसे अपने साथ लेकर आती थी।  अब काम कम हो गया था, तो रेखा को रजत के द्वारा अपने मां पापा पर किए जा रहे खर्चे अखरने लगे

एक दिन खर्चे की बात को लेकर रेखा, चीख-पुकार कर रही थी। तो उसके मुंह से निकल गया कि ,वो तो maid चली गई थी और सस्ती मिल नहीं रही थी। बहुत छुट्टी भी लेती थी और उस पर भी दिमाग दिखाती थी, कि काम बहुत है।  इसलिए ही बुला लिया थी, पर अब मुझे आप लोगों की जरूरत नहीं है।

Sunny बड़ा हो गया है, मुझे अब दिनभर की maid की आवश्यकता नहीं है। आप लोगों के रहने से कितना खर्चा होता है, उससे कम में एक time की maid मिल जाएगी।

प्रेमा का दिल टूट गया था, उनकी बहू को उन पर प्यार नहीं आया था। Maid चली गई थी और maid की आवश्यकता थी, इसलिए बुलाया था।

वह सोच रही थीं, काश बहू ने कभी तो उन्हें मां- पापा या दादी-दादा ही समझा होता। वह काम तो तब  भी कर देते और साथ में बहुत सारी आशीष भी देते। 
इस बार जो मां पापा गए तो, फिर बुलाने से कभी नहीं आए।

Tuesday, 2 July 2019

Story of Life : Maid चली गयी ( भाग -2)



Maid चली गयी (भाग -  2)

रहने दो प्रेमा, किसके लिए आंसू बहा रही हो ? इसे अब रेखा के अलावा दिखाई कौन देता है। मैं अभी जिंदा हूं!  तुम्हारे लिए और तुम मेरे लिए, पिता ने 'आह'भरते  हुए कहा।

रजत चला गया। दोनों अपने बेटे, बहू को दिन भर याद करते। रजत, कभी बात कर लेता तो हालचाल पता चल जाते थे।

रेखा तो जब से गई थी, उसने कभी फोन नहीं किया। उसे वैसे भी, अपने सास-ससुर एक आंख नहीं भाते थे। वह  तो आई ही यहां इसलिए थी,  कि उनसे पीछा छूट जाएगा। फिर यहां  उसने job भी join कर ली थी। 

बस एक समस्या थी मुंबई में, maid की बड़ी दिक्कत थी। maid  एक ही time आती थी।

 कुछ साल बाद रजत और रेखा का बेटा हुआ,  उसके होने के समय पापा- मां कुछ दिन के लिए आए थे।

उन दोनों के रहने से, रेखा को बच्चे का एक भी काम नहीं करना पड़ता था। जब वो चले गए, तो रेखा ने बच्चे के लिए दिन भर के लिए एक maid  रख ली।

Maid आए दिन छुट्टी लेती, जिससे रेखा उससे बहुत लड़ती- झगड़ती और हमेशा पैसा देने में भी कंजूसी करती।


रोज-रोज की झिकझिक और रेखा की कंजूसी से तंग आकर maid चली गई ।

रेखा से एकतरफ ना तो इतने पैसे दिए जा रहे थे, कि maid रख सके। और दूसरी तरफ आलस के कारण काम भी नहीं संभल रहे थे। बच्चे के कारण office भी नहीं जा पा रही थी। 

एक दिन उसकी दोस्त का फोन आया, तो रेखा ने उसे अपने दिल का सारा हाल बता दिया। उसकी दोस्त बोली, तुम तो एकदम बेवकूफ हो। तेरे सास- ससुर है ना.......

रेखा की दोस्त ने उसे क्या सलाह दी, जानते हैं Maid चली गयी  (भाग -3 ) में

Monday, 1 July 2019

Story Of Life : Maid चली गयी


Maid चली गयी

प्रेमा ने अपने इकलौते बेटे रजत का विवाह बड़ी धूमधाम के साथ रेखा से कर दिया। रेखा बेहद सुंदर थी, पर साथ ही उतने रूखे स्वभाव की महाआलसी और हद की कंजूस भी थी।

कुछ ही दिनों में रजत पर उसके खूबसूरती को जादू सर चड़कर बोलने लगा। रेखा जो कुछ भी उल्टा-सीधा उसके परिवार के लिए बोलती, वो उसे ही हकीकत मानता।

घर में आए दिन कलह होने लगे, तो रेखा रजत के पीछे पड़ गयी, तुम कोई दूसरी नौकरी क्यों नहीं ढूंढते हो? मैं तंग आ गयी हूँ, तुम्हारे माँ पापा के संग रह रह कर। ऐसी नौकरी ढूंढो, जिससे हम इस शहर से ही चले जाएँ। मेरा तो अब इस शहर में मन भी नहीं लग रहा है।

जब रेखा ने कह दिया, तो कैसे हो सकता था, कि रजत उसकी बात ना माने। रजत बहुत ही talented था, इसलिए नई जॉब ढूँढने में बहुत समय नहीं लगा।

वो नया appointment letter लेकर सीधे रेखा के पास गया, रेखा की बांछे खिल गयी।

अगले दिन ही रेखा ने movers and packers वालों को बुला लिया, और जो समान उसे अपनी शादी में मिला था, या जो कभी रजत ने खरीदा था। वो सब pack करने को बोल दिया।

समान pack होता देख माँ- पापा हैरान थे, आखिर packing क्यों हो रही है? उन्होंने रजत से पूछा, बेटा ये लोग कौन हैं, और ये समान क्यों pack कर रहें हैं? 

रजत बड़े ही सहज शब्दों में बोला, माँ इन्हें रेखा ने बुलाया है, हम Bombay जा रहे हैं ना। 

Bombay! क्यों रजत? पापा ने आश्चर्य से पूछा।

अरे पापा, रेखा का यहाँ मन लगना बंद हो गया है, तो अब से हम बॉम्बे में ही रहेंगे। 

और नौकरी........? उसका क्या सोचा है, तुमने रजत? पिता ने दूसरा प्रश्न पूछा, वो भी वहीं करूंगा। 

कैसे? तुम्हारी company का तो Bombay में कोई ऑफिस भी नहीं है।

पापा मैंने company बदल ली है। रजत हर बात ऐसे बोलते जा रहा था, जैसे कुछ बड़ा हुआ ही नहीं है।

माँ के आँसू निकल आए, तुमने नौकरी बदल ली, Bombay में join करोगे......, हम लोगों से इतनी दूर! और हमें कुछ बताया भी नहीं।

क्या माँ के आँसू से रजत का मन बदल जायेगा?  जानते हैं Maid चली गयी (भाग-2 )