Sunday, 25 October 2026

Recipe : Besan-Pyaaz Paratha

नवरात्रि पर्व का समापन विजयादशमी पर्व के साथ हो गया, पर त्यौहार! उनकी तो लड़ी लगी ही हुई है, अभी हिन्दुओं का सबसे बड़ा पाँच-दिवसीय पर्व दीपावली का आगमन होना है।

पंच दिवसीय दिन अलग-अलग व्यंजन बनाने का प्रावधान है तो चलिए इस बार कुछ different cuisine के साथ दीपावली का स्वागत करते हैं।

आज share कर रहे हैं Rajsthan ki delicacy, बेसन-प्याज़ का पराठा।

इसे आप तब भी enjoy कर सकते हैं, जब आप के पास सब्जियाँ न हो। Easily और instantly prepare होने वाली dish की recipe देख लेते हैं…

बेसन-प्याज़ पराठा

Ingredients :
  • Wheat flour - 2 cups
  • Gram flour - 3 to 4 tbsp.
  • Onion - 2 (medium)
  • Salt - as per taste 
  • Green chilli -a s per taste 
  • Ginger - 1 inch 
  • Coriander leaves - handful
  • Coriander seeds - ½ tsp.
  • Fennel seeds - ½ tsp.
  • Carom seeds - ½ tsp.
  • Asafoetida - ½ tsp.
  • Cumin seeds - 1 tsp.
  • Red chilli powder -  1 tsp./as per taste 
  • Turmeric powder - ½ tsp.
  • Ghee - for shallow fry 

Method :
  1. आटा में 1 pinch नमक डालकर नरम-मुलायम dough तैयार कर लें।
  2. जब dough नरम हो जाए, तो उसमें घी डालकर एक बार और अच्छे से गूंथ लें।
  3. Dough को 10-15 मिनट के लिए गीले कपड़े से ढककर रख दें ताकि यह set हो जाए।
  4. साबुत धनिया और सौंफ को दरदरा कूट लें। एक wok में 1 tsp. घी गर्म करें।
  5. इसमें हींग, जीरा, कुटा हुआ धनिया, सौंफ और जीरा डालकर चटकाएँ।
  6. अब इस में बेसन डालकर हल्का-सा भूनकर कच्चापन दूर कर लें।
  7. Gas off करके उसमें छोटा-छोटा कटा हुआ प्याज डालकर धनिया, हरी मिर्च, नमक और अमचूर डालकर अच्छी तरह mix कर लें। 
  8. इस मसाले में थोड़ा-सा पानी डालकर slightly soft dough prepare कर लीजिए।
  9. फिर इस मसाले के dough की छोटी-छोटी गोलियां बना लीजिए।
  10. आटे की एक लोई लेकर उसकी छोटी-छोटी कटोरी-सी बना लें।
  11. इस पर हल्का घी लगाएँ और तैयार किए हुए बेसन-प्याज के मिश्रण की गोली भरकर कटोरी को बंद कर ball shape का गोला तैयार कर लें (जैसे कचौड़ी या आलू के पराठे की गोली तैयार करते हैं)।
  12. इस गोले को चपटा करके सूखे आटे की मदद से हल्के हाथ से‌ गोल बेल लें।
  13. गरम तवे पर पराठा डालें।
  14. एक तरफ से सिकने के बाद पलट लें और घी लगाकर दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेक लें।
Enjoy your Besan-Pyaaz Parathas with curd, chutney, or dip of your favourite choice!


Tips and Tricks :
  • बेसन प्याज़ के mix में थोड़ा-सा पानी डालकर soft dough prepare करके उस की गोलियां बनाकर भरने से पराठे बनाना ज्यादा easy और even होगा।
  • साथ ही पराठे बनने के बाद खाने में उसका भरावन फैलेगा नहीं।
  • प्याज़ के लच्छे से छोटा-छोटा कटा प्याज लेने से पराठा ज्यादा easily और even बनेगा।
  • ध्यान रखिएगा कि प्याज़ में नमक डालने से पानी छोड़ता है। अतः इस मसाले में पानी हिसाब से डालें, जिससे dough ज्यादा गीला न हो।
  • बेसन की गोली भरने के बाद गोले का चिपकाया हुआ भाग हथेली की तरफ करके गोल-गोल कीजिए, इस तरह से गोली seal हो जाएगी और गोला even बनेगा।
सारे tips और tricks follow करके स्वादिष्ट बेसन-प्याज़ पराठा बनाएं और त्यौहार में चार चांद लगाएँ!

Wednesday, 21 October 2026

India's Heritage : Sindoor Khela

(I) Navratri Ending :

कल नवरात्रि पर्व का समापन विजयादशमी पर्व के हर्षोल्लास के साथ हो गया। पर क्या सब जगह हो गया?

नहीं। पर कहाँ रह गया था? पश्चिमी बंगाल और बंगाली समाज में आज विजयादशमी पर्व था।

उनका विजयादशमी पर्व को लेकर अलग cultural recognition है।

विजयादशमी पर्व पर विशेष रूप से सिंदूर खेला किया जाता है।

क्या होता है सिंदूर खेला?

दुर्गा माता के आगमन का बंगाली समाज में क्या पर्याय है? आज इसी को India's Heritage segment में share कर रहे हैं…

सिंदूर खेला


(II) The Ritual :

सिंदूर खेला West Bengal और Bengali community में दुर्गा पूजा के अंतिम दिन (विजयादशमी) को मूर्ति विसर्जन से ठीक पहले मनाई जाने वाली एक प्रमुख और पारंपरिक रस्म है।

इसका शाब्दिक अर्थ है ‘सिंदूर का खेल’।

इस रस्म से जुड़ी कुछ मुख्य बातें और परम्पराएँ हैं, आइए जानते हैं कि वो क्या हैं?


(III) Major Details :

  • Farewell of Maa Durga- ऐसा माना जाता है कि दुर्गा पूजा में माँ दुर्गा अपने मायके (पृथ्वी) आती हैं, उनके भव्य स्वागत के लिए जगह-जगह पूजा-पंडाल तैयार किए जाते हैं। षष्ठी से लेकर विजयादशमी पर्व तक रोज पंडाल में माँ दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है, खिचड़ी, पूड़ी-सब्जी इत्यादि का दोपहर में भोग प्रसाद खाया जाता है। शाम से रात तक विभिन्न भव्य और cultural programmes होते हैं। रात में खाना मुख्यतः विभिन्न पंडालों में दुर्गा माता के दर्शन के दौरान बाहर ही खाया जाता है। और विजयादशमी के दिन माँ दुर्गा को मायके से ससुराल (कैलाश) लौटने से पहले विदा किया जाता है।
  • Debi Boron- Immersion से पहले महिलाएँ माँ दुर्गा की आरती करती हैं, पान के पत्ते से माँ के मुखमंडल को स्पर्श करती हैं तथा उनके माथे व चरणों में सिंदूर व मिठाई अर्पित करती हैं। इस अनुष्ठान को ‘देबी बोरोन’ कहा जाता है।
  • Applying Sindoor- माँ को सिंदूर चढ़ाने के बाद महिलाएँ आपस में एक-दूसरे के माथे, गालों और चेहरे पर सिंदूर लगाती हैं। जो ऐसा प्रतीत होता है, मानो सिंदूर से “होली” के समान खेला जा रहा है।
  • Traditional Outfits- बंगाली समाज में red border वाली सफेद saree को विशेष मान्यता प्राप्त है। और हर शुभ अवसर जैसे दुर्गा पूजा, विवाह, पूजा-पाठ इत्यादि में इसे पहना जाता है। दुर्गा पूजा वहाँ का सबसे बड़ा त्यौहार व उत्सव है।
  • इस उत्सव में महिलाएँ आमतौर पर लाल border वाली सफेद साड़ी (‘लाल पाड़ साड़ी’) और हाथों में शंख और लाल चूड़ियाँ (‘शंखा-पोला’) पहनती हैं।
  • Dhol & Dance- जैसे Punjab में ढोल, वैसे ही Bengal में ढाकी को विशेष स्थान दिया गया है। और हर शुभ अवसर पर ढाकी वाले को बुलाया जाता है। अतः षष्ठी में मातारानी की मूर्ति की स्थापना के साथ ही ढाकी वाले आ जाते हैं और विजयादशमी पर्व पर मूर्ति विसर्जन तक रहते हैं। इस रस्म के दौरान पारंपरिक ढाकी (ढोल) की थाप, शंखनाद और उल्लास का माहौल होता है।
  • Importance- यह रस्म महिलाओं द्वारा एक-दूसरे के सुहाग की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य, पारिवारिक सुख और समृद्धि की कामना के लिए मनाई जाती है।

बोलो दुग्गा माई के जोय!

Tuesday, 20 October 2026

Poem : बस एक अपराध

आज शारदीय नवरात्र का समापन है, माँ दुर्गा और भगवान श्रीराम के विजयादशमी पर्व के साथ।

माँ दुर्गा और भगवान श्रीराम की कृपादृष्टि सदैव बनी रहे!

बस एक अपराध


राम और रावण के युद्ध में,

हुआ था बहुत रक्तपात।

रावण के अहंकार ने,

पूरा वंश कर दिया समाप्त।।


सोने की थी लंका उसकी,

राज्य में थी खुशियाँ अपार।

बस एक ही गलती से,

सब हुई तार-तार।।


त्रिकाल दर्शी, प्रकांड विद्वान,

भक्त शिरोमणि, था बहुत महान। 

सब क्षणभंगुर हो गया था

 पर-स्त्री का जब किया अपमान।।


पर, क्या एक अपराध ही,

होता है सब पर भारी?

शायद क्षम्य हो जाता,

गर साधु वेष न‌ धरता अहंकारी।।


उस अपराध में शामिल था,

संत समाज का भी अपमान।

जिन्हें समझा जाता है,

 ईश्वर के समान।।


गर वो, एक अपराध न करता वो,

साधु रूप न धरता वो।

तो इस तरह युगों-युगों तक, 

अपराध बोध में न जलता वो।।


आइए, हम सब प्रभु श्रीराम से प्रार्थना करें कि हमें छोटे-बड़े सभी पापों से मुक्त रखें और अपने श्रीचरणों में रखकर हमारी भक्ति स्वीकार करें।

जय श्रीराम!