Saturday, 21 February 2026

Article : Delhi- Wrongly Infamous for AQI

प्रदूषण का नाम लिया जाए, और दिल्ली का नाम न आए, यह तो संभव ही नहीं है। इतनी अधिक बदनाम है दिल्ली, मानो यहां के अलावा बाकी सारी जगहों में तो एकदम शुद्ध हवा चलती हो।

वैसे दिल्ली को बदनाम करने में खुद दिल्ली वालों का बेहद बड़ा हाथ है, इसे polluted करने में और उससे ज़्यादा हंगामा मचाने में भी। सिर्फ और सिर्फ अपने आप को sofes and hi-fi दिखाने के लिए।

मन किया, चलो पता किया जाए कि आखिर भारत में और कितने शहर ऐसे हैं, जहां दिल्ली जितना या थोड़ा कम-ज्यादा AQI (Air Quality Index) होता है।

तो web browser पर डाला, “दिल्ली जितना प्रदूषण और कितने शहरों में है?”

और फिर जो आया, वो मेरी सोच नहीं है, बल्कि उस web browser द्वारा दिया गया AI Overview है।

Delhi- Wrongly Infamous for AQI


तो चलिए, पहले यह जान लेते हैं कि कौन-कौन से वो शहर हैं, जहां लगभग उतना ही प्रदूषण है, जितना दिल्ली में। पर वहां प्रदूषण के नाम पर शोर नहीं मचता, वहां की हवा में लोगों का दम भी नहीं घुटता और चक्कर भी नहीं आते।

दिल्ली जितना प्रदूषण कई भारतीय शहरों में है, खासकर उत्तर भारत में, जिनमें दिए गए शहरों की सूची शामिल हैं।


(I) Cities with Delhi-like AQI.

1. NCR (National Capital Region):

2. Uttar Pradesh:

3. Bihar:

4. Other Cities:

  • Jaipur (Rajasthan)
  • Chandigarh (UT- Union Territory)
  • Kolkata (West Bengal)
  • Mumbai (Maharashtra)
  • And some north-eastern cities (e.g. Byrnihat, Assam)

यहाँ अक्सर AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) दिल्ली के बराबर या उससे भी ज़्यादा हो जाता है, खासकर सर्दियों में।


(II) Major Causes of such AQI.

1. Traffic Jam: मुम्बई और कलकत्ता में हद की भीड़, सड़कें बहुत अच्छी अवस्था में न होना, जिससे traffic jam की अधिकता। इसलिए समुद्र होने के बावजूद, अगर आप traffic jam में फंसे, तो आपको pollution झेलना ही पड़ेगा और वो भी घंटों तक।

2. Topography: उत्तरी भारत के मैदानी इलाकों में प्रदूषण जमा हो जाता है. 

3. Seasonal Effects: सर्दियों में प्रदूषण का स्तर कई गुना बढ़ जाता है, जिससे कई शहर एक साथ गंभीर वायु गुणवत्ता का सामना करते हैं।

4. Pollution Impacts: प्रदूषण अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में भी फैल रहा है, जैसा कि श्री गंगानगर और सिवानी जैसे शहरों में देखा गया है।


एक appeal दिल्ली वालों से भी, कि अपना दिमाग दिल्ली को स्वच्छ करने में लगाइए, न कि उसको बदनाम करने के लिए, क्योंकि दिल्ली आप की अपनी है 🙏🏻

तो कैसी लगी, AI की ये report? कुछ लोगों के लिए कड़वी ज़रूर होगी, पर 100% सच्ची है। ऐसी और interesting reports के लिए stay tuned, at Shades of Life…

Friday, 20 February 2026

Article : एकांत का शोर

आज की यह post एक अजीब से एहसास की दास्तान है। एक ऐसी दास्तान, जिसका अनुभव किसी को कभी न हो।  शायद हुआ भी न हो, क्योंकि यह एक विकट परिस्थिति है, जिससे बहुत कम लोगों को रूबरू होना पड़ता है।

और वो एहसास है, एकांत के शोर का।

एकांत का शोर


आप कहेंगे कि आजकल एकांत का एहसास कौन-सा नया है। Joint family का culture तो लगभग खत्म ही हो चुका है, फिर बच्चों का बड़े शहरों और विदेशों में बसना, इसको बहुत बढ़ावा दिया जा रहा है। सही है, यह भी बहुत भयावह है, पर अब यह कटु सत्य बनता जा रहा है, जो अगर आप अपने परिवार में रोक सकें तो आप बहुत भाग्यशाली होंगे।

पर हम आज उस एकांत की बात कर रहे हैं, जब आप सबके बीच में हों, सब बेइंतहा आपका ध्यान रख रहे हों, आपके लिए तन-मन-धन से समर्पित हों, आप को सब दिख रहा हो, सबका एहसास भी हो, पर फिर भी आप नितांत अकेले हों, असमर्थ हों। 

आप कहेंगे कि हम क्या कहना चाह रहे हैं, कुछ समझ नहीं आ रहा है? जी हांँ, ऐसी ही परिस्थिति थी, जब weather और doctor की लापरवाही के कारण pneumonia और मेरे दोनों कानों में infection हो गया, जो कि कान की हड्डियों तक पहुंच चुका था, साथ ही कान के पर्दे में छेद हो गया था। तो कान में बेहद दर्द और हमें सुनाई देना लगभग बंद हो गया।

लगभग, मतलब बिल्कुल कान के पास आकर और जोर से कोई बोले तभी सुनाई दे रहा था। अन्यथा इशारे से बातें। एक तो सुनाई नहीं दे रहा था, और ऊपर से pneumonia के कारण सांस न ले पाना और अतिशय कमजोरी, सीने में दर्द, कान के पर्दे में छेद होने की वजह से ear drops, कान से निकल कर मुंह में आ जाती, जिससे मुंह बेहद कसैला हो जाता, जिससे खाना खा पाना दूभर, इत्यादि।

मतलब कि एक बहुत भयावह और लगभग तोड़ देने वाली स्थिति, पर इस स्थिति के साथ ही एक और एहसास, एकांत के शोर का। एकांत का शोर, मतलब?

कुछ सुनाई नहीं दे‌ रहा था, पूरी दुनिया से पूरी तरह से कट गए थे, क्योंकि न किसी की बात सुन‌ पा रहे थे और pneumonia के कारण बहुत सांस फूल रही थी, तो किसी से कुछ बात भी कर पाना मुश्किल हो रहा था।

इस तरह से सबके मध्य रहकर भी नितांत एकांत में पहुंच जाना बहुत भयावह था। 

पर एकांत में शोर? 

वो क्या था? 

वो था, उस समय अपने शरीर के अंदर की आवाज सुनाई देना। 

मतलब?

मतलब दिल की धड़कन(heart beat), जो कि तबीयत खराब होने के कारण 72 से बढ़कर 150 हो गई थी। हर पल ऐसी प्रतीत हो रही थी, मानो दिमाग में लगातार कोई हथौड़े चला रहा हो, कभी तो मन करता कि यह धड़कन रुक जाए, तो चैन आए।

अपना बोलना, सबसे तेज़ खुद को ही सुनाई देना, कुछ खा रहे होते तो उससे तेज़ कुछ नहीं सुनाई देना और बहुत सारी बातों का मंथन, हर पल को सालों में बदल रहा था। 

ईश्वर ने हमें 5 इंद्रियां दी है। जो कोई उनमें से किसी एक से भी वंचित हैं, तो उसका जीवन बहुत कठिन होता है। किन्तु वो व्यक्ति जो पहले पूर्णतः स्वस्थ हो, पर किसी कारणवश उसकी कोई इंद्री, कुछ समय या हमेशा के लिए ख़राब हो जाए, तो उसके लिए जीवन असहनीय हो जाता है।

क्योंकि जिसके पास पहले से ही नहीं था, उसे पूर्ण अनुभव नहीं होता है कि वो क्या क्या खो रहा है। 

जबकि, जो सब अनुभव कर चुका हो, उसका उस अनुभव के बाद वंचित होना बेहद कष्टकारी होता है।

पर अब कुछ बेहतर स्थिति है, थोड़ा-थोड़ा सुनाई देना, कुछ-कुछ बातें भी कर लेना, मेरा blog में वापसी, सब आप लोगों का प्यार है, जिसने एक बार फिर दिल को आप सब से जोड़ दिया।

चलिए, कल से फिर से एक बार खुशनुमा सफ़र शुरू करते हैं, एक नई शुरुआत के साथ, पर सोच में बहुत कुछ बदल गया है, शायद इसकी झलक आगे की posts में भी दिखे।

आप सभी को बहुत सारा धन्यवाद, जिन्होंने मेरे स्वास्थ्य के लिए मंगलकामनाएं की 🙏🏻 

हे ईश्वर, आप से प्रार्थना है कि, सबको ही सम्पूर्णता प्रदान करें और किसी को सुख प्रदान कर यूं कभी वंचित न करें।

Sunday, 15 February 2026

Bhajan : भोलेनाथ जी

भोलेनाथ जी


हाथ जोड़कर खड़े भक्त हैं

सुन लो भोलेनाथ जी

कृपा दृष्टि कर दो हम-सब पर

अरज लिए हैं आज जी

ओ शंभू नाथ जी

हाँ भोलेनाथ जी - 2


जब तुम हो शिरोधार्य मेरे 

फिर क्यों विपदा मुझको है घेरे 

त्रिशूल उठाकर कर दो 

तुम उन सबका नाश जी 

ओ शंभू नाथ जी 

हाँ भोलेनाथ जी -2 


देवों के देव हो तुम ही 

त्रिकाल, महाकाल जी

शरण तुम्हारे बैठे हैं हम

भक्ति करो स्वीकार जी

ओ शंभू नाथ जी 

हाँ भोलेनाथ जी - 2 


शिव गौरा के पवित्र मिलन से 

बढ़कर कुछ नहीं बात जी

आई अनोखी रात जी

शिवरात्रि है आज जी 

ओ शंभू नाथ जी 

हाँ भोलेनाथ जी -2 



"ॐ नमः पार्वती पतये हर हर महादेव" 



आप सभी को महाशिवरात्रि पर्व शुभ हो, महादेव और माता पार्वती का आशीर्वाद हम सब पर सदैव बना रहे 🙏🏻