Sunday, 18 October 2026

Recipe : Paneer Pops (the airfryer style) & Phalahari Chutney

नवरात्रि पर्व चल रहा है, जिसमें बहुत लोग पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं। यदि आप भी एक ही चीज खाकर bore हो गये हैं, तो हमारे fast special recipes के link पर‌ click करें- https://shadesoflife18.blogspot.com/search/label/Recipes%20-%20Fasts?m=0

आज इसी segment में एक और recipe share कर रहे हैं, यह easily और instantly बनने वाली less fat और most healthy dish है।

और सबसे बड़ी बात, यह fast की और recipes की तरह आप के carbs और fat में add-on नहीं करेगी। साथ ही आपके साथ ऐसी फलाहारी chutney share करेंगे, जो हर dish के साथ चार चांद लगा देगी।

Paneer Pops (the airfryer style) & Phalahari Chutney



Ingredients :

  • Fresh creamy paneer - 100 gm.
  • Almonds - 8 to 10 
  • Foxnuts - 50 gm.
  • Thick & creamy curd - 2 tbsp. 
  • Fresh coriander leaves - handful
  • Ginger - 1 inch
  • Green chillies - optional 
  • Pink salt - as per taste 
  • Ghee - 1 tbsp.


Method :

  • Foxnuts को crispy होने तक dry roast कर लीजिए, फिर इसे coarsely grind कर लीजिए।
  • एक mixer grinder jar लीजिए, उसमें धनिया, अदरक, दही, बादाम, और 5 से 7 मखाने में स्वादानुसार सेंधा नमक डालकर fine और thick paste बना लें।
  • पनीर के cubes काट लीजिए। इनको fine paste में अच्छे marinate कर दीजिए।
  • फिर इसे मखाने के coarse powder पर roll कर दीजिए, जिससे पूरे पनीर cubes पर मखाने की coat लग जाए।
  • Airfryer को 200°C पर preheat करें।
  • अब पनीर के टुकड़ों को silicon mould/steel plate में place कर दीजिए।
  • घी को गर्म कर लीजिए और सभी paneer pieces पर थोड़ा-थोड़ा sprinkle कर दीजिए।
  • 180°C पर 5 minutes और 200°C पर 5 minutes के लिए airfryer कर लीजिए। 
  • जो paste बचे, उसमें थोड़ा-सा पानी डालकर एक बार फिर grind कर लीजिए।

Crispy Paneer Pops and Phalahari Chutney is ready to serve. Enjoy your fast without any guilt!


Tips and Tricks :

  • पनीर पानी में भीगा हुआ न लें, otherwise वो बहुत ज्यादा पानी release करेगा।
  • मखाना भूनकर दरदरा ही पीसें, यही paneer pops को crispy और crunchy texture और taste देगा।
  • पनीर के cubes होने से coating अचछी‌ हो जाती है, हालांकि मखाने की coating के बाद proper cubic texture नहीं रहता है। 
  • हमने घी use किया है, क्योंकि घी को व्रत के भोजन के लिए ज्यादा appropriate मानते हैं। साथ ही घी से fast के लिए prepare की गई dish का taste enhance हो जाता है।
  • हम ने creamy paneer और thick and creamy curd लिया है, इसी से हम ghee or oil की quantity reduce करेंगे। इसलिए ध्यान रखिएगा कि curd creamy और thick रहे।
  • Curd thick न होकर runny होने से marinate करने में problem होगी।
  • आप घी डालना avoid करके इसे oil free भी बना सकते हैं, पर हमने थोड़ा-थोड़ा घी सिर्फ इसलिए डाला है, जिससे airfryer करते समय मखाने जल न जाएँ।
  • धनिया, अदरक, बादाम, हरी मिर्च, दही और मखाने से तैयार marination Paneer Pops के taste को next level पर ले जाता है।
  • Paneer pops के marination और coating के बाद बचे धनिया, marination paste, और coarse foxnut powder को आप mixer grinder jar में डालकर grind कर लीजिए। 
  • कुछ भी waste नहीं होगा और चटनी के साथ pops में चार चांद लग जाएंगे।
  • अगर आप के पास airfryer नहीं है, तो आप इसे pan में shallow fry भी कर सकते हैं। 

तो आज की शाम इसे ही माता रानी को प्रसाद स्वरूप चढ़ाएँ और चाय के साथ लुत्फ उठाएँ।

व्रत न होने पर भी आप इसे evening tea और kitty party or parties में as a starter serve कर सकते हैं।

जय माता दी! 

Saturday, 17 October 2026

India's Heritage : सप्तमी, अष्टमी‌ व नवमी अति-विशेष क्यों?

(I) The Major Dates :

सनातन धर्म में नवरात्रि पर्व का बहुत महत्व है। फिर शारदीय नवरात्रि पर्व का महत्व और अधिक माना जाता है।

और उसमें भी सप्तमी, अष्टमी‌ व नवमी को बहुत अधिक महत्वपूर्ण समझा जाता है। पर क्यों?

आज के India's Heritage segment में इसे ही share कर रहे हैं…

सप्तमी, अष्टमी‌ व नवमी अति-विशेष क्यों?


(II) Goddess Durga's Avatars :

सप्तमी, अष्टमी और नवमी नवरात्रि की सबसे महत्वपूर्ण तिथियां हैं, क्योंकि ये देवी दुर्गा के उग्र और शांत रूपों (कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री) की पूजा और उनकी शक्ति को समर्पित हैं।

इस समय विशेष हवन, कन्या पूजन, और माँ दुर्गा की विजय का उत्सव मनाया जाता है। यहाँ माता की असीम कृपा से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।


(III) Major Reasons :

  • Supreme Forms- सप्तमी को माँ कालरात्रि, अष्टमी को माँ महागौरी और नवमी को माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती है, जो शक्ति के सर्वोच्च स्वरूप हैं। 
  • Key Role of Kanya Pujan- अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन (कन्याओं को देवी का रूप मानकर भोजन कराना) किया जाता है। यह नवरात्रि पर्व का मुख्य भाग माना जाता है। जिससे माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। 
  • Receiving Asht Siddhis- इन दिनों की साधना से साधक को अणिमा, गरिमा, लधिमा, ईशित्व एवं वशित्व जैसी आठों सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।
  • Symbol of Victory and Peace- नवमी तिथि को माता ने असुरों (महिषासुर) का संहार किया था, इसलिए यह विजय, सुख-समृद्धि और ज्ञान का प्रतीक है। 
  • Completion of Yajna and Havan- इन दिनों किए गए हवन और उपवास से mental peace, energy में वृद्धि और आध्यात्मिक लाभ मिलता है, जो पिछले दिनों के व्रत को पूर्णता देते हैं। 
  • Yogini Worship- अष्टमी को महालक्ष्मी (ईशान कोण) और नवमी को ब्रह्माणी (पूर्व दिशा) योगिनियों की पूजा का भी विधान है।

संक्षेप में, ये दिन आध्यात्मिक ऊर्जा, आत्म-शुद्धि और माँ दुर्गा के दिव्य आशीर्वाद को प्राप्त करने के सबसे उत्तम समय माने जाते हैं।

यही कारण है नवरात्रि पर्व में सप्तमी, अष्टमी व नवमी को अति-विशेष कहते हैं। यही कारण है, इन्हें महासप्तमी, महाअष्टमी व महानवमी कहते हैं।

दुर्गा माता की जय!

Friday, 16 October 2026

India's Heritage : षष्ठी क्यों विशेष?

आज शारदीय नवरात्रि पर्व की षष्ठी है, जो कि बहुत विशेष है। पर आखिर किस तरह से विशेष?

आइए, बताते हैं आपको। 

सनातन धर्म में दोनों नवरात्रि (चैत्र और शारदीय) पर्व के प्रथम दिवस से ही विशेष मानते हैं।

लेकिन बंगाली समाज में, जिसमें दुर्गा माता को मुख्य विशेषता प्रदान की जाती है, उसकी मान्यता सनातन धर्म से कुछ अलग है।

वहाँ शारदीय नवरात्रि पर्व को अधिक महत्व दिया जाता है, तथा वहाँ नवरात्रि पर्व नवरात्र से एक दिन पहले, यानी महालया से प्रारंभ मानी जाती है।

महालया की क्या विशेषता है, यह हम आपको अगले साल महालया के दिन ही बताएंगे। आज षष्ठी है, तो विशेषता भी षष्ठी पर्व की ही बताते हैं…

षष्ठी क्यों विशेष?


आप कहेंगे कि हम तो बंगाली नहीं हैं, फिर कैसे बताएँगे?

तो ऐसे, कि हमारे पति की पहली posting Durgapur (West Bengal) में ही थी।

साथ ही अभी भी, हम जब दिल्ली में रहते हैं, तो यहाँ भी शारदीय नवरात्रि पर्व Bengali culture से ही मनाते हैं।

पंडाल अपनी पूर्ण सजावट से सुसज्जित हो चुका है, माता रानी का आगमन हो चुका है और इस विशेष आयोजन ने ही हमें आज की post India's Heritage segment में लिखने को प्रेरित किया है‌।

हाँ तो आप को बता दें, महालया से प्रारंभ तो होता है, लेकिन वो rituals केवल मातारानी की मूर्ति के लिए होता है।

लेकिन माता रानी के पंडाल की सम्पूर्ण सजावट और माता रानी का आगमन नवरात्रि पर्व की षष्ठी में ही होता है।

बंगाली पूजा-पंडालों में माँ दुर्गा का आगमन और उनका आह्वान मुख्य रूप से महाषष्ठी की शाम को ‘Bodhan’ नामक अनुष्ठान के साथ होता है।

महाषष्ठी की शाम को देवी का बोधन और आह्वान किया जाता है, जिससे उनकी आंखें खोली जाती हैं और प्राण-प्रतिष्ठा की प्रक्रिया होती है।

एक विशेष परंपरा के अंतर्गत इससे पहले पंचमी के दिन ‘कल्पारंभ’ और बेल के पेड़ के नीचे मां को निमंत्रण देने की रस्म होती है, और षष्ठी की संध्या बेला में माँ का पंडाल में वास्तविक आगमन माना जाता है।

जिसमें माँ दुर्गा की विशाल मूर्ति महिषासुर का मर्दन करते हुए, और माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती, गणेश जी और कार्तिकेय जी की मूर्तियां होती है।

दुर्गा माता की मूर्ति से थोड़ी छोटी बाकी मूर्तियां होती हैं। सभी भगवान जी की मूर्तियाँ अपने-अपने वाहन‌ पर आसीन होती है।

इस तरह से बंगाल में शारदीय नवरात्रि पर्व का मुख्य आरंभ षष्ठी से आरंभ होकर विजयादशमी पर्व तक सिंदूर खेला के पश्चात् मूर्ति विसर्जन तक होता है।

नवरात्रि पर्व के षष्ठी के साथ ही वो पूर्णतः माँ को समर्पित हो जाते हैं। इन दिनों पढ़ाई-लिखाई, कामकाज, सब माँ को समर्पित रहता है।

घर में विभिन्न कार्य जैसे भोजन इत्यादि बनाना सब पंडाल में ही रहता है। अर्थात् सब को छोड़कर, सिर्फ और सिर्फ माँ की भक्ति।

विभिन्न तरह के cultural programmes भी पंडाल में आयोजित किए जाते हैं।

इसलिए ही बंगाल को आज भी culturally rich कहा जाता है।

यही कारण है कि षष्ठी को शारदीय नवरात्र में विशेष महत्त्व दिया जाता है।

वैसे हमारे लिए यह एक और कारण से भी विशेष है, क्योंकि शारदीय नवरात्रि पर्व की षष्ठी को ही मातारानी ने हमें कन्या रूपी बहुमूल्य रत्न प्रदान कर माँ बनने का विशेष सौभाग्य प्रदान किया था।

बोलो दुग्गा माई की जोय!