Tuesday, 8 February 2022

Article : U.P. Election कब और कहाँ?

U.P. Election कब और कहाँ?


यूपी में विधानसभा चुनाव 10 February में शुरु होने जा रहा हैं।

क्या आप ready हैं? अपनी प्रिय party और नेता के चुनाव के लिए। 

बहुत से लोग चुनाव को बिल्कुल भी seriously नहीं लेते हैं, उनका कहना है कि हमें कोई भी party or leader पसंद नहीं है।

उन्हें चुनाव, एक ऐसा दिन लगता है, जिस दिन holiday है। जिस दिन वो अपने कोई भी ज़रूरी और गैर ज़रूरी काम को कर सकते हैं। साथ ही अगर कोई काम नहीं है, तो चादर ओढ़ कर सो जाते हैं।

पर ऐसा कर के आप किसी और का नहीं स्वयं अपना ही अहित कर रहे हैं।

अपना अहित? वो भला कैसे?

भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ हर एक नागरिक के पास यह अधिकार होता है कि वो अपनी पसंद के नेता का चुनाव करे और उसे सत्ता में लाए।

शायद आपको अंदाज़ा नहीं है कि वोट एक बहुत बड़ी ताकत होती है। 

एक-एक वोट यह निर्धारित करता है कि देश सही हाथों में रहेगा कि नहीं।

कुछ लोगों का यह कहना होता है कि अगर आप को कोई पसंद नहीं है तो आप नोटा विकल्प का चयन कर लीजिए।

पर हमारा यह कहना कि, आप का नोटा विकल्प को चुनना भी सही नहीं है। इससे भी आप अपने अधिकारों का हनन कर रहे हैं।

आप वोट ना करें या नोटा विकल्प को चुनें, दोनों ही सूरत में आप अपनी पसंद के विपक्ष, party का चुनाव कर रहे हैं।

आपको कोई नेता पसंद नहीं है, मान लेते हैं। फिर भी कम-ज़्यादा तो पसंद में शामिल होंगे ही। तो उनमें जो सबसे कम नापसंद हो, उसे ही चुन लीजिए।

पर अपनी वोट की शक्ति को व्यर्थ में बर्बाद मत कीजिए। इसका सीधा असर आपके भविष्य पर पड़ता है। 

कैसे?

देखिए आप जाएं या ना जाएं, पर कुछ जाति-विशेष के लोग अवश्य वोट देकर आएंगे। वो वोट देने के लिए, दूर-दूर से छुट्टी लेकर आ रहे हैं।

अब आप को इतना तो पता ही है ना, जिसको ज़्यादा वोट मिलेंगे, वो ही जीतेगा। 

तो बस जो जीतेगा, सरकार भी उसकी ही बनेगी और सत्ता में उसी जाति विशेष का वर्चस्व रहेगा। 

अगर देश को पुनः गुलाम होने से बचाना है तो अपना एक सही वोट अवश्य दीजिएगा।

वोट अवश्य दीजिए, वोट हमारा सबसे महत्वपूर्ण अधिकार है और हमारे देश के प्रति सबसे बड़ा फर्ज है।

आइए आपको बता देते हैं कि कब कहाँ चुनाव हैं, जिससे आप सभी को अपने शहर के चुनाव की date पता चल जाए। 

यूपी विधानसभा चुनाव2022: सात चरणों में कब और कहाँ मतदान ?

पहला चरण (10 फरवरी)दूसरा चरण (14 फरवरी)तीसरा चरण (20 फरवरी)चौथा चरण (23 फरवरी)पांचवां चरण (27 फरवरी)छठा चरण (3 मार्च)सातवां चरण (7 मार्च)
कैराना, थाना भवन, शामली, बुढ़ाना, चरथावाल, पुरकाजी (एससी), मुजफ्फरनगर, खतौली, मीरापुर, सिवालखास, सरधना, हस्तिनापुर, (एससी), किठौर, मेरठ छावनी, मेरठ, मेरठ दक्षिण, छपरौली, बड़ौत, बागपत, मुरादनगर, साहिबाबाद, गाजियाबाद, मोदी नगर, धौलाना, हापुड़ (एससी), गढ़मुक्तेश्वर, नोएडा, दादरी, जेवर, सिकंदराबाद, बुलंदशहर, स्याना, अनूपशहर, डिबाई, शिकारपुर, खुर्जा (एससी), खैर (एससी), बरौली, अतरौली, छर्रा, कोइल, अलीगढ़, इगलास (एससी), छाता, मांठ, गोवर्धन, मथुरा, बलदेव (एससी), एत्मादपुर, आगरा कैंट (अनुसूचित जाति), आगरा दक्षिण, आगरा उत्तर, आगरा ग्रामीण (एससी), फतेहपुर सीकरी, खेरागढ़, फतेहाबाद, बाहबेहट, नकुड़, सहारनपुर नगर, सहारनपुर, देवबंद, रामपुर, मनिहारन (एससी), गंगोह, नजीबाबाद, नगीना (एससी), बरहापुरी, धामपुर, नेहतौर (एससी), बिजनौर, चांदपुरी, नूरपुर, कंठ, ठाकुरद्वारा, मुरादाबाद ग्रामीण, मुरादाबाद नगर, कुंदरकि, बिलारी, चंदौसी (एससी), अस्मोलिक, संभली, सुआरी, चमरौ, बिलासपुर, रामपुर, मिलक (एससी), धनौरा (एससी), नौगवां सादात, अमरोहा, हसनपुर, गुन्नौरी, बिसौली (एससी), सहसावन, बिल्सी, बदायूं, शेखूपुर, दातागंज, बहेरी, मीरगंज, भोजीपुर, नवाबगंज, फरीदपुर (एससी), बिठारी चैनपुर, बरेली, बरेली छावनी, ओंला, कटरा, जलालाबाद, तिलहरो, पवयन (एससी), शाहजहांपुर, दादरौलीहाथरस (एससी), सादाबाद, सिकंदराराऊ, टूंडला (एससी), जसराना, फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, सिरसागंज, कासगंज, अमनपुर, पटियाली, अलीगंज, एटा, मरहारा, जलेसर (एससी), मैनपुरी, भोनगांव, किशनी (एससी), करहली, कायमगंज (एससी), अमृतपुर, फर्रुखाबाद, भोजपुर, छिबरामऊ, तिर्वा, कन्नौज (एससी), जसवंतनगर, इटावा, भरथना (एससी), बिधूना, दिबियापुर, औरैया (एससी), रसूलाबाद (एससी), अकबरपुर-रानिया, सिकंदर, भोगनीपुर, बिल्हौर (एससी), बिठूर, कल्याणपुर, गोविंदनगर, शीशमऊ, आर्य नगर, किदवई नगर, कानपुर छावनी, महाराजपुर, घाटमपुर (एससी), माधौगढ़, कालपी, उरई (एससी), बबीना, झांसी नगर, मौरानीपुर (एससी), गरौठा, ललितपुर, मेहरोनी (एससी), हमीरपुर, रथ (एससी), महोबा, चरखारीपीलीभीत, बरखेड़ा, पूरनपुर (एससी), बीसलपुर, पलिया, निघासन, गोला गोकर्णनाथ, श्री नगर (एससी), धौरहरा, लखीमपुर, कस्त (एससी), मोहम्मदी, महोली, सीतापुर, हरगांव (एससी), लहरपुर, बिस्वाणि, सेवाता, महमूदाबाद, सिधौली (एससी), मिश्रिख (एससी), सवायजपुर, शाहाबाद, हरदोई, गोपामऊ (एससी), संड (एससी), बिलग्राम-मल्लांवान, बालमऊ (एससी), संडीला, बांगरमऊ, सफीपुर (एससी), मोहान (एससी), उन्नाव, भगवंतनगर, पुरवा, मलिहाबाद (एससी), बख्शी का तालाब, सरोजिनी नगर, लखनऊ पश्चिम, लखनऊ उत्तर, लखनऊ पूर्व, लखनऊ सेंट्रल, लखनऊ छावनी, मोहनलालगंज (एससी), बछरावां (एससी), हरचंदपुर, रायबरेली, सारेनीक, ऊंचाहार, तिन्दवारी, बबेरू, नारायणी (एससी), बांदा, जहानाबाद, बिन्दकि, फतेहपुर, आया शाह, हुसैनगंज, खागा (एससी)तिलोई, सलोन (एससी), जगदीशपुर (एससी), गौरीगंज, अमेठी, इसौली, सुल्तानपुरी, सदर, लम्भुआ, कादीपुर (एससी), चित्रकूट, मानिकपुर, रामपुर खासी, बाबागंज (एससी), कुण्ड, विश्वनाथ गंज, प्रतापगढ़, पट्टी, रानीगंज, सिराथू, मंझनपुर (एससी), चैल, फाफामऊ, सोरांव (एससी), फूलपुर, प्रतापपुर, हंडिया, मेजा, कराछना, इलाहाबाद पश्चिम, इलाहाबाद उत्तर, इलाहाबाद दक्षिण, बारा (एससी), कोरांव (एससी), कुर्सी, राम नगर, बाराबंकी, जैदपुर (एससी), दरियाबाद, रुदौलीक, हैदरगढ़ (एससी), मिल्कीपुर (एससी), बीकापुरी, अयोध्या, गोशैनगंज, बल्हा (एससी), नानपर, मतेरा, महासी, बहराइच, पयागपुर, कैसरगंज, भिंग, श्रावस्ती, महनौं, गोंडा, कटरा बाजार, कर्नलगंज, तरबगंज, मनकापुर (एससी), कटेहरी, टांडा, अलापुर (एससी), जलालपुर, अकबरपुर, तुलसीपुर, गेनसारी, उतरौला, बलरामपुर (एससी), शोहरतगढ़, कपिलवस्तु (एससी), बंसी, इतवा, डुमरियागंज, हरैया, कप्तानगंज, रुधौली, बस्ती सदर, महादेवा (एससी), मेंहदावल, खलीलाबाद, धनघटा (एससी), फरेंदा, नौतनवा, सिसवा, महराजगंज (एससी), पनियार, कैम्पियारगंज, पिपराइच, गोरखपुर शहर, गोरखपुर ग्रामीण, सहजनवा, खजनी (एससी), चौरी-चौरा, बांसगांव (एससी), चिल्‍लूपार, खड्ड, पडरौना, तमकुही राज, फाजिलनगर, कुशीनगर, हाटा, रामकोला (एससी), रुद्रपुर, देवरिया, पथरदेवा, रामपुर कारखाना, भाटपार रानी, सलेमपुर (एससी), बरहज, बेलथरा रोड (एससी), रसड़ा, सिकंदरपुर, फेफना, बलिया नगर, बांसडीह, बैरियाअतरौलिया, गोपालपुर, सागरी, मुबारकपुरी, आजमगढ़, निज़ामाबाद, फूलपुर-पवई, दीदारगंज, लालगंज (एससी), मेहनगर (एससी), मधुबनी, घोसी, मुहम्मदाबाद- गोहना (एससी), मऊ, बदलापुर, शाहगंज, जौनपुर, मल्हानी, मुंगड़ा बादशाहपुर, मछलीशहर (एससी), मरियाहु, जाफराबाद, केराकाट (एससी), जखानियन (एससी), सैदपुर (एससी), गाजीपुर, जंगीपुर, ज़हूराबाद, मोहम्मदाबाद, ज़मानिया, मुगलसराय, सकलडीह, सैयदराजा, चकिया (एससी), पिंडरा, अजगरा (एससी), शिवपुर, रोहनिया, वाराणसी उत्तर, वाराणसी दक्षिण, वाराणसी छावनी, सेवापुरी, भदोही, ज्ञानपुर, औराई (एससी), छनबे (एससी), मिर्जापुर, मझवानी, चुनारी, मरिहान, घोरावाली, रॉबर्ट्सगंज, ओबरा (एसटी), दुद्धी (एसटी)

Monday, 7 February 2022

Article : लता दी, एक स्वर युग...

 लता दी, एक स्वर युग...



लता दी, भारत की स्वर कोकिला, जिनकी सुरीली आवाज़ से भारत गूंजायमान हो गया था। उनका शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया है, पर उनके स्वर और सुरीली आवाज़, भारत के कण-कण में समाहित थे, हैं और रहेंगे।

उनके पिता जी‌ (दीनानाथ मंगेशकर) बहुत बड़े मराठी theatre actor, Hindustani classical vocalist थे। उनके पास बहुत से शिष्य, संगीत का ज्ञान लेने के लिए आते थे। एक बार एक शिष्य को पिता जी, बहुत ही कठिन, राग पूरिया धनाश्री (जो कि एक सायंकालीन संधि प्रकाश राग है) सिखा रहे थे और लता दी, जो कि मात्र 5 साल की थी, कमरे के बाहर खड़ी सुन रहीं थीं।

जब पिता जी, किसी काम से बाहर गए, लता दी अंदर जाकर बोलीं, बाबा ऐसे नहीं, ऐसे गाते हैं। पिता जी ने लता दी को पहली बार गाते हुए सुना था। वो बहुत प्रसन्न हुए और तभी से उनकी दीक्षा, पूरिया धनाश्री राग के साथ ही प्रारंभ कर दी।

जब वो 9 साल की थीं, पिता जी के साथ stage performance देने लगीं।

मात्र 13 साल की उम्र में उनके सिर से पिता जी का साया उठ गया। और सम्पूर्ण परिवार की जिम्मेदारी उनके नन्हे कंधों पर आ गई। जिसे उन्होंने बखूबी निभाई।

अतः 13 साल की उम्र से ही लता दी ने playback singing शुरू कर दी। 

उस समय से प्रारम्भ हुआ उनका career, 7 दशकों तक बुलंदी पर रहा, उसके बाद, गीतों के गिरते स्तर के कारण, उन्होंने बहुत चुनिंदा गीतों को ही अपनी आवाज़ दी।

लता दी को स्वर कोकिला क्यों कहा गया, उसके पीछे का कारण यह है कि संगीत के प्रति ऐसी लहर आजादी से पहले नहीं थी। उस समय गाने तो लिखे जाते थे लेकिन ऐसा कंठ नहीं था जो इन गानों को एक ऊंचाई दे सके। तब प्रदार्पण हुआ सुर कोकिला लता मंगेशकर का, जिनके गाए गानों में आम आदमी से लेकर अपने क्षेत्र के शिखर पर बैठे हर व्यक्ति तक की भावनाओं को आवाज मिली।

जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ती रही, उनकी आवाज़ का जादू भी दिनों-दिन परवान चढ़ता रहा। उनकी बढ़ती उम्र का प्रभाव कभी भी उनके संगीत के आड़े नहीं आया।

उस आवाज़ में जो कशिश थी, जो अल्हड़ जवानी थी, जो सुरीला सुर था, वो उनके हर गीत को बेमिसाल बनाता था। 

उनके लिए, बड़े-बड़े गायक कहा करते थे कि यह आवाज़ तो कभी बेसुरी होती ही नहीं है।

उनके गाये पहले गीत "पांव लगूं कर जोरी" से अंतिम गीत, "लुका-छिपी" तक के सभी गीतों में उनकी आवाज़ का जादू चढ़ता ही गया।

उनके गीत, हर्ष में, विषाद में, भक्ति में शक्ति में, प्रेम में, परिहास में सभी रंगों में रंगे थे। 

उनके गाए गीतों से बच्चों को सोते से उठाते हैं, "जागो मोहन प्यारे" ईश्वर की प्रार्थना करनी हो तो, " हम को मन की शक्ति देना" बच्चों को शिक्षा देनी हो तो," बच्चे मन के सच्चे", जब उन्हें सुलाना हो, "आ जा रही आ, निंदिया तू आ", जवां हो जाएं तो, " सोलह बरस की बाली उमर को सलाम", "जब प्यार किया तो डरना क्या",मन की तमन्नाओं को उड़ान देनी हो तो, " आज फिर जीने की तमन्ना है", जब दिल टूट जाए तो,"अजीब दास्तां है ये",  बीता ना बिताए रैना,  "तेरे बिना ज़िंदगी से कोई शिकवा तो नहीं", और जब प्यार वापस आ जाए तो, "बाहों में चले आओ", जब देश भक्ति जागे तो"ए मेरे वतन के लोगों", और जब परिपक्वता आ जाए तो, तेरे लिए हम हैं जिए". इसलिए लता दी, आदि भी हैं और अनंत भी... या यूं कहें कि वो अलौकिक हैं।

यही कारण था कि लता मंगेशकर, लता दी बनकर सबके दिलों में उतर गई और सबकी लता दी बनकर उनसे संगीत का मीठा रिश्ता बना लिया।

लता दी हमेशा चप्पल उतार कर ही गीत गाती थीं, उनके लिए गीत गायन, ईश्वरीय भक्ति थी, साधना थी, अराधना थी और जहाँ ईश्वर का साथ हो, वहाँ सफलता सिद्धी बन जाती है।

उन्होंने, विभिन्न भारतीय भाषाओं में 30,000 से अधिक गाने गाए हैं। अपने सात दशकों से अधिक के career में उन्होंने ‘जरा आंख में भर लो पानी’, ‘आज फिर जीने की तमन्ना है’, ‘अजीब दास्तान है ये’, ‘तुझे देखा तो यह जाना सनम’, ‘हमको हमीं से चुरा लो’, "जब प्यार किया तो डरना क्या’, ‘नीला आसमां सो गया’ और ‘तेरे लिए’ जैसे कई यादगार tracks को अपनी आवाज दी है.।मोहम्मद रफ़ी, किशोर कुमार सहित कई singers के साथ उन्होंने कई सदाबाहर गाने दिए।

वह भारत के तीनों सर्वोच्च नागरिक सम्मान (भारत रत्न, पद्म भूषण और पद्म विभूषण) सहित तीन राष्ट्रीय और चार फिल्मफेयर पुरस्कारों से नवाजी जा चुकी हैं।

उन्हें साल 1989 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। साल 2001 में लता मंगेशकर को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' दिया गया था। 

आज स्वर साम्राज्ञी लता दी, हमारे बीच सशरीर नहीं हैं, पर अगर उन्हें संगीत जगत का स्वर युग कहा जाए, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। 

अपने हजारों गानों के माध्यम से वो अमर आवाज़ हमेशा हम सब के साथ रहेगी, उनकी याद बनकर, उनकी पहचान बनकर...

और उनका जीवन संघर्ष और परिवार के लिए समर्पण, सबको प्रेरित करेगा, सफलता की बुलंदियों को छूने के लिए...

उनके बहुत से अमर गीतों में से:

ऐ मेरे वतन के लोगों...

रहे ना रहें हम, महका करेंगे... 

मेरी आवाज़ ही पहचान है...

इन गीतों ने उन्हें बहुत पहले ही अमर कर दिया था।

आज लता दी, एक स्वर युग को कोटि-कोटि प्रणाम और अश्रूपूरित श्रद्धांजलि 🙏🏻💞

Saturday, 5 February 2022

Recipe : Tehri

बसंतोत्सव, बसंत पंचमी पर्व और सरस्वती पूजा सब एक ही पर्व के विभिन्न नाम है। जो अपनी अलग ही छटा बिखेरता है। माँ सरस्वती की पूजा अर्चना होती है। बसंतोत्सव है तो हर तरफ पीले ही पीले रंग की बहार दृष्टिगत होती है। 

माँ का श्रृंगार पीला, जो पुष्प अर्पित किए जाते हैं वो पीले, भक्तगणों के वस्त्र पीले और चढ़ने वाला प्रसाद भी पीला।

माँ सरस्वती की पूजा अर्चना होती है इसलिए जिन लोगों के घरों में गुरु अराधना होती है, वहाँ इसे गुरु पूजन दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

बचपन से इसमें बनने वाला भोग तहरी, जिसके विभिन्न नाम है, मसाला भात, वेज़ पुलाव आदि..  हमें बहुत पसंद है।

यह जितनी tasty होती है, उतनी ही healthy भी। 

तो चलिए आज ही इसकी recipe share कर देते हैं, और सभी को स्वादिष्ट भोग तहरी का भोज कराते हैं।

तहरी




Ingredients :

  • Rice - 2 bowl 
  • Paneer diced- ¼ bowl
  • Pea - ¼ bowl 
  • Carrot - ¼ bowl 
  • Cauliflower -¼ bowl
  • Potato diced - ¼ bowl
  • Cumin - ½ tsp.
  • Ginger - ½ inch
  • Clove - 2 to 3
  • Black pepper kernels - 6 to 8
  • Cinnamon stick - ½ inch
  • Bay leaf - 1 medium
  • Green Cardamom - 2 to 3
  • Turmeric powder - ½ tsp.
  • Coriander powder - 1tsp.
  • Red chilli powder - ½ tsp.
  • Salt - as per your taste
  • Mustard oil - 3 tbsp.


Method :

  1. Rice को अच्छे से धोकर, भिगोकर रख दीजिए।
  2. Ginger  को chop कर लीजिए।
  3. Pressure cooker में oil डालकर अच्छे से गर्म कर लीजिए।
  4. गर्म तेल में जीरा व अदरक को डालकर गुलाबी भून लीजिए। इसमें सभी खड़े मसाले डालकर भून लें।
  5. अब इसमें सभी सब्जियों और सभी powders, spices (मसाले) व नमक को डालकर भूनें।
  6. चावल से पानी हटाकर निथार लें।
  7. निथरे हुए चावल को pressure cooker में डालकर slow flame पर थोड़ी-थोड़ी देर में चलाते हुए ½ hours तक अच्छे से भून लीजिए।
  8. अब इसमें पानी डाल दीजिए।
  9. Pressure cooker का ढक्कन बन्द करके high flame पर रख दीजिए।
  10. 1 सीटी high flame पर दे दीजिए, फिर पांच मिनट के लिए flame slow कर दीजिए। उसके बाद gas off कर दीजिए।
  11. 7 to 10 minutes में pressure down हो जाएगा।
  12. Serving time में आप तहरी में 2tsp. घी (शुद्ध) ज़रुर से डालें।

Now yummy, tasty tehri is ready. You can serve it with chutney or raita.

Now it's tip and tricks time.


Tips and Tricks :

  • चावल को बहुत देर तक नहीं भिगाएं, अन्यथा तहरी खिली-खिली नहीं बनेगी। 
  • तहरी बनाने के लिए mustard oil ही सबसे अच्छा रहता है, क्योंकि उसी से उसका taste, texture and flavour सबसे अच्छा आएगा।
  • सारी सब्जियाँ एक बराबर सी काटें, इससे तहरी देखने में भी अच्छी लगती है और taste भी uniform रहता है, जो तहरी को लाजवाब बनाता है।
  • गोभी और पनीर के टुकड़े बहुत छोटे मत रखिएगा, वरना वो तहरी में घुल जाएंगे और उनका prominent taste नहीं आएगा। 
  • खड़े गर्म मसालों को अवश्य डालिएगा, इन से तहरी की  tempting aroma enhance होती है। आप चाहें तो खड़े गर्म मसालों को serving से पहले हटा भी सकते हैं।
  • आप चाहें तो इसमें dry fruits जैसे cashews (काजू), almonds (बादाम) और raisins (किशमिश) आदि.. भी add कर सकते हैं। 
  • अगर आप onion and garlic  खाते हैं तो, छौंकने के समय 2 medium size onion को लम्बा काट कर व 4 to 5 garlic cloves को chop करके सुनहरा होने तक भून लें, फिर उसमें खड़े मसाले डालकर भूनें।

  • चावल को भूनने के लिए डालने से पहले पानी अच्छे से निकला हुआ होना चाहिए। वरना तेल में पानी जाने से चावल सब्जियों के साथ अच्छे से भुनेगा भी नहीं और तेल के छींटे आने से हाथ भी जलने का डर रहता है।
  • चावल और सब्जियाँ जितना अच्छे से भुने रहेंगे, तहरी उतनी ही खिली-खिली बनेगी।
  • चावल में पानी इतना डालना है कि चावल और सब्जियाँ डूब जाए। पानी चावल से approx. 1 inch ऊपर रहेगा।
  • ध्यान रखिएगा कि पानी की quantity proper रहनी चाहिए। पानी कम होने से तहरी जल जाएगी और पानी ज्यादा से खिली-खिली नहीं बनेगी और बहुत स्वादिष्ट भी नहीं लगेगी। 

तो इंतज़ार किस बात का है, बसंतोत्सव में तहरी का भोग/प्रसाद तैयार कीजिए जिससे माता रानी और परिवार वाले सभी खुश हों।

आप सभी को बसंतोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ 💐🙏🏻