Thursday, 9 July 2026

Poem : जन्मदिवस पर स्नेहाशीष

एक माँ का अपने बेटे के लिए स्नेहाशीष…

जन्मदिवस पर स्नेहाशीष


मनुष्य जन्म को तब,

आधार मिलता है।

जब मां-पापा बनने का,

अधिकार मिलता है।

जीवन की बगिया में, 

वो जो पुष्प खिलता है।

सम्पूर्णता मिल गई हो जैसे, 

यह एहसास मिलता है।

अपने अस्तित्व को भूल,

मां-बाप उसमें ही खो जाते हैं। 

उसके इर्द-गिर्द ही अपनी, 

दुनिया सजाते हैं।

पर यह बच्चे पर भी,

निर्भर करता है।

सुखद जीवन मिले उन्हें,

वो अपने कर्मों से तय करता है।

फिर अगर मिल जाए,

अद्वय-सा बच्चा।

सुखद जीवन का स्वप्न,

हो जाए सच्चा।

कुशाग्र बुद्धि, बेहद सरल,

जैसे बहता अविरल जल।

जितना चंचल, उतना कोमल,

डिगे नहीं, चाहे हो जो पल।

संस्कृति, विज्ञान का वो संगम,

उजला तन उजला ही मन।

उसकी हर एक को कामना,

सुखद रहे जीवन उसका, 

यही है ईश्वर से मेरी प्रार्थना। 


हे ईश्वर, कोटि-कोटि आभार आपको, जैसे बच्चे की कामना होती है सबको, वैसा ही बच्चा आपने दे दिया हमको।

जन्मदिवस पर विशेष शुभकामनाएँ हमारे प्यारे बेटे अद्वय!

Wednesday, 8 July 2026

Article : सितारे superstar क्यों नहीं?

आज एक अलग ही बात मन में आई तो सोचा कि उसी पर लेखनी चलाई जाए, तो आज का topic है सितारे, stars.

आपने कभी सोचा कि यह stars हमें इतना लुभाते क्यों हैं, क्योंकि इनकी जगमगाहट हमें अपनी तरफ सम्मोहित करती है।

पर हमारा इनके प्रति इतना attraction का main reason है इनसे हमारी दूरी, इन तक हमारी न पहुंच पाने की क्षमता।

यह दूरी और हमारी यह अक्षमता इन्हें और भी special बनाती है। हमें इन्हें पाने की चाहत, इनके नजदीक जाने की, इन्हें छूने की इच्छा, हमारी छटपटाहट बढ़ाती है 

सोचिए, अगर यह हमारी range में होते, इन्हें छूना, इन्हें पाना, बहुत आसान होता तो? 

तो शायद यह attraction भी नहीं होता, star होना कुछ बड़ा नहीं होता…

सितारे superstar क्यों नहीं?


Stars की इस quality के कारण ही movies and serials के कलाकारों को star के नाम का दर्जा दिया गया।

कोशिश की गई कि जैसे ही कोई कलाकार limelight में आ जाए, मतलब hit or superhit हो जाए, वो आम इंसान से दूर हो जाए।

उनको मिलना, उनको देखना, next to impossible हो जाए।

रूपहले पर्दे पर उनका आना उन्हें जगमगाहट देता है और लोगों की पहुंच से दूर हो जाना, लोगों का उन्हें न देखना पाना, उन्हें न छू पाना, उनसे न मिल पाना, उनके fans में छटपटाहट बढ़ाता है। 

लोग उनकी एक झलक पाने के लिए घंटों इंतज़ार करते, उनके लिए अपने खून से पत्र लिखते, अपनी दीवानगी दिखाने के लिए उन्हें रिझाने के हर संभव असंभव प्रयास करते।

और जो जितने बड़े superstar or legend, उनसे दूरी उतनी अधिक और लोग उनके लिए उतने ही पागल।

लेकिन ऐसा उस समय में ज्यादा होता था, जब लोगों को अपने favourite stars को देखने का जरिया सिर्फ cinema halls हुआ करते थे।

पर आज जब movies देखना कोई बड़ी बात नहीं है, लोग घरों में बैठकर जब और जो चाहे वो movie देख सकते हैं। 

आज उन्हें बड़े पर्दे और special sound effects के लिए theatre नहीं जाना पड़ता है, सब कुछ घर में मौजूद है।

रही सही कसर Netflix, OTT cinema और social media पर stars की availability ने कर दिया।

अब stars की reaches बहुत easy कर हो गई है, जिसके कारण अब यह stars, superstar नहीं बन पा रहे हैं।

बाकी उनको star बनाना भी क्यों है जो हमसे दूरी बनाने के अलावा कुछ नहीं करते?

उन्हें star बनाना भी क्यों है जिनका दायरा केवल अभिनय तक सीमित है?

Star or superstar उन्हें बनाएं जिन्होंने देश के लिए कुछ किया हो, या उन्हें बनाएं जिन्होंने आपकी जिंदगी संवार दी। 

जिनके लिए आप सर्वोपरि हैं, जो आपके लिए हर दूरी मिटा दें। उन्हें star नहीं, अपना superstar बनाएं और जिंदगी को सरल और सफल बनाएं…

Tuesday, 7 July 2026

Story of Life : खुशी

खुशी


चंदू प्यारा-सा, छोटा-सा, नटखट बच्चा था। वो इतना चंचल था कि दिनभर मस्ती करता, पर किसी के हाथ नहीं आता। उसकी माँ वसुधा उसे संभालते-संभालते थक जाती, पर मजाल है कि चंदू दो पल को भी थककर बैठता।

एक दिन परेशान होकर वसुधा ने अपनी माँ शक्ति देवी को अपने घर बुला लिया। शक्ति देवी अपने नामानुसार बहुत शक्तिशाली थीं, इस उम्र में भी उनमें बहुत दम-खम था।

शक्ति देवी को देखकर वसुधा ने चैन की सांस ली, कि चलो अब कुछ दिन सुकून से निकलेंगे। चंदू को शक्ति देवी ने उसके पैदा होने के समय संभाला था, पर अभी व्यस्तता के चलते शक्ति देवी अपनी बेटी से चार साल से मिलने नहीं आ पाई थीं।

दरअसल शक्ति देवी अपने गांव की बहुत सफल मुखिया थी, साथ ही उनके बहुत बड़े खेत-खलिहान भी थे, जिनके रखरखाव की जिम्मेदारी पूरी उन्होंने ही उठा रखी थी, और पूरा गांव उनको बहुत मानता था। 

अभी खेत-खलिहान में बीज इत्यादि लगाकर उस तरफ से थोड़ी फुर्सत पाकर वो हफ्ते भर के लिए वसुधा और चंदू से मिलने आईं थीं। चंदू एक दिन तक तो शक्ति देवी से दूर-दूर रहा, पर जल्दी ही उनके साथ घुल-मिल गया।

क्योंकि शक्ति देवी ने उसके लिए बेहद स्वादिष्ट पकवान बनाए, उसे रात में बहुत अच्छी कहानियां सुनाईं और दिन में उसके साथ दुनियाभर के खेल खेले।

अब तो चंदू दिनभर अपनी नानी माँ के साथ ही रहता, उनके साथ खेलता, उनके हाथ से ही खाना खाता, उनके साथ ही सोता।

वसुधा, चंदू और शक्ति देवी सभी प्रसन्न थे। वसुधा चैन की सांस लेकर, चंदू अपनी नानी मांँ का साथ पाकर, और शक्ति देवी अपने नाती को लाड लड़ाकर।

एक हफ्ता कब गुजर गए, पता ही नहीं चला और शक्ति देवी के लौटने का दिन आ गया।

जब चंदू को पता चला कि नानी माँ जा रही हैं तो वो बहुत दुखी हो गया और भगवान से प्रार्थना करने लगा कि कुछ ऐसा हो जाए कि नानी माँ रुक जाएं। पर ऐसा हुआ नहीं, नानी माँ के लिए cab आ गई और वो station के लिए रवाना हो गईं।

चंदू बहुत ज़ोर-ज़ोर से रो रहा था कि नानी माँ लौट आइए।

वसुधा चंदू का रोना देखकर उसे भीतर ले गयी और चंदू को समझाने लगी, तभी खबर आई कि शक्ति देवी वापस आ रही हैं। सुनकर चंदू खुशी से चिल्ला-चिल्ला कर उछलने लगा, नानी माँ आ रही हैं।

जब शक्ति देवी आईं, तो पता चला कि cab से उतरते समय उनका balance गड़बड़ हुआ, जिससे वो काफी जोर से गिर गई और उनके पैर में बहुत तेज दर्द हो रहा है।

वसुधा माँ को लेकर तुरंत hospital पहुंच गई, वहां पता चला कि उनके पैर में fracture हुआ है और 3 महीने के bed rest की जरूरत है।

अब तो शक्ति देवी दिनभर bed पर रहतीं, वसुधा भी उनकी ही तिमारदारी में लगी रहती, इस तरह से नानी माँ लौट तो आईं पर दर्द से कराहते हुए और माँ से जो थोड़ा बहुत समय चंदू को मिलता था, वो भी अब नहीं मिल रहा था।

एक दिन नानी माँ के पास बैठकर चंदू रो रहा था, उन्होंने कारण पूछा, तो उसने रोते हुए कहा, “मैंने ही भगवान जी को बोला था, कैसे भी आप रुक जाओ और आपका accident हो गया। आप लौट तो आईं पर मेरा कोई फायदा नहीं हुआ, मुझे खुशी मिली ही नहीं।”

नानी माँ ने चंदू को चुप कराया और बोला कि “इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं, जो‌ होना था हो गया। पर बेटा, आगे से अगर तुम्हारी खुशी किसी और से भी जुड़ी हुई है तो, अपनी कामना के लिए प्रार्थना करने के साथ यह भी कहो, कि उसमें उसका कोई अनिष्ट न हो, बल्कि उसे भी लाभ हो, और तुम्हारी कामना तब पूर्ण हो, जब उसकी भी वही कामना हो। अपनी खुशी को पाने के लिए अगर दूसरे को दुःख पहुंचता है तो फिर ऐसी ही ग्लानि होती है। इसलिए ऐसा मांगो कि आपका और उसका दोनों का शुभ हो, तभी सच्ची खुशी मिलेगी।”

सुनकर चंदू मंदिर की ओर दौड़ गया और भगवान जी से प्रार्थना करने लगा, और बोला “मेरी नानी माँ को जल्दी ठीक कर दीजिए और वो तब तक रहें, जब तक वो ख़ुशी से रह सकें, क्योंकि जब वो खुश रहेंगी, तभी मैं भी खुश रहूंगा।”