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Thursday, 29 October 2026

Poem : इस करवाचौथ व्रत

दूर बैठे हैं पति तो, सखी ईश्वर से कर रही मनुहार।

हे ईश्वर, लौट आए पति तो करवाचौथ का व्रत पूर्ण हो हर बार…

इस करवाचौथ व्रत 


बैठे हो जो दूर जाकर,

जिंदगी में दूर तलक, 

तन्हाई दिखाई देती है।

जो आगोश में लेते हो,

तो जिन्दगी में हर तरफ, 

शहनाई सुनाई देती है।।

गुमसुम गुपचुप हम,

कब तक बैठे रहेंगे?

एक दूसरे से दूर रहकर,

विरह वेदना सहते रहेंगे?

खत्म हो अब अश्कों का तराना,

मिलन हो फिर से हमारा।

गूंजे फिजाओं में हमारे,

प्यार का अफसाना।।

कहते हैं कि पूरे मन से मांगो,

तो पूरी कायनात भी साथ आती है।

करने पूरी दिल की हसरत,

वो भी साथ निभाती है।।

तो चलो हम इसे आजमाते हैं,

अपनी दुआओं के साथ।

कायनात की शक्ति भी मिलाते हैं,

देखते है कि हमारे नसीब में, 

क्या-क्या आता है।

क्या छूटा हुआ साथ?

एक बार फिर से मिल पाता है, 

इस करवा चौथ पर यही है

ईश्वर से प्रार्थना,

मिल जाए साथ पिया का,

दिल से यही है आराधना।।


हे देवी माता, करवाचौथ व्रत पर सभी सुहागिनों को अपने पति का साथ और प्यार प्रदान करें।

क्योंकि जब हो पति-पत्नी का साथ, तभी हो करवाचौथ व्रत की पूर्णता का एहसास।

आप सभी को करवाचौथ व्रत पर विशेष शुभकामनाएँ!

Tuesday, 20 October 2026

Poem : बस एक अपराध

आज शारदीय नवरात्र का समापन है, माँ दुर्गा और भगवान श्रीराम के विजयादशमी पर्व के साथ।

माँ दुर्गा और भगवान श्रीराम की कृपादृष्टि सदैव बनी रहे!

बस एक अपराध


राम और रावण के युद्ध में,

हुआ था बहुत रक्तपात।

रावण के अहंकार ने,

पूरा वंश कर दिया समाप्त।।


सोने की थी लंका उसकी,

राज्य में थी खुशियाँ अपार।

बस एक ही गलती से,

सब हुई तार-तार।।


त्रिकाल दर्शी, प्रकांड विद्वान,

भक्त शिरोमणि, था बहुत महान। 

सब क्षणभंगुर हो गया था

 पर-स्त्री का जब किया अपमान।।


पर, क्या एक अपराध ही,

होता है सब पर भारी?

शायद क्षम्य हो जाता,

गर साधु वेष न‌ धरता अहंकारी।।


उस अपराध में शामिल था,

संत समाज का भी अपमान।

जिन्हें समझा जाता है,

 ईश्वर के समान।।


गर वो, एक अपराध न करता वो,

साधु रूप न धरता वो।

तो इस तरह युगों-युगों तक, 

अपराध बोध में न जलता वो।।


आइए, हम सब प्रभु श्रीराम से प्रार्थना करें कि हमें छोटे-बड़े सभी पापों से मुक्त रखें और अपने श्रीचरणों में रखकर हमारी भक्ति स्वीकार करें।

जय श्रीराम!

Friday, 4 September 2026

Poem : तुम हुए साकार

मेरी बेटी अद्विका ने brush से उकेर कर नारायण के निराकार रूप को कान्हा के साकार रूप में बनाया।

तो मन बरबस ही उस ओर खिंचा चला गया और कलम ने यह भाव उकेर दिए, आज जन्माष्टमी महोत्सव के पावन पर्व पर उसी को साझा कर रहे हैं…

तुम हुए साकार


तुम निराकार,

तुम हुए साकार,

नारायण, कान्हा बनकर।


मुरली की तान,

मीठी मुस्कान,

नटवर गिरिधारी बनकर।


मोरपंख का मान,

भक्तों की शान,

श्याम वर्ण कृष्णा बनकर।


लकुटी को बांध,

दिया सुख का भान,

रक्षक बनवारी बनकर।


तुम निराकार,

तुम हुए साकार,

नारायण, कान्हा बनकर।


आप सभी को जन्माष्टमी के पावन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएँ!

Wednesday, 29 July 2026

Poem : हे गुरु, करूँगा मैं इसकी साधना

“गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिलै न मोष।

गुरु बिन लखै न सत्य को, गुरु बिन मिटै न दोष॥”

इस दोहे के साथ आज सद्गुरु महाराज को श्रद्धा के सुमन अर्पित कर रही हूं।

हे गुरु, करूँगा मैं इसकी साधना


जब मोह-माया में था मैं मस्त,

जीवन था तब अस्त-व्यस्त।

मनुष्य जीवन का नहीं था भान,

किस कारण मिला है? नहीं था ज्ञान। 

सुख, समृद्धि और सफलता,

स्वार्थ सिद्धि और प्रफुल्लता,

इसी को रहा था जीवन मान।

सच्चे उद्देश्य को नहीं रहा था जान।

तभी मिली एक सुदृढ़ छत्रछाया,

जिसने आत्मज्ञान जगाया।

मनुष्य जीवन का बताया मोल,

कहा, होता यह जीवन अनमोल। 

मनुष्य जीवन नहीं होता है खुद को पाना,

होता इसमें आत्मा को ईश्वर से मिलना।

हे गुरु, करूँगा मैं इसकी साधना,

आपसे है बस यही प्रार्थना।

जब तक न मिले हरि द्वार, 

करते रहना प्रेरित हर बार… 


गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर मेरा शत-शत प्रणाम स्वीकार करें 🙏🏻

Thursday, 2 April 2026

Poem : हनुमान जी का जन्मोत्सव

पवनपुत्र, मारुति, केसरी नंदन, अंजनी सुत, संकटमोचन, महावीर, बजरंग बली, ऐसे और बहुत से नामों के स्वामी भक्त शिरोमणि हनुमानजी के जन्मोत्सव पर विशेष शुभकामनाएँ! 

हे संकटमोचन, हर कष्ट हरो, हर एक को सुखी करो।

पूरे संसार में सिर्फ हनुमानजी ही हैं, जिनका जन्मोत्सव, साल में दो बार मनाया जाता है। पर क्यों?

इसे ही कविता में ढालने का प्रयास किया है। आइए इस कविता के माध्यम से उनका आशीर्वाद प्राप्त करें…

हनुमान जी का जन्मोत्सव


ईश्वर जो हैं, सर्व शक्तिमान, 

भक्तशिरोमणि हनुमान। 

क्यों दो-दो दिन होता है,

उनके जन्मोत्सव का प्रावधान?


एक कार्तिक, एक चैत्र, 

क्या दोनों एक समान? 

क्यों दो-दो दिन होता है,

उनके जन्मोत्सव का प्रावधान?


कार्तिक मास की चतुर्दशी को, 

भए प्रगट वीर हनुमान।

उनके जन्मोत्सव का यही है 

शुभ प्रथम प्रावधान।। 


पिता केसरी, माता अंजना, 

मारुति रखा था नाम। 

छोटे से पवनपुत्र 

करते थे बड़े-बड़े काम।।


भूख की पीड़ा से पीड़ित, 

हो रहे थे व्याकुल परेशान।

सूर्य को‌ ही निगल गये

वो, फल आम का जान।।


इन्द्र ने करके व्रज प्रहार, 

किया सूर्य निकालने का काम। 

टूटी इससे मारुति की ठुड्ढी,

तब से वो कहलाए हनुमान।। 


कुपित हो गये पवनदेव,

पुत्र की ऐसी गति जान।

नहीं रहेगी वायु कहीं भी,

गर पुत्र में फिर न आए प्राण।। 


ईश्वरीय आशीष से,

मारुति में आ गयी जान।

चैत्र की पूर्णिमा थी उस दिन, 

हुआ जब दूसरे जन्म का प्रावधान।। 


दिन विशेष दोनों ही,

दोनों ही एक समान। 

इसलिए ही जन्मोत्सव के

उनके हैं दो-दो प्रावधान।।


हनुमान जी की कृपा से, 

होते सफल, सुजान। 

प्रातः स्मरण जो करे उनका,

उसका सदा होए कल्याण।।


आप सभी को हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ।


हनुमान जी से जुड़ी हुई और जानकारी प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए links पर click करें -

Sunday, 15 February 2026

Bhajan : भोलेनाथ जी

भोलेनाथ जी


हाथ जोड़कर खड़े भक्त हैं

सुन लो भोलेनाथ जी

कृपा दृष्टि कर दो हम-सब पर

अरज लिए हैं आज जी

ओ शंभू नाथ जी

हाँ भोलेनाथ जी - 2


जब तुम हो शिरोधार्य मेरे 

फिर क्यों विपदा मुझको है घेरे 

त्रिशूल उठाकर कर दो 

तुम उन सबका नाश जी 

ओ शंभू नाथ जी 

हाँ भोलेनाथ जी -2 


देवों के देव हो तुम ही 

त्रिकाल, महाकाल जी

शरण तुम्हारे बैठे हैं हम

भक्ति करो स्वीकार जी

ओ शंभू नाथ जी 

हाँ भोलेनाथ जी - 2 


शिव गौरा के पवित्र मिलन से 

बढ़कर कुछ नहीं बात जी

आई अनोखी रात जी

शिवरात्रि है आज जी 

ओ शंभू नाथ जी 

हाँ भोलेनाथ जी -2 



"ॐ नमः पार्वती पतये हर हर महादेव" 



आप सभी को महाशिवरात्रि पर्व शुभ हो, महादेव और माता पार्वती का आशीर्वाद हम सब पर सदैव बना रहे 🙏🏻 

Tuesday, 26 August 2025

Poem: हरतालिका तीज निराली

शिव शम्भू और मां पार्वती की कृपा सदैव बनी रहे 🙏🏻 🙏🏻 

सभी को हरतालिका तीज की हार्दिक शुभकामनाएँ 💐


हरतालिका तीज निराली

 



आई हरतालिका तीज निराली 

सुहागिनों का शुभ करने वाली 

हरा श्रृंगार, हर ओर हरियाली 

मन-मस्तिष्क में सुख भरने वाली 


कठिन तप, अटूट विश्वास 

शिव पार्वती की कृपा अपार 

सभी सुहागन व्रतों में इसको

सबसे अधिक बनाए खास 


प्रेम, भक्ति और तपस्या का

सजनी करती इसमें श्रृंगार 

अलौकिक प्रदीप्ति से 

दमके उसका घर संसार 


काले मेघ, घनघोर घटाएं 

मन में प्रेम प्रीत जगाएं 

साजन के संग मिलकर 

आओ यह शुभ पर्व मनाएं 

Saturday, 16 August 2025

Poem : The Story of Giridhar

This is the first time Advay has expressed a story in the form of a poem (written a ballad). Please motivate him if you do like it.

Happy Janmashtami 🎉

The Story of Giridhar


After scorching heat, comes pleasant rain,
When nature itself, waters the grain.
This monsoon season, has many folklores,
Full of lessons, worth several crores.


They are one of the earliest creations,
Passed along many several generations.
Let me narrate, one of the folktales,
Where arrogance, fury and anger fails.


The auspicious and holy place of Mathura,
Acted as the residence of Lord Krishna.
The villagers were farmers by occupation,
And revered Lord Indra, for apt irrigation.


One fine day, with a question in his head,
In an innocent voice, Lord Krishna said,
“Why worship Indra? What does he do,”
As if attempting, to get a small clue.


Maa Yashoda replied, “There’s a reason,
He is the god of the monsoon season.”
Krishna understood, but was dissatisfied.
To share his view, he moved a bit aside.


“Why not worship Mount Govardhan?
For our cattle, it is the grass garden.”
Everyone agreed, and did the same.
For Indra, it became a matter of shame.


As a result, he started raining exceedingly.
For seven days, it rained increasingly.
Nothing was harmed, he was surprised,
The savior’s God himself, he had realized.


He came down, in order to apologize,
But he couldn’t simply believe his eyes.
A boy held a mountain on his li’l finger,
None other than Shri Krishna, or Giridhar.

Thursday, 10 July 2025

Poem : गुरू ही हैं सब-कुछ

गुरू पूर्णिमा के पावन अवसर पर सदगुरु श्री श्री भवानी शंकर जी महाराज को मेरा शत-शत वंदन... 

यह काव्य पंक्तियां आपके श्री चरणों में समर्पित है।

पूज्य गुरुदेव आपकी कृपा हम सब पर सदैव बनी रहे 🙏🏻

गुरू ही हैं सब-कुछ


मेरे तो गुरू ही हैं सब-कुछ,

दूसरा न कोय।

उनकी चौखट है मंदिर,

हर पल दर्श जिसमें होय।।


उनके चरण रज में,

सिमटा सारा संसार। 

ह्रदय में है छवि बसी,

कृपा करें वो बारम्बार।। 


उनका कथन है मेरे,

जीवन का आधार।

उनसे ही मिलता,

मेरे जीवन को आकार।। 


दुनिया में उनकी इच्छा से आए,

उनमें ही मिल जाना है।

जीवन का है लक्ष्य यही,

चरणों में उनके जगह पाना है।।

Sunday, 3 November 2024

Poem : चित्रगुप्त महाराज

चित्रगुप्त महाराज


ब्रह्मा की काया से उपजे,

कलम लिए हुए हाथ।

पाप-पुण्य का लेखा-जोखा,

रहता है जिनके साथ।।


कायस्थ कुल,

के जन्मदाता।

ज्ञान, बुद्धि से,

इनका नाता।।


अति पराक्रमी,

अति तेजस्वी,

वो देव ही कहलाते हैं

।। चित्रगुप्त महाराज ।।


 परम परमेश्वर श्री चित्रगुप्त जी महाराज के श्री चरणों में मेरा सादर प्रणाम 🙏🏻🙏🏻

चित्रगुप्त पूजा, भाईदूज, व यमद्वितीया की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏻🎉

Friday, 6 September 2024

Poem‌ Devotional : हरतालिका तीज

 हरतालिका तीज 




व्रत में, व्रत कई,

फिर क्यों तीज महान?

कैसे हो कल्याण‌ इससे? 

सब क्यों करें इसका गुणगान..


नाम, हरण से आरंभ हुआ, 

तीन पर हुआ शेष।

जिसमें कुछ भी शुभ नहीं,

फिर कैसे यह है विशेष?..


महादेव को वरने के लिए, 

थीं, मां पार्वती परेशान। 

पिता को, शिव नहीं भा रहे,

कैसे वर दें, उनसे अपनी जान?..


स्वयंवर सजने लगा, 

देवों के आगमन के लिए। 

हिमवान भावविभोर थे,

पार्वती को दुल्हन बनाने के लिए..


देखकर व्यथीत पर्वती को,

सखियां सब हो रही हैरान। 

कैसे, क्या करें, कि पार्वती?

खिले पुनः पुष्प के समान..


हरण कर सखी का,

लें चलीं वनागमन को।

निष्प्राण देह को, 

प्रेम से जीवित करने को..


कठिन तप, अथाह प्रेम, 

व्रत, पूजन करने लगी।

शिव को, पति रूप में पाने को, 

पार्वती, यत्न सब करने लगी.. 


भादो का था मास,

व्रत हरतालिका तीज।

अपने अथक प्रयास से, 

मां ने, महादेव को लिया जीत.. 


शिव पार्वती के मिलन का,

हैं यह पवित्र त्यौहार। 

इससे कुछ बढ़कर नहीं, 

जहां महादेव गए हार.. 


वर हों महादेव, 

वधू मां पार्वती।

बस यही है, 

हरतालिका तीज..


शिव पार्वती जी के अमर प्रेम के प्रतीक हरतालिका तीज व्रत की विशेष कृपा सभी सुहागनों को मिलें और सभी को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिले 🙏🏻 


हर हर महादेव 🚩

जय मां पार्वती की🌹


हरतालिका व्रत कथा को कविता में पिरोने का प्रयास मात्र है,  हे महादेव जी व माँ पार्वती आप की कृपा सदैव बनी रहे 🙏🏻 🙏🏻 

Monday, 26 August 2024

Bhajan (Devotional Song): कान्हा जी तुम आ जाओ

 कान्हा जी तुम आ जाओ


कान्हा जी तुम आ जाओ 

आके बाल रूप दिखाओ


कान्हा जी तुम आ जाओ   

माखन का भोग लगाओ 


कान्हा जी तुम आ जाओ 

मुरली की मीठी तान सुनाओ 


कान्हा जी तुम आ जाओ 

आ करके रास रचाओ


कान्हा जी तुम आ जाओ 

ग्वालों संग गाय चराओ


कान्हा तुम आ जाओ 

सभी को संकट से बचाओ


कान्हा जी तुम आ जाओ 

भक्तों पर किरपा बरसाओ


कान्हा जी तुम आ जाओ 

मुक्ति का मार्ग दिखाओ


कान्हा जी तुम आ जाओ


आप सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏻 

प्रभू श्री कृष्ण जी की कृपा सदैव हम सब पर बनी रहे 🙏🏻🙏🏻



💐🙏🏻हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की💐🙏🏻

Monday, 8 July 2024

Poem : देखा है जगन्नाथ जी को

भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा प्रारंभ हो चुकी है। इस समय उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में अलग ही समा है। लोग भक्तिमय होकर प्रभू में ही लीन हैं। रथयात्रा का रथ मेला भी लगता है, जो कि बहुत ही अनूठी अनुभूति देता है।

जब उनका रथ चलता है, तो भीड़ उमड़ पड़ती है, कि बस एक पल मिल जाए और उनके रथ की रस्सियों को हाथ लगाने को मिल जाए।

आज उन्हीं पलों को समेटे हुए एक कविता साझा कर रहे हैं, आनंद लीजिए…

देखा है जगन्नाथ जी को

आज हमने,

जगन्नाथ जी को,

बचपन में,

जाते हुए देखा है।

उन्हें नन्हे हाथों को,

बनाते हुए देखा है।।


देखा है उन्हें,

आज हमने,

बच्चों की टोली में।

झूमते-नाचते,

मस्ती करते हुए, 

लोहे की ट्रोली में।।


देखा है उन्हें,

आज हमने,

मंदिर में, पंडाल में।

जगत के नाथ, 

जगन्नाथ जी को,

भक्तों के साथ में।।


लेकर सुभद्रा, बलराम को, 

चलता है उनका रथ,

तो साथ भक्ति चलती है।

साथ चल रहे सब लोगों के,

रोम-रोम में मिलती है।।


है वो रथ नाथ‌ का,

पर फूल सा लगे,

रज उसके पहिए की,

स्वर्ग की धूल सी लगे।

सौभाग्य है उसका,

जिसको वो छूने को मिले।।


जगन्नाथ जी, सुभद्रा और बलराम के शुभ आगमन पर हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏻

जगन्नाथ रथयात्रा पर विशेष article 👇🏻

जगन्नाथ रथयात्रा प्रारंभ और विशेषता

Monday, 25 March 2024

Bhajan (Devotional Song) : होली खेल रहें हैं ब्रज में

होली का त्यौहार हो, रंगों की बौछार हो और उसमें राधा कृष्ण के प्रेम का इज़हार हो, तब ही तो होली का असली रंग नज़र आता है। और ऐसा कोई गीत हो तो वो दिल को भाता है।

बस इसी बात को ध्यान में रखते हुए आज का यह गीत श्री कृष्ण और राधा रानी के श्री चरणों में समर्पित है।

आइए इसका आनंद लेते हैं।

होली खेल रहे हैं ब्रज में

 होली खेल रहें हैं ब्रज में,

कान्हा राधा के साथ।

कान्हा राधा के साथ,

लेकर हाथों में हाथ।।


होली है त्यौहार प्रीत का,

रंगों की रंगोली।

प्रेम के रंग में रंग गई राधा,

कृष्णा की वो होली।।


होली खेल रहें हैं ब्रज में,

कान्हा राधा के साथ।


कौन है अपना, कौन पराया,

होली में ना हो विचार।

प्रेम प्रीत में सबको रंग दे,

रंगों की बौछार।।


होली खेल रहें हैं ब्रज में,

कान्हा राधा के साथ।


दृश्य सुहाना देखकर,

सब उसमें ही खो जाएं।

अलग-अलग नहीं दिख रहे दोनों,

 एक नजर आएं।।


होली खेल रहें हैं ब्रज में,

कान्हा राधा के साथ।।


आप सभी को रंगों के त्यौहार, होली की हार्दिक शुभकामनाएँ 💐🎉

भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी हम सभी के जीवन को प्रेम-प्रीत, उमंग और सुख के रंग में रंग दें 🙏🏻🙏🏻

Thursday, 7 September 2023

Bhajan : आया आया है नंदलाला

भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं 💐

कान्हा, कन्हैया, गोविन्द, नंदलाला, मुरली वाला, गोपाला, अगिनत नाम पर हर रुप, हर अदा मनोहर और चाह सिर्फ एक कि श्री हरि के चरणों में स्थान मिल जाए🙏🏻🙏🏻 

आज का यह भजन प्रभू आपके श्री चरणों में समर्पित है 🙏🏻🙏🏻


आया आया है नंदलाला



नंदबाबा के घर में 

छाया उजाला-2


आया आया है नंदलाला -2 


मोहिनी मूरत सांवली सूरत- 2

कैसा है जादू डाला 


आया आया है नंदलाला -2  


मोहक हंसी से रीझें सबको -2

सबको बनाएं मतवाला 


आया आया है नंदलाला -2  


ठुमक ठुमक चलत कन्हैया -2

ऐसा है मुरली वाला 


आया आया है नंदलाला -2  


हर ओर यह शोर मचा है -2 

गोकुल धाम क्या खूब सजा है

दौड़े आए हैं गोपी ग्वाला


आया आया है नंदलाला


नंदबाबा के घर में 

छाया उजाला

आया आया है नंदलाला

आया आया है गोपाला 

आया आया है मुरली वाला


नंदबाबा के घर में 

छाया उजाला

आया आया है नंदलाला -2 



हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की.... 

जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏻

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Friday, 28 April 2023

Poem : ख़ामोशी की आवाज

 ख़ामोशी की आवाज




ख़ामोशी भी ख़ामोश नहीं रहती है,

गौर से गर सुनो तो,

ख़ामोशी भी बहुत कुछ कहती है।

उसकी भी अपनी एक आवाज़ होती है, 

और गर सुन सके‌ कोई उसे,

तो बस वही जिंदगी होती है।


जब रखता है मासूम मन, 

अपने स्कूल में पहला कदम।

उसकी ख़ामोश निगाहें,

ढूंढती है अपना बचपन।

गर सुन लेता है, 

उनकी ख़ामोशी,

कोई कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक।

वो बन जाता है उनके,

सपनो का रक्षक।

बच्चे उनके सानिध्य में,

उज्जवल भविष्य बनाते हैं।

ऐसे शिक्षक उन्हें,

जिंदगी भर याद आते हैैं।


ख़ामोशी भी ख़ामोश नहीं रहती है,

गौर से गर सुनो तो,

ख़ामोशी भी बहुत कुछ कहती है।


जब होती है बेटी विदा, 

तब पिता की आंखों में नमी,

और जुबान पर ख़ामोशी होती है,

वो ख़ामोशी बेटी से जुदा होने की,

सारी व्यथा कहती है।

गर सुन सके बेटी, यह तो,

वो पिता के और नजदीक होती है।


ख़ामोशी भी ख़ामोश नहीं रहती है,

गौर से गर सुनो तो,

ख़ामोशी भी बहुत कुछ कहती है।


जब आती है नई नवेली दुल्हन, 

अपने ससुराल की दहलीज पर,

उसकी ख़ामोश नजर पड़ती है घर पर।

वो ख़ामोशी उसके मन में चलती, 

अनेकों उलझन को बंया करती है।

गर सुन सके उसकी सास यह, 

बहू उसके नज़दीक होती है।


ख़ामोशी भी ख़ामोश नहीं रहती है,

गौर से गर सुनो तो,

ख़ामोशी भी बहुत कुछ कहती है।  


जब हो साजन या सजनी ख़ामोश,

कह ना सके लब से पर,

आंखें कहना चाहती हों बहुत कुछ,

तब उस ख़ामोशी को पढ़ लेना।

उनकी ख़ामोश व्यथा समझ लेना, 

जो यह समझ पाता है।

उनका जीवन सुख से भर जाता है,

उनकी अमर हो जाती प्रेम गाथा है।


ख़ामोशी भी ख़ामोश नहीं रहती है,

गौर से गर सुनो तो,

ख़ामोशी भी बहुत कुछ कहती है।  


जब हो जाते हैं, मां-पापा बुजुर्ग, 

बच्चों के इंतजार में हो जाते ख़ामोश। 

गर सुन सके बच्चे उनकी ख़ामोशी, 

उनके स्नेह और आशीष के साथ,

सफलताओं के शीर्ष पर पहुंच जाते हैं,

जीवन में हर ख़ुशी पाते हैं।


ख़ामोशी भी ख़ामोश नहीं रहती है,

गौर से गर सुनो तो,

ख़ामोशी भी बहुत कुछ कहती है। 


आप भी एक बार सुनिएगा, ख़ामोशी अपने माता-पिता, अपने सास-ससुर अपने पति, अपनी पत्नी, अपने बच्चे, अपने दोस्तों की, सच मानिए, जिस दिन से आप ख़ामोशी भी सुनने लगेंगे, आप की bonding उनसे और बढ़ जाएगी क्योंकि


ख़ामोशी भी बहुत कुछ कहती है,

उसकी भी अपनी एक आवाज़ होती है।

और गर सुन सके‌ कोई उसे,

तो बस वही जिंदगी होती है।


बहुत सारे प्यार के साथ, अपने सभी viewers के लिए ईश्वर से प्रार्थना है कि उनके जीवन में सुख शांति और सौहार्द्र बना रहे 🙏🏻


यह अप्रैल की last post है, तो सोचा कि पांच साल के पूरे होने पर यह कोशिश बढ़ा दें कि अपने viewers की ख़ामोशी भी सुन सके।

जिससे हम लोगों की bonding और मजबूत हो जाए, तो आज आपकी नज़र में ख़ामोशी की आवाज साझा की है 🙏🏻🙏🏻

Sunday, 15 January 2023

Poem: उत्तरायण मास

उत्तरायण मास

चम चम चमके

सूर्य देवता 

रोशन करें संसार


उनसे ही तो 

है यह दुनिया 

वो ही है जीवन आधार 


अपनी चमक

 हमको भी दे दो 

सफलता मिले अपार  


आरोग्य रहें

दुनिया में सब ही  

प्रसन्नता रहे हर द्वार


सुख समृद्धि 

मिले सभी को 

संपन्नता बारम्बार  


उत्तरायण मास के

पवित्र दिवस पर

सूर्य देव को सादर नमस्कार 


आप सभी को उत्तरायण मास पर हार्दिक शुभकामनाएं 🌅

सूर्य देव सभी पर अपनी अनुकम्पा बनाएं रखें, सभी जगह सुख समृद्धि और प्रसन्नता रहे 🙏🏻🙏🏻

Tuesday, 30 August 2022

Poem : हरतालिका तीज

हरतालिका तीज 


हरतालिका तीज 

है अजब निराली;

सखियों द्वारा, माँ पार्वती 

को हरने वाली।

हरण था, माँ पार्वती का,

शिव शंभू के वास्ते।

पवित्र प्रेम प्राप्ति के लिए,

छोड़ आई महलों के रास्ते।

प्रेम अटटू था,

थी शिव शंभू को पाने की आस,

त्याग दी माँ ने,

सदियों तक अपनी भूख प्यास।

कठोर तप था, था अडिग निश्चय,

फिर कैसे भोलेनाथ उन्हें ना मिलते...

माँ पार्वती के हरण से,

महादेव के वरण तक की,

अनोखी प्रेम की गाथा है,

हरतालिका तीज का व्रत,

पवित्र व्रत अनुराग का;

सिद्ध व्रत सुहाग का।


अखंड सौभाग्य की कामना के परम पावन पर्व हरतालिका तीज की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं🙏🏻💐

माँ पार्वती और भगवान शंकर की कृपा सब पर बनी  रहे🙏🏻🙏🏻

Thursday, 9 June 2022

Poem : गंगा दशहरा

हम हिन्दुओं में बहुत से तीज-त्योहार मनाए जाते हैं, जिनकी अलग-अलग विशेषताएं हैं।

आज गंगा दशहरा है। इसे क्यों मनाया जाता है, तथा गंगा माँ के पूजन का क्या फल है।  इसको काव्य बद्ध करने का प्रयास किया है, माँ की अनुकम्पा सदैव बनी रहे 🙏🏻🙏🏻

आइए उसका आनन्द लें।


गंगा दशहरा


भागीरथ महाराज ने,

अपने पूर्वजों को तरने हेतु।

माँ गंगा का, कठिन तप किया,

माँ गंगा ने प्रसन्न होकर,

तब पृथ्वी पर अवतरण लिया।।

था वो शुभ दिवस, 

माँ के अवतरण का।

ज्येष्ठ मास के, शुक्ल पक्ष की,

दशमी तिथि में, हस्त नक्षत्र का।।

था प्रबल और प्रचंड,

माँ गंगा का स्वरूप।

पृथ्वी पर हर तरफ था,

जल निमग्न का ही रूप।।

महादेव की अराधना, 

तब भागीरथ ने की। 

होकर प्रसन्न, भोलेनाथ ने, 

जटाओं में गंगा जी भर ली।।

बस मात्र एक धारा को, 

पाप हरण के लिए।

अमृत रूप में,

पृथ्वी में प्रवाहित किया।।

गंगा दशहरा के दिवस,

जो माँ गंगा का पूजन करे।

तीन दैहिक, चार वाणी,

तीन मानसिक, जैसे

दस पाप से उसको मुक्ति मिले।।

तब से ही इस दिवस को,

नाम गंगा दशहरा दिया।

माँ के सम्मान में,

इस दिवस को रख दिया।।


आप सभी को गंगा दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ

गंगा माँ, पृथ्वी पर सदैव जल रुपी अमृत प्रदान करें 🙏🏻 💐

Monday, 30 May 2022

Poem : वट सावित्री का व्रत

आप सभी को वटसावित्री व्रत पर हार्दिक शुभकामनाएं 💐 सभी को अखण्ड सौभाग्य प्राप्त हो 🙏🏻🙏🏻


 वट सावित्री का व्रत




वट सावित्री का व्रत नहीं,

 केवल व्रत सुहाग का।

इसमें अमिट प्रेम भी शामिल है,

सावित्री के अनुराग का।।


वो थी, अनोखी, अजब निराली,

थी वो हठी बड़ी मतवाली।

जिसने मौत को भी हरा दिया,

वो थी सावित्री भागों वाली।।


नारद जी ने उसको,

विवाह पूर्व चेताया था।

सत्यवान है अल्प आयु,

यह उसको बड़ा समझाया था।।


वो बोली तब, नारद जी से,

अब वर, नहीं मैं बदलूंगी।

उनको ना जाने दूंगी खुद से पहले,

मैं यमराज से लड़ लूंगी।।


यह राजकुमारी महलों की,

वो गलियों में रहने वाला।

कोई जोड़ नहीं है उनका,

यह विवाह नहीं चलने वाला।।


हर हाल में कैसे खुश रहना है,

उसने सबको दिखा दिया।

पति को पुनः जीवित कर के,

यमराज को भी हरा दिया।।


सावित्री के अमर प्रेम को,

वट सावित्री व्रत कहते हैं।

आज के दिन बरगद पूजन कर,

अखंड सौभाग्य का आशीष लेते है।।