Sunday, 15 March 2026

Article : Crude Oil एक, रूप अनेक

(I) Scarcity of LPG :

जब से Iran और Israel के युद्ध में USA (United States of America) शामिल हुआ है, Crude Oil को कैसे अपने देश में लाया जाए, इसकी कवायद पूरे विश्व में शुरू हो गई है।

पर एक बात समझ नहीं आ रही है, जब scarcity LPG (Liquefied Petroleum Gas) की है तो इतनी मांग crude oil के लिए क्यों की जा रही है?

“सारा जोर crude oil मंगाने में ही दिया जा रहा है? या यह भी सोचा जा रहा है कि कैसे gas cylinder की कमी को दूर किया जाए, और petrol और diesel की कमी का क्या? वैसे यह crude oil है क्या बला?”

इन्हीं सवालों का जवाब है, आज का यह article...

Crude Oil एक, रूप अनेक


(II) Introduction to Crude Oil :

सबसे पहले आपको बता दें कि crude oil ही सबसे बड़ी बला है, यह आ जाए देश में तो सब आ गया और यह नहीं तो कुछ नहीं।

कैसे?

तो ऐसे समझिए कि crude oil जननी है और बाकी सब उसके बच्चे।

 मतलब? 

मतलब कि crude oil की process से ही सब बनाया जाता है, जिसकी पूरी एक chain है।

क्या है यह पूरी process, और क्या है उसकी पूरी chain? आइए, इसे समझते हैं।


(III) Fractional Distillation :

वैसे आजकल के 8th class तक पहुंचते हुए बच्चे भी आपको यह बता देंगे, क्योंकि आजकल के curriculum में इस पूरी process को बताया जाता है।

तो वो पूरी process है कि crude oil या कच्चा तेल, जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है, कि आरंभिक अवस्था है। इस पूरी process को petroleum refining या fractional distillation कहा जाता है।

Crude oil को बड़ी-बड़ी refineries में process करते हैं, तो इसके refine होने से बहुत सारे products निकलते हैं। आइए, इन्हें order-wise (bottom to top) जानते हैं।


(IV) Petroleum Products :


  1. Residue (>600°C)- सबसे पहले जो product निकलता है, वो है residue, जिससे asphalt और bitumen (साधारण भाषा में डामर) बनते हैं। इनका उपयोग सड़कों के निर्माण में किया जाता है।
  2. Fuel Oil (370°C-600°C)- Residue के just ऊपर float करता है fuel oil, या engine oil. इसका इस्तेमाल ships और factories में as a fuel किया जाता है।
  3. Lubricating Oil (300°C-370°C)- इसके बाद का product है lubricating oil या machine oil, जो machines को सुचारू रूप से चलाने में सहायक होता है। इससे wax और polishes भी बनती हैं।
  4. Diesel (250°C-350°C)- उसके बाद आता है diesel, जिसका उपयोग होता है heavy motor vehicles, generators, motors, और बड़ी machines में। इसको युद्धपोत (war tankers) में भी use किया जाता है, क्योंकि यह petrol और बाकी fuels के मुकाबले कम inflammable होता है।
  5. Kerosene (175°C-325°C)- उसके बाद आता है kerosene. इससे बनाया जाता है paraffin wax और jet fuel. Paraffin से vaseline और jet fuel से aeroplanes का special fuel बनता है। आपको बता दें कि jets/aeroplanes petrol/diesel से नहीं चलते हैं, उनके लिए एक special oil होता है।
  6. Naphtha (60°C-100°C)- इसके बाद आता है naphtha, जिसका उपयोग plastic और naphthalene balls जैसे जरूरी उत्पादों के लिए किया जाता है।
  7. Petrol/Gasoline (40°C-205°C)- उसके बाद आता है petrol और gasoline. इनका उपयोग (as a fuel) कहाँ-कहाँ किया जाता है, यह बताने की तो ज़रूरत ही नहीं है।
  8. Refinery Gas (<40°C)- Last but not the least आती है refinery gas, जिससे CNG (Compressed Natural Gas), LPG (Liquefied Petroleum Gas) और LNG (Liquefied Natural Gas) जैसे fuels बनाए जाते हैं। सामान्य भाषा में LPG हमारे घरों, restaurants, factories में उपयुक्त होने वाली gas, हमारे gas cylinder की gas है। और CNG vehicles का एक greener fuel.


(V) Petroleum's Prestige :

अब आप समझे कि crude oil क्यों आवश्यक है, क्योंकि crude oil है, तभी सब है, वरना कुछ नहीं। एक देश की अर्थव्यवस्था, रक्षा व्यवस्था, निर्माण व्यवस्था, सब कुछ निर्भर करता है crude oil पर।

अतः देश को सुदृढ़ और सुचारू रूप से चलाने के लिए crude oil का storage आवश्यकता से अधिक होना चाहिए। USA, China, Russia जैसे बड़े और विकसित देशों ने प्रचुर मात्रा में crude oil को store करके रखा है।

अगर भारत को इनसे मुकाबला करना है, तो उसको भी प्रचुर मात्रा में crude oil का storage करना होगा। 

भारत में 85% crude oil import किया जाता है। वैसे crude oil की खपत को कैसे कम किया जाए, इसके बहुत से उपाय किए जा रहे हैं और उनमें सफलता भी मिल रही है।


(VI) An appeal to all :

भारतीय जनता से appeal है कि वह भी कोशिश करे कि crude oil का wastage कम हो। व्यर्थ में सड़कें बर्बाद करना, diesel, petrol‌ और LPG की बर्बादी करना कम करें, बंद करें।

हम आम जनता,  crude oil को देश में लाने का प्रबंध नहीं कर सकते हैं, पर जितना देश में है और हम इस्तेमाल कर रहे हैं, उसका  सदुपयोग कर, उसको बचाने का काम तो कर ही सकते हैं।

याद रखिएगा- 

जब हम रखेंगे ध्यान, 

तभी बनेगा देश‌ महान!

Saturday, 14 March 2026

Article : The Politics of Petroleum

Iran और Israel के युद्ध में एक word बहुत अहम भूमिका निभा रहा है, और वो है Strait of Hormuz. “पर क्यों, युद्ध से ज्यादा यह महत्वपूर्ण कैसे है?”

“इससे सभी देश इतने affect क्यों हो रहे हैं?” “आखिर क्या है, इसके पीछे की वजह?”

आपके मन में भी ऐसे ही सवाल उठ रहे हैं ना? तो चलिए, इन सब का जवाब ढूंढते हैं, आज के इस article के साथ…

The Politics of Petroleum


(I) Closure of Strait of Hormuz: 

सबको लगता है कि Iran Strait of Hormuz को बंद कर सकता है। पर यह सरासर गलत है, Iran ने इसे बंद नही किया है। बंद किया है, तो London (UK - United Kingdom) ने।

पर उसकी सरकार ने नहीं, बल्कि insurance companies ने। पूरी दुनिया में कच्चे तेल का सबसे बड़ा source लगभग बंद ही हो गया।


(II) Cargo Ships and Missiles: 

हर दिन, करीबन 107 cargo ships सामान्य रूप से चला करते थे। पूरी दुनिया के लिए energy की lifeline. पर आखिरी हफ़्ते? सारे आंकड़े बदल गए।

केवल 19 ships चले। Traffic में 81% गिरावट देखी गई। एक भी missile नहीं। बस एक निर्णय, insurance companies ने coverage withdraw कर लिया।

आइए पहले यह समझते हैं की आखिरकार global shipping काम करती कैसे है।


(III) Global Shipping: 

सम्पूर्ण विश्व के 90% जहाज 12 maritime insurance clubs द्वारा insured हैं। ये clubs reinsurance markets पर निर्भर हैं, जिनमें से अधिकतर London में स्थित हैं।

जब युद्ध का risk बढ़ता है, तो reinsurers coverage वापस ले सकते हैं। और जब वो होता है, तब न ही कोई insurance, न ही कोई जहाज, और न ही कोई trade.

एक USD (United States Dollar - $) 150 million, या करीब 14 हज़ार करोड़ रुपये, का tanker insurance के बिना एक inch तक आगे नहीं बढ़ सकता।

मतलब Strait of Hormuz किसी navy द्वारा blocked नहीं था, blocked था तो एक spreadsheet के द्वारा। अब सवाल यह उठता है, कि इसका बुरा असर किस पर पड़ रहा है?


(IV) The Victims: 

  1. Iran- यहाँ के अधिकतर oil exports Hormuz के through निकलते हैं। अगर shipping कम होती है, तो; Iran export नहीं कर सकता, उसका war revenue गायब हो जाएगा। मतलब rhetorically, यह युद्ध सबसे पहले Iran को ही घायल करेगा।
  2. China- चीन Hormuz disruption के लिए सबसे exposed देश है। Hormuz से ~40% चीनी कच्चे तेल के आयात pass करते हैं, ~90% Iranian oil exports चीन के पास जाते हैं, और Qatar के LNG (Liquefied Natural Gas) shipments भी Hormuz पार करके ही चीन पहुँचते हैं। तो अगर यह route बंद होता है, तो चीन की energy security काँपने लगती है। इसीलिए Beijing ने जल्द-से-जल्द quick escalation की मांग की।
  3. Gulf Countries- Saudi Arabia, UAE (United Arab Emirates), Qatar, Kuwait, Iraq. उनके oil exports इसी पर निर्भर हैं, क्योंकि Hormuz के through ~20 million (2 करोड़) barrels हर दिन जाते हैं। और हाँ, इसका कोई दूसरा रास्ता भी नहीं है।


(V) The British Entry: 

यहीं पर अंग्रेजों का financial system बड़ी शातिरता और शांति से इस कहानी का एक अहम भाग बन जाता है। सदियों से London ने maritime insurance को dominate किया है, चाहे वो Lloyd के markets हों या global reinsurance. 

इसका मतलब कि जब London यह निर्णय लेता है, कि इसका risk बहुत ज़्यादा है, तो global shipping थम जाती है, वो भी बिना किसी blockade की ज़रूरत के।


(VI) Aftermath:

  1. Russia- Short term में यह रूस के लिए सहायक होगा। अगर gulf exports धीमे होते हैं, तो; oil prices बढ़ जाएँगे, रूसी तेल ज़्यादा कीमती हो जाएगा, Asia शायद रूसी तेल को खरीदे। बढ़े दाम मतलब Moscow (Russia's capital) के लिए ज़्यादा पैसा और ज़्यादा profit.
  2. India- भारत अपने तेल का ~85% आयात करता है, जिसमें से अधिकतर Middle East से आता है। अगर Hormuz disruption आगे भी रहती है, तो; shipping costs बढ़ जाएँगी, कच्चे तेल के दाम spike करेंगे, inflation का दबाव और भी बढ़ेगा। पर भारत अपना फ़ायदा कर सकता है diversification से; वो तेल खरीदे रूस से, gulf देशों से, और अन्य suppliers से।


(VII) Summary:

अगर Hormuz unstable रहता है, तो सबको और pay करना पड़ेगा। तो इससे यह समझा जा सकता है; कि geopolitics को presidents, generals और missiles control करते हैं।

पर कभी-कभी, असली gatekeepers होती हैं acturaies जो लंदन में risk models चलाते हैं। वो हथियार नहीं उठाते, probability देखते हैं। और जब आंकड़े काम नहीं आते, तो trade पूरी दुनिया में कहीं भी कभी भी काम नहीं कर पाती।


(VIII) Takeaway: 

अगर आपको modern geopolitics समझनी है, तो यह याद रखिएगा कि आज के जमाने में दुनिया को सरकारें नहीं, बल्कि systems चलाते हैं।

Insurance systems, energy systems, और financial systems. Missiles headline बनाती हैं, और risk models वास्तविकता।


तो अब आपको समझ आ गया होगा, कि क्या वजह है। साथ ही यह भी ज्ञात हो गया होगा कि बड़ी-बड़ी लड़ाइयां युद्धभूमि में उतार कर लाखों-करोड़ों को स्वाहा कर के नहीं, बल्कि कूटनीति के साथ बिना लड़े भी जीती जाती हैं।

लोगों को लड़ने के लिए प्रेरित करा के नहीं, बल्कि विश्व में शांति व्यवस्था स्थापित करा के की जाती है। और इतिहास गवाह है, कि जो इसमें निपुण हैं वही विश्व गुरु बनेगा। इशारा और अर्थ, आप दोनों समझ रहे होंगे…

Friday, 13 March 2026

Article : आर्थिक संकट, आप किस तरफ़?

Iran-Israel की बढ़ती हुई लड़ाई और उसमें USA का involve होना, इससे सम्पूर्ण विश्व में आर्थिक संकट के बादल छा रहे हैं। हर देश में crude oil, petrol, diesel और gas cylinder के दाम आसमान छू रहे हैं।

India भी अन्य देशों से इतर नहीं है, यहां भी कच्चा तेल, petrol, diesel और gas cylinder के दाम में बढ़ोतरी हुई है, पर उतनी नहीं जितनी अन्य देशों में हो रही है। कारण, मोदी जी व उनकी BJP सरकार इस ओर प्रयासरत हैं कि भारत देश में किल्लत न हो या कम से कम हो।

आर्थिक संकट, आप किस तरफ़?


बहुत से लोग कहेंगे कि क्या मोदी-मोदी और BJP सरकार के नारे लगा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि मोदी जी ने दिया ही क्या है महंगाई के अलावा?

पर हम सभी जानते हैं, मोदी सरकार के समय आए हर संकट के बादल का BJP सरकार ने डटकर सामना किया है और भारत को पहले से और सुदृढ़ अवस्था में लाया है। इससे भी उबर जाएंगे।

बस उसके लिए हम भारतवासियों को अपनी सरकार पर भरोसा करना होगा, साथ ही panic condition नहीं लानी है। किसी भी देश में संकट के बादल और गहरे तब हो जाते हैं, जब जनता panic करने लगती है।

अफवाहों के गर्म बाजार पर यकीन करके आनन-फानन में हर ग़लत काम में साथ देने लगती है। बस इसी का फायदा उठाते हैं मुनाफाखोर लोग। आप panic होकर gas cylinder और ration को महंगे दामों में न भरें।

अगर उचित मूल्य पर सब उपलब्ध है, तभी खरीदें। वो भी सिर्फ उतना ही, जितनी आपकी आवश्यकता है, उससे अधिक न भरें। क्योंकि कुछ लोगों के आवश्यकता से अधिक भरने से संसाधनों की आपूर्ति होने लगती है और महंगाई बढ़ जाती है।

भारत में हर तरह के संसाधन पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं, चाहे अनाज हों या सब्जी-फल, राशन हो या तेल। कुछ कम नहीं है, बस हम भारतवासियों को भी सूझबूझ से काम करना होगा।

आपको जानकर खुशी होगी कि वो ship, जिन पर भारत का झंडा लगा हुआ है, उन्हें Strait of Hormuz से निकलने का पूरा passage दिया गया है।

यह power है BJP सरकार की, हमारे विदेश मंत्री S. Jaishankar जी कि सूझबूझ और सजगता के चलते Iran ने भारत को Strait of Hormuz की permission दी है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दो भारतीय ship; Pushpak और Parimal, Mumbai के समुद्र तट पर पहुंच चुके हैं, जिनमें लगभग 1.35 lakhs ton crude oil है।

बाकी की व्यवस्था भी की जा रही है, और जल्द ही सब कुछ पहले जैसा समान्य हो जाएगा, ऐसी विकट परिस्थिति में थोड़ा इंतजार तो सहनीय है।

वैसे आप बताएं, जब देश में है आर्थिक संकट, तो आप हैं किस तरफ़? देश के साथ उसको आपदा से निकालने में, या सरकार पर दोषारोपण करके chaos फैलाने में? बताइएगा ज़रूर।

जय हिंद, जय भारत 🇮🇳 

यह Strait of Hormuz है क्या, और यह सभी देशों को कैसे प्रभावित कर रहा है, यह article कल share करेंगे।

So stay tuned 😊