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Saturday, 31 October 2026

Article : Vigilant and Victorious

(I) Vigilance Awareness Week 2026 :

आजकल Vigilance Awareness Week (26 October - 1 November) चल रहा है, जो India के ‘Ironman of India’ Sardar Vallabhbhai Patel के birth-anniversary के सप्ताह के रूप में celebrate किया जाता है।

क्यों कहते हैं इस week को vigilance awareness week? Vigilance अर्थात् सतर्कता...

सतर्कता ही सफलता


(II) Major Contributions :

सरदार वल्लभभाई पटेल ने न केवल देश को independent कराने में योगदान दिया था, बल्कि बंटे हुए देश को एकसूत्र में बांध कर, unite करके, भारत देश (Part A, Part B, Part C, Part D) बनाया था।

सरदार वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्र भारत के political unity, administrative system के निर्माण, और farmer protests के जरिए देश के निर्माण में historical contribution दिया है।

उन्हें भारत के ‘लौहस्तंभ’ के रूप में जाना जाता है। देश के लिए उनके प्रमुख योगदान इस प्रकार हैं।

  • Provincial Unity- आज़ादी के बाद देश के सामने लगभग 565 से अधिक princely states को एक करने की सबसे बड़ी चुनौती थी। सरदार पटेल ने अपनी कूटनीति, बातचीत और दृढ़ इच्छाशक्ति से 560 से अधिक provinces को Indian Union में मिलाया।
  • Accession Process- V.P. Menon के साथ मिलकर States Department के through ‘Instrument of Accession’ (विलय-पत्र) पर signature कराकर अधिकांश रियासतों का विलय किया गया।
  • Main Challenges- Hyderabad, Junagadh, Kashmiri, Travancore, और Bhopal जैसी रियासतों के एकीकरण में उन्होंने कूटनीति और आवश्यकतानुसार दृढ़ रुख अपनाया।
  • Iron Man- इस ऐतिहासिक और extraordinary कार्य के कारण ही उन्हें भारत का ‘लौह पुरुष’ कहा जाता है।
  • Union Public Service Commission- पटेल को ‘Father of All Indian Services’ माना जाता है। उन्होंने देश में Indian Administrative Service (IAS) और Indian Police Service (IPS) [UPSC] की स्थापना की, जो देश के प्रशासनिक ढांचे को मजबूती प्रदान करती है।
  • Protests and Satyagraha- आज़ादी के पहले उन्होंने Bardoli Satyagraha (1928) और Kheda Satyagraha (1918) का नेतृत्व किया। Bardoli की महिलाओं ने उन्हें वहाँ ‘Sardar’ की उपाधि दी थी।
  • Co-operative Protests- भारत के co-operation और dairy sector की नींव रखने में उनका अहम योगदान था, जिससे आगे चलकर ‘Amul (Anand Milk Union Limited)’ जैसे बड़े organizations का मार्ग प्रशस्त हुआ।
  • Home Minister and Deputy Prime Minister- आज़ादी के बाद देश के लिए prime minister के रूप में पहली पसंद सरदार वल्लभभाई पटेल ही थे।


(III) Gandhi's Say :

किन्तु Mahatma Gandhi की इच्छा थी कि Jawaharlal Nehru prime ministers बने। अतः उन्होंने गांधी जी की इच्छा को सर्वोपरि मानते हुए पहले गृह मंत्री और उप-प्रधानमंत्री का पद स्वीकार किया।

पहले गृहमंत्री और उपप्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने partition के बाद refugees के पुनर्वास और internal security बहाल करने में मुख्य भूमिका निभाई।

अगर हमारे देश भारत के पास सरदार वल्लभभाई पटेल की सतर्क दृष्टि और सफल political ज्ञान न होता, तो भारत कभी सुदृढ़ और सफल नहीं होता।

देश अपने पुनर्संगठित, सुदृढ़ और सफल होने के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल जी का सदैव indebted रहेगा।

उनके अनेकानेक योगदान को याद करते हुए, उनकी देश के प्रति सतर्कता को सच्ची श्रद्धांजलि देने के उपलक्ष्य में vigilance awareness week मनाता है, जिसे उनके जन्मदिवस पर अपने श्रद्धा के पुष्प अर्पित कर सम्पन्न किया जाता है।

देश के अमर स्वतंत्रता सेनानी, पहले गृहमंत्री और उपप्रधानमंत्री, लौह-पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी को, जिन्होंने हमें समझाया कि सतर्कता ही सफलता है, उनके जन्मदिवस पर शत-शत नमन!

Wednesday, 28 October 2026

Article : कहाँ कब निकलेंगे चंद्रमा?

कल सुहागिनों का सबसे बड़ा और सबसे favourite fast करवाचौथ है, जिसकी तैयारी वो बहुत जोर-शोर से करती हैं।

Dress, jewellery, मेंहदी, श्रृंगार; सब कुछ इतना perfect रखना चाहती हैं कि पिया जी की उनसे नज़रें ही न हटें।

पर इन सब के अलावा दो और बहुत बड़ी बातें होती हैं, कि करवाचौथ व्रत का पूजा-मुहूर्त क्या है, और चन्द्र देव कब दर्शन देंगे?

तो बस, हर बार की तरह इस बार भी आपके इस प्रश्न के उत्तर के साथ आज की post ready है…

कहाँ कब निकलेंगे चंद्रमा?


पूजा का शुभ मुहूर्त शाम के 5:38 से रात के 6:56 बजे तक है।

चतुर्थी तिथि की समाप्ति: रात 10:09 बजे तक 

करवाचौथ (29 October 2026) पर विभिन्न प्रमुख शहरों में चंद्रोदय (moonrise) का समय इस प्रकार रहेगा:

  • Kolkata- रात 7:47 बजे
  • Prayagraj- रात 8:02 बजे
  • Kanpur- रात 8:05 बजे
  • Varanasi- रात 8:05 बजे
  • Lucknow- रात 8:06 बजे
  • Agra- रात 8:18 बजे 
  • Delhi- रात 8:21 बजे
  • Ghaziabad- 8:16 बजे 
  • Noida- 8:17 बजे 
  • Dehradun- रात 8:14 बजे
  • Gurugram- रात 8:22 बजे
  • Indore- रात 8:34 बजे 
  • Bhopal- रात  8:26 बजे 
  • Gwalior- रात 8:20 बजे 
  • Narmadapuram (Hoshangabad)- रात 8:26 बजे 
  • Jaipur- रात 8:31 बजे 
  • Bengaluru- रात 8:52 बजे 
  • Ahmedabad- रात 8:53 बजे
  • Mumbai- रात 9:00 बजे 

अगर आप को किसी विशेष शहर के विषय में जानकारी चाहिए, तो कृपया comment box में बता दें।

Timings तो आपको बता दीं, पर साथ में एक ऐसी बात भी है, जो शायद सुहागिनों को अच्छी न लगे।

मौसम विभाग ने Eastern Uttar Pradesh में भारी से बहुत भारी बारिश और गरज-चमक (heavy thinderstorms) का alert जारी किया है। Eastern Uttar Pradesh में भी गरज-चमक और तेज हवाएँ चलने की आशंका है। मध्य प्रदेश के भी कई शहरों में भारी बारिश होने की forecast की गई है।

ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं को चाँद के दीदार के लिए इंतजार करना पड़ सकता है या शायद चाँद देखना मुमकिन न हो। 

Indian Meteorological Department (IMD) की सूचना के अनुसार बादलों के कारण चाँद हर शहर में देर से दिखेगा, अतः हर शहर का दिया हुआ संभावित समय बदल सकता है।

हालांकि Jaipur, Bengaluru, Ahmedabad, Mumbai आदि क्षेत्रों वाले शहरों (western and southwestern India) में बारिश की forecast नहीं है।

अगर आप को सही समय पर चाँद दिख जाए तो बहुत अच्छी बात है। यदि निर्धारित समय होने पर भी बादल न हटें, तो चंद्रदेव का स्मरण करें और पंचांग के अनुसार जिस दिशा से चंद्रमा का उदय होना चाहिए, उस दिशा की तरफ मुख करके अर्घ्य दें। ऐसा शास्त्र सम्मत है।

सभी सुहागिनों को करवाचौथ व्रत पर विशेष शुभकामनाएँ!

Friday, 9 October 2026

Article : Organic Revolution

(I) Our Inspiration :

आज का यह article कोई information को share करने के लिए नहीं डाल रहे हैं, बल्कि एक appeal, एक awareness के लिए डाल रहे हैं।

इसलिए इसे जितना हो सके forward कीजिए, अगर आप भी Cancer से खुद को और अपने परिवार को बचाना चाहते हैं तो।

यह article movie The India Story देखने के बाद लिखने की प्रेरणा मिली। इसमें Green Revolution को रोक लगाकर अब Organic Revolution करने की appeal की गई है।

जो कितनी आवश्यक है, उसे समझने से पहले यह जानते हैं कि green revolution क्या है, यह क्यों शुरू किया गया था, और अब इसकी आवश्यकता क्यों नहीं है…

Organic Revolution


(II) The Requirement :

1966 की बात है, Tashkent (Uzbekistan) में रहस्यमय तरीके से भारत के Prime Minister Lal Bahadur Shastri Ji की मौत हो गई। 

इसके पीछे किसका हाथ था? आखिर क्या राजनैतिक कारण था? आज तक clear नहीं हुआ है। 

उस समय देश में भुखमरी जैसे हालात पैदा हो गये थे, अतः कोशिशें की जाने लगी कि किस तरह से produce बढ़ाई जाए, कैसे देश को भुखमरी से निकाल कर self-dependent बनाया जाए।

भारत में Green Revolution की शुरुआत 1960 के decade के उत्तरार्ध (लगभग 1966-67) में हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य देश को produce के मामले में आत्मनिर्भर बनाना था।

Green Revolution agriculture में आधुनिक techinques, HYV (High Yield Variety) seeds और chemical fertilizers के प्रयोग से produce में भारी वृद्धि करने की एक ऐतिहासिक पहल है।


(III) Historical Overview :

  • International Father- Norman Borlaug को international level पर green revolution का father माना जाता है।
  • Indian Father- Dr. M.S. Swaminathan India में green revolution के प्रमुख pioneer और father थे।
  • Word Usage- ‘Green Revolution’ शब्द का सबसे पहले प्रयोग William Gaud ने किया था।


(IV) Major Details :

  • HYV seeds- High Yielding Variety seeds का उपयोग विशेषकर गेहूं और चावल के लिए किया गया। इससे भारत को अनाज के Import पर निर्भर नहीं रहना पड़ा।
  • Ploughing- Wells और advanced ploghing साधनों का विस्तार।
  • Fertilisers & Pesticides- Chemical fertilizers और pesticides का बड़े पैमाने पर प्रयोग।
  • Machinery- Traditional तौर-तरीकों की जगह tractor, harvester, tubewell, thresher और advanced agricultural implements का उपयोग शुरू हुआ।


(V) Positive Impacts :

  • Food Sufficient- भारत अनाज के मामले में self-dependent बन गया और भुखमरी की समस्या में कमी आई।
  • Higher Produce- Wheat और paddy के उत्पादन में record-breaking तीन गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। 
  • Economic Increase- विशेष रूप से Punjab, Haryana और western Uttar Pradesh के farmers की income बढ़ी और वे subsidence farming से निकलकर commercial farming की ओर अग्रसर हुए।
  • More Employment- Farming prodyce बढ़ने, harvesting के चक्र में तेजी आने और machinery से rutal areas में employment के नए अवसर पैदा हुए।


(VI) Negative Impacts :

  • Regional Inequality- Green Revolution का लाभ मुख्य रूप से Punjab, Haryana और western Uttar Pradesh तक ही सीमित रहा, जबकि देश के अन्य पिछड़े हिस्से इससे वंचित रह गए।
  • Urban-Rural Divide- Advanced agricultural techniques (बीज, उर्वरक, machines) महंगी होने के कारण इसका पूरा लाभ बड़े और अमीर किसानों को मिला, जबकि छोटे व गरीब किसान पीछे छूट गए।
  • Barren Land- Chemical fertilizers और pesticides के अंधाधुंध इस्तेमाल से मिट्टी की natural fertility घटने लगी और भूमि barren होने लगी।
  • Groundwater reduction- धान और गेहूं जैसी अधिक पानी चाहने वाली crops के कारण अंधाधुंध नलकूप चलाए गए, जिससे कई क्षेत्रों में groundwater level काफी नीचे चला गया।
  • Nature Degradation- Chemical व pesticides के अवशेषों से water और air pollution बढ़ा, जिसका बुरा प्रभाव human health और biodiversity पर भी पड़ा।


(VII) Emergence of Cancer :

नकारात्मक प्रभाव में मुख्य रूप से भूमि और मिट्टी की उर्वरता पर असर तथा nature और health को नुकसान शामिल है।

Chemical fertilizers और pesticides के अंधाधुंध इस्तेमाल से सबसे अधिक संकट जो उभर कर सामने आया, वो है cancer जैसी खतरनाक बीमारी का बहुत तेजी से फैलना।

रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से बचने और मिट्टी की उर्वरता, पर्यावरण व स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए organic और natural कृषि पद्धतियों को अपनाने की एक महत्वपूर्ण पहल है, जैविक क्रांति।


(VIII) Main Details :

  • Budget Reduction- Organic तकनीकों और prodyce के उपयोग से खेती की लागत traditional chemical farming के मुकाबले लगभग आधी (50% तक) रह जाती है। मतलब मेहनत अधिक और पैदावार कम।
  • Fertility increase- Urea और अन्य chemicals के अत्यधिक उपयोग से खराब हुई मिट्टी की उपजाऊ क्षमता और उसकी softness manure व vermicompost से फिर से बहाल होती है।
  • Natural Fertilizers- Crops को कीटों से बचाने के लिए नीम, धतूरा और सीताफल जैसी प्राकृतिक पत्तियों के fermented घोल का उपयोग किया जाता है।
  • Better Profit- Organic रूप से उगाए गए अनाज, सब्जियां और अन्य उत्पाद market में सामान्य उत्पादों की तुलना में अधिक कीमत पर बिकते हैं, जिससे किसानों की income बढ़ती है।

 

(IX) The Summary :

हरित क्रांति के प्रभाव को कम करने का सटीक उपाय जैविक क्रांति ही है। लेकिन उसके साथ ही यह भी सुन लें कि organic grains, fruits और vegetables अधिक costly होते हैं।

लेकिन एक बार अपने सीने पर हाथ रखकर अवश्य सोचिएगा, कि आपके लिए धन अधिक महत्वपूर्ण है या अपने और परिवार का स्वास्थ्य?

Organic food items थोड़े महंगे अवश्य होते हैं, लेकिन अब भारत की paying capacity और saving इतनी अवश्य बढ़ी हुई है कि हम अपने और अपने परिवार के स्वस्थ को priority प्रदान करें।

हर कोई अधिक लाभ की कामना करता है, अगर हम अधिक खर्च करने को तैयार होंगे, तो किसान भी अधिक खर्च और मेहनत करने को तत्पर होगा। 

हम संकल्प लें कि केवल organic products ही लेंगे, और उसकी बिक्री को बढ़ावा दें। तो वो दिन दूर नहीं, जब organic revolution आ जाए और सभी किसान केवल organic farming करें। 

इससे पर्यावरण के साथ-साथ स्वास्थ्य नवाब भी होगा…

Thursday, 8 October 2026

Article : Nana Patekar- The Great

(I) The “Kalakar” :

Bollywood cinema जगत के दिग्गज कलाकार Nana Patekar आज सुबह 5:20 (A.M.) पर इस नश्वर संसार से विदा हो गए। 

यहाँ उनके लिए अभिनेता नहीं कलाकार शब्द का उपयोग किया है, क्योंकि अभिनेता के अभिनय करने का मुख्य उद्देश्य धनार्जन करना होता है, जबकि एक कलाकार अभिनय करता है कला की सेवा के लिए, समाज के कल्याण के लिए, समाज में क्रांति के लिए।

और नाना पाटेकर की बहुत-सी movies, उनका फिल्मों में role और सादगी से भरा जीवन, उनके कलाकार होने की पुष्टि करता है।

दिग्गज कलाकार नाना पाटेकर भारतीय cinema में अपनी बेबाक शख्सियत, acting की गहराई और सादगी के कारण सबसे अलग माने जाते हैं।

आइए जानते हैं ऐसे कौन से कारण हैं, जो उन्हें सबसे अलग और “great” बनाते हैं…

Nana Patekar- The Great


(II) Why The “Great” :

  • His Deep Acting- उनकी आँखें और आवाज बिना ज्यादा कहे भी बहुत कुछ बयां कर देती थीं। उनके चंद संवाद और ठहरी हुई आवाज़, film में मौजूद अन्य सभी actors और actresses की acting पर भारी पड़ते थे। उन्होंने ‘Parinda’, ‘Krantiveer’, ‘Prahaar’, ‘Khamoshi’, ‘Agni Sakshi’, ‘Yugpurush Yashvant’ और ‘Natsamraat’ जैसी अनेक films में ऐसे किरदार निभाए जो audience के दिलों पर गहरी छाप छोड़ गए।
  • उनका संवाद " एक साला मच्छर आदमी को हिजडा़ बना देता है" बड़े से बच्चों तक सबको याद होगा और सिर्फ यह ही नहीं, अनगिनत ऐसे संवाद हैं, जो उनको हमेशा जीवित रखेंगे।
  • Looks Don't Matter- उन्होंने अपनी acting से एक और बात सिद्ध की कि looks नहीं, बल्कि talent सफलता तक पहुंचाती है। सबसे glamourous समझे जाने वाली जगह में उन्होंने सिद्ध किया कि एक साधारण से नैन-नक्श वाला व्यक्ति भी cinema जगत में आकर अपना वर्चस्व स्थापित कर सकता है।
  • The Comic Seriousness- नाना पाटेकर की image मुख्यतः एक गंभीर और गुस्सेल किरदार निभाने वाले कलाकार की थी।‌ लेकिन ‘Welcome’ जैसी फिल्म में 'Udai Shetty' का किरदार निभाकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि वे comedy में भी बेजोड़ हैं।
  • His Simplicity- उन्होंने कभी flimy चकाचौंध या stardom की परवाह नहीं की। वे खुद एक बेहद सादा जीवन जीते थे। Pune के Singhgadh Fort के पास उनकी लगभग 10 acre जमीन थी, जहाँ वे खुद खेती करते थे और किसानों जैसा जीवन पसंद करते थे।

उनकी यह बात उन्हें कला का उपासक सिद्ध करती हैं। यह तो हुई उनके कला से जुड़े होने की बातें।


(III) The Social Servant :

पर क्या सिर्फ वो एक कलाकार थे? नहीं, बल्कि वो सच्चे देशभक्त भी थे। हम यह क्यों कह रहे हैं?

आइए, इस पहलू को भी देख लेते हैं।

  • Social Contribution- वे केवल पर्दे पर ही actor नहीं थे, बल्कि असल जिंदगी में भी society से जुड़े हीरो ही रहे। बात 2015 की है, जब वे ₹1.5 crore की car खरीदने वाले थे। तब किसानों की su!cide की news सुनकर उन्होंने वह विचार छोड़ दिया और ‘NAAM Foundation’ के जरिए drought-affected किसानों की मदद की।
  • Widow's Pain- पूरी घटना इस प्रकार है। वर्ष 2015 में Maharashtra के Beed district की उनकी एक trip ने उनका perspective बदल दिया। वहाँ उन्होंने debt से परेशान होकर su!cide करने वाले किसानों की कम उम्र की widows और उनके बच्चों की दयनीय स्थिति को अपनी आँखों से देखा, जिसके बाद उन्होंने उनके लिए काम करने का फैसला किया।
  • NAAM Foundation- September 2015 में उन्होंने Marathi actor Makarand Anaspure के साथ मिलकर इस foundation की शुरुआत की। इसके माध्यम से वे Maharashtra के drought-affected क्षेत्रों (Vidarbha, Latur, Usmanabad etc.) के किसानों की economic मदद करते थे।
  • Direct Conversation- वे farmers को su!cide न करने के लिए लगातार encourage करते थे और कहते थे कि किसी भी मुश्किल में वे सीधे उनसे बात कर सकते हैं।
  • Water Conssrvation- उन्होंने सिर्फ economic सहायता ही नहीं दी, बल्कि villages में पानी की कमी दूर करने के लिए check dam, तालाब और water sources को पुनर्जीवित करने का बड़ा काम किया।


(IV) The Patriot :

उनकी जिंदगी से जुड़ा एक और बहुत famous incident है।

  • Army Connection- Acting के अलावा वे Indian Army से भी जुड़े रहे। उन्होंने 1999 के Kargil W@r के दौरान सेवा दी और उन्हें Territorial Army में lieutenant colonel के मानद पद से सम्मानित किया गया था। 
  • Army Training- अपनी film ‘Prahaar’ की shooting और तैयारी के लिए उन्होंने Maratha Light Infantry के साथ करीब 3 साल तक army और commando training ली थी। वे एक अच्छे national level के shooter भी थे।
  • Defence Minister's Consent- W@r शुरू होने पर उन्होंने acting से कुछ समय के लिए break लिया और then Defence Minister George Fernandes से सीधे संपर्क कर युद्ध क्षेत्र में जाने की विशेष consent मांगी।
  • Quick Reaction Team- Consent मिलने के बाद वे Kargil पहुंचे और वहाँ ‘Quick Reaction Team’ (QRT) का हिस्सा बनकर soldiers के साथ करीब 60 दिन तक मैदान में रहे।


इन जैसी और बहुत-सी बातें थीं, जो उन्हें दिग्गज कलाकार और महान personality प्रदान करती हैं।

ईश्वर उनकी पुण्य आत्मा को शांति प्रदान करें और अपने में विलीन करें!

Monday, 5 October 2026

Article : Asian Games 2026

2026 Asian Games का आयोजन Japan के Aichi और Nagoya में 19 September से 4 October 2026 तक किया गया, जो कि कल बहुत-सी जीत-हार के साथ सम्पन्न हो गये।

गर्व की बात यह है कि भारत ने कुल 85 medals जीतकर medal rally में अपना चौथा स्थान बरकरार रखा। 2018 और उससे पहले तक भारत medal ranking में 8, 7, 6, 9वें स्थान पर आता था।

पर‌ 2023 से भारत चौथे स्थान पर आसीन रहने लगा है। 2023 में भारत ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 72 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था, जब भारत ने medals का आंकड़ा 100 के पार किया है…

Asian Games 2026


इसमें 28 gold, 38 silver, और 41 bronze के साथ भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 107 medals देश के नाम किए हैं।

इससे पहले 2018 में भारत ने सबसे अधिक 70 medals जीते थे।

Asian Games 2026 में top ten countries इस प्रकार हैं।


हमारे कुछ बेहतरीन खिलाड़ी, कुछ कारणों से इस साल Asian Games में नहीं पहुंच सके, जिसके कारण 2023 की तरह भारत century नहीं पार कर पाया।

For example, एक promising player, Neeraj Chopra, अपने ligament tear के चलते इस बार Asian Games में participate नहीं कर पाए।

इसके बावजूद Asian Games 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार खेल दिखाते हुए कुल 85 medals अपने नाम किए।

  • Gold Medals- 21
  • Silver Medals- 27
  • Bronze Medals- 37
  • Total Medals- 85

2023 की ही भांति, Asian Games 2026 (Aichi-Nagoya) में भारत के लिए कई खिलाड़ियों ने एक से अधिक पदक जीते, जिनमें से प्रमुख खिलाड़ियों की सूची इस प्रकार है।

  • Neetu Dhanda (Shooting)- 3 medals (2 gold, 1 silver)
  • Kumkum Mohod (Archery)- 3 medals (2 gold, 1 silver)
  • Ganesh Mani Ratnam Thirumuru (Archery)- 3 medals (2 gold, 1 bronze)
  • Gulveer Singh (Athletics)- 3 medals (2 silver, 1 bronze)
  • Vithya Ramraj (Athletics)- 3 medals (1 gold, 1 silver, 1 bronze)
  • Prathika Pradeep (Archery)- 2 medals (2 gold)
  • Sahil Jadhav (Archery)- 2 medals (2 gold)
  • Jyoti Surekha Vennam (Archery)- 2 medals (2 gold)

हम आशा करते हैं कि हमारे खिलाड़ियों का प्रदर्शन दिन-दूनी रात-चौगुनी गति से बेहतर होता जाएगा और फिर वो दिन दूर नहीं, जब भारत, तीसरे, दूसरे और प्रथम स्थान पर आसीन होगा।

हमें गर्व है अपने सभी खिलाड़ियों पर, उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें अनेकानेक बधाइयाँ, साथ ही जो खिलाड़ी किसी भी कारण से अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए ईश्वर अगले Asian Games में उनके प्रदर्शन को और अधिक सार्थक करें, जिससे वे भी विजय हों और हमारा देश भारत पदक तालिका में शीर्ष पर आ जाए।

जय हिन्द, जय भारत!

Sunday, 4 October 2026

Article : श्राद्ध पक्ष- दुःख या त्यौहार

श्राद्ध पक्ष चल रहे हैं और हम इन दिनों में अपने से जुड़े हुए परिवार के सदस्यों की उनकी तिथि के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं।

इसमें हम उनकी पसंद के भोजन व मिष्ठान का भोग लगाते हैं, उनके नाम से कुछ रुपए निकालते हैं, जिसे अनाथ-आश्रम और पूजनीय-आश्रम में दान कर देते हैं।
  • किसी ने पूछा कि आप एक-एक की तिथि जान कर, हर साल पूजा-अर्चना क्यों करती हैं?
  • केवल मातृ नवमी और सर्वपितृ अमावस्या में ही क्यों नहीं कर देती हैं?
  • आपको क्या यह त्यौहार लगता है?
  • इस तिथि में गए हुए सदस्य के जाने का दुःख नहीं लगता है?
श्राद्ध पक्ष- दुःख या त्यौहार


हाँ, सबसे पहली बात श्राद्ध पक्ष के यह 16 दिन एक त्यौहार ही हैं, इसलिए इसे उसी तरह से मनाया जाना चाहिए।

यह त्यौहार इसलिए भी हैं, क्योंकि हमारे सनातन धर्म में इन 16 दिनों में हमारे पितरों को ईश्वर के तुल्य स्थान दिया गया है।

जो दिन, पितरों को ईश्वर के तुल्य बना दें, वो दुःख के दिन कैसे हो सकते हैं?
 
कहा जाता है कि इन दिनों अपने पितरों की पूजा-अर्चना, दान-पुण्य करने से हमें सर्वाधिक पुण्य की प्राप्ति होती है, साथ ही साथ हमारे पितरों को तृप्ति की प्राप्ति होती है।

जहाँ तक रही दुःख की बात, तो बिल्कुल होता है, अपने परिवार के सदस्यों के लिए।

पर आपको बता दें कि दुःख मनाया जाने वाला दिन वो है, जिस महीने व जिस दिन वो गए थे, यह नहीं।

यह नहीं, क्यों?

क्योंकि इस दिन में पूजा-अर्चना इसलिए की जाती है, क्योंकि अपनी तिथि-विशेष में वह सदस्य आपसे मिलने, आपको आशीर्वाद देने के लिए आता है। 

तो उस दिवस को कैसे दुःख का दिन मान लें, जब वह पुनः हमसे जुडने के लिए, हम पर कृपा बरसाने के लिए आ रहे हैं?

दूसरा, प्रत्येक व्यक्ति का आगमन अपने तिथि-विशेष में होता है, तो उस दिन को विशेषता न देकर अपनी सुविधानुसार पूजा-अर्चना और दान-पुण्य करने का क्या औचित्य?

बस यही वजह है, कि हम प्रत्येक सदस्य की तिथि को जानकर उस दिन उन्हीं के पसंद के अनुरूप भोग-प्रसाद व मिष्ठान आदि बनाते हैं, दान-पुण्य करते हैं।

आइए, श्राद्ध पक्ष के इन 16 दिनों को मिलन दिवस या त्यौहार के रूप में मनाएँ।

ईश्वर में लीन सदस्य को याद करते हुए, पूजा-अर्चना करते हुए, उनके मनपसंद भोग-प्रसाद व मिष्ठान आदि को उन्हें अर्पित करें, दान-पुण्य करें।

उनसे प्रार्थना करें कि वो सदैव हमसे जुड़कर हमारा मार्गदर्शन करें, हमें सफलता के पथ पर अग्रसर करें, हमारे सभी दुःख-कष्टों को दूर कर हमें सुख प्रदान करें, व हमें वो सामर्थ्य प्रदान करें कि हम सदैव ऐसा कर्म करें जो हमारे कुल, हमारे गौत्र का नाम रोशन करने में सहायक हो।

अपने सभी पूर्वजों व बुजुर्गों को शत-शत प्रणाम, आप सब की कृपादृष्टि सदैव हम पर बनी रहे और आपसे हमारा संपर्क सदैव बना रहे।

जय सभी पितरों की!

Saturday, 3 October 2026

Article : Indian Courage

(I) The Nation's Bravery :

एक बार फिर पूरे विश्व में भारतीय वीरता, अदम्य साहस, और अपने कर्म के प्रति समर्पण की नई मिसाल उभर कर सामने आई है।

इसकी पूरे विश्व में चर्चा की जा रही है। और हो भी क्यों न? काम ही सराहनीय हुआ है।

हम बात कर रहे हैं, भारतीय वीर captain Smit Machchhar की।

जैसा कि आप सब को विदित ही होगा, Flydubai की उड़ान FZ1073 के विषय में।

आइए, उस पूरी घटना को विस्तार से समझते हैं, कि आखिर क्यों इतनी तारीफ़ हो रही है Smit Machchhar की…

Indian Courage


(II) The Conspiracy :

30 September (2026) की बात है। एक flight Dubai से आरंभ होकर Israel में पहुंचनी थी। पर क्या पहुंचनी थी? 

या उस flight के आरंभ होने के साथ ही शुरू हो गया था षड्यंत्र। एक बहुत दर्दनाक षड्यंत्र! 9/11 के जैसा ही कुछ।

इस flight को hijack करके crash कराने का plan था, जिसको अंजाम देना था एक terr0r!st को, जो कि flight में Co-pilot के रूप में मौजूद था।

क्या वो अपने कुकृत्य को अंज़ाम दे पाया?

शायद दे ही लेता, अगर भारतीय Captain Smit Machchhar वहाँ main pilot के रूप में मौजूद न होते तो।


(III) The Incident :

आइए, घटनाक्रम को सिलसिलेवार ढंग से देखते हैं।

Flydubai की उड़ान FZ1073 के भारतीय Captain Smit Machchhar ने हवा में cockpit के भीतर Omani co-pilot द्वारा किए गए घातक हमले और विमान को crash करने की साजिश को नाकाम कर गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद 174 यात्रियों की जान बचाई।

• Date- 30 September 2026

• Flight- Flydubai Flight FZ1073 (Dubai to Tel Aviv, Israel)

• Situation- जब flight 34000 feet की ऊंचाई पर था, तब Omani co-pilot ने मुख्य pilot Smit Machchhar पर ताबड़तोड़ हमला करना शुरू कर दिया और विमान को नीचे की तरफ मोड़ दिया, जिससे विमान अचानक 33000 feet से गिरकर 17000 feet पर आ गया।

• Rescue- गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद Captain Smit ने हमलावर का मुकाबला किया, cockpit का दरवाजा खोला और passengers व अन्य crew members को अंदर आकर हमलावर पर काबू पाने का मौका दिया।

• Emergency Landing- Flight में सवार अन्य Flydubai के pilots ने नियंत्रण संभाला और Saudi Arabia के Tabuk शहर में विमान की सुरक्षित emergency landing कराई।


(IV) Responses and Respect :

• Israel's PM- Benjamin Netanyahu ने Captain Smit Machchhar को ‘सच्चा hero’ करार दिया और कहा कि उनकी सूझबूझ से एक बड़ा 9/11 जैसा हादसा टल गया।

• India's PM- Narendra Modi ने Captain Smit के अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की तथा उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। 

USA's President- Donald Trump ने Flydubai के भारतीय pilot captain Smit Machchhar को एक “hero” बताया है। Smit की बहादुरी की सराहना करते हुए कहा कि Captain Smit गंभीर रूप से घायल और बुरी हालत में होने के बावजूद लड़े और उन्होंने असाधारण हिम्मत दिखाई। साथ ही Trump ने कहा, इस सूझबूझ से विमान को जानबूझकर दुर्घटनाग्रस्त करने या 9/11 जैसे किसी बड़े हमले की कथित कोशिश को नाकाम करने में मदद मिली।

• Security Operation- Saudi officers ने landing के बाद हमलावर co-pilot को arrest कर लिया है। Captain Smit का hospital में इलाज चल रहा है और उनकी स्थिति स्थिर है।


(V) Salute to the Hero :

हमें गर्व है Captain Smit पर है, जिन्होंने एक बार फिर पूरे विश्व में भारतीय वीरता और अदम्य साहस का परिचय कराया। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के साथ ही हम सब भारतीय भी आपकी वीरता को नमन करते हैं।

इस घटना ने सिद्ध कर दिया है कि जहाँ भारत का लाल होगा, वहाँ कमाल होगा।

जय हिन्द, जय भारत!

Wednesday, 30 September 2026

Article : दुखों की दुनिया

आजकल मन अशांत-सा रहता है, ऐसा प्रतीत होता है मानो दुनिया में सबसे अधिक दुःख हमें ही है।

न किसी से मिलने की इच्छा, न कहीं जाने की। मानो दुनिया रुकी-सी, थमी-सी हो गई हो। आपको भी कभी ऐसा लगता होगा? 

पर एक बात कहें, मानो तो आप ही सबसे ज़्यादा दुःखी, और अगर चारों ओर नजर घुमाएंगे तो एहसास होगा कि पूरी दुनिया ही दुखों की है। A true sense of melancholy!

दुखों की दुनिया


कहीं कोई सुखी है ही नहीं। किसी को किसी बात की परेशानी, तो किसी को किसी और बात का ग़म।

सच में इधर कुछ ऐसे लोगों से मुलाकात हुई कि एहसास हुआ कि अभी भी हम ही भाग्यशाली हैं कि अभी भी हम बहुत सुखी हैं।

दरअसल हम मनुष्यों की एक विशेष आदत होती है, कि हम दूसरे के दुःख को कम और अपना बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं।

जबकि दुख तो दुःख होता है, कम या ज़्यादा कहाँ होता है। वैसे ही जैसे दर्द तो दर्द होता है, किस जगह हो‌ रहा है, उससे उसकी intensity में कोई फर्क नहीं पड़ता है। 

तो दूसरों की तकलीफ़, कष्ट, परेशानी की समझने का प्रयास कीजिए, उसे खत्म करने की कोशिश कीजिए। इससे देखिएगा, आपके कष्ट अपने आप कम लगने लगेंगे।

और शायद सचमुच दूसरों के दुःख कम करते-करते आपके दुःख कम हो जाएँ या फिर शायद खत्म ही हो जाएँ।


कबीरदास जी का यह दोहा शायद आपने सुना होगा-

“बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।

जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।।”


आज उसी दोहे की तर्ज़ पर-

“दुःखी जो देखन मैं चला, दुःखी मिलिया सब कोय।

जो दिल खोजा आपना, मेरा दुःख ही कम होय।।”


हे ईश्वर, आपसे कामना है कि इस दुखों की दुनिया में से सबके दुखों को खत्म कर दें और सभी को सुखी करें।

सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे भवन्तु निरामया...

Tuesday, 29 September 2026

Article : हमारे अपनों के दिन

इस वर्ष पितृपक्ष या कनागत की शुरुआत 26 September (शनिवार) को पूर्णिमा श्राद्ध के साथ हो चुकी है, और इसका समापन 10 October (शनिवार) को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा।

इन विशेष दिनों को हमारे अपनों के दिन भी कहा जा सकता है, क्योंकि इन दिनों में हम किसी देवी-देवता की पूजा-अर्चना नहीं करते हैं, बल्कि अपने पूर्वजों की पूजा-अर्चना करते हैं।

अपने पूर्वजों के विशेष दिन में पंडित जी को बुलाकर उनके नाम से दान-पुण्य, पूजा-हवन इत्यादि करते हैं‌।

पर यह विशेष दिन हमारे लिए और अधिक महत्वपूर्ण इसलिए हो जाते हैं, क्योंकि इन दिनों में हम ईश्वर से अधिक नज़दीक हो जाते हैं…

हमारे अपनों के दिन


हमारे द्वारा की गई पूजा-अर्चना ईश्वर जल्दी स्वीकार कर लेते हैं, क्योंकि इस समय में की गई पूजा-अर्चना दान-पुण्य इत्यादि हमारे पूर्वजों से होते हुए ईश्वर तक पहुंचते हैं।

हमारे पूर्वज, ईश्वर के प्रिय होते हैं और हम अपने पूर्वजों के। तो हो गई न ईश्वर से नज़दीकी!

पर क्या इसमें उन्हीं पूर्वजों की पूजा-अर्चना करनी चाहिए, जो स्वर्गवासी या ब्रह्मलीन हो गए हैं?

नहीं, ऐसा नहीं है कि केवल उन्हीं की पूजा-अर्चना से पुण्य अर्जित किया जा सकता है। 

बल्कि उनकी पूजा-अर्चना के साथ-साथ ही अगर आप अपने जीवित दादा-दादी, नाना-नानी, माता-पिता या सास-ससुर की सेवा करेंगे, उनकी इच्छाओं की पूर्ति करेंगे, उनके साथ समय व्यतीत करते हैं, तब भी आप को वही पुण्य मिलेगा।

यह विशेष दिन हमारे अपनों के हैं, उनकी सेवा और पूजा-अर्चना के दिन है।

भारतीय संस्कृति में यह 16 दिन इसलिए ही निर्धारित किए गए हैं, कि हर साल हम atleast 16 दिन अपने पूर्वजों से जुड़ें, उन्हें धन्यवाद दें, उनके नाम से दान-पुण्य पूजा-अर्चना करें।

पर जो चले गए, उनके लिए विधिवत कर्मकाण्ड संस्कार करना, और हमारे जो बुजुर्ग जीवित हैं उन्हें neglect करने से कुछ पुण्य अर्जित नहीं होगा।

अगर पूरी प्रक्रिया विधिवत करनी है, तो जो ब्रह्मलीन पूर्वजों के लिए पूजा-अर्चना दान-पुण्य करें और जो बुजुर्ग जीवित हैं उनकी सेवा-सुश्रुषा करें, उन्हें मान-सम्मान दें, उनके साथ समय व्यतीत करें।

तब आपकी पूजा अर्चना विधिवत पूर्ण होगी। और उनके आशीर्वाद से होंगे आपके सभी कार्य सम्पन्न व पूर्ण होगी सभी मनोकामनाएं, जिससे आप सुखी, स्वस्थ और समृद्ध रहेंगे।

एक और सबसे बड़ी बात होगी, हमारे अपनों के दिन में अपने पूर्वजों और बुजुर्गों की सेवा से, कि आपके बच्चों में संस्कार आएंगे, वो भी सबसे जुड़ेंगे और सबसे बढ़कर वो सीखेंगे। अपनों से जुड़ना, उनकी सेवा करने, उन्हें मान-सम्मान देना।

और एक दिन पलट कर यह आपको भी सुख प्रदान करेगा, क्योंकि ध्यान रखिएगा कि एक दिन बुजुर्ग सबको होना है और ब्रह्मलीन भी।

तो जाने से पहले सबकी सेवा कर लीजिए, क्योंकि ईश्वर भी उन्हीं से प्रसन्न होते हैं, जिनके पूर्वज और बुजुर्ग उनसे प्रसन्न हैं।

हमारे सभी पितर तृप्त रहें, हम से प्रसन्न रहें और उनकी कृपा दृष्टि सदैव बनी रहे।

हमारे सभी पूर्वजों व बुजुर्गों को शत-शत प्रणाम!

Monday, 21 September 2026

Article : Taxpayers - The Unsung Heroes

Tax एक ऐसी चीज़ है, जिसका नाम सुनते ही लोगों के पसीने छूटने लगते हैं, हर कोई यह सोचने लगता है कि कैसे क्या किया जाए कि tax से छूटकारा मिल जाए…

पहले समझ लेते हैं कि tax होता क्या है और यह क्यों ज़रूरी होता है।


Tax मतलब “कर”, यह एक compulsory amount या financial charge है जो किसी भी सरकार द्वारा किसी व्यक्ति या organisation पर लगाया जाता है…


अब जान लेते हैं कि क्यों है tax collection इतना ज्यादा ज़रूरी क्यों है?

दरसअल tax collection के पैसों से ही सर्वोत्तम सुविधाएँ और बुनियादी ढाँचा प्रदान करने वाले सार्वजनिक कार्यों को किया जाता है।

मतलब, better infrastructure; जैसे सड़क, पुल, इत्यादि।

हालांकि हमारे देश में महज 6% taxpayers हैं, जिनमें से भी 5.5% पर तो zero tax है (Salary≤₹12 LPA).

2020-21 में आखिरी बार सार्वजनिक हुए आंकड़ों के मुताबिक, देश की कुल 132 करोड़ की population में 8.22 करोड़ taxpayers थे।

इनमें 7.5 करोड़ zero tax के दायरे में थे। वहीं, एक बड़ी आबादी मोटी कमाई करने के बावजूद कोई tax नहीं चुका रही। न सिर्फ सरकार बल्कि कई economist भी इस पर चिंता जता चुके हैं।

ऐसे में लगभग 1.5 करोड़ taxpayers के दम पर ही केंद्र सरकार को income tax collection करना पड़ रहा है।

USA (United States of America) में 60% population income tax भरती है, इसलिए ही उनके पास देश की सुरक्षा और सुदृढ़ता के लिए अधिक पैसा है।

देश के income tax collection में 48% हिस्सेदारी UP-बिहार और MP समेत 5 राज्यों की है। 

केंद्र द्वारा total tax collection में राज्यों के हिस्से 10.21 लाख करोड़ रुपये आते हैं। 

इसमें UP 1.8 लाख करोड़ रुपए यानी 18% की हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर आता है।

बिहार की 10%, मध्यप्रदेश की 8% और महाराष्ट्र-राजस्थान की 6-6% है। जबकि हर साल 11% की रफ्तार से बढ़ रहे हैं करोड़पति।

Report के मुताबिक देश में एक साल के अंदर 7 करोड़ से ज्यादा संपत्ति वाले 11% बढ़कर 4.58 लाख हो गए।

Finance minister द्वारा राज्यसभा में दिए विवरण के मुताबिक साल 2021-22 में 10 लाख से एक करोड़ रुपये कुल income वाले लोग 77 लाख हो गए।

जब लोगों की paying capacity बढ़ रही है, तो उतनी तेज़ी से सरकार के पास पैसे एकत्रित क्यों नहीं हो रहे हैं?

पता है, क्यों? क्योंकि अमेरिका जैसी सुरक्षा, सुदृढ़ता और सुविधाएं तो सबको चाहिए, पर tax कोई नहीं देना चाहता है।

वहीं देश के कुछ नागरिक हैं, जो नियम से और समय से tax pay कर रहे हैं। जानना चाहते हैं, वो कौन लोग हैं?

Government employees. जी हाँ, आपने एकदम सही सुना। इन्हें अगर unsung heroes कहा जाए, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

ऐसा इसलिए क्योंकि यही हैं, जिनके दिए हुए tax से ही देश का निर्माण; जैसे पुल, सड़क, रेलवे station आदि बनते हैं। 

इनके लिए हुए tax से ही गरीबों को subsidy दी जाती है, उन्हें दुनिया-भर के सामान जैसे मुफ्त ration, hospital facilities और घर मिलते हैं।

पर यह कहाँ का न्याय है कि ख़र्चा एक व्यक्ति उठाए और सुविधा सबको एक-सी दी जाए? कुछ तो विशेष सुविधाओं पर केवल taxpayer का अधिकार होना चाहिए।

सुविधाएँ तो छोड़ दीजिए, taxpayer को इसके लिए न‌ कोई विशेष सम्मा दिया जाता है और न उनकी बढ़ाई की जाती है, कि “यही वो देश के नागरिक हैं जिनके कारण देश सुरक्षित और सुदृढ़ है।”

पर सरकार से यह निवेदन है कि taxpayers को विशेष सम्मान दिया जाए, उनके बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए विशेष schemes लाई जाएँ। कुछ सुविधाएं केवल taxpayers को प्रदान की जाएं। 

जब सरकार इस बात को अपने cognizance में लेगी, तब न केवल tax चोरी होना बंद होगा, बल्कि लोग आगे आएंगे tax pay करने।

और यह तो बताने की आवश्यकता नहीं है, जितना अधिक tax सरकार के पास होगा, उतना ही अधिक पैसा देश‌ की सुरक्षा और सुदृढ़ता के लिए होगा।

तब तक Taxpayers- The Unsung Heroes के लिए हमारा salute, “आप ही हैं देश की असली ताकत, आप हैं इसलिए ही देश सुरक्षित है, सुदृढ़ है।”

Wednesday, 16 September 2026

Article : Human Reservation

Article- AI Boon or Bane को बहुत पसंद किया गया है, अगर आप ने नहीं पढ़ा है तो click करके पढ़ सकते हैं- https://shadesoflife18.blogspot.com/2026/09/article-ai-boon-or-bane.html?m=1

आज उसके आगे की बात करेंगे हम, कि अगर हमने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो क्या-क्या हो सकता है।

आपको title पढ़कर लगा होगा कि इसका क्या मतलब है, जातियों को लेकर वैसे ही काफी reservations हैं, फिर आखिर यह क्या बला है?

पर आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह कोई बला नहीं है, बल्कि लापरवाही रखी गई तो शीघ्र ही व अवश्य ही यह हम सबका भविष्य होगा…

Human Reservation


जिस तरह से AI tools, chatbots, और Generative AI का use किया जा रहा है, तो वो दिन दूर नहीं जब लोगों का न तो दिमाग काम करेगा, न मेहनत करने की इच्छा होगी, न उनमें creativity की क्षमता होगी, न काम में novelty, न originality।

फिर क्या लगता है आपको, ऐसे लोगों को jobs मिलेंगी? बिल्कुल नहीं मिलेंगी, कौन रखेगा नकारा और नाकाम लोगों को? यूँ कोई अपनी कमाई व्यर्थ के लोगों पर जाया नहीं करेगा।

फिर आज AI chatbots को initiate करने के लिए हमारी requirements हैं, आगे वो भी नहीं होंगी। हम इन पर dependent होते जाएंगे और ये उतने ही independent.

तब jobs के लिए reservation जातिगत नहीं, बल्कि इंसानों के लिए मांगना होगा। तब reservations के लिए मांग ऐसी होगी कि “इतने % humans employees” होने ही चाहिए।

अगर आप अपने बच्चों के लिए ऐसा भविष्य नहीं चाहते हैं, तो उन्हें encourage कीजिए कि वो AI help लें, guidance लें पर नकल न करें, उन पर dependent न हों। अपने काम को वो अपनी skill और अपनी creativity से complete करें। 

उनको अपना assistant बनाएँ, उनके slaves न बन जाएँ। इतिहास गवाह रहा है, जब-जब slaves को overpower किया गया, system corrupt अवश्य हुआ है।

फिर AI तो इतने अधिक powerful होते हैं, कि अगर यह overpower हो गये, तो विनाश को कोई नहीं रोक सकता है।

अपनी creativity, novelty, originality को मरने मत दीजिए, क्योंकि इंसान ईश्वर की बनाई कृति है, और इंसान जब तक अपनी शक्ति को जागृत रखेगा, उसका मुकाबला संसार में कोई नहीं कर सकता है। 

और एक बात ध्यान रखिएगा, कि आपको जो यह AI super intelligent, skillful, prompt, creative और perfect लग रहें हैं, उसके पीछे भी एक इंसान की ही intelligence, creativity, skills, knowledge और experience ही है। 

मतलब AI के ऊपर इंसान था और रहना भी चाहिए। अगर यह सोच रखेंगे तो इंसान हमेशा सफल रहेगा और वैसे भी reservations जिसको मिलता है, वो खोखला और कमजोर होता जाता है।

इसलिए विकास के लिए reservations हर ओर से ख़त्म हो जाना चाहिए, न humans के लिए और न अलग-अलग जातियों के लिए।

देश का विकास, समाज का विकास, जाति का विकास, व्यक्ति का विकास, तभी हो संभव, जब सफलता की राह उसे अपनी मेहनत और क्षमता से मिले न कि किसी reservations के कारण।

जय हिन्द, जय भारत!

Tuesday, 15 September 2026

Article : AI - Boon or Bane

हर दौर में अपनी एक आधुनिकता आती है, जो सबके सिर चढ़कर बोलने लगती है। आजकल का दौर चल रहा है AI का- मतलब ChatGPT, Google Gemini, Meta AI, Grok AI, Perplexity AI, Copilot AI, Claude इत्यादि।

छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्गों तक, सब इन्हें use कर रहे हैं। Offices, schools, colleges, competitions, या partues, हर जगह AI का बहुत अधिक use देखा जा सकता है।

सच में इसके use से आपकी problem कुछ पलों में सुलझ जाती है। ऐसा लगता है, मानो कोई जादू की छड़ी हाथ लग गई हो…

AI - Boon or Bane


Office work हो, जैसे calculations, excel sheet पर काम, ढेरों files में tally करना, कोई presentation prepare करनी हो etc., सब चुटकियों में।

School में बच्चों को नई information देनी हो, उन्हें project ready करना हो, competitions के लिए GD (group discussion) ready करना हो, speech देनी हो, debate करनी हो, etc. सब झटपट ready, वो भी बिना किसी के guidance के।

और parties में चार चांद लगाना, अब न मुश्किल है, न महंगा। बस एक prompt डालिए और ढेरों एक से बढ़कर एक ideas, और खुद न कर पाओ तो कौन कर सकता है उसके ढेरों options भी।

सच में जिंदगी आसान हो गई है AI chatbots के आने से। पर क्या सच में AI boon ही है, या इनके आने से कुछ ऐसा भी हो रहा है, जो अभी दिखाई नहीं दे रहा है। पर कहीं न कहीं बहुत तेजी से खत्म होती जा रही है।

जी हाँ, यह जितना ज़्यादा boon है, उससे कहीं ज़्यादा bane भी है। आप गौर कीजिए कि इसके आने से creativity बहुत तेजी से खत्म हो रही है।

इसका ताज़ा उदाहरण बताते हैं आपको, हमारे बेटे के school में Inter-School Debate Competition था। उसने तो अपनी speach ready की थी।

पर जब debate for and against में start हुई, तो पता चला कि आधे से अधिक schools के बच्चों ने अपनी speech AI से prepare की थी। नतीजा, सारे बच्चे एक सा रटा-रटाया content सुना रहे थे। यहां तक कि examples भी change नहीं किए गए थे। उस debate का result बताने की जरूरत है?

हमारे बेटे की speech top पर थी, हर कोई उसकी तारीफ करते नहीं थक रहा था, उन schools के teachers भी तारीफ कर रहे थे जिन schools के बच्चे AI से speech ready कर के लाए थे।

अब दोष किसको दें- उन बच्चों को, उनके parents को, उनके teachers को, या इस AI को?

यही हाल offices में  है, जहाँ पहले घंटों की मेहनत से presentation prepare की जाती थी, वहीं आज मिनटों में काम निपटा दिया जाता है। पर नतीजा, सबकी presentation एक सी, अब ऐसी presentation को marvellous कहा जाए या कामचोरी से नवाजा जाए?

Parties में भी पहले-सी novelty नहीं दिख रही है, सब होड़ में लगे हैं, घंटों का काम मिनटों में करने में। इससे ऐसा लगता है, मानों खूबसूरत पल भी किसी तरह काम-निपटें में तब्दील हो गया है।

हम ऐसा नहीं कह रहे हैं कि AI न करें, पर इस तरह से कीजिए कि वो boon रहे और bane न बने। आप उससे ideas लीजिए, guidance लीजिए, पर उससे नकल मत कीजिए। 

क्योंकि जब आप मेहनत करेंगे, अपनी creativity डालेंगे, तभी novelty आएगी।‌ और यही है, जिससे आपके काम की value होगी, वरना क्या होगा, यह आपको अगले article में share करेंगे।

Stay tuned…

Monday, 31 August 2026

Article : Ageing - A Process

I. Introduction :

उम्र बढ़ने का कोई एक “दिन” नहीं होता, बल्कि यह एक continuous process है जो विभिन्न physical, mental और social परिवर्तनों का एक combination है।

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि 45 से 55 years की आयु के बीच उम्र बढ़ने की process तेज हो जाती है, खासकर blood vessels पर इसका असर सबसे ज्यादा होता है। 

हालांकि, स्वस्थ lifestyle, exercise, balanced diet और mental health का ध्यान रखकर आप उम्र बढ़ने की process को धीमा कर सकते हैं और जीवन की quality बनाए रख सकते हैं…

Ageing - A Process


II. Physical Symptoms :

  • Blood Vessels- 45 से 55 years की आयु के बीच blood vessels सख्त होने लगती हैं, जिससे शरीर के विभिन्न अंगों पर असर पड़ता है। 
  • Weakened Muscles-  उम्र बढ़ने के साथ muscles की ताकत स्वाभाविक रूप से कम होती है, लेकिन exercise से इसे रोका जा सकता है। 
  • Neural Reduction- Neurons में गिरावट आती है, जिससे नई जानकारी को process करने में अधिक समय लगता है। 
  • Hormonal Changes- महिलाओं में menopause (रजोनिवृत्ति) के दौरान hormonal बदलाव होते हैं जो उम्र बढ़ने से जुड़े होते हैं। 


III. Slowing Down Ageing :

  • Controlled Exercise- Physical fitness मस्तिष्क कोशिकाओं को संरक्षित करने और neurogenesis (नई कोशिकाओं का जन्म) को बढ़ावा देती है, जिससे उम्र बढ़ने की गति धीमी होती है। 
  • Balanced Diet- Antioxidants से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे जामुन, मछली और dark chocolate का सेवन त्वचा और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। 
  • Adequate Sleep- 7 से 9 घंटे की निर्बाध गहरी नींद mental health के लिए ज़रूरी है और समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखती है। 
  • Mental Care- Mental रूप से सक्रिय रहना और सकारात्मक दृष्टिकोण रखना स्वस्थ उम्र बढ़ने में मदद करता है। 


IV. Summary :

उम्र बढ़ना एक प्राकृतिक process है। इसे रोकने के बजाय, स्वस्थ आदतों को अपनाकर आप उम्र बढ़ने के साथ जीवन की quality में सुधार कर सकते हैं और सक्रिय रह सकते हैं। 

Saturday, 29 August 2026

Article : यादों का झरोखा

कभी-कभी लगता है कि पुराने दिन कितने अच्छे थे, हम सब मिलकर कितना आनंद करते थे।

काश कोई ऐसा दरवाजा होता है, जिससे हम अपने पुराने दिनों में लौट जाते, और यादों की गलियों में घूम आते।

पर कोई दरवाजा नहीं होता है पुराने दिनों में जाने का। हाँ, लेकिन यादों का झरोखा अवश्य होता है…

यादों का झरोखा


इसको खोलकर आप उन पलों को चंद क्षणों में जी अवश्य लेते हैं। और वो हम सबके मन में मौजूद होता है, कभी समय निकाल कर खोल कर देखिए, याद आएगा।

कि दिन-रात भाईयों-बहनों के साथ मिलकर, कुछ भी काम करने का आनन्द ही कुछ और था। काम तो खूब करते थे, पर जिम्मेदारियां कुछ नहीं थी। 

सिर पर माता-पिता का हाथ था, जिसने यह कभी न खत्म होने वाली बेहद थकाने वाली जिम्मेदारियों का एहसास ही नहीं होने दिया।

अपनों का साथ, माँ-पापा का आशीर्वाद, इससे कभी जिंदगी बोझिल ही नहीं हुई। हमेशा आगे बढ़ते जाने और कुछ पाने का नाम ही लगा जिंदगी।

वो दादी-नानी की कहानियों का भंडार,

उनके अनुभवों का निचोड़ है संसार।

मामा-मामी और मौसी-मौसा का ढेर सारा प्यार।

चाचा-चाची के साथ मस्ती अपार,

और बुआ-फूफा के आने का इंतजार।

वो सहेलियों के संग घंटों की बातें,

किसी के घर आने पर स्वागत-सत्कार।

अपने तो छोड़ो, पराए लोगों से भी मिलता था प्यार।

न जाने हम कब इतने बड़े हो गए,

अपनों से ही दूर जाकर खड़े हो गए। 

वो पुराने दिन थे कितने अच्छे, 

ज़िंदगी में वही लगते थे सच्चे।

आने वाले और बीते हुए कल के लिए कितना अच्छा लिखा है, एक बार सोचिएगा ज़रूर‌-

वो कल जिसे हमने देखा नहीं,

उसके लिए जिंदगी, 

भागी-दौड़ी चली जाती है। 

और वो कल जो बीत चुका,

उसकी खूबसूरत यादें ही,

ज़िंदगी को जिंदगी बनाती हैं। 

15 दिन, महीना, 6 महीना, साल, दो साल में एक बार यादों का झरोखा अवश्य खोलना चाहिए। ऐसा करने से मन में तरावट और ताजगी आ जाएगी, फिर आपको जिंदगी बोझिल नहीं लगेगी।

Stay healthy, stay happy :)

Saturday, 22 August 2026

India's Heritage : पार्वती जी को भी भाए सावन

सावन का पावन माह चल रहा है, शिव जी को प्रसन्न करने वाला, उनकी भक्ति में लीन होने का।

पर क्या आपको पता है, न केवल शिव जी को, बल्कि शक्ति स्वरूपा पार्वती जी को भी सावन माह में पूजा-अर्चना करते हुए प्रसन्न किया जा सकता है?

पर जैसे सावन के सोमवार में पूजा-अर्चना करने से महादेव प्रसन्न होते हैं, वैसे ही पार्वती माता की सावन माह के मंगलवार को पूजा-अर्चना की जाती है, जिसे मंगलागौरी व्रत भी कहते हैं?

पार्वती जी को भी भाए सावन


सावन (श्रावण) मास के प्रत्येक मंगलवार को माता पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप की पूजा की जाती है और मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। यह व्रत सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए करती हैं।

  • व्रत का महत्व और नियमसमर्पण- यह दिन भगवान शिव की शक्ति और माता पार्वती को समर्पित होता है।
  • सौभाग्य प्राप्ति- विवाहित महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।
  • शीघ्र विवाह- अविवाहित युवतियां मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत रखती हैं।
  • सोलह की संख्या- पूजा में सभी सामग्री (जैसे दीपक, चूड़ियां और प्रसाद) सोलह (16) की मात्रा या संख्या में अर्पित की जाती है।

हर-हर महादेव, माता पार्वती की जय।

Monday, 17 August 2026

India's Heritage : नागपंचमी व सावन का सोमवार

हिन्दू धर्म में सभी को सर्वश्रेष्ठ और पूजनीय स्थान दिया गया है, फिर वो चाहे देवी-देवता, प्रकृति, सूर्य, चन्द्र, शनिदेव, आकाश, पृथ्वी, गाय, या नागदेवता हों, सबकी पूजा-अर्चना के दिन निर्धारित हैं। 

इन दिनों में से नागपंचमी नागदेवता के लिए निर्धारित किया गया है।

नाग पंचमी का पावन पर्व इस साल 17 अगस्त 2026 (सोमवार) को है। 

इस दिन सावन का तीसरा सोमवार होने के कारण एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है, क्योंकि भगवान शिव और नाग देवता की पूजा एक साथ की जाएगी।

महादेव को नाग अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए ही उन्होंने नाग को अपनी ग्रीवा में स्थान दिया हुआ है। 

महादेव की गर्दन में नाग इस तरह से लिपटे हुए रहता है, मानो वह उनके श्रृंगार का अभिन्न अंग हो, उनके गले का हार हो।

पर क्यों है ऐसा और क्यों मनाते हैं नागपंचमी? आज India's Heritage segment में यही देखेंगे…

नागपंचमी व सावन का सोमवार


महादेव के गले में नाग क्यों :

भगवान शिव के गले में जो सांप लिपटा रहता है, उसका नाम वासुकी नाग है, जो नागों के राजा हैं। 

शिव जी ने उन्हें समुद्र मंथन के दौरान उनकी सेवा, समर्पण और कष्ट सहन करने के भाव से प्रसन्न होकर अपने गले का आभूषण बनाया था।


पौराणिक व आध्यात्मिक कारण :

इसके पीछे कई पौराणिक और आध्यात्मिक कारण हैं।

  • समुद्र मंथन- समुद्र मंथन के समय वासुकी नाग ने मंदराचल पर्वत को मथने के लिए रस्सी की भूमिका निभाई थी। घर्षण से घायल होने और विष का प्रभाव सहने के उनके समर्पण को देखकर शिव जी ने उन्हें अपने गले में स्थान दिया।
  • भक्त की इच्छा- नागराज वासुकी भगवान शिव के परम भक्त थे और हमेशा उनके समीप रहना चाहते थे, इसलिए शिव ने उनकी मनोकामना पूरी की।
  • मृत्यु पर विजय- सांप को मृत्यु और काल का प्रतीक माना जाता है। गले में नाग धारण कर शिव यह दर्शाते हैं कि वे महाकाल हैं और मृत्यु तथा भय से परे हैं।
  • कुंडलिनी शक्ति- योग और तंत्र साधना में सांप को कुंडलिनी शक्ति का प्रतीक माना जाता है, जो मनुष्य के भीतर जागृत होने वाली चेतना का संकेत है।
  • संतुलन और शांति- एक अत्यंत विषैला और हिंसक जीव होने के बावजूद सांप शिव के गले में शांत रहता है, जो यह सिखाता है कि भयंकर ऊर्जा या क्रोध पर भी संयम रखा जा सकता है।

नागपंचमी का कारण :

अब जान लेते हैं कि क्यों मनाते हैं नागपंचमी।

नाग पंचमी का त्योहार सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग देवता के प्रति सम्मान और उनकी रक्षा के लिए मनाया जाता है। इस दिन सांपों को दूध व फूल चढ़ाकर सर्पदंश से रक्षा, पारिवारिक समृद्धि और कालसर्प दोष की शांति के लिए पूजा की जाती है।


पौराणिक कथाएं और मान्यताएं :

  • आस्तिक मुनि की कथा- राजा जन्मेजय ने अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए विशाल सर्प यज्ञ किया था। आस्तिक मुनि ने श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन उस यज्ञ को रोककर नागों के प्राण बचाए थे, तभी से यह पर्व मनाया जाता है।
  • कालिया नाग का वध- भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन कालिया नाग को हराकर यमुना नदी को जहर से मुक्त किया था।
  • शिव व विष्णु का संबंध- भगवान शिव अपने गले में नाग रखते हैं और विष्णु जी शेषनाग पर सोते हैं, इसलिए नागों की पूजा का विशेष महत्व है।


तिथि व शुभ मुहूर्त :

  • पंचमी तिथि प्रारम्भ- 16 अगस्त 2026 को शाम 04:52 बजे।
  • पंचमी तिथि समाप्त- 17 अगस्त 2026 को शाम 05:00 बजे।
  • पूजा का शुभ मुहूर्त- सुबह 05:51 बजे से सुबह 08:29 बजे तक (कुल अवधि= 2 घंटे 37 मिनट)।
  • पूजा विधि और महत्व- सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें। घर के मंदिर या पूजास्थल पर शिव परिवार के साथ नाग देवता का ध्यान करें। शिवलिंग पर जल, दूध, और बेलपत्र अर्पित करें तथा नाग देवता को दूध, खीर, चंदन व पुष्प चढ़ाएं।

इस दिन नाग देवता की पूजा करने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है और कालसर्प दोष का निवारण होता है। 

देवाधिदेव भगवान महादेव और उनके परम भक्त नागदेवता की कृपा हम सब पर सदैव बनी रहे, जिससे हम सभी दुःख-कष्ट से मुक्त होकर उनकी भक्ति में लीन रहें।

हर हर महादेव!

Monday, 10 August 2026

India's Heritage : सावन शिव को क्यों मनभावन?

एक प्रश्न मन में उठता है कि आखिर सावन माह ही इतना विशेष क्यों? और यह माह ही शिव जी इतना प्रिय क्यों है, क्या है इसका कारण?

शिव जी का प्रिय माह और समर्पित दिन है आज, सावन का दूसरा सोमवार। तो इससे अच्छा कौन-सा दिन हो सकता है, इस जानकारी के लिए। फिर आज आपके समक्ष इसे ही प्रस्तुत कर रहे हैं…

सावन शिव को क्यों मनभावन?


धार्मिक व पौराणिक कारण :

इस के कुछ धार्मिक व पौराणिक कारण हैं, तो चलिए उन्हें जान लेते हैं।


(1) समुद्र मंथन -

हिन्दू धर्म का एक बहुत बड़ा प्रसंग है, समुद्र मंथन, जिसमें बहुत से देवताओं व राक्षसों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।समुद्र मंथन के दौरान कुल 14 दिव्य रत्न (मूल्यवान वस्तुएं) निकले थे। इनमें कालकूट (हलाहल) विष, कामधेनु गाय, उच्चैःश्रवा घोड़ा, ऐरावत हाथी, कौस्तुभ मणि, कल्पवृक्ष, रंभा अप्सरा, माता लक्ष्मी, वारुणी (मदिरा), चंद्रमा, पारिजात वृक्ष, पांचजन्य शंख, भगवान धन्वंतरि और अमृत कलश शामिल हैं।

इसमें सबसे पहले निकला था कालकूट (हलाहल) विष, जिसे कोई धारना नहीं करना चाहता था। उस प्रसंग का विस्तार इस प्रकार है।

  • विष पान- सावन मास में ही समुद्र मंथन हुआ था। संसार की रक्षा के लिए शिव जी ने हलाहल विष पिया और नीलकंठ कहलाए। विष की गर्मी शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल चढ़ाया। तभी से शिवलिंग पर जल अभिषेक की परंपरा शुरू हुई। 
  • माता पार्वती का तप- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सावन (श्रावण) महीने में सोमवार का व्रत और निराहार रहकर कठोर नियमित तपस्या की थी। उन्होंने बालू (रेत) का शिवलिंग बनाकर उसकी विधिवत पूजा की और अपना यह व्रत पूरा किया था, जिससे प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था।

एक और पौराणिक कथा इस प्रकार है, जिसके कारण शिव जी सावन माह पसंद है।


(2) ससुराल आगमन -

  • शिव का ससुराल आगमन- मान्यता है कि सावन में शिव जी अपने ससुराल आते हैं, जहां उनका स्वागत जलाभिषेक से होता है।


यह सब कारण हैं, कि क्यों शिव जी को सावन का महीना सर्वप्रिय है।

भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा हम सब पर सदैव बनी रहे!

हर हर महादेव!