Friday, 15 August 2025

Poem : कहानी स्वतंत्रता की

79वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। स्वतंत्रता दिवस के पावन पर्व पर शहीदों को श्रृद्धा सुमन अर्पित करते हुए आज की यह कविता प्रस्तुत करते हैं…

कहानी स्वतंत्रता की


मंगल पांडे, तात्या टोपे,

या फिर झांसी की रानी। 

स्वतंत्रता दिलाई किस-किस ने,

है यह बड़ी लंबी कहानी।।

 

शहीद यहाँ हुए अनेकों, 

कुछ जाने, कुछ अनजाने भी। 

हंसते-हंसते खून बहा दिए,

आजादी के परवानों ने ही।।

 

वीर सावरकर, और भगत सिंह,

हो या चंद्रशेखर आजाद।

नाम अनेकों जुड़े हुए हैं,

जिन्होंने देश को किया आबाद।।


गांधीजी हो, सरदार पटेल,

या हो सुभाष चन्द्र बोस। 

अंग्रेजों की कुटिल चाल को,

सदा के लिए किया ख़ामोश।।


हर भारतीय ने किया विरोध,

 गूंज उठा हर एक इलाका।

पराजित फिरंगी देख हैरान थे,

लहराता हुआ विजय पताका।।


सन् सत्तावन से भड़की चिंगारी,

सन् सैंतालीस में शांत हुई।

फिरंगियों की सेना हारी, 

बेचैन और क्लान्त हुई।।


शत्-शत् नमन उन सभी को,

जो थे अमर‌ वीर बलिदानी।

सदियों तक याद की जाएगी,

स्वतंत्रता की अमिट कहानी।।



🇮🇳🙏🏻 भारत माता की जय 🙏🏻🇮🇳

Thursday, 14 August 2025

Poem : बारिश की नन्हीं बूंदें

रिमझिम बारिश को देख मन स्वतः ही काव्य-रस में भीगकर नन्हीं बूंदों संग अठखेलियां करता हुआ यह कविता गढ़ता चला गया। आइए इसका आनन्द लें और बारिश के मनभावन मौसम का लुत्फ उठाएं…

बारिश की नन्हीं बूंदें


बारिश की नन्हीं बूंदें, 

इठलाती-बलखाती सी।

नभ से उतरकर जो,

धरा की अंक में समाती हैं।

सौंधी खुशबू से हर एक के

तन-मन को महकाती हैं।।

तरुणी को आया नवयौवन, 

भाता उनका चंचल चितवन।

क्षणिक मनोहर-सी वो आभा,

 नैनों को तृप्ति दिलाती है।

विटप नहाए, पपीहा गाए,

प्रकृति में हरियाली छाए।।

देखकर ऐसी छवि निराली, 

जन-जन को हर्षाती है। 

बारिश की नन्हीं बूंदें, 

इठलाती-बलखाती सी।

नभ से उतरकर जो,

धरा की अंक में समाती हैं।।

Tuesday, 12 August 2025

Article : गर्व राखी पर

दो दिन से medical related problems के लिए hospital जाना हो रहा था।

तो आने-जाने और hospital में एक बात notice की, उसे बताने से पहले हिन्दू त्यौहार के विषय में जान लेते हैं।

गर्व राखी पर 


हिन्दू धर्म, एक ऐसा धर्म है, जहां हर धर्म से अधिक देवी-देवता हैं और हर धर्म से अधिक इसमें तीज-त्योहार मनाए जाते हैं।

पर सर्वाधिक देवी-देवता, हिन्दू धर्म में ही क्यों हैं? ऐसा कभी आपने सोचा?

अगर नहीं, तो चलिए साथ में विचार करते हैं...

एकमात्र हिन्दू धर्म में ही हर एक को ईश्वरीय स्थान प्राप्त है, फिर वो पेड़-पौधे हों, पशु-पक्षी हों, चाहे प्रकृति हो, या रिश्ते हों, जैसे पूर्वज, पति, भाई, संतान इत्यादि...

जब हर कुछ पूजनीय है तो देवी-देवता भी बहुत सारे होंगे और तीज-त्योहार भी...

और जितने अधिक देवी-देवता और तीज-त्योहार होंगे, उतना ही अधिक उत्साह, उमंग, प्रेम, अपनत्व, सुख और आनंद...

और जीवन में जिसे यह सब प्राप्त हो, वो ही मोक्ष प्राप्ति कर ईश्वर में समा पाएगा।

दीपावली, होली, रामनवमी, दशहरा, जन्माष्टमी, शिवरात्रि, नवरात्रि, राखी, करवाचौथ, तीज, छठ, सकट, गणेशोत्सव, रथयात्रा, नागपंचमी इत्यादि... इतने अधिक तीज-त्योहार हैं कि बस लिखते ही जाएं...

इन्हीं त्योहारों में से एक त्योहार है राखी...

भाई-बहन के प्यार को प्रेम के मजबूत बंधन में बांधती रेशम की डोर... 

जितना यह अनोखा बंधन है उतना ही गर्व से भरा हुआ...

हमने देखा कि जिन कलाइयों में राखी बंधी हुई थी, उन लोगों के चेहरे पर एक अलग ही सुख और गर्व की आभा थी।

और यह आभा, उतनी अधिक थी, जितनी ज्यादा राखी बंधी हुई थी कलाई पर...

उम्र, फिर चाहे कुछ भी हो, बच्चा, जवान या वृद्ध, सभी अपने हाथों में बंधी राखी से प्रसन्न होकर उसे बार-बार उसे ठीक करते रह रहे थे।

कौन कहता है कि केवल पुत्र प्राप्ति की कामना है, पूछिए भाइयों से कि उन्हें कितना इंतजार रहता है अपनी कलाइयों को सजवाने का, या जानिए, उन भाइयों से कि वो कितने दुखी रहते हैं, जिनकी कलाई सूनी रहती है...

कितने ही लोग तो ऐसे होते हैं, जो अपने हाथों में राखी एक-दो दिन नहीं बल्कि महीनों तक या अगली राखी तक बांधे रहते हैं।

इन गर्वित चेहरों को देख कर यह ही प्रतीत हुआ कि लोगों को लगता होगा होली, दीपावाली बड़ा त्योहार होगा, पर राखी से सजी हुई कलाइयां और गर्व से भरे हुए चेहरे, कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहे थे।

इससे यह एहसास होता है कि भारत देवी-देवताओं और तीज-त्योहारों का देश है, जहां प्रेम, सुख, आनंद, श्रद्धा और विश्वास है। जहां यह सब है, वहीं ईश्वरीय वास है और जहां ईश्वर है, वहीं जीवन भी है और मोक्ष भी...

इसलिए अगर आप भारतीय है और भारत में ही रह रहे हैं तो अपने आप को सम्मानित महसूस कीजिए और गर्व से कहें,

जय हिन्द, जय भारत 🇮🇳