(I) The Major Dates :
सनातन धर्म में नवरात्रि पर्व का बहुत महत्व है। फिर शारदीय नवरात्रि पर्व का महत्व और अधिक माना जाता है।
और उसमें भी सप्तमी, अष्टमी व नवमी को बहुत अधिक महत्वपूर्ण समझा जाता है। पर क्यों?
आज के India's Heritage segment में इसे ही share कर रहे हैं…
सप्तमी, अष्टमी व नवमी अति-विशेष क्यों?
(II) Goddess Durga's Avatars :
सप्तमी, अष्टमी और नवमी नवरात्रि की सबसे महत्वपूर्ण तिथियां हैं, क्योंकि ये देवी दुर्गा के उग्र और शांत रूपों (कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री) की पूजा और उनकी शक्ति को समर्पित हैं।
इस समय विशेष हवन, कन्या पूजन, और माँ दुर्गा की विजय का उत्सव मनाया जाता है। यहाँ माता की असीम कृपा से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
(III) Major Reasons :
- Supreme Forms- सप्तमी को माँ कालरात्रि, अष्टमी को माँ महागौरी और नवमी को माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती है, जो शक्ति के सर्वोच्च स्वरूप हैं।
- Key Role of Kanya Pujan- अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन (कन्याओं को देवी का रूप मानकर भोजन कराना) किया जाता है। यह नवरात्रि पर्व का मुख्य भाग माना जाता है। जिससे माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है।
- Receiving Asht Siddhis- इन दिनों की साधना से साधक को अणिमा, गरिमा, लधिमा, ईशित्व एवं वशित्व जैसी आठों सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।
- Symbol of Victory and Peace- नवमी तिथि को माता ने असुरों (महिषासुर) का संहार किया था, इसलिए यह विजय, सुख-समृद्धि और ज्ञान का प्रतीक है।
- Completion of Yajna and Havan- इन दिनों किए गए हवन और उपवास से mental peace, energy में वृद्धि और आध्यात्मिक लाभ मिलता है, जो पिछले दिनों के व्रत को पूर्णता देते हैं।
- Yogini Worship- अष्टमी को महालक्ष्मी (ईशान कोण) और नवमी को ब्रह्माणी (पूर्व दिशा) योगिनियों की पूजा का भी विधान है।
संक्षेप में, ये दिन आध्यात्मिक ऊर्जा, आत्म-शुद्धि और माँ दुर्गा के दिव्य आशीर्वाद को प्राप्त करने के सबसे उत्तम समय माने जाते हैं।
यही कारण है नवरात्रि पर्व में सप्तमी, अष्टमी व नवमी को अति-विशेष कहते हैं। यही कारण है, इन्हें महासप्तमी, महाअष्टमी व महानवमी कहते हैं।
दुर्गा माता की जय!


