16 मई का यह दिन बहुत ही शुभ योग लेकर आया।
जैसा कि आप जानते होंगे, कि अमावस्या में बरगद अमावस्या (वट सावित्री अमावस्या) को सबसे शुभ और सबसे बड़ी मानी गई है।
फिर इस अमावस्या के साथ सुहाग का इतना बड़ा पर्व भी जुड़ा हुआ है, अतः यह सबसे फलदाई भी मानी जाती है। इस बार संयोग यह है कि साथ में शनि जयंती भी है।
महायोग दुःख-कष्ट निवारण का
शनि जयंती :
हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को पड़ता है। इस साल शनि जयंती 16 मई को मनाई जा रही है।
- दुर्लभ संयोग- शनि जयंती शनिवार के दिन ही पड़ने के कारण इसे बेहद शक्तिशाली और शुभ माना गया।
- ज्योतिषीय महत्व- कर्म और न्याय के देवता शनि देव को समर्पित इस दिन विशेष पूजा-अर्चना और दान से साढ़े साती और ढैय्या के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
- पूजा और उपाय- इस दिन शनि मंदिरों में तेल चढ़ाने, व्रत रखने, हनुमान चालीसा का पाठ करने और गरीबों को दान देने का विधान है।
पूजा की विधि :
सबसे पहले घर पर पोछा कराते समय पानी में नमक डाल कर पोछा लगवाएँ। अगर आप की maid जा चुकी है, तो आप एक mug में पानी लेकर उसमें नमक डालकर मिलाएं। इस पानी को दहरी (जहां-जहां घर में दरवाजे हैं) पर छिड़क कर पोंछ दीजिए।
नमक वाले पानी का पोछा आप प्रत्येक शनिवार को भी लगवा सकते हैं, इससे negativity घर में नहीं आती है और सब शुभ होता है। उसके पश्चात व्रत रखकर वटवृक्ष के नीचे जाकर या वटवृक्ष की डाल को घर में लाकर विधिवत पूजा कीजिए।
पूरी पूजा विधि के लिए link पर click करें- वट सावित्री या बरगद अमावस्या व्रत
अगर आप के घर पर वटसावित्री व्रत नहीं किया जाता है, तब भी आप वटवृक्ष को जल अवश्य चढ़ाएं, इससे भी शुभ फल मिल जाएगा।
इस व्रत के प्रभाव से अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है, साथ ही पति-पत्नी का सुख-समृद्धि के साथ जीवन-यापन होता है और दोनों को एक-दूसरे का प्यार से परिपूर्ण साथ मिलता है।
शनिवार हनुमानजी का भी दिन माना जाता है, फिर ज्येष्ठ मास, हनुमान जी की पूजा का विशेष माह माना गया है। अतः सुन्दरकाण्ड पाठ, हनुमान चालीसा पाठ और हनुमान जी की आरती, इनमें से आप कुछ भी अवश्य कीजिए, यदि आप तीनों कर लें तो आप पर विशेष कृपा होगी।
हनुमान जी संकटमोचन हैं, हर तरह के दुःख-कष्ट निवारण के देवता। अतः जिसने इन्हें अपना इष्ट देव बना लिया, उसके तो सभी दुःखों का हरण करने के लिए वो खुद तत्पर रहते हैं।
शाम के समय में मंदिर जाकर हनुमान जी और शनिदेव के दर्शन करें, सरसों का तेल चढ़ाएं, दीया जलाएं व सुहाग के सामान, पांच फल (खरबूजा, तरबूज, खीरा, आम व केला), मेवा, मिठाई, पंखों आदि का दान कीजिए।
अगर आप के घर में शनि के तेल का दान मांगने या नींबू मिर्ची लगाने के लिए लोग आएं तो विशेष रूप से करें। रात्रि में 8 बजे पीपल के वृक्ष पर जल व तेल चढ़ाएं और दीया जलाएं।
सभी विधि दुःख-कष्ट निवारण हेतु किए गए प्रयास मात्र हैं, इन्हें करने से सुख समृद्धि के योग बनते हैं।
पूरा करना, आधा करना या नहीं करना आपकी इच्छा है। ईश्वरीय आराधना, ईश्वर तक अपनी बात पहुंचाने का जरिया होता है, पर पूर्ण फल हमारे कर्म और ईश्वर की कृपा पर निर्धारित होता है।
जय हनुमान जी, जय शनिदेव जी, जय वटवृक्ष! आप सभी हम सब के सभी दुःखों का निवारण कर सुख प्रदान करें।


