आज शारदीय नवरात्र का समापन है, माँ दुर्गा और भगवान श्रीराम के विजयादशमी पर्व के साथ।
माँ दुर्गा और भगवान श्रीराम की कृपादृष्टि सदैव बनी रहे!
बस एक अपराध
राम और रावण के युद्ध में,
हुआ था बहुत रक्तपात।
रावण के अहंकार ने,
पूरा वंश कर दिया समाप्त।।
सोने की थी लंका उसकी,
राज्य में थी खुशियाँ अपार।
बस एक ही गलती से,
सब हुई तार-तार।।
त्रिकाल दर्शी, प्रकांड विद्वान,
भक्त शिरोमणि, था बहुत महान।
सब क्षणभंगुर हो गया था
पर-स्त्री का जब किया अपमान।।
पर, क्या एक अपराध ही,
होता है सब पर भारी?
शायद क्षम्य हो जाता,
गर साधु वेष न धरता अहंकारी।।
उस अपराध में शामिल था,
संत समाज का भी अपमान।
जिन्हें समझा जाता है,
ईश्वर के समान।।
गर वो, एक अपराध न करता वो,
साधु रूप न धरता वो।
तो इस तरह युगों-युगों तक,
अपराध बोध में न जलता वो।।
आइए, हम सब प्रभु श्रीराम से प्रार्थना करें कि हमें छोटे-बड़े सभी पापों से मुक्त रखें और अपने श्रीचरणों में रखकर हमारी भक्ति स्वीकार करें।
जय श्रीराम!


