Showing posts with label Invited Creations. Show all posts
Showing posts with label Invited Creations. Show all posts

Monday, 11 May 2026

Poem : चली थी जहाँ से

आज आप सब के साथ मुझे भोपाल के मेजर नितिन तिवारी जी की कविता को साझा करते हुए अपार प्रसन्नता हो रही है।

आज नितिन जी की लेखनी ने प्रेम-रस बरसाया है, कुछ ही शब्दों का उपयोग कर के बहुत ही खूबसूरत कविता लिखी है।

आइए, इसका आनन्द लेते हैं…

चली थी जहाँ से


चली थी जहां से,

वहीं फिर चली।

कली-सी महकती,

है कविता कली।

खिला रूप यौवन,

चमन में खिला।

चली मिलने मोहन,

से राधा चली।

कई ठांव आए,

गए भी कई।

चली जो थी कहने,

वो कहने चली।

चली थी जहां से,

वहीं फिर चली…

Thursday, 26 March 2026

India's Heritage : मंत्रों से बढ़कर तेरा नाम

आज आप सब के साथ मुझे उत्तराखंड के भुवन चंद्र अवस्थी जी के विचार को साझा करते हुए अपार प्रसन्नता हो रही है।

भुवन जी बहुत ही ज्ञानी, जीवन्त, प्रेरणादायक और आध्यात्मिक भाव के प्राणी है। 

उनके साथ विचार-विमर्श के पश्चात्, बहुत से प्रश्न उठे, जिनका सिलसिलेवार तरीके से अध्ययन किया।

जो पता चला, वो बहुत ही रोचक व अंतरात्मा को शांति प्रदान करने वाला था, तो सोचा उसे ही साझा करें।

आज के India's Heritage segment में वही, जिस सत्य के बिना हम नहीं।

हम हिन्दुओं में राम नाम का बहुत महत्व है, पर क्यों? क्यों भारत में लोग एक-दूसरे से मिलने पर good morning, सुप्रभात इत्यादि न कह कर राम-राम कहा करते थे? और क्यों एक बार राम न कह कर दो बार राम नाम दोहराते थे, अर्थात् राम न कहकर राम-राम कहा करते थे।

आज इसी को बताने जा रहे हैं, उनके शब्दों में...

मंत्रों से बढ़कर तेरा नाम


राम-राम का महत्व :

सबसे पहले तो good morning या सुप्रभात कहने से आप एक-दूसरे के उस सुबह के शुभ होने की कामना करते हैं। पर पता है, जब आप राम-राम कहते हैं तो क्या होता है?

राम नाम की अगर मात्रा का जोड़ करते हैं तो: 

र्+अ+म् = 54 आता है।

दो बार अगर राम बोलते हैं तो:

54+54 = 108 

मतलब आप दो बार राम नाम बोलते हैं तो उसका प्रभाव 108 बार जाप करने के बराबर हो जाता है।

जब आप राम-राम कहते हैं तो प्रतिउत्तर में अगला भी राम-राम कहता है, अर्थात् उसने भी 108 बार राम नाम का जाप कर लिया।


108 बार मंत्र-जाप की परंपरा :

मंत्र जाप जब भी किया जाता है तो 108 बार जाप करने की परंपरा है, पर क्यों? यह भी देख लेते हैं।

जप (मंत्रों का जाप) 108 बार करने की परंपरा के पीछे कई धार्मिक और आध्यात्मिक कारण हैं। माना जाता है कि 108 बार जाप करने से ब्रह्मांड के कंपन के साथ सामंजस्य स्थापित करने में मदद मिलती है, और यह संख्या पवित्र मानी जाती है।


इसके प्रमुख कारण :

  • वैदिक संस्कृति में महत्व- 108 को वैदिक संस्कृति में पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। 
  • सूर्य, चंद्रमा व पृथ्वी का संबंध- सूर्य और चंद्रमा का पृथ्वी से औसत दूरी उनके व्यास का 108 गुना है। 
  • ऊर्जा रेखाएँ- 108 ऊर्जा रेखाएँ हृदय चक्र में मिलती हैं, जो जीवन का केंद्र है।
  • माला में मोती- हिंदू मालाओं में 108 मनके होते हैं, जो 108 बार जाप करने का प्रतीक हैं। 
  • श्वासों की संख्या- कुछ लोगों का मानना है कि 108 संख्या 24 घंटे में मनुष्य द्वारा ली जाने वाली 21,600 सांसों से संबंधित है। 
  • नक्षत्र और चरण- 27 नक्षत्रों और प्रत्येक के 4 चरणों को मिलाकर 108 बनता है। 
  • ज्योतिषीय महत्व- 12 राशियाँ और 9 ग्रहों का गुणनफल 108 होता है। 
  • ब्रह्मांड का प्रतीक- 108 संख्या ब्रह्मांड की संपूर्णता और गति का प्रतिनिधित्व करती है।

संक्षेप में, 108 बार जाप करने से आध्यात्मिक लाभ, ऊर्जा का प्रवाह, और ब्रह्मांड के साथ संबंध स्थापित करने में मदद मिलती है।


अर्थात् आपके good morning या सुप्रभात कहने से आप एक-दूसरे के लिए केवल उस सुबह को शुभ बनाते हैं, लेकिन राम-राम कहकर, आप केवल एक सुबह, एक दिन को नहीं बल्कि उसके सम्पूर्ण जीवन को संपूर्णता देकर शुभ बनाते हैं और यदि सब प्रत्येक दिन राम-राम कहते हैं, तो उनका मानव जन्म लेना सार्थक हो जाता है। 

सोचिए कितना सहज और सरल है, इस विधि से प्रभू की आराधना करना, जिसमें एक निमिष मात्र पल में आपने 108 बार का जाप कर लिया और बाकी जितनों ने उसका उत्तर दिया, उन सभी ने भी 108 बार का मंत्र जाप कर लिया।

बस यही है राम नाम की महिमा, और इसलिए कहा भी गया है:

“मंत्रों से बढ़कर तेरा नाम, 

जय श्री राम, जय श्री राम, 

जय श्री राम, राजा राम!”

इतनी सहज, सुलभ, सरल और प्रभावशाली संस्कृति है, भारतीय संस्कृति और सभ्यता, और बस यही कारण है कि भारतीय संस्कृति को सर्वोपरि माना जाता है।

आप सभी को राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

जय श्री राम!

भुवन जी, आपका विशेष धन्यवाद।


Friday, 14 November 2025

Poem : A Child's Privileged Right- 14 November

On the occasion of Children's Day, a little girl, Sanvi Mehra, has expressed her feelings about this special day. The poem portrays how the innocent and cute giggles and smiles of children make the adults feel nostalgic and seem as if they have once again entered into the phase of childhood. 

A Child's Privileged Right- 14 November

Nehru's pride, shine and affection, still showers - the perplexing question strikes the mind.

This makes a layman entangle in the grape wines to find.

But listen, the solution is itty-bitty easy.

The answer derives - the scent of children's day is quite round the corner, and breezy.

Just like Bapu, the second father of munchkins-unlike nation.

Nehru's soul and blood flows in this occasion.

The hilarious giggles, cute conversations and innocence makes a juxtaposition in the mundane surrounding.

Where an elder's heart melts by seeing an inner and past memory bounding.

The merry 24 hours where children are pampered.

Our India's next generation, “The children” say it aloud with proud, while no resource being hampered.

Let's howl and roar “A joyous children day!”
Which gives pupils a new, bright rise and shine like a dawn's ray.


Thursday, 25 September 2025

Recipes : पेठा पनीर की खीर

आज नवरात्रि की चतुर्थी है, इस शुभ अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏🏻

नवरात्रि में माता रानी को विभिन्न व्यंजनों का भोग लगाया जाता है।

ऐसे पावन पर्व के लिए आज आप सब के साथ मुझे रायपुर, छत्तीसगढ़ की मंजू  सरावगी मंजरी जी द्वारा भेजी हुई recipe को साझा करते हुए अपार प्रसन्नता हो रही है।

पेठा पनीर की खीर


(I) Ingredients :

  • Milk - 1 litre
  • Ash gourd (Petha) - 200 grams
  • Cottage cheese (Paneer) - 50 grams
  • Cardamom powder - 1 teaspoon
  • Milk powder - 4 tablespoons 
  • Almonds - 7 to 8
  • Pistachios - 7 to 8
  • Cashews - 10 to 12
  • Parts of foxnut - 10 to 15


(II) Method :

  1. 1 litre दूध को gas पर रखें। धीमी आँच पर उसे ¾ हो जाने तक पकाएँ।
  2. इसी बीच पेठा को दो हिस्सों में बांट लें। आधे पेठे को कद्दूकस कर लें और आधे  पेठे को थोड़े-छोटे टुकड़े कर ले।
  3. अब जो दूध gas पर रखा है, गर्म होने पर उसमें 4 tbsp. milk powder डालें और गाढ़ा होने दें।
  4. फिर उसमें कद्दूकस किया हुआ पेठा, कटा हुआ पेठा और बारीक कटा हुआ पनीर डाल दें।
  5. फिर से थोड़ी देर उबालें, जब तक कि वह पेठा नरम ना हो जाए।
  6. अब इसमें इलायची powder, और थोड़े बारीक कटे मेवे डालकर एक बार अच्छे से चला दें।
  7. खीर को ठंडा कर लें और ठंडा होने के बाद उसे बचे हुए बारीक कटे हुए मेवों से सजा के परोसे।


Disclaimer :
The opinions shared in this post are the personal views of the writer. It is not necessary that the thoughts/advices reflect the thoughts of this blog (Shades of Life). Errors (if any) in this post are of the writer and the blog shall not be responsible for them.

Friday, 5 September 2025

Poem : Teacher - A Gift of God

On this occasion of Teacher's Day, a little girl, Kashika Srivastava has expressed her feelings towards her teachers through this poem. Let's see what are the emotions of the young generation towards its teachers…

Teacher - A Gift of God


This poem is dedicated, to the teacher god gifted.

The Teacher is a creature, who designs our future.


They want us to be focused and disciplined,

So that each topic of life can be explained.


Two people are always happy on our success,

Our parents and the teacher already addressed.


The teachers' efforts are responsible,

To design our future best suitable.


Teachers are constant in pursuit,

For shaping our future best suit.


On this teacher's day I owe,

The way of teaching they do.


Happy Teacher's Day 🎉🎉

Monday, 7 July 2025

Poem : अखबारों से बंद दरवाजा

आज आप सब के साथ मुझे दरभंगा, बिहार की शुभ्रा संतोष जी की कविता को साझा करते हुए अपार प्रसन्नता हो रही है।

शुभ्रा जी एक मंझी हुई कवयित्री है, बहुत से मंच में उनकी कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं।

तो आइए, उनकी कविता का आनंद लेते हैं।

अखबारों से बंद दरवाज़ा


एकबार फिर से आओ

कूंजी घुमा के देखें

 बंद दरवाज़े की अनदेखी

परतों को खोलें।


 सदियों से

दुनियां का स्वरूप 

 ख़बरें जो 

गढ़ रहीं

उस सोच की चादर के

सिलवटों को झटकें।

  

स्याह रंग के कहकरे 

दीमको के घर बने

जेहन के दरवाज़े

घिस घिस कर

खोखले हुए।


झटक कर धूल सारी

आहिस्ते आहिस्ते

अंदर के इंसान को 

 एकबारगी टटोलें।


 निकल कर बासी खबरों 

 के दायरों से 

दरवाज़े के सांकल को 

पुरजोर से खोलें।


पढ़ रहे जो या समझ रहें जो 

 दुनिया को आज-कल

दरवाज़े के उस तरफ 

कोई और ही 

दुनिया आपकों दिखें।


क्या पता 

कोई और ही 

हवा चल रही हो वहां।

क्या पता

कोई और ही 

दुनियां पल रही हो वहां। 



Disclaimer :

इस कविता में व्यक्त की गई राय लेखिका के व्यक्तिगत विचार हैं। जरूरी नहीं कि वे विचार या राय Shades of Life के विचारों को प्रतिबिंबित करते हों। कोई भी चूक या त्रुटियां लेखक की हैं और Shades of Life उसके लिए कोई दायित्व या जिम्मेदारी नहीं रखता है।

Thursday, 5 September 2024

Poem: गुरु ईश्वर समान

कैसा गजब संयोग है कि गुरु दिवस, गुरुवार को...

वैसे तो हर दिन का अपना विशेष स्थान है और अपना अलग महत्व, पर कोई विशेष हो तो उसे गुरु (जिसका एक अर्थ बड़ा या  महान भी होता है) कह दिया जाता है।

गुरुवार को गुरुवार कहने का एक तात्पर्य यह भी है कि, यह दिन जगत को संचालित करने वाले ईश्वर विष्णु जी को समर्पित है। 

उसी तरह जीवन में हर रिश्ते का अपना विशेष स्थान और महत्व होता है, पर उन सबमें गुरु (शिक्षक) को ईश्वर के समान स्थान प्रदान किया गया है।

आज उसी भाव को हमारे प्यारे से बेटे अद्वय ने अपनी कविता के माध्यम से शब्दों में पिरोया है। तो सोचा कि आज उसे ही साझा किया जाए।

उसके साथ ही उसके सभी शिक्षकों को, अपने सभी शिक्षकों को या यूं कहें कि, जो भी शिक्षण का कार्य कर रहे हैं, उन सभी शिक्षकों को कोटि कोटि धन्यवाद  🙏🏻 

क्योंकि दुनिया में जो भी शिक्षा देने का कार्य कर रहा है, पूरा समाज उन सभी का आभारी हैं। 

क्योंकि शिक्षक हैं तो, सम्पन्नता है, प्रसन्नता, है, सौभाग्य है, अनुराग है, वो हैं, इसलिए ही सबका अस्तित्व है। 

एक बार फिर से कोटि कोटि आभार 🙏🏻 

आप सभी अद्वय की कविता का आनन्द लें और उसे अपना आशीर्वाद प्रदान करें 🙏🏻😊

 गुरु ईश्वर समान



जब बच्चे होते हैं छोटे,

पर उनकी जिज्ञासा हो बड़ी।

तब शिक्षिकाएँ ही तो होती हैं,

उनके उत्तरों के लिए खड़ी।


जब बच्चों को पुस्तकों का, 

कुछ भी समझ न आया।

तब अध्यापक ही तो थे,

जिन्होंने सब कुछ सिखाया।


जब बच्चे का दिल टूटे,

और बिखर जाएं आशाएँ।

तब शिक्षक प्रोत्साहित कर,

उनको मंजिल तक पहुंचाएंँ।


यदि होते न गुरु द्रोण,

तो क्या होता अर्जुन तीरंदाज?

यदि होते न गुरु ब्रह्मा,

तो क्या होता यह समाज?


हो कोई महाज्ञानी,

या एक साधारण इंसान।

सबका मानना एक ही,

गुरु है ईश्वर समान।


अद्वय सहाय


🙏🏻 गुरु दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏻 

📚 Happy Teacher's Day 🎓

Tuesday, 16 April 2024

Recipe: Kuttu ki Kachori

आज नवरात्र की अष्टमी है। मां गौरी का पवित्र दिन, आज के दिन बहुत लोग व्रत रखते हैं। वो भी जो नौ दिन तक व्रत रखते हैं और वो भी जो पहला और आखिरी रखते हैं।

तो सोचा, आप सबके लिए व्रत की ही कोई dish share की जाए।

ऐसे में रश्मि जी, जो कि व्रत के एक से बढ़कर एक पकवान बनाती हैं, उनकी ही एक recipe साझा कर रहे हैं।

कुट्टू के आटे की कचौड़ी....

बहुत से लोग कहेंगे कि यह तो हमें भी आती है, तो कोई कहेगा कि अरे उसमें बहुत झंझट है, तो कुछ बोलेंगे कि इतना घी-तेल हम नहीं खाते हैं...

बिल्कुल सही कहा आप सब ने, हमें भी यही लगता था, पर जब उन्होंने सामने ही बना कर taste कराई तो सारी धारणा धरी की धरी रह गई।

आप एक बार पूरी recipe देख लीजिए, बहुत ही आसानी से बन रही थी। और taste की guarantee हमारी... Soft and crisp combination बहुत ही कमाल का आता है।

तो चलिए झट-पट से recipe share कर देते हैं।

कुट्टू की कचौड़ी

Ingredients :

  • Buckwheat flour - 1 cup
  • Boiled potato - 2 medium size
  • Rock salt - ¼ tsp. or as per taste
  • Coriander leaves - 6 to 8 twigs 
  • Green chilli - 2 
  • Clarified butter (ghee) - for frying 


Method :

  1. Boiled potato को अच्छे से mash कर लीजिए।
  2. धनिया पत्ती और हरी मिर्च को finely chop कर लीजिए।
  3. अब आलू में कुट्टू का आटा, नमक, हरी धनिया और मिर्च को अच्छे से मिलाकर dough prepare कर लीजिए।
  4. अब इन की छोटी-छोटी लोई तोड़ लीजिए।
  5. अब हथेली पर थोड़ा-थोड़ा घी लगाते हुए लोई से छोटी-छोटी सी कचौड़ी बना लीजिए।
  6. एक wok लीजिए, उसमें घी डाल लीजिए।
  7. जब घी गर्म हो जाए तो उसमें दो कचौड़ी डाल दीजिए।
  8. अब कचौड़ी पर थोड़ा-थोड़ा घी डालते जाएं, जिससे वो तलकर फूल जाए। 
  9. अब उसको पलट दें और दूसरी तरफ से भी तल लें। 
  10. जब कचौड़ी दोनों तरफ से हल्की-हल्की सी तल जाए, तो तेज आंच करके सुनहरा होने तक तल लें।


गरमागरम खस्ता करारी कुट्टू के आटे की कचौड़ी तैयार है। आप इसे चटनी, दही और पनीर या आलू की सब्जी के साथ serve कर सकते हैं।

वैसे तो गरमागरम कचौड़ी अपने आप में complete है, इसलिए अगर आप उसे ऐसे ही खाना चाहें तो भी बढ़िया लगेगी।


Tips and tricks :

  1. आलूओं को गर्म ही छीलकर mash कर लें। भर्ता जितना smooth होगा, कचौड़ी उतनी easily फूलेगी।
  2. जितना आलू quantity wise भर्ता बनाने के बाद हो जाए, उतना ही कुट्टू का आटा लेना है।
  3. दोनों का ratio equal होने के कारण बिना भरी कचौड़ी होने के बाद भी taste and texture कचौड़ी जैसा आता है। 
  4. आलू ज्यादा होने से घी ज्यादा soak होगा और आटा ज्यादा होने से कचौड़ी कड़ी बनेगी और उसमें आटे का flavour ज्यादा आएगा।
  5. इस तरह से बनाने से कचौड़ी घी भी कम soak करती है। और पूरी कचौड़ी में taste भी एकसार रहता है।
  6. कचौड़ी का dough prepare करते समय ध्यान रखिएगा कि dough ऐसा होना चाहिए कि हाथ पर बहुत चिपके भी नहीं और ना ही ऐसा हो कि bind ही ना हो।
  7. अगर bind ना हो तो, थोड़ा-थोड़ा पानी छींटते हुए आटा गूंथना है।
  8. कुट्टू का आटा बहुत जल्दी गीला होता है, इसलिए पानी अंदाज़ से ही डालें।
  9. धनिया पत्ती और हरी मिर्च भी महीन ही काटें।‌ ज्यादा बड़ी होने से कचौड़ी फूट जाएगी, तो वो बहुत ज्यादा घी soak कर लेगी। 
  10. कचौड़ी बनाने में एक बात का ध्यान रखिएगा कि कचौड़ी एक जैसी होनी चाहिए, कहीं से पतली, कहीं से मोटी नहीं होनी चाहिए। वरना कचौड़ी फूलेगी नहीं।
  11. कचौड़ी को medium flame पर ही तलनी है और सुनहरा high flame पर करना है।
  12. मतलब हर बार कचौड़ी slow flame पर डालनी है, फिर flame medium कर लेनी है और फिर तेज़।
  13. तो flame का right combination, perfect कचौड़ी बनाने का key ingredient है।

Friday, 22 March 2024

Recipe: Aloo Papad

जैसा कि आप को बताया था कि इस बार आलू पापड़ और साबूदाना पापड़ बनाने की request बहुत ज्यादा आई थी।

आप को साबूदाने के पापड़ की recipe कल share कर दी थी, जिसे लोग बहुत पसंद भी कर रहे हैं।

आज हम, आलू के पापड़ की जो recipe share कर रहे हैं, वो प्रयागराज से श्रीमती रश्मि श्रीवास्तव जी के खजाने से है।

इन्हें आलू के पापड़ बनाने में महारत हासिल है, अतः इनके experience का benefit भी आपको मिल जाएगा और आपका आलू का पापड़ एकदम perfect बनेगा।

चलिए इसकी झट-पट से recipe देख लेते हैं।

आलू पापड


Ingredients : 

  • Red potato - 1 kg.
  • Salt - 1 tbsp. / as per your taste 
  • Cumin seeds - 1½ tsp.
  • Chilli flakes - 1½ tsp.
  • Mustard oil - for greasing


Method : 

  1. आलू को 2 high flame पर 1 sim flame पर whistle दे दीजिए।
  2. आलुओं को गर्म-गर्म ही छीलकर महीन और चिकना भर्ता बना लें।
  3. अब इसमें नमक, मिर्च और जीरा डालकर अच्छे से mix कर लीजिए।
  4. इस आलू मसाला की छोटी-छोटी गोली बना लीजिए।
  5. एक बड़ी सी plastic की sheet फैला दीजिए।
  6. एक 12×12 inch की plastic की sheet भी ले लीजिए। 
  7. आलू की गोली‌ पर दोनों तरफ हल्का-हल्का सा mustard oil लगा दीजिए।
  8. अब उसे बड़ी plastic की sheet पर रख दीजिए।
  9. अब छोटी plastic sheet को भी गोलाकार shape में थोड़ा सा mustard oil लगाकर grease कर लीजिए।
  10. आलू की गोली पर छोटी plastic sheet रखकर, उस पर चकला रखकर press करके गोलाकार पापड़ बना लीजिए।
  11. फिर छोटी plastic sheet को धीरे-धीरे से गोली के ऊपर से हटा लीजिए।
  12. ऐसे ही सारे पापड़ बना लीजिए।
  13. फिर इन्हें धूप पर सूखने के लिए रख दीजिए। 
  14. जब पापड़ एक तरफ से सूख जाएंगे तो वो plastic sheet को छोड़ देंगे।
  15. तब इन्हें पलटकर दूसरी तरफ से भी सूखा लीजिए।
  16. दोनों तरफ से कड़क सूख जाने पर इसे airtight container में store कर के रख दीजिए।
इसे deep fry कर के आप होली के पकवानों की शान बढ़ाएं या tea time में serve करके इसका लुत्फ उठाएं।
Now crispy and crunchy all-time-favourite Aloo Papad is ready to serve.

चलिए, कुछ tips and tricks भी देख लेते हैं।

Tips and Tricks : 

  • लाल आलू लेने से perfect पापड़ बनते हैं, पर अगर आप को लाल आलू ना मिले, तो आप पुराने आलू ले सकते हैं।
  • आलू medium size के ही लीजिए, छोटे आलू का भर्ता थोड़ा गीला सा बनता है, तो पापड़ बनाना कठिन होता है।
  • आलू बड़े होने से वो अंदर से ज्यादा tight रहता है, तो पापड़ अच्छे से फैलता नहीं है।
  • आलू का भर्ता, गर्म-गर्म आलू से ही बनाना है। आप आलू को grate करके बना सकते हैं या मसल कर बना सकते हैं। 
  • अगर आप अकेले ही मसाला बना रहे हैं, तो दो-दो आलू छीलकर कर ही उसका भर्ता बनाते चलें। इससे भर्ता ज़्यादा smooth बनता है।
  • आलू में नमक, जीरा, मिर्च डालने के बाद जब पूरा मसाला ready हो जाएगा, तब वो ऐसा होना चाहिए कि वो हाथों में नहीं चिपकना चाहिए।
  • आलू का smooth paste ही आलू के पापड़ बनाने का key ingredient है, तो इसका अवश्य ध्यान रखें। 
  • यदि मसाला चिकना नहीं हुआ है, तो उसे हथेली से rub करते हुए चिकना अवश्य कर लें। 
  • आलू मसाले में फुटकी (आलू के छोटे छोटे दाने) रह जाने से पापड़ सूखने पर चिटकने लगते हैं। 
  • आप आलू का पापड़ तीन तरह से बना सकते हैं...
A. पहला जैसा हमने बताया है।
B. पहले छोटी plastic sheet में रखकर    बेल लें, फिर उसे बड़ी plastic sheet  पर transfer कर दें।
C. आप छोटी plastic sheet पर उंगली से press करते हुए गोली को बड़ा करते जाएं।
D. वैसे, आजकल पापड़ बनाने की machine भी आती है, आप उसकी मदद से आसानी से पापड़ बना सकते हैं।

  • आलू के पापड़ बहुत पतले और smooth texture के होते हैं, इसलिए जल्दी सूख जाते हैं, अतः यह ऐसे पापड़ हैं जो धूप की कमी में भी easily बन जाते हैं। 
  • अगर आप apartment setup में रहते हैं और धूप हल्की या नहीं आती है तो आप यह tip अब धूप मेरी मुट्ठी में अवश्य देख लीजिएगा, आप बहुत काम आएगी।
  • अगर आप को आलू के पापड़ व्रत के लिए बनाना है, तो नमक सेंधा डालिएगा और mustard oil की जगह groundnut oil ले सकते हैं।

तो चलिए ready हो जाइए, all-time-favourite Aloo Papad बनाने के लिए और होली के त्यौहार पर चार चांद लगा दीजिए।

Thursday, 21 March 2024

Recipe: Sago Papad

Hello friends,

आप से पिछले साल अब धूप मेरी मुट्ठी में के tips में पूछा था कि अगर आप को किसी तरह के पापड़ की recipe चाहिए तो हमें बता दीजिएगा।

तो हमें दो तरह के पापड़ की सबसे ज़्यादा request मिली है। एक तो सदाबहार आलू के पापड़ की, दूसरा साबूदाने के पापड़ की। 
साबूदाने के पापड़ देर से सूखते हैं तो इसकी recipe ही पहले share कर रहे हैं।
आज की यह recipe है तो साबूदाने के पापड़ की, लेकिन जब डालना है तो सोचा कुछ ऐसी recipe share करें, जिसकी recipe थोड़ी different and more tasty हो और थोड़ी unique भी, पर सबसे important, बिना झंझट के instantly prepare होने वाली होनी चाहिए।
इसलिए आज हम यह recipe लाएं हैं, अपनी माँ श्रीमती गीता लाल जी के खजाने से, जो कि इस segment में super expert हैं। 
उनके द्वारा बनाए गए पापड़, बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, सबको ही बहुत पसंद आते हैं। यह जितना crunchy होता है, उतना ही मुंह में घुल जाने वाला भी और इसके स्वाद का तो कहने ही क्या, पापड़ों से भरी पूरी plate खत्म हो जाएगी, पर इसे खाने वाले यही कहेंगे कि यह दिल मांगे more😊 


तो चलिए इसके preparation का method देख लेते हैं।

 साबूदाना पापड़




Ingredients :

  • Sago - 400 gm.
  • Potato - 200 gm.
  • Cumin seeds - 1½ tsp.
  • Salt - 1½ tsp. or according to your taste
  • Clarified butter (ghee) - 2 tsp.


Method :

  1. साबूदाना को overnight के लिए soak करने रख दीजिए।
  2. अगले दिन आलू को छीलकर अच्छे से धोकर, grate कर लीजिए।
  3. पानी में ½ tsp. नमक डाल दीजिए। अब grated potato को नमक के पानी में डाल दीजिए।
  4. एक heavy bottom का भगोना या pressure cooker ले‌ लीजिए, उसमें ½ litre पानी लेकर boil होने रख दीजिए। 
  5. पानी इतना होना चाहिए कि साबूदाना पूरी तरह से डूबा रहना चाहिए। अगर आप का साबूदाना ½ litre में ना डूबे तो पानी की quantity बढ़ा लीजिएगा।
  6. पानी में उबाल आ जाने पर उसमें भीगा हुआ साबूदाना, घिसे हुए आलू, नमक और जीरा, घी डालकर बराबर चलाते हुए medium flame पर पका लें।
  7. जब साबूदाना, white से transparent हो जाए, और घोल pouring consistency का हो जाए, gas burner off कर दीजिए।
  8. बर्तन ढककर 15-20 minutes के लिए रख दीजिए।
  9. अब एक plastic की sheet को धूप में फैला दीजिए।
  10. इस sheet पर tablespoon की help से इस घोल को डालकर थोड़ा सा फैला दीजिए, जिससे पापड़ पतले-पतले फैल जाए।
  11. अब इन्हें धूप में सूखने रख दीजिए। 4-6 घंटे बाद इसे पलट दीजिए। अलटते-पलटते हुए इन्हें दोनों तरफ से कड़क होने तक सुखा लीजिए।
  12. तेज़ धूप में यह पापड़ एक से दो दिन में सूख जाता है। धूप हल्की होने से 2½ दिन तक लग सकते हैं।
  13. अब इन्हें airtight container में रख दीजिए।

इसे पूरे साल भर के लिए आप store कर के रख सकते हैं।
इसे होली मिलन और tea time में fry करके serve कीजिए।
Now, crispy, crunchy and mouth-melting Sago Papad se ready to serve...
चलिए कुछ tips and tricks भी देख लेते हैं।


Tips and Tricks :

  • साबूदाना overnight ही soak करना है, जिससे एक-एक दाना अंदर तक soaked रहे। अच्छे से भीगा हुआ साबूदाना ही crunchy and juicy पापड़ बनाएगा। अन्यथा hard and chewy पापड़ बनेगा।
  • गर्म पानी में साबूदाना डालने से पापड़ जल्दी बनेगा, perfect बनेगा और चलाते समय उसके चिपकने और जलने की tendency कम रहेगी।
  • हाँ, घोल बनाते समय, अवश्य ही लगातार चलाते रहें, जिससे घोल नीचे से जले नहीं। पर यदि घोल बनाते समय थोड़ा जल गया है, तो उतना discard कर दीजिए।
  • आप आलू की quantity अपने according घटा- बढ़ा सकते हैं। 
  • इसमें साबूदाने के साथ आलू होने से ही यह ज़्यादा tasty and juicy बनता है।
  • यदि आप आलू के chips भी बनाते हैं, तो उसके पानी में भी आप साबूदाने के पापड़ बना सकते हैं। लेकिन उस समय नमक का अंदाज़ा ठीक रखिएगा। क्योंकि chips बनाते समय उसके पानी में भी नमक डाला जाता है। 
  • इस पापड़ का घोल बनाते समय थोड़ा-सा घी डाल‌ देने से पापड़ का घोल तली से चिपकता नहीं है, साथ ही taste enhance हो जाता है। पर यह पूरी तरह optional है, आप इसे avoid भी कर सकते हैं। 
  • घी की जगह थोड़ा-सा refined oil भी डाल सकते हैं। 
  • यह इतना tasty बनता है कि इसमें ऊपर से कोई भी मसाला डालने की requirement नहीं है, फिर भी अगर आप को चटपटा flavour पसंद है तो आप पापड़ को fry करके उस पर black pepper या पापड़ मसाला, sprinkle कर सकते हैं। 
  • अगर आप को साबूदाना पापड़ व्रत के लिए बनाना है, तो नमक सेंधा डालिएगा।
ना तो इसके घोल को बनाने में घंटों लगते हैं और ना फैलाने में, एक-एक पापड़ को बेलने का भी झंझट नहीं है...
तो बस झट-पट मस्त Sago Papad बना लीजिए और होली में अपने अड़ोस-पड़ोस के लोगों से different flavour की dish serve कीजिए... 

अगर आप apartment setup में रहते हैं तो यह tip अब धूप मेरी मुट्ठी में अवश्य देख लीजिएगा, आपके बहुत काम आएगी।

Wednesday, 29 March 2023

Bhajan (Devotional Song) : गौरा गोद में गणेश जी को ले के निकली

आज चैत्र नवरात्र की अष्टमी है। इस पावन दिवस पर माता रानी के, गौरा रुप की पूजा अर्चना की जाती है। मां गौरी हों और गणेश जी की स्तुति ना हो यह तो हो ही नहीं सकता है...

आज के इस भजन में गौरा माता और गणेश जी कि स्तुति की गई है। इसमें गणेशजी के जन्मोत्सव का बड़ा ही मनोरम वर्णन किया गया है..

यह भजन लखनऊ से श्रीमती प्रीति सहाय जी की मधुर आवाज़ में साझा कर रहे हैं। ढोलक पर सुरीली थाप, नुपुर सहाय जी की है.. 

आइए इस मनोरम और मधुर भजन को पढ़कर व सुनकर आनन्द लें... 


गौरा गोद में गणेश जी को ले के निकली  



गौरा गोद में गणेश जी को,

 ले के निकली-2

हो गौरा ले के निकली,

गौरा गोद में गणेश जी को 

ले के निकली....


ब्रम्हा आए विष्णु आए,

आए भोले नाथ,

गणपत जी ने जनम लियो है, 

नारद वीणा बजाएं 

गौरा गोद में गणेश जी को....


रामा आए लक्ष्मण आए, 

संग में सीता आई,

गणपत जी ने जनम लियो है,  

हनुमत चुटकी बजाएं,

गौरा गोद में गणेश जी को....


राधा आई रुक्मण आई,

 संग में ललिता आई,

गणपत जी ने जनम लियो है 

कान्हा ने मुरली बजाएं,

गौरा गोद में गणेश जी को.....



जय माता दी 🚩

आप सभी को चैत्र नवरात्र की दुर्गाष्टमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं 💐🙏🏻 

माता रानी, हम सब पर सदैव अपनी कृपा दृष्टि बनाएं रखें 🙏🏻🙏🏻 

माता रानी के और भी नए भजन आप को यहां click 👇🏻 करने पर मिल जाएंगे, आप उनका भी आनन्द लें सकते हैं...

माता रानी के भजन

Wednesday, 1 March 2023

Tips: अब धूप मेरी मुठ्ठी में

होली का त्यौहार आ रहा है, बचपन में शायद हम सबके घरों में चिप्स और पापड़ बनते थे।

पर अब जब हम बड़े हो गए हैं तो हम सब में से बहुत लोग apartment में रहते हैं।

जिसके कारण हम में से बहुत लोग ऐसे होंगे जो चाहकर भी धूप के अभाव में चिप्स और पापड़ नहीं बना पाते होंगे... 

बनाने की चाहत के बावजूद नहीं बना पाने में हम भी शामिल थे। और इस बात से दुखी भी रहते थे।

लेकिन अभी कुछ दिन पहले इलाहाबाद से, इस segment में बहुत ही expert श्रीमती रश्मि श्रीवास्तव जी ने बहुत ही बेहतरीन tip बताई है, जिसे हमने implement भी किया है और यह पूरी तरह कारगर भी सिद्ध हुई। तो आज हम आपके साथ उसे ही साझा कर रहे हैं। 

जिससे आप अपनी पसंद के बहुत सारे चिप्स और पापड़ बना सकते हैं, क्योंकि अब धूप है आप की मुठ्ठी में।

अब धूप मेरी मुठ्ठी में 

  1. अगर आप के घर में धूप नहीं आती है तो हम आप को बता दें कि आप साबूदाने का पापड़ छोड़कर बाकी सभी तरह के पापड़ बना सकते हैं।
  2. साबूदाने का पापड़ अधिक गीला होता है, इस कारण से उसके सूखने के लिए कड़क धूप की आवश्यकता होती है।
  3. बाकी पापड़ आप जैसे बनाते हैं, वैसे ही बनेंगे, बस उनको सुखाना पंखे की हवा में है।
  4. आप कहेंगे कि हम तो धूप की बात कर रहे थे। 
  5. जी बिल्कुल, अब आगे जो बताएंगे, वही tip है।
  6. जब पापड़, पंखे की हवा में इतना सूख जाएं कि आपस में एक-दूसरे से चिपके नहीं, तो उन्हें एक पालीथीन में रख दें।
  7. आज कल car तो सबके पास होती है तो आज हम उसे ही use करेंगे...
  8. Car! कैसे?
  9. तो उसके लिए अब आप अपनी कार को जहां धूप हो, वहां खड़ी कर दें।
  10. और फिर उसमें पापड़ वाली पालीथीन रख दें, एक से दो दिन में ही पापड़ बहुत बढ़िया सूख जाएंगे और आप अपनी पसंद के पापड़ का लुत्फ उठा पाएंगे...
  11. तो है ना, बहुत बढ़िया tip, जो आपकी मुठ्ठी में धूप ले आएगी...

तो बस अब apartment में रहने से दुखी होने की जरूरत नहीं है, बल्कि अब समय है अपने taste buds को वापस खुश करने का...

वैसे बाजार में सब मिलता है, लेकिन उसमें वो स्वाद कहां, जो आपके बनाए हुए में रहता है...

तो बस बना लीजिए, मन चाहे पापड़ और चिप्स... 

और फिर से मनाएं, स्वाद से भरपूर Happy Holi🎨🎉💐💞 


अगर आप को किसी भी पापड़ या चिप्स की recipe चाहिए तो आप comment section में जरुर से बताएं, हम उसे share करने की पूरी कोशिश करेंगे 🙏🏻😊

Wednesday, 1 February 2023

Story of Life : होनी होकर रहती है (भाग- 2)

 होनी होकर रहती है (भाग - 1) के आगे...

होनी होकर रहती है (भाग- 2)


सब उस जगह पहुंचें, जहां ऐसा हुआ था, और जो उन्होंने वहां देखा, उसे देखकर सब हैरान रह गए...

उन्होंने देखा कि जहां राजकुमार की मृत्यु हुई थी, वहां पास में सांप का फन जैसा पड़ा था, जो रक्तरंजित था।

यह कहां से आया?

सब यह देख रहे थे, तभी साधू महाराज बोले, यह उस कलाकृति से आया है?

यह कैसे संभव है? रानी पीड़ा से भरकर बोली... 

महामंत्री ने, बहुत ध्यान से कलाकृति देखी, तत्पश्चात् कलाकृति बनाने वाले कलाकार को बुलाया, उससे पूछताछ की, फिर पूरी घटना के तार जोड़े, उसके बाद राजमहल में पहुंचा।

महाराज, मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि, साधू महाराज की बात सत्य साबित हुई..

क्या कहना चाहते हो, साफ-साफ कहो? पहेलियां मत बुझाओ...

महाराज, जब पुष्प वर्षा की जा रही थी, तो उससे बहुत सारी कलाकृतियां हिल रही थी।

उन्हीं में से एक कलाकृति का हाथ थोड़ा मुड़ गया, साथ ही उसकी एक उंगली में एक तार निकल गया। जिससे ऐसी संरचना बनी, मानों कोई सांप अपनी विषैली जिह्वा निकाल कर बैठा हो।

और जैसे ही राजकुमार सिंहासन पर विराजमान हुए, वो कलाकृति ऐसी हिली कि वो हाथ राजकुमार के ऊपर गिर गया और राजकुमार की उसी क्षण मृत्यु हो गई।

तुम क्या कहानी सुना रहे हो? तार चुभने से कोई मृत्यु होती है। 

महाराज, मैंने पूरा परिक्षण किया है, वो तार जिस स्थान से लाया गया था, वहां पर जहरीले फूलों का पौधा था। उसका एक फूल उस तार में लगा रह गया था। 

कलाकार ने जल्दी बाज़ी में कुछ ध्यान नहीं दिया और वैसा तार ही मूर्ति को मजबूत करने में लगा दिया। 

फिर वही हुआ जो होना था।

राजा ने सारी बातें सुनकर, साधू महाराज से अनेकानेक क्षमा मांगी। महाराज आपने मुझे अगाह किया था, पर मैं मूर्ख, अपनी सामर्थ्य पर विश्वास कर के ईश्वर के विधान को बदलने चला था।

राजन्, तुमने दुःख में मुझसे कहा था, मैंने उसका किंचित मात्र भी बुरा नहीं माना और ना ही तुम से क्रोधित हूं। 

पर आज भी मैं यहीं कहूंगा कि, अच्छा हो या बुरा... होनी होकर ही रहती है, उसके होने के विधान अपने आप बन जाते हैं। 

जैसे राजकुमार की मृत्यु सत्य थी, वैसे ही उसका जन्म होना भी सत्य था, तुम्हारा सुख और दुःख भी सत्य था। इसलिए मेरे अगाह करने के बाद भी सब घटना घटित हुई...

इसलिए सत्य को स्वीकार करो और आगे की सुधि लो, यह कहकर साधु महाराज अपने आश्रम की ओर प्रस्थान कर गए।

Tuesday, 31 January 2023

Story of Life : होनी होकर रहती है

आज की कहानी का मेरे जीवन में अलग ही महत्व है, क्योंकि यह कहानी मेरी दादी मां सुनाती थीं। वो कहती थीं, जब भी सवालों के घेरे में घिर जाना, तो यह कहानी तुम्हें उस चक्र से कुछ हद तक निकाल देगी।

तो आज उसी कहानी को share कर रहे हैं.. 

होनी होकर रहती है




कहानी तब की है, जब राजे-रजवाड़ों का समय था।

एक राजा था, अत्यंत शक्तिशाली व धन-धान्य से परिपूर्ण, अपनी प्रजा का बहुत ध्यान रखने वाला, उसकी प्रजा भी उसे बहुत मान-सम्मान देती थी। हर दृष्टि से वह सुयोग्य शासक था। उसकी रानी भी बहुत सुन्दर और नेक दिल थी।

सब था, राजा के पास.. कमी थी तो बस एक कि कोई संतान नहीं थी।

एक दिन उसके राज्य में एक बहुत सिद्ध साधू महाराज आए... 

राजा ने अपनी रानी के साथ, उनकी खूब सेवा की, जब साधू महाराज प्रसन्न हो गए तो, दोनों ने विनती की कि उन्हें इस राज्य का राजकुमार प्रदान करें..

साधू महाराज बोले, कि मुझे इसके लिए तप करना पड़ेगा, उसके बाद ही मैं बता पाऊंगा कि क्या होगा?

तप के बाद, साधू महाराज बोले कि राजकुमार तो मैं तुम्हें दे सकता हूं, पर उसकी अल्प आयु है और उसकी मृत्यु सर्प दंश से होना अवश्यंभावी है। 

सुनकर, राजा बोला, आप इस बात की किंचित मात्र भी चिंता ना करें,अगर हम अपने राज्य से सारे सांप ही समाप्त कर देंगे तो, राजकुमार मृत्यु नहीं होगी और वह चिरायु हो जाएगा... आप हमें पुत्र प्रदान करें।

साधू महाराज बोले कि होनी होकर रहती है, फिर भी अगर तुम्हारी यही इच्छा है तो, तुम्हारी सेवा से खुश होकर, मैं तुम्हें आशीर्वाद देता हूं कि अगले वर्ष यहां का राजकुमार जन्म ले लेगा। 

साधू महाराज का कथन सही सिद्ध हुआ, बहुत ही खूबसूरत राजकुमार का जन्म हुआ।

सभी बहुत प्रसन्न थे, पूरे राज्य में उत्सव मनाया गया...

राजा तो राजा था, वर्चस्व का स्वामी, उसने राजकुमार की सुरक्षा हेतु, पूरे राज्य में, साधू महाराज की भविष्यवाणी बता दी। 

राजकुमार पर खतरा जानकर, आनन-फानन सभी सांपों को खत्म कर दिया गया।

हर पल राजकुमार की रखवाली के लिए 10 सपेरे तैनात कर दिए गए, कि आस-पास कोई सांप ना फटके और अगर कोई दिख भर जाए तो उसका वहीं अंत कर दें।

उनके अलावा और भी बहुत से पहरेदार दिन रात पहर देते साथ ही पूरी प्रजा भी इस बात का ध्यान रखती कि सांप तो क्या, कोई कीड़ा-मकौड़ा भी राजकुमार के ईर्द-गिर्द ना फटके..

राजकुमार दिन-दूनी, रात-चौगुनी वृद्धि से बड़ा होने लगा। अब वो बीस साल का बांका जवान हो गया था। 

राजकुमार भी राजा के समान, हष्ट-पुष्ट वीर और साहसी था। और उनकी ही भांति सहृदय था तो सबका प्रिय भी था।

राजा-रानी अब बूढ़े हो चुके थे। राजकुमार को हर तरह से सुयोग्य देखकर राजा ने सोचा कि अब राजकुमार का राजतिलक कर दिया जाए।

पूरे राज्य में राजकुमार के राज्यतिलक की मुनादी करा दी गई। 

जिस साधू महाराज की कृपा से राजकुमार हुआ था, उन्हें भी आमंत्रण पत्र भेजा गया। पर वो महाराज तपस्या पर गये थे, तो उनके शिष्यों ने कहा आप आयोजन करें, गुरुवर तपस्या कर के आ जाएंगे तो आप के आयोजन के विषय में जानकारी दें देंगे।

बड़े धूमधाम से उत्सव की तैयारियां शुरू कर दी गई। बहुत ही भव्य आयोजन किया गया। पूरे सिंहासन को फूलों से सजाया गया। सिंहासन के पीछे बेहद खूबसूरत कलाकारी की गई। बहुत तरह की कलाकृतियां भी लगाई गई...

मुहूर्त के अनुसार राजपुरोहित व अनेक मंदिरों से पंडित, साधू संत सब पधारे... 

मंत्रोच्चारण के साथ, पूजा पाठ आरंभ हो गया। पूरे प्रांगण में धूप-दीप, पुष्प इत्यादि की सुगंध आ रही थी।

पूजा पाठ समाप्त करके राजपुरोहित जी ने राजकुमार को, राजतिलक के लिए बुलाया। 

राजतिलक होने के पश्चात्, राजकुमार को सिंहासन पर विराजमान होने को कहा गया।

राजकुमार जब सिंहासन पर बैठा, सब ओर से पुष्प की वर्षा होने लगी और राजकुमार की जय-जयकार होने लगी।

सभी तरफ प्रसन्नता छाई हुई थी कि अचानक से राजकुमार की चीख निकल गई और वो वहीं फर्श पर गिर पड़ा।

सब तरफ अफ़रा-तफ़री मच गई। 

राजकुमार को तुरंत, राजमहल ले जाया गया। राजवैद्य जी तत्परता से दवाई करने लगे, पर सब व्यर्थ था, वो राजकुमार को नहीं बचा पाए। 

सम्पूर्ण वातावरण शोकाकुल हो गया।

उसी समय वो साधू महाराज आए और देखकर बोले, राजन मैंने तुम्हें पहले ही अगाह किया था।

पर महाराज आपने तो कहा था कि राजकुमार की मृत्यु सर्पदंश से होगी, पर यहां तो कोई सांप नहीं है, फिर ऐसा कैसे हुआ? क्या आप का कहा, मित्थया था।

नहीं! राजन मेरा कथन कभी ग़लत नहीं जाता। तुम वहां मुझे ले चलो, जहां यह घटना हुई थी।

सब उस जगह पहुंचें, जहां ऐसा हुआ था, और जो उन्होंने वहां देखा, उसे देखकर सब हैरान रह गए...

आगे जाने...

होनी होकर रहती है (भाग - 2) में...

Saturday, 31 December 2022

Poem: New Year

A new year, everytime on this day, we go to several parties, we celebrate this grand festival with pomp and vigour, we visit many places, and fill every single moment with fun & frolic. "Truly not!" Interrupts our succeeding generation. "Not according to me!" This new generation thinks something else and so this poem. Enjoy this poem 'New Year' written by Divyanshi Khare from Prayagraj.

Get to know that how do we celebrate a new year with pomp and vigour according to them.

 New Year


New years come and go,

But our lives go to and fro.

Some years might be full of sadness,

But some years fulfill our life with gladness.


What do you think a new year is?

Enjoying the party you never want to miss?

We take resolutions eagerly,

Of might listening to our parents sincerely.


But have you ever thought of improving your environment?

Enjoying a better country by making an improvement.

Past years are like teachers,

They teach us to protect our land and creatures.


So we should learn from our mistakes every year,

And try to shape a better new year.


I am a very nuclear element of this earth family,

So we all should get together and contribute to the earth as one family.


🎉Happy New Year 🎉

Sunday, 23 October 2022

Poem : उसकी कैसी दीवाली

आज आप सब के साथ मुझे भोपाल के मेज़र नितिन तिवारी जी की कविता को साझा करते हुए अपार प्रसन्नता हो रही है।

आज नितिन जी की लेखनी में वो दर्द उभर कर आया है, जो कि हर भारतीय सैनिक के मन में उठता है। क्योंकि दुश्मनों से लड़ने वाले वीर फ़ौजी, त्यौहारों में अपने परिजनों से दूर रहने पर कुछ पलों के लिए बेहद संवेदनशील हो जाते हैं।


उसकी कैसी दीवाली




सभी पर्व तिथियों तक सीमित, 

आते याद दिलाने को,

आते आकर जाते भी हैं,  

आते ही हैं, जाने को।


टूटा मरा हुआ है जिसका मन, 

उसकी कैसी दीवाली, 

अंतरमन में यदि होली जलती, 

 तो बाहर कैसी दीवाली? 


अपना जीवन परवश काट रहा जो, 

उसे मनाने को है क्या, 

देख दिखावा औरों का वह, 

उससे क्या सुख पा सकता वो ।


जिसके पास नहीं हो पैसा, 

उसको नूतन वसन कहाँ, 

दीपक तेल और बाती का, 

कर ले पावन मिलन कहाँ? 


जिसका कोई सुजन नहीं है,  

साथी किसे बना सकता, 

भरी भीड़ में हो एकाकी,  

कैसै मेल मिला सकता?


पैसा साधन पास सभी कुछ, 

किन्तु उसके पास नहीं कोई संगी साथी, 

औरों को नित कोस-कोसकर,

भले दान दे दे हाथी।


कैसे सुख पा सकता है वह, 

कैसी उसकी  दीवाली, 

भले प्रदर्शन कितना कर ले, 

अंतरमन  तो रहता खाली।


किसी-किसी के हाथ नहीं कुछ, 

किन्तु बहुत है दिल वाला, 

उसकी नित रंगों की होली, 

रात दियों की नव माला। 


जो संयमी धैर्य से सुरभित, 

सबको अपना कहता है, 

औरो के सुख-दुख में भागी, 

 साथ दुखी के रहता है। 


दिल औरों का नहीं जलाये, 

दीवाली सचमुच उसकी, 

औरों के घर दिये जलाये,  

सही दिवाली है उसकी।


सज्जन लोगों के घर मैने, 

रोज दिवाली देखी है, 

दुर्जन के घर नित्य कष्ट की, 

 मैंने भीषण होली देखी है। 



                           🇮🇳 जयहिंद 🇮🇳


                      🇮🇳भारतीय सैनिक 🇮🇳




Disclaimer:


इस पोस्ट में व्यक्त की गई राय लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। जरूरी नहीं कि वे विचार या राय इस blog (Shades of Life) के विचारों को प्रतिबिंबित करते हों। कोई भी चूक या त्रुटियां लेखक की हैं और यह blog उसके लिए कोई दायित्व या जिम्मेदारी नहीं रखता है।

आप सभी को नरक चतुर्दशी, रुप चौदस‌ व छोटी दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ 💐

Tuesday, 7 June 2022

Article : Nasal vestibulitis (नाक में फुंसी)

Nasal vestibulitis (नाक में फुंसी)




दाना, फुड़िया, फुंसी, pimples यह सब कहीं भी निकल आए तो बहुत problems होती है। पर अगर nostrils के अंदर फुंसी ((nasal vestibulitis) निकल आए तो और भी ज़्यादा problem हो जाती है।

आइए, आपको इसके symptoms, cause और कैसे इससे easily relief मिले, इसकी tip आपको बताते हैं। 

पर उससे पहले आपको बता दें, इधर कुछ दिनों से तबियत ख़राब होने के कारण, हमने कुछ दवाई ली थी। 

गर्मी बहुत ज़्यादा पड़ रही है और वो दवा भी गरम थी, नतीजन हमारे नाक के अंदर कुछ फुंसी निकलने लगी, जो एक हफ़्ते तक होती रही। 

नाक में swelling, redness, pain and breathing problem, होने से हम परेशान थे।

ऐसे में लखनऊ की श्रीमती प्रीति सहाय जी के द्वारा बताई गई tip बहुत कारगर साबित हुई। आज उसे भी share करेंगे। 


Symptoms :

Redness

Swelling

Breathing problem

Pain in nostril(s)

Dryness 

Bleeding

Irritation

Itching etc.

Problem face करनी पड़ती है। अगर आप को लगता है कि यह problem आप को भी nostrils में हो रही है तो इन symptoms का एक कारण नाक के अंदर फुंसी भी हो सकती है।

नाक के अंदर फुंसी होने के बहुत से कारण ( causes हो सकते हैं।

Causes : 

बहुत अधिक गर्मी

किसी दवाई का effect 

Nostrils के अंदर होने वाले बाल का टूट जाना

किसी तरह की गंदगी चले जाना

उंगली का नाखून लग जाना, etc.

इसके ये सारे causes हो सकते हैं। यह ऐसे common causes हैं, जो किसी के साथ भी हो सकते हैं। 

ऐसे में आप को उपाय बता रहे हैं, जो बहुत easily आप घर में implement कर सकते हैं।


Relieving method :

रुई के फाहे (cotton balls) में perfume डालकर smell कीजिए। 

इसे आप दिन में कई बार सूंघें।

मुल्तानी मिट्टी और चंदन के पाउडर को बहुत थोड़े से ठंडे पानी में घोलकर, paste बनाकर mud pack ready कर लीजिए। 

अब इस mud pack को नाक पर ऊपर से apply कर लीजिए।

Mud pack सूखने पर ठंडे पानी से धो लीजिए। 

नाक के अंदर dryness ज़्यादा लग रही हो तो, उस पर coconut oil की बहुत हल्की layer लगा सकते हैं।

नाक के अंदर, सामने की तरफ पपड़ी जम रही है और अगर आप इसे हटा दें रहे हैं और वहाँ से अगर खून निकल रहा हो तो Soframycin skin cream की पतली layer apply कर दीजिए।

Notes :

Nostrils की बात है तो, सभी कुछ बहुत सोच समझ कर, use कीजिए। यह एक कारगर उपाय है, क्योंकि  नाक के अंदर की परेशानियों, दाना, फुड़िया आदि को ठीक करने के लिए, तेज़ महक सूंघने से जल्दी relief मिलता है। 

1. अगर आप रुई का फाहा (cotton balls) use कर रहे हैं तो, रुई को हल्का गीला कर के निचोड़ दीजिए, फ़िर perfume spray कीजिए। 

अगर आप सूखी रुई में perfume spray करेंगे तो जब रुई से alcohol उड़ जाएगा, तो रुई dry हो जाएगी पर scent बनी रहेगी। ऐसी dry scented रुई सूंघने से रुई के महीन रेशे नाक में जा सकते हैं, जो problematic हो सकते हैं। तो याद रखिएगा, dry cotton balls को smell नहीं करना है।

2. कुछ लोग फूल सूंघने की सलाह भी देते हैं, पर याद रखिएगा कि फूलों में pollen grains होते हैं। ऐसे में उस तरह के फूल ना लें, जिनमें pollen grains ऊपर ही होते हैं और बहुत सारे होते हैं।

Pollen grains बहुत महीन होते हैं, तेज़ smell करने से वो नाक के अंदर चले गए तो problematic हो सकता है। 

तो याद रखिएगा कि अगर आप फूल सूंघ रहें हों तो वो साफ हो, उसके अंदर कोई छोटा सा भी कीट ना हो, इसका बेहतर विकल्प चमेली, मोगरा, बेला हो सकते हैं। पर उन्हें भी अच्छे से check कर लीजिएगा कि वो अंदर से पूरी तरीके से साफ़ हों। ऐसे फूलों को आप एक रूमाल में डालकर फिर सूंघें।

3. वैसे perfume सूंघने का सबसे अच्छा विकल्प है कि आप perfume को अपनी, clean and dry wrist पर spray कर के हल्के से rub कर लीजिए। और उसे दिन में कई बार smell करें। इस method में नाक के अंदर कुछ भी जाने का डर नहीं रहता है, जिससे problem बढ़े। साथ ही इस तरह से आप, deeply smell भी कर सकते हैं।

हमने तीसरा method ही अपनी nasal problem के लिए, implement किया था। 

4. Nose, sensitive organ है, इसलिए उसके अंदर जो कुछ भी apply करें, उसकी बहुत thin layer होनी चाहिए। अतः coconut oil को थोड़े से पानी में मिलाकर, फिर बहुत thin layer apply करें।

अगर आप coconut oil avoid करना चाहते हैं तो, केवल पानी से भी nostril को अन्दर से moist कर सकते हैं।

5. Soframycin skin cream को सिर्फ आगे ही apply करें। नाक के अंदर apply ना करें।

6. जब भी nose clean करनी हो, washbasin के पास ही खड़े होकर करें, जिससे अगर आप को जमी हुई पपड़ी हटानी हो तो उसे पहले पानी की help से moist कर लीजिए। जिससे पपड़ी soft हो जाए और उसे हटाने में ज्यादा खून नहीं निकले।

वैसे भी पूरे समय नाक में उंगली डाल कर नाक साफ करते रहना, bad habits हैं, सामने वाले व्यक्ति को आप का ऐसा करते रहना, नागवार गुजरता है। साथ ही उंगली गंदी हो जाती है और यह unhygienic भी है। तो brush के time ही नाक भी साफ़ करने की habit रखें। 

7. Mud pack (मुल्तानी मिट्टी और चंदन पाउडर) अपने आप में भी Summers में skin पर apply करने से बहुत अच्छा लगता है। Skin को ठंडक मिलती है, जिससे गर्मी में होने वाली skin problems काफी कुछ eliminate हो जाती हैं। 

Pack, बहुत thick मत बनाएं, साथ ही layer भी पतली apply करें। Pack, dry हो जाने पर skin में खिंचाव महसूस होने लगे, तो ठंडे पानी से धो लीजिए।

Mud pack में आप पानी की जगह, गुलाब जल भी use कर सकते हैं।

हमने आपको, symptoms and causes बता दिए हैं, साथ ही relief भी बता दिया है। 

हमारे लिए यह method बहुत कारगार साबित हुआ था। प्रीति जी उसके लिए अनेकानेक आभार 🙏🏻

आप सब भी problem होने से, इसे ज़रूर से try करें।दो दिन में relief मिल जाता है, पर अगर आप को relief नहीं मिले तो doctor से ज़रुर मिलें।

एक बार फिर कहेंगे कि nasal problem को casually मत लीजिएगा। Nose हमारे शरीर में बहुत sensitive and important organ है। साथ ही, nasal की problems का effect उसकी bones and cartilage पर भी पड़ता है।  


डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।


★Allergen alert

Friday, 25 March 2022

Kids story : New School Bag

आज की कहानी, छोटे से समझदार बच्चे अद्वय सहाय द्वारा लिखी हुई है। 

वो अपनी कहानी के जरिए अपने दोस्तों को समझना चाहता है कि हमेशा उन्हीं सामानों की demand करनी चाहिए, जिनकी हमें requirement हो।

इस कहानी को अपने बच्चों को अवश्य सुनाएं, जिससे उन्हें भी पैसे और समय की कद्र रहे।

New School Bag

Results आ चुके थे, बच्चे pass हो चुके थे। New class, new books सब कुछ नया, बच्चों में इसका अलग ही craze रहता है।

सोनू भी उन्हीं बच्चों में से था, जिन्हें हर साल school के लिए नयी-नयी चीजें चाहिए होती हैं।

कोरोना के कारण पिछले दो साल से school ठीक से नहीं खुल रहे थे तो सोनू के सभी सामान काफ़ी अच्छी condition में थे।

इसके बावजूद सोनू जिद्द कर रहा था कि उसे सब कुछ नया चाहिए। 

Specially New School Bag, वो भी doraemon वाला।

माँ ने समझाया भी कि क्या जरूरत है, नये bag की। अभी पिछले साल ही तो छोटा भीम वाला bag लिया था, और तुम school, मुश्किल से महीने भर भी नहीं गये हो। वो bag बिल्कुल नया जैसा ही है।

माँ, आप समझती नहीं हैं, अब मैं बड़ा हो गया हूँ, छोटा भीम वाला bag नहीं ले जा सकता हूँ, मुझे doraemon वाला new bag ही चाहिए। फिर सारे friends भी हर बार new bag लाते हैं तो मैं क्यों नहीं। 

पापा बोले, छोड़ो, मैं देखता हूँ। अगर वो bag मिलता है तो।

पापा की बात सुनकर सोनू खुश हो गया और doraemon, doraemon... का गाना गाते हुए खेलने चला गया।

लौटने पर उसने देखा कि doraemon उसके कमरे में उसका इंतजार कर रहा था।

सोनू, खुशी से उछल पड़ा, doraemon तुम?

हाँ मैं, doraemon ने जवाब दिया।

तुम यहाँ कैसे आ गये?

तुम से यह पूछने कि तुम्हारा bag कहाँ-कहाँ से फटा है? 

कहीं से नहीं! 

अभी पापा ने पिछले साल ही तो लिया था और मैं एक महीने भी school नहीं गया था तो वो बिल्कुल नया जैसा ही है।

क्या उसमें तुम्हारी new books, pencil box, tiffin box नहीं आएंगे?

बिल्कुल आएंगे, बहुत बड़ा bag है, वो मेरा।

अच्छा देखने में बहुत गन्दा और पुराना लगने लगा है?

नहीं... कहा तो बिल्कुल नये जैसा है।

तो क्या कारण है कि तुम्हें new bag चाहिए, सिर्फ इसलिए कि उसके cartoon में छोटा भीम बना है। या सिर्फ इसलिए कि और बच्चे new bag लाएंगे।

हाँ यही कारण है। 

तो तुम बिल्कुल ग़लत हो, हमें कोई सामान तभी लेना चाहिए, जब उसकी requirement हो, ना कि दूसरों की देखा-देखी या show-off करने के लिए।

अगर हम बिना requirement के एक ही सामान को बार-बार लेते रहेंगे तो वो पैसे की और समय की बर्बादी है। 

अगर हम इसका ध्यान रखें तो हमारे पास बहुत variety की चीजें होंगी, साथ ही हमारे पैसे और समय की बचत होगी।

अच्छा ठीक है, मैं समझ गया doraemon, कि तुम क्या कहना चाहते हो। अब से मैं केवल उन्हीं सामानों को लूंगा, जिसकी मुझे requirement हैं। व्यर्थ में पापा के पैसे और समय बर्बाद नहीं करूंगा।

यह कहकर वो पापा, पापा चिल्लाने लगा।

पापा और मम्मी सोनू के कमरे में आते हैं, वो देखते हैं कि सोनू सोते-सोते, पापा पापा चिल्ला रहा है।

उन्होंने सोनू को जगाकर पूछा कि क्या हुआ?

तब सोनू को समझ आया कि doraemon उसके सपने में आकर समझा रहा था। पर उसे doraemon की कही हुई बात अभी भी याद थी।

उसने अपने पापा से कहा, पापा अब मुझे new bag नहीं चाहिए।

क्यों, क्या हुआ बेटा?

पापा अब मुझे अच्छे से समझ आ गया है कि उन्हीं सामानों की demand करनी चाहिए, जिसकी मुझे requirement हो। 

मम्मी और पापा ने सोनू को बहुत सारा प्यार किया।