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Saturday, 10 February 2024

Trip Review : Amritsar - सफर देशभक्ति और आस्था का - 5

 Trip Review : Amritsar - सफर

Trip Review : Amritsar - सफर देशभक्ति और आस्था का 

Trip Review : Amritsar - सफर देशभक्ति और आस्था का -2

Trip Review : Amritsar - सफर देशभक्ति और आस्था का -3  

Trip Review : Amritsar - सफर देशभक्ति और आस्था का - 4 

अब तक आपको तलवार म्यूजियम, वाघा बॉर्डर, रामतीरथ, golden temple, लाल माता देवी मंदिर और सड्डा पिंड के विषय में बता चुके हैं, अब आगे...

Trip Review : Amritsar - सफर देशभक्ति और आस्था का - 5  



सड्डा पिंड के बाद हमारी सवारी चल दी, अमृतसर के एक और खूबसूरत मंदिर की ओर, जो है दुर्गियाना मंदिर... 

दुर्गियाना मंदिर 


Golden temple की तरह ही दुर्गियाना मंदिर भी सरोवर के बीच में था, और उसी की तरह बहुत सुंदर, पवित्र माहौल और असीम शांति, वहां भी थी। 

वहां पर मूर्तियां, इतनी सुन्दर थीं कि उनसे नजर ही नहीं हट रही थी।

मंदिर में कोई धक्का मुक्की नहीं, कोई किचकिच नहीं, पंडितों का किसी प्रकार का कोई प्रोपेगंडा नहीं...  

अत्यंत सुख की अनुभूति हुई वहां, आत्मा तृप्त हो गई...

गोविन्दगढ किला  


वहां दर्शन करने के बाद हम चल दिए गोविंदगढ़ किला...(Gobindgarh fort)

चूंकि शाम हो चुकी थी और हम लोग थक भी
गये थे तो fort घूमने का हमारा कोई विचार नहीं था। पर हम वहां गए थे क्योंकि हमने सुना था कि वहां पर होने वाले shows बहुत बढ़िया होते हैं। ध्यान रखिएगा सारे shows everything में होते हैं।

वहां पहुंच कर पता चला कि वहां तीन तरह के टिकट थे। एक केवल fort घूमने के, दूसरा including show, तीसरा including meal, उनकी cost भी उसके according मंहगी होती गई। 

क्योंकि हमें fort के बाद golden temple जाना था और वहां लंगर प्रसाद ग्रहण करना था, अतः हमने without meal वाली टिकट ली थी। 

जिसमें shows, events, games and ridings शामिल थी।

हमने वहां सब बहुत enjoy किया। 7d show and laser show बहुत amazing था। Games and riding भी बहुत मजेदार था। 

वहां AI based games भी थे, जिनका अलग से payment करना था, बच्चों ने उन्हें भी खेला और बहुत enjoy किया। 

वहां पर खाना कैसा था, और क्या-क्या dishes थीं, हम नहीं बता सकते हैं, हां welcome drink में soups थे, जिन्होंने meal वाला टिकट लिया था, उनको serve किया जा रहा था।


उसके बाद हम लोग golden temple के लिए निकल गये थे, जिसके बारे में हम आपको पहले ही बता चुके हैं। 

तीसरे दिन हम लोगों के जो point छूटे थे वो cover करने थे। जिसमें जलियांवाला बाग और partition museum था। 

जलियांवाला बाग  




तो बस उस दिन सुबह सबसे पहले हम लोग, जलियांवाला बाग गये थे। वहां ज्यादा समय नहीं लगा, क्योंकि वहां एक कुआं है, जहां वो भयंकर त्रासदी हुई थी, क्रूर जनरल डायर के द्वारा चलवाई गई गोलियों के निशान हैं, साथ ही कुछ gallery भी...

यहां पर show भी है उस त्रासदी का, जो evening में होता है, पर हम उसे नहीं देख पाए।


उसके बाद हम एक बार फिर golden temple गये, शायद कुछ भीड़ कम हो और हम लोग माथा टेक लें। पर नहीं, भीड़ अभी भी बहुत ज्यादा थी। अतः कुछ देर golden temple के प्रांगण में बैठ कर हमने वहीं से बाबा जी को शत-शत प्रणाम किया। 


अब चल दिए उस आखिरी जगह के लिए, जिसके लिए यही कहेंगे कि अगर आप अमृतसर में वहां नहीं गए तो आप ने भारत की उस घड़कन को नहीं समझा, जब हमारे देश ने सबसे कठिन पल जिया था।

यह वो पल था, जब भारत को अपने उस पल की खुशियां मनानी थी, जिसका वो बरसों से सपना देख रहा था, जिसके लिए, उसके ना जाने कितने लाल ने हंसते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। 

आजादी का पल... 

पर उस पल का भारत जश्न भी नहीं मना पाया था कि  भयंकर यातना देने वाली त्रासदी ने भारत को जकड़ लिया था। वो है partition.... 

Partition museum  



हम बात partition museum की कर रहे हैं। वहां उस पल को जैसे आज भी जीवंत कर के रखा है। वहां जाने पर उस त्रासदी को देखकर, महसूस कर, के एक सिहरन सी दौड़ गई। 

मन में रोम रोम एक तीव्र वेदना से भर गया। आंखें नम हो गई। वहां बजती हुई train की whistle, उसका announcement, आरी से किया हुआ विभाजन, घर की गिरीं हुई ईंटें, headphones में उस समय की आवाजें, वहां रखे सामान और उनकी कहानियां। और भी बहुत कुछ... 

वो सब इतनी सजीव और मार्मिक हैं कि अगर आप उन सबको देख कर आएंगे तो आपको पता चलेगा कि भारत ने बहुत कठिन समय व्यतीत कर के आज का समय पाया है, आज का भारत, धरोहर है उन सपनों की, जो वो हमें सौगात में दे गए थे। उनका मान करें, अपने देश का सम्मान करें और हर वो काम करें, जो देश को उन्नत, सुदृढ़ और समृद्ध करें...

इसके साथ ही हमारा अमृतसर की आस्था और देशभक्ति से परिपूर्ण सफ़र समाप्त हुआ। पर हम अपने साथ आशीर्वाद और देशभक्ति को लेकर लौटे और आप सबसे कहेंगे कि एक बार अपने बच्चों को वहां जरूर लें जाएं, जिससे हमारे बच्चे, देशभक्ति और आस्था दोनों से जुड़े... 

एक प्रयास था कि आपको अपने देश की संस्कृति और परंपरा से जोड़े, थोड़ा लम्बा हो गया, पर हमारी कोशिश थी कि आपको एक एक बात ऐसी बताएं कि जब भी आप वहां जाएं, आपकी यात्रा मंगलमय हो और वो जीवन में एक मीठी याद बन कर रहे। 

जय हिन्द जय भारत 🇮🇳

Thursday, 8 February 2024

Trip Review : Amritsar - सफर देशभक्ति और आस्था का -4

Trip Review : Amritsar - सफर देशभक्ति और आस्था का 

Trip Review : Amritsar - सफर देशभक्ति और आस्था का -2

Trip Review : Amritsar - सफर देशभक्ति और आस्था का -3 

अब तक आपको तलवार म्यूजियम, वाघा बॉर्डर, रामतीरथ, golden temple के विषय में बता चुके हैं, अब आगे...

Trip Review : Amritsar - सफर देशभक्ति और आस्था का - 4  



माता लाल देवी मंदिर 



अगले दिन हम माता लाल देवी मंदिर गए, माता लाल देवी, वैष्णो माता रानी की बहुत बड़ी भक्त थीं। अतः उन्होंने अमृतसर में वैष्णो माता रानी जी मंदिर बनवाया, जिससे जब तक माता रानी के दरबार ना जा पाएं तो वहीं दर्शन कर लें। लाल माता मंदिर के ऊपर ही वैष्णो देवी मंदिर बना है। मंदिर बहुत अच्छा था, इसमें हम घूम-घूम कर आगे बढ़ते जा रहे थे, पूरा रास्ता बहुत अच्छे से समझाया गया था, और कोशिश की गई है कि वहां पहुंच कर आपको वैष्णो देवी मंदिर जैसा ही एहसास हो। 

अंत मे एक गुफा भी है, जिससे होकर माता रानी जी के दरबार में पहुंचते हैं।

हालांकि वैष्णो माता के दरबार सा, पूरी तरह तो नहीं लगेगा, लेकिन जब तक माता रानी का बुलावा नहीं आ जाता, यहां दर्शन करने जाना, सुख की अनुभूति प्रदान करता है।

उसके बाद हम लोग चल दिए अमृतसर की जान सड्डा पिंड की ओर...


सड्डा पिंड 


सड्डा पिंड अमृतसर में एक fun loving place है। इसका टिकट थोड़ा मंहगा ज़रूर है, पर यहां जाकर आपको पंजाब के पूरे culture के विषय में पता चल जाएगा।पंजाब की संस्कृति, विरासत एवं परंपराओं को दर्शाने के लिए एक अनोखे open air musium साड्डा पिंड में कलाकृतियों एवं इमारतों का दुलर्भ संग्रह देखने को मिलता है। लगभग 12 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में फैली इस जगह को पंजाब के ग्रामीण परिवेश को दर्षाने वाली जगह के रूप में विकसित किया गया है। 

वहां की दिलेरी, वहां का बांकपन, वहां का उल्लास, उत्साह और उमंग, वहां की बेबाकी, वहां का खान-पान, वहां की आस्था, वहां की देशभक्ति, वहां की मेहमाननवाजी, in short क्या है पंजाब...

यहां आप को बहुत कुछ ऐसा देखने को मिलेगा, जो आपने अपने बचपन में देखा होगा या बचपन की मीठी कहानियों में सुना होगा।

सड्डा पिंड का अर्थ है, हमारा गांव...

यहां पहुंच कर आपको लगेगा, जैसे आप किसी गांव में आ गए हैं। वहां आपके स्वागत में सबसे पहले आपको पंजाब का देशी या यूं कहें गांव के खाने का आनन्द मिलेगा। मस्त सरसों का साग और नर्म-नर्म मक्के की रोटी, ठंडी-ठंडी छाछ और गर्मागर्म स्वादिष्ट बाजरे की खिचड़ी, मठ्ठी मटर और मीठे चावल... यह सब देते हुए प्रसन्न और मस्त लोग, कि यह सब खाकर आप भी पंजाब के रंग में रंगने लगेंगे। खाना कितना है, और कितनी बार खा सकते हैं? यह तो आपके मन पर निर्भर करेगा... क्योंकि वो लोग तो बहुत प्रेम से परोसते जाएंगे।

पर ध्यान रखिएगा आगे होटल की शान वाले items भी आपके स्वागत के लिए lunch or dinner में आपका इंतजार कर रहे हैं। कहीं बहुत अधिक पेट भर जाने से आप उसका लुत्फ़ उठाने से वंचित ना रह जाए।

एक बात बता दें आपको, आप चाहें मौसम में जाएं या बेमौसम, आपके स्वागत के लिए सरसों का साग और मक्के की रोटी हमेशा तैयार मिलेगी। 

अंदर और बढ़ने पर एक के बाद एक event थे, एक से एक बढ़कर, अद्भुत और अनोखे। सबसे एक से एक जुड़े रहते हैं, एक ख़त्म होता है और दूसरा शुरू। पर हां एक भी छोड़िएगा नहीं, क्योंकि यहां छोड़ने पर फिर वो आपको कहां मिलेंगे पता नहीं?

आगे बढ़ने पर कुछ games थे। हर टिकट पर per head दो games free थे। हम चार थे तो 8 games free थे तो बच्चों ने उसमें भी खूब enjoy किया, हमने भी। उसके अलावा झूले भी बहुत तरह के थे, उसका भी अलग आनन्द था।  

साड्डा पिंड में स्थानीय कुम्हारों, लोहारों, बुनकरों एवं अन्य कारीगरों के खोखे भी बने हुए हैं, जिनमें उन्होंने अपना सामान प्रदर्शित किया है। यहां पर फुलकारी दुपट्टे, जूतियां, परांदियां, संगीत वाद्य, मिट्टी के खिलौने एवं कृषि औज़ार आदि ख़रीदे जा सकते हैं। 

यहां पर, camel ride, bullock cart ride, etc भी थी, जो reasonable price पर थी। पर वहां इतने event थे और हमारे पास time कम था इसलिए हमने वो rides नहीं ली।

क्योंकि हमें उस दिन और जगह भी जाना था तो हम lunch के लिए, उनके restaurant area में चले गए और वहां पर lunch enjoy किया। वहां भी बहुत varieties थी और taste लाज़वाब.. खाने में जो जितना मन करे उतना खाएं। बस एक बार serve कर लीजिए और अपनी table पर चले जाएं, उसके बाद आपको जो चाहिए वो आपकी table पर पहुंचा दिया जाएगा। वहां की दाल मखनी तो बेमिसाल थी, क्योंकि उसमें चूल्हे पर बनी सुगंध बेमिसाल थी...

अच्छा ध्यान रखिएगा कि restaurant में अंदर जाने के लिए आपके हाथ में band होना बहुत ज़रूरी है, जो कि टिकट लेने के साथ ही बांध दिया जाता है और restaurant से बाहर निकलते ही काट दिया जाता है।

सड्डा पिंड का आनन्द लेकर हमारा सफ़र बढ़ चला, दूसरी मंजिल की तरफ...

Wednesday, 7 February 2024

Trip Review : Amritsar - सफर देशभक्ति और आस्था का -3

अब तक के trip review में हम आपको तलवार म्यूजियम और वाघा बॉर्डर के बारे में बता चुके हैं। 

Trip Review : Amritsar - सफर देशभक्ति और आस्था का 

Trip Review : Amritsar - सफर देशभक्ति और आस्था का -2

चलिए अब आगे के सफ़र में चलते हैं -

Trip Review : Amritsar - सफर देशभक्ति और आस्था का -3 


राम तीरथ 




Border से चल कर हम लोग रामतीरथ‌ या लवकुश मंदिर गये। यह वो जगह है, जहां त्रेतायुग में महर्षि वाल्मीकि जी का आश्रम था और माता सीता उस समय उनके पास थी, जब वो pregnant थी। 

इसी आश्रम में उन्होंने अपने पुत्र लव को जन्म दिया था और महर्षि वाल्मीकि जी के आशीर्वाद से कुश को भी पुत्र रूप में प्राप्त किया था।

जब प्रभु श्री राम जी ने अश्वमेध यज्ञ किया था तब यहीं पर लव व कुश ने उनके घोड़े को पकड़ा था तथा हनुमान जी भी दोनों बच्चे के प्रेम और प्रभु श्री राम जी की भक्ति में यहीं बंधे थे। 

यह आश्रम रुपी मंदिर बहुत सुंदर है। एक और विशेषता है, अमृतसर के बड़े मंदिरों की, कि वो सरोवर के बीच में स्थित होते हैं। और यह विशेषता वहां के मंदिरों में चार चांद लगा देती है। 

साथ ही सरोवर का हल्का हल्का बहता हुआ पानी एक विशेष शांति और जीवटता उत्पन्न करता है। जिससे मंदिर का वातावरण पूजा अर्चना और positive vibes के लिए अनुकूल हो जाता है।

यहां के पवित्र माहौल के बाद, हमने golden temple जाने का विचार बनाया था। 

पर हमारे car driver ने कहा कि आज बाबा दीप सिंह जी का जन्म हैं, अतः अत्यधिक भीड़ होगी। अतः आज के बजाए कल का program रखें। 

तो हम उस दिन वापस अपने hotel आ गये। पर हम आपसे यही कहेंगे कि आप पहले दिन ही golden temple जाएं और माथा टेक लें। क्योंकि वहां माथा टेकने जाना बहुत आसान नहीं है। बहुत भीड़ होती है।

Golden temple  ‌


Golden temple, बहुत सुन्दर, बहुत भव्य और अत्यंत दिव्य। वो जितना खूबसूरत है उतना ही शांत और पवित्र भी। उसका वर्णन करना सूरज को दीपक दिखाना है। पर अपनी आस्था और श्रद्धा के दीपक द्वारा यह धृष्टता कर रहे हैं। बाबा जी, हमारे आस्था के फूल स्वीकार करें। 

यह हम लिखकर उनके श्रीचरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित कर रहे हैं 🙏🏻

वहां रहकर समय का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है, क्योंकि आप ऐसे सुख और आनंद की अवस्था में रहेंगे कि आप को अपनी सुध-बुध ही नहीं होगी। वहां सब बाबाजी की मेहर लेने आते हैं। 

Golden temple के लिए लोगों के मन में बहुत अधिक श्रृद्धा है। वहां सुबह के 2 बजे से ही लोग नहा-धोकर पहुंच जाते हैं और तभी से ही line में खड़े हो जाते हैं, सुबह के 3 बजे से गुरुद्वारे में जाना आरंभ हो जाता है।‌ जो कि रात 10 बजे तक होता है। गर्मियों में मंदिर के दरवाजे बंद होने का समय 11 बजे है।

वहां जाने के लिए आपको शालीन वस्त्र पहनने होंगे। सिर ढककर रखना होगा, पर वहां टोपी पहनना allowed नहीं है। 

वहां अंदर पहुंचने से पहले अपने जूते-चप्पल, जूता घर में रखकर हाथ धोकर व पैर भी नीचे बहते हुए जल से धोकर जाना होता है। 

मंदिर के चारों ओर सरोवर है, जो कि बहुत पवित्र और मनोकामना को पूर्ण करने वाला माना जाता है। वहां हाथ, मुंह, पैर धोकर जल को सिर-माथे लगाया जाता है। आप चाहे तो सरोवर में डुबकी भी लगा सकते हैं। कहा जाता है इस का जल दुःख, कष्ट, व्याधि को दूर करने वाला होता है।

मंदिर में पंहुचने तक आप आधे मंदिर की परिक्रमा लगा लेते हैं। उसके बाद आप वहां पहुंचेंगे जहां, अंदर जाने के लिए line बनती है। 

वहीं अकाल तख्त साहिब भी है, वहां भी माथा टेकते हैं। 

हम भी line में लगे थे, पर भीड़ बहुत होने के कारण line बहुत धीरे धीरे बढ़ रही थी।

और फिर वही हुआ, जिसका हमें डर था। रात के दस बज गए थे और हम अंदर जाने से वंचित रह गए। 

हम मायूस होकर लौटने लगे, तभी किसी ने कहा कि स्वरुप अभी आएंगे और उनके दर्शन, माथा टेकने के समकक्ष ही हैं।

थोड़ी देर में एक पालकी में गुरू ग्रंथ साहिब को लेकर आए और हम ने वहीं खड़े खड़े माथा टेक लिया। हम पर बाबा जी की मेहर हो गई।

अकाल तख्त साहिब पर माथा टेकने गये तो हमें हलवा का प्रसाद भी मिल गया।

उसके बाद हम लोग ने प्रसाद रुपी लंगर भी ग्रहण किया। Golden temple में 24 घंटे लंगर चलता है। लंगर चखने से पहले और बाद में दोनों समय पैर धोकर ही जाते हैं। वहां पर उपस्थित सभी सेवादार, चुस्त दुरुस्त अपने कार्य को पूजा मानकर लगे हुए थे। दिन भर में ना जाने कितने हजारों लोग लंगर खाकर जाते हैं, पर भोजन व्यवस्था बहुत सुचारू रूप से चलती है कि कुछ भी कमी या गड़बड़ी नहीं होती है। 

सिखों के गुरुद्वारे का एक ही नियम है कि सब याचक हैं, सब एक समान हैं। बाबा जी के दरबार में जो कोई आएगा, उनकी मेहर जरुर से पाएगा।

शायद यही वजह थी कि हम वहां जाकर खाली हाथ नहीं लौटे, हम उनके स्वरुप के दर्शन भी हुए, हमने माथा टेका, हलुआ रुपी प्रसाद व लंगर प्रसाद ले सके। 

बाबा जी की मेहर हो गई। तो हम आप से यही कहेंगे कि अगर किसी कारण वश आप दिन में गुरुद्वारा साहिब नहीं आ पाए हों तो रात में जाएं और भीड़ के कारण अंदर प्रवेश ना कर पाए तो रुक कर स्वरुप के दर्शन अवश्य करें। उसे ही अपने आंखों में बसा कर जाएं।

जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल वाहेगुरु जी का खालसा वाहे गुरु जी की फतेह 

एक विशेष बात ध्यान देने योग्य की अगर संभव हो पाए तो यह पता कर के जाएं कि वहां किसी व्यक्ति विशेष जैसे उनके किसी गुरु जी या किसी विशेष व्यक्ति का जन्म तो नहीं है, क्योंकि ऐसा होने पर golden temple पर भीड़ बढ़ जाती है, शनिवार और रविवार को भी भीड़ बहुत ज़्यादा होती है।‌ अगर आप ऐसे दिन में पहुंच गए हैं तो बस बाबा जी पर श्रद्धा और धैर्य रखकर आगे बढ़ते जाएं, आगे उनकी मेहर तो मिल ही जानी है, वो अपने भक्तों पर कृपा अवश्य बरसाते हैं 🙏🏻

Tuesday, 6 February 2024

Trip Review : Amritsar - सफर देशभक्ति और आस्था का -2

Trip Review : Amritsar - सफर देशभक्ति और आस्था का - 2




हमने कल के  Trip Review : Amritsar  - सफर देशभक्ति और आस्था का से अपना सफ़र शुरू किया था, और आपको तलवार म्यूजियम के विषय में बताया था। चलिए आगे चलते हैं, उसके बाद हम बार्डर की ओर चल दिए।

क्योंकि हम लोग 26 January को गये थे, इसलिए हम लोगों को 1:30 बजे तक वहां पहुंच जाना था। 

Wagah Border 




वहां उस समय देशभक्ति गीत बज रहे थे। वहां हम जैसे ही पहुंचे, उस समय केसरी फिल्म का गीत बज रहा था,

 "तलवारों पे सिर, वार दिए, अंगारों पर जिस्म जलाया है, तब जाकर कहीं हमने, यह केसरी रंग सजाया है।"

यह गाना कई बार सुन चुके हैं, पर सच मानिए, उस समय, वह गाना सुनते हुए जब एक-एक कदम हम अंदर की ओर बढ़ रहे थे और हमारे शरीर में देशभक्ति की भावना यूं ओतप्रोत हो रही थी कि हम सब goosebumps feel कर रहे थे। और उसके बाद एक के बाद एक देशभक्ति गीत बदलते रहे, नहीं बदला तो बस यह, वहां मौजूद हम सब लोगों की feeling...

उस दिन हम भारत के उस हिस्से को देखने जा रहे थे जो पाकिस्तान से जुड़ा हुआ था। 

जब हम अंदर बढ़ रहे थे तो दो गगनचुंबी झंडे लहरा रहे थे, एक भारत का तिरंगा और दूसरा पाकिस्तान का। दोनों ही झंडे दूर से दिख रहे थे।

अंदर पहुंचने के बाद एक लंबी सी सड़क थी जिसके दोनों तरफ़ stadium form में stairs थीं जो कि बहुत ऊपर तक थी और एक कोने में दोनों तरफ उन stairs पर कुर्सियां रखी थीं। 

कुर्सियों के बाद में वो gate था, जो भारत और पाकिस्तान को जोड़ता था। 

जब हम उस जगह पहुंचे तो वहां भीड़ आनी शुरू हो चुकी थी, सब अपने-अपने लिए जगह देखकर बैठते जा रहे थे। 

Cultural program लगभग 2 बजे से शुरू हो गया। आपने बहुत से cultural program देखे होंगे, पर जो जोश और उत्साह वहां था वो अलग ही level का था। 

वहां program conduct कराने वाले और सबमें जोश भरने वाले उस व्यक्ति विशेष की जितनी तारीफ की जाए, कम है।

2:30 से 3 बजे तक में पूरा stadium ऐसे खचाखच भर गया था कि तिल रखने की जगह नहीं थी। लगभग हजार से भी ज्यादा लोग वहां मौजूद थे और जब सारे भारत माता की जय, वंदे मातरम् और हिन्दुस्तान जिंदाबाद... के नारे लगाते थे तो बहुत ही गर्व की अनुभूति हो रही थी। 

हम सब सरहद पर बैठे हैं, इस बात से किसी के मन में भी किंचित मात्र भी भय नहीं था, बल्कि सभी के हौसले इतने बुलंद थे कि लग रहा था कि वो नारे मानों ऐलान हों कि कोई भी भारत से टकरा नहीं सकता। 

फिर वो घड़ी आ गई, जिसका हम सब को बेसब्री से इंतज़ार था। लगभग 4 बजे Beating retreat का program शुरू हो गया और चंद मिनटों बाद वो Gate भी खुल गया और उसके बाद दोनों तरफ की सेना का शक्ति प्रदर्शन...

अद्भुत और दुर्लभ... 

और फिर वो ceremony, जिसके कारण इसका नाम है, beating retreat... 

Flags के fold होने का...

दोनों ही देशों के छोटे बड़े कई झंडे थे। दोनों ही देशों के एक-एक सबसे बड़े झंडे को छोड़कर, बाकी सभी झंडों को slant कर के fold कर दिया जाता है।

26 January और 15 August को वाघा बार्डर या अटारी बार्डर पर 2 बजे से cultural program शुरू हो जाते हैं, और beating retreat 4 बजे से शुरू होती है।

ठंड में beating retreat का time 4 से 5 बजे का होता है और गर्मियों में समय 5 से 6 का होता है।

Beating retreat रोज ही शाम को होती है। 26 January and 15 August में बस उस से  पहले cultural program भी add हो जाता है।

यहां बहुत भीड़ होती है, इसलिए सही समय से पहुंचना और निकलना बहुत जरूरी होता है।

आपको अपने साथ खाने-पीने की कोई भी चीज अपने साथ ले जाने की जरूरत नहीं है, पानी से लेकर cold drink, chips, biscuits, chocolate, popcorn, icecream etc सब वहां बिकता है और वो भी लगभग rate to rate... पर कोई चीज महंगी होगी भी तो दस-बीस रुपए ज्यादा... Picture hall, जितना दुगुने चौगुने दाम पर नहीं...

अगर आप को chair वाली जगह चाहिए तो वो online book होती है, जिसका कोई charge नहीं है, बस timely booking देखनी होगी। 

बाकी ऐसा नहीं है कि chairs वाली जगह नहीं मिली तो कुछ भी उत्साह और जोश कम होगा, ऐसा बिल्कुल नहीं है... 

जय हिन्द जय भारत 🇮🇳 

अभी बहुत कुछ बाकी है तो बस ऐसे ही आपको हर रोज़ बताते जाएंगे तो बस आपको करना यह है कि हम से जुड़ा रहना है...

Monday, 5 February 2024

Trip Review : Amritsar - सफर देशभक्ति और आस्था का

Amritsar, इस शहर का नाम आते ही ज़हन में आता है, Golden Temple... 

पर अमृतसर में सिर्फ golden temple ही नहीं है बल्कि और भी बहुत कुछ है। 

इसलिए अगर आप कहीं घूमने जाने का plan कर रहे हैं तो अमृतसर का plan कर सकते हैं और एक अच्छी बात यह है कि इसके लिए आपको बहुत सारे दिन की जरूरत भी नहीं है।

अभी हाल ही में अमृतसर जाना हुआ, जहां का हमारा experience बहुत ही अच्छा रहा, तो आज़ आपके लिए उसी को share कर रहे हैं‌।

Amritsar - सफर देशभक्ति और आस्था का 


अमृतसर शहर, एक ऐसा शहर है जो कि आस्था और देशभक्ति दोनों से ही परिपूर्ण है। यह एक ऐसा शहर है जहां सम्पन्नता भी है और प्रसन्नता भी है। एक और विशेषता मिली इस शहर में कि यहां के रहने वाले अधिकांशतः लोग किसान हैं, पर सभी दूसरे कामों द्वारा भी अपना जीवन यापन कर रहे हैं, इसलिए यहां के किसान उतने गरीब नहीं है, जितने बाकी जगह पर हैं और क्योंकि अधिकांशतः किसान हैं, इसलिए वे मेहनती भी है, जिसके कारण वो बाकी काम भी बड़ी मुस्तैदी से करते हैं। एक और महत्वपूर्ण बात, यहां पर स्त्री-पुरुष बराबर से सभी काम करते हैं तो इनकी सोच संकीर्ण नहीं है।‌ कुल मिलाकर यहां आप सुरक्षित भी रहेंगे और प्रसन्न भी... यह तो हुई वहां के लोगों की और उनकी संस्कृति की बात।

चलिए अब अमृतसर की जगहों की भी बात कर लेते हैं और जान लेते हैं कि अगर आप अमृतसर शहर घूमने जा रहे हैं तो आप को कितना समय लगेगा...

अमृतसर बहुत बड़ा और बिखरा हुआ शहर नहीं है, अतः  2½ से 3 दिन बहुत हैं, सभी जगहों को देखने के लिए। 

बस आपको उसके लिए अपना पूरा program ऐसे plan करना होगा कि वहां के कुछ special जगहों के timing meet-up हो जाए। 

जी हां वहां कुछ जगहें ऐसी हैं, जहां पर कुछ timings है तो सबसे पहले हम आपको उन timings के बारे में बताते हैं, फिर सभी जगहों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं।


1. Golden temple :- 

सुबह 3 बजे से रात 10 बजे तक, ध्यान रखिएगा कि अगर 10 बज गए और आप line में लगे भी होंगे तो भी माथा नहीं टेक पाएंगे, अतः line में time देखकर ही लगें और बता दें, भीड़ बहुत ज़्यादा होती है तो माथा टेकने में कम से कम तीन से चार घंटे लग सकते हैं।


2. Jallianwala Bagh :-

यह सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक खुलता है तो इसका भी ध्यान रखें।

 

3. Wagah Border :- 

Beating retreat: शाम 4 बजे से 5 बजे तक सर्दियों में

5 बजे से 6 बजे तक गर्मियों में 


4. Qila Gobindgarh :-

इसमें evening time में कुछ shows होते हैं जो interesting होते हैं तो एक evening का time आपको उसके लिए भी रखना होगा।


Mostly लोग golden temple के पास ही hotel लेना prefer करते हैं। जिससे पूरे समय गुरूबाणी सुनाई दे। अगर आप सिर्फ golden temple में माथा टेकने पहुंचे हैं तो यही best option है।

पर अगर आप का plan हमारी तरह golden temple और Attari border दोनों जगह नमन करना है तो आप hotel का plan हमारी तरह भी कर सकते हैं। 

हमारा hotel, hall gate पर था। जो कि golden temple से 2 km. पर और station से 500 meter पर था। 

Hall gate पर hotel होने से आपका hotel on road रहता है, जिससे सब जगह के लिए Conveyance easily मिल जाता है। Golden temple के पास जलियांवाला बाग और partition musium है, बाकी सब दूसरी तरफ है तो अगर आप उसको ध्यान में रखते हैं तो हमारे hotel की location बहुत अच्छी जगह पर थी। वहां से भी कुछ जगहें बहुत पास थी। तो hotel का चुनाव करते समय यह ध्यान रखिएगा। एक बात हम, आपको बता दें कि हमारे hotel में भी हमें गुरुबाणी सुनाई दे रही थी।

हम लोग ने अपना program ऐसे रखा था कि हम 26 January को भारत के अटारी बार्डर को नमन कर सकें। अतः हम 25 January की रात में अमृतसर पहुंच गए थे। 

चलिए अब आपको सभी जगहों की विस्तृत जानकारी देते हैं। 

पहला दिन: हम सुबह 9 बजे निकलेंगे, सबसे पहले War Memorial देखें।


War Memorial (तलवार museum) :-




यह museum इन दोनों नाम से मशहूर है। शुरुआत इसी से की थी हमने... क्योंकि हम लोगों के मन में देश को और उसके वीरों को नमन करने की लालसा सबसे ज्यादा बलवती थी।  

हमने यहां guide किया था, वैसे guide के बिना भी अगर आप इसे देखेंगे तो भी आप को बहुत कुछ समझ आ जाएगा क्योंकि वहां बहुत कुछ लिखा हुआ है और कुछ video clips भी चलती हैं।

तलवार museum में एक special और उसके अलावा 9 और gallery थीं। 

जब उसमें enter किया था तो एक बहुत बड़ी तलवार दिखी थी, जिसकी लंबाई 45 meters है, जो कि stainless steel की बनी है, साथ ही यह विश्व की सबसे लंबी तलवार है,

जो इस museum को यादगार बनाती है, और इस लिए ही  इसका नाम तलवार museum है।  

इसमें पहली special gallery में Indian army के सभी regiment के flags और बहुत तरह के युद्ध में प्रयुक्त होने वाले शस्त्र हैं।

बाकी की 9 gallery में India के हड़प्पा से लेकर आज तक के सेना युद्ध का वर्णन है। वैसे आप इसे 1 hour में देख सकते हैं, पर यह ऐसी जगह है जहां देश को प्रेम करने वालों की झलकियां हैं और अगर आप भी देशप्रेमी हैं और उन पलों को जीना चाहते हैं, जो इन वीरों के सीने को छूकर गुजरे थे, तो आपको यहां 2 से 3 घंटे लगेंगे इस museum को देखने में। एक बात आप को यह भी बता दें कि 10 galleries में से कुछ में wax के statues भी हैं, अतः उनमें gallery में ठंड कुछ ज्यादा रहती है। गर्मियों में तो अच्छा लगता है, लेकिन ठंड के दिनों के ठीक से गर्म कपड़े पहनकर जाएं। 

वैसे इस museum को जरूर से देखें, वो भी समय लेकर, यह आपको, आपके देश से बहुत गहरे तक जोड़ता है।

इस Trip Review को हम कुछ भागों में डाल रहे हैं, जिससे आपको छोटी छोटी बातों को बता सकें, जिससे आप की trip बहुत यादगार रहे। 

तो अगले भागों को भी जरुर से पढ़िएगा... 

हम आपको सारे भाग इस पूरे week में डालेंगे।

Wednesday, 15 May 2019

Trip Review: Rishikesh

The summer vacations are about to begin. Enjoying vacations and promenading is one of the Shades of Life. So, keeping in mind the requests of some of my readers, I am going to start a new segment of Trip Reviews. For this segment, if you think you have been to a place which others should also visit, you can share your trip review with me via mail(anuadviadvay@gmail.com), and I would post it in your name.

Rishikesh – An adventurous yet 
religious pleasant place





In the previous summer vacations, I went to Rishikesh with my family. Thinking about the place, I have written this review of the city, which may help you to visit the same. it is a pleasant religious place, but full of adventure sports, so people of any and every age group can enjoy there. So, pack your bags for Rishikesh.

Rishikesh is a place which not only offers you a religious atmosphere but also some adventurous sports.

We went there by our car. But it is also convenient to go through train, bus or flight. The Rishikesh railway Station is located in Adarsh Nagar, Ganga Nagar;
while there are many bus stands like Sanyukt Yatra Bus Stand, Bus Stand Laxman Jhula, Roadways Bus Stop, Inter State Bus Terminus, I.D.P.L. Bus Stop, Tehri Private Bus Stand, Neergarh Bus Stop, Uttarakhand Roadways & Laxman Jhula Bus Stand. If you are going by flight there is an airport in Dehradun, from where you can take a bus to Rishikesh.

People there are kind and soft-hearted. The place though being religious  is not much crowded. No one their forces themselves into you, but if one needs help, they would not stay behind.

To explore the place, you may use public conveniences or ride on a bike or scooter - that can be hired there.

Main Attractions:

The place has many attractions out of which some are:
  • Ram Jhula is a hanging bridge above the holy river Ganga. The bridge keeps swinging and walking on it gives a good experience.
  • Geeta Bhavan has a temple inside the premises, surrounded by many rooms and a huge hall, which provides free shelter to pilgrims and devotees.
    The place has a religious atmosphere with river Ganga flowing just in front of it. The committee of Geeta Bhavan provides a room or a place in the hall
    (as possible) for the devotees to live in. There, they can take thalis costing  Rs.40 per plate or cook their own meals for which crockery is provided. But the above is given only when the person stays there at least for 10 days.
  • Parmarth Niketan is a compound with a temple, some tableaux (झाँकियाँ) and statues. In the entrance there is a huge sculpture of Lord Shiv performing tandav.
  • Parmarth Niketan Ghat is a bank on the river Ganga where an aarti takes place. There not only pundits but also the people get a chance to perform the aarti.
    In front of the ghat there is a huge statue of Lord Shiv and nearby of  Lord Hanuman. One can sit on the steps of the ghat keeping his feet dipped in the cold flowing water of river Ganga, mesmerized by the nature or can also take a bath in the holy river Ganga.
  • Laxman Jhula is also a hanging bridge, just like Ram Jhula. But this bridge swings more than Ram Jhula. It takes long to reach the bridge as you need to go down by steps which would be around 90 in number.
  • Laxman Jhula Ghat is the most famous ghat for rafting and speed boat ride.
    For rafting one should be above 14 years and for speed boat ride one should be older than 2½ years.
  • Triveni Ghat is a shallow ox-bow lake separated by the river through huge grasses. The ghat is such shallow that a person can easily stand on the ground in the water. One can also take a bath there. The ghat is known for the famous aarti which takes place in the evening. One can also take a holy dip there in the cool water of the river Ganga.
  • Chotti Waale ka Dhabba is a famous restaurant with tasty food at nominal rates. It is situated near Ram Jhula.
  • Rajasthani Mishthaan Bhandaar is another famous restaurant that along with multi-cuisine food serves sweets at reasonable prices. Rajasthani Dal-Baati Platter is the best choice to have here.

Itinerary :

2 days are sufficient to promenade some major tourist attractions.
On your first day, you can start your trip by 4:00p.m. First, you can go to Ram Jhula. Then, to Geeta Bhavan and the nearby Geeta Press. If you want to have tea and snacks, they are available in the market at reasonable prices. You may then head on to Parmarth Niketan and its Ghat to attend the aarti, which starts around 6:30p.m. After attending the aarti you can enjoy the cold water of the river Ganga. For dinner you can go to Chotti Waale ka Dhabba. The next day, you can go to Laxman Jhula, enjoy the rides there and go to Triveni Ghat, where you can bathe or take a holy dip. Afterwards, for lunch have a seat in Rajasthani Mishthaan Bhandaar. Or, if you want to attend the aarti at Triveni Ghat you can postpone the second day’s plan to the same day’s evening.

Some tips:

  • Before going inside water do wear loose clothes so that it is easy to change afterwards.
  • Remember to keep an umbrella with you as it drizzles or rains sometimes in the evening.
  • It is better to promenade in Rishikesh from 4:00 p.m.The days are warm, while the nights are soothing in the month of June.
  • Some adventure sports like white water rafting, bungee jumping, trekking, rock climbing, etc. take place here, to participate in which one should be elder than 14 years.

Advika Sahai