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Friday, 2 June 2023

Kids story : वक्त से पहले

वक्त से पहले 


आज सुबह-सुबह ही फ़ोन की घंटी बज उठी, रचना ने रंजीत को कहा, मैं चाय बना रही हूं, आप फ़ोन उठा लेंगे? 

हां, हां.. उठाता हूं अभी, यह कहकर रंजीत ने फ़ोन उठाया... Hello.., आप कौन बोल रहे हैं? 

Hello Sir.., मैं शुभ के school से बोल रहा हूं, मैं आप से शुभ के regarding कुछ बात करना चाहता हूं...

रंजना तब तक चाय लेकर आ चुकी थी, किस का फ़ोन है?

शुभ के school से है..

शुभ के school से शाम को? Speaker पर रखिए...

Sir, आपको शुभ ने बताया, कि आज उसनेे क्या किया?

नहीं ऐसा तो कुछ नहीं कि, आप का फ़ोन आ जाए..

उसने आज बस चलाई है...

बस!.. क्या बोल रहे हैं आप? वो अभी मात्र 11 साल का है- रचना ने कहा...

जी वही मैं भी सोच रहूं Ma'am, वो अभी मात्र 11 साल का ही है, फिर भी उसने यह कमाल कर दिया...

आपको शुभ ने बताया नहीं? फिर कुछ सोचते हुए, शुभ के Sir बोले, हो सकता है कि इसलिए नहीं बताया हो, क्योंकि उसे कोई बड़ी बात ना लगी हो!...

पर आप यह बताइए कि उसने बस चलाई ही क्यों? और आप लोग, इस बात की तारीफ कर रहे हैं या उसके द्वारा, ग़लत काम करने की बात कहने के लिए फ़ोन किया है, रंजीत ने थोड़ा झुंझलाहट में बोला...

Sir, शुभ की तारीफ करने के लिए ही फ़ोन किया है।

दरअसल बात यह है कि आज सुबह, बस driver की तबीयत अचानक से बिगड़ गई और वो उसी अवस्था में बस चला रहा था।

शुभ ने, बस driver की तरफ देखा और चंद ही मिनटों में समझ गया कि driver की तबीयत ख़राब हो रही है। वो तुरंत उसके पास पहुंचा और driver की guidance में उसने बस को किनारे लगा दिया।

उसके बाद driver के फोन द्वारा हमें सभी परिस्थितियों से अवगत कराया।

कुछ ही मिनटों में हम उस जगह पर पहुंच गए और सभी बच्चे school आ गये। 

आज अगर आप का बेटा, alert and responsible नहीं होता,‌‌ तो सारे बच्चे मुश्किल में पड़ जाते...

हमारे पूरे school को गर्व है शुभ पर...

यह सुनकर, रंजीत और रचना, दोनों ने समवेत स्वर में धन्यवाद किया।

Sir, हमें जितना गर्व है शुभ पर, उतनी ही इस बात की curiousity भी कि, केवल शुभ ही क्यों? आखिर क्या ख़ास है उसमें?

रंजीत ने बहुत ही गर्व से सधे हुए शब्दों में कहा, उसके पास mobile नहीं है...

Mobile नहीं होना कौन सी खासियत होती है?

आजकल की बढ़ती आधुनिकता और दिखावे के चलन के कारण, छोटे-छोटे बच्चों के पास भी मोबाइल फोन रहने लगा है, जिसके कारण उनके अंदर alertness and responsibilities ख़त्म होती जा रही है।

साथ ही उन्हें बहुत छोटी उम्र में उन बातों का exposure भी मिल रहा है, जो नहीं मिलना चाहिए, क्योंकि वो उनके बचपन को नष्ट और भविष्य को बर्बाद कर रहा है। 

हम चाहते थे कि हमारा शुभ, alert, responsible, intelligent and sensible बने और उसका भविष्य उज्जवल बने।

आप ने जो आज देखा, वो उसी खासियत के कारण हुआ। 

Mobile ज़रूरी है पर ठीक समय पर, वक्त से पहले नहीं... 

बिल्कुल सही कहा आपने.. एक बार फिर से शुभ और आपकी परवरिश को कोटि कोटि प्रणाम 🙏🏻

हम अपने school में इस बात का जिक्र अवश्य करेंगे, जिससे बाकी के parents and students भी इससे aware रहें।

Wednesday, 11 May 2022

Kids Story : The Friendly Fish

आज की kids story, एक छोटे से बच्चे Advay Sahai ने लिखी है, वो अपनी कहानी के जरिए अपने friends को एक बात बता रहा है।

जो कि है तो छोटी सी, पर बहुत जरूरी भी, क्योंकि जो बच्चे, इस बात का ध्यान नहीं रखते हैं, उन्हें बड़ी परेशानी उठानी पड़ती है।

तो आइए देखते हैं कि उसने अपनी कहानी में ऐसी कौन सी बात कही है। 

उसको motivate करने के लिए, कहानी पसन्द आने पर, like and comments ज़रुर कीजिए।

The Friendly Fish 

सोनू का जन्मदिन आने वाला था। वो यह बात सोच-सोचकर हर समय बहुत खुश रहता। इस बार जनाब को अपने parents के तरफ़ से birthday gift में एक pet animal चाहिए था। उसने यह बात अपने parents से कही। 

उसके parents ने भी सोनू की इच्छा पूरी कर दी और उसे एक friendly fish दी और कहा, "यह fish बहुत friendly है। अगर तुम एक good boy की तरह रहोगे तो यह तुम्हारी friend बन जाएगी और तुम्हारे साथ बातें करेंगी और games खेलेगी।" 

सोनू यह सुनकर खुश हो गया और अपने parents को "Thank you." कहकर अपने friends के साथ खेलने चला गया।

सोनू हर दिन की तरह, आज भी अपनी books और notebooks, table पर छोड़कर चला गया था। Fish ने भी यह देख लिया।

जब सोनू लौटकर आया तो उसे दिखा की उसकी books तो ठीक हैं पर उसकी notebooks गीली हो गई हैं। यह देखकर सोनू कस-कसकर रोने लगा। 

Fish ने उससे पूछा, "क्या हुआ सोनू? तुम रो क्यों रहे हो?" सोनू ने कहा, "मेरी notebooks गीली हो गई हैं।" Fish ने कहा, "मुझे तो नहीं लग रहा।" 

सोनू को fish की बात समझ में नहीं आयी तो उसने fish से पूछा, "क्या मतलब?" 

Fish ने समझाया, "पहले तुम confirm करो की ये तुम्हारी used notebooks हैं भी या नहीं।" सोनू ने check किया। वो तो सोनू की new notebooks निकलीं! यह देखकर सोनू ने रोना बंद कर दिया। 

तभी fish ने कहा, "देखा! यह तो तुम्हारी new notebooks निकलीं। पर अगर तुम हर दिन अपनी books और notebooks को ऐसे ही छोड़कर चले जाओगे तो किसी दिन ऐसा तुम्हारी used notebooks के साथ भी हो सकता है। बात सिर्फ books और notebooks की ही नहीं है बल्कि तुम्हारी हर चीज़ की है। तुम्हें अपनी हर चीज़ को अपनी place पर और organised way में रखना चाहिए।"

सोनू को fish की बात समझ में आ गई और तब से वो अपनी हर चीज़ (including books and notebooks) को अपनी place पर और organised way में रखने लगा।

सोनू good boy बन गया और friendly fish उसकी best friend बन गई।

Friday, 25 March 2022

Kids story : New School Bag

आज की कहानी, छोटे से समझदार बच्चे अद्वय सहाय द्वारा लिखी हुई है। 

वो अपनी कहानी के जरिए अपने दोस्तों को समझना चाहता है कि हमेशा उन्हीं सामानों की demand करनी चाहिए, जिनकी हमें requirement हो।

इस कहानी को अपने बच्चों को अवश्य सुनाएं, जिससे उन्हें भी पैसे और समय की कद्र रहे।

New School Bag

Results आ चुके थे, बच्चे pass हो चुके थे। New class, new books सब कुछ नया, बच्चों में इसका अलग ही craze रहता है।

सोनू भी उन्हीं बच्चों में से था, जिन्हें हर साल school के लिए नयी-नयी चीजें चाहिए होती हैं।

कोरोना के कारण पिछले दो साल से school ठीक से नहीं खुल रहे थे तो सोनू के सभी सामान काफ़ी अच्छी condition में थे।

इसके बावजूद सोनू जिद्द कर रहा था कि उसे सब कुछ नया चाहिए। 

Specially New School Bag, वो भी doraemon वाला।

माँ ने समझाया भी कि क्या जरूरत है, नये bag की। अभी पिछले साल ही तो छोटा भीम वाला bag लिया था, और तुम school, मुश्किल से महीने भर भी नहीं गये हो। वो bag बिल्कुल नया जैसा ही है।

माँ, आप समझती नहीं हैं, अब मैं बड़ा हो गया हूँ, छोटा भीम वाला bag नहीं ले जा सकता हूँ, मुझे doraemon वाला new bag ही चाहिए। फिर सारे friends भी हर बार new bag लाते हैं तो मैं क्यों नहीं। 

पापा बोले, छोड़ो, मैं देखता हूँ। अगर वो bag मिलता है तो।

पापा की बात सुनकर सोनू खुश हो गया और doraemon, doraemon... का गाना गाते हुए खेलने चला गया।

लौटने पर उसने देखा कि doraemon उसके कमरे में उसका इंतजार कर रहा था।

सोनू, खुशी से उछल पड़ा, doraemon तुम?

हाँ मैं, doraemon ने जवाब दिया।

तुम यहाँ कैसे आ गये?

तुम से यह पूछने कि तुम्हारा bag कहाँ-कहाँ से फटा है? 

कहीं से नहीं! 

अभी पापा ने पिछले साल ही तो लिया था और मैं एक महीने भी school नहीं गया था तो वो बिल्कुल नया जैसा ही है।

क्या उसमें तुम्हारी new books, pencil box, tiffin box नहीं आएंगे?

बिल्कुल आएंगे, बहुत बड़ा bag है, वो मेरा।

अच्छा देखने में बहुत गन्दा और पुराना लगने लगा है?

नहीं... कहा तो बिल्कुल नये जैसा है।

तो क्या कारण है कि तुम्हें new bag चाहिए, सिर्फ इसलिए कि उसके cartoon में छोटा भीम बना है। या सिर्फ इसलिए कि और बच्चे new bag लाएंगे।

हाँ यही कारण है। 

तो तुम बिल्कुल ग़लत हो, हमें कोई सामान तभी लेना चाहिए, जब उसकी requirement हो, ना कि दूसरों की देखा-देखी या show-off करने के लिए।

अगर हम बिना requirement के एक ही सामान को बार-बार लेते रहेंगे तो वो पैसे की और समय की बर्बादी है। 

अगर हम इसका ध्यान रखें तो हमारे पास बहुत variety की चीजें होंगी, साथ ही हमारे पैसे और समय की बचत होगी।

अच्छा ठीक है, मैं समझ गया doraemon, कि तुम क्या कहना चाहते हो। अब से मैं केवल उन्हीं सामानों को लूंगा, जिसकी मुझे requirement हैं। व्यर्थ में पापा के पैसे और समय बर्बाद नहीं करूंगा।

यह कहकर वो पापा, पापा चिल्लाने लगा।

पापा और मम्मी सोनू के कमरे में आते हैं, वो देखते हैं कि सोनू सोते-सोते, पापा पापा चिल्ला रहा है।

उन्होंने सोनू को जगाकर पूछा कि क्या हुआ?

तब सोनू को समझ आया कि doraemon उसके सपने में आकर समझा रहा था। पर उसे doraemon की कही हुई बात अभी भी याद थी।

उसने अपने पापा से कहा, पापा अब मुझे new bag नहीं चाहिए।

क्यों, क्या हुआ बेटा?

पापा अब मुझे अच्छे से समझ आ गया है कि उन्हीं सामानों की demand करनी चाहिए, जिसकी मुझे requirement हो। 

मम्मी और पापा ने सोनू को बहुत सारा प्यार किया।

Thursday, 8 October 2020

Kids stories : खिलौने

खिलौने



टिन्नी अपने मम्मी पापा की इकलौती संतान थी। उसके मम्मी-पापा दोनों job करते थे और दोनों ही high post पर थे।

तो दोनों ही के पास समय नहीं था। जिस के कारण, वो टिन्नी की हर बात को सिर-माथे रखते थे। उसकी सारी फरमाइश, जरुरत हो या ना हो, झट पूरी कर देते थे।

टिन्नी के पास, खिलौनों की भरमार थी, फिर भी हर महीने ना जाने कितने और आ जाते।

टिन्नी एक भी खिलौने ढंग से नहीं रखती थी। मंहगे से मंहगे खिलौने, चंद दिनों में ही बेकद्री की भेंट चढ़ जाते।

टिन्नी की माँ ने टिन्नी की देखभाल के लिए एक नई कामवाली को रख लिया।

कामवाली के साथ उसकी बेटी कमली भी आती, जो  टिन्नी की हमउम्र थी।

जब तक कमली की माँ काम करती, टिन्नी कमली के साथ खेला करती।

कमली को टिन्नी के खिलौने बहुत भाते, वो बड़ ललचाई नज़रों से उन्हें देखा करती।

एक दिन कमली की माँ भांप गई, कि कमली खिलौने देखकर ललचाती है तो वो अनहोनी के डर से अंदर तक कांप गई। उसे अपने अच्छे काम छूटने का डर सताने लगा।

उसने कमली को बहुत समझाया, कि दूसरे की चीज़ देखकर नहीं ललचाते, पर कमली का बाल मन खिलौने देखकर, सब भूल जाता।

एक दिन कमली नहीं आयी, केवल उसकी माँ ही आयी।

उस दिन टिन्नी के मम्मी पापा देर से आने वाले थे।

तो टिन्नी पीछे पड़ गई, कि उसे कमली से मिलने जाना है।

कमली की माँ समझाने लगी, उनका घर बहुत छोटा है, टिन्नी को वहाँ अच्छा नहीं लगेगा।

 चलना है, चलना है, कहकर टिन्नी रोने लगी।

कमली की माँ, उसे अपने साथ ले गयी। जब टिन्नी वहाँ पहुंची तो उसने देखा, घर सचमुच बहुत छोटा था। पर कमली को देख कर वह बहुत खुश हो गई।

कुछ देर बाद वो कमली के पीछे पड़ गई कि कमली अपने खिलौने लेकर आए, और वो लोग खेल सके।

कमली अपने पुराने और टूटे-फूटे खिलौने लेकर चली आई।

टिन्नी ने देखा, कमली ने पुराने और टूटे-फूटे खिलौने भी बहुत संभाल कर रखे थे।

टिन्नी का पुराने और टूटे-फूटे खिलौनों में बहुत मन नहीं लगा, वो जल्दी अपने घर लौट आई।

आते ही सब से पहले वो अपने खिलौनों के पास गयी।

शाम को जब मम्मी पापा घर आए, तो उन्होंने देखा कि टिन्नी ने अपनी खिलौनों की shelf को बहुत अच्छे से सजा लिया था। साथ ही कुछ खिलौने उसने नीचे भी सजाकर रखें थे।

उन लोगों ने टिन्नी की, shelf सजाने के लिए बहुत सारा प्यार किया और तारीफ भी की।

फिर उन्होंने पूछा, कुछ खिलौने नीचे क्यों हैं?

तो टिन्नी ने बताया कि वो आज कमली के घर गयी थी, जहाँ उसने अपने पुराने, टूटे-फूटे खिलौने भी बहुत संभाल कर रखे थे।

यह देखकर उसने decide किया कि वो भी अपने खिलौने भी ढंग से रखेगी। साथ ही कुछ अच्छे खिलौने कमली को भी दे दे, जिससे कमली को पुराने, टूटे-फूटे खिलौनों से ना खेलना पड़े।

टिन्नी के मम्मी पापा उसकी, समझदारी व अच्छी सोच से बहुत खुश हुए।

टिन्नी अब सारे खिलौने बहुत ढंग से रखने लगी, हर महीने ढेरों खिलौने लेना भी उसने बंद कर दिया।

कमली, अब टिन्नी के खिलौने देखकर ललचाती नहीं थी, पर अब उसे टिन्नी से बहुत प्यार हो गया था।


Tuesday, 28 July 2020

Kids' Stories ( Advay the hero series- Green friends)


Advay the Hero - Green Friends
 

बहुत दिनों से corona के कारण कहीं बाहर ना निकल पाने से सारे बच्चे परेशान हो गए थे।

सब्र का बांध अब Advay का भी टूटने लगा था।

कितने दिनों से वो सब आपस में नहीं मिले थे, बहुत दिन बीत गए थे उन्हें आपस में मस्ती किए हुए।

अकेले-अकेले, खेल कर वो थक चुके थे और बहुत बोर भी हो चुके थे।

School की online classes की देखा देखी, उन्होंने online मस्ती भी शुरू कर दी थी।

पर साथ में खेलने वाले बच्चों को virtually कब तक मज़ा आता?

तो वो उसमें भी बोर हो गए।

अब उन्हें कुछ नया चाहिए था, जिसे करने के लिए उन्हें बाहर ना जाना पड़े, क्योंकि कोई भी parents इसकी permission नहीं दे रहे थे।

तो वो नया ऐसा चाहिए था, जो घर में ही कर लें, पर उसमें रोज नया surprise हो, जो बच्चों को बांधे भी रखे।

उन्हीं दिनों Advay के school में Sow Good की classes start हो गई।

उसमें Advay को हर रोज नया और surprising element मिल रहा था, तो उसे बहुत मज़ा आ रहा था।

उसने सोचा apartment में भी सारे friends को बता देता हूँ, तो सबको मज़ा आएगा।

उसने सारे friends को call किया, कि मैंने कुछ new friends से friendship की है।

सब उनसे friendship कर लें तो वो सबके घर आ जाएंगे। और parents उन्हें आने से मना नहीं करेंगे, बल्कि सब उन्हें प्यार करेंगे।

और वो हमें corona से बचाने में भी माहिर हैं।

सारे बच्चे surprise हो गये, कौन हैं ऐसे वो?

सब नाम पूछने लगे।

Advay बोला, मेरे Green friends.

Green friends, यह क्या है... ? 

कोई जादू है क्या.....?

हाँ, जादू ही तो हैं वो, हमारे साथ रहेंगे, हर रोज़ नए-नए रूप में आएंगे। हमें corona से बचाएंगे, साथ ही हम उन्हें खा भी सकते हैं।

सुनकर सारे बच्चे बहुत खुश हुए और कहने लगे, हमें भी उनसे दोस्ती करनी है।

Advay ने उन्हें micro-greens  को लगाने का सारा method बता दिया।



सारे friends के घरों में आसानी से मिलने वाले, चना, मेथी, मूंग, धनिया के छोटे छोटे-छोटे पौधे लहलहाने लगे।

सारे बच्चों को रोज़ कुछ नया देखने और करने को मिल रहा था।

Advay ने सारे friends को बोला, हम लोग हर 4 days बाद अपने green friends की pic share करेंगे और हर week online में मिलकर अपना experience share करेंगे।

सारे बच्चों ने ऐसा करना शुरू कर दिया, अब सबके पास बताने को बहुत कुछ था, साथ ही हर समय उनके साथ उनके Green-friends भी थे।



एक बार फिर से पूरे apartment के बच्चों में खुशी की लहर दौड़ गई।

एक बार फिर बच्चों ने corona को अपनी खुशी छीनने से रोक दिया था।

Wednesday, 24 June 2020

Kids Story : वीरा


वीरा


वीरा केवल नाम की वीरा थी, वरना तो कोई छोटा सा puppy भी देख लेती तो mumma mumma करने लग जाती थी। और एक छोटा सा कीड़ा भी उसे अपनी जगह से हिलाने की क्षमता रखता था। इस कदर डरपोक थी, कि अब तो वो शक्ल से भी दब्बू ही लगती थी।

वीरा के माँ-पापा बहुत ही साहसी थे। 

पर वीरा के ऐसा होने से उसकी बुआ, उसकी माँ से हमेशा यही कहा करती थी, भाभी आपने क्या सोच कर इसका नाम वीरा रख दिया, इसका नाम तो भीरु रखना चाहिए। वो हमेशा उसे दब्बू ही कह कर बुलाती थी। 

माँ को बहुत बुरा लगता था। पर क्या करती, जब अपना ही सिक्का खोटा हो।

मेम साहब, हम जा रहे हैं, वीरा दीदी घर वापस आ गयी हैं। कह कर काम वाली चली गयी। 

पर हमेशा की तरह, उस दिन भी जब वीरा स्कूल से घर आई, तो आते से ही उसने दरवाज़ा बंद नहीं किया था। 

उस दिन माँ की तबीयत ठीक नहीं थी। वे दवा खाकर लेटी थीं, उन्होंने लेटे लेटे ही वीरा से कहा, बेटा तेरा खाना microwave में रखा है। गुड्डा,  गरम करके आज खाना अपने आप ले लेगी, या मैं उठूँ?

नहीं! माँ, मैं ले लूँगी अपने आप। 

स्कूल जाते वक़्त वीरा के पापा ने उसे सख्त हिदायत दी थी, कि “माँ को आराम करने देना। और आज खाना भी अपने आप ले लेना”।

सुन कर कि, वीरा खाना ले लेगी, माँ सो गयी। वीरा भी कपड़े बदलने चली गयी।

तभी कुछ आवाज़ें सुनाई देने लगीं, वीरा कपड़े बदल कर बाहर आई। 

तो उसने देखा दो अजनबी घर के अंदर घुस आए थे। वीरा की लापरवाही के कारण ऐसा हुआ था, उसने दरवाज़ा जो नहीं बंद किया था।

उसमें से एक के हाथ में बंदूक और दूसरे के हाथ में चाकू था। उनकी शक्ल से ही साफ साफ समझ आ रहा था, कि वे चोर थे।

उन्हें देख कर वीरा बुरी तरह से घबरा गयी थी। माँ दवाई खा कर सो रहीं थीं, काम वाली जा चुकी थी। पापा के आने में अभी काफी समय था।

वीरा पर बंदूक तानते हुए एक चोर ने पूछा, घर में कौन कौन है?

कोई.... कोई भी नहीं।

वीरा माँ के बारे में नहीं बताना चाह रही थी, क्योंकि माँ बीमार थीं, और दवाई के असर से गहरी नींद में सो भी चुकी थीं। 

अकेली हो....  कह कर चोर हँसने लगे।

अच्छा चल बता, तेरी माँ गहने कहाँ रखती हैं?

जी, उस कमरे के अंदर एक कमरा है, वहीं माँ गहने और पैसे रखती हैं।

बड़ी समझदार लड़की है, सब बता दे रही है, दूसरे चोर ने कहा। 

अंकल मैं खाना खाने जाऊँ? मैं अभी स्कूल से आयीं हूँ ना, मुझे बड़ी भूख लगी है।

वीरा के सब बता देने, और उसके दब्बू चेहरे के कारण, चोर उसकी तरफ से आश्वस्त थे। वे कमरे की तरफ मुड़ गए, और वीरा kitchen की तरफ।

जब वे उस कमरे में पहुंचे, वहाँ बड़ा अंधेरा था, जब वो पलट कर वापस आने लगे तो, उन्होंने पाया कि दरवाज़ा बंद था। 

वो ज़ोर ज़ोर से दरवाज़ा पीटने लगे, पर वीरा ने दरवाज़ा नहीं खोला। उन्होंने अंदर का समान भी तोड़ना- फोड़ना शुरू कर दिया था। पर उसका भी वीरा पर असर नहीं हुआ।

कुछ ही देर में, पुलिस, और वीरा के पापा, घर आ गए थे। चोर पकड़े गए। 

थोड़ी देर में माँ भी उठ गयीं, तो उन्होंने भी अपने कमरे का दरवाज़ा बंद पाया। वे जब दरवाज़ा knock करने लगीं, तो पापा ने दरवाज़ा खोला।

माँ ने पूछा, दरवाज़ा क्यों बंद किया था?

तब वीरा ने बताया, कि चोर घुस आए थे, आप सो रहीं थीं, आपके पास आवाज़ें न जाएँ, इसलिए आपका दरवाज़ा भी बंद कर दिया था। 

चोरों को store room का गलत पता बता कर, kitchen में जाने का झूठा नाटक करके उन्हें भी बंद कर दिया था। 

फिर पापा को फोन कर दिया था। पापा, पुलिस अंकल को ले आए, और चोर पकड़े गए।

माँ ने पूछा, तुम्हें डर नहीं लगा?

लगा था, माँ! पर आपको कुछ नुकसान ना हो, जब ये सोचा, तो ना जाने कहाँ से हिम्मत आ गयी। 

माँ और पापा ने उसे बहुत सारा प्यार किया।

 जब बुआ ने सुना, तो वो देखने चलीं आयीं। 

तब वीरा की माँ ने बड़े गर्व से कहा, दीदी ये आपके भैया और मेरी बेटी है, इसलिए इसका नाम वीरा है। 

उसके बाद से वीरा की बुआ ने उसे दब्बू कहना बंद कर दियाऔर वीरा ही कहने लगीं।           


Wednesday, 20 November 2019

Kids Story : डाँट का डर ,


आज की story problem based है, हमारी viewer की बेटी की problem है, उनकी बेटी कुछ नहीं करती है, बस एक जगह बैठी रहती है। अगर आपकी भी यही problem है, तो इस पर आप भी जरूर ध्यान दें।
डाँट का डर

श्रुति की बेटी सेजल का किसी काम में मन नहीं लगता था, न तो वो पढ़ने में अच्छी थी, न खेल कूद में। बस वो घंटो एक जगह बैठ कर निकाल देती थी।
    श्रुति उसकी इस आदत से, बहुत परेशान थी। कई डॉक्टर को भी दिखा चुकी थी, पर कहीं से उसे कोई हल नहीं मिल रहा था।
    बल्कि धीरे धीरे उसकी हालत और ज्यादा खराब होती जा रही थी। इधर कुछ दिनों से तो उसके हाथ पैर भी काँपने लगे थे, साथ ही वो हकलाने भी लगी थी।
    किसी को समझ नहीं आ रहा था, कि क्या उपाय किया जाए।
    एक दिन उसके घर के पास एक computer का institute खुला, जहाँ बच्चों को ही सिखाया जाता था। वहाँ बड़े लोगों के admission नहीं होते थे।
    Apartment के बहुत बच्चे जा रहे थे, तो श्रुति ने सेजल को भी भेज दिया।
    कुछ दिन तक सेजल जाती रही, श्रुति ने देखा, सेजल में change आ रहा था। वो थोड़ा ठीक से behave करने लगी थी। और सबसे बड़ी बात computer की classes के लिए वो हमेशा ready रहती थी, बल्कि अगर किसी कारण से श्रुति नहीं भेज पाती थी, तो उस दिन वो बहुत रोती थी।
    एक दिन वो भी गयी, और उसने सेजल की computer की class में बैठने की permission भी माँगी। वहाँ के administration ने इसके लिए मना कर दिया।
    तभी वहाँ से सेजल की computer की ma’am निकल रही थीं। उन्होंने भी श्रुति को allowed करने की request की। तो administration ने permission दे दी।
    Computer ma’am ने श्रुति से कहा - आप teachers corner में बैठ जाइएवहां की window से आपको सब कुछ दिखेगापर जिसको पता ना होवो आपको नहीं देख पाएगा और हाँ जब तक class चलेबीच में कुछ मत बोलिएगा। श्रुति ने हाँ कर दी।
    सारे बच्चे रोज़ की तरह पढ़ रहे थे, किसी को नहीं पता था, कि श्रुति वहाँ बैठी है, पर श्रुति को सब दिख रहा था।
    श्रुति ने देखा, सेजल भी बहुत से question के reply दे रही थी। वो भी सही और बहुत confidence के साथ भी।
    श्रुति की आँखों में आँसू भर गए। जब class finish हुई, तो उसने सेजल का माथा चूम लिया। computer ma’am बोलीं, आप सेजल को छोड़कर आइये, मुझे आप से बात करनी है। श्रुति बोली, मुझे भी आप से बात करनी है, मैं बस 15 min. में लौट कर आती हूँ। पूरे रास्ते श्रुति सेजल को प्यार करती रही, जब वो घर पहुँची, तो उसके पति शिखर भी घर में मौजूद थे। 
    अरे शिखर आप घर पर हैं? हाँ, आज half day की leave मिल गयी है, कल से दो दिन के लिए tour पर जाना है। पर तुम बताओ, क्या बात है? आज बहुत खुश दिख रही हो।
    श्रुति ने सेजल को अपनी सास के पास छोड़ा, और कहा माँ जी, आप इसे संभालें, हम अभी आ रहे हैं। कहकर वो शिखर का हाथ पकड़ कर अपने साथ ले गयी।
    दोनों ही computer ma’am के पास पहुँच गए, रास्ते में श्रुति ने शिखर को सेजल के performance के बारे में बता दिया।
जब दोनों पहुँचे, तो computer ma’am ने दोनों से पूछा, कि आप दोनों सेजल को बहुत डाँट लगते हैं? वो बेवकूफ़ है, कुछ नहीं कर सकती है, ऐसा कहते हैं?
    अब दोनों एक दूसरे का मुँह देख रहे थे, क्योंकि ये सच था। तब वो बोलीं, आप लोगों की बेटी बहुत प्यारी है। बस problem ये है, कि उसके मन में बहुत अन्दर तक आप लोगों की डाँट और उम्मीद का डर बैठ गया है। साथ ही आप लोग उसे हमेशा यही एहसास कराते रहते हैं, कि वो कुछ नहीं कर सकती है।
    आपको पता है, मुझे उसकी शुरू की classes अकेले में लेनी पड़ी थी, जिसमें मैंने उसे कुछ नहीं पढ़ाया। उन दिनों मैंने उसके अन्दर बस ये बैठाया, कि वो normal है, वो भी सब कुछ कर सकती है, उसकी बिल्कुल भी डाँट नहीं लगाई, ना उसके हकलाने पर मैंने ध्यान दिया। सिर्फ one week लगे, मुझे फिर वो थोड़ी normal हो गयी। उसके next week मैंने उसे धीमे-धीमे और बहुत low level से पढ़ना शुरू किया। फिर level भी बढ़ाया और time भी। फिर सब के साथ पढ़ना शुरू किया, साथ ही सेजल से यह बोलती रही, तुम्हें ढंग से पढ़ना होगा, वरना हमारी team हार जाएगी। मुझे जीताने के लिए वो सब से ज्यादा पढ़कर आने लगी।
आज श्रुति जी आपने खुद देखा, वो हकला नहीं रही थी, question के reply सही भी दे रही थी, और वो भी पूरे confidence के साथ। श्रुति और शिखर बुत बने सारी बात सुन रहे थे।
    बच्चों को बहुत ज्यादा नहीं डाँटना चाहिए, साथ ही उनमें करने की क्षमता है, इसके लिए boost भी करते रहना चाहिए। जो उनमें कमी है, उससे याद नहीं दिलाते रहना चाहिए, बल्कि धीरे से उसे कम कर के खत्म कर दें, इसका प्रयास करें। result आपके सामने होगा।
    शिखर और श्रुति दोनों ने computer ma’am को बहुत सारा धन्यवाद दिया, और उनकी बताई बातों पर ध्यान भी दिया। कुछ साल की अथक मेहनत से सेजल अपने class में good student की category में आ गयी।

Thursday, 21 February 2019

Kids Story : हड़बड़ी में गड़बड़ी


समस्याजब बच्चे को आता सब हो, पर वो हड़बड़ी में काम गलत करता हो।

कहानी  : हड़बड़ी में गड़बड़ी


ध्रुव class 1st में पढ़ने वाला बहुत ही अच्छा लड़का था। हर चीज़ में सबसे आगे, चाहे बात पढ़ाई की हो या खेलकूद की, drawing की या किसी की help की। ध्रुव सबसे आगे रहा करता था। पर उसमे एक आदत बड़ी खराब थी। वो हमेशा यही सोचता था, कि सारे काम वो सबसे पहले कर ले, या सब काम उसे ही मिले। उसका नतीजा कभी कभी ये भी होने लगा, कि उसे सब सही आते हुए भी हड़बड़ी में गड़बड़ी हो जाती थी। और अपनी हड़बड़ी में वो, किसी की नहीं सुनता था, वो हमेशा यही मानता था कि उसे सब आता है। जिसके कारण उसे कभी कभी first position नहीं मिल पाती थी। और जब वो first नहीं आ पाता था, तब दुखी होता था।

उसकी teacher सिन्हा Ma’am, उसे बहुत ही पसंद करती थी।
123RF.com
क्योंकि वो उनकी class का सबसे होनहार बच्चा था। साथ ही वो बहुत मासूम और आज्ञाकारी भी था। पर उसकी हड़बड़ी की आदत से वो भी परेशान थीं।

एक दिन सिन्हा Ma’am ने उसकी Mumma को स्कूल बुलाया, और उन्हें सारी बात भी बताई। तो ध्रुव की Mumma बोलीं, मैं भी इसकी इस आदत से बहुत परेशान हूँ। कई बार इसे समझा भी चुकी हूँ, पर ये समझता ही नहीं है। पर ये आपको बहुत पसंद करता है, इसलिए इस पर आपकी बात का ज्यादा असर होगा।

ध्रुव की Mumma के जाने के बाद सिन्हा Ma’am सोचने लगी, कि अब उन्हें ही कुछ करना होगा।

कुछ दिन बाद school में teachers का लड्डू making competition था, उसमे सिन्हा Ma’am सबसे expert थीं। सारा स्कूल जानता था, कि वो हीं first आएँगी।

ध्रुव बहुत खुश था, कि उसकी Ma’am को ही trophy मिलेगी, इसलिए वो उनके लिए chocolates और flowers ले कर आया था। उसने सोचा था, जब Ma’am first आएँगी, तब वो उन्हें congratulation बोलेगा, और chocolates और flowers देगा, तो Ma’am खुश हो जाएंगी।

Competition शुरू हुआ, सभी teachers लड्डू बनाने लगे, वही हुआ जैसा सबको लगता था, सिन्हा Ma’am ने सबसे पहले लड्डू बना लिए। थोड़ी ही देर में result declare होना था। सब जगह सिन्हा Ma’am, सिन्हा Ma’am.... की आवाज़ गूंज रही थी। और उसमे सबसे तेज़ आवाज़ ध्रुव की थी।

पर ये क्या श्रेया Ma’am first आई थीं, और सिन्हा Ma'am second थीं। किसी को विश्वास नहीं हो रहा था, कि आखिर ऐसा हुआ क्यों? ना ही जज विश्वास कर पा रहे थे, और ना ही खुद श्रेया Ma’am

पर जो सबसे ज्यादा दुखी था, वो था ध्रुव। वो जज के पास stage पर चला गया। और उनसे बोला, मेरी Ma’am ने सबसे पहले लड्डू बनाए थे, तब आपने उन्हें first क्यों नहीं किया? जज ध्रुव की मासूमियत व सिन्हा Ma’am के प्रति उसका प्यार देखकर खुश हो गए। फिर वे बोले, बेटा उन्होंने ही सबसे पहले बनाए थे, पर हड़बड़ी में उनके कुछ लड्डू टेढ़ेमेढ़े थे। इसलिए हम चाह कर भी उन्हें first नहीं कर पाये।

ये सुन कर ध्रुव को बहुत ही ज्यादा दुख हुआ, वो नीचे आ गया। उसने chocolates और flowers stage पर छोड़ दिये।

Principal ने वो उठा लिए, उन्हें समझ नहीं आ रहा था, आखिर क्या वजह थी, जो सिन्हा Ma’am second आयीं। उन्होंने सिन्हा Ma’am को अपने office में बुलाया, और उसकी वजह पूछी। तब सिन्हा Ma’am ने बताया, कि उन्हें competition हारने का कोई दुख नहीं है। ऐसा उन्होंने ध्रुव को समझाने के लिए किया था, कि कोई कितना ही expert क्यों ना हो। हड़बड़ी में किया गया काम गड़बड़ी का ही होता है।

Principal ने कहा, सिन्हा Ma’am आप बहुत अच्छी हैं, हर student आपकी जैसी teacher चाहता है। इसके बाद principal ने उन्हें chocolates और flowers दे दिये। और कहा आप इसे deserve करती हैं। मैं ईश्वर से प्रार्थना करूंगा कि आप का प्रयास सफल रहा हो।

अगले दिन से ध्रुव ने हड़बड़ी करनी छोड़ दी, अब वो हमेशा first आने लगा था।  जब ध्रुव class 10th में भी first आया, तब principal ने उसे अपने office में बुलाया, और उसे उस दिन के competition के पीछे का राज बताया।

ध्रुव अगले दिन बहुत बड़ा bouquet और बहुत सारी chocolates ले कर सिन्हा Ma’am के पास गया। उसकी आँखों से लगातार  आँसू बह रहे थे। Ma’am अगर आप उस दिन नहीं हारी होतीं, तो मैं कभी जीत नहीं पाता। आपकी एक हार ने मुझे जीतना सिखा दिया। आप ने मुझे सीखा दिया, कि कोई कितना भी expert क्यों ना हो पर, हड़बड़ी करने से बस गड़बड़ी ही होती है। उसे देखकर सिन्हा Ma’am ने उसे गले लगा लिया।