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Tuesday, 18 August 2026

India's Heritage : Vande Mataram after 80 Years

15 August 2026 एक ऐसा ऐतिहासिक दिन बनकर आया, जिसमें हम सब भारतवासियों के साथ आजादी के मतवाले शहीद भी शामिल हो गए।

ऐसा हम क्यों कह रहे हैं? तो उसका कारण है, स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर पर वंदे मातरम् के सम्पूर्ण गीत का गायन।

क्या आप जानते हैं, लाल किले की जान रहा यह राष्ट्रगीत 80 साल बाद मंच पर गाया गया?

“वन्दे मातरम्, सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम् शस्यश्यामलां मातरम्, वन्दे मातरम्!”

आइए, इस राष्ट्रगीत का निर्माण और इसके महत्व को समझते हैं…

Vande Mataram after 80 Years


यह हमारे देश भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसे बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ने 150 साल पहले 1875 में बनाया था।

1882 में अपनी किताब आनंदमठ में यह गीत प्रकाशित किया, उसके बाद यह घर-घर की आवाज बन गया और 1896 को इसे मंच पर रविन्द्रनाथ टैगोर ने गाया।

आजादी के पूर्व आज़ादी के मतवालों के लिए यह आजादी का गीत बन गया।

जिसने अंग्रेज़ो को हिलाकर रख दिया था, उस समय इस गीत को गाना जुर्म माना जाता था, उन पर लाठीचार्ज होती थी, जेल हो जाती थी, जो यह गीत गाते थे। 

पर इसे जितना रोका गया, आजादी के मतवालों ने उतना ही अधिक गाया।

सभाओं में, गली-गली में, जुलूसों में, भीड़ में, जेल में, यहां तक कि फांसी लगते समय भी, हर पल, हर क्षण, इस एक गीत ने अंग्रेजों की नाम पर दम कर दिया था।

1905 में अंग्रेजों ने बंगाल के दो टुकड़े कर दिए, इससे पूरा देश हिल गया। तब यही गीत, गीत के साथ-साथ नारा और देश को आजादी दिलाने का हथियार भी बन गया। 

हर ओर से, हर छोर से, जोर-जोर से पूरे देश में दो नारे सर्वत्र गूंज रहे थे। वंदे मातरम् और इंकलाब जिंदाबाद। इन दो नारों से ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि अंग्रेज भारत को आजाद करने को मजबूर हो गए। 

और तब मिली हमारे देश को आजादी, अविस्मर्णीय दिन आया, अथक प्रयासों, व अनेकानेक बलिदानों के बाद। वंदे मातरम् गीत को पूरा गाने पर पहले अंग्रजों को फिर मुस्लिम league को परेशानी थी। 

क्योंकि गीत के आखिरी stanza में भारत माता की तुलना दुर्गा माता से की, तो कुछ विशेष लोगों ने कहा कि उनके धर्म में ऐसे देवी अर्चना नहीं की जाती है। अतः यह निर्धारित किया गया कि वंदे मातरम् गीत के आखिरी stanza न गाएँ जाएँ। 

24 January 1950 में पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद जी ने यह ऐलान कर दिया था कि “जन-गण-मन अधिनायक जय हे” राष्ट्र गान है, जबकि “वन्दे मातरम्” राष्ट्रगीत निर्धारित होगा।

और जितने भी सरकारी कार्यालय, विद्यालय आदि हैं, उनमें देश से जुड़े पर्व में और किसी भी ऐसी जगह जाने में देश को represent किया जा रहा है, तो पहले वहाँ राष्ट्रगान गाया जाएगा, राष्ट्रगान के पश्चात राष्ट्रीय गीत गाया जाएगा।

पर यह बहुत अफसोस की बात है कि हममें से बहुत कम ही भारतीय हैं, जिन्हें यह राष्ट्रीय गीत आता हो, कितनों को तो यह भी पता नहीं होगा कि भारत का राष्ट्रीय गीत कौन सा है।

लेकिन इस वर्ष लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय गीत गाया और पूरा गाया गया, जिसकी यह सोच थी उसे शत-शत नमन।

क्योंकि यह गीत गाए जाने से देश ने सभी आजादी के मतवालों को उनके बलिदान को शत-शत नमन किया है, उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी है, उन्हें हृदय से आभार व्यक्त किया है।

आशा है आने वाले समय में वंदे मातरम् गीत को हर राष्ट्रीय पर्व पर विशेष रूप से गाया जाएगा, जिससे बच्चों-बच्चों को यह कंठस्थ हो जाए। और हम हर वर्ष आजादी दिलाने वाले वीर सपूतों को आभार प्रकट कर सकें, सच्ची श्रद्धांजलि दे सकें।

वंदे मातरम्! जय हिन्द, जय भारत!

Saturday, 5 July 2025

Article : सकारात्मक ऊर्जा

अभी कुछ दिन पहले यह एहसास हुआ कि जिंदगी के अनवरत चलते रहने में सब कुछ आपका सोचा हुआ नहीं होता है। 

बहुत कुछ वो भी होता है, जो कोई और सोच रहा होता है। जो उसकी इच्छा होती है। यहां "उसकी" का तात्पर्य ईश्वर से नहीं है, बल्कि उनसे है, जो आप से जुड़े हुए हों या शायद वो जिन्हें आप पहचानते भी नहीं हैं।

पर एक बात समझ नहीं आई कि जब हमें हमारे कर्मों के अनुसार फल मिलना होता है, तो दूसरे की सोची हुई इच्छा का प्रभाव हम पर क्यों पड़ता है?

हम अपने कर्मों, अपनी सोच को तो सकारात्मक रख सकते हैं, पर दूसरों की नहीं…
सकारात्मक ऊर्जा

फिर किस तरह से यह करें कि फल हमें हमारे कर्मों और हमारी सोच का मिले?

या किस प्रकार से अपने सजाए हुए सपनों को बिखरते देखकर दुखी न हों?

आखिर हम कौन से सपने संजोएं और कौन से नहीं...

या सपने संजोना ही छोड़ दें?

पर अगर सपने ही नहीं संजोएंगे, तो आगे बढ़ने की, कठिन परिश्रम करने की इच्छा भी बलवती नहीं होगी।

और न ही जिंदगी में कोई उत्साह और उमंग होगी।

मन नीरसता के गहरे अंधकार में जाता चला जाएगा...

पर क्या यह सही है?

और क्या यह सही है कि कर्म करो, फल की इच्छा न करो... वाली बात, क्योंकि कर्म तो हम कर रहे हैं और फल दूसरों के कर्म और इच्छा से भी मिल रहे हैं...

अब से एक नया अभियान शुरू किया है, सकारात्मक ऊर्जा को प्रज्वलित करने का, स्वयं की भी और अपने आस-पास मौजूद सब लोगों में भी...

एक नया प्रयोग कि क्या, जब सब लोग मिलकर एक ही विषय में सोचें तो क्या असंभव कार्य भी संभव हो सकता है...

क्योंकि जब किसी की आपके प्रति विपरीत सोच काम कर सकती हैं, तो आपके पक्ष वाली सोच भी काम करनी चाहिए…

ईश्वर से करबद्ध प्रार्थना है कि हे ईश्वर, आप मनोकामना सिद्ध करने वाले हैं, इस मनोकामना को भी पूर्ण कीजिए और हमारी भक्ति स्वीकार कीजिये। अपनी कृपादृष्टि सदैव बनाए रखियेगा 🙏🏻

Wednesday, 14 May 2025

Article: भारत महानायक

भारत महानायक



भारत ने 9 आतंकी अड्डों को ध्वस्त करने के बाद जिस तरह से पाकिस्तानी हमलों का प्रतिउत्तर उनके 11 airbase और सैन्य ठिकानों को तबाह करके दिया है, उसने उसे विश्व स्तर पर महानायक बना दिया है। 

7 May के बाद पाकिस्तान पूरी तरह से बौखला उठा था, और उसने जम्मू, पंजाब, राजस्थान और गुजरात में रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। उसने missiles, drones, fighter planes and rockets से ताबड़तोड़ हमले करना शुरू कर दिया।

मगर, उसका सारा निशाना बेकार चला गया। वजह यह रही कि 'सुदर्शन चक्र' ने रास्ते में ही उन्हें बेअसर कर दिया और भारत की रक्षा की। ठीक वैसे ही जैसे भगवान कृष्ण ने महाभारत में इसका इस्तेमाल किया था। 

सुदर्शन चक्र? पर Air defense system तो S-400 रहा था? फिर यह सुदर्शन चक्र क्या है?

सेना ने S-400 का नाम सुदर्शन चक्र रखा है।

भारत हर तरफ से पाकिस्तान पर भारी पड़ रहा था, फिर चाहे attack करना हो या defense... Rafale, MIG 29, स्वदेशी मिसाइल आकाश, ब्रह्मोस और drones से attack and S-400 से defense..

हमारी सेना ने उनके छक्के छुड़ा दिए। हालात यह बन गए कि तीन दिन में ही पाकिस्तान ने ceasefire की request कर दी।

हमारा भारत महानायक बन गया...

पर किस के कारण?

हमारी अदम्य साहसी, सुदृढ़ और सक्षम सेना के कारण...

बिल्कुल सही है।

लेकिन कुछ और लोग भी हैं, जिनके बिना यह जीत संभव नहीं होती...

मोदी जी के कारण... बिल्कुल उनके ही कारण...

पर उनसे पहले एक और नाम है उनका जिक्र पहले करते हैं, जिन्होंने अमेरिका के आगे घुटने नहीं टेके और अपने फैसले पर डटे रहे, और सुदर्शन चक्र और राफेल की जुगलबंदी को भारतीय सेना के defense system में शामिल कर दिया। 

और वो हैं, भारत के पूर्व रक्षामंत्री स्वर्गीय मनोहर पर्रिकर जी...

2021 के अंत में S-400 के तीन squadron आ चुके हैं और तब से तैनात हैं, इस साल और भी squadron आने की उम्मीद है। अक्टूबर 2018 में रूस के साथ 35,000 करोड़ रुपए के सौदे में इन्हें लिया गया था। इस सौदे पर 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी में नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए थे।

5 अक्टूबर, 2018 को डील पर हस्ताक्षर किए गए थे। हालांकि, delivery 2021 के अंत में हुई।

2018 में पूर्व रक्षा मंत्री रहे मनोहर पर्रिकर ने राफेल डील को आगे बढ़ते हुए, अहम बात  कही थी, कि राफेल के आने से भारत, पाकिस्तान की हवाई क्षमता पर भारी पड़ेगा। इसका target अचूक होगा। राफेल ऊपर-नीचे, अगल-बगल यानी हर तरफ निगरानी रखने में सक्षम है। मतलब इसका vision  360° का होगा। पायलट को बस विरोधी को देखना है और बटन दबा देना है और बाक़ी काम कंप्यूटर कर लेगा।

1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय वायु सेना पाकिस्तान पर इसलिए हावी रही थी क्योंकि भारत की मिसाइलों की पहुंच SU-30 और MIG-20 के साथ 30 किलोमीटर तक थी। दूसरी तरफ पाकिस्तान की पहुंच 20 किलोमीटर तक ही थी। इसलिए हम आगे रहे। 

हालांकि, 1999 से 2014 के बीच पाकिस्तान ने अपनी क्षमता को बढ़ाकर 100 किलोमीटर तक कर लिया। जबकि भारत इस दौरान अपनी पहुंच 60 किलोमीटर तक ही बढ़ा पाया। मतलब हम लोग तब खतरे में थे। तब अगर पाकिस्तानी लड़ाकू विमान हम पर हमले करते तो शायद हम पलटवार उतना boldly नहीं कर पाते। लेकिन राफेल के आने के बाद हमारी पहुंच 150 किलोमीटर तक हो गई।

इसके साथ ही S-400 में क्षमता है कि वो 400 km. दूर से ही अपने target को detect करके हवा में ही intercept कर देता है। इसलिए पाकिस्तान के एक भी हमले कारगर साबित नहीं हुए, क्योंकि उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया गया था।

और यह तो सबको मालूम है कि सेना के साथ ही साथ, हमारा सशक्त और सुदृढ़ defense system भी था, भारत को महानायक बनाने में। 

अब बात करते हैं कि मोदी जी को इतना क्यों महत्व दिया जा रहा है सेना की इस महान जीत के लिए, जबकि किया तो सब हमारी भारतीय सेना ने था। साहस, वीरता और जान का जोखिम सब उनका...

बिल्कुल वो ही सर्वोपरि हैं, लेकिन जब आप देखेंगे कि मोदी जी का क्या role है, इस पूरी जीत में, तब शायद आप भी मानें।

सेना में सैनिक होने के साथ ही जो जरूरी होता है, वो होता है, उन्हें arms and ammunition से strong बनाना, जो किया था, BJP government ने, मोदी जी ने और मनोहर पर्रिकर ने, S-400 और Rafale लाकर।

मोदी जी अपने आपको चौकीदार कहते हैं। पर जब S-400 and Rafale की deal की बात हुई थी, तो इसका विरोध विपक्ष से लेकर जनता तक सबने किया था।

यहां तक कि विपक्ष ने तो मोदी जी के लिए "चौकीदार चोर है", का नारा भी बुलंद किया था। 

America भी नहीं चाहता था कि, भारत में S-400 and Rafale आए और भारत strong बनें...

पर मोदी जी ने किसी की परवाह नहीं की और उन्होंने रूस से deal की...

इसके साथ ही मोदी जी के देश को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों से Indian defense system भी मजबूत हो रहा है।

जैसे कि स्वदेशी मिसाइल आकाश, ब्रह्मोस मिसाइल, INS विक्रांत आदि का निर्माण करके... 

और सबसे बड़ी बात, मोदी जी ने सेना को खुली छूट दी थी कि, उन्हें मौके की स्थिति देखकर, जो कार्यवाही उचित लगे, वो उसे कर सकते हैं। जबकि मोदी जी अपनी सेना के साथ हर पल जुड़े रहते हैं।

यह बहुत बड़ी बात है, जो कि ज्यादातर नहीं दी जाती है। पूरी कार्यवाही को सभी प्रधानमंत्री अपने हाथ में रखते हैं और सभी निर्णय उनके अनुसार होते हैं। 

मोदी जी की दूरदर्शिता और सुदृढ़ व सक्षम नेतृत्व ही है, जिसका नतीजा है, पाकिस्तान का इतना ताबड़तोड़ हमला होने के बावजूद सरहद से जुड़े शहरों के अलावा पूरा देश, शांति से रहा। 

सरहद के निकट के शहरों को भी जितना हो सकता था, सुरक्षित रखने की कोशिश की गई, हालांकि वहां कुछ मासूमों की जान नहीं बचा पाए।

वाकई में नरेंद्र मोदी जैसा आज तक कोई प्रधानमंत्री नहीं हुआ...

शायद इस घटना के बाद आप को भी विश्वास हुआ हो, कि देश उनके ही हाथों में सौंपना चाहिए, जो देश को सुरक्षित रख सकें...

जय हिन्द, जय हिन्द की सेना 🙏🏻

Wednesday, 29 January 2025

India's Heritage : अमृत स्नान - मौनी अमावस्या

महाकुंभ महोत्सव अपने चरम पर है। फिर चाहे वहां हो रहे विभिन्न क्रियाकलापों की बात हो, वहां इकट्ठा भीड़ की बात हो, वहां हो रहे लोगों के लाभ की बात हो या आने वाले अमृत स्नान की बात हो... 

प्रयागराज अपने अलग ही स्वरूप में नजर आ रहा है। 

चलिए, जब बात चल ही रही है, तो आपको आज के दूसरे स्नान के विषय में सम्पूर्ण जानकारी दे देते हैं। 

अमृत स्नान - मौनी अमावस्या 


कब होगा दूसरा स्नान? क्या है स्नान के शुभ मुहूर्त? मौनी अमावस्या में मौन रहने का कारण? क्या खासियत है इस दिन डुबकी लगाने में? क्या हैं मौनी अमावस्या व्रत के नियम?


1) महाकुंभ 2025 - दूसरा शाही स्नान :

महाकुंभ 2025 का दूसरा शाही स्नान 29 जनवरी 2025 मौनी अमावस्या के दिन होगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 28 जनवरी की शाम 7:35 बजे शुरू होकर 29 जनवरी की शाम 6:05 बजे खत्म होगी। ऐसे में उदया तिथि के हिसाब से स्नान 29 जनवरी को किया जाएगा। इस दिन संगम पर भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। आपको बता दें कि इसके बाद तीसरा शाही स्नान 3 फरवरी 2025 को बसंत पंचमी के दिन किया जाएगा।


2) स्नान-दान का शुभ मुहूर्त :

हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या के दिन स्नान-दान का बेहद महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार, 29 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:25 बजे से 6:19 बजे तक रहेगा। ऐसे में इस दौरान स्नान और दान को बेहद शुभ माना गया है। अगर इस समय में स्नान नहीं कर पाएं, तो सूर्योदय से सूर्यास्त तक कभी भी स्नान और दान कर सकते हैं।


3) मौन रखने का कारण :

मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखने का विधान है। साधक इस दिन मौन रहकर व्रत करते हैं, जो मुख्यतः आत्मसंयम और मानसिक शांति के लिए किया जाता है। यह व्रत साधु-संतों के द्वारा भी किया जाता है, क्योंकि मौन रहकर मन को नियंत्रित करना और ध्यान में एकाग्रता लाना सरल हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार, मौन व्रत से व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक उन्नति होती है। इसके माध्यम से वाणी की शुद्धता और मोक्ष की प्राप्ति संभव है। यह व्रत आत्मिक शांति और साधना में गहराई लाने का एक सशक्त माध्यम है। 

और साधु-संत लोग की महान उपलब्धि होती है, वाणी की शुद्धता, आत्मिक शांति और साधना में गहराई लाने, तथा उनकी साधना तब पूर्ण समझी जाती है, जब मोक्ष की प्राप्ति संभव हो। तो बस यह व्रत एक सशक्त माध्यम है, उसी महान उपलब्धि का...


4) डुबकी लगाना क्यों खास :

मौनी अमावस्या का दिन खास इसलिए है, क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि इस दिन पितृ धरती पर आते हैं। अगर इस दिन संगम में स्नान के साथ पितरों का तर्पण और दान किया जाए, तो उनकी आत्मा तृप्त होती है और उन्हें मोक्ष मिलता है। इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और परिवार पर पितरों का आशीर्वाद बना रहता है। सिर्फ पितरों के लिए ही नहीं, मौनी अमावस्या का स्नान हर व्यक्ति के लिए खास माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन गंगा में डुबकी लगाने से सारे पाप धुल जाते हैं। यह दिन आत्मिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। 


मौनी अमावस्या का व्रत हर वर्ष माघ मास की अमावस्या तिथि पर रखा जाता है। इसे माघी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2025 में यह व्रत 29 जनवरी को रखा जाएगा, और इसी दिन महाकुंभ मेले में दूसरा अमृत स्नान भी होगा। धार्मिक ग्रंथों में अमावस्या तिथि को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह दिन गंगा स्नान, दान और पितरों की पूजा के लिए समर्पित होता है। प्रत्येक अमावस्या का अपना विशेष महत्व होता है, लेकिन मौनी अमावस्या को इनमें सबसे खास माना गया है। इस दिन मौन रहकर व्रत करने की परंपरा है। इसे जप, तप और साधना के लिए सबसे उपयुक्त समय माना गया है।


5) मौनी अमावस्या व्रत के नियम :

  • इस दिन प्रातःकाल गंगा स्नान करना आवश्यक है। यदि गंगा स्नान संभव न हो, तो पवित्र नदी के जल से स्नान करने का प्रयास करें।
  • पूरे दिन मौन रहकर ध्यान और जप करें।
  • व्रत के दौरान किसी प्रकार का बोलना वर्जित है। तिथि समाप्त होने के बाद व्रत पूर्ण करें।
  • व्रत खोलने से पहले भगवान राम या अन्य इष्ट देव का नाम अवश्य लें।

तो अब आपको पता चल गया होगा कि मौनी अमावस्या क्यों इतनी विशेष होती है और क्यों मौनी अमावस्या पर किए जाने वाला अमृत स्नान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

Tuesday, 31 December 2024

Article : 2024 Sports Rewind

2024 साल का आज अंतिम दिन है। इस अंतिम दिन पर इस साल को अनेकानेक धन्यवाद देने, और इसकी उपलब्धियों को गिनने का दिन है।

2024 Sports Rewind



यह साल खेल जगत के लिए स्वर्णिम साल के रूप में आया था, जिसमें एक क्रिकेट विश्व कप, आधा दर्जन ओलंपिक पदक और दो शतरंज विश्व चैंपियन शामिल रहे हैं।

वर्ष 2024 ने भारतीय खेल प्रशंसकों को जश्न मनाने के कई मौके दिए जिससे खेलों की दुनिया में भारत का भविष्य उज्जवल नजर आता है।

यूँ तो वर्ष 2024 ने भारतीय खेलों में कुछ यादगार पल जोड़े लेकिन जिन तारीखों को याद किया जाएगा उनमें 29 जून, 30 जुलाई, 12 दिसंबर और 28 दिसंबर शामिल हैं।

भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम 2036 ओलंपिक की मेज़बानी के इरादे का औपचारिक आशय पत्र सौंपना रहा। यह एक ऐसा कदम है जिसमें देश के खेल परिदृश्य को बदलने की क्षमता है।


(1) Cricket :

ODI World Cup 2023 के match में, रोहित शर्मा की अगुवाई वाली भारतीय क्रिकेट टीम final तक तो पहुंची, पर जीत हासिल कर के Cup अपने हाथ में न उठा सकी। सब ओर निराशा के बादल छा गए थे।

पर फिर आया साल 2024, जो अपने साथ T20 World Cup लेकर आया...

बारबाडोस में 29 जून की उमस भरी शाम थी, एक बार फिर रोहित शर्मा की अगुवाई वाली भारतीय क्रिकेट टीम T20 World Cup के final में शामिल थी।

Match अपने रोमांचक मोड़ पर था, नहीं सूझ रहा था कि अगले पल क्या होने वाला है, तभी हार्दिक पांड्या के bowling के आखिरी spell ने कमाल कर दिया और एक दशक से भी अधिक समय तक चले इंतजार को खत्म करते हुए T20 World Cup को जीत लिया। यह देश के लिए वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण उपलब्धि थी।


(2) Olympics :

भारतीय क्रिकेट टीम की सफलता के एक महीने बाद, 30 जुलाई को, पिस्टल निशानेबाज – मनु भाकर – आज़ादी के बाद एक ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनी। इस ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों ने 6 bronze और 1 silver medal जीता।


(3) Paralympics :

Paralympics में 7 gold, 9 silver, 13 bronze: total 29 medal मिले। Ranking वाले 79 देशों में से भारत 18वें स्थान पर था। इस बार के Paralympic खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से भारत को गौरवान्वित किया।


(4) Chess :

पिछले चार महीनों में chessboard भारत के लिए खुशहाली का मैदान बन गया है, जहां open & women, दोनों teams ने सितंबर में पहली बार Olympiad में gold medal जीते हैं, वहीं डी गुकेश और कोनेरू हम्पी ने दिसंबर में World Champion बन के नई ऊंचाइयों को छुआ।

गुकेश 12 दिसंबर को 18 साल की उम्र में चीन की डिंग लिरेन को हराकर सबसे कम उम्र के विश्व चैंपियन बने, साथ ही 37 वर्षीय हम्पी ने 28 दिसंबर को अपने career में दूसरी बार महिलाओं का rapid Chess world Cup जीता। 

वर्ष 2024 को भारतीय खेलों में T20 Cricket World Cup (Men's), Olympics, Paralympics, Chess Olympiad, FIDE World Rapid Championship (Women's section) and FIDE World Championship (Open section) में सफलता के लिए याद किया जाएगा।

भारत आगे आने वाले सालों में भी ऐसे ही विजई परचम लहराए और विश्व विजयी कहलाए।

जय हिन्द, जय भारत 🇮🇳

Thursday, 28 November 2024

Article : Dr*gged Chocolate

आज एक ऐसे topic पर लिख रहे हैं, जो कि बहुत तेजी से school and college में फ़ैल रहा है, जिसके victim बच्चे बनते जा रहे हैं। और वो भी इस तरह से कि उन्हें पता भी नहीं चल रहा है। 

हमारी बातों का मतलब आप को समझ नहीं आ रहा होगा।

Actually हम बात कर रहे हैं chocolates की...

Dr*gged Chocolate 


आज कल हर दूसरे school and college में dr*gs बेचते और खरीदते हुए बच्चे पकड़े जा रहे हैं।

Chocolates लोगों को इतना अधिक temptation देती है कि बच्चे तो क्या बड़े बड़े लोग भी अपने मुंह में आते पानी को रोक नहीं पाते हैं।

फिर बच्चों की तो कमजोरी होती हैं chocolate।

बस इसी बात का फ़ायदा उठा रहे हैं, dr*gs dealing वाले।

आज कल market में dr*gs chocolate, readily available हैं। और इनका main target होते हैं, मासूम बच्चे और youths।

इसलिए बहुत से schools and colleges में आजकल इनका racket बहुत strong हो गया।

पहले इन्होंने dr*gs chocolate, केवल metro cities के schools and colleges में पहुंचाई थी। पर अब तो हर छोटे-बड़े शहरों के schools and colleges में dr*gs chocolate readily available रह रही हैं।

इन dr*gs dealers ने दो बातों को main target किया है, एक तो chocolate और दूसरा colourful and shiny wrapping।

Chocolate तो tempting होती है, फिर colourful and shiny wrapping और ज्यादा attract करती है।

बस इन्हीं chocolates के through, यह schools and colleges में आकर बच्चों में dr*gs की लत लगवा रहे हैं।

यह dr*gs' dealers, इतने शातिर होते हैं कि यह dr*gs dealing का काम भी वहीं के बच्चों से कराते हैं। 

मतलब जो खरीद रहे हैं, वो शिकार हो रहे हैं और जो बेच रहे हैं, वो पहले ही शिकार हो चुके हैं। क्योंकि उनको पहले dr*gs की लत लगवाई जाती है, फिर उनसे dr*gs बेचने को कहा जाता है।

ऐसे में अगर बेचने वाले पकड़े जाते हैं, तब भी dr*gs dealers का सिर्फ माल पकड़े जाने का नुक़सान होता है। 

न वो पकड़ में आते हैं, न उन्हें जेल होती है और तो और उनके image पर भी कोई आंच नहीं आती है।

बस वो बच्चे, जो dr*gs बेचते पकड़े जाते हैं, उन्हें school and college से restrict कर दिया जाता है, उनको black list कर दिया जाता है, जिससे उनका future चौपट हो जाता है।

पर अब सवाल यह उठता है कि इससे बचा कैसे जाए? हम अपने बच्चों को सचेत कैसे करें? क्योंकि हर समय तो हम उनके साथ नहीं रह सकते हैं ...

तो उसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है...

कुछ भी खाने-पीने की चीजें, unknown लोगों से न लें, चाहे वो कितनी भी tempting क्यों न हो।

चाहे free में ही क्यों न मिल रही हो, वैसे इस बात का‌ ध्यान हमेशा रखिए कि free में कुछ नहीं मिलता है।

बल्कि अगर सोचा जाए तो free में मिलने वाली चीज कितनी खतरनाक है, यह बहुत बार नहीं पता चलता है, या तब पता चलता है, जब situation आपके हाथ से निकल चुकी होती है। 

तो free के फेर से जितना हो सकता है, बचें।

कभी भी खाने-पीने की चीजें लें, किसी unknown source (चाहे इंसान या जगह) से नहीं , हमेशा renowned company का लें। जिसके विषय में आप सब जानते हैं।

जब भी खाने-पीने की कोई भी चीज लें तो कुछ चीजें जरूर से notice करें। पहला उसकी expiry date, दूसरा उसके ingredients।

Expiry date, इसलिए क्योंकि expiry date निकल जाने के बाद, खाने-पीने की चीजें health के point of view से बहुत harmful हो जाती हैं।

और ingredients जानना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि हो सकता है कि उसमें dr*gs न हो, पर कोई ऐसी चीज हो, जो particularly आपके लिए harmful हो। तो ध्यान रखिएगा कि product की expiry date and ingredients ज़रूर से देखें।

कोई भी company का product हो, company name, logo and ingredients उसके wrapper पर जरूर लिखा होगा।

जबकि dr*gs chocolate के wrapper mostly colourful and shiny होंगे। उसमें किसी भी company का  name‌ and logo नहीं लिखा होगा और, सबसे बड़ी बात उसमें ingredients तो बिल्कुल नहीं लिखे होंगे।

In short, अगर safe रहना चाहते हैं तो careful, informed and attentive रहें, क्योंकि जितनी तेजी से पूरी दुनिया में crimes बढ़ते जा रहे हैं। Safe रहने का, इसके आलावा कोई विकल्प नहीं है।

साथ ही अपने बच्चों के साथ भी इन topics में बात करते रहें, जिससे वो भी current situation से aware रहें और safe रह सकें। 

Be careful, be attentive, be informed and be safe...

Thursday, 21 November 2024

Article: बढ़ते आवारा कुत्ते, कितने खतरनाक

पहले कभी हुआ करती थी दिन की शुरुआत मुर्गे की बांग या चिड़ियों की चहचहाहट के साथ... 

पर अब तो दिन की शुरुआत आवारा कुत्तों के भौंकने और लड़ने की आवाज से ही होती है...

ऐसा इसलिए क्योंकि, आज कल लोगों में आवारा जानवरों को लेकर बहुत अधिक दया और प्रेम भाव आ गया है, जिसके चलते आवारा कुत्ते, बिल्लियों की संख्या बहुत अधिक बढ़ती जा रही है।

जिनके अंदर यह भावना बहुत बलवती है, उन्हें मेरा इस topic पर article लिखना बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा होगा।

लेकिन इस article को लिखने की वजह है एक छोटी बच्ची के संग हुआ भयानक हादसा..

इस बात को बिना किसी भूमिका में बांधे हुए इस सच्ची घटना का विवरण दे रहे हैं।

यह एक ऐसी घटना है, जो दिल को दहला देती है और हमें यह सोचने पर मजबूर कर देती है, क्या हमारे बच्चे safe हैं? या ऐसी situation में क्या करें?

बढ़ते आवारा कुत्ते, कितने खतरनाक  

बात है शाम की, लगभग 5- 5 :30 बजे का समय था। सड़क पर अच्छी-खासी चहल-पहल थी।

मेरा बेटा रोज़ शाम को cycling करने के लिए जाता है। तो वो उसके लिए निकला हुआ था।

उसने देखा, लगभग उसके बराबर (करीब 10-12 साल) की एक लड़की सड़क पर पैदल, अपने घर की ओर जा रही थी। 

तभी एक आवारा कुत्ता उसे परेशान करने लगा।

लड़की, martial art जानती थी। उसने अपने पैर को हवा में ज़ोर से लहराया और कुत्ते के नाक पर ज़ोर से एक kick मारी।

कुत्ता इससे पूरी तरह बिलबिला गया, पर उसने भागने के बजाए ज़ोर-ज़ोर से भौंकना शुरू कर दिया और देखते ही देखते 6-8 आवारा कुत्तों का समूह आ गया। सबने लड़की को घेर लिया।

इतने कुत्तों को देखकर लड़की घबरा गई और साथ ही मेरा बेटा भी...

वो सभी कुत्ते खतरनाक रूप से लड़की की ओर आगे बढ़ने लगे। अब लड़की को कुछ सूझ नहीं रहा था कि वो क्या करें?

मेरे बेटे ने वहां से गुजर रहे लोगों से उसकी मदद करने को कहा, पर कोई भी ऐसा नहीं था, जो उस लड़की की मदद करता...

कुछ बेपरवाह और लापरवाह से वहां से निकल गये और कुछ कुत्तों के भयानक रूप को देखकर डर गये।

बेटा पास के थाने में जाकर मदद के लिए बोलने गया, पर जब तक वो लोग उस लड़की को बचाने पहुंचते, देर हो चुकी थी, क्योंकि कुत्ते उस लड़की को बुरी तरह से घायल करके जा चुके थे।

उस लड़की को तुरंत hospital ले जाया गया, पर अब वो कैसी है? नहीं पता...

पर ऐसा दर्दनाक हादसा, जो उसके साथ हुआ, वो किसी भी बच्चे, बुजुर्ग, यहां तक किसी भी जवान मनुष्य के साथ भी हो सकता है।

और इसके जिम्मेदार कौन होंगे?

वो सभी, जो आवारा कुत्ते-बिल्लियों को बेवजह बढ़ावा दे रहे हैं। इनकी बढ़ती संख्या हद से ज्यादा खतरनाक रूप ले रही है...

सोचिए जो, कुत्ते-बिल्ली पालतू होते हैं, वो साफ-सुथरे होते हैं, उनके vaccination होता है और सबसे बड़ी बात, वो नियंत्रण में रहते हैं, क्योंकि वो हमेशा chain से बंधे हुए रहते हैं। जबकि आवारा कुत्ते-बिल्लियां इसके ठीक विपरीत होते हैं।

आखिर क्यों, बेवजह बढ़ावा देना, ऐसे अनियंत्रित ख़तरे को? 

और अगर सच में आपको आवारा कुत्ते बिल्लियों से इतना स्नेह है तो लीजिए उनकी जिम्मेदारी, पर पूरी तरह से, उनकी साफ-सफाई, vaccination और नियंत्रण में रखने तक, सब कुछ...

जिम्मेदारी उठाइये कि वो व्यर्थ में लोगों को परेशान न करें। किसी को यूं न घेरे, cycle, scooter, bike, car से जा रहे लोगों को खदेड़कर, उन पर बिना वजह भौंक कर उन्हें परेशान न करे, उनके accident होने की वजह न बने...

उनके चक्कर में हम बच्चों और बुजुर्गों को unsafe नहीं कर सकते हैं।

अगर ऐसा नहीं हो सकता है तो सरकार को अपील करें कि वो आवारा कुत्तों की बढ़ती हुई संख्या पर control करें, उन्हें पकड़ कर लें जाएं और बढ़ते हुए खतरनाक रूप को संभालें।

साथ ही आपको बता दें कि अगर कोई कुत्तों से घिर जाए तो उसे क्या करना चाहिए...

 

बच्चों से कहें कि वो अपने बचाव के लिए तेजी से बिल्कुल न भागें, क्योंकि सभी तरह के जानवर, किसी के भी बहुत तेजी से उनके सामने से भागने को ग़लत ही समझते हैं और न काट रहे हों तो भी काट लेते हैं।

अपने हाथ या पैर से उन्हें न मारें, वरना वो जरूर से काट लेगा। 

उसके बजाय डंडे, पत्थर या belt से मारने से बचाव की उम्मीद बढ़ जाती है 

अगर आप के पास रोशनी का कोई साधन है तो उसकी आंखों पर रोशनी डालने से भी वो भाग जाएगा।

धैर्य से, बिना डरे, शांत खड़े रहने से बचने की संभावना बढ़ जाती है। 

जहां बहुत ज्यादा कुत्ते हों, उस जगह पर जाना avoid कीजिए। क्योंकि आवारा जानवरों का कोई भरोसा नहीं होता है, वो कभी भी बहुत अधिक furious हो जाते हैं। 

आवारा जानवरों पर दया और प्रेम भाव रखिए, पर वहां तक कि उसे व्यर्थ में परेशान न करे, अकारण मारे नहीं, यदि वो घायल हैं तो उन्हें उचित लोगों तक पहुंचा दें। वो भूखे हैं तो उन्हें भोजन दे दीजिए।

पर उनकी बढ़ती हुई संख्या को बढ़ावा देना, municipality वाले पकड़ने आएं तो उनके काम में बाधा उत्पन्न करना, जैसे काम न करें। क्योंकि आवारा जानवरों का society में अनावश्यक रूप से बढ़ना, बच्चों से लेकर बुजुर्गो तक सबके लिए घातक सिद्ध होता है।

Friday, 8 November 2024

Article : शारदा, तुझे प्रणाम

आज छठ महापर्व, पारण के साथ पूर्ण हुआ। छठी मैया की असीम कृपा हम सब पर सदैव बनी रहे 🙏🏻

हर पर्व खुशियां और सौहार्द लेकर आता है। पर कभी-कभी ऐसा भी होता है कि मनुष्य यह सोचने पर मजबूर हो जाता है, कि ऐसा क्यों हुआ?

ऐसा ही कुछ छठ पूजा के पहले दिन हुआ...

शारदा, तुझे प्रणाम 


छठ महापर्व के पहले दिन भारतीय लोक संगीत गायिका और बिहार की कोकिला कही जाने वाली शारदा सिन्हा के निधन ने देशभर में लोगों को झकझोर कर रख दिया।

दरअसल, मंगलवार की देर रात दिल्ली एम्स में 72 साल की शारदा सिन्हा ने अंतिम सांस ली है। शारदा सिन्हा जी के गाये गए छठ गीत अभी हर तरफ बज रहे हैं, लेकिन लोगों में मायूसी सी छाई हुई है।

शारदा सिन्हा को उनके संगीत योगदान के लिए कई पुरस्कार मिले, जिनमें 1991 में पद्मश्री, 2000 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2006 में राष्ट्रीय अहिल्या देवी अवार्ड, 2015 में बिहार सरकार पुरस्कार, और 2018 में पद्मभूषण शामिल हैं।

शारदा सिन्हा ने करीब 50 साल पहले यानी साल 1974 में पहला भोजपुरी गाना गाया था। फिर साल 1978 में उन्होंने छठ गीत ‘उग हो सुरुज देव’ गाया। इस गाने ने रिकॉर्ड बनाया और यहीं से शारदा सिन्हा और छठ पर्व एक-दूसरे के पूरक हो गए। करीब 46 साल पहले गाए इस गाने को आज भी छठ घाटों पर सुना जा सकता है।

1990 में शारदा सिन्हा ने बॉलीवुड फिल्म 'मैंने प्यार किया' में 'कहे तो से सजना, ये तोहरी सजनिया'... गीत गाया, जो जबरदस्त hit हुआ। इस गीत ने उन्हें film industry में एक नया मुकाम दिलाया और तब से उनकी पहचान केवल लोक संगीत के गायन तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे bollywood में भी एक प्रमुख गायिका बन गईं।

"मैंने प्यार किया" में सलमान खान और भाग्यश्री पर फिल्माए इस गीत ने दर्शकों से अपार लोकप्रियता हासिल की।

इसके बाद हम आपके हैं कौन का "बाबुल जो तुमने सिखाया, जो तुमसे है पाया, सजन घर ले चली"...

Gang of wasseypur का "तार बिजली से पतले हमारे पिया"...

जैसे hit हिंदी फिल्मों में गाने और अनेकानेक hit भोजपुरी गीत गाए, जिसमें कुछ ऐसे super hit गीत भी हैं, जिनके बिना महापर्व छठ अधूरा लगता है, जैसे,

हे छठी मईया...

छठ के बरतिया... 

पहिले पहिल बानी कईले छठी मैया वरत तोहार...

ऐसे ही और भी बहुत से गीत हैं...

इसके साथ ही, शारदा जी ने लोक संगीत की समृद्ध परंपरा को कायम रखते हुए अपनी गायकी जारी रखी, लेकिन हमेशा इस बात का ध्यान रखा कि वे कभी भी द्विअर्थी गीत न गाएं। उनका संगीत शुद्ध और भावनात्मक रूप से प्रामाणिक रहता था, जो उनके शास्त्रीय और लोक धारा के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

शारदा सिन्हा की आवाज से बंधता है छठ का समां, वो आवाज़ आज भी गूंज रही है, शारदा जी को अमरत्व प्रदान करती हुई और हमेशा छठ पर्व पर उनकी याद के रूप में सुनी जाती रहेगी...

छठी मैया की भक्त, उनके श्री चरणों में, उनके ही दिनों में समर्पित हो गई, मां अपनी भक्त पर कृपा करें 🙏🏻

इसके साथ ही स्वर कोकिला शारदा जी को सादर प्रणाम...

Tuesday, 15 October 2024

Article : सही फैसला

सही फैसला 



भारत के अनमोल रत्न, रतन नवल टाटा जी का निधन हो गया, जो कि एक सफल उद्योगपति, महादानी, पथ-प्रदर्शक, और महान देशभक्त थे।

हमने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए एक article लिखा था 'अनमोल रतन' 

जिसमें उनके कथनों का भी जिक्र किया था या यूं कहें कि उनके जीवन मूल्यों का जिक्र किया था। यह उनके वो जीवन मूल्य थे, जो उन्होंने अपने जीवन में साक्षात जिए थे।

उन्हीं में से एक था 👇🏻

"सही फैसले लेने में मैं विश्वास नहीं करता"

रतन टाटा जी का कहना था कि, मैं सही फैसले लेने में विश्वास नहीं करता। मैं फैसले लेता हूं और फिर उन्हें सही साबित कर देता हूँ...

उनके इस कथन ने हमारे दिल को बहुत गहरे तक छूआ। यह एक ऐसा कथन है कि, जिस किसी ने इसे अपना लिया, वो सफल अवश्य होगा...

आइए उनके इस कथन को उनकी करनी के दृष्टांत से समझते हैं।

बात तब की है, जब Tata ने अपनी पहली Car, Tata Indica launch की थी और 1998 में बनी, यह पहली स्वदेशी कार भी थी।

But रतन टाटा जी का car manufacturer का plan बहुत successful नहीं रहा और TATA की car नहीं चली, रतन टाटा ने सोचा कि car बनाने वाली units को sell कर देते हैं। अमेरिका में Ford company संग बात आगे बढ़ी...

ज़ब बात final होनी थी तो, Ford motor के मालिक Bill Ford, रतन टाटा जी से बोले- ये बचपना करने की क्या जरूरत थी, कि कार बनाने चल पड़े.. (यानि एहसान सा दिखाया Bill Ford ने रतन टाटा पर, मानो वो टाटा की car units खरीदकर कोई एहसान कर रहे हैं)

रतन टाटा वापिस भारत आए और टीम को बोले- हम unit नहीं बेचेंगे बल्कि सुधार करेंगे खुद में....! 

रतन टाटा, अपने अपमान से झल्लाए नहीं, बल्कि उन्होंने अपने unit में सुधार करवाना शुरू कर दिया और 2008-09 आते-आते TATA ने अपने पैर जमा दिए भारतीय कार बाजार में..

फिर एक दिन वो भी आया कि उसी Ford की Land Rover and Jaguar, टाटा ने खरीद ली। आज भारत में Ford नहीं है, उसका बहुत सा सौदा Tata के पास है..!

तो रतन टाटा जी के जीवन के उस कथन से हमें समझ लेना चाहिए कि दौर बदल जाया करते हैं।

बस हमारे प्रयास, हमारी कमियों में सुधार कर उन्हें दूर करने के होने चाहिए..!

एक बार ऐसे भी सोचकर देखिए, जैसे रतन जी ने सोचा, सफलता की सीढ़ियां अपने आप, आपके कदमों के नीचे होगी...


यूं ही नहीं कोई,

सबके दिलों पर,

छा जाता है।

यूं ही नहीं कोई,

सबको अपना,

बनाता है।

सदियों में कोई,

एक ही आता है,

फरिश्ता ऐसा।

जो अपनी जिंदगी,

के बाद भी,

सबको बहुत याद,

आता हो।।

Wednesday, 9 October 2024

Article: दुर्गाष्टमी किस दिन और क्यों?

शारदीय नवरात्रों के दिन चल रहे हैं, हर ओर माता रानी की पूजा अर्चना, भजन आरती इत्यादि चल रहे हैं। सर्वत्र माता रानी का जयकारा गूंज रहा है, माँ अपने भक्तों को भर भरकर आशीष प्रदान कर रहीं हैं।

आज नवरात्रों की षष्ठी है, और आज से ही दुर्गापूजा का पांच-दिवसीय समारोह आरंभ हो जाता है। इस दिन से दुर्गा माता की प्रतिमा का पट खुलता है, जिसके बाद ही श्रद्धालु दुर्गा माता की प्रतिमा का दर्शन कर पाते हैं।

शारदीय नवरात्रों में दुर्गाष्टमी का विशेष महत्व होता है, नवरात्रों में अष्टमी के दिन माता रानी ने दुर्गा माँ का रूप धारण किया था। दुर्गाष्टमी में माता रानी ने दुष्ट भैंस राक्षस महिषासुर का वध किया था, जिसका जश्न मनाया जाता है। 

दुर्गा माँ के स्वरूप की कथा 

किंवदंती है कि भगवान ब्रह्मा जी के द्वारा दिए गए वरदान के कारण, महिषासुर को केवल एक महिला द्वारा ही हराया जा सकता था। जब भगवान इंद्र, युद्ध के मैदान में पराजित हुए, तो वह त्रिदेवों की शरण में आए।

संसार के कल्याण हेतु बह्मा, विष्णु और शिव ने अपनी-अपनी शक्तियां प्रदान कर दुर्गा माँ का निर्माण किया, जिसमें उनके शरीर के प्रत्येक भाग को पुरुष देवताओं की शक्तियों द्वारा सशक्त किया था। दुर्गा माता ने त्रिशूल द्वारा महिषासुर का वध किया था। 

दुर्गाष्टमी, ईश्वर के स्त्री रूप के सशक्तिकरण का प्रतीक है। जहांँ ईश्वर ने यह  चरितार्थ किया है कि यदि स्त्री अपनी सामर्थ्य को प्रदर्शित करे तो वह किसी भी मामले में पुरुष से कम नहीं है। 

दुर्गाष्टमी व्रत का महत्व

शास्त्रों में दुर्गाष्टमी व्रत के महत्व को विस्तार से बताया है। बता दें कि नवरात्रि के नौ दिनों में अष्टमी व्रत का सबसे अधिक महत्व होता है।

ऐसा इसलिए क्योंकि इस दिन मां भगवती एवं कन्याओं की उपासना की जाती है। इस दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है।

 धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत का पालन व कन्या पूजन करने से से जीवन में सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

साथ ही सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं, इस व्रत का पालन करने से कई प्रकार के ग्रह दोष भी दूर होते हैं।

इस वर्ष लोगों के मन में बहुत उलझन चल रही है कि दुर्गाष्टमी किस दिन है और उसका क्या कारण है? इसी उलझन को सुलझाने का प्रयास है आज का यह article...

दुर्गाष्टमी किस दिन और क्यों?


दुर्गाष्टमी व्रत किस दिन रखा जाए या जिन्हें अष्टमी में कन्या पूजन करना है, वो किस दिन करें, 10 या 11 अक्टूबर को?

और क्या कारण है 10 और 11 October दो दिन अष्टमी का योग है?

वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन महा दुर्गा अष्टमी व्रत का पालन किया जाता है।

सनातन धर्म में मां दुर्गा की उपासना के लिए दुर्गा अष्टमी व्रत को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। शारदीय नवरात्रि में दुर्गाष्टमी व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन मां भगवती की उपासना की जाती है।

महा अष्टमी के दिन महा स्नान एवं षोडशोपचार पूजा की जाती है। मान्यता है कि दुर्गाष्टमी के दिन व्रत का पालन करने से व्यक्ति को सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है व जीवन में आ रही समस्याएं दूर हो जाती है।

तिथि और मुहूर्त 

वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का शुभारंभ 10 अक्टूबर दोपहर 12:35 पर होगा और इस तिथि का समापन 11 अक्टूबर दोपहर 12:05 पर हो जाएगा।

इस वर्ष सप्तमी व्रत का पालन 10 अक्टूबर के दिन किया जाएगा।और सप्तमी व अष्टमी व्रत एक साथ नहीं रखे जाते हैं,  क्योंकि सप्तमी तिथि से युक्त अष्टमी तिथि , नित्य शोक व संताप (कष्ट) को देने  वाली होती है व अष्टमी तिथि से युक्त नवमी तिथि हर तरह से शुभ फलदाई होती है।

निर्णय सिंधु में पृष्ठ 375 के अनुसार उदया अष्टमी में महाष्टमी व्रत व महानवमी व्रत, कन्या पूजन, हवन इत्यादि का कार्य 11 October शुक्रवार को करना शास्त्र सम्मत है।

आशा है अब आप को निर्णय लेने में सुविधा हो जाएगी।

बाकी नवरात्रि में तो नौ दिन माता रानी के हैं, हर दिन शुभ है, वो हर दिन अपने भक्तों को भर भरकर आशीष प्रदान करतीं हैं 🙏🏻 

बोलो सांचे दरबार की जय 🚩🙏🏻

Tuesday, 8 October 2024

Article : जलते देश

जलते देश 



आज कल, कुछ देश ऐसे जल रहें कि धीरे-धीरे उनका अस्तित्व ही खत्म होता जा रहा है। 

फिर चाहे बात करें, अफगानिस्तान पर तालिबानी हमले की, रुस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध की, या इजराइल- फिलस्तीन, फिर इजराइल- हमास या फिर अब इजराइल और ईरान के युद्ध की...एक के बाद एक देश जल रहें हैं। और इनके साथ ही, कुछ देश ऐसे भी हैं, जो इन्हें युद्ध के सामान देकर उनके लिए सहायक बन रहे हैं, युद्ध के भागीदार बन रहे हैं।

मतलब कहीं न कहीं इस प्रचंड तांडव में एक-एक करके सभी देश शामिल हो रहे हैं और कब यह युद्ध, विश्व युद्ध में बदल जाएगा, ईश्वर ही जाने....

इन हो रहे युद्ध में, जो नुकसान हो रहा है, प्रत्यक्ष रूप से, उस देश की जनता का, वहां की सम्पदा का, और अप्रत्यक्ष रूप से बाकी सभी देशों का... 

देश कोई भी जीते, पर हानि जीतने और हारने वाले, दोनों देशों की होती है। 

आज कल के युद्ध में मिसाइल तो ऐसे चलती है, मानो आतिशबाज़ी हो रही हों। 

हर तरफ़ से भय से चीखने-चिल्लाने वाली आवाजें आती रहती है, सिसकियां और रुदन की आवाजें भी हर ओर गूंजती रह रही है। 

ऐसे समय में जब हम अपने भारत को देखते हैं, तो पाते हैं कि भारत में न केवल शांति बरकरार हैं, बल्कि देश विकास की ओर अग्रसर है। देश GDP की race में आगे ही बढ़ता जा रहा है और वो दिन दूर नहीं, जब भारत number 1 position पर भी पहुंच जाएगा।

और ऐसा नहीं है कि केवल GDP में ही अग्रसर है, बल्कि खेलकूद में भी कमाल कर रहा है। फिर चाहे बात cricket की हो, Olympic games की हो या Chess की। हर तरफ़ Indian players सफलता हासिल कर रहे हैं।

अगर infrastructure की बात करें तो, road हो या hospital, colleges हो या company setups आदि, हर field में भारत पिछले कुछ सालों में बहुत तेजी से समृद्ध हो रहा है।

देश में education system में भी फेरबदल की जा रही है, जिससे मेधावी भारतीय छात्र और अधिक capable बने, और अधिक focus हों, जिससे उनका future और अधिक secure हो सके और देश और अधिक सुदृढ़...

Morden India बहुत तेजी से बदल रहा है, यह अधिक secure, अधिक सजग और सचेत हो चुका है। यह जितना तेजी से tecnical बन रहा है, उतनी ही तेज़ी से पुनः संस्कृति और संस्कार की ओर भी केन्द्रित हो रहा है। 

बहुत मुश्किल से भारत अपने सनातन स्वरूप में बदल रहा है, जहां वो सबसे सशक्त, सबसे समृद्ध और सबसे खुशहाल था। ईश्वर से प्रार्थना है कि हमारे भारत को किसी की नज़र न लगे। 

जैसा भारत, अब बनता जा रहा है, वो वैसे ही आगे भी बढ़ता हुए और सफलताओं के शिखर पर पहुंचे।

क्या आप भी यही चाहते हैं?

तो उसके लिए सरकार के साथ ही हम सब को भी प्रयास करना चाहिए और उचित सरकार को समर्थन और सहयोग प्रदान करना चाहिए।

साथ ही कामना है कि बाकी देश भी यूं युद्ध की आग में जल कर तबाह और बर्बाद न हो। क्योंकि यह चिर सत्य है कि कहीं भी युद्ध की आग जल रही हो, उसकी तपन से झुलसेंगे सभी... आज उनका नम्बर है, कल किसी और का भी नंबर लग सकता है। और सबसे बड़ी बात कि युद्ध की आग में और कोई झुलसे न झुलसे, मरेंगे मानव‌ ही और नष्ट होगी मानवता ही...

और किसी भी तरह की जान, मान की हानि क्यों हो? हर जगह सुख शान्ति और आनन्द भी तो रह ही सकता है...

हे ईश्वर, हमारा भारत सदैव सुरक्षित और सुदृढ़ रहे, साथ ही सम्पूर्ण विश्व भी...

जय हिन्द जय भारत 🇮🇳 💐 🙏🏻 

Tuesday, 17 September 2024

Article : Popularity Ganpati Bappa ki

Popularity गणपति बप्पा की..

यूं तो भारत अनेकानेक देवी-देवताओं की पवित्र पावन भूमि है, पर फिर भी अलग-अलग states में अलग-अलग देवी-देवताओं की मान्यता है।

जैसे बंगाल व पंजाब में मातारानी की, महाराष्ट्र में गणपति बप्पा की, south में, भगवान विष्णुजी, लक्ष्मी माता व मुरुगन जी की, और north में भगवान शिव, भगवान श्री कृष्ण, भगवान श्री राम और हनुमान जी को अधिक मानते हैं।

हालांकि, अब तो सभी जगह, सभी states के लोग रहते हैं, इसलिए लगभग पूरे भारत में सभी देवी-देवताओं के आगमन और उनके विसर्जन की धूम रहती है।

लेकिन जब आज अनंत चतुर्दशी है तो गणेश जी पर ही पूरा article अर्पित हो, इतना तो बनता है। 

वैसे भी महादेव व माता पार्वती जी के लाडले पुत्र हैं, तो सभी देवी-देवताओं के लाडेश्वर भी ठहरे।

तो गणेश जी को दंडवत प्रणाम के साथ आगे का article बढ़ाते हैं...

हाँ तो, हुआ ऐसा कि हमारी लाडली बिटिया रानी, ज़रा बड़ी हुई तो, उन्हें दो देवताओं ने बड़ा आकर्षित किया। 

पहले तो कृष्ण जी और दूसरे गणेश जी...

तो बस madam जी तो थीं छोटी, तो खुद तो कुछ कर नहीं सकतीं थीं, पर हुक्म पूरा चला लेती थीं।

तो बस जन्माष्टमी पर्व पर मम्मी के द्वारा सिखाई दुनिया भर की चीज़ का भोग लगाते थे पर बिट्टो रानी ने मक्खन भी जुड़वा दिया, कि बिन मक्खन के कान्हा जी का कैसा भोग? तो बस अब तो हर जन्माष्टमी पर्व पर मक्खन भी जरुर बनता है।

और दूसरे, हमारे गणपति महाराज..

अब हम लोग तो ठहरे North Indian, तो north के भगवान श्री राम, श्री कृष्ण, बम-बम भोले और हनुमान जी वाले... 

तो गणेश जी का आगमन तो बस दिपावली पूजन में माता लक्ष्मी जी के साथ ही करते थे। 

पर हमारी छोटी madam, फैल गई, कि नहीं भाई, हम तो हर गणेश चतुर्थी में गणपति बप्पा को बैठाएंगे और मोदक का भोग भी लगाएंगे।

बस तब से नियम बन गया, गणेश चतुर्थी में गणपति बप्पा को बैठाने और मोदक का भोग लगाने का... 

हमारे पतिदेव की प्यारी दीदी, मुंबई में रहती हैं, एक बार जब मुंबई जाना हुआ, तो बिटिया रानी को उनकी बुआ जी ने, मोदक बनाने का सांचा दे दिया।

बस उसके बाद से बप्पा के लिए, बनने वाले टेढ़े-मेढ़े मोदक, सांचे में ढल कर सुडौल और सटीक बनने लगे। 

उससे लगा कि, बप्पा को भी, हमारा उनका आगमन कराना बहुत अच्छा लगा, तभी तो मोदक के सांचे को हमारे पास पहुंचा दिया।

सिलसिला यूं ही चलता रहा, गणपति बप्पा के आगमन पर हम हर साल कुछ अलग तरह के मोदक बनाते और चतुर्दशी को जिसमें बप्पा का विसर्जन होता है, अर्थात वो फिर से अपनी माँ की गोद में पहुंच कर अठखेलियां करने लगते हैं।

उस दिन भी हम पूजा अर्चना करते।

पर इस बार, आंखों का treatment चल रहा है तो हमें लगा, मोदक बनाना शायद संभव न‌ हो पाए। एक दिन पहले, वैसे ही हरतालिका तीज़ के व्रत पूजन पाठ के लिए गुझिया बना चुके थे, हर बार की तरह..

पतिदेव बोले, इस साल मोदक वो लेते आएंगे...

हमने भी, बड़े अकड़ कर कहा, यह दिल्ली है, मुम्बई नहीं...

यहां दुनिया भर की मिठाई मिल सकती है, मोदक नहीं... अगर एक भी मोदक आप ले आएं तो उसे हम समझ लेंगे कि लोग बप्पा को यहां भी आमंत्रित करते हैं। 

शाम को office से घर लौटते समय, पतिदेव का phone आ गया, यहां 25 varieties के Modak मिल रहें हैं, कौन से वाले लाने हैं?

25....आय हाय! इतनी variety तो सिद्धी विनायक मंदिर में नहीं मिलते हैं, जितने कि यहां मिल रहें हैं... 

हमारे तो स्वर ही बदल गये, बड़े मधुर स्वर में हम ने पूछा, क्या varieties हैं, और भइया, पतिदेव तो शुरू हो गये, एक के बाद एक, मोदक की variety का नाम बताने में...

ओहो, ऐसा लग रहा था कि, किसी restaurant या hotel का menu बता रहे हैं। सच बता रहे हैं, किसी variety की मिठाई नहीं बची थी, जो मोदक न बन चुकी हो। वो भी बताते-बताते, हंसने लगे, कि यहां सारी मिठाइयां, मोदक बन चुकी हैं। तुम तो बस यह बताओ कि तुम्हें अपने गणपति बप्पा को किस taste की मिठाई के मोदक से प्रसन्न करना है?

आहा! गणपति बप्पा ने तो हमें ही पशोपेश में डाल दिया था, खैर variety थी, तो बप्पा जी को एक तरह के मोदक से क्यों प्रसन्न किया जाए...हमने चार varieties के मोदक मंगवा लिए।

गणपति बप्पा की popularity ने हमारी सारी अकड़ निकाल दी, उन्होंने सिद्ध कर दिया कि मुम्बई हो या दिल्ली या कोई और शहर, गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक हर जगह, सिर्फ और सिर्फ गणपति बप्पा की ही धूम रहती है।

और popularity कि तो क्या ही कहें, super popularity है भाई...

बस इतना ही कह सकते हैं कि गणपति बप्पा, आप तो छा गए हैं ...

अपनी कृपा सदैव हम सब पर बनाए रखियेगा 🙏🏻🙏🏻


    गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या 🙏🏻😊

Friday, 23 August 2024

Article: National Space Day

 National Space Day 

 



आज यानी 23 अगस्त 2024 को पूरा देश Chandrayaan-3 की चंद्रमा पर सफल लैंडिंग landing की पहली वर्षगांठ मना रहा है. यानी राष्ट्रीय अन्तरिक्ष दिवस।

यह वो सुखद दिन था, जब भारत माता और चंदा मामा के बीच की दूरी, scientifically काफ़ी घट गई थी।

वैसे चन्द्रमा पर अपने यान को उतारने वाला भारत पहला देश नहीं था, ना ही आखिरी...

फिर क्यों इतना propoganda किया गया?

तो वो इसलिए कि, भारत पहला ऐसा देश था, जिसने अपना चंद्रयान, चंन्द्रमा के south pole पर उतारा था। जबकि बाकी देशों ने अब तक north pole पर ही उतारा है।

North pole की comparatively south pole में चंद्रयान उतारना बहुत कठीन था। 

South pole में अंधेरा अधिक रहता है, साथ ही गड्डे भी बहुत होते हैं, जिसके चलते soft landing करना बहुत कठीन था।

दूसरा अन्य देश, जिन्होंने soft landing की है, उन सभी देशों के पास अथाह धन था, इस project को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए।

पर भारत के पास, उतना धन नहीं था, और दूसरा इच्छा थी कि south pole पर ही soft landing करेंगे, क्योंकि ऐसा करने से ही भारत का नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाता।

और इस असंभव कार्य को भारत ने ना केवल किया, बल्कि समय-सीमा के अंदर कर दिखाया, वो भी अदम्य साहस के साथ।

जब चंद्रयान ने चांद की जमीन पर soft landing की, तो लगा मानो, हमारा चंदा मामा से प्यार और प्रगाढ़ हो गया।

आज भारत का नाम विश्व के चार बड़े देशों में लिया जाने लगा है, और इसका पूरा श्रेय भारतीय वैज्ञानिकों को जाता है।

बहुत से लोगों के मन में यह भी सवाल होगा कि क्या हासिल कर लिया, ऐसा कर के?

तो आप को बता दें कि इससे बहुत सी तरह की जानकारी प्राप्त होगी, जो हमारे लिए बहुत कारगर साबित होगी, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है कि अगर कोई दुश्मन देश हम पर हमला करना चाहेगा तो उसके नापाक इरादे हम पहले ही भांप लेंगे और उनको मुंह तोड़ जवाब देकर हार की धूल चटा देंगे। 

तो चलिए गर्व के साथ राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाते हैं और देश को बाकी के क्षेत्रों में भी सर्वोच्च बनाते हैं।

जय हिन्द जय भारत 🇮🇳

Article : क्या आपके नमक और चीनी में प्लास्टिक है?

 क्या आपके नमक और चीनी में प्लास्टिक है?


यह खबर बहुत तेजी से, हर news channel पर viral हो रही है कि आज कल, हर brand के नमक और चीनी में प्लास्टिक पाया जा रहा है। 

प्लास्टिक? क्या बकवास है.. 

प्लास्टिक डलेगी और हमें पता भी नहीं चलेगी, How come?

फिर नमक और चीनी तो हम लोग अधिकतर पका कर खाते हैं, means सब्जी, दाल, नाश्ते, दूध, चाय, काॅफी, मीठा आदि में..

उसमें तो heat के साथ प्लास्टिक गल जाएगी और अलग ही दिखेगी...

बिल्कुल दिखती, अगर plastic होती पर यह तो micro plastics है, वो भी रंग-बिरंगी.. 

यही कारण है कि easily पकड़ नहीं पा रहे हैं।

पर जैसा कि हम सब जानते हैं कि plastic का शरीर में जाना, cancer को invite करना है तो बस यह micro plastics, हमारे शरीर में slow poison का काम कर रहे हैं।

लोगों के मन में यह बात आ रही है कि किस तरह के नमक और चीनी में प्लास्टिक पायी जा रही है?

तो आपकी जानकारी के लिए बता दें, हर तरह का नमक, चाहें वो सेंधा नमक हो, सादा नमक हो, काला नमक हो या समुद्री नमक, और चीनी भी पांचों तरह की मिलावट के साथ ही मिल रही है। हां, कहा जा रहा है कि organic salt and sugar में micro plastics की मात्रा कम पाई जा रही है।

पर अब दूसरा सवाल आता है कि क्या क्या छोड़ दें और क्या खाएं?

क्योंकि हालात तो बद से बद्तर होते जा रहे हैं, कोई भी चीज़ तो बिना adulteration के नहीं मिल रही है। 

कहां, कहां तक और क्या, क्या छोड़ें?

बाकी यह तो मिलावट करने वाले सोचें...

क्यों और किस लिए करनी है मिलावट? क्या इसके बिना business संभव नहीं है? 

क्या उनका परिवार, इससे अछूते रहेंगे?

नहीं, बिल्कुल नहीं, आज नहीं तो कल वो भी चपेट में आएंगे...

फिर चंद पैसों के लिए, क्यों किसी की भी जान लेने का काम करना?

पर ऐसे में हम क्या कर सकते हैं, आंखें मूंद लेने के अलावा?

कर सकते हैं, बस इतना की थोड़ा सचेत रहें, जितना हो सके organic चीज़ें लें। हां एक बात एकदम पक्की है कि इसमें adulteration कितना होगा, कितना नहीं, पता नहीं, पर जो बात जगजाहिर है कि इनके दाम ज़रूर ज़्यादा होते हैं।

मतलब कि एक जगह adulteration है तो दूसरी जगह, महंगाई...

अब आपको निर्धारित करना है कि किस ओर जाया जाए? 

आप को हम कुछ चीजें शुद्ध है या अशुद्ध, कैसे पता चलेगी वो हम आगे आने वाले article में बताएंगे। आप उसे अवश्य पढ़ें और जागरूक रहें।

तब तक के लिए, जागरूक रहें, सचेत रहें...

Sunday, 18 August 2024

Article: क्रूरता का अंत

आज कल हर जगह एक ही चर्चा चल रही है, Dr. Moumita Devanath के साथ हुआ अमानवीय कृत्य..

निर्भया के साथ जैसा कुकृत्य हुआ था, कुछ वैसा ही भयावह कुकृत्य हुआ है, जो कि किसी को भी यह सोचने पर मजबूर कर देगा कि इतना भयावह कुकृत्य होने का क्या कोई अंत है भी?



और क्या ऐसे करने वालों के लिए उतनी ही क्रुरता पूर्ण सजा का प्रावधान होना चाहिए?

क्यों हिम्मत होती है, किसी की भी स्त्रियों के साथ इस तरह के अमानवीय कृत्य करने की?

क्या मोमिता को न्याय मिलेगा?

क्या CBI का इस case से जुड़ना, उसे न्याय दिलाएगा?

आखिर क्यों, मोमिता के संग ऐसा उस जगह पर हुआ, जो उसके लिए सबसे सुरक्षित जगहों में से एक होनी चाहिए थी?

क्या मोमिता की जगह कोई आदमी होता तो उसके साथ ऐसा नहीं होता? (आदमी की नृशंस हत्या)

क्या स्त्री होना अपराध है?

क्या स्त्रियों का घर से बाहर निकल कर अपना अस्तित्व बनाना, इतना असुरक्षित है?

क्या कोई system corr*pt हो तो आवाज़ नहीं उठानी चाहिए?

लड़कियों की सुरक्षा किस तरह की जाए?

ऐसे ही बहुत से सवालों से घिरा हुआ है यह case...

बहुत देर तक पढ़ा, देखा और समझा तो, सबसे पहले यह ही विचार आया कि क्यों दुनिया इतनी असुरक्षित है?

शायद उसका बहुत बड़ा कारण यह है कि, अपराधियों को उतनी ही क्रुर सजा देने का प्रावधान नहीं है, जो कि अवश्य ही होनी चाहिए।

साथ ही news में यह भी आ रहा है, case सिर्फ r*pe and brutal m*rd€r का ही नहीं है बल्कि hospital से जुड़े rackets का भी है।

और मोमिता के साथ हुए कुकृत्य में आरोपी का साथ, hospital में मौजूद कुछ लोगों ने भी दिया था। 

वैसे भी, सोचने वाली बात है कि एक दुष्ट प्रवृत्ति का मनुष्य, जो कि hospital से associated नहीं था, फिर भी वो seminar room में पहुंच गया...

उसे कैसे पता चला कि मोमिता वहां है और वो भी अकेली...

एक ऐसी जगह, जहां मोमिता ने कभी नहीं सोचा होगा कि वो इतनी असुरक्षित है कि उसके संग ऐसा भयावह कुकृत्य हो जाएगा...

इस कुकृत्य को अब पूरी दुनिया में कोई बर्दाश्त नहीं करना चाहता है, कोई नहीं चाहता है कि अब हमारे देश में लड़कियां असुरक्षित रहें। इसी कारण से सबने मिलकर आवाज़ उठाई है और वो पूरी तरह से सही भी है।

सुरक्षा रहे, इसके लिए सबको एकजुट होना ही चाहिए और इस तरह के कुकृत्य ना हो, इसके लिए सरकार को कुछ इस तरह का कठोर दण्ड रखना होगा, जिसकी कल्पना मात्र हो जाने से हर कोई सिहर उठे।

पर इसके साथ ही दो बातों पर सबको ध्यान रखना है।

पहला बेटियों को अपनी सुरक्षा के लिए मजबूत बनाएं, उन्हें self defence सिखाएं, साथ ही उन्हें बताएं कि और ज्यादा सतर्क रहें, जिससे उनके साथ ऐसा कुछ ना हो।

किसी के भी साथ जरुरत से ज्यादा घनिष्ठता ना बढ़ाएं। ज़रुरत से ज्यादा घनिष्ठता, सभी के लिए harmful होती है, फिर चाहे वो किसी पुरुष से हो या स्त्री से। 

अकेले रहना, अंधेरी जगह जाना, अगर avoid किया जा सकता है, तो जरूर करें। पर अगर ज़रुरी है जाना या मजबूरी है जाना, तो पूरी तरह से सुरक्षा व्यवस्था के साथ जाएं। 

पर, दूसरी बात इससे भी और ज्यादा जरुरी है, कि अपने बेटों को शिक्षा दें, स्त्री सम्मान की..

क्योंकि जब सबके मन में सम्मान की भावना रहेगी, तभी इसको पूर्ण रूप से रोकना संभव है।

कभी भी corruption के against आवाज़ उठानी है तो अर्जुन बन जाने के बाद। अगर आप अभिमन्यु हैं (मतलब अगर आपको चक्रव्यूह में घुस कर निकलना नहीं आता है), तो फिर हश्र, भयावह होने की बहुत ज़्यादा सम्भावना है, फिर चाहे वो कोई लड़की हो या लड़का...

ईश्वर से प्रार्थना है कि वो सभी की रक्षा करें और सरकार से अपील है कि इस कुकृत्य के सभी अपराधियों को कठोर से कठोर दण्ड दे, जिससे आगे ऐसा ना हो और देश में स्त्रियां सुरक्षित रह सकें 🙏🏻

क्योंकि स्त्री होना कोई अपराध नहीं है, वो कमजोर भी नहीं हैं, साथ ही उन्हें भी अपना जीवन, खुलकर जीने का अवसर मिलना चाहिए। बिना किसी असुरक्षित होने की भावना के साथ...

इतना तो हम सब कर सकते हैं, अपनी बेटी, बहन, बहू, मां और दोस्त, रिश्तेदार के लिए...

Thursday, 8 August 2024

Article : कैसी होगी किस्मत?

कैसी होगी किस्मत ?



आजकल पेरिस में Olympic games चल रहे हैं, जिसमें भारत के खिलाड़ियों का प्रदर्शन भी चल रहा है।

अब तक तीन bronze medal भारत की झोली में आ चुके हैं और बाकी खिलाड़ी, इस प्रयास में तन-मन से समर्पित हैं कि वो भी अपने बेहतरीन प्रदर्शन से भारत को सम्मानित करें।

इन खिलाड़ियों में भारत की विनेश फोगाट भी गई थी। और ना केवल वो गई, बल्कि उसके प्रदर्शन ने भारत को गौरवान्वित भी करना आरंभ कर दिया था।

अपने सभी प्रतिद्वंद्वियों को परास्त करते हुए, वो final match तक पहुंच गई थी।

एक रात पहले ही उसके doctor ने उसे weight ज्यादा होने की बात कही थी।

और उसने weight lose करने का भरसक प्रयास किया, जैसी meal skip की, blood donate किया, jogging की, cycling की, अपने बाल और नाखून काट दिए,यहां तक की पूरी रात आंखों में गुजार दी। एक पल के लिए भी नहीं सोई...

पर हाय रे किस्मत! यहां पहुंच कर वो काल के क्रूर हाथों का शिकार हो गई और महज़ 100 gm. के अतिरिक्त वजन के कारण disqualify कर दी गई।

इतनी मेहनत से उसे severe dehydration हो गया और उसे hospital में admit होना पड़ा।

उन्होंने कुछ समय की मांग भी की थी, पर United World Wrestling ने उसे खारिज कर दिया गया। जिसके चलते विनेश फोगाट को उससे replace कर दिया गया जो third place पर थी।

फोगाट अत्यंत दुखी हो गई और उसने disqualify होने के बाद पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ‘माँ कुश्ती मेरे से जीत गई मैं हार गई। माफ करना, आपका सपना, मेरी हिम्मत सब टूट चुके है। इससे ज्यादा ताकत नहीं रही अब। अलविदा कुश्ती 2021-2024। आप सबकी हमेशा ऋणी रहूंगी।’

यह सब होना, फोगाट के साथ-साथ, भारत देश के लिए भी एक दुर्भाग्य है। क्योंकि फोगाट का final तक पहुंचना, इस बात की ओर इशारा था कि, gold or silver में से एक medal पक्का था।

अभी-अभी मिली सूचनाओं से यह पता चला है कि, फोगाट ने Court of Arbitration and Sports (CAS) में appeal की है, उसे silver medal दे दिया जाए...

पेरिस में आज दोपहर 2 बजे के करीब, Indian time के according शाम 5:30 से इस फैसला को लिए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी कि, विनेश फोगाट को silver medal दिया जाए या नहीं...


A. UWW के rules :

UWW के नियमों के मुताबिक अगर कोई athlete weight measurement process के मापदंड को पूरा  करने में असफल रहता है तो उसे स्पर्धा से बाहर कर दिया जाता है और बिना rank के आखिरी स्थान पर रखा जाता है।


हम सब भारतीय यही चाहेंगे कि विनेश फोगाट को atleast silver medal अवश्य दिया जाए।

विनेश फोगाट, भारत के लिए कोई नया नाम नहीं है। वो गीता फोगाट और बबीता फोगाट की चचेरी बहन है। 

Olympic games से पहले भी उसने भारत को कई बार सम्मानित किया है।


B. विनेश फोगाट का career:

2014 commonwealth games में विनेश फोगाट ने अपना पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय खिताब जीता। उन्होंने gold medal जीता, तो ओलंपिक खेलों में कदम रखने के लिए आत्मविश्वास बढ़ा। फिर 2016 Rio Olympic के quarter final में जगह बना ली। हालांकि, उस दौरान वह medal जीतने से चूक गईं, लेकिन इसके बाद उन्होंने 2018 में राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में gold medal हासिल किया।

नूर सुल्तान में पहला विश्व चैंपियनशिप पदक हासिल किया और इससे पहले एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में bronze medal जीतकर सभी को हैरान कर दिया। 2021 एशियाई चैंपियनशिप में अपना पहला gold medal जीता। टोक्यो ओलंपिक का हिस्सा बनीं। साथ ही राष्ट्रमंडल खेल 2022 में लगातार तीसरी बार gold medal अपने नाम किया है। विनेश फोगाट तीन राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान हैं।

साथ ही Olympic games में wrestling में final तक पहुंचने वाली भी पहली खिलाड़ी है।

विनेश फोगाट के प्रदर्शन को सम्मानित किए जाने के लिए हम उन्हें सदैव याद रखेंगे, उनके बेहतरीन प्रदर्शन की सदैव सराहना की जाएगी। 

साथ ही हम सब दिल से ईश्वर से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि फैसला विनेश फोगाट के पक्ष में आए और उन्हें silver medal मिल जाए... 

जिससे यह पल पूर्ण रूप से ना सही पर फिर भी विनेश फोगाट और हम सब भारतीयों के मन में मीठी याद बनकर रहे।

 अब देखना है, क्या आता है फैसला? कैसी होगी किस्मत?...

विनेश फोगाट को एक grand salute के साथ यह article शेष करते हैं... 

जय हिन्द, जय भारत 🇮🇳 

Wednesday, 12 June 2024

Article : उम्र का पड़ाव

हमारी ज़िंदगी में उम्र के तीन पड़ाव होते हैं, बाल्यावस्था, युवावस्था और वृद्धावस्था।

यूँ तो हर पड़ाव का अपना महत्व होता है, हर पड़ाव की अपनी अपनी priorities होती हैं, अपने शौक और अपने ही मज़े होते हैं। 

पर आज एक नई ही सोच जागृत हुई, जब hospital जाना हुआ।

Hospital में time लग रहा था और पतिदेव को office जाने में देरी हो रही थी। अतः, हमने मिलकर decide किया, कि वो अपने office जाएं और हम hospital में खुद को दिखवाकर घर लौट जाएं।

उम्र का पड़ाव

तो बस हमें hospital में बिठा कर, वो office के लिए रवाना हो गए।

हम doctor का इंतजार करते हुए, समय व्यतीत कर रहे थे। तभी एक aged couple आया, और उनके साथ ही उन लोगों की एक attendant.

Aunty जी थोड़ी स्वस्थ सी थीं, पर पूरी तरह से नहीं। जबकि uncle जी थोड़ा ज़्यादा बीमार थे। 

Basically, उनको ही दिखाने आए थे वो लोग...

Aunty जी बड़ी cute और शांत सी थीं, जबकि uncle जी अक्खड़ और dominating थे।

हाँ, तो बात करते हैं जो आज observe किया था।

पूरे समय में aunty जी, हर थोड़ी देर में अंकल जी को कभी पानी पीने को, तो कभी कुछ खाने को लिए पूछतीं, फिर uncle जी की इच्छानुसार उन्हें खाने और पीने को देती जातीं।

Aunty जी जितनी सौम्यता से uncle जी के साथ व्यवहार कर रही थीं, uncle जी उतना ही रूखा व्यवहार दिखा रहे थे। वो ऐसा कर रहे थे, जैसे aunty जी को वैसा करना ही उनका पत्नी धर्म...

खैर आगे की बात करते हैं।‌ उन दोनों को देखकर यह प्रतीक हो रहा था कि अगर आप के साथ आपका अपना partner है तो आप की जिंदगी set है ।

क्योंकि यही मायने में ज़िंदगी second innings में ही है। इस समय में इंसान के पास वो सब होता है, जिसकी वो ज़िंदगी भर कामना करता है।

पैसा, जिसे वो कमा चुका होता है, एक position, जो वो पा चुका होता है, ज़िम्मेदारी, जिन से वो मुक्त हो चुका होता है, ज़िंदगी की भाग-दौड़, जो अब जीवन संध्या पर पहुंच चुकी होती है और समय, वो तो बेइंतहां होता है।

ऐसे में दोनों सिर्फ एक दूसरे के लिए समर्पित होते हैं। जो कि बहुत ही खूबसूरत होता है...

और एक बात, यह ही वो पल भी होते हैं, जो बिन‌ partner के व्यतीत करना अत्यधिक कठिन भी होता है।

इसलिए आप से सिर्फ इतना ही कहना है कि अपने partner और अपना बहुत ध्यान रखिए, जिससे ज़िन्दगी के सबसे खूबसूरत पल, आप भी जी सकें।

ईश्वर से सबके लिए शुभ की प्रार्थना...

Wednesday, 5 June 2024

Article : कहाँ चूके मोदी जी

कल का जो चुनाव परिणाम आया है, उसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। ना BJP को, ना विपक्ष को और ना ही जनता को, यहाँ तक exit poll भी कुछ और कहानी कह रहे थे।

Exit poll के according BJP का पूर्ण बहुमत पक्का था, फिर कहाँ चूक गए मोदी जी?

कहाँ चूके मोदी जी


इतने अच्छे राजनीतिक विश्लेषकों के होने के बाद भी कहाँ चूक हो गई?

NDA ने तो पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है, पर इस बार BJP को सत्तारूढ़ होने के लिए सहारा अवश्य लेना पड़ेगा...

देश में सर्वाधिक votes BJP को ही मिले हैं, इतने विपक्ष में सब मिलकर भी नहीं जुटा पाए। 

पर पूर्ण बहुमत नहीं जुटा पाने के कारण BJP खुशी के उस चरम तक नहीं पहुंच पाई, जो पिछले दो कार्यकाल में पहुंच रही थी।

और विपक्ष हार के भी ऐसे जश्न मना रहे हैं, जैसे सत्ता उन्हें मिल जाएगी। क्योंकि इस बार, उनका मुख्य उद्देश्य केवल BJP का बहुमत का विजय रथ रोकना था। और वो इस पर कुछ हद तक कामयाब भी रहे...

पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के कारण कुछ बड़ी जीत कहीं गुम हो गई, जैसे दिल्ली और मध्य प्रदेश में, BJP को clean sweep मिला है, जो कि एक अच्छी खबर है।

पर चूक कहां गए? 

उत्तर प्रदेश में...

उत्तर प्रदेश seats के मामले में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रहता है। इसकी लोकसभा चुनाव में पूरी 80 सीटें रहती हैं। उसके बाद महाराष्ट्र में 48 सीटें, बंगाल और आंध्र प्रदेश में 42 सीटें और बिहार में 40 सीटें।

इसका अर्थ है कि जब भी लोकसभा चुनाव हो, सबसे अधिक ध्यान उत्तरप्रदेश में केन्द्रित करना चाहिए, जो कि नहीं किया गया।

उत्तरप्रदेश को for granted ले लिया गया, या बहुत हल्के में ले लिया गया। यहाँ ना चुनाव प्रचार पर ध्यान दिया गया, और ना ही इस ओर ध्यान दिया गया कि जो public BJP को votes देना चाह रही है, उनके पास पर्ची भी पहुंची है कि नहीं?

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण करा दिया, पर उसके पूर्ण होने से पहले ही उद्घाटन कर दिया, दूसरा southern India को रिझाने के लिए मूर्ति south से लाकर लगवा दी। 

अयोध्या में राम मंदिर बनवाने का कार्य होते हुए भी यह BJP के कोई काम नहीं आ सका। अगर राममंदिर निर्माण के तुरंत बाद ही elections हो जाते तो, प्रभू श्री राम जी अवश्य ही विजय पताका फहरवा देते…

क्योंकि उस समय लोग राम मय थे। पर समय मिल जाने से लोगों को राममंदिर की अपूर्णता और काली मूर्ति खटकने लगी।

वैसे उनका तो क्या ही कहें, जिन्होंने निर्माण करने वालों को vote देने के बजाय विध्वंस करने वालों को vote दे दिया। 

अयोध्या और लक्षद्वीप में रहने वाले लोग तो एक बार सोचें जरुर, जिनके विकास के लिए किसी ने नहीं सोचा, उनके विषय में सोचने वालों को उन्होंने क्या सिला दिया?

दूसरा उत्तरप्रदेश को लेकर BJP over-confident थी, इसलिए वो अन्य राज्यों में ही अपना ध्यान केंद्रित करती रही...

नतीजा वहां से तो ज़्यादा कुछ मिला नहीं, यहाँ की पक्की seats भी हाथ से जाती रहीं... 

इसी तरह की छोटी-छोटी-सी नज़रंदाजी ही थी, जिसके कारण जो नहीं सोचा था, वो हो गया।

गनीमत इतनी है कि NDA के 292 votes आ गए हैं और एक बार फिर मोदी जी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ेगा।

पर यह एक सबक है BJP के लिए, कि उन्हें public आंखें मूंद कर नहीं चुनेगी, भरोसा दिलाना पड़ेगा, कि वो ही देश को सुचारू रूप से चलाएंगे। 

और यह अगले साल होने वाले CM के election के लिए एक alarm है कि उन्हें अभी से सचेत हो जाना पड़ेगा, अन्यथा अभी तो कुछ seats ने सबक दिया है, उसमें कोताही बरती तो सीधा उत्तर प्रदेश हाथ से जाएगा।

अखिलेश यादव ने अपनी तरफ से कोशिश आरंभ कर दी है, जिसकी एक झलक दिखाई दे रही है, साथ ही BJP को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कुछ समय पहले, बहुत लम्बे समयांतराल तक उत्तरप्रदेश पर सपा ही सत्तारूढ़ थी।  

जो प्रयासरत रहता है, फल भी उसे ही मिलता है।


फ़िर एक बार, मोदी सरकार 🙏🏻🇮🇳

Tuesday, 4 June 2024

Article : कौन संभालेगा देश

आज चुनाव का नतीज़ा निकलना है कि पूरे देश में किस political party का वर्चस्व है।

देश की जनता के लिए क्या priority है, उनकी निजी आवश्यकताएं या देश की सुरक्षा, विकास और संस्कृति? 

क्या फिर से BJP सत्तारढ़ होगी?

या INDIA alliance का दबदबा रहेगा?

कौन संभालेगा देश


अगर BJP जीतती है, जैसा कि रुझान से दिखाई भी दे रहा है, तो एक बार फिर देश मोदी जी के नेतृत्व में आगे बढ़ेगा। 

दो साल के अपने सफलतम कार्यकाल के पश्चात्, तीसरा सत्र उनका कैसा रहेगा?

हमारे देश के साथ-साथ, विदेशी देशों की भी नज़र चुनाव के नतीजों पर टिकी हुई है।

वह भी देख रहे हैं कि उन्हें भारत में निवेश करना है कि नहीं?

कल sensex बहुत तेजी के साथ खुला था और शेयर बाजार में एक बड़ी उछाल आई थी।

लेकिन आज के रूझान को देखते हुए, share market थोड़ा ठंडा हुआ है…

Share market के गर्म या ठंडे होने से क्या औचित्य है? तो आपको बता दें कि देश की अर्थव्यवस्था कैसी होगी, इसका पूरा link, share market के गर्म या ठंडे होने पर ही निर्भर करती है।

इसी से यह निर्धारित होता है कि विदेशी देश, कितना निवेश कर रहे हैं। और यह तो सीधा सा गणित है कि जिस देश में सबसे ज़्यादा निवेश होगा, वो देश उतना ही विकसित और उन्नत होगा। 

INDIA alliance के आने से एक बात सोचने वाली रहती है कि सत्ता कौन संभालेगा, क्योंकि जैसा कि saying है, 'Too many cooks spoil the broth…'

जब सब की सोच ही एक सी नहीं, तो देश किस सोच से चलेगा? 

लोकसभा चुनाव होने में दो states का महत्वपूर्ण स्थान है, पहला उत्तरप्रदेश और दूसरा महाराष्ट्र...

वो क्यों?

क्योंकि इन दोनों ही states में सबसे ज्यादा seats होती है। 

यह नेता लोग जो कि किसी भी परीक्षा के परिणामों को महत्वपूर्ण नहीं समझते हैं, उन्हें लोगों पर पड़ने वाले pressure की कोई चिंता नहीं रहती है।

वो आज के दिन सबसे ज़्यादा मानसिक तनाव में रहते हैं। पांच साल के कार्यकाल में उन्होंने क्या ऊपर-नीचे किया है? उन सब का परिणाम होता है, नतीजों का दिन...

पर साथ ही यह दिन यह भी निर्धारित करता है, आगे देश का कितना उत्थान होगा या पतन? 

एक देश पर सत्तारूढ़ हुई political party यह भी निर्धारित करती है कि उसका दूसरे देशों के साथ संबंध मधुर बनेंगे या खटास वाले?

इस तरह से देश का विकास, सुरक्षा और संस्कृति सब आज के नतीजे पर ही निर्धारित होगी। 

अब results तो वही आएंगे, जिस हिसाब से लोगों ने votes दिए हैं... 

बस ईश्वर से यही प्रार्थना है कि जो भी देश संभाले, वो देश का विकास करे ना कि अपना और अपने परिवार का..

उसके लिए देश की सुरक्षा प्रथम हो...

उसके लिए देश की सभ्यता और संस्कृति सर्वप्रिय हो...

बस वही बने जो देश को अखंड रख सके...