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Sunday, 26 January 2025

Poem : ऐ देश, तेरे सम्मान में हम

ऐ देश, तेरे सम्मान में हम


ऐ देश, तेरे सम्मान में हम,

नित-नित शीश झुकाते हैं।


है गंगा, जमुना, सरस्वती यहाँ,

गोदावरी, नर्मदा, कावेरी यहाँ।

इन नदियों के पावन जल का,

सानिध्य हमेशा पाते हैं।।


ऐ देश, तेरे सम्मान में हम,  

नित-नित शीश झुकाते हैं।


हिमराज हिमालय का साया,

रोके रिपु की काली छाया।

कल-कल बहता सागर का जल,

सुख-संपदा हमें दिलाते हैं।।


ऐ देश, तेरे सम्मान में हम,

 नित-नित शीश झुकाते हैं।


राम और कृष्ण की जन्मस्थली,

संस्कारों से अभिसिंचित है।

इसलिए ही हम भारतवासी, 

स्वतः संस्कारी हो जाते हैं।।


ऐ देश, तेरे सम्मान में हम,

 नित-नित शीश झुकाते हैं।


वीर शिवाजी, झांसी की रानी, 

अमर स्वतंत्रता के सेनानी। 

इनके शौर्य की कथा सुनकर,

ओज से हम भर जाते हैं।। 


ऐ देश, तेरे सम्मान में हम, 

नित-नित शीश झुकाते हैं।


अध्यात्म, ज्ञान और विज्ञान, 

भारत का सबमें सर्वोच्च स्थान। 

यह सोच-सोच, हम भारतवासी,

गौरवान्वित हो जाते हैं।।


ऐ देश, तेरे सम्मान में हम,

 नित-नित शीश झुकाते हैं।


हर क्षण प्रयत्न हमारा यही रहे,

विश्व विजयी भारत बने।

गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर,

हम प्रण यही उठाते हैं। 


ऐ देश, तेरे सम्मान में हम,

 नित-नित शीश झुकाते हैं।।


🇮🇳 आप सभी को 76वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 🇮🇳

Friday, 24 January 2025

Poem: सेल - एक राष्ट्र निर्माता

सेल - एक राष्ट्र निर्माता 



सेल सबकी जिंदगी से जुड़ा 

हमारी तो जिंदगी है सेल 

देता है यह दृढ़ता भारत को

हमारी तो बंदगी है सेल 


देश की आन है सेल

देश की शान है सेल 

 हम हैं सेल से

हमारी पहचान है सेल


केवल इस्पात नहीं 

ज़िन्दगी भी सजाती है सेल 

हर कमजोर को सुदृढ़

बनाती है सेल


यह एक कम्पनी नहीं

है एक राष्ट्र निर्माता सेल

गौरवान्वित हो जाता है वो 

जिससे जुड़ जाता है सेल 


सभी को सेल के निर्माण दिवस पर विशेष शुभकामनाएं 🎉 💐


Wednesday, 1 January 2025

Poem : हे ईश्वर, इस नववर्ष में

हे ईश्वर, इस नववर्ष में 




नवरंग की उमंग में,

खुशियों की तरंग में,

एक वर्ष और जुड़ गया,

सुख का पर्याय मिल गया।


नभ को छूने की आस को,

सफलता की तलाश को,

एक वर्ष और जुड़ गया,

सुअवसर मिल गया।


अपनों के साथ का,

सपनों की रात का,

एक वर्ष और जुड़ गया,

सानिध्य सबका मिल गया। 


हे ईश्वर, इस नववर्ष में 

खुशियां ही खुशियां आएं 

सपने सबके पूरे हो जाएं 

अपनों का सानिध्य पाएं 


हे ईश्वर इस नववर्ष में 

सुख संपन्नता सब पर बरसाएं 

प्रकृति पर हरियाली छाए

भारत विश्व विजयी कहलाए 

Monday, 25 November 2024

Poem: ऐ मेरे हमसफ़र

ऐ मेरे हमसफ़र 



ज़िन्दगी का यह सफ़र 

ऐ मेरे हमसफ़र 

खुशनुमा हो गया 

जब हम चले थे 

एक डगर 

एक हस्ती थी तुम्हारी 

एक हस्ती थी हमारी 

एक-दूसरे की दुनिया से 

हम दोनों थे बेखबर 

पल पल, लम्हा लम्हा 

जो जो गया गुज़रता 

कब कैसे एक-दूसरे में 

दोनों ही खो गये

दिखते हैं हम सबको 

अब  एक ही नज़र 


Happy anniversary my love 💞


Thursday, 14 November 2024

Poem: कुछ Special है

कुछ Special है



जब हम बच्चे थे,

सच में, तब दिन 

बहुत अच्छे थे

Children's day

बड़ी धूम से 

मनाते थे 

ऐसा नहीं था कि 

कुछ special 

तोहफे पाते थे

न‌ ऐसा था कि 

हम इस दिनों को 

मनाने के लिए 

अपने माता-पिता से 

किसी जिद्द पर 

अड़ जाते थे 

पर यह दिन 

कुछ special है 

ऐसे भाव मन में 

ज़रूर आते थे 

Teachers, उस दिन 

पढ़ाई-लिखाई छोड़कर 

हमें खूब खेल खिलवाते थे

आह! हमारा स्कूल 

हमारे अध्यापक 

सब बड़े अच्छे 

हम इस बात को 

सोच सोचकर 

दिन भर इतराते थे 


कुछ दिन, कुछ पल, ज़िंदगी में ऐसे होते हैं 

जिनका होना, ज़रूरी नहीं, पर उनका होना 

ज़िंदगी की जरूरत होती हैं।

क्योंकि यह ही ज़िंदगी को ज़िन्दगी बनाते हैं, हमें हमारे बचपन से मिलवाते हैं।

तो उन्हें, किसी भी कारण से नष्ट मत कीजिए, बल्कि हो सके तो ऐसे और बहुत सारे पल और दिन बच्चों की जिंदगी से जोड़ दीजिए। 

Happy children's day to all my dear children ❤️

Monday, 11 November 2024

Poem: तरन्नुम सी चलती रही...

इस बार उर्दू के चंद लफ़्ज़ों को जोड़कर, एक नज़्म पेश करने का प्रयास किया है, आप पढ़कर बताएं कि प्रयास कितना सफल रहा...

तरन्नुम सी चलती रही...



ज़िंदगी ता उम्र, 

यूं ही चलती रही।

कभी समाई मुठ्ठी में,

कभी रेत सी फिसलती रही।


गोया हम न कर सके, 

नाज़ ज़िंदगी पर कभी।

क्योंकि चार कदम संभली,

कभी किसी लम्हा गिरती रही‌।


मगर शिकायत करें हम,

किस से भी क्या?

रिवायतें, सबकी ज़िंदगी में,

यह ही चलती रही.. 


ज़माने की महफ़िल में,

हैं मेहमां सभी।

मुकम्मल जिंदगी,

किसी को भी मिलती नहीं..


ज़िन्दगी में अश्क,

कभी हमने बहाए नहीं। 

खुशी हो चाहे ग़म,

फ़र्क पड़ता नहीं।


हर ख़ुशी मुझको, 

ग़म पर भारी लगी।

इसलिए जिंदगी अपनी,

तरन्नुम सी चलती रही...

Sunday, 3 November 2024

Poem : चित्रगुप्त महाराज

चित्रगुप्त महाराज


ब्रह्मा की काया से उपजे,

कलम लिए हुए हाथ।

पाप-पुण्य का लेखा-जोखा,

रहता है जिनके साथ।।


कायस्थ कुल,

के जन्मदाता।

ज्ञान, बुद्धि से,

इनका नाता।।


अति पराक्रमी,

अति तेजस्वी,

वो देव ही कहलाते हैं

।। चित्रगुप्त महाराज ।।


 परम परमेश्वर श्री चित्रगुप्त जी महाराज के श्री चरणों में मेरा सादर प्रणाम 🙏🏻🙏🏻

चित्रगुप्त पूजा, भाईदूज, व यमद्वितीया की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏻🎉

Thursday, 31 October 2024

Poem : दीपों का त्यौहार दीपावली

 दीपों का त्यौहार दीपावली


🪔🎉🪔🪷🪔🎆🪔🎊🪔🕉️🪔


दीपों का त्यौहार दीपावली,

रोशन हो रही है गली-गली।

फूलों से घर-आंगन महके,

खुशियों से हर बच्चा चहके।

 रंगोली से सज गई हैं दहरी,

दीपक हर चौखट का प्रहरी।

मिठाई-पकवानों की मांग बढ़ी है,

 पटाखे की धूम मची है।

हंसी-खुशी हैं जिसकी सहेली, 

वो ही है, त्यौहार दीपावली। 


🪔🎉🪔🪷🪔🎆🪔🎊🪔🕉️🪔


मां लक्ष्मी जी व श्री गणेश जी की कृपा, सदैव हम सब पर बनी रहे 🙏🏻 

आप सभी को दीपावली के महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं 🪔

सर्वत्र सुख-समृद्धि, सम्पन्नता व स्वास्थ्य का वास हो 🙏🏻


दीपावली पर लिखी अन्य कविताओं का आनन्द लेने के लिए click करें  :

Poem : शायद तुम्हें याद होगा 

Poem : यादों की दीपावली

Poem : शुभ दीपावली

Poem : इस बरस दीपावली में 

Poem : दोहे दीपावली वाले 

Poem: दीप से दीप जलाकर

Poem : चलो इस बार दिवाली कुछ अलग सी मानते हैं

Thursday, 5 September 2024

Poem: गुरु ईश्वर समान

कैसा गजब संयोग है कि गुरु दिवस, गुरुवार को...

वैसे तो हर दिन का अपना विशेष स्थान है और अपना अलग महत्व, पर कोई विशेष हो तो उसे गुरु (जिसका एक अर्थ बड़ा या  महान भी होता है) कह दिया जाता है।

गुरुवार को गुरुवार कहने का एक तात्पर्य यह भी है कि, यह दिन जगत को संचालित करने वाले ईश्वर विष्णु जी को समर्पित है। 

उसी तरह जीवन में हर रिश्ते का अपना विशेष स्थान और महत्व होता है, पर उन सबमें गुरु (शिक्षक) को ईश्वर के समान स्थान प्रदान किया गया है।

आज उसी भाव को हमारे प्यारे से बेटे अद्वय ने अपनी कविता के माध्यम से शब्दों में पिरोया है। तो सोचा कि आज उसे ही साझा किया जाए।

उसके साथ ही उसके सभी शिक्षकों को, अपने सभी शिक्षकों को या यूं कहें कि, जो भी शिक्षण का कार्य कर रहे हैं, उन सभी शिक्षकों को कोटि कोटि धन्यवाद  🙏🏻 

क्योंकि दुनिया में जो भी शिक्षा देने का कार्य कर रहा है, पूरा समाज उन सभी का आभारी हैं। 

क्योंकि शिक्षक हैं तो, सम्पन्नता है, प्रसन्नता, है, सौभाग्य है, अनुराग है, वो हैं, इसलिए ही सबका अस्तित्व है। 

एक बार फिर से कोटि कोटि आभार 🙏🏻 

आप सभी अद्वय की कविता का आनन्द लें और उसे अपना आशीर्वाद प्रदान करें 🙏🏻😊

 गुरु ईश्वर समान



जब बच्चे होते हैं छोटे,

पर उनकी जिज्ञासा हो बड़ी।

तब शिक्षिकाएँ ही तो होती हैं,

उनके उत्तरों के लिए खड़ी।


जब बच्चों को पुस्तकों का, 

कुछ भी समझ न आया।

तब अध्यापक ही तो थे,

जिन्होंने सब कुछ सिखाया।


जब बच्चे का दिल टूटे,

और बिखर जाएं आशाएँ।

तब शिक्षक प्रोत्साहित कर,

उनको मंजिल तक पहुंचाएंँ।


यदि होते न गुरु द्रोण,

तो क्या होता अर्जुन तीरंदाज?

यदि होते न गुरु ब्रह्मा,

तो क्या होता यह समाज?


हो कोई महाज्ञानी,

या एक साधारण इंसान।

सबका मानना एक ही,

गुरु है ईश्वर समान।


अद्वय सहाय


🙏🏻 गुरु दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏻 

📚 Happy Teacher's Day 🎓

Sunday, 4 August 2024

Poem : दोस्ती को निभाया

दोस्ती का अनोखा रिश्ता, जिसने हमारे भारत के इतिहास को गौरवान्वित किया है, आज उसी को कविता के रूप में उकेरा है। आइए इस अनूठे रिश्ते को हम भी जीएं‌ और जीवन को सुख से भर दें।

आप सभी को मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🎉💞💐

दोस्ती को निभाया

राम ने विभीषण संग,

दोस्ती को निभाया। 

माता सीता के बदले,

लंका को रावण मुक्त बनाया।

सच्ची मित्रता को,

नया आयाम दिलाया।


खाकर सुदामा के चावल, 

कान्हा ने दोस्ती को निभाया।

चंद चावलों के बदले,

करोड़ों का राजपाट थमाया।

दोस्ती को अमीरी-गरीबी से,

ऊपर उठाया।


कर्ण ने दुर्योधन संग,

दोस्ती को निभाया।

राजपाट के बदले,

अपनी जान ही वार आया।

दोस्ती सर्वोपरि है,

ऐसा इतिहास बनाया। 


जो मिली है विरासत में,

दोस्ती हमें। 

वो हम भी निभाएंगे,

ऐ दोस्त तुम पर,

तन-मन-धन, 

सब वार आएंगे।


Happy friendship day 🥳 

Monday, 22 April 2024

Poem : क्या है पृथ्वी?

क्या है पृथ्वी? 

क्या है पृथ्वी?

पुष्प की सुगंध से

महकता मंजर

या वक्ष चीरकर,

बहता तटिनी का आंचल..

या ऊंचे ललाट सा,

महीधर का शिखर..

या समीर की चाल पर,

बल खाती विटप की डाली..

या धूप छांव पर बदलती, 

रेगिस्तान की रेत..

या रुह को सुकून देता,

 हिम का अद्भुत एहसास..

या कहें उसे मां,

या सुकोमल नारी,

जिसके इर्द-गिर्द, 

है दुनिया सारी..

पर यह सब है

सिर्फ तब तक 

जब तक है 

हरियाली 

जीवन में है

तब तक ही

खुशहाली 


पृथ्वी दिवस पर विशेष 🌍

Sunday, 14 April 2024

Poem : अम्बेडकर अपना अपना

अम्बेडकर अपना अपना 


जाति कोई छोटी नहीं,

ना ही है कोई बड़ी।

ना अमीरी-गरीबी,

रास्ता रोक सकती कोई।

जिसके हों इरादे फ़ौलाद,

वो मंजिल अपनी,

पा ही लेता है।

लाख रोड़े हो राह में,

वो अपना मुकाम,

बना ही लेता है।

और गर फिक्र हो,

अपने से ज्यादा अपनों की।

वो सफलता का परचम,

लहरा ही लेता है।

हैं इस बात की मिसाल,

भीमराव अम्बेडकर

जिन्होंने बस एक ही,

शस्त्र शामिल किया था।

आरक्षण का, संविधान में,

आज तक भुगत रहा है,

सामान्य वर्ग का युवा,

बस इस इंतज़ार में।

शायद कोई एक,

अम्बेडकर,

आएगा पुनः।

जो खत्म कर देगा,

आरक्षण,

तब ही तो देश,

मुक्त होगा,

जात-पात से।

उस दिन होगा सशक्त,

सम्पूर्ण देश,  विकास से।

Thursday, 11 April 2024

Poem : शीतलता है सर्वोपरि

शीतलता है सर्वोपरि

आसमां में देखकर,

पूछा हमने उनसे,

किस नाम से पुकारूं,

क्या नाम है तुम्हारा?

क्यों तुमको इस जहां में

पूजे संसार सारा?

वो बोले मुस्कुरा के,

चंद्र देव, चंद्रमा,

या कहो चांद,

संसार ने कई नामों से,

हमें है पुकारा।। 

रुप, तेज, गुण,

सब है मुझमें,

पर शीतलता है सर्वोपरि,

उसके ही कारण,

पूजे जहां सारा।।

सच ही तो है,

हो चंद्रमा करवाचौथ का,

या चांद हो ईद का,

खूबसूरत दोनों ही हैं,

पर रुप के ऊपर

शीतलता है भारी,

उसके कारण ही

दुनिया जुड़ी है सारी।।

तो गर, उनके जैसी ही शीतलता,

हम सभी में आ जाए,

तो इस जहां में

प्रेम ही प्रेम छा जाए।।

पर यह उम्मीद,

किसी एक इंसान,

या एक वर्ग से ही,

ना की जाए।।

सम्पूर्ण सृष्टि ही

इस गुण को अपनाए,

तब यह धरा ही,

स्वर्ग बन जाए।।


आप सभी को नवरात्रि व ईद की हार्दिक शुभकामनाएं 💐

Monday, 25 March 2024

Bhajan (Devotional Song) : होली खेल रहें हैं ब्रज में

होली का त्यौहार हो, रंगों की बौछार हो और उसमें राधा कृष्ण के प्रेम का इज़हार हो, तब ही तो होली का असली रंग नज़र आता है। और ऐसा कोई गीत हो तो वो दिल को भाता है।

बस इसी बात को ध्यान में रखते हुए आज का यह गीत श्री कृष्ण और राधा रानी के श्री चरणों में समर्पित है।

आइए इसका आनंद लेते हैं।

होली खेल रहे हैं ब्रज में

 होली खेल रहें हैं ब्रज में,

कान्हा राधा के साथ।

कान्हा राधा के साथ,

लेकर हाथों में हाथ।।


होली है त्यौहार प्रीत का,

रंगों की रंगोली।

प्रेम के रंग में रंग गई राधा,

कृष्णा की वो होली।।


होली खेल रहें हैं ब्रज में,

कान्हा राधा के साथ।


कौन है अपना, कौन पराया,

होली में ना हो विचार।

प्रेम प्रीत में सबको रंग दे,

रंगों की बौछार।।


होली खेल रहें हैं ब्रज में,

कान्हा राधा के साथ।


दृश्य सुहाना देखकर,

सब उसमें ही खो जाएं।

अलग-अलग नहीं दिख रहे दोनों,

 एक नजर आएं।।


होली खेल रहें हैं ब्रज में,

कान्हा राधा के साथ।।


आप सभी को रंगों के त्यौहार, होली की हार्दिक शुभकामनाएँ 💐🎉

भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी हम सभी के जीवन को प्रेम-प्रीत, उमंग और सुख के रंग में रंग दें 🙏🏻🙏🏻

Monday, 18 March 2024

Poem: Love Stories

फागुन का रंग, रस, माधुर्य से परिपूर्ण मास चल रहा है। इस मास में हवाएं भी ऐसी चलती है कि सब ओर प्रेम ही प्रेम विद्धमान रहता है। उस का असर कुछ ऐसा होता है कि सजीव तो सजीव, निर्जीव वस्तुओं के सुर भी बदल जाते हैं। 

इस सुर को ही अपनी आज की कविता में पिरोया है। आइए उसका आनंद लेते हैं।

Love Stories 


हवा चली ज़ोर से

तो window बोली 

door से 

सुन रहे हो

जो खट-खट 

वो मेरे heart की है

धक-धक 

क्या मस्त हवा है

मौसम romantic हो चला है

Flowers महक रहे हैं

पंछी चहक रहे हैं 

काश आज कोई

sweets ले आए

मद्धम सी light की 

Candle जलाए 

चलो हम भी इंसानों-सा 

थोड़ा रोमानी हो जाएँ

हमको personify करके 

कोई हमारी feeling को

समझ पाए

जितनी हो requirements बस

मकान उतने ही बनाएँ

जिससे लहराते रहे वृक्ष

और चलती रहें हवाएँ 

उन्हें काटकर

Window and door

ना बनाए जाएं 

हम भी रह सकें सजीव

निर्जीव ना हो जाए 

और इस romantic से

मौसम में, यूँ ही 

Love stories बनती जाएँ... 



आज कुछ अलग सी कविता लिखी है, जैसी आजकल ज्यादा पसंद की जा रही है। जिसमें रस भी है और उन्मुक्तता भी, जो प्यार के एहसास को जगाती है और ना बोलने वाली वस्तुओं को भी धड़कन और आवाज़ दे जाती है। 

एक अलग प्रयास किया है, बताइएगा कि आप को कैसा लगा?....

Friday, 8 March 2024

Poem : ऐ नारी

आप सभी को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष शुभकामनाएँ 💐

ऐ नारी


लांघ कर देहरी,
जब आई थी ससुराल।
छोड़ आई थी पीछे,
अपने दिल का हाल। 
वो अल्हड़ सी मस्ती,
वो मस्तानी चाल।
बेफिक्री जमाने की
हवाओं में लहराते बाल।
आज ना नींद है,
ना सपने।
बेगाने, ना जाने,
कब बन गए अपने।
अब हर दिन, हर रात,
इनके लिए खुद को बुनती है।
क्यों नहीं कभी,अपने लिए,
अपने को सुनती है?
ऐ नारी तू क्यों नहीं,
अपनी खुशियों को चुनती है?
आ एक दिन, एक रात के लिए,
भूल जा ज़माने को,
दुनिया भर के फसाने को।
आ उड़ चले आसमान,
एक स्वच्छंद सी उड़ान।
जहाँ, तुझे बेटी,पत्नी, माँ
किसी का ना हो भान
बस नारी होना ही, 
हो तेरी पहचान। 



Happy Women's Day💃

Tuesday, 5 March 2024

Poem: डालियों का प्रेम मिलन

आज कल बहुत जोर हवाएं चल रही हैं, इन हवाओं को देखकर कुछ अलग ही अनुभूति हुई, उसी को उकेर रहें हैं, पढ़िएगा शायद आपको भी यही अनुभूति हुई हो या पढ़ने के बाद, आप जब हवाओं को चलता देखें तो यह अनुभव हो! बड़ा ही मधुर अनुभव है, आइए आनन्द लेते हैं इसका... 


डालियों का प्रेम मिलन 




तेज़ हवाओं ने,

प्रकृति को दिया,

नेह निमंत्रण।

आओ झूम लो,

सब भूलकर।

तुम भी कर लो,

प्रेम आलिंगन।


दो डालियां जो हैं, 

एक ही वृक्ष की।

साथ-साथ बढ़ी,

साथ ही खड़ी।

फिर भी कभी,

एक दूसरे से,

मिल ना सकी।


उनको ही मिलाने को,

यह हवाएं हैं चली।

झूम कर इससे,

दोनों जो मिली।

प्रकृति में हर ओर,

दोनों के प्रेम मिलन की, 

बात है चली।


डालियों का एक-एक,

मुस्कुरा रहा है पात।

देखकर इस प्रसंग को,

हो रहा सुखद एहसास।

लग रहा है आज,

कुछ ओज है खास,

कुछ जोश है खास।


एक शोर है अजब सा,

पर मधुर है गजब का।

ना जाने है यह किसका?

हवाओं के तेज़ चलने का?

या पत्तों का खुशी से मचलने का ?

या है यह शाश्वत आलिंगन,

डालियों के प्रेम‌ मिलन का...


ब प्रकृति प्रसन्न होकर झूमती है, उस समय ईश्वर की कृपा सर्वाधिक बरसती है 🙏🏻🙏🏻🌳🌺💞🌷🌻🌹

Wednesday, 14 February 2024

Poem : एक पुष्प

 एक पुष्प 



लेकर चला पुष्प एक वो,

 प्रिया को ललचाने को। 

आज क्षण आया है वो,

नेह उस पर लुटाने को।


थोड़ा ठहर जा क्षणभर,

विचार कर ले तनिक भर।

क्या उससे पहले नहीं है,

कुछ फ़र्ज़ तेरे निभाने को।


पुष्प एक कर देना अर्पित,

विद्या ज्ञान की देवी को।

जिससे ज्ञान बुद्धि हो जाग्रत,

उचित मार्ग में जाने को।


पुष्प एक चढ़ा देना तुम,

पुलवामा के अमर शहीदों को।

जिसने प्राण निछावर कर दिए,

जीवन तुम्हें दिलाने को।


फिर कर लेना प्रेम की वर्षा,

प्रिया को अपनी रिझाने को। 

जिसने अर्पण किए दिन-रैन।

सर्वोपरि तुम्हें बनाने को।


आप सभी को बसंतोत्सव की हार्दिक

शुभकामनाएं 💐🙏🏻

माता सरस्वती की कृपा हम सब पर बनी रहे 🙏🏻🙏🏻 

पुलवामा के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि🙏🏻

Happy valentine's day 💞 

Friday, 26 January 2024

Poem : मेरा भारत, मेरा शेर

आज हमारे नौनिहाल किस तरह से देखते हैं हमारे देश को, उनके मन में अपने देश की क्या परिकल्पना है। 

ओज से परिपूर्ण इस कविता में साफ़ झलकता है, जिसे प्रिय अद्वय ने लिखा है।

आइए उसके बाल मन से रची-बसी इस कविता का आनन्द लें...

मेरा भारत, मेरा शेर


चुनौतियों को करके पार,

रोशन करके अंधेर।

आज भी है उतना ही परिश्रमी,

मेरा भारत, मेरा शेर।।


अनगिनत युद्धों में विजेता बनके,

शत्रुओं को करके ढेर।

आज भी है वह विश्व विजयी,

मेरा भारत, मेरा शेर।।


खुशियाँ, उमंग और उत्साह,

जीवन में रंगों को रहा बिखेर।

आज भी है उतना ही सुदृढ़,

मेरा भारत, मेरा शेर।।


मित्रों को लेकर साथ 

प्रतिपक्षी को करके घेर।

आज भी है उतना ही सफल,

मेरा भारत, मेरा शेर।।


सशक्त है जैसे चट्टान,

मीठा है जैसे बेर।

आज भी है सोने की चिड़िया,

मेरा भारत, मेरा शेर।। 


🇮🇳 भारत माता की जय 🇮🇳

🇮🇳 वन्दे मातरम् 🇮🇳

 गणतंत्र दिवस पर राष्ट्र अभिनंदन।

Monday, 15 January 2024

Poem: मकर संक्रान्ति

मकर संक्रान्ति  




उत्तरायण का सूरज 

पतंग की डोर

ले चली सबको

सुख की ओर 


घने कोहरे के

छंट गए बादल 

धूप ही धूप 

फैली हर ओर


मकरसंक्रांति हो 

खिचड़ी या पोंगल

भांति भांति के नाम

सब जुड़े एक ही छोर

 

जनवरी से दिसंबर 

त्यौहारों की बहार 

मस्ती ही मस्ती

छाई हर ओर 


मकरसंक्रांति हो

चाहे होली, दीवाली 

भारत में फैली रहे 

सुख शान्ति हर ओर 


आप सभी को सूर्य देव के उत्तरायण में प्रवेश की हार्दिक शुभकामनाएं 💐

मकरसंक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं 💐🙏🏻