Showing posts with label Articles - Special. Show all posts
Showing posts with label Articles - Special. Show all posts

Wednesday, 6 May 2026

Article : जीत है प्रचंड

4 May को बंगाल के चुनाव के नतीजे सामने आते ही BJP government के अपने founder श्यामा प्रसाद मुखर्जी से किया वादा कि बंगाल पर भी भगवा ध्वज लहराएंगे, BJP government की प्रचंड जीत के साथ पूर्ण हुआ।

यहाँ तक कि ममता बनर्जी भी स्वयं अपनी constituency भवानीपुर से हार गई। इससे ज्यादा बड़ी सफलता बंगाल पर सत्तारूढ़ होने की और कुछ नहीं हो सकती।

यह जीत रातों-रात नहीं मिली है, बल्कि यह लगभग 10 से 15 वर्षों के सुनियोजित प्रयासों का परिणाम है।

2011 से BJP का प्रयास जारी था और 0 से 206 तक पहुंच कर सफल हुआ।

बंगाल को मिलाकर 22 राज्यों में BJP government सत्ता पर है।

अगर इसे map पर देखेंगे तो आपको बता दें कि 72% भारत में BJP government सत्तारूढ़ है।

आरंभ है प्रचंड


इस जीत के पीछे जो सबसे बड़ा कारण है, उससे अगर कोई भी मनुष्य प्रेरणा ले, तो सौ-प्रतिशत सफलता मिलेगी ही मिलेगी, और वो कारण है लक्ष्य को प्राप्त करने तक अथक प्रयास करते रहना।

जी हाँ, BJP government की सतत् जीत का मुख्य कारण लगन और सतत् प्रयास ही है, और इसके कारण ही उनका अखंड भारत बनाने का स्वप्न लगभग पूरा होता दिख रहा है।



इसके साथ ही और भी कुछ कारण हैं, जिनकी वजह से BJP (मोदी जी) जीत दर्ज कर सकी और TMC (ममता बनर्जी) हार गई।



पर इसके साथ ही एक बहुत बड़ी बात BJP government को भी समझनी होगी कि लगातार जीत कभी भी हार में बदल सकती है। यदि सत्ता पाने का लक्ष्य केवल सत्तारुढ़ होने तक सीमित हो।

जो देशहित में कार्यरत रहेगा, वही सत्तारूढ़ रहेगा, अन्यथा जनता जितना प्यार और सम्मान सत्तारूढ़ करने के लिए देती है, उतना ही कुपित हो तख्तापलट भी कर देती है।

इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं- कांग्रेस, आप, सपा, बसपा, TMC आदि का तख्ता पलट। 

मोदी जी, भारत को अखंड, सुदृढ़ और सफल बनाएं, देश आपके साथ है।

जय हिंद, जय भारत!

Monday, 27 April 2026

Article : Mohini Ekadashi

(I) Mohini Avatar :

आज मोहिनी एकादशी है। भगवान श्रीहरि के मोहिनी स्वरूप की आराधना की एकादशी। ऐसे स्वरूप की जिसका जो नाम है, वही प्रभाव भी। अर्थात् ईश्वर की साधना में मोहित होकर सर्वस्व प्राप्त कर लेना।

जी हाँ, सर्वस्व प्राप्त कर लेना। मुख्यतः कहा जाता है कि ईश्वर की आस्था में लीन होकर सर्वस्व न्यौछावर कर दो, पर यह ऐसा व्रत है, जो आपको सांसारिक सुखों की प्राप्ति से लेकर मोक्ष तक सब प्रदान करता है।


(II) Vishnu's Dashavatar :

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु के प्रमुख 10 अवतार (दशावतार) माने जाते हैं, जो पृथ्वी पर धर्म की स्थापना के लिए लिए गए थे। हालांकि श्रीमद्भागवत पुराण और अन्य ग्रंथों में मुख्य रूप से 24 अवतारों का भी वर्णन मिलता है। ये हैं विष्णुजी के दशावतार :

  • मत्स्य (मछली)
  • कूर्म (कछुआ)
  • वराह (सूअर)
  • नरसिंह (नर-सिंह)
  • वमन (बौना ब्राह्मण)
  • परशुराम
  • राम
  • कृष्ण
  • बुद्ध
  • कल्कि (भविष्य का अवतार)

इनमें से अब तक 23 अवतार अवतरित हो चुके हैं, जबकि 24वां (कल्कि अवतार) अभी होना बाकी है। इनके अलावा देवताओं की रक्षा हेतु भगवान श्रीहरि विष्णु जी ने एक स्वरूप भी धरा था और वो था मोहिनी का स्वरूप।

भगवान विष्णु जी का स्त्री स्वरूप सम्पूर्ण ब्रह्मांड में उपस्थित सबसे ज्यादा खूबसूरत स्त्री स्वरूप। प्रभु श्रीहरि विष्णु का हर स्वरूप मन को मोह लेता है, लेकिन भगवान श्रीहरि का मोहिनी स्वरूप हर एक को सर्वाधिक मोहित करता है।

आइए जानते हैं इसके विषय में... 

Mohini Ekadashi


(III) Ekadashi :

हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व है। बता दें कि एक साल में कुल 24 एकादशी होती है। लेकिन इस साल अधिकमास होने के कारण कुल 26 एकादशी पड़ने वाली है। ऐसे ही वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। 

वैशाख के शुक्लपक्ष में मोहिनी नाम से प्रसिद्ध एकादशी आती है। मोहिनी एकादशी को उपवास करने आपके लिए एक नहीं कई लाभ होते हैं। भगवान विष्णु की कृपा तो मिलती है, साथ ही सभी पाप भी नष्ट हो जाते हैं। अनेक जन्मों के किए हुए महापाप भी नष्ट हो जाते हैं। इसलिए मोहिनी एकादशी का व्रत जरूर करना चाहिए। 

पहले जान लेते हैं कि भगवान श्रीहरि ने मोहिनी स्वरूप क्यों धारण किया था।


(IV) Reason behind Mohini :

पौराणिक कथा के अनुसार यह सतयुग में समुद्र मंथन को अंतिम स्वरूप प्रदान करने के लिए भगवान श्री हरि ने मोहिनी स्वरूप धारण किया था। पर ऐसा क्या हुआ था, जिसके कारण समुद्र मंथन हुआ था? आइए विषयवार इस को समझते हैं।


(V) Samudra Manthan :

  • Time- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह घटना सत्ययुग में हुई थी।
  • Reason- ऋषि दुर्वासा के श्राप से इंद्र और अन्य देवता श्रीहीन (शक्तिहीन) हो गए थे, जिसे पुनः प्राप्त करने के लिए मंथन आवश्यक था।
  • Equipments- मंदराचल पर्वत को मथानी और वासुकी नाग को रस्सी (नेती) बनाया गया था।
  • Base- भगवान विष्णु ने कूर्म (कछुआ) अवतार लेकर मंदराचल पर्वत को अपने कवच पर धारण किया था।
  • Conclusion- मंथन से 14 रत्न निकले, जिनमें विष (हलाहल), अमृत कलश, माता लक्ष्मी, और ऐरावत हाथी जैसे बहुमूल्य रत्न शामिल थे।

आपको बता दें कि भगवान श्रीहरि ने मोहिनी रूप धर कर देवताओं को अमृतपान कराया था, इसलिए मोहिनी एकादशी का व्रत बहुत खास है।

मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय जब अमृत निकला था, तब उसे राक्षसों से बचाकर देवताओं को प्रदान करने के लिए भगवान श्री विष्णुजी ने मोहिनी अवतार धारण किया था और धर्म की रक्षा की थी। 

इसी कारण मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णुजी की विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और हर तरह के पापों से भी मुक्ति मिल सकती है।


(VI) Date & Time in 2026 :

मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन व्रत में मोहिनी एकादशी व्रत कथा का श्रवण करें, ये हजारों गायों को दान करने के समान पुण्य देता है।

ये व्रत तमाम तरह के मोह, बुरे कर्म से मुक्ति दिलाकर सही राह पर चलने की शक्ति देता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति के तमाम पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे राजसुख प्राप्त होता है। अगर आपको मोहिनी एकादशी व्रत की सम्पूर्ण कथा जाननी है, तो हम अगली मोहिनी एकादशी में उसे ही साझा करेंगे।

साथ ही आप को आगे यह भी बताएंगे कि दशमी-एकादशी योग या एकादशी-द्वादशी योग में से कौन-सा अधिक शुभ मुहूर्त है। अतः जुड़े रहें Shades of Life से आस्था और विश्वास के साथ।

बोलो भगवान श्रीहरि की जय!

Thursday, 23 April 2026

Article : Airfryer and its Recipes

(I) Queries with Airfryers :

कुछ दिनों से the airfryer style segment की recipes बता रहे हैं, तो कुछ viewers का पूछ्ना था कि कौन सा airfryer लें, कितनी capacity का लें, कौन-कौन से utensils की requirement है, क्या-क्या बन सकता है etc.

तो आज आपकी सारी queries solve कर देते हैं, और बताते हैं कि आप कैसे airfryer king और queen बन सकते हैं…

Airfryer and its Recipes


(II) Companies of Airfryers :

सबसे पहले आप को बता दें कि भारत में airfryer कई famous companies द्वारा बनाए जाते हैं, जिनमें Philips, Havells, Prestige, Agaro, Inalsa, Wonderchef, Kent, Pigeon, Milton और Xiaomi (Mi) main brands हैं। ये brands healthy cooking के लिए famous हैं और इनके airfryers different budget and capacity में उपलब्ध हैं।

तो इनमें से कौन-सा लें? आपको बता दें, सभी brands अच्छी हैं और function-wise, more-or-less सब same हैं, आप अपने budget के according लें सकते हैं।

बस लेते समय ध्यान रखिएगा कि ऐसा airfryer लें, जिसमें glass window बनी हो और अंदर LED light जलती हो। इससे food बनते हुए दिखता है तो इसे बार-बार खोल कर check नहीं करना पड़ता है कि खाना बना कि‌ नहीं।


(III) Suitable Capacities :

  • 2 to 4 Members- 4.2 litres sufficient है।
  • 4 to 6 Members- 4.2 से 6.2 litres तक का appropriate है।

वैसे कितनी capacity का लेना है, यह इस बात पर भी depend करेगा कि आप उसे use कितना करेंगे।


(IV) Required Utensils :

इसमें plastic and glass के utensils सही नहीं रहते हैं। इसके लिए silicon moulds और metallic utensils use कर सकते हैं।

वैसे बहुत से food items तो इसकी rack पर रखकर भी बन जाते हैं।


(V) Easy Handling :

Airfryer बहुत user-friendly है, इतना कि बच्चे भी इसमें कुछ भी बहुत easily बना सकते हैं। जलने का डर नहीं है, बस brushing के लिए बड़ा brush रखें, दूसरा food items को उलटने-पलटने के लिए proper tongs रहें। 

साथ ही silicon mitts होने से काम करना easy हो जाता है। इसलिए silicon mitts अवश्य लें, यह e-commerce websites पर easily available रहता है।


(VI) Easy Maintenance :

Airfryer बहुत user-friendly है, maintenance के point of view से भी।

इसकी rack and basket nonstick cookware है। Easily clean हो जाता है। Dishwasher में भी वो धो सकते हैं।

आप चाहें तो tissue paper or moist cloth से भी इसे clean कर सकते हैं।


(VII) How to Use :

  • For best results, airfryer को preheat अवश्य करें।
  • उसकी rack को ghee or oil से grease अवश्य करें।
  • Different items के लिए different temperatures रखें। Thumbrule पर सभी को 200°C पर ही नहीं बनाएं।
  • Food items पर butter, ghee or oil से की गई brushing से जितना कम-से-कम oil चाहिए, सिर्फ उतना ही लगता है, बाकी basket में store हो जाता है, जिसे आप बाद में निकाल कर reuse भी कर सकते हैं। 
  • ध्यान रखिएगा कि for perfect result, खाना बनाने के लिए जो भी रखें, space के साथ रखें, चढ़ा कर या बहुत सटाकर न रखें।
  • आप इसमें cooking, baking, frying, roasting, reheating etc. कर सकते हैं, वो भी less oily, easily and less timings के साथ।

हमने बहुत-सी recipes share की हैं, जिसका link नीचे दिया है। आपको इनसे बहुत अच्छे से idea हो जाएगा कि airfryer में क्या और कैसे बनाएं- https://shadesoflife18.blogspot.com/search/label/Recipes%20-%20the%20airfryer%20style?m=0

वैसे beginners के लिए general food items के लिए time and temperature mentioned रहता है, पर आप एक बार हमारी recipe try कर लेंगे, तो आप beginner नहीं बल्कि expert बन जाएंगे।

तो आप ready हैं ना expert बनने के लिए?

Saturday, 18 April 2026

About Shades of Life : सफर आठ साल का

आज फिर वही दिन आया है,

जिसने आपको हमसे मिलाया है। 

सोचा नहीं था कि सफ़र यह चलेगा,

आठ साल तक अनवरत चलता रहेगा।।


कृपा ईश्वर की, आशीष और प्यार आपका,

ताउम्र रहेगा यह दिल शुक्रगुजार आपका।

यूं ही यह हसीं सफर जिंदगीभर चलता रहे,

कामना है, साथ आपका यूं ही मिलता रहे।।

सफर आठ साल का


आप लोगों का लगातार साथ, हमें अपने आप पर थोड़ा-सा घमंड करने का मन‌ करने लगा है।

घमंड?... जी हाँ! सही पढ़ा है आपने घमंड।

अरे नहीं-नहीं, वो वाला नहीं कि हम बहुत अच्छा लिखते हैं, उसका तो कर ही नहीं सकते हैं, क्योंकि कलम तो हमने चलाई ही कब है।

ईश्वर की कृपा और आप सबके आशीर्वाद, स्नेह और साथ में वो तो बस चलती गई, इसलिए ईश्वर से प्रार्थना है कि मुझे पर कृपा और नेह यूं ही बरसता रहे।

घमंड तो इस बात का है कि आप सब हमारे साथ अनवरत हैं, आप लोगों का साथ और प्रेरणा हमेशा मार्गदर्शन करता है सतत् लिखते रहने के लिए।

आप सभी के प्रोत्साहन से हमने एक प्रयास किया है कि आप अगर हमारे blog के viewers हैं तो आप को सब यहीं मिल जाए, आप को चाहे information चाहिए था या entertainmet, किसी के लिए भी आपको किसी और platform पर न जाना पड़े।

चाहे कहानियां हों (बड़ों से जुड़ी या बच्चों से) या कविता हो, व्यंग्य हो या tips हों, भजन हों, या विभिन्न आयोजनों के गीत हों, दुनियाभर की recipes हों, या current affairs पर articles हों।

इस साल की viewership इस प्रकार

 है - 






मतलब जिंदगी के हर पहलू को छूने का अथक प्रयास किया है और आगे भी करते रहेंगे।

हे ईश्वर! आपकी कृपा व छत्रछाया सदैव बनी रहे, और हमारे सारे viewers का आशीर्वाद, स्नेह और साथ, क्योंकि जब तक यह है हमारे पास, लेखनी सतत् चलती रहेगी।

आप सबको बहुत सारे आभार देते हुए, आगे भी ऐसे ही साथ की कामना के साथ, चलिए आगे बढ़ते हैं 🙏🏻

Monday, 13 April 2026

Article : आशा भोसले - सुरों की मल्लिका

सुरों की मल्लिका, शोख और चंचल आवाज़ की धनी, महान playback singer आशा भोसले 92 वर्ष की आयु में आज पंचतत्व में विलीन हो गयी।

शरीर चला जाता है, लेकिन कुछ आवाज़ें हवा में ठहरी रह जाती हैं, दूर तक, देर तक, कभी-कभी हमेशा के लिए। 'नया दौर' से 'तीसरी मंज़िल', 'हरे रामा हरे कृष्णा' से 'उमराव जान' और 'इजाज़त' से होते हुए 'रंगीला' और उससे बहुत आगे तक।

वक़्त बदला, मंज़र बदले, पीढ़ियां बदलीं, पर्दे पर नायिकाएं बदलीं, पर आशा भोसले की आवाज़ हमेशा जवान रही। 

आशा भोसले - सुरों की मल्लिका


जीवन परिचय :

आशा भोसले के पिता जी‌ (दीनानाथ मंगेशकर) बहुत बड़े मराठी theatre actor, Hindustani classical vocalist थे।

दीनानाथ जी के पांच बच्चे थे, चार बेटियाँ और एक बेटा।

यूँ तो पूरा परिवार गायन में निपुण था, पर लता मंगेशकर और आशा भोसले गीतों के साम्राज्य की दो साम्राज्ञी थी, या यूं कहा जाए कि इनके बिना संगीत जगत अधूरा है, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। 

दीनानाथ मंगेशकर जी का निधन बहुत जल्दी हो गया था, जिसके कारण परिवार के भरण-पोषण के लिए दोनों बहनों ने 13 और 10 वर्ष में ही playback singing आरंभ कर दी थी, जिसमें लता मंगेशकर स्वर कोकिला और आशा भोसले सुरों की मल्लिका के रूप में उभरी।

दोनों बहनों ने एक-साथ मिलकर 92, 93 यादगार गीत दिए, जिनमें 'मनभावन के घर जाए गोरी', 'मन क्यों बहका रे बहका आधी रात को', 'मैं चली मैं चली देखो प्यार की गली', 'सखी रे सुन बोले पपीहा', 'छाप तिलक सब छीनी' जैसे गाने शामिल हैं‌। इन गानों ने न सिर्फ उस दौर में लोकप्रियता हासिल की, बल्कि आज भी लोगों की पसंदीदा गानों में शुमार हैं।


बहनों का संयोग :

बड़ी बहन: लता मंगेशकर (1929 - 2022)

छोटी बहन: आशा भोसले (1933 - 2026)

दोनों बहनों की उम्र का अंतर: 3 साल, 11 महीने और 11 दिन।

निधन का संयोग: दोनों महान गायिकाओं ने 92 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कहा।


जीवन संघर्ष :

सच तो यह है कि अपनी विलक्षण प्रतिभा के बावजूद, आशा भोसले को 'नंबर दो' के पायदान से ही संतोष करना पड़ा, क्योंकि हिंदी film industry में 'नंबर एक' पर उनकी अपनी ही महान और दिग्गज बड़ी बहन, लता मंगेशकर थीं।

आरंभ के दौर में आशा भोसले के गीतों का गाने का style लता मंगेशकर के जैसा ही था।

लता मंगेशकर प्रतिष्ठित गायिका थीं, जिसके चलते आशा जी की demand ज्यादा नहीं थी।

लेकिन film हम दोनों के एक गीत, "अभी न जाओ छोड़ कर" ने आशा जी को फिल्म जगत में प्रसिद्ध कर दिया।

लता मंगेशकर हर तरह के गीतों को नहीं गाती थीं, उन्होंने अभी न जाओ को reject कर दिया था, जिसे आशा भोसले ने गाया और यह गाना superhit हो गया। बस यहीं से उनका दौर शुरू हो गया।


बदला अपना style :

लता और आशा दोनों का नाम एक साथ लिया जाता था, पर लता जी के आगे आशा जी को कम ही काम मिलता था।

अतः आशा जी को लगा कि अगर वो भी लता जी जैसा ही गाती रहेंगी तो उनकी अपनी कोई पहचान या शोहरत नहीं होगी। इस के बाद उन्होंने अपने गाने का अंदाज बदलना शुरू कर दिया। उन्होंने अंग्रेज़ी फिल्में देखना शुरू किया ताकि western गाने सीख सकें, देख सकें कि वे अंग्रेजी में कैसे गाते हैं। उन्होंने कव्वाली, गजल गाना भी सीखा, और गाने के अलग-अलग रूपों में जरूरी आवाज के उतार-चढ़ाव भी सीखे। उन्होंने सब कुछ सीखना शुरू कर दिया। अंग्रेजी फिल्मों से गाने का अंदाज सीखा और अलग-अलग genre में प्रयोग करने लगीं।


सबसे versatile singer :

आशा भोसले ने केवल Roman गानों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने कैबरे, गजल, कव्वाली और pop जैसे कई अलग-अलग styles में गाना शुरू किया। उन्होंने आवाज में modulation, expression और अलग tone का इस्तेमाल कर अपनी अलग पहचान बनाई. यही वजह रही कि बाद में उन्हें industry की सबसे versatile singers में गिना जाने लगा और उनका अंदाज लता मंगेशकर से बिल्कुल अलग नजर आया।

हिंदी playback singing के क्षितिज पर लता नाम के सूरज की चमक के आगे अपनी एक अलग लौ जलाना आशा की ज़िद थी।

उस दौर में यह लगभग असंभव जैसा था, लेकिन अपनी ज़िद और बेमिसाल प्रतिभा के दम पर आशा उस साये से बाहर निकलीं और संगीत के क्षितिज पर अपना एक मुकम्मल आसमां बनाया।


बगावती शादी :

16 साल की उम्र में उन्होंने परिवार के खिलाफ जाकर अपने से 15-20 साल बड़े गणपतराव भोसले से शादी की, जो उनके लिए कष्टदायक रही। उन्होंने 1960 में दो बच्चों के साथ घर से बाहर निकलने के बाद खुद को संभाला।


संगीतमय सफर :

आशा जी की जिंदगी में दो शख्स ऐसे थे, जिन्होंने आशा भोसले को सुरों की मल्लिका का खिताब दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पहले ओ.पी. नैय्यर और दूसरे आर.डी. बर्मन (पंचम दा)।


ओ.पी. नैयर के साथ काम :

ओ.पी. नैयर के साथ उनकी साझेदारी ने उन्हें पहचान दिलाई और उन्होंने 60 फिल्मों में 324 गीत गाए। 


ओ.पी. नय्यर और आशा भोसले की कहानी : 

आशा को लता की परछाई से निकाल कर एक 'bold' और अलग अंदाज़ वाली गायिका के रूप में स्थापित करने का असली श्रेय ओ.पी. नैयर को ही जाता है।

हिंदी cinema की सबसे चर्चित और रूमानी कहानियों में से एक है, जो 1950 के दशक के अंत में शुरू हुई। नय्यर ने आशा को 'नया दौर' (1957) फिल्म से गायिका के रूप में स्थापित किया, जो बाद में 14 वर्षों (1958-1972) तक चले उनके प्रेम संबंध में बदल गया। इस रिश्ते ने आशा को star बनाया, लेकिन नय्यर की पारिवारिक जिंदगी पर गहरा असर डाला। 

नय्यर के संगीत और आशा की आवाज ने मिलकर 'उड़ें जब जब जुल्फें तेरी' और 'हम जब सिमट के आपकी बाहों में' जैसे blockbuster गाने दिए।


आर.डी. बर्मन से मुलाकात :

आर.डी. बर्मन (पंचमदा) के साथ उनकी प्रेम कहानी और विवाह एक मील का पत्थर था।

आरडी बर्मन और आशा भोसले की प्रेम कहानी संगीत और संवेदना का एक दुर्लभ संगम थी। उम्र में 6 साल का अंतर होने के बावजूद, 1960 के दशक के "तीसरी मंजिल" (1966) के समय से इनकी दोस्ती गहरी हुई। बर्मन (पंचम दा) के करियर के कठिन समय में आशा ताई ने उनका साथ दिया और 1980 में दोनों ने शादी कर ली, 1994 में बर्मन के निधन तक इनका साथ रहा। 

उनकी जोड़ी ने 'दम मारो दम', 'चुरा लिया है तुमने', और 'मेरा कुछ सामान' जैसे सदाबहार गाने दिए।


उपलब्धियां :

आशा जी को पद्म विभूषण सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 1997 मई में आशा जी पहली भारतीय गायिका बनीं जो grammy award के लिए नामांकित की गईं।

आशा भोसले ने अपनी जिजीविषा और प्रतिभा से न केवल हिंदी cinema में अपना स्थान बनाया, बल्कि एक single mother के रूप में भी खुद को साबित किया।

आशा भोंसले ने करीब 800 से अधिक films के लिए 12,000 से अधिक गाने record किए हैं। इसी के साथ उनका Guinness Book of World Records में नाम दर्ज किया गया।

वैसे तो उनके एक से बढ़कर एक सुप्रसिद्ध गीत हैं, उनमें से यह चंद गीत ऐसे हैं, जो उनके सुरों की मल्लिका के खिताब को हमेशा justify करते हैं-

  • एक परदेसी मेरा दिल ले गया
  • उड़े जब जब जुल्फें तेरी 
  • इन आंखों की मस्ती के 
  • दम मारो दम 
  • ढल गया दिन, हो गई शाम 
  • पिया तू अब तो आजा 
  • आओ न, गले लगाओ न, लगी बुझाओ न
  • कह दूं, तुम्हें या चुप रहूं 
  • ओ मेरे सोना रे सोना रे सोना 
  • मुझे नौलखा मंगा दे ओ संइया 
  • सजना है मुझे सजना के लिए 
  • तू, तू है वहीं, दिल ने जिसे अपना कहा 
  • जीना है तो, हंस के जीओ 
  • प्यार का तोहफा तेरा, बना है जीवन मेरा 
  • गोरी तेरे अंग अंग में 
  • यह परदा हटा दो
  • मिलने की तुम कोशिश करना
  • कतूबा, कतूबा
  • सपने में मिलती है 
  • तुम्हारी नज़रों में हमने देखा 
  • हम लाख छुपाएं प्यार मगर 
  • कतरा कतरा बहता है 
  • मेरा कुछ सामान 
  • खाली हाथ शाम आई है 
  • प्यार कभी कम नहीं करना 
  • कजरा मोहब्बत वाला 
  • कोई शहरी बाबू, दिल लहरी
  • दिल्लगी ने दी हवा
  • तुम से मिल के, ऐसा लगा 
  • मार गई मुझे तेरी जुदाई 
  • हो जा रंगीला रे 
  • कहीं आग लगे, लग जाए
  • ज़रा सा झूम लूं मैं 
  • ले गई, लें गई, दिल ले गई 
  • शरारा शरारा 
  • राधा कैसे न जले 


ऐसे ही और बहुत से hit गानों की लड़ी सजाई थी आशा जी ने, सबका जिक्र तो संभव नहीं।

आशा जी, आप सभी singers की प्रेरणा थीं और रहेंगी।

अपने सुमधुर गीतों के साथ सुरों की मल्लिका के रूप में आप हम सब के बीच में सदैव अमर रहेंगी।

Wednesday, 25 March 2026

Article : अष्टमी व नवमी पर्व

चैत्र नवरात्र पर्व चल रहा है, जिसमें सभी दिन‌ विशेष और शुभ होते हैं। इसमें माँ जगदंबा, भगवती या माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है, लेकिन मुख्य रूप से अष्टमी व नवमी तिथि का महत्व अधिक होता है।

अष्टमी तिथि का इसलिए कि इस दिन बहुत से लोग अपने व्रत का पारण कर कन्या पूजन करते हैं, वहीं कुछ नवमी तिथि को कन्या पूजन करते हैं।

साथ ही चैत्र नवरात्र में नवमी तिथि का विशेष महत्व यह भी है कि इस दिन प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है।


तिथियों में संशय :

पिछले कुछ सालों से त्यौहारों की तिथियों  में असमंजस रहने लगा है, और इस साल नवरात्र में अष्टमी व नवमी तिथि काई असमंजस है।

सोचा आज के लेख में दोनों तिथियों के असमंजस का खुलासा एक साथ ही कर दें, कि कब और क्यों‌ है अष्टमी व नवमी तिथि...

जिससे आप के मन में किसी तरह का कोई confusion न रहे…

अष्टमी व नवमी पर्व


महाअष्टमी तिथि :

महाअष्टमी इस वर्ष 26 मार्च 2026 (गुरुवार) को मनाई जा रही है।

कारण :

अष्टमी तिथि 25 मार्च को दोपहर 1:50 बजे शुरू होकर 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे समाप्त होगी। कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त 26 मार्च को सुबह 6:18 से 7:50 और सुबह 10:55 से दोपहर 11:48 बजे तक रहेगा। 

सभी त्यौहारों की उदया तिथि को अधिक विशेषता दी जाती है, अतः अष्टमी का कन्या पूजन 26 मार्च को होगा।


महानवमी तिथि :

चैत्र नवरात्रि की महानवमी 27 मार्च 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है, और इसी दिन नवरात्रि व्रत का पारण (व्रत तोड़ना) और कन्या पूजन किया जाता है।


कारण :

नवमी तिथि 26 मार्च की सुबह 11:48 बजे से शुरू होकर 27 मार्च की सुबह 10:06 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के कारण व्रत का पारण व‌ कन्या पूजन 27 मार्च को होगा।


राम नवमी तिथि :

अगर आप राम जन्मोत्सव की तिथि देख रहे हैं, तो आपको बता दें कि राम जन्मोत्सव 26 मार्च को ही किया जाएगा।


कारण :

नवमी तिथि 26 मार्च की सुबह 11:48 बजे से शुरू होकर 27 मार्च की सुबह 10:06 बजे तक रहेगी। प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव चैत्र नवरात्र की नवमी में 12 बजे किया जाता है।

26 मार्च को नवमी का मुहूर्त 11:48 मिनट से प्रारम्भ होगा, जो कि 27 मार्च को 10:06 मिनट तक ही है, अर्थात् 27 मार्च को 12 बजे तक नवमी तिथि का मुहूर्त ही नहीं है। अतः राम जन्मोत्सव 26 मार्च को ही किया जाएगा।


आप सभी को महाअष्टमी पर्व, महानवमी पर्व व राम जन्मोत्सव पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएँ!

Monday, 16 March 2026

Article : Alternatives of LPG

(I) Crisis of LPG :

LPG (Liquefied Petroleum Gas) के gas cylinders की crisis से आपको भी problem है? तो जुड़े रहिए Shades of Life से, क्योंकि हमारे पास हर problem का solution है। 

LPG/gas cylinder की crisis के चलते, लोग दूसरे alternatives ढूंढ रहे हैं, जिससे खाना बनाया जा सके। क्योंकि बिना खाना खाए तो जीवन नहीं चल सकता है, और हर रोज़ बाहर से order करना संभव नहीं है।

तो चलिए, आज के इस article में जानते हैं LPG के दूसरे alternatives, जिससे खाना अच्छा भी बने और सस्ता भी…

Alternatives of LPG


(II) Alternative Options :

LPG के alternative options हैं microwave oven, airfryer, rice cooker, induction plate और roti-maker.


(III) Microwave Oven : 

Microwave oven gas cylinder का अच्छा alternative है, लेकिन लोगों को लगता है कि यह केवल खाना गर्म करने के लिए useful है।

पर ऐसा नहीं है, इसमें आप variety के rice, different types के bakery items, बहुत-सी तरह की सब्जियां (सूखी और रसे वाली), different types के snacks आदि बना सकते हैं।

Problem है कि बनेंगे कैसे? तो solution आपको मिलेगा हमारी microwave recipes के link में-

https://shadesoflife18.blogspot.com/search/label/Recipes%20-%20the%20microwave%20style?m=0 


हाँ, इसमें रोटी, पराठा, पूड़ी सेंकना नहीं हो सकता है। पर अगर आप bread से रोटी-पराठा replace कर सकते हैं, तो आपका काम बन जाएगा। आप मैदे की जगह आटा ले सकते हैं।


(IV) Rice Cooker :

Rice cooker भी एक option है, दाल-चावल-सब्जी इत्यादि बनाने के लिए।हाँ, थोड़ा time-taking है, पर इसमें भी पूड़ी-पराठा जैसी चीजें नहीं बन सकती हैं।


(V) Induction Plate :

अब आता है, induction plate का option.

इसमें खाना बनाना बहुत हद तक gas stove पर बनाने के equivalent है। विभिन्न नाश्ते, दालें, चावल, सब्जियां-रोटी, पूड़ी-पराठा सब बना सकते हैं, यहां तक कि तवा रोटी भी। वो भी एकदम parfect.

बस इसके इस्तेमाल के लिए इसके विशेष बर्तन होते हैं। इसके बर्तन का base induction plate friendly होता है। अभी single utensil use plate available है, अतः पूरा खाना बनाने में time ज्यादा लगता है।


(VI) Airfryer :

आजकल airfryer भी बहुत trend कर रहा है, specially health के point of view से। 

इसमें खाना बनाने में बहुत कम घी-तेल इस्तेमाल हो रहा है, साथ ही यह user-friendly भी है।

विभिन्न तरह के नाश्ते, सब्जियां आदि बना सकते हैं।

इसमें वो दिक्कतें भी नहीं आ रहीं, जो microwave oven और rice cooker में आ रही थीं। 

मतलब आप इसमें पूड़ी-पराठा आसानी से बना सकते हैं, ऐसा माना जाता है। हाँ पूड़ी पराठा का taste, थोड़ा compromising होगा।

बच्चे भी microwave oven की तरह airfryer को easily use कर सकते हैं। साथ ही इसमें खाना बनाने में कोई special utensil भी use नहीं करना पड़ता है, और इसमें बिजली का bill microwave oven and induction plate के comparison में काफी कम आता है। 


(VII) Roti-Maker :

अगर आप का बिना रोटी-पराठा के काम नहीं चलता है, तो रोटी maker एक अच्छा option है।

इसमें रोटी, पराठा, डोसा, चीला, पापड़, टिक्की, कबाब आदि बनाए जा सकते हैं।

हाँ, यदि आप इसको खरीदने जा रहे हैं तो याद रखिएगा कि इसमें रोटी-पराठा को बेलने काम भी यह कर देता है। पर perfect रोटी-पराठा flatten कैसे होगा, यह उससे सीख कर आइएगा जिससे आप यह खरीद रहे हैं।

जैसे कि perfect रोटी-पराठा के लिए dough कैसा prepare करना है( soft or hard)आटे की गोली को रोटी maker में कहां place करना है, गोली को flatten करने में कहां और कितना press करना है etc., यह सब  उससे सीख लीजिएगा, अन्यथा आप उससे perfect रोटी बना नहीं पाएंगे।

वैसे अगर आपको इसमें रोटी पराठा को perfect flatten करना नहीं आ रहा है, तो रोटी-पराठा बेलकर डाल दें और सेंकने का काम इसमें कर लें।


(VIII) Drawbacks of Alternatives : 

सभी alternatives के कुछ drawbacks भी हैं, उन्हें समझ कर आप उसे खरीदें, जो आपके लिए सबसे ज्यादा perfect हो।

  • Microwave Oven- इसमें बने खाने को health के point of view से अच्छा नहीं माना जाता है, साथ ही इसके excessive बिजली के bill के कारण इसे हरी झंडी देना है कि नहीं, यह सोचा जा सकता है।
  • Rice Cooker- इससे केवल वो चीजें बना सकते हैं, जिन्हें उबालकर बनाना है। इसमें तड़का लगाना, छौंकना-भूनना नहीं किया जा सकता है। 
  • Induction Plate- इससे लोग अभी used to नहीं हुए हैं, अतः खाना जलना, दूध का उफन कर गिर जाना, इत्यादि जैसी problems आ रही हैं। खैर वो तो use and practice से ठीक हो जाएगा। एक problem और है, microwave oven की तरह induction plate से भी बिजली का bill बढ़ा हुआ आता है।
  • Airfryer- इसमें खाना tasty तो बनता है, लेकिन कम तेल-घी का बना खाना हो सकता है कुछ लोगों को taste में compromising लगे। 
  • Roti Maker- इसमें बनने वाली चीजें limited हैं। साथ ही रोटी-पराठा को flatten करने में perfection होने से यह ज्यादा useful होगा।


(IX) Choice of Alternative :

इतने सारे options में आपके लिए best कौन सा है, यह आप खुद decide कीजिए और उसे लाकर अपनी problem solve कीजिए।

Induction plate, airfryer, rice cooker and roti maker, आप अपने संग journey में ले जाकर hotel में भी इसे use कर सकते हैं।


(X) Conclusion :

उपाय हर चीज़ का है, अगर सोचें तो। Panic करने से नहीं, थोड़ा calmly सोचने से option मिल जाते हैं। फिर आप तो Shades of Life से जुड़े हैं, आपके लिए तो हम हर problem का solution लाएंगे ही।

So stay tuned...

Sunday, 15 March 2026

Article : Crude Oil एक, रूप अनेक

(I) Scarcity of LPG :

जब से Iran और Israel के युद्ध में USA (United States of America) शामिल हुआ है, Crude Oil को कैसे अपने देश में लाया जाए, इसकी कवायद पूरे विश्व में शुरू हो गई है।

पर एक बात समझ नहीं आ रही है, जब scarcity LPG (Liquefied Petroleum Gas) की है तो इतनी मांग crude oil के लिए क्यों की जा रही है?

“सारा जोर crude oil मंगाने में ही दिया जा रहा है? या यह भी सोचा जा रहा है कि कैसे gas cylinder की कमी को दूर किया जाए, और petrol और diesel की कमी का क्या? वैसे यह crude oil है क्या बला?”

इन्हीं सवालों का जवाब है, आज का यह article...

Crude Oil एक, रूप अनेक


(II) Introduction to Crude Oil :

सबसे पहले आपको बता दें कि crude oil ही सबसे बड़ी बला है, यह आ जाए देश में तो सब आ गया और यह नहीं तो कुछ नहीं।

कैसे?

तो ऐसे समझिए कि crude oil जननी है और बाकी सब उसके बच्चे।

 मतलब? 

मतलब कि crude oil की process से ही सब बनाया जाता है, जिसकी पूरी एक chain है।

क्या है यह पूरी process, और क्या है उसकी पूरी chain? आइए, इसे समझते हैं।


(III) Fractional Distillation :

वैसे आजकल के 8th class तक पहुंचते हुए बच्चे भी आपको यह बता देंगे, क्योंकि आजकल के curriculum में इस पूरी process को बताया जाता है।

तो वो पूरी process है कि crude oil या कच्चा तेल, जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है, कि आरंभिक अवस्था है। इस पूरी process को petroleum refining या fractional distillation कहा जाता है।

Crude oil को बड़ी-बड़ी refineries में process करते हैं, तो इसके refine होने से बहुत सारे products निकलते हैं। आइए, इन्हें order-wise (bottom to top) जानते हैं।


(IV) Petroleum Products :


  1. Residue (>600°C)- सबसे पहले जो product निकलता है, वो है residue, जिससे asphalt और bitumen (साधारण भाषा में डामर) बनते हैं। इनका उपयोग सड़कों के निर्माण में किया जाता है।
  2. Fuel Oil (370°C-600°C)- Residue के just ऊपर float करता है fuel oil, या engine oil. इसका इस्तेमाल ships और factories में as a fuel किया जाता है।
  3. Lubricating Oil (300°C-370°C)- इसके बाद का product है lubricating oil या machine oil, जो machines को सुचारू रूप से चलाने में सहायक होता है। इससे wax और polishes भी बनती हैं।
  4. Diesel (250°C-350°C)- उसके बाद आता है diesel, जिसका उपयोग होता है heavy motor vehicles, generators, motors, और बड़ी machines में। इसको युद्धपोत (war tankers) में भी use किया जाता है, क्योंकि यह petrol और बाकी fuels के मुकाबले कम inflammable होता है।
  5. Kerosene (175°C-325°C)- उसके बाद आता है kerosene. इससे बनाया जाता है paraffin wax और jet fuel. Paraffin से vaseline और jet fuel से aeroplanes का special fuel बनता है। आपको बता दें कि jets/aeroplanes petrol/diesel से नहीं चलते हैं, उनके लिए एक special oil होता है।
  6. Naphtha (60°C-100°C)- इसके बाद आता है naphtha, जिसका उपयोग plastic और naphthalene balls जैसे जरूरी उत्पादों के लिए किया जाता है।
  7. Petrol/Gasoline (40°C-205°C)- उसके बाद आता है petrol और gasoline. इनका उपयोग (as a fuel) कहाँ-कहाँ किया जाता है, यह बताने की तो ज़रूरत ही नहीं है।
  8. Refinery Gas (<40°C)- Last but not the least आती है refinery gas, जिससे CNG (Compressed Natural Gas), LPG (Liquefied Petroleum Gas) और LNG (Liquefied Natural Gas) जैसे fuels बनाए जाते हैं। सामान्य भाषा में LPG हमारे घरों, restaurants, factories में उपयुक्त होने वाली gas, हमारे gas cylinder की gas है। और CNG vehicles का एक greener fuel.


(V) Petroleum's Prestige :

अब आप समझे कि crude oil क्यों आवश्यक है, क्योंकि crude oil है, तभी सब है, वरना कुछ नहीं। एक देश की अर्थव्यवस्था, रक्षा व्यवस्था, निर्माण व्यवस्था, सब कुछ निर्भर करता है crude oil पर।

अतः देश को सुदृढ़ और सुचारू रूप से चलाने के लिए crude oil का storage आवश्यकता से अधिक होना चाहिए। USA, China, Russia जैसे बड़े और विकसित देशों ने प्रचुर मात्रा में crude oil को store करके रखा है।

अगर भारत को इनसे मुकाबला करना है, तो उसको भी प्रचुर मात्रा में crude oil का storage करना होगा। 

भारत में 85% crude oil import किया जाता है। वैसे crude oil की खपत को कैसे कम किया जाए, इसके बहुत से उपाय किए जा रहे हैं और उनमें सफलता भी मिल रही है।


(VI) An appeal to all :

भारतीय जनता से appeal है कि वह भी कोशिश करे कि crude oil का wastage कम हो। व्यर्थ में सड़कें बर्बाद करना, diesel, petrol‌ और LPG की बर्बादी करना कम करें, बंद करें।

हम आम जनता,  crude oil को देश में लाने का प्रबंध नहीं कर सकते हैं, पर जितना देश में है और हम इस्तेमाल कर रहे हैं, उसका  सदुपयोग कर, उसको बचाने का काम तो कर ही सकते हैं।

याद रखिएगा- 

जब हम रखेंगे ध्यान, 

तभी बनेगा देश‌ महान!

Monday, 9 March 2026

Article : History Repeated, History Defeated

(I) Introduction :

कल International Women's Day पर भारत माँ के सपूतों ने भारत माता को ICC (International Cricket Council) Men's T20 World Cup 2026 की trophy देकर भारत माता के सम्मान में चार चांद लगा दिए।


(II) Toss - NZ chose to bowl first :

कल का तूफानी मैच एक अविस्मरणीय अनुभव था। भारत का हर खिलाड़ी मंझा हुआ नज़र आ रहा था। New Zealand ने toss जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी और बस वहीं से मैच भारत की झोली में आ गया।


(III) Indian Batsmen :

भारत के हर बल्लेबाज का प्रदर्शन देखने योग्य था, जो आ रहा, वो sixers मार रहा। फिर Abhishek Sharma हो, Sanju Samson हो, Ishan Kishan हो, Hardik Pandya हो या Shivam Dube.

पहले तीन batsman; Abhishek Sharma, Sanju Samson और Ishan Kishan ने तो 50 इतनी जल्दी जड़ दिया, मानों सोचकर आएं हों कि इससे कम में तो मानेंगे ही नहीं।

Sanju Samson की सधी हुई आतिशी पारी कमाल‌ की है। India को semi-finals में प्रवेश, semi-finals match में जीत और finals में जीत दर्ज करने में Sanju Samson ने मुख्य भूमिका निभाई है।

यह कहा जा सकता है कि हमारे पास Sanju Samson जैसा एक भरोसेमंद और विश्वसनीय बल्लेबाज है।

हालांकि एक पल जरूर ऐसा आया था, जब भारत के तीन बल्लेबाज; Sanju Samson, Ishan Kishan और Suryakumar Yadav के लगातार तीन wickets गिरने से लगा था कि क्या भारतीय पारी सिमट गई?

क्योंकि उससे पहले तो लग रहा था कि total team score 300 तक पहुंच जाएगा, पर उस क्षण प्रतीत हुआ मानो ढाई सौ का आंकड़ा भी पार होगा कि नहीं। पर Shivam Dube की तेज़ पारी ने 255 का विशाल लक्ष्य दे ही दिया।

History Repeated, History Defeated


(IV) Indian Bowlers :

अब बारी आई गेंदबाजों की, और मजा चौगुना हो गया। जब bowlers ने शुरुआत से ही New Zealand के बल्लेबाजों को बांध कर रख दिया। उनके runs ठीक से बन नहीं रहे थे और wickets भी जल्दी जल्दी गिर रहे थे।

गेंदबाजों में हमारे विश्व प्रसिद्ध Jasprit Bumrah का तो कोई जवाब ही नहीं है। एक catch‌ out और तीन bowled देकर 4 wickets चटकाए, दूसरी ओर Axar Patel ने तीन wickets लेकर बराबर से साथ दिया।

बाकी गेंदबाज, Hardik Pandya, Varun Chakravarthy, Abhishek Sharma ने भी एक-एक wicket लेकर कमाल कर दिया। Abhishek Sharma ने जितनी अच्छी बल्लेबाजी की, वैसी ही अच्छी गेंदबाजी, कि केवल एक over की गेंदबाजी करने आए और उसमें भी एक wicket चटका दिया।

ईशान किशन के शानदार catches ने भारत की जीत में मील के पत्थर जैसा काम किया।


(V) India's Smashing Victory :

दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि कल का दिन भारत का था। भारत माँ के सपूत यह ठान कर आए थे कि आज trophy तो हम ही देंगे अपनी माँ को।

आतिशी बल्लेबाजी, कसी हुई गेंदबाजी ने New Zealand की आधी पारी में ही game एकतरफा कर दिया था। New Zealand की team ताश के पत्तों की तरह ढेर हो गई और 96 के विशाल score से हार गई।


(VI) Records set and shattered (by India) :

भारत के कल के match में बहुत सारे records कायम हो गये, जो इस प्रकार हैं।

  • किसी T20 World Cup Final में अभी तक का highest total score (255/5).
  • Sanju Samson द्वारा बनाया गया किसी T20 World Cup Final में बनाया गया highest individual score- 89/32 (89 runs, 32 balls).
  • साथ ही Sanju Samson ने इस season का highest individual total score (321 runs) भी बनाया।
  • Abhishek Sharma ने अभी तक T20 World Cup Final में fastest fifty (बस 18 balls) बनाई।
  • इस total score के साथ India पहली team बनी T20 World Cup matches में 50 से भी अधिक बार 200+ runs बनाने वाली।
  • इस जीत के साथ India बनी पहली team जिसने T20 World Cup को तीन बार जीता है।
  • India दो बार लगातार T20 World Cup जीतने वाली (Defending Champions) भी पहली team बनी।
  • आजतक India के अलावा कोई भी T20 World Cup को अपने ही देश में नहीं जीत पाया है।
  • पहली बार किसी team के तीनों openers (Sanju Samson, Abhishek Sharma, Ishan Kishan) ने T20 World Cup Final में अर्धशतक जड़े हैं।
  • अभी तक किसी T20 World Cup Finals में powerplay (6 overs) में सबसे अधिक runs (92) बनाए India ने।


(VII) Triumphant History :

  1. भारत की T20 World Cup की पहली trophy M.S. (Mahendra Singh) Dhoni की captaincy में 2007 में आई।
  2. दूसरी trophy Rohit Sharma की captaincy में 2024 में 17 साल के लंबे इंतजार के बाद आई।
  3. तीसरी trophy Suryakumar Yadav की captaincy में 2026 में आई, जो कि दो लगातार trophy में शामिल हो गयी।


(VIII) Key Common Players (2024 & 2026) :

बहुत से खिलाड़ी दोनों T20 World Cups (2024 & 2026) में शामिल हैं, जो कि इस प्रकार हैं।

  • Suryakumar Yadav
  • Jasprit Bumrah
  • Hardik Pandya
  • Arshdeep Singh
  • Kuldeep Yadav
  • Varun Chakravarthy
  • Shivam Dube
  • Axar Patel



(IX) Conclusion :

इसके साथ ही भारत ने 6 World Cup जीत लिए हैं, 2 (men's) ODI, 3 (men's) T20 और 1 Women's World Cup. अब तो यही कहा जाएगा, कि हर जगह में गूंज रहा बस एक ही नारा, "भारत महान हमारा!”

बहुत लोगों ने अफवाहें उड़ाईं और भारत की जीत को इस match में असंभव माना। पर हमारे players ने यह दिखा दिया कि इतिहास हम भारतीयों को दोहराना भी आता है, और हराना भी। इसलिए यह कहा जा सकता है कि History was Repeated, History was Defeated.

जय हिंद, जय भारत 🇮🇳 

Thursday, 5 March 2026

Article : होली भाईदूज

हमारे हिन्दू धर्म में हर रिश्ते का अपना अलग महत्व है, जितना मान और प्रेम माता-पिता, पति-पत्नी और बच्चों के रिश्ते को दिया जाता है, उतना ही मान और प्रेम भाई-बहन के रिश्ते को भी दिया जाता है।

इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है रक्षाबंधन और भाईदूज, पर क्या आप जानते हैं कि भाईदूज साल में दो बार आता है? दो बार?

जी हाँ, दीपावली के बाद का भाईदूज, जिसे सब जानते हैं, विभिन्न नामों के साथ जाना जाता है, जैसे भाईदूज, यमद्वितीया, भाईफोटा इत्यादि। दूसरा भाईदूज होली के रंगोत्सव के दूसरे दिन होता है।

हालांकि बहुत से लोगों के घरों में सिर्फ दीपावली के पश्चात् यमद्वितीया ही मनाया जाता है। लेकिन होली के पश्चात मनाए जाने वाले भाईदूज की भी बराबर से मान्यता है।

आइए जानते हैं, इस विषय में, और इसके पीछे की पौराणिक कथा को भी…

होली भाईदूज


(I) संक्षिप्त विवरण :

हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। इसे भ्रातृ द्वितीया भी कहा जाता है। यह पावन पर्व भाई-बहन के अटूट स्नेह और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।

इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। विवाहित बहनें विशेष रूप से अपने भाइयों को घर आमंत्रित करती हैं और प्रेमपूर्वक, होली पर बनाए विभिन्न पकवान और भोजन कराती हैं। 

मान्यता है कि भाई दूज के दिन बहन के घर जाकर भोजन करने से भाई की आयु में वृद्धि होती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।


(II) पौराणिक कथा :

होली के बाद मनाए जाने वाले भाई दूज से जुड़ी एक लोकप्रचलित कथा इस प्रकार है-

एक नगर में एक वृद्धा अपने बेटे और बेटी के साथ रहती थी। समय के साथ बेटी का विवाह हो गया। एक बार होली के बाद बेटे के मन में अपनी बहन से मिलने और उससे तिलक कराने की तीव्र इच्छा जागी।

उसने अपनी माँ से बहन के घर जाने की अनुमति मांगी। पहले तो माँ ने टालने की कोशिश की, लेकिन बेटे के बार-बार आग्रह करने पर उसे जाने की अनुमति दे दी। बहन का गांव दूर था, रास्ते में नदी, जंगल इत्यादि पड़ने थे।

घर से निकलने के कुछ समय बाद, रास्ते में उसे एक नदी मिली। नदी बहुत उफान पर थी, मानो बोल उठी- “मैं तुम्हारा काल हूँ, जैसे ही तुम मेरे जल में उतरोगे, डूब जाओगे।”

यह सुनकर वह घबरा गया, पर साहस जुटाकर बोला- “पहले मैं अपनी बहन से तिलक करवा लूँ, उसके बाद तुम मेरे प्राण ले लेना।”

आगे बढ़ने पर जंगल में एक भयंकर शेर मिला। वह उसे खा जाने के लिए गुर्राता हुआ आगे बढ़ने लगा, उसने शेर से भी वही विनती की। 

थोड़ी दूर चलने पर एक सांप ने उसके पैर लपेट लिए। युवक ने उससे भी निवेदन किया कि पहले बहन से मिल लेने दे, फिर जो दंड देना हो दे देना।

किसी तरह वह अपनी बहन के घर पहुंच गया। बहन ने भाई को देखते ही स्नेह से गले लगाया, तिलक किया और प्रेमपूर्वक भोजन कराया। भोजन करते समय भाई को उदास देखकर बहन ने उसके दुख का कारण पूछा। तब भाई ने रास्ते में मिली सभी बाधाओं की बात बता दी। 

बहन अपने भाई को असीम स्नेह करती थी, रास्ते की बाधाएं सुनकर वह बोली- “भाई! तुम चिंता न करो, मैं तुम्हें घर तक छोड़कर आऊंगीं।”

वह कुछ तैयारी के साथ भाई के साथ हो गई। उसने शेर के लिए मांस, सांप के लिए दूध और नदी के लिए ओढ़नी साथ ले ली।लौटते समय सबसे पहले शेर मिला। बहन ने उसके आगे मांस डाल दिया, जिससे वह शांत हो गया।

आगे सांप मिला तो उसने उसके सामने दूध रख दिया, और वह भी शांत हो गया। जब वे नदी के पास पहुंचे तो लहरें पुनः तेज उठने लगीं। बहन ने श्रद्धा से नदी को ओढ़नी अर्पित की, जिससे नदी भी शांत हो गई और दोनों सुरक्षित पार हो गए।


(III) धार्मिक मान्यता :

इस प्रकार बहन ने अपने प्रेम, बुद्धिमत्ता और साहस से भाई पर आने वाली हर विपत्ति को टाल दिया। तभी से मान्यता है कि चैत्र मास की द्वितीया तिथि, अर्थात होली के अगले दिन, भाई दूज का पर्व मनाया जाता है।

इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक कर उनकी लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।


(IV) अन्य कारण :

वैसे आपको हर बहन के मन की बात बताते हैं कि विवाह उपरांत, भाई के प्रति और अधिक स्नेह भाव बढ़ जाता है। 

वो अपने भाई की हर विपदा से लड़ जाती हैं, और सदैव अपने भाई की सुरक्षा और समृद्धि की कामना करती है। तो जिन भाइयों की बहन हैं, वो अपने सौभाग्य को सराहा सकते हैं।

आप सभी को होली भाईदूज की हार्दिक शुभकामनाएँ!

Sunday, 1 March 2026

Article : होलिका दहन - पूजन विधि, तिथि व शुभ मुहूर्त

हिन्दू धर्म में बहुत से देवी-देवता और अनेकानेक छोटे-बड़े त्योहार हैं, जिसमें दो मुख्य त्योहार हैं; दीपावली और होली।

दोनों की अलग छटा, अलग उत्सव, कोई किसी से कम नहीं, एक अमावस्या को, तो एक पूर्णिमा को।

इस साल होलिका दहन व रंगोत्सव होली में एक दिन का अंतर है। ऐसा क्यों है, और होलिका दहन का शुभ मुहूर्त क्या होगा, जान लेते हैं।

होलिका दहन - पूजन विधि, तिथि व शुभ मुहूर्त


होलिका दहन, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, हर साल यह पर्व फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है।

साल 2026 में होली की तारीख को लेकर लोगों के मन में थोड़ा confusion है कि होलिका दहन 2 मार्च या 3 मार्च, कब मनाया जाएगा?


(I) तिथि :

2 या 3 मार्च-

कहीं 2 मार्च तो कहीं 3 मार्च को दहन की चर्चा हो रही थी। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि 3 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। पंचांग के अनुसार यह इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च 2026, सोमवार की रात को किया जाएगा। हालांकि इस बार भद्रा का साया भी रहेगा, जिस वजह से सही मुहूर्त का विशेष ध्यान रखना जरूरी होगा।

पूर्णिमा व भद्रा का संयोग-

पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च 2026 को शाम के 5:18 से हो रही है। इसी समय भद्रा का वास भी शुरू हो जाएगा, जो पूरी रात और अगली सुबह 3 मार्च को 4:56 बजे तक प्रभावी रहेगा। 

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, भद्रा काल में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करना वर्जित माना गया है। 

खासतौर पर होलिका दहन जैसे पर्व पर भद्रा का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। शास्त्रों में भद्रा को अशुभ योग माना गया है। मान्यता है कि भद्रा में किए गए शुभ कार्यों का फल विपरीत हो सकता है।


(II) शुभ मुहूर्त :

पंचांग के अनुसार इस वर्ष होलिका दहन का सबसे उपयुक्त और शास्त्रसम्मत समय रात 12:50 बजे से 2:02 बजे के बीच रहेगा। इस दौरान भद्रा का पुच्छ काल माना जा रहा है, जो होलिका दहन के लिए अनुकूल माना जाता है।

अतः होलिका दहन का सबसे उपयुक्त मुहूर्त कुल 1 घंटा 12 मिनट का है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी समय में होलिका दहन करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

तो आप समझ गए होंगे कि इस साल के पहले चंद्रग्रहण और भद्रा काल के कारण, होलिका दहन 2 मार्च की रात को किया जाएगा, 3 मार्च को चंद्रग्रहण है अतः रंगोत्सव 4 मार्च को मनाया जाएगा।

हालांकि सबके घर में भिन्न-भिन्न तरह से सभी पूजा-अर्चना की जाती है, लेकिन होलिका दहन की अग्नि के समीप की जाने वाली पूजा विधि इस प्रकार है।


(III) पूजा विधि :

होलिका दहन से पहले परिवार के साथ विधि-विधान से पूजा करना शुभ माना जाता है।

होलिका के चारों ओर परिक्रमा करें।

कच्चा सूत, गेहूं की बालियां, नारियल और जल अर्पित करें।

साथ में होली उत्सव के लिए जो भी पकवान बनाए या आपने खरीदे हैं, जैसे गुजिया, मठरी, पापड़, मालपुआ, दही बड़े इत्यादि उनको भी साथ में लाएं और उनका अर्पण कर पकवानों को प्रसाद रूप में परिवर्तित करें।

“ॐ होलिकायै नमः” मंत्र का जाप करें।

परिवार की सुख-समृद्धि और बुरी शक्तियों के नाश की प्रार्थना करें।

अगले दिन होलिका की राख को तिलक के रूप में लगाना भी कई जगह शुभ माना जाता है।


(IV) पूजन मंत्र :

  • मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वज:, मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
  • ॐ वासुदेवाय विघ्माहे वैधयाराजाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात्।
  • ॐ तत्पुरुषाय विद्‍महे अमृता कलसा हस्थाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात्।


आप सभी को होलिका दहन व रंगोत्सव होली पर हार्दिक शुभकामनाएं।

Friday, 20 February 2026

Article : एकांत का शोर

आज की यह post एक अजीब से एहसास की दास्तान है। एक ऐसी दास्तान, जिसका अनुभव किसी को कभी न हो।  शायद हुआ भी न हो, क्योंकि यह एक विकट परिस्थिति है, जिससे बहुत कम लोगों को रूबरू होना पड़ता है।

और वो एहसास है, एकांत के शोर का।

एकांत का शोर


आप कहेंगे कि आजकल एकांत का एहसास कौन-सा नया है। Joint family का culture तो लगभग खत्म ही हो चुका है, फिर बच्चों का बड़े शहरों और विदेशों में बसना, इसको बहुत बढ़ावा दिया जा रहा है। सही है, यह भी बहुत भयावह है, पर अब यह कटु सत्य बनता जा रहा है, जो अगर आप अपने परिवार में रोक सकें तो आप बहुत भाग्यशाली होंगे।

पर हम आज उस एकांत की बात कर रहे हैं, जब आप सबके बीच में हों, सब बेइंतहा आपका ध्यान रख रहे हों, आपके लिए तन-मन-धन से समर्पित हों, आप को सब दिख रहा हो, सबका एहसास भी हो, पर फिर भी आप नितांत अकेले हों, असमर्थ हों। 

आप कहेंगे कि हम क्या कहना चाह रहे हैं, कुछ समझ नहीं आ रहा है? जी हांँ, ऐसी ही परिस्थिति थी, जब weather और doctor की लापरवाही के कारण pneumonia और मेरे दोनों कानों में infection हो गया, जो कि कान की हड्डियों तक पहुंच चुका था, साथ ही कान के पर्दे में छेद हो गया था। तो कान में बेहद दर्द और हमें सुनाई देना लगभग बंद हो गया।

लगभग, मतलब बिल्कुल कान के पास आकर और जोर से कोई बोले तभी सुनाई दे रहा था। अन्यथा इशारे से बातें। एक तो सुनाई नहीं दे रहा था, और ऊपर से pneumonia के कारण सांस न ले पाना और अतिशय कमजोरी, सीने में दर्द, कान के पर्दे में छेद होने की वजह से ear drops, कान से निकल कर मुंह में आ जाती, जिससे मुंह बेहद कसैला हो जाता, जिससे खाना खा पाना दूभर, इत्यादि।

मतलब कि एक बहुत भयावह और लगभग तोड़ देने वाली स्थिति, पर इस स्थिति के साथ ही एक और एहसास, एकांत के शोर का। एकांत का शोर, मतलब?

कुछ सुनाई नहीं दे‌ रहा था, पूरी दुनिया से पूरी तरह से कट गए थे, क्योंकि न किसी की बात सुन‌ पा रहे थे और pneumonia के कारण बहुत सांस फूल रही थी, तो किसी से कुछ बात भी कर पाना मुश्किल हो रहा था।

इस तरह से सबके मध्य रहकर भी नितांत एकांत में पहुंच जाना बहुत भयावह था। 

पर एकांत में शोर? 

वो क्या था? 

वो था, उस समय अपने शरीर के अंदर की आवाज सुनाई देना। 

मतलब?

मतलब दिल की धड़कन(heart beat), जो कि तबीयत खराब होने के कारण 72 से बढ़कर 150 हो गई थी। हर पल ऐसी प्रतीत हो रही थी, मानो दिमाग में लगातार कोई हथौड़े चला रहा हो, कभी तो मन करता कि यह धड़कन रुक जाए, तो चैन आए।

अपना बोलना, सबसे तेज़ खुद को ही सुनाई देना, कुछ खा रहे होते तो उससे तेज़ कुछ नहीं सुनाई देना और बहुत सारी बातों का मंथन, हर पल को सालों में बदल रहा था। 

ईश्वर ने हमें 5 इंद्रियां दी है। जो कोई उनमें से किसी एक से भी वंचित हैं, तो उसका जीवन बहुत कठिन होता है। किन्तु वो व्यक्ति जो पहले पूर्णतः स्वस्थ हो, पर किसी कारणवश उसकी कोई इंद्री, कुछ समय या हमेशा के लिए ख़राब हो जाए, तो उसके लिए जीवन असहनीय हो जाता है।

क्योंकि जिसके पास पहले से ही नहीं था, उसे पूर्ण अनुभव नहीं होता है कि वो क्या क्या खो रहा है। 

जबकि, जो सब अनुभव कर चुका हो, उसका उस अनुभव के बाद वंचित होना बेहद कष्टकारी होता है।

पर अब कुछ बेहतर स्थिति है, थोड़ा-थोड़ा सुनाई देना, कुछ-कुछ बातें भी कर लेना, मेरा blog में वापसी, सब आप लोगों का प्यार है, जिसने एक बार फिर दिल को आप सब से जोड़ दिया।

चलिए, कल से फिर से एक बार खुशनुमा सफ़र शुरू करते हैं, एक नई शुरुआत के साथ, पर सोच में बहुत कुछ बदल गया है, शायद इसकी झलक आगे की posts में भी दिखे।

आप सभी को बहुत सारा धन्यवाद, जिन्होंने मेरे स्वास्थ्य के लिए मंगलकामनाएं की 🙏🏻 

हे ईश्वर, आप से प्रार्थना है कि, सबको ही सम्पूर्णता प्रदान करें और किसी को सुख प्रदान कर यूं कभी वंचित न करें।

Tuesday, 25 November 2025

Article : राम मंदिर में धर्म-ध्वज

आज का दिन 25 November 2025, सनातन धर्म के इतिहास में महत्वपूर्ण दिन है।

कारण?

जिस तरह से सैकड़ों वर्षों की परतंत्रता की बेड़ियों को तोड़कर भारत स्वतंत्र हुआ था, वो स्वतंत्रता दिवस का पल अनमोल था।

वैसे ही प्रभु श्रीराम जी के भव्य मंदिर पर सैकड़ों वर्षों पश्चात् सनातन पताका या धर्म-ध्वज लहराना भी अविस्मरणीय दिवस है।

राम मंदिर में धर्म-ध्वज


राम मंदिर में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिखर पर धर्म-ध्वज की स्थापना आज, मतलब 25 नवंबर (मंगलवार) को कर चुके हैं। हर राम भक्त के मन में यह सवाल है कि आखिर 25 नवंबर को ऐसा क्या है कि इसी दिन यह शुभ घड़ी आई है। इस दिन का क्या महत्व है, और 22, 23 अथवा 24 तारीख क्यों नहीं रखा गया?

प्रभु श्रीराम की नगरी, अयोध्या में 25 नवंबर को एक ऐतिहासिक कार्य होने जा रहा है, जिसके लिए खास तैयारियां चल रही हैं। अयोध्या में यह पहली बार होगा, जब राम जन्मभूमि परिसर में बने भव्य राम मंदिर में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिखर पर धर्म-ध्वज की स्थापना 25 नवंबर दिन मंगलवार को करेंगे।

दरअसल 25 नवंबर का दिन बेहद खास है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ज्योतिष गणना के अनुसार, इस दिन विवाह पंचमी है और इसी दिन त्रेतायुग में प्रभु राम और माता जानकी का विवाह हुआ था।

इस दिन किया गया कार्य शुभ माना जाता है। अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं, कि 25 नवंबर का दिन मंगलवार पढ़ रहा है और इस दिन चंद्रमा भी मकर राशि में विद्यमान है।

उन्होंने बताया कि मंगलवार दिन होने की वजह से हनुमान जी महाराज की भी विशेष कृपा इस दिन पर रहेगी।

ऐसी स्थिति में इस दिन कई शुभ योग का निर्माण भी हो रहा है। जिस समय प्रधानमंत्री मोदी दोपहर 11:45 से लेकर 12:29 के बीच राम मंदिर के शिखर पर ध्वज की स्थापना करेंगे, वह मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त है और भगवान राम का जन्म भी दोपहर में अभिजीत मुहूर्त में ही हुआ था। यही वजह है कि यह दिन बेहद खास और ऐतिहासिक दिन है।

यह एक ऐसा दिन है, जो भारत में पुनः हिंदुत्व की प्रभुता को प्रखर करेगा। पुनः भारत अपनी सभ्यता और संस्कृति का प्रचार-प्रसार करेगा, एक बार फिर भारत में रामराज्य स्थापित होगा।

बहुत से लोग होंगे, जिन्हें यह कुछ विशेष नहीं लग रहा होगा, बल्कि वो कहेंगे कि school-colleges खुलवाते, hospitals बनवाते, तो उनको यही कहेंगे, वो भी खुलवाए और बनाए गए हैं।

पर कुछ समय, ध्यान और धन ईश्वर को भी समर्पित करना चाहिए, क्योंकि जहां ईश्वर का वास होता है, वहां सब कुछ खास होता है।


जय श्रीराम, दशरथ नंदन, राजाराम।

जय श्री राम, जय श्री राम, जय श्री राम 🪔 🎉 🚩


आज का दिन मेरी ज़िन्दगी का भी विशेष दिन है। इसी दिन, ईश्वर ने हमें जीवन साथी से जोड़ा था 🙏🏻

ईश्वर की कृपा और आप सभी की शुभकामनाएं सदैव बनी रहे 🙏🏻 🙏🏻 

ईश्वर से प्रार्थना है कि सुखी-वैवाहिक जीवन प्रदान करें, परिवार भी सुख-सम्पन्न रहें, रिश्तों से बंधा परिवार भी और आप सभी से जुड़ा परिवार भी 🙏🏻😊

Wednesday, 12 November 2025

Article : वंदे मातरम्@150 years

वंदे मातरम्, एक शब्द, एक उद्धोष, एक प्रेरणा, एक ज्वाला है, जिसने भारत में स्वतंत्रता की मशाल जला दी। हर बच्चा, युवा, बुजुर्ग- पुरुष और महिला, सबके मन-मस्तिष्क पर वंदे मातरम् अंकित हो गया था।

हर व्यक्ति के लिए अपने स्वार्थ के ऊपर देश था। और जब जन-जन के मन में देश प्रथम होता है, तब स्वर्णिम बेला अवश्य आती है, जो भारत में आजादी के रूप में आई।

देश की आजादी के पश्चात इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में सम्मानित किया गया।

वंदे मातरम्@150 years


7 नवंबर को, वन्दे मातरम् को 150 वर्ष पूरे हो गए हैं। अतः सरकार द्वारा यह निर्धारित किया गया है कि इस शुभ अवसर को पूरे एक वर्ष तक उत्सव के रूप में मनाया जाएगा।

Government & public places पर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् बजाया जाएगा, साथ ही साथ समय-समय पर कुछ विशेष कार्यक्रमों को भी आयोजित किया जाएगा।

वन्दे मातरम् महान बंगला साहित्यकार और देशप्रेमी बंकिम चन्द्र चटर्जी द्वारा संस्कृत और बाँग्ला मिश्रित भाषा में रचित एक गीत है।

उन्होंने इस देशभक्ति गीत की रचना 7 नवंबर 1875 में अक्षय नवमी के दिन की, जिसका publication सन् 1882 में उनके उपन्यास आनन्द मठ में अन्तर्निहित गीत के रूप में हुआ था। इस गीत से सदियों से सुप्त भारत देश जग उठा।

यह गीत British सत्ता के विरोध और देशप्रेम की भावना से ओत-प्रोत एक ऐसी कहानी है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम को नये आयाम दिए। 

दरअसल उस समय पर बड़े पैमाने में राजनैतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परिवर्तन हो रहा था। राष्ट्रीय पहचान और British सत्ता के प्रति प्रतिरोध की भावना बलवती हो रही थी।

ऐसे में वंदे मातरम् गीत ने माँ भारती को शक्ति, समृद्धि और दिव्यता के रूप में प्रतिष्ठित किया, तथा देश की एकता व अखंडता की भावना को जाग्रत करते हुए उसे एक काव्यात्मक स्वरूप दिया। जल्दी ही यह गीत भक्ति, समर्पण और अमरता का प्रतीक बन गया।

राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् को एक वर्ष तक विशेष महत्व देना, मात्र इस गीत को विशेष सम्मान प्रदान करना नहीं है वरन् उसके रूप में उन सभी देशभक्त क्रान्तिकारियों के सामने नतमस्तक होना है, जिन्होंने अपने स्वार्थ से ऊपर देश को रखा, जिन्होंने अपने बहुमूल्य जीवन को हंसते-हंसते देश की आजादी के लिए निछावर कर दिया। 

यदि उन्होंने देशभक्ति को सर्वोपरि नहीं माना होता तो भारत को स्वतंत्रता दिलाना असंभव था।

आज हम स्वतंत्र भारत में, स्वेच्छा से अपना जीवन यापन कर रहे हैं, तो उन्हीं देशभक्त क्रान्तिकारियों के कारण ही..

तो क्यों न सरकार के इस सराहनीय कार्य को और शुभ करते हैं। हम अपने बच्चों को, अपने युवाओं को उस पल के विषय में जितना अधिक जागरूक कर सकते हैं, करते हैं। उनके मन में देश-प्रथम की भावना को बलवती करते हैं।

जब हमारा भारत सर्वोपरि, सशक्त, अखंड और समर्थ होगा, तब ही सच्चा नमन होगा, राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् को और सच्ची श्रद्धांजलि देशभक्त क्रान्तिकारियों को।

जय हिन्द, जय भारत 🇮🇳