Wednesday, 4 May 2022

Article : North Indian movies Vs South Indian movies

North Indian movies Vs South Indian movies..


आज कल, एक नये मुद्दे पर चर्चा चल रही है, कि which movies are better? North Indian movies or South Indian movies...

और इस के साथ ही एक और व्यर्थ की चर्चा कि हिन्दी भाषा को राष्ट्रीय भाषा समझा जाए या नहीं?...

पहले तो हिंदी भाषा की राष्ट्रीयता पर जो प्रश्न उठाया गया है, उस पर चर्चा कर लेते हैं...

भारत देश की स्वतंत्रता के पश्चात ही, हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकारा जाना था। पर तब यह समस्या उत्पन्न हो गई कि अभी भारत के प्रत्येक राज्य को हिंदी पूर्णतः नहीं आती है, अतः यह प्रावधान रखा गया कि कुछ समय दिया जाए, जिससे सभी हिंदी भाषा सीख लें।

उसके बाद हिन्दी को राष्ट्रभाषा घोषित कर दिया जाएगा, तब तक के लिए क्षेत्रीय भाषाओं व English भाषा का प्रयोग, सभी तरह के कार्यों व शिक्षा के लिए किया जाए।

यह हमारे देश की त्रासदी है कि, पूरे भारत में सबने विदेशी भाषा English को ज़्यादा महत्व दिया और आज सभी जगह english भाषा को सर्वाधिक उपयोग में लाया जा रहा है और जिसे सम्मान मिलना चाहिए, उसे क्षेत्रीय भाषा बनाकर दरकिनार कर दिया गया है।

जो यह कह रहे हैं कि दक्षिण भारतीय फिल्में, उत्तर भारतीय फिल्मों से बेहतर हैं, अतः हिन्दी भाषा को राष्ट्रीय भाषा नहीं समझना चाहिए, तो उनको यह समझ आना चाहिए कि फिल्म, किस भाषा की श्रेष्ठ हैं, इससे भाषा की राष्ट्रीयता सिद्ध करना, बेहद बचकाना है। अतः यह बात कहना ही पूर्णतः निराधार है।

अब बात करते हैं कि, कौन सी फिल्म श्रेष्ठ है तो उसके लिए तो यही कहना है कि, जिस भी फिल्म की कहानी श्रेष्ठ होगी, वो फिल्म श्रेष्ठ है।

जिसमें, किसी भी धर्म, संस्कृति और समाज को नीचा ना दिखाया जाए,वो फिल्म श्रेष्ठ है। जिस फिल्म को हर वर्ग के (बच्चे, जवान और वृद्ध) लोग एक साथ देख सकें, वो फिल्म श्रेष्ठ है। जिसमें दृश्य की मांग है, कहकर अश्लीलता ना दिखाई जाए, वो फिल्म श्रेष्ठ है।

अभी तीन-चार लगातार South Indian movies के hit हो जाने से किसी भी एक को श्रेष्ठ और दूसरे को निम्न श्रेणी में रखना उचित नहीं है।

दोनों ही को श्रेष्ठ फिल्मों का निर्माण करना चाहिए।

साउथ की फ़िल्में इन दिनों हर तरफ चर्चा में बनी हुई हैं। पुष्पा से शुरू हुआ यह सफ़र KGF 2 तक आ गया है। सभी फ़िल्में बेशुमार कमाई कर बड़े-बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर रही हैं। इसमें 3 फ़िल्में तो खास बन गई हैं जिसमें RRR भी शामिल है।

वैसे अभी इन चार South Indian movies को hit कराने में हिंदी भाषा का पूर्ण सहयोग है।

कैसे?

क्योंकि, क्या अपने कभी यह सोचा है कि यह साउथ के सितारे हिंदी तो बोल नहीं पाते हैं, या बोलते हैं तो उतना अच्छी नहीं जिससे दर्शक को फिल्म देखने में मज़ा आये और वह दीवाना हो जाए। 

तो इसके पीछे जो लोग हैं आज हम आपको उनके बारे में बताते हैं जिनकी वजह से साउथ की फ़िल्में सुपर-डुपर हिट हो रही हैं। जाहिर है किसी भी फिल्म में हीरो के dialogue और उनकी आवाज़ सुनकर, लोग उनसे प्रभावित होते हैं।

ऐसे में कई साउथ स्टार्स की हिंदी में फिल्मों की अपार सफलता के पीछे कुछ डबिंग आर्टिस्ट हैं। इनमे तो कुछ हिंदी फिल्मों के चर्चित नाम भी हैं।

ज़ाहिर है दक्षिण भारतीय फिल्मों की हिंदी डबिंग का प्रचलन शुरू होने के बाद बिहार-यूपी जैसे हिंदी भाषी क्षेत्रों के लोग भी इन फिल्मों के दीवाने हो गए।

लेकिन साउथ की फिल्मों को नॉर्थ में लोकप्रिय बनाने में इन फिल्मों के हिंदी डबिंग आर्टिस्ट का भी बड़ा योगदान होता है। इन्हीं की बदौलत साउथ की फिल्में साउथ के साथ-साथ पूरे देशभर में लोकप्रिय हैं।

महेश बाबू, अल्लू अर्जुन, रामचरण और यश की आवाज समझकर आप किसे सुनते आए हैं? आपमें में से हो सकता है कुछ लोग जानते भी हों की इन साउथ फिल्मों में अभिनेता ने खुद अपनी आवाज नहीं दी है। इसके लिए डबिंग आर्टिस्ट की मदद ली गई जिन्होंने आज फिल्मों को देश भर में सुपरहिट करा दिया।

शरद केलकर

डबिंग आर्टिस्ट की बात हो और सिनेमा इतिहास की सबसे बड़ी फिल्म बाहुबली का जिक्र न हो तो कैसे हो सकता है। जी हां Bahubali में प्रभास के dialogue और उनको आवाज़ देने वाले अभिनेता शरद केलकर ही थे।

शरद की ही दमदार आवाज़ ने प्रभास के राजा वाले लुक में जान डाली थी जिसको सुनकर बिलकुल भी इस बात का अहसास नहीं हुआ था। बाद में जब इस बात का खुलासा हुआ तो लोग हैरान रह गए थे।

श्रेयस तलपड़े

इस अभिनेता और आर्टिस्ट का नाम तो भुला ही नहीं जा सकता। जी हां दुनिया भर में धूम मचाने वाले पुष्पा राज को फिल्म में श्रेयस ने ही आवाज़ दी है। मैं फ्लॉवर नहीं फायर है.. झुकेगा नहीं साला, यह डायलॉग जब आपने सुना होगा तो आपको लगा होगा कि अल्लू अर्जुन ने क्या डायलॉग मारा ।

लेकिन असल में इस दमदार आवाज़ और जादू के पीछे तो श्रेयस तलपड़े की आवाज थी। श्रेयस ने पुष्पा में अल्लू अर्जुन की आवाज़ डब की थी जो आज बच्चे बच्चे की जुबान पर चढ़ गई है।

संकेत म्हात्रे

इस लिस्ट में हम शुरुआत करते हैं उस कलाकार के नाम से जिन्होंने साउथ के कई स्टार्स को अपनी आवाज़ देने का काम किया है। जी हां संकेत म्हात्रे जो केवल साउथ की ही नहीं बल्कि हॉलीवुड फिल्मों की भी डबिंग करते हैं।

वो देश के सबसे मशहूर डबिंग आर्टिस्ट हैं। संकेत साउथ की हिंदी डबिंग फिल्मों को सबसे ज्यादा आवाज़ देते हैं। इनकी आवाज को अल्लु अर्जुन, N.T. Rama Rao Jr. और महेश बाबू की आवाज़ माना जाता है।

इनकी आवाज़ अल्लू अर्जुन पर सबसे अधिक suit करती है। यही नहीं संकेत कई एनिमेटेड फिल्मों को भी अपनी आवाज़ दे चुके हैं, संकेत ने हाल ही में आई फिल्म ‘मास्टर’ में thalapathy vijay को अपनी आवाज़ दी है।

सचिन गोले 

इसके बाद नाम आता है उस मशहूर आर्टिस्ट का जिनकी आवाज़ ने इस वक्त पूरे देश का दिल जीत रखा है। जी हां सचिन गोले जिन्होंने रॉकी भाई यश की फिल्म KGF में अपनी आवाज दी है।

यही नहीं उन्होंने कई साउथ फिल्मों को अपनी आवाज़ से सजाया है। उनकी आवाज़ सबसे अधिक KGF स्टार यश पर suit करती है।

उन्होंने यश की कई फिल्मों को अपनी आवाज दी है। इसमें सबसे चर्चित KGF है जो इन दिनों दुनिया भर में धूम मचा रही है।

ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अगर साउथ फिल्म की सही डबिंग न हो तो क्या दर्शक फिल्म को इतना प्यार दे पाएंगे? जाहिर है हर फिल्म के साथ यह एक महत्वपूर्ण भाग होता है और फिल्म की अपार सफलता में आवाज़ और dialogue का भी काफी अहम रोल होता है।

तो अब आप खुद अच्छे से समझ गये होंगे कि सफलता प्राप्त करने के लिए मिलजुल, एक-दूसरे को सहयोग देना होता है। 

कभी किसी को कमतर आंकने से नहीं बल्कि दूसरों को सम्मानित करने से आप सर्वश्रेष्ठ कहलाते हैं।

फिर क्या फर्क पड़ता है कि movie, North Indian हो या South Indian.

 दोनों ही india हैं, और किसी की भी सफलता India की सफलता है। हमें अगर अपने भारत को सर्वश्रेष्ठ बनाना है तो एक होना आवश्यक है। 

जय हिन्द जय भारत 🇮🇳

Tuesday, 3 May 2022

Article : Akshaya Tritiya🎑🕉️

हम हिन्दुओं में हर शुभ कार्य, मूहुर्त देखकर ही संपन्न किए जाते हैं। ऐसे में पंडित जी के चक्कर लगाने पड़ते हैं, फिर भी, कभी-कभी मन में यह शंका रह ही जाती है कि पंडित जी ने सही गणना की होगी ना? कहीं धन के लोभ या व्यस्तता के कारण सही गणना ना की हो तो?

ऐसे सभी सवालों के समाधान हैं, हमारे यह स्वयं सिद्ध मुहूर्त...

यह स्वयं सिद्ध मुहूर्त क्या पहेली है? आप को बताते हैं, पहले आज के शुभ पर्व अक्षय तृतीया की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏🏻💐

अक्षय तृतीया🎑🕉️



आज अक्षय तृतीया है। शास्त्रों में अक्षय तृतीया एक स्वयं सिद्ध मुहूर्त है यानी ऐसी तिथि जिसमें किसी तरह का शुभ कार्य या शुभ खरीदारी करने के लिए पंडित से शुभ मुहूर्त निकलवाने की आवश्यकता नहीं होती है। अक्षय तृतीया के दिन सभी तरह के शुभ कार्य किए जा सकते हैं। अर्थात् बिना शुभ मुहूर्त के सभी तरह के शुभ कार्य की शुरुआत की जा सकती है।

शास्त्र कहते हैं कि, 'न क्षयः इति अक्षयः' अर्थात जिसका क्षय नहीं होता वह अक्षय है। वर्ष में चैत्र माह के शुक्लपक्ष की नवमी (रामनवमी), वैशाख शुक्लपक्ष की तृतीया,(अक्षय तृतीया), आश्विन माह शुक्लपक्ष की दशमी (विजय दशमी) और कार्तिक माह शुक्लपक्ष की एकादशी इन्हें स्वयं सिद्ध या अक्षय मुहूर्त के नाम से जाना जाता है। इनमें भी वैशाख माह की तृतीया को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस दिन रोहिणी नक्षत्र और बुधवार का दिन भी हो तो यह और भी अमोघफल देने वाली हो जाती है।

हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया का त्योहार मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 03 मई को है। अक्षय तृतीया को आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है। अक्षय का मतलब होता है जिसका कभी भी क्षय या नाश न होना। मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन शुभ खरीदारी या शुभ कार्य करने पर हमेशा इसमें वृद्धि होती है। अक्षय तृतीया के दिन शुभ कार्य करने, दान, स्नान और जप आदि करने पर कभी भी शुभ फल की कमी नहीं होती है। वहीं खासतौर पर अक्षय तृतीया के दिन विशेष तौर पर सोने के आभूषण की खरीदारी की जाती है। मान्यता है इस दिन सोने और चांदी के आभूषण खरीदने से व्यक्ति के जीवन में माता लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है जिससे व्यक्ति का जीवन सुख, समृद्धि और वैभव का वास रहता है।

अक्षय तृतीया का महत्व आज से नहीं है, बल्कि हिन्दू ग्रंथों और पुराणों के अनुसार, त्रेता युग, द्वापरयुग आदि में भी इस तिथि की विशेष महत्ता थी और इस तिथि में बहुत से शुभ कार्य किए गए हैं, आपको उन कार्यों के विषय में बताते हैं, तो आप मन में आस्था और बढ़ जाएगी...


अक्षय तृतीया की खास बातें :

  • शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया पूरे एक वर्ष में उन साढ़े तीन शुभ मुहूर्त में से एक जिसे स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना गया है। 
  • अक्षय तृतीया के दिन सोने से बने आभूषण की खरीदारी करना बहुत ही शुभ होता है। 
  • अक्षय तृतीया की तिथि पर भगवान परशुराम और हयग्रीव अवतार हुए थे।
  • माँ अन्नपूर्णा जी का जन्म भी आज ही के दिन हुआ था
  • सतयुग व त्रेतायुग का प्रारंभ भी इसी तिथि को हुआ था।
  • धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ही महाभारत के युद्ध का समापन हुआ था।
  • धार्मिक शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ही द्वापर युग का समापन हुआ था।
  • धार्मिक कथाओं के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन सुदामा भगवान कृष्ण से मिलने पहुंचे थे।
  • द्रोपदी को चीरहरण से कृष्ण ने आज ही के दिन बचाया था
  • अक्षय तृतीया के दिन से ही वेद व्यास और भगवान गणेश ने महाभारत ग्रंथ लिखना शुरू किया था।
  • धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ही मां गंगा का धरती पर आगमन हुआ था।
  • कुबेर को आज ही के दिन खजाना मिला था
  • अक्षय तृतीया के दिन उत्तराखंड स्थिति श्री बद्रीनाथ जी के कपाट खुलते हैं।
  • अक्षय तृतीया के शुभ दिन वृंदावन के बांके बिहारी जी के मंदिर में श्री विग्रह के चरणों के दर्शन होते हैं। साल में केवल एक बार इसी तिथि के दिन ही ऐसा होता है।  
  • अक्षय तृतीया के शुभ दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। 
  • हिंदू धर्म ग्रंथों में कहा गया है कि अक्षय तृतीया के दिन किया गया दान-पुण्य कर्म का फल कभी नष्ट नहीं होता।इस तिथि पर सभी तरह के मांगलिक और शुभ कार्य बिना पंचांग देखे किए जाते हैं। अक्षय तृतीया के दिन विवाह करना, सोना खरीदना, माता लक्ष्मी की पूजा करने का विशेष महत्व होता है।


अक्षय तृतीया पूजा मुहूर्त : 

05:39 AM से 12:18 PM तक

अवधि : 6 घंटे 39 मिनट


अक्षय तृतीया पर बना शुभ योग :
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अक्षय तृतीया 03 मई को सुकर्मा योग में मनाई जाएगी। अक्षय तृतीया के दिन शोभन और मातंग योग, तैतिल करण, रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि का चंद्रमा रहेगा। मंगलवार, 03 मई के दिन अक्षय तृतीया रोहिणी नक्षत्र के संयोग से मातंग नाम का शुभ योग बन रहा है। इस योग में किए गए कार्य का फल अक्षय रहता है। शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन रोहिणी नक्षत्र पड़ने को बहुत ही शुभ माना गया है। इसके अलावा इस अक्षय तृतीया पर पांच ग्रहों की शुभ स्थिति भी देखने को मिलेगी। ज्योतिष गणना के अनुसार इस बार अक्षय तृतीया पर सूर्य, चंद्रमा, शुक्र उच्च राशि में और गुरु और शनि अपनी स्वराशि में रहेंगे। इस तरह के शुभ योग और नक्षत्र में खरीदारी, निवेश और लेन-देन के लिए पूरा दिन बहुत ही शुभ रहने वाला होगा।

अक्षय तृतीया पर क्यों खरीदते हैं सोने के आभूषण :

हर वर्ष अक्षय तृतीया के त्योहार के दिन सोने के आभूषण खरीदने की परंपरा निभाई जाती है। मान्यता है इस दिन खरीदा गया सोना सुख, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक होता है। ऐसा माना जाता है इस दिन खरीदा गया सोना या निवेश किया गया धन कभी भी खत्म नहीं होता। मान्यता है अक्षय तृतीया के दिन खरीदे गए सोने और निवेश का स्वयं भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी रक्षा और उसमें वृद्धि करते हैं।

Thursday, 28 April 2022

Article : हर प्रदेश चाहे, योगी सरकार

 हर प्रदेश चाहे, योगी सरकार... 




अभी कुछ दिन पहले ही उत्तर प्रदेश में चुनाव हुए, जिसमें भारी मतों से (बीजेपी) भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की, और उत्तर प्रदेश में एक बार पुनः योगी आदित्यनाथ जी, मुख्यमंत्री के रूप में चयनित हुए।

योगी जी, जब पहली बार उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री बने थे, उस समय जीत का सारा श्रेय मोदी जी का था। लेकिन इस बार के चुनाव के परिणाम, उनके द्वारा किए गए कार्यों के आंकलन पर भी होने थे। अर्थात् इस बार, योगी जी के मुख्यमंत्री बनने में, मोदी जी के साथ ही योगी जी के द्वारा किए गए कार्यों को भी, हार-जीत की कसौटी में कसा जाना था।

लोगों ने उनके द्वारा किए गए कार्यों को पूरे मन से सराहा और उन्हें शानदार जीत का तोहफा दिया।

आज तक चुनाव को जीतने के लिए बहुत से मुद्दे रखे जाते थे। पर law and order को कभी चुनाव का मुद्दा नहीं बनाया जाता था। शायद इसीलिए कि आज तक कभी भी किसी भी नेता ने इतनी सख्ती और ईमानदारी से law and order संभाला ही नहीं था।

सख्ती इतनी, कि एक से बढ़कर एक गैंगस्टर की भी इतनी हिम्मत नहीं है, कि वो योगी जी के कार्यकाल में कोई ग़लत काम करने की सोच भी सके। उनके बुलडोजर से सब डरते हैं और दबदबा तो इतना कि उनका नाम ही बुलडोजर बाबा रख दिया गया है।

और ईमानदारी इतनी, कि कोई भी जाति, धर्म, ऊंच, नीच, अमीर-गरीब के साथ न्याय में कोई भेद भाव नहीं है। 

चुनाव होने से पहले किसान आंदोलन, चुनाव के दौरान, हिजाब पहनने का एजेंडा और अब लाउडस्पीकर का कांड।

एक के बाद एक समस्या सामने आ कर खड़ी होती रही।

बहुत से प्रदेशों में हिजाब पहनने और लाउडस्पीकर के विवादों पर ना जाने कितनी हिंसा, तोड़-फोड़ कर दी गई। हिन्दू मुस्लिम के दंगे भड़क गए। लोगों पर अत्याचार हुए, कुछ लोग लापता भी हो गये।

पर इसकी तुलना अगर उत्तर प्रदेश से की जाए, तो आप पाएंगे कि, हिजाब का मुद्दा तो कब सुलझ गया, पता ही नहीं चला।

और जो लाउडस्पीकर का मुद्दा था, वो इतने सौहार्द्रपूर्ण तरीके से भी सुलझ सकता है, कोई सोच भी नहीं सकता था।

पर इस मुद्दे को भी योगी जी ने सुलझा दिया है, बिना किसी हिंसा के, बिना किसी ज़ोर जबरदस्ती के।

पर यह हुआ कैसे?

क्योंकि जब योगी जी ने उत्तर प्रदेश में इस समस्या को सुलझाने वाली बात कही और कहा कि High court के नियम के अनुसार, हर किसी को लाउडस्पीकर उतारने होंगे, फिर वो मस्जिद हों, मंदिर हों या मठ हों । और जो लाउडस्पीकर लगे रहेंगे, उससे भी आने वाली आवाज़, इतनी धीमी होनी चाहिए कि वो परिसर के बाहर नहीं जाए।

और आप को पता है कि, किस मठ के लाउडस्पीकर सबसे पहले उतारे गए? कोई और नहीं, उनके खुद का गोरखपुर का मठ, जहाँ के वो मठाधीश हैं। और जो लाउडस्पीकर लगे हैं, उनकी आवाज़, 45 decibels से भी कम कर दी गई है, साथ ही उन लाउडस्पीकर का face, जो कि बाहर की तरफ था, उसे मंदिरों की तरफ कर दिया गया है, जिससे, उनकी आवाज़ सिर्फ परिसर में ही सुनाई दे रही है। 

जब सत्ता में आसीन ताकत, अपने होने का वर्चस्व नहीं दिखाती है, बल्कि ईमानदारी और कर्तव्य निष्ठा से काम करती है, तो जनता भी उसका साथ देने में तत्परता से लग जाती है।

दूसरा लाउडस्पीकर उतरा, गोरखपुर की सबसे बड़ी मस्जिद से जो कि मठ के नज़दीक ही है। पर उस मस्जिद से लाउडस्पीकर उतारने के लिए, ना तो हिंसा करनी पड़ी, ना ही ज़ोर जबरदस्ती करनी पड़ी। उन्होंने स्वतः ही कानून के दायरे को अपना लिया। इसके बाद पूरे उत्तर प्रदेश के सभी धार्मिक स्थलों में स्वतः लाउडस्पीकर के नियम का पालन किया गया। 

उत्तर प्रदेश में सभी धार्मिक स्थलों के मिलाकर, लगभग 22,000 लाउडस्पीकर उतारे गए और 35,000 लाउडस्पीकर की आवाज़ कम की गई।

आप ने देखा, किस तरह प्रेम और सौहार्द्र से पूरे प्रदेश में law and order को follow किया गया। कहीं कोई मतभेद नहीं, कोई भेदभाव नहीं, कहीं कोई हिंसा नहीं, कहीं कोई पथराव नहीं, किसी को जेल में भर्ती भी नहीं किया गया।  

वहीं, राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली हिंसा की आग में जल रहे हैं, क्योंकि वहाँ एक तरफा कार्यवाही हो रही है। रामनवमी और हनुमान जन्मोत्सव पर रैली पर पथराव, हिंसा, मंदिरों और हिन्दूओं के घरों का खंडन किया जा रहा है। 

शायद जिन्होंने अपने निजी स्वार्थों के चलते योगी जी को वोट नहीं दिया था, उन्हें भी लगा हो, कि अच्छा हुआ कि योगी जी की ही सरकार बनी है, और वह भी आगे से अपनी भूल को सुधारते हुए, हमेशा योगी जी को दी वोट दें।

योगी जी, law and order के साथ ही, अमृत सरोवर, पर्यटन व परिवहन विभाग, सड़क यातायात व्यवस्था, रोजगार के अवसर, संस्कृति और विरासत का विकास व प्रदेश के आधुनिकीकरण पर भी विशेष ध्यान दें रहे हैं।

योगी जी हों साथ, तो सुरक्षा और विकास एक साथ...

वो दिन दूर नहीं, जब उत्तर प्रदेश का नाम भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रदेश में लिया जाएगा।

कभी जो प्रदेश, सबसे अधिक गुंडागर्दी के लिए मशहूर था, वो आज law and order के नाम पर प्रसिद्धी प्राप्त कर रहा है।

अब आप खुद सोच लीजिए कि क्यों हर प्रदेश चाहे योगी सरकार…