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Friday, 6 March 2026

Article : बाहर बारूद-गोली, भारत में होली

Pakistan, Afghanistan, Iran, Israel, Qatar, UAE, Bahrain, Russia, Ukraine, Saudi Arabia; कहीं युद्ध, कहीं गृहयुद्ध, कहीं बद से बद्तर हालात।

जहाँ अन्य देश धूं-धूं कर के जल रहे हैं, वहीं भारत में हर रोज़- हर पल, विकास की ओर आगे बढ़ना, AI Summit, 21 देशों के नेताओं का भारत आना, होली के पर्व की धूम और रमजान के शुभ दिनों के साथ सौहार्द का परिचय।

आपको नहीं लगता है कि आप एक सुरक्षित देश में हैं? तो इसका कारण भी जानिए। पर उससे पहले यह समझने की कोशिश कीजिए कि जिंदगी में सबसे महत्वपूर्ण क्या है?

बाहर बारूद-गोली, भारत में होली


रोज़ी रोटी, कपड़ा, मकान, विभिन्न संसाधन, promotion या आपका ज़िंदा रहना? सब है, पर सबसे पहले ज़िंदा रहना। कहा भी गया है, जान है तो जहान है।

यकीन जानिए, हम भारतीयों का पाला नहीं पड़ा, हर पल दहशत के साये में जीने का, नहीं दो-चार होना पड़ा, ज़िंदगी को धमाकों के साए से बचाकर लाना।

नहीं देखना पड़ा वो भयावह मंजर, जब अपनी आंखों के सामने अपनी दुनिया उजड़ रही हो, सालों से मेहनत से बनाए घर-द्वार अपनी आंखों के सामने ध्वस्त हो रहे हो।

उस असहनीय दर्द को, जब आपके अपने सामने दम तोड़ रहे हों। इन सबकी कल्पना मात्र से सिरहन पैदा हो जाती है, तो सोचिए, आज कितने ही देश, रोज़ इसी पीड़ा से गुजर रहे हैं।

तो क्या एक धन्यवाद हम अपने उन राजनेताओं को नहीं दे सकते हैं, जिनके कारण भारत में चैनों अमन है, अलग-अलग culture के लोग अपना-अपना त्योहार सुख-,समृद्धि से मना रहे हैं।

मजबूत, निर्भीक, दूरंदेशी उन सभी नेताओं का धन्यवाद क्या नहीं देना चाहिए, जिन्होंने देश को सुदृढ़ तरीके से थाम रखा है? फिर चाहे हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी हों, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, अजित डोभाल, नितिन गडकरी, योगी आदित्यनाथ, हेमंत बिस्वा, देवेन्द्र फडणवीस आदि जैसे एक से बढ़कर एक महान राजनेताओं की पूरी कोशिश रहती है कि भारत पूर्णतः सुरक्षित और समृद्ध रहे, विकास की ओर अग्रसरित रहे।

और यह संभव हुआ है उन सभी भारतीयों के द्वारा, जिन्होंने सही हाथों में देश की बागडोर देना का सही निर्णय कर उचित वोट दिया है।

गर्व है मुझे अपने भारत पर, उसके सुदृढ़ नेतृत्व पर और सबसे अधिक इस भावना के लिए, जहां विभिन्न देशों में युद्ध और बिगड़ते हुए हालात हैं, वहीं भारत में सब चंगा है।

जय हिंद, जय भारत 🇮🇳

Thursday, 5 March 2026

Article : होली भाईदूज

हमारे हिन्दू धर्म में हर रिश्ते का अपना अलग महत्व है, जितना मान और प्रेम माता-पिता, पति-पत्नी और बच्चों के रिश्ते को दिया जाता है, उतना ही मान और प्रेम भाई-बहन के रिश्ते को भी दिया जाता है।

इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है रक्षाबंधन और भाईदूज, पर क्या आप जानते हैं कि भाईदूज साल में दो बार आता है? दो बार?

जी हाँ, दीपावली के बाद का भाईदूज, जिसे सब जानते हैं, विभिन्न नामों के साथ जाना जाता है, जैसे भाईदूज, यमद्वितीया, भाईफोटा इत्यादि। दूसरा भाईदूज होली के रंगोत्सव के दूसरे दिन होता है।

हालांकि बहुत से लोगों के घरों में सिर्फ दीपावली के पश्चात् यमद्वितीया ही मनाया जाता है। लेकिन होली के पश्चात मनाए जाने वाले भाईदूज की भी बराबर से मान्यता है।

आइए जानते हैं, इस विषय में, और इसके पीछे की पौराणिक कथा को भी…

होली भाईदूज


(I) संक्षिप्त विवरण :

हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। इसे भ्रातृ द्वितीया भी कहा जाता है। यह पावन पर्व भाई-बहन के अटूट स्नेह और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।

इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। विवाहित बहनें विशेष रूप से अपने भाइयों को घर आमंत्रित करती हैं और प्रेमपूर्वक, होली पर बनाए विभिन्न पकवान और भोजन कराती हैं। 

मान्यता है कि भाई दूज के दिन बहन के घर जाकर भोजन करने से भाई की आयु में वृद्धि होती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।


(II) पौराणिक कथा :

होली के बाद मनाए जाने वाले भाई दूज से जुड़ी एक लोकप्रचलित कथा इस प्रकार है-

एक नगर में एक वृद्धा अपने बेटे और बेटी के साथ रहती थी। समय के साथ बेटी का विवाह हो गया। एक बार होली के बाद बेटे के मन में अपनी बहन से मिलने और उससे तिलक कराने की तीव्र इच्छा जागी।

उसने अपनी माँ से बहन के घर जाने की अनुमति मांगी। पहले तो माँ ने टालने की कोशिश की, लेकिन बेटे के बार-बार आग्रह करने पर उसे जाने की अनुमति दे दी। बहन का गांव दूर था, रास्ते में नदी, जंगल इत्यादि पड़ने थे।

घर से निकलने के कुछ समय बाद, रास्ते में उसे एक नदी मिली। नदी बहुत उफान पर थी, मानो बोल उठी- “मैं तुम्हारा काल हूँ, जैसे ही तुम मेरे जल में उतरोगे, डूब जाओगे।”

यह सुनकर वह घबरा गया, पर साहस जुटाकर बोला- “पहले मैं अपनी बहन से तिलक करवा लूँ, उसके बाद तुम मेरे प्राण ले लेना।”

आगे बढ़ने पर जंगल में एक भयंकर शेर मिला। वह उसे खा जाने के लिए गुर्राता हुआ आगे बढ़ने लगा, उसने शेर से भी वही विनती की। 

थोड़ी दूर चलने पर एक सांप ने उसके पैर लपेट लिए। युवक ने उससे भी निवेदन किया कि पहले बहन से मिल लेने दे, फिर जो दंड देना हो दे देना।

किसी तरह वह अपनी बहन के घर पहुंच गया। बहन ने भाई को देखते ही स्नेह से गले लगाया, तिलक किया और प्रेमपूर्वक भोजन कराया। भोजन करते समय भाई को उदास देखकर बहन ने उसके दुख का कारण पूछा। तब भाई ने रास्ते में मिली सभी बाधाओं की बात बता दी। 

बहन अपने भाई को असीम स्नेह करती थी, रास्ते की बाधाएं सुनकर वह बोली- “भाई! तुम चिंता न करो, मैं तुम्हें घर तक छोड़कर आऊंगीं।”

वह कुछ तैयारी के साथ भाई के साथ हो गई। उसने शेर के लिए मांस, सांप के लिए दूध और नदी के लिए ओढ़नी साथ ले ली।लौटते समय सबसे पहले शेर मिला। बहन ने उसके आगे मांस डाल दिया, जिससे वह शांत हो गया।

आगे सांप मिला तो उसने उसके सामने दूध रख दिया, और वह भी शांत हो गया। जब वे नदी के पास पहुंचे तो लहरें पुनः तेज उठने लगीं। बहन ने श्रद्धा से नदी को ओढ़नी अर्पित की, जिससे नदी भी शांत हो गई और दोनों सुरक्षित पार हो गए।


(III) धार्मिक मान्यता :

इस प्रकार बहन ने अपने प्रेम, बुद्धिमत्ता और साहस से भाई पर आने वाली हर विपत्ति को टाल दिया। तभी से मान्यता है कि चैत्र मास की द्वितीया तिथि, अर्थात होली के अगले दिन, भाई दूज का पर्व मनाया जाता है।

इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक कर उनकी लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।


(IV) अन्य कारण :

वैसे आपको हर बहन के मन की बात बताते हैं कि विवाह उपरांत, भाई के प्रति और अधिक स्नेह भाव बढ़ जाता है। 

वो अपने भाई की हर विपदा से लड़ जाती हैं, और सदैव अपने भाई की सुरक्षा और समृद्धि की कामना करती है। तो जिन भाइयों की बहन हैं, वो अपने सौभाग्य को सराहा सकते हैं।

आप सभी को होली भाईदूज की हार्दिक शुभकामनाएँ!

Wednesday, 4 March 2026

Poem : The Story of Holi

What is the folklore behind the celebration of Holi, and what it teaches all of us. This has been weaved into a beautiful poem by Advay. Let's enjoy this poem and awaken the good within us. Happy Holi!

The Story of Holi


We lit a bonfire, play with colours.

We tend to forget who're ours & others.

Gujhiyas & Malpuas steal the spotlight.

The New Year begins after a fortnight.


Yes, Holi's the name of this festival.

With all the clues, it's way too guessable.

But why's it celebrated & why this name?

In this poem, let's understand the same.


Hiranyakashyapu was Lord Vishnu's enemy.

While his son Prahlad, was Vishnu's devotee.

The father's a demon, the son's a follower.

This clash led to rage & anger all over.


The devil once became hot under the collar.

To burn Prahlad, was his unjust & cruel order.

Hiranyakashyapu's sister Holika stepped ahead.

With the boon, even in the fire, she didn't become dead.


Everything happened according to the ogre's desire.

Prahlad was in Holika's lap, & Holika in the fire.

Prahlad continuously chanted the name of the almighty.

Hardly anxious, because of his belief in the deity.


To everyone's surprise, Holika went on flames.

Whilst Prahlad was all right, he himself claims.

The monster could not digest this fact.

He now couldn't see his son fully intact.


And ahead he stepped, to kill his kid.

With his enemy's votary, he wanted to get rid.

Prahlad didn't stop chanting the word ‘Hari’.

Aware of the fact that the decision was arbitrary.


The sword was lifted, and the situation became tense.

God himself had to step in, to stop this barbarism immense.

Killing the ‘asur’ required a situation bizarre.

Thus, Lord Vishnu appeared in Narsimha Avatar.


Hiranyakashyapu was killed, and Prahlad survived.

The evil had declined, and the good had thrived.

To do the same inside ourselves, Holi is celebrated.

In Hinduism, this occasion is eagerly awaited.

Tuesday, 3 March 2026

Tip : Pre-Holi Skincare

Pre-Holi Skincare


होली पर्व में रंगोत्सव में शामिल होने से पहले क्या ज़रूर से करना चाहिए, इसकी tip हम 2023 में share कर चुके हैं।यह tip आपके लिए बहुत helpful है, इसको एक बार ज़रूर से देखें।

यह आपके उत्साह और उमंग में और चार चांद लगा देगा। उसका link share किया है, आप जरूर से देखें-

https://shadesoflife18.blogspot.com/2023/03/tip-pre-holi-skin-care.html?m=1


आप सोच रहे होंगे कि हम इतना भी क्या जोर दे रहे हैं। तो इतना ही कहेंगे कि Shades of Life अपने सभी viewers से बहुत प्यार करता है, उनकी सुरक्षा इसका ध्येय है।

बस उसी का अनुरोध है आपसे, कि आप अपना ध्यान रखें, और त्योहार का भी भरपूर आनंद लें।


रंग में न पड़े भंग,

होली खेलें उत्साह के संग।

जीवन में बनी रहे उमंग,

सुखद प्रेम की रहे तरंग।।


आप सभी को रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं!

Monday, 2 March 2026

Recipe : Kanji Vada

आपको दो दिन पहले गाजर के पानी वाले अचार की recipe share की थी, साथ ही promise किया था कि आप इसे बनाएं, फिर हम आपको instantly prepare होने वाले कांजी वड़ा की recipe share करेंगे।

तो आपको बता दें, कि गाजर के पानी वाले अचार को सिंधी अचार और oil-free गाजर का या mix पानी वाला अचार भी कहते हैं। साथ ही इस पानी वाले अचार का पानी ही कांजी होता है। तो चलिए, recipe शुरू करते हैं।

Kanji Vada



(I) Method :

  1. सबसे पहले आप इस (अचार) का पानी लीजिए।
  2. बड़े के batter से छोटी-छोटी गोलियां बनाकर तल लें।
  3. इन गोलियों को गर्म पानी में डालकर हल्के हाथों से निचोड़ लीजिए, जिससे extra पानी निकल जाए।
  4. इन गोलियों को कांजी के पानी में, serving करने के 4-6 घंटे पहले डाल दीजिए।
  5. Serving के time कांजी वड़ा को glass में डाल लीजिए।
  6. उसे finely chopped धनिया पत्ती, भुना जीरा और लाल मिर्च powder से garnish कर लीजिए।

Your Kanji Vada is ready to boost your gut health and your taste buds, both at the same time. Enjoy!

नीचे कांजी और वड़ा दोनों का link डाल देते हैं, for a perfect Kanji Vada recipe।


(II) Links :


तो इंतज़ार किस बात का? आज ही बनाइए Kanji Vada और मज़े से खाइए और खिलाइए अपने परिवार को रंगोत्सव के सभी पकवान।

वैसे भी आपने सीखीं दो अलग-अलग recipes; गाजर के पानी वाले अचार और वड़े की। इन recipes से आपने बनाई यह recipe, Kanji Vada. ऐसी ही multi-use recipes के लिए जुड़े रहें Shades of Life से…

Sunday, 1 March 2026

Article : होलिका दहन - पूजन विधि, तिथि व शुभ मुहूर्त

हिन्दू धर्म में बहुत से देवी-देवता और अनेकानेक छोटे-बड़े त्योहार हैं, जिसमें दो मुख्य त्योहार हैं; दीपावली और होली।

दोनों की अलग छटा, अलग उत्सव, कोई किसी से कम नहीं, एक अमावस्या को, तो एक पूर्णिमा को।

इस साल होलिका दहन व रंगोत्सव होली में एक दिन का अंतर है। ऐसा क्यों है, और होलिका दहन का शुभ मुहूर्त क्या होगा, जान लेते हैं।

होलिका दहन - पूजन विधि, तिथि व शुभ मुहूर्त


होलिका दहन, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, हर साल यह पर्व फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है।

साल 2026 में होली की तारीख को लेकर लोगों के मन में थोड़ा confusion है कि होलिका दहन 2 मार्च या 3 मार्च, कब मनाया जाएगा?


(I) तिथि :

2 या 3 मार्च-

कहीं 2 मार्च तो कहीं 3 मार्च को दहन की चर्चा हो रही थी। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि 3 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। पंचांग के अनुसार यह इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च 2026, सोमवार की रात को किया जाएगा। हालांकि इस बार भद्रा का साया भी रहेगा, जिस वजह से सही मुहूर्त का विशेष ध्यान रखना जरूरी होगा।

पूर्णिमा व भद्रा का संयोग-

पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च 2026 को शाम के 5:18 से हो रही है। इसी समय भद्रा का वास भी शुरू हो जाएगा, जो पूरी रात और अगली सुबह 3 मार्च को 4:56 बजे तक प्रभावी रहेगा। 

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, भद्रा काल में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करना वर्जित माना गया है। 

खासतौर पर होलिका दहन जैसे पर्व पर भद्रा का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। शास्त्रों में भद्रा को अशुभ योग माना गया है। मान्यता है कि भद्रा में किए गए शुभ कार्यों का फल विपरीत हो सकता है।


(II) शुभ मुहूर्त :

पंचांग के अनुसार इस वर्ष होलिका दहन का सबसे उपयुक्त और शास्त्रसम्मत समय रात 12:50 बजे से 2:02 बजे के बीच रहेगा। इस दौरान भद्रा का पुच्छ काल माना जा रहा है, जो होलिका दहन के लिए अनुकूल माना जाता है।

अतः होलिका दहन का सबसे उपयुक्त मुहूर्त कुल 1 घंटा 12 मिनट का है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी समय में होलिका दहन करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

तो आप समझ गए होंगे कि इस साल के पहले चंद्रग्रहण और भद्रा काल के कारण, होलिका दहन 2 मार्च की रात को किया जाएगा, 3 मार्च को चंद्रग्रहण है अतः रंगोत्सव 4 मार्च को मनाया जाएगा।

हालांकि सबके घर में भिन्न-भिन्न तरह से सभी पूजा-अर्चना की जाती है, लेकिन होलिका दहन की अग्नि के समीप की जाने वाली पूजा विधि इस प्रकार है।


(III) पूजा विधि :

होलिका दहन से पहले परिवार के साथ विधि-विधान से पूजा करना शुभ माना जाता है।

होलिका के चारों ओर परिक्रमा करें।

कच्चा सूत, गेहूं की बालियां, नारियल और जल अर्पित करें।

साथ में होली उत्सव के लिए जो भी पकवान बनाए या आपने खरीदे हैं, जैसे गुजिया, मठरी, पापड़, मालपुआ, दही बड़े इत्यादि उनको भी साथ में लाएं और उनका अर्पण कर पकवानों को प्रसाद रूप में परिवर्तित करें।

“ॐ होलिकायै नमः” मंत्र का जाप करें।

परिवार की सुख-समृद्धि और बुरी शक्तियों के नाश की प्रार्थना करें।

अगले दिन होलिका की राख को तिलक के रूप में लगाना भी कई जगह शुभ माना जाता है।


(IV) पूजन मंत्र :

  • मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वज:, मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
  • ॐ वासुदेवाय विघ्माहे वैधयाराजाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात्।
  • ॐ तत्पुरुषाय विद्‍महे अमृता कलसा हस्थाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात्।


आप सभी को होलिका दहन व रंगोत्सव होली पर हार्दिक शुभकामनाएं।

Saturday, 28 February 2026

Recipe : गाजर का पानी वाला अचार

होली आने वाली है, जो साथ लाएगी बच्चों में उत्साह, जवानों में उमंग व संग में प्रेम, सौहार्द और अपनेपन का रंग। पकवानों की बहार होगी, सबके संग मिल मस्ती हजार होगी।

पर रंग में भंग तब पड़ जाता है, जब इतने पकवानों को खाकर पेट डांवाडोल हो जाता है। पर इस होली नहीं होगा, अगर आप Shades of Life को follow करते हैं, क्योंकि इस बार हम जो share कर रहे हैं, उसके साथ आपका होली का मजा चौगुना हो जाएगा।

आइए झट-पट इसकी recipe देख लेते हैं…

गाजर का पानी वाला अचार


(I) Ingredients :

  • Red Carrot - 100 gm.
  • Rai (small mustard seeds) - 1 tbsp. 
  • Turmeric powder - ½ tsp.
  • Salt - as per taste
  • Asafoetida - 1 tsp.
  • Black salt - ½ tsp.
  • Water - 1 litre


(II) Method :

  1. एक भगौने में एक litre पानी को गर्म होने रख दीजिए।
  2. गाजर को छीलकर उसके fingers काट लीजिए (जैसे french fries ready किए जाते हैं)।
  3. पानी में नमक, हींग, और गाजर डालकर एक खौल आने तक पकाएं।
  4. राई को coursely grind कर लीजिए। Ground राई व काला नमक इस पानी में डाल दीजिए।
  5. पानी को कांच की शीशी में पलट दीजिए और बरनी के मुंह को कपड़े से बांध दें।
  6. अब बरनी को दो से तीन दिन के लिए धूप में रख दीजिए।

Your tangy and tasty digestive Carrot Water Pickle is ready.


(III) Tips and Tricks :

  • गाजर fresh and red लीजिए, इससे स्वाद अच्छा आता है।
  • गाजर को किसी भी shape में काट सकते हैं। Fingers वाला देखने में अच्छा लगता है।
  • आप पानी बिना उबाले भी इसे बना सकते हैं, फिर इसे बनने में 4 to 6 days लग जाते हैं। बहुत बार सही स्वाद का नहीं भी बनता है।
  • इसमें खट्टा स्वाद राई के fermentation से आता है। खट्टा करने के लिए नींबू रस या सिरका इत्यादि बिल्कुल न डालें।
  • राई दरदरा ही पीसकर डालें, महीन नहीं करना है। 1 tbsp. से अधिक न डालें, वरना पानी कसैला हो जाएगा।
  • हल्दी हल्के से पीले tinch के लिए, या पीला रंग करने के लिए डालना है, आप अपनी पसंद के अनुसार डाल सकते हैं।
  • आप चाहें तो mix veg भी ले सकते हैं, जैसे गाजर के साथ मूली, गोभी, हरी मिर्च इत्यादि। 
  • इसमें अपनी पसंद अनुसार, सौंफ, अजवाइन, काली मिर्च, लाल मिर्च पाउडर आदि डाल सकते हैं। हमने नहीं डाला है, क्योंकि हमने इसे पाचक जल बनाया है। इसमें हींग, राई, नमक का बहुत ही soothing effect आता है। इसलिए गाजर भी हमने कम डाली है, केवल fermentation process fast करने के लिए।
  • कम गाजर डालने और कोई अन्य सब्जियां न डालने का एक कारण और है कि सब इसका पानी अधिक पसंद करते हैं, साथ में गाजर या सब्जियों को खाना पसंद नहीं करते हैं। और वो इसलिए भी क्योंकि यह एक appetizer drink है, खाने के साथ खाया जाने वाला अचार नहीं है।
  • पानी पूरी तरह तैयार है, इसकी पहचान खट्टी-सी खुशबू और स्वाद होता है।
  • साथ ही अचार के पूरा बनते ही गाजर ऊपर की तरफ आ जाती है।
  • हींग जरूरी है, इससे पाचन क्रिया अच्छी हो जाती है।


तो सोचिए मत, आज ही बना लीजिए, easily and instant बनने वाला, oil free अचार, जो खाने के साथ नहीं बल्कि उससे पहले या बाद में खाया जाता है, पकवानों के पाचन के लिए।

होली के पकवानों की list में इसे भी शामिल कर लीजिए, क्योंकि यह होली का पूरा मज़ा बनाए रखेगा।

ज्यादा सोचा तो होली आकर निकल जाएगी और यह नहीं बन पाएगा, आपके मेहमानों के लिए। और एक secret बताएं, आप इसे तैयार कीजिए। उसके बाद हम तुरंत तैयार होने वाले कांजी वड़ा की विधि दो दिन में बताते हैं।

So stay tuned… 

Monday, 25 March 2024

Bhajan (Devotional Song) : होली खेल रहें हैं ब्रज में

होली का त्यौहार हो, रंगों की बौछार हो और उसमें राधा कृष्ण के प्रेम का इज़हार हो, तब ही तो होली का असली रंग नज़र आता है। और ऐसा कोई गीत हो तो वो दिल को भाता है।

बस इसी बात को ध्यान में रखते हुए आज का यह गीत श्री कृष्ण और राधा रानी के श्री चरणों में समर्पित है।

आइए इसका आनंद लेते हैं।

होली खेल रहे हैं ब्रज में

 होली खेल रहें हैं ब्रज में,

कान्हा राधा के साथ।

कान्हा राधा के साथ,

लेकर हाथों में हाथ।।


होली है त्यौहार प्रीत का,

रंगों की रंगोली।

प्रेम के रंग में रंग गई राधा,

कृष्णा की वो होली।।


होली खेल रहें हैं ब्रज में,

कान्हा राधा के साथ।


कौन है अपना, कौन पराया,

होली में ना हो विचार।

प्रेम प्रीत में सबको रंग दे,

रंगों की बौछार।।


होली खेल रहें हैं ब्रज में,

कान्हा राधा के साथ।


दृश्य सुहाना देखकर,

सब उसमें ही खो जाएं।

अलग-अलग नहीं दिख रहे दोनों,

 एक नजर आएं।।


होली खेल रहें हैं ब्रज में,

कान्हा राधा के साथ।।


आप सभी को रंगों के त्यौहार, होली की हार्दिक शुभकामनाएँ 💐🎉

भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी हम सभी के जीवन को प्रेम-प्रीत, उमंग और सुख के रंग में रंग दें 🙏🏻🙏🏻

Sunday, 24 March 2024

India's Heritage : होलिका दहन

आप ने कभी ध्यान दिया है? हम हिन्दूओं के सभी त्यौहार, ईश्वर के सानिध्य से जुड़े हुए हैं... 

सोचिए, जरा जब हर त्यौहार में उनका भी अंश है तो उनकी कृपा और आशीर्वाद तो निहित रहना ही है। फिर चाहे वो रामनवमी हो, प्रभू श्रीराम का जन्मोत्सव, नवरात्र हो, माता रानी का प्राकट्य और राक्षस का वध, दशहरा पर प्रभु श्रीराम द्वारा रावण का वध, दीपावली‌ में जिसमें प्रभू श्रीराम वनवास से लौटे, जन्माष्टमी में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव, होली में नरसिंह भगवान का प्राकट्य... ऐसे ही बाकी सभी त्यौहार भी... 

अर्थात जहाँ हर त्यौहार प्रभू से जुड़ा हो, वहाँ उसे पूर्ण आस्था से वैसे ही क्यों ना किया जाए, जैसे सदियों से चला आ रहा है।

आखिर क्यों हर हिंदू त्यौहार पर, उसकी आस्था पर टीका-टिप्पणी और रोक?...

कारण है ज्ञान की, आस्था की कमी..

आप को पता है, हर त्यौहार में जो भी परंपरा या रीति-रिवाज़ हैं, उनका अपना एक significance होता है।

आज होलिका दहन है, तो आज भारतीय विरासत (heritage segment) में उसी के विषय में बात करते हैं।

होलिका दहन

पहले तो उन लोगों को बता दें, जो कि अनभिज्ञ हैं कि क्यों किया जाता है होलिका दहन और क्यों कहते हैं इसे होलिका दहन?

होलिका दहन कोई bonfire नहीं है कि कुछ लकड़ियां इकट्ठी की और जला दी... 

नहीं, बिल्कुल भी नहीं... 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में महर्षि कश्यप व माता दिति के दो पुत्र थे; हिरण्यकश्यप व हिरण्याक्ष व एक पुत्री थी होलिका।

महर्षि के दोनों पुत्र व पुत्री बहुत बड़े राक्षस थे, या यूं कहें कि महर्षि कश्यप की तीनों ही संतान कर्म से राक्षस थीं। इन्होंने कठिन साधना द्वारा देवताओं को प्रसन्न कर अत्यंत दिव्य व दुर्लभ वरदान प्राप्त कर लिए थे, जिसके कारण यह अत्याधिक बलशाली या यूं कहें अमर प्राणी बन‌ चुके थे।

क्योंकि होलिका दहन की घटना, हिरण्यकश्यप व होलिका से जुड़ी है तो आगे की घटनाक्रम उसी ओर ले चलते हैं।

असुरराज हिरण्यकश्यप (हिरण्यकशिपु) की पत्नी का नाम कयाधु था। उनकी कुल पांच संतान थी, उनके चार पुत्र - प्रह्लाद, संह्लाद, अनुह्लाद, ह्लाद व एक पुत्री सिंहिका थी।

प्रह्लाद उनमें से सबसे बड़ा था। हिरण्यकश्यप जितना बड़ा राक्षस था, प्रहलाद उतना ही बड़ा भगवान विष्णु जी का भक्त। 

भगवान ब्रह्मा की कठिन साधना कर, दिव्य व दुर्लभ वरदान प्राप्त कर हिरण्यकश्यप अपने आपको भगवान समझता था और भगवान विष्णु को अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानता था और उनसे सबसे ज़्यादा बैर भाव रखता था। 

अब सोचेंगे कि ऐसा भी क्या दिव्य व दुर्लभ वरदान प्राप्त कर लिया था उसने? 

हिरण्यकश्यप को वरदान प्राप्त था कि ना तो उसे देव मार सकते हैं, ना दानव, ना नर, ना पशु, ना दिन में, ना रात में, ना घर के भीतर, ना घर के बाहर... अर्थात वह अमरत्व प्राप्त हो चुका था।

अब क्योंकि हिरण्यकश्यप हरि बैरी था और प्रह्लाद हरि भक्त, अतः दोनों पिता-पुत्र में तनिक भी नहीं बनती थी।

हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को समाप्त करने के लिए अनेक प्रयास किए। कभी पागल हाथी से कुचलवाया, कभी जहर दिलवाया, ऐसे ही अनेक प्रयास किए, पर हरिकृपा से सब निष्फल हो जाते, जिससे हिरण्यकश्यप और कुपित और क्षुब्ध हो जाता।

एक दिन हिरण्यकश्यप व उसकी बहन होलिका का आपस में वार्तालाप हुआ। होलिका अपने भाई को कुपित और क्षुब्ध देखकर बोली, "भैया, आपकी हर समस्या का अंत है मेरे पास। मुझे वरदान प्राप्त है, कि यदि मैं अग्नि में प्रवेश भी कर जाऊं, तब भी मेरा बालबांका नहीं होगा, चाहे साथ की सब चीज़ें राख ही क्यों ना हो जाए। अतः, मैं प्रह्लाद को लेकर अग्नि में प्रवेश कर जाऊंगी और प्रह्लाद जलकर भस्म हो जाएगा।"

हिरण्यकश्यप अति प्रसन्न हो गया।‌ 

अग्नि कुंड की तैयारी की गई, और जैसा कि निर्धारित हुआ था, होलिका व प्रह्लाद, दोनों ही अग्नि में प्रवेश कर गए।

होलिका आत्मविश्वास से परिपूर्ण थी, पर प्रह्लाद भी तनिक भी भयभीत नहीं था, क्योंकि उसे अपने भगवान श्रीहरि पर अटल विश्वास और आस्था थी।

कुछ ही पल बीते और अग्नि प्रचंड हो चुकी थी। थोड़ी ही देर बाद चीखें और दर्द भरी आह निकल रही थी। जब अग्नि पूर्णतः जलकर शांत हुई तो देखा गया कि हरि भक्त प्रह्लाद यथावत था, और होलिका जलकर भस्म हो चुकी थी। प्रह्लाद की भक्ति और आस्था पुनः विजयी हुई।

तब से ही होलिका दहन का प्रचलन प्रारंभ हो गया। क्योंकि इसमें होलिका का दहन हुआ था, अतः इसका नाम होलिका दहन ही रख दिया गया। 

माना जाता है कि होलिका दहन के समय पूजन करने से हम में व्याप्त बुराई का अंत हो जाता है और हमारा अंतःकरण हरि कृपा से पूर्ण रूप से शुद्ध और परिष्कृत हो जाता है।


(क) होलिका दहन का वैज्ञानिक कारण :

होलिका दहन से केवल आत्मिक शक्ति नहीं मिलती है, अपितु एक कारण यह है कि होली के पहले शरद ऋतु रहती है और उसके बाद ग्रीष्म ऋतु का आगमन हो जाता है। अर्थात होली का त्यौहार संगम है दो ऋतुओं का।

जब हम होलिका दहन के लिए रात्रि में परिक्रमा और पूजन कर रहे होते हैं, उस समय हमारा शरीर अगले दिन सुबह होली के त्यौहार में रंगों व जल की बौछार को सहन करने के लिए condition हो रहा होता है। इसके कारण ही रंगों और पानी से सराबोर होने के बावजूद हम बीमार नहीं पड़ते हैं।

साथ ही होलिका दहन में हमारे मन में व्याप्त दुनिया भर की बुराई के साथ ही मौसम के संगम से उत्पन्न, विभिन्न, विषैले जीवाणु, किटाणुओं और मच्छरों का भी अंत हो जाता है।


(ख) विधि व पूजन :

जहां होलिका दहन का आयोजन किया जाता है, वहां सबसे पहले बालू डाली जाती है। उसके ऊपर सूखी हुई लकड़ियों का संयोजन किया जाता है, उसे गाय के गोबर के उपले की माला, पुष्प, चन्दन, कपूर, पत्ते, तिल, सूखा नारियल और लौंग आदि से सुसज्जित किया जाता है। पूरे घेरे को हल्दी-कुमकुम आदि से बनाया जाता है। 

अनुरोध है कि जब भी होलिका दहन की तैयारी करें, उसमें कोई भी कूड़ा-करकट, गंदगी आदि ना डालें, वो पूजा अर्चना के लिए सजाई जाती है।

जब पूजन करने के लिए जाते हैं तो एक बड़ी सी थाली में गेहूं की बाली, चने-होरे की बाली, गुलाल, होली के त्यौहार के लिए जो भी पकवान बनाए गए हैं, जैसे गुझिया, मालपुआ मठरी, दही बड़े, दालमोंठ, पापड़, mixture आदि को रखते हैं। एक बड़े से लोटे में जल लेकर जाते हैं। होलिका की परिक्रमा करते हुए सभी कुछ अर्पित करते हैं, जल चढ़ाते हैं। फिर एक-दूसरे के गुलाल लगाते हैं। पकवान के कुछ अंश को घर ले आते हैं जो प्रसाद स्वरूप होता है।

वहां से आकर सभी पकवान जो कि प्रसाद स्वरूप हैं उन्हें घर में रखे पकवान में मिलाकर सभी को प्रसाद तुल्य बना लेते हैं।

होलिका दहन में अर्पित करने के पश्चात् ही होली के त्यौहार के लिए बनाए गए पकवानों को खाया जाता है। और उसके बाद ही होली में एक-दूसरे को रंग लगाया जाता है।

अब आप को समझ आ गया होगा, कि होली के त्यौहार में जितना महत्व रंगों से सराबोर होने का है, उससे अधिक महत्वपूर्ण है होलिका दहन...

अतः होलिका दहन को महज़ bonfire ना समझें और ना ही उसे पर्यावरण प्रदूषण का प्रतीक मानकर उसका विरोध करें, बल्कि होलिका दहन को परंपरा और भारतीय संस्कृति का प्रतीक समझें और आने वाली पीढ़ी को भी इसका महत्व बताएं और संस्कारों का परिवहन करें।

आइए, आज का होलिका दहन का शुभ मुहूर्त भी जान लेते हैं।


(ग) होलिका दहन का शुभ मुहूर्त :

होली का पर्व 24 मार्च, अर्थात् आज से प्रारंभ है। इसी दिन सुबह 9:56 बजे से भद्रा शुरू हो रही है जो रात्रि 23:13 तक रहेगी। 

ऐसी मान्यता है कि भद्रा काल में कोई शुभ काम नहीं किया जाता है, इसलिए रविवार को होलिका दहन भी 11:14 बजे से पहले नहीं किया जाना चाहिए। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात 12:20 बजे तक रहेगा। अतः 24 मार्च, रात 11:14 से लेकर 12:20 के बीच होलिका का दहन करना ही शास्त्र के अनुसार उचित है।

हिरण्यकश्यप और प्रह्लाद की आगे की कहानी भी बहुत रोचक है, जिसे आपको विरासत के किसी और अंक में बताएँगे।

आप सभी को होलिका दहन की हार्दिक शुभकामनाएं 💐

Saturday, 23 March 2024

Recipe : Beetroot Pudding

होली का त्यौहार होता है, बहुत सारे yummy and tasty food items का त्यौहार... पापड़, कचरी, गुझिया, मालपुआ, मठरी, दही बड़े, दालमोंठ, mixture, और भी ना जाने क्या-क्या...

इसमें एक से बढ़कर एक items होते हैं जो मुंह में पानी ले आते हैं। लेकिन पहले के comparatively आज कल लोग बहुत ज़्यादा health conscious हो गये हैं।

वो इतनी मेहनत वाली preparation बनाना और खाना avoid करने लगे हैं। 

पर Shades of Life रखता है सब का ध्यान, तो क्यों हो रहे हैं परेशान? Instantly prepare होने वाली बहुत ही healthy recipe को आप के लिए share कर रहे हैं।

जब दो-दो पापड़, साबूदाना पापड़ और आलू पापड़ की  recipe बताई है तो कुछ healthy मीठा भी होना चाहिए।

आज का Star ingredient है, Beetroot...

Beetroot, सुनकर लग रहा होगा, कैसी लगेगी, इसकी pudding?

पर इतनी कमाल की बनती है कि बड़े तो बड़े, बच्चे भी बहुत खुशी-खुशी खाएंगे...

तो चलिए झट-पट देख लेते हैं इसकी recipe...

Beetroot pudding

Ingredients :

  • Beetroot - ½ kg.
  • Sugar - 100 gm.
  • Rose essence - 3 to 4 drops
  • Sugar balls - for decoration


Method :

  1. चुकंदर को कद्दूकस से grate कर लीजिए।
  2. अब एक wok लीजिए, उसमें चुकंदर और चीनी को डालकर slow flame पर ढककर 10 to 15 minutes के लिए soft होने तक पका लीजिए।
  3. अब इसमें घी डालकर, थोड़ी देर भून लीजिए।
  4. Gas burner off कर दीजिए, अब इसमें rose essence डालकर अच्छे से mix कर दीजिए।
  5. एक plate में इसे जमने के लिए रख दीजिए।
  6. जब beetroot pudding ठंडी हो जाए तो उसे silver balls से decorate करके मन चाहे shape में cut कर लीजिए।

Yummy and healthy beetroot pudding is ready to serve.

Perfect pudding के लिए कोई tips and tricks ना बताएं तो कैसे चलेगा? तो बस जल्दी से उसे भी देख लेते हैं…


Tips and Tricks :

  • चुकंदर मीठा होता है, इसलिए बहुत कम sugar में भी बहुत tasty बन जाता है। तो try कीजिएगा, कि sugar की quantity बहुत ज़्यादा नहीं बढ़ाएं।
  • ज्यादा sugar डालने से उसका texture भी chewy and sticky हो जाएगा, तो taste enhance नहीं होगा। 
  • अगर आप इस pudding को और ज्यादा healthy version देना चाहते हैं या taste variation देना चाहते हैं तो, sugar की जगह, मिश्री, honey या jaggery भी use कर सकते हैं। 
  • मिश्री से तो almost वही taste आएगा, लेकिन honey and jaggery से taste little bit different taste आएगा।
  • पकाना भी बहुत ज्यादा नहीं है, क्योंकि चुकंदर बहुत जल्दी hard होने लगता है, बस soft होने तक ही पकाएं।
  • Essence पूरी तरह से optional है, आप इसे avoid भी कर सकते हैं और अपनी पसंद का दूसरा essence भी डाल सकते हैं। वैसे rose essence डालने से थोड़ा सा गुलकंद जैसा feel आता है। साथ ही यह pudding beetroot की ना लगकर थोड़ी unique लगती है।
  • बाकी आपकी choice है, आप essence के regarding जो करना चाहें, बाकी हम यही कहेंगे कि अगर आप खुद खा रहे हैं तो जैसा चाहें, पर अगर बच्चों या मेहमानों को serve कर रहे हैं तो कोई ना कोई essence, mix करेंगे तो ज्यादा पसंद किया जाएगा।
  • Sugar balls भी पूरी तरह से optional है, वो presentation के लिए डाली है। अगर आप के पास नहीं है या आपको पसंद नहीं है तो इसे discard कर सकते हैं।

तो बस ready है, आपकी healthy craving के लिए, instant and healthy option... तो सोचना क्या है, बना डालिए इस होली कुछ different...

Friday, 22 March 2024

Recipe: Aloo Papad

जैसा कि आप को बताया था कि इस बार आलू पापड़ और साबूदाना पापड़ बनाने की request बहुत ज्यादा आई थी।

आप को साबूदाने के पापड़ की recipe कल share कर दी थी, जिसे लोग बहुत पसंद भी कर रहे हैं।

आज हम, आलू के पापड़ की जो recipe share कर रहे हैं, वो प्रयागराज से श्रीमती रश्मि श्रीवास्तव जी के खजाने से है।

इन्हें आलू के पापड़ बनाने में महारत हासिल है, अतः इनके experience का benefit भी आपको मिल जाएगा और आपका आलू का पापड़ एकदम perfect बनेगा।

चलिए इसकी झट-पट से recipe देख लेते हैं।

आलू पापड


Ingredients : 

  • Red potato - 1 kg.
  • Salt - 1 tbsp. / as per your taste 
  • Cumin seeds - 1½ tsp.
  • Chilli flakes - 1½ tsp.
  • Mustard oil - for greasing


Method : 

  1. आलू को 2 high flame पर 1 sim flame पर whistle दे दीजिए।
  2. आलुओं को गर्म-गर्म ही छीलकर महीन और चिकना भर्ता बना लें।
  3. अब इसमें नमक, मिर्च और जीरा डालकर अच्छे से mix कर लीजिए।
  4. इस आलू मसाला की छोटी-छोटी गोली बना लीजिए।
  5. एक बड़ी सी plastic की sheet फैला दीजिए।
  6. एक 12×12 inch की plastic की sheet भी ले लीजिए। 
  7. आलू की गोली‌ पर दोनों तरफ हल्का-हल्का सा mustard oil लगा दीजिए।
  8. अब उसे बड़ी plastic की sheet पर रख दीजिए।
  9. अब छोटी plastic sheet को भी गोलाकार shape में थोड़ा सा mustard oil लगाकर grease कर लीजिए।
  10. आलू की गोली पर छोटी plastic sheet रखकर, उस पर चकला रखकर press करके गोलाकार पापड़ बना लीजिए।
  11. फिर छोटी plastic sheet को धीरे-धीरे से गोली के ऊपर से हटा लीजिए।
  12. ऐसे ही सारे पापड़ बना लीजिए।
  13. फिर इन्हें धूप पर सूखने के लिए रख दीजिए। 
  14. जब पापड़ एक तरफ से सूख जाएंगे तो वो plastic sheet को छोड़ देंगे।
  15. तब इन्हें पलटकर दूसरी तरफ से भी सूखा लीजिए।
  16. दोनों तरफ से कड़क सूख जाने पर इसे airtight container में store कर के रख दीजिए।
इसे deep fry कर के आप होली के पकवानों की शान बढ़ाएं या tea time में serve करके इसका लुत्फ उठाएं।
Now crispy and crunchy all-time-favourite Aloo Papad is ready to serve.

चलिए, कुछ tips and tricks भी देख लेते हैं।

Tips and Tricks : 

  • लाल आलू लेने से perfect पापड़ बनते हैं, पर अगर आप को लाल आलू ना मिले, तो आप पुराने आलू ले सकते हैं।
  • आलू medium size के ही लीजिए, छोटे आलू का भर्ता थोड़ा गीला सा बनता है, तो पापड़ बनाना कठिन होता है।
  • आलू बड़े होने से वो अंदर से ज्यादा tight रहता है, तो पापड़ अच्छे से फैलता नहीं है।
  • आलू का भर्ता, गर्म-गर्म आलू से ही बनाना है। आप आलू को grate करके बना सकते हैं या मसल कर बना सकते हैं। 
  • अगर आप अकेले ही मसाला बना रहे हैं, तो दो-दो आलू छीलकर कर ही उसका भर्ता बनाते चलें। इससे भर्ता ज़्यादा smooth बनता है।
  • आलू में नमक, जीरा, मिर्च डालने के बाद जब पूरा मसाला ready हो जाएगा, तब वो ऐसा होना चाहिए कि वो हाथों में नहीं चिपकना चाहिए।
  • आलू का smooth paste ही आलू के पापड़ बनाने का key ingredient है, तो इसका अवश्य ध्यान रखें। 
  • यदि मसाला चिकना नहीं हुआ है, तो उसे हथेली से rub करते हुए चिकना अवश्य कर लें। 
  • आलू मसाले में फुटकी (आलू के छोटे छोटे दाने) रह जाने से पापड़ सूखने पर चिटकने लगते हैं। 
  • आप आलू का पापड़ तीन तरह से बना सकते हैं...
A. पहला जैसा हमने बताया है।
B. पहले छोटी plastic sheet में रखकर    बेल लें, फिर उसे बड़ी plastic sheet  पर transfer कर दें।
C. आप छोटी plastic sheet पर उंगली से press करते हुए गोली को बड़ा करते जाएं।
D. वैसे, आजकल पापड़ बनाने की machine भी आती है, आप उसकी मदद से आसानी से पापड़ बना सकते हैं।

  • आलू के पापड़ बहुत पतले और smooth texture के होते हैं, इसलिए जल्दी सूख जाते हैं, अतः यह ऐसे पापड़ हैं जो धूप की कमी में भी easily बन जाते हैं। 
  • अगर आप apartment setup में रहते हैं और धूप हल्की या नहीं आती है तो आप यह tip अब धूप मेरी मुट्ठी में अवश्य देख लीजिएगा, आप बहुत काम आएगी।
  • अगर आप को आलू के पापड़ व्रत के लिए बनाना है, तो नमक सेंधा डालिएगा और mustard oil की जगह groundnut oil ले सकते हैं।

तो चलिए ready हो जाइए, all-time-favourite Aloo Papad बनाने के लिए और होली के त्यौहार पर चार चांद लगा दीजिए।

Thursday, 21 March 2024

Recipe: Sago Papad

Hello friends,

आप से पिछले साल अब धूप मेरी मुट्ठी में के tips में पूछा था कि अगर आप को किसी तरह के पापड़ की recipe चाहिए तो हमें बता दीजिएगा।

तो हमें दो तरह के पापड़ की सबसे ज़्यादा request मिली है। एक तो सदाबहार आलू के पापड़ की, दूसरा साबूदाने के पापड़ की। 
साबूदाने के पापड़ देर से सूखते हैं तो इसकी recipe ही पहले share कर रहे हैं।
आज की यह recipe है तो साबूदाने के पापड़ की, लेकिन जब डालना है तो सोचा कुछ ऐसी recipe share करें, जिसकी recipe थोड़ी different and more tasty हो और थोड़ी unique भी, पर सबसे important, बिना झंझट के instantly prepare होने वाली होनी चाहिए।
इसलिए आज हम यह recipe लाएं हैं, अपनी माँ श्रीमती गीता लाल जी के खजाने से, जो कि इस segment में super expert हैं। 
उनके द्वारा बनाए गए पापड़, बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, सबको ही बहुत पसंद आते हैं। यह जितना crunchy होता है, उतना ही मुंह में घुल जाने वाला भी और इसके स्वाद का तो कहने ही क्या, पापड़ों से भरी पूरी plate खत्म हो जाएगी, पर इसे खाने वाले यही कहेंगे कि यह दिल मांगे more😊 


तो चलिए इसके preparation का method देख लेते हैं।

 साबूदाना पापड़




Ingredients :

  • Sago - 400 gm.
  • Potato - 200 gm.
  • Cumin seeds - 1½ tsp.
  • Salt - 1½ tsp. or according to your taste
  • Clarified butter (ghee) - 2 tsp.


Method :

  1. साबूदाना को overnight के लिए soak करने रख दीजिए।
  2. अगले दिन आलू को छीलकर अच्छे से धोकर, grate कर लीजिए।
  3. पानी में ½ tsp. नमक डाल दीजिए। अब grated potato को नमक के पानी में डाल दीजिए।
  4. एक heavy bottom का भगोना या pressure cooker ले‌ लीजिए, उसमें ½ litre पानी लेकर boil होने रख दीजिए। 
  5. पानी इतना होना चाहिए कि साबूदाना पूरी तरह से डूबा रहना चाहिए। अगर आप का साबूदाना ½ litre में ना डूबे तो पानी की quantity बढ़ा लीजिएगा।
  6. पानी में उबाल आ जाने पर उसमें भीगा हुआ साबूदाना, घिसे हुए आलू, नमक और जीरा, घी डालकर बराबर चलाते हुए medium flame पर पका लें।
  7. जब साबूदाना, white से transparent हो जाए, और घोल pouring consistency का हो जाए, gas burner off कर दीजिए।
  8. बर्तन ढककर 15-20 minutes के लिए रख दीजिए।
  9. अब एक plastic की sheet को धूप में फैला दीजिए।
  10. इस sheet पर tablespoon की help से इस घोल को डालकर थोड़ा सा फैला दीजिए, जिससे पापड़ पतले-पतले फैल जाए।
  11. अब इन्हें धूप में सूखने रख दीजिए। 4-6 घंटे बाद इसे पलट दीजिए। अलटते-पलटते हुए इन्हें दोनों तरफ से कड़क होने तक सुखा लीजिए।
  12. तेज़ धूप में यह पापड़ एक से दो दिन में सूख जाता है। धूप हल्की होने से 2½ दिन तक लग सकते हैं।
  13. अब इन्हें airtight container में रख दीजिए।

इसे पूरे साल भर के लिए आप store कर के रख सकते हैं।
इसे होली मिलन और tea time में fry करके serve कीजिए।
Now, crispy, crunchy and mouth-melting Sago Papad se ready to serve...
चलिए कुछ tips and tricks भी देख लेते हैं।


Tips and Tricks :

  • साबूदाना overnight ही soak करना है, जिससे एक-एक दाना अंदर तक soaked रहे। अच्छे से भीगा हुआ साबूदाना ही crunchy and juicy पापड़ बनाएगा। अन्यथा hard and chewy पापड़ बनेगा।
  • गर्म पानी में साबूदाना डालने से पापड़ जल्दी बनेगा, perfect बनेगा और चलाते समय उसके चिपकने और जलने की tendency कम रहेगी।
  • हाँ, घोल बनाते समय, अवश्य ही लगातार चलाते रहें, जिससे घोल नीचे से जले नहीं। पर यदि घोल बनाते समय थोड़ा जल गया है, तो उतना discard कर दीजिए।
  • आप आलू की quantity अपने according घटा- बढ़ा सकते हैं। 
  • इसमें साबूदाने के साथ आलू होने से ही यह ज़्यादा tasty and juicy बनता है।
  • यदि आप आलू के chips भी बनाते हैं, तो उसके पानी में भी आप साबूदाने के पापड़ बना सकते हैं। लेकिन उस समय नमक का अंदाज़ा ठीक रखिएगा। क्योंकि chips बनाते समय उसके पानी में भी नमक डाला जाता है। 
  • इस पापड़ का घोल बनाते समय थोड़ा-सा घी डाल‌ देने से पापड़ का घोल तली से चिपकता नहीं है, साथ ही taste enhance हो जाता है। पर यह पूरी तरह optional है, आप इसे avoid भी कर सकते हैं। 
  • घी की जगह थोड़ा-सा refined oil भी डाल सकते हैं। 
  • यह इतना tasty बनता है कि इसमें ऊपर से कोई भी मसाला डालने की requirement नहीं है, फिर भी अगर आप को चटपटा flavour पसंद है तो आप पापड़ को fry करके उस पर black pepper या पापड़ मसाला, sprinkle कर सकते हैं। 
  • अगर आप को साबूदाना पापड़ व्रत के लिए बनाना है, तो नमक सेंधा डालिएगा।
ना तो इसके घोल को बनाने में घंटों लगते हैं और ना फैलाने में, एक-एक पापड़ को बेलने का भी झंझट नहीं है...
तो बस झट-पट मस्त Sago Papad बना लीजिए और होली में अपने अड़ोस-पड़ोस के लोगों से different flavour की dish serve कीजिए... 

अगर आप apartment setup में रहते हैं तो यह tip अब धूप मेरी मुट्ठी में अवश्य देख लीजिएगा, आपके बहुत काम आएगी।

Wednesday, 20 March 2024

Article : एक appeal - होली पर

पिछले साल एक memory डाली थी, namely 'त्यौहार सिमट गए', जिसमें हमने government से एक appeal की थी कि हमेशा से ही बच्चों के final exam की dates, होली के आसपास ही रहती है, specially board examinations की, जिसके कारण बच्चे होली के त्यौहार का आनन्द पूरी तरह से नहीं ले पाते हैं। जबकि कोई भी त्यौहार हो, उसमें बच्चों को विशेष आनन्द आना चाहिए। 

फिर होली का त्यौहार तो होता ही है मस्ती, उत्साह और उमंग से परिपूर्ण... इसलिए बच्चों को हमेशा से ही यह त्यौहार अपनी ओर आकर्षित करता है।

लेकिन final exam की dates, होली के आसपास या बीच में होने के कारण, बच्चों को होली पर्व को हर्षोल्लास से मनाने के बजाए पढ़ना पड़ता था, जिससे त्यौहार की रौनक खत्म होती जा रही थी और त्यौहार नीरस होता जा रहा था।

हमने appeal की थी कि जब भारत हिन्दू साम्राज्य बनता जा रहा है, और सरकार हिंदूत्व की समर्थक हैं तो, उन्हें इस ओर ध्यान देना चाहिए कि बड़े तीज-त्यौहारों पर बच्चों के final exam की dates नहीं रहे, जिससे भारतीय संस्कृति और परंपरा सुचारू रूप से चल सके। 

हम धन्यवाद देना चाहेंगे, BJP government को, कि इस साल, किसी भी class के final exam की dates, होली के आसपास या बीच में नहीं पड़ी... यहां तक कि board examinations की dates भी नहीं। उम्मीद करेंगे कि सरकार ने जो कदम इस बार लिया है बच्चों के लिए, वह अब से हर साल क़ायम रहेगा। पर उसके लिए सरकार कौन सी होनी चाहिए, यह हमें देखना होगा...

सभी exams, होली से दस से पंद्रह दिन पहले ही खत्म हो गये हैं और आजकल बच्चों को एक लंबा vacation मिला हुआ है। इस कारण इस बार बच्चों में होली के त्यौहार का अलग ही उत्साह और उमंग नजर आ रहा है।

एक appeal - होली पर

अब एक appeal आप से भी है, कि जब BJP government ने बच्चों को विशेष अवसर दिया है, होली को हर्षोल्लास के साथ मनाए जाने का, तो हम सब भी यही कोशिश करें कि होली के त्यौहार को त्यौहार ही रहने दें।

मतलब long vacation समझकर घूमने जाने का program ना बनाएँ।

इस त्यौहार में उनके लिए खूब सारे पकवान बनाएँ, जैसे हमारे बचपन में हमारी माँ, दादी, चाची, बुआ, नानी, मामी, मौसी लोग बनाया करती थी। 

हम आपको Holi से related पूरे tab का link दे रहे हैं, इसमें आपको होली से संबंधित हमारी सभी posts मिल जाएँगी। इसमें आपको होली से जुड़ी हुई बहुत सी बातें, और recipes पता चल जाएँगी, साथ ही इसकी कहानियाँ और कविताएँ आपको entertain भी करेंगी। इसमें मौजूद अनेकों recipes से आप को अपनी मनपसंद recipes बनाने का idea भी मिल जाएगा : Holi-special tab

सभी dishes बहुत अच्छे से और easy way में बताई गई हैं। हम इस साल कुछ पापड़ों की easy and tasty recipes share करेंगे और आगे भी ऐसी ही  recipes share करते रहेंगे तो हमारे recipe segment से जुड़े रहिएगा...

Just for your information, घर के बने सामानों से त्यौहार में ज़्यादा रौनक आती है। उनमें किसी तरह की मिलावट नहीं रहती है... 

नहीं-नहीं, रहती है, मिलावट तो इसमें भी रहती है, पर प्यार और अपनेपन की 😊

इसलिए यह ज़्यादा healthy and tasty रहते हैं। ज़्यादा नहीं तो कुछ एक पकवान घर पर ज़रूर से बना लीजिए, जो आपको सबसे ज़्यादा easy लगे।

पर अगर आप को यह सब काम बहुत झंझट के लगते हैं, तो आप ही की सुविधा के लिए, बाज़ारों में यह सब easily available है, जहाँ से आप सब कुछ खरीद सकते हैं। 

जो भी आपको उचित लगे, वही करें, पर करें ज़रूर...

बच्चों के लिए खूब सारे रंग, पिचकारी, पानी की उचित व्यवस्था कीजिए।

पर जो सबसे ज़्यादा ज़रूरी है, वो है आपका अमूल्य समय, जिस पर उस दिन सबसे ज़्यादा अधिकार बच्चों का और आपके अपनों का ही है। उनके साथ अपना समय व्यतीत करें। 

Social media पर virtually नहीं बल्कि real time दें अपनों को अपना...

जिससे उन्हें एहसास हो कि त्यौहार जीवन के विशेष दिन होते हैं, इनका जीवन में विशेष महत्व है। तो इन्हें पूरी परंपरा और रीति-रिवाज़ से ही मनाना चाहिए, अपनी सुविधानुसार तोड़ना-मरोड़ना नहीं चाहिए।

बच्चों के साथ ही त्यौहारों को परंपरागत रूप से मनाने से हम अपने देश, संस्कृति और सभ्यता को भी मान देते हैं, जिसे देना हमारा फ़र्ज़ भी है और हमारा दायित्व भी। 

आप सभी को होली पर्व पर अभी से बहुत-बहुत बधाइयाँ, आशा है आप इस appeal का मान रखेंगे और अपने बच्चों का बहुत ध्यान रखेंगे और उन्हें अपना खूब सारा प्यार और समय देकर enjoy कराएंगे...

Tuesday, 19 March 2024

Tip : A Sustainable Holi

होली का उत्सव आने वाला है और अपने साथ लाने वाला है, रंग, उत्साह, उमंग और पानी की ठंडी-ठंडी बौछार...

लेकिन होली के आते ही कुछ 'so-called समाज सुधारक' पानी के अपव्यय पर भाषण देना शुरू कर देंगे और होली के त्यौहार को नीरस करने का पूर्ण प्रयास करेंगे। ऐसे लोगों को पानी की बर्बादी केवल होली में ही दिखाई देती है... पर क्या यह उचित है कि हिन्दूओं के प्रत्येक त्यौहार को किसी ना किसी बात का मुद्दा उठाकर नीरस कर दिया जाए? 

नहीं ना...

आज ऐसे ही लोगों के लिए, साथ ही उन लोगों के लिए भी जिन्हें होली का त्यौहार बहुत प्रिय होता है, हम बहुत अच्छा उपाय लेकर आए हैं...

जिससे पानी का अपव्यय भी कम होगा और त्यौहार का मज़ा भी दोगुना रहेगा। 

A Sustainable Holi 


तो चलिए, बात करते हैं उस उपाय की...

I. Saving water for Holi  :

इसके लिए सबसे पहले आपको मितव्ययिता अपनानी होगी। मतलब पानी तो बचाना है, मगर सिर्फ होली के दिन ही नहीं, बल्कि कुछ दिन पहले से पानी को मितव्ययिता से use करें। 

  1. Means अगर आप shower लेते हैं तो कुछ दिन पहले से shower लेना बंद कर दीजिए, क्योंकि shower लेने से बहुत ज्यादा पानी बर्बाद होता है। 
  2. आप अपने घर के नलों के पानी का pressure कम कर दीजिए। नल में pressure जितना ज़्यादा होगा, पानी उतना ही ज्यादा बर्बाद होगा।
  3. आप दाल, चावल, सब्ज़ियां, कपड़े आदि धोने में ध्यान रखिए कि उसका धुला हुआ पानी बह ना जाए। बल्कि आप उसी पानी से अपने bathroom को धो सकते हैं या उस पानी को पेड़-पौधों पर डालकर उसका सदुपयोग कर सकते हैं।


अब उपाय करते हैं, होली के दिन का...

II. Preserving water on the day of Holi/Dhulendi :

  1. उस दिन के लिए आप organic colours को use कीजिए। यह रंग आपकी skin के लिए भी अच्छा होता है, साथ ही इन रंगों को छुड़ाने के लिए आप को कम पानी की आवश्यकता होगी। 
  2. एक-दूसरे पर पानी फेंकने में ध्यान रखिए कि उसकी मात्रा बहुत अधिक ना हो। आप मस्ती के लिए पानी use कीजिए पर बर्बादी के लिए नहीं... 
  3. जहां पर खेलने के लिए पानी भर रहे हों, वहां पानी भर जाने के बाद बहते हुए रहने मत दीजिए, बल्कि बार बार नल को बंद करने और खोलने का काम करते रहें।
  4. रंग का उत्सव सदैव ऐसी जगह खेलें, जहां कुछ दूरी पर पेड़-पौधे भी लगे हों, जिससे रंग खेलने के दौरान use होने वाला पानी बर्बाद ना हो, वो पेड़-पौधों में चला जाए।


मतलब इन उपायों से जब हम पानी बचाएंगे तो हम इसी पानी को होली में उपयोग में ला सकेंगे। 

आप कहेंगे कि पानी का अपव्यय तो अभी भी हुआ?

बिल्कुल हुआ, पर, उतना नहीं जितना हम हमेशा करते हैं। और हमने उसके लिए पानी की बचत भी पहले से की थी।

इस तरह से पानी भी बचेगा और त्यौहार भी उत्साह से सजेगा।

अरे हाँ, अब यह उपाय उनके लिए है, जिनके घरों में पानी की बहुत ज्यादा crisis रहती है...

III. Playing Holi/Dhulendi in areas which face deficiency of water :

होली फागुन का त्यौहार है, इसमें फूलों की बहार रहती है। पलाश और टेसू के फूल तो विशेष रूप से होली में ही आते हैं और इनका उपयोग तो भगवान श्रीकृष्ण जी के समय से हो रहा है। तो बस, आप पानी के अभाव में पलाश और टेसू के पुष्पों के साथ ही अन्य फूलों को भी अपने रंगों से replace कर दीजिए।


नहीं, माननी है तो बस एक बात, चाहे जो भी हो, हम होली का त्यौहार ज़रूर मनाएंगे, वो भी पूरे उत्साह, उमंग और खुशियों के साथ... उसे किसी भी तरह से नीरस नहीं होने देंगे।

तो बोलो सा रा रा रा रा रा रा रा रा...

आप सभी को होली पर्व की advance में हार्दिक शुभकामनाएं 💐💦

Wednesday, 8 March 2023

Poem: होली और नारी

 होली और नारी 



बाबू जी सोच रहे सिर को खुजलाए,

श्रीहरि को इस बरस सूझी क्या?

जो होली और महिला दिवस दिए मिलाए, 

आखिर किस तरह से दोनों में एक गुण समाए? 


हम बोले उनसे, 

सोचकर देखें तो एक बार।

नारी में है रंग हज़ार,

और होली है रंगों का त्यौहार।  


बाल रूप के रंग से ही,

कन्या सबको भाती है।

उसके इस रुप में,

वो देवी नजर आती है।


यौवन के उसके रंग में,

दुनिया रंग जाती सारी है।

अधूरी लगती है जिंदगी,

अगर मिलती नहीं नारी है।


मां के रंग की तो,

छटा ही अजब निराली है। 

मां के साये बिन तो,

सृष्टि ही पूरी खाली है।




जिस घर होली में,

पत्नी, सलहज या ना हो साली।

तो लाख रंग बिखरे रहे धरा पर,

होली  लगती नहीं मतवाली।




तुरंत समझ गये बाबू जी,

लाख पते की बात।

होली भली लगे तबहिं

जब नारी रहती साथ। 



आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं 💐🎉🎨🙏🏻

Happy Women's Day💃

Tuesday, 7 March 2023

Tip : Pre - Holi Skin Care

Holi का त्यौहार, रंगों और उमंगों का त्यौहार है। लेकिन आज कल त्यौहार में वो रौनक और उत्साह नहीं रह गया है, जो कभी पहले देखने को मिलता था।

इसकी बहुत सारी वजहें है, लेकिन सबसे बड़ी वजह है, मिलावट और chemicals वाले रंग और गुलाल, जिसके कारण skin में itching, irritation and pimples हो जाते हैं।

पहले कुछ खराब quality के रंगों को छोड़ कर सभी रंग और गुलाल, बहुत अच्छी quality के ही मिलते थे।

लेकिन अब तो बिना मिलावट और chemicals के गुलाल भी मिलना मुश्किल है। 

होली में एक समस्या और होती है कि आप के herbal colour लाने से नहीं बल्कि दूसरे लोगों के herbal colour लाने से आप सुरक्षित रहेंगे, क्योंकि आपके चेहरे पर तो वही रंग लगेगा, जो दूसरों के पास होगा।

पर कर क्या सकते हैं? हर कोई तो आपके कहने से herbal colours लाएगा नहीं...

क्यों नहीं कर सकते हैं... आप ने सुना होगा अपनी सुरक्षा, अपने हाथ... तो बस इसी सोच के साथ, आज यह tip share कर रहे हैं।

जिससे होली में आप सुरक्षित भी रहें और त्यौहार के हर क्षण का आनन्द भी ले सकें...

Pre - Holi Skin Care


चलिए जानते हैं कि ऐसा क्या करना है, जिससे हम सुरक्षित रहेंगे...


1. Ice cube :

अपनी skin पर कुछ भी लगाने से पहले 10 min. Ice massage करें, क्योंकि ice में सभी खुले छिद्रों को बंद करने की शक्ति होती है। एक बार बर्फ लगाने के बाद Oil or sunscreen ज़रूर लगाएं। ऐसा करने से आपकी त्वचा पर होने वाले मुंहासों को रोका जा सकता है।

अगर आप की तबीयत ठीक नहीं है या आपको ठंड लग रही है तो, ice massage avoid कर सकते हैं।


2. Moisturizer :

होली खेलने जाने से पहले सबसे important बात कि अपनी त्वचा को moisturized या hydrated करें। यह आपकी skin को chemical वाले गुलाल से बचाने में मदद करेगा। Skin को hydrate करने के लिए अच्छे से moisturizer का इस्तेमाल करें।


3. Hydration :

दिन भर पानी, juice, glucose आदि पीते रहें। पानी की कमी से त्वचा dry हो सकती है और sunburn हो सकता है। Dry skin रंग के साथ मिलकर होली के बाद dull लगने लगती है और skin का glow चला जाता है।


4. Nailpolish/Olive oil :

होली खेलने जाने से पहले अपने Nails पर dark nailpolish लगा लें। Nailpolish लगे होने से आप के nails chemical वाले रंगों से बच जाएंगे।

अगर आप nailpolish avoid करना चाहते हैं तो अपने नाखूनों पर थोड़ा olive oil रगड़ लें, क्योंकि यह एक ढाल का कार्य करेगा और रंगों को आसानी से smudge नहीं होने देगा।


5. Vaseline :

अपने होठों पर थोड़ी सी Vaseline का प्रयोग अवश्य करें क्योंकि Vaseline का texture गाढ़ा होता है तो यह अधिक समय तक टिकी रहती है। इसके अलावा, आप गर्दन, कान के पीछे और उंगलियों के बीच में भी इसे लगा सकते हैं। यह ऐसी जगहें हैं जहां रंग लगने के बाद छुड़ाना मुश्किल होता है। इसके लगे होने से रंग चिपकेगा नहीं और बहुत आसानी से छूट जाएगा।

अगर आप के lips फटे हुए हैं तो होली के कुछ दिन पहले से ही lip balm लगाना शुरू कर देना चाहिए जिससे आप के होंठ होली आने से पहले ही smooth हो जाए, क्योंकि फटे हुए होंठों से रंग छुड़ाना बहुत कष्टकर होता है।


6. Sunscreen :

होली में रंगों से खेलने में हमें लगातार धूप में ही रहना होता है।

और आज कल लोग, tanning को लेकर बहुत sensitive रहते हैं। अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो  tanning से बचने के लिए, रंग खेलने जाने से पहले waterproof solar moisturizer लगाएं, क्योंकि यह आपकी skin को काफी हद तक सुरक्षित रख सकता है।


7. Coconut oil :

इस tip को तो बिल्कुल भी miss न करें। रंग खेलने जाने से पहले coconut oil or mustard oil से hair massage अवश्य करें। इससे आप के बाल, dull और damage होने से बच जाएंगे।


8. Full-sleeve cotton clothes :

होली mainly outdoor festival है, इसलिए कोशिश करें कि आप full-sleeves के cotton के कपड़े पहनें, यह न केवल आपकी skin को रंग के नुकसान से बचाने में मदद करता है, बल्कि धूप के सीधे संपर्क से भी बचाता है जो आपकी त्वचा को प्रभावित कर सकता है। Cotton clothes, comfortable भी होते हैं, जल्दी सूख भी जाते हैं, तो आप के भीगे रहने से ज्यादा ठंड भी नहीं लगेगी। वहीं synthetic and tight कपड़े रंग के संपर्क में आने पर skin पर allergy का कारण बन सकते हैं।


तो होली खेलने से पहले अगर आप इन tips को follow कर लेंगे तो आप की skin, lips, nails and hair, सब safe रहेंगे। 

होली का रंगोत्सव होने के बाद, रंगों को छुड़ाने के लिए Facewash or soap की अपेक्षा आप अगर उबटन का इस्तेमाल करें तो यह आपकी skin को नुकसान नहीं पहुंचाएगा। 

साथ ही एक बात जो सबसे ज्यादा ज़रूरी है, वो यह कि सारा रंग एक ही दिन में निकाल देने के कारण बहुत ज्यादा rubbing भी आपकी skin damage का प्रमुख कारण है।

थोड़ा रंग छुड़ा दीजिए, बाकी सारा रंग, समय के साथ अपने आप साफ हो जाता है।

वैसे भी कुछ दिन, अगर अपनों का लगाया रंग लगा भी है तो क्या? उसका भी आनन्द लीजिए।

होली भी कहां साल भर से पहले दुबारा आएगी, और ना सालभर से पहले आएगा यह दिन...


So let's enjoy 🥳🥳🥳

आप सभी को होलिका दहन की हार्दिक शुभकामनाएं 💐🎉🙏🏻