Monday, 24 February 2025

Story of Life: जीवन क्या है( भाग -3)

जीवन क्या है (भाग-1) व… 

जीवन क्या है (भाग-2) के आगे...

जीवन क्या है (भाग - 3) 




इतने बड़े साधु महाराज की बातें और प्रश्नों के उत्तर की प्रतीक्षा सभी मौन होकर करने लगे, क्योंकि हर किसी के मन में कहीं न कहीं यही प्रश्न कौतूहल की स्थिति बनाए हुए थे।

साधु महाराज ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा...

बेटी आपने प्रश्न किया था कि, महाराज जीवन क्या है?

और उसमे सबसे पहले पूछा था कि 

क्या अपनों का सानिध्य जीवन है?

तो आप सबको बता दें कि अपनों का सानिध्य ही जीवन है।

ईश्वर ने खुद हमें अपनों के सानिध्य में रहने के लिए ही रिश्तों की डोर से बांध कर जन्म दिया है।

मां-पापा, भाई-बहन, बाबा दादी नाना-नानी, बुआ चाचा, मामा मौसी, नाते-रिश्तेदार, मित्रगण, मायका ससुराल इत्यादि... सभी अपनेपन से जुड़े रिश्ते...

लेकिन अपनों का सानिध्य तब होता है, जब मान-सम्मान, प्रेम, त्याग सब परस्पर हो। आगे से आगे बढ़कर एक दूसरे के लिए करने की इच्छा हो, किया जाता हो।

पर अगर करने वाला एक ही पक्ष हो, मान-सम्मान प्रेम त्याग सब एक ही पक्ष को करना हो और दूसरा सिर्फ़ करवाने में विश्वास करता हो, तो ऐसे में दो बात कहेंगे, एक तो उसके लिए आप का कोई मूल्य नहीं है, वो आपको बहुत हल्के में लेता है, और दूसरी बात जो समझने वाली है कि आप अपनों के सानिध्य में नहीं है बल्कि स्वार्थियों के सानिध्य में हैं।

इस तरह के रिश्ते में बंधे रहना, केवल अपने सामर्थ्य को नष्ट करना है और अपने मन को आघात पहुंचाना है...

ऐसे में यही कहूंगा कि जीवन ऐसे अपनों का सानिध्य तो बिल्कुल नहीं है... 

दूसरा प्रश्न था कि क्या धनार्जन जीवन है? तो सुनो..

आगे पढ़े, जीवन क्या है (भाग -4 ) में...

Saturday, 22 February 2025

Story of Life : जीवन क्या है (भाग-2)

जीवन क्या है (भाग-1) आगे… 

जीवन क्या है (भाग-2)


अनुष्का ने कहा, महाराज जी, मेरे प्रश्न इन सबसे अलग हैं और थोड़े अधिक समय लेने वाले, क्या मुझे कुछ अधिक समय मिलेगा?

क्योंकि प्रश्न तो सबको ही सुनाई दे रहे थे तो यह, सुनकर सब शोर मचाने लगे कि अधिक समय न दिया जाए, क्योंकि अभी बहुत लोग बचे हैं और सबको ही अपनी-अपनी उलझनों का हल चाहिए...

साधु महाराज ने कहा... सभी शांत हो जाइए, इस बेटी को कितना समय दिया जाएगा, यह इसके द्वारा पूछे गए प्रश्न निर्धारित करेंगे... मैं यहां लोगों की उलझन ही सुलझाने आया हूं, तो किसी को भी निराश होकर नहीं जाना होगा। 

अनुष्का ने कहना शुरू किया..

महाराज, जीवन क्या है?

क्या अपनों का सानिध्य जीवन है?

या धनार्जन जीवन है?

या सफलता जीवन है? 

या फिर ईश्वर में समर्पण जीवन है?

साधु महाराज ने कहा, बेटी तुम्हें अपने भविष्य से जुड़े किसी प्रश्न का उत्तर नहीं जानना है?

नहीं महाराज...

या यह कहूं कि हां जानना है, या फिर यह कि इन्हीं प्रश्नों के उत्तर से ही मेरा भविष्य निर्धारित होगा...

चंद क्षण महाराज मौन रहे, फिर बोले बेटी तुमने जो प्रश्न पूछे हैं, वो वही पूछ सकता है जो प्रेम से परिपूर्ण हो, जिसने अपना सर्वस्व अपनों पर निछावर कर दिया हो, जिसके लिए सफलता असफलता से पहले उसके अपने हों बल्कि यह कहना उचित होगा कि उसके लिए अपने अस्तित्व से पहले अपने हों...

पर तुम्हें पता है, जिसने यह जान लिया, उसने जीवन का सही अर्थ जान लिया।

मैं बहुत सी जगह गया और लोगों ने मुझसे न जाने कितने प्रश्न पूछे और मैंने उत्तर दिए।

सबके प्रश्नों के उत्तर देने के पश्चात् लगता था कि इतनी अधिक मोह-माया से भरे संसार में कहीं भी सच्चा स्नेह नहीं व्याप्त है।

लोग अपने से ऊपर उठकर अपनों के लिए भी नहीं सोचना चाह रहे हैं। 

इसलिए शायद तुमने ध्यान दिया हो कि लोगों के प्रश्न सबको सुनाई दे रहे थे, पर मेरे उत्तर सिर्फ प्रश्न पूछने वाले को ही...

हां महाराज, मेरे मन में भी यह विचार आया था, पर इसका कारण पूछने की आप से हिम्मत नहीं हुई...

बेटी ऐसा इसलिए, क्योंकि उनके प्रश्न तो सामान्य थे, पर उनके उत्तर व्यक्ति विशेष से जुड़े होते थे तो सबको क्या सुनाता...

पर तुमने जो पूछा है, उनके हल‌ सबको सुनने चाहिए, अतः इन प्रश्नों के उत्तर सबको सुनाई देंगे।

और एक बात, तुम्हारे प्रश्नों के उत्तर देने ही मैं यहां आया था। मुझे तुम्हारे आने का पूर्वाभास हो गया था और मैं तुम्हारी ही प्रतिक्षा कर रहा था।

इतने बड़े साधु महाराज की बातें और प्रश्नों के उत्तर की प्रतीक्षा, सभी मौन होकर करने लगे, क्योंकि हर किसी के मन में कहीं न कहीं यही प्रश्न कौतूहल की स्थिति बनाए हुए थे।

साधु महाराज ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा...

प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए पढ़ें, जीवन क्या है (भाग-3)।

Friday, 21 February 2025

Story of Life : जीवन क्या है (भाग-1)

 जीवन क्या है (भाग-1)


पूरे शहर में चर्चा थी कि एक बहुत पहुंचे हुए साधु महाराज आए हुए हैं, और हर किसी के मन की उलझन सुलझा रहे हैं।

ऐसे में अनुष्का का भी मन हुआ कि जीवन के रहस्य को समझा जाए। तो वो भी उस ओर चल दी। 

हालांकि उसे जल्दी इस तरह के लोगों से मिलने में कोई विशेष रुचि नहीं होती थी, फिर भी न जाने क्या उसे उस ओर खींच रहा था।

जब वो वहां पहुंची तो उसने देखा कि वहां बहुत ज्यादा भीड़ थी और हर किसी को भविष्य जानने की इच्छा थी, चाहे वर्तमान में कोई कुछ भी कर रहा हो।

जिसका भी नम्बर आता, उसके हाथों में पुष्प देकर साधु महाराज के निकट जाने को कह दिया जाता। 

बहुत देर में जब उसका नम्बर आया तो उसे भी पुष्प दे दिए गए, उनमें कुछ अलग ही तरह की खुशबू थी। जिससे उसका रोम-रोम महकने लगा।

उसने साधु महाराज को प्रणाम किया, उनके मुख पर विशेष शांति और तेज विद्धमान था। उसने पुष्प को उन पर अर्पित करने के लिए हाथ आगे बढाया।

साधु महाराज ने कहा, नहीं बेटी, यह पुष्प मुझ पर अर्पित करने के लिए नहीं हैं। यह तुम अपने साथ रखना और जाते समय तुम्हें एक विशेष कक्ष में ले जाया जाएगा, वहां तुम जिसे चाहे यह पुष्प अर्पित कर देना। 

साधु महाराज की बात सुनकर अनुष्का थोड़ी सोच में पड़ गयी कि ऐसा भी क्या विशेष कक्ष होगा? 

बाकी दूर से उसे नहीं दिख रहा था कि लोग पुष्प हाथ में लिए थे कि उन्होंने साधु महाराज को अर्पित कर दिया था..

एक बात और थी कि लोग प्रश्न क्या पूछ रहे हैं वो सबको सुनाई दे रहा था, पर साधु महाराज उत्तर क्या दे रहे हैं, यह सिर्फ प्रश्न पूछने वाले को सुनाई दे रहा था। 

अनुष्का ने कहा, महाराज जी, मेरे प्रश्न इन सबसे अलग हैं और थोड़े अधिक समय लेने वाले, क्या मुझे कुछ अधिक समय मिलेगा?

उसने देखा था कि किसी को भी बहुत अधिक समय नहीं दिया जा रहा था, पर वो अपने हर प्रश्न का उत्तर जानना चाह रही थी और साथ ही अधिक समय भी..

क्योंकि प्रश्न तो सबको ही सुनाई दे रहे थे तो यह सुनकर सब शोर मचाने लगे कि अधिक समय न दिया जाए, क्योंकि अभी बहुत लोग बचे हैं और सबको ही अपनी अपनी उलझनें सुलझानी है ...

साधु महाराज ने कहा...

आगे पढें जीवन क्या है (भाग - 2) में