अब तक आपने पढ़ा-रीना, बहुत ही हंसमुख, ज़िंदादिल व्यक्तित्व की स्वामिनी थी। साथ ही बहुत ज्यादा helpful भी थी।फिर भी उसकी कोई कद्र नहीं थी, बल्कि जब उसे साथ चाहिए होता था, तब कोई साथ भी नहीं देता था.....अब आगे .
स्वाभिमान (भाग-३ )
उन्होंने वहाँ जा कर रीना के माँ- पापा से बात की, फिर रीना को बुलाया गया, जब रीना आई, तो उसके boss ने रीना से पूछा- मुझे अपना पापा बनाओगी? रीना के माँ- पापा ने भी यही पूछा, अपने boss को अपना पापा बनाओगी? रीना को कुछ समझ नहीं आ रहा था, तब उसकी माँ हँसते हुए बोली, भाईसाहब तुझे अपनी बहू बनाना चाहते हैं।
रीना हाँ
करने
से पहले मेरे बेटे से मिल लो, वो बाहर कार
में है, साथ ही
तुम्हें मेरी company भी मेरे बेटे के साथ
चलानी होगी। पर जैसे
मैं कहता हूँ वैसे। तुम जहाँ ना बोलना है वहाँ ना बोलोगी, दूसरों की मदद तो करोगी, पर अपने को व अपने काम को suffer कराके नहीं।
रीना जब बाहर पहुंची, वहाँ उसका classmate
राघव खड़ा था। उसे देखते ही रीना बोल उठी तुम?
हाँ, मैं ही
तुम्हारे boss का बेटा हूँ, मुझे पापा ने तुम्हारे बारे में
पहले ही सब बता दिया था, पर मैं भी
पापा की शर्तों पर ही शादी करूंगा। अगर
तुम्हें मैं पसंद हूँ? और पापा की
शर्तें भी मान्य हों तो? राघव भी अपने पापा की तरह ही बहुत ही समझदार और सुलझा हुआ था। इतना अच्छा
रिश्ता उसके लिए घर चल कर आया था। उसने हाँ कर दी। दोनों अंदर आ
गए, और सबको अपनी रजामंदी, बता दी।
रीना की माँ बोलीं- बेटा तुम
अच्छी हो, इसलिए इतना
अच्छा रिश्ता तुम्हारे लिए आया है, लेकिन हीरे की
कद्र सिर्फ जौहरी को ही होती है। इसलिए अब से वही करना, जो भाईसहब तुमसे करने को बोल रहे हैं।
आगे से रीना ने सोच-समझ के लोगों की मदद करनी
शुरू कर दी, और जहाँ ना
कहना होता था, वहाँ ना भी
बोलने लगी। अब वो सब के लिए हर समय free नहीं
रहा करती थी। जब कुछ बुरा लगता था, तो वो उसे अच्छे से जाहिर करने लगी।
अब, सब लोग उसके
साथ respectfully
रहने लगे।
अब उसे अच्छे से समझ आ गया था, अगर आप अपने स्वाभिमान की रक्षा खुद करेंगे।
तभी दुनिया भी आपको मान देगी।