Monday, 12 October 2026

India's Heritage : The Navrang of Navratri

शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो चुका है (11 October से 19 October 2026) जो नौ दिनों का है।

शरद ऋतु में जग-जननी माँ जगदम्बा ने महिषासुर मर्दन करने में नौ रूप धारण किए थे, इसलिए ही इन्हें शारदीय नवरात्रि पर्व कहा जाता है। 

नौ रूप, नौ दिनों, और हर एक दिन के लिए नौ रंग निर्धारित रहते हैं। वो नौ रंग कौन से हैं और किस कारण से विशेष दिन के लिए विशेष रंग निर्धारित रहते हैं?

आइए, आज इसे ही share कर देते हैं, जिससे कि आप इन नौ दिनों में उसके अनुसार ही वस्त्र धारण करें और माता रानी को प्रसन्न कर उनकी कृपा प्राप्त करें।

नवरात्रि के नवरंग


नौ दिनों के शुभ रंग और देवी के स्वरूपों की सूची इस प्रकार है।

  • Day 1 (11) {प्रतिपदा}- माँ शैलपुत्री की पूजा:- नारंगी (orange) [उत्साह और positivity का प्रतीक] धारण करें 
  • Day 2 (12) {द्वितीया}- माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा:- सफेद (white) [शांति और पवित्रता का प्रतीक]
  • Day 3 (13) {तृतीया}- माँ चंद्र घंटा की पूजा:- लाल (red) [साहस और शक्ति का प्रतीक]
  • Day 4 (14) {चतुर्थी}- माँ कूष्मांडा की पूजा:- Royal Blue [भव्यता और स्थिरता का प्रतीक]
  • Day 5 (15) {पंचमी}- माँ स्कंदमाता की पूजा:- पीला (yellow) [खुशी और बुद्धिमत्ता का प्रतीक]
  • Day 6 (16) {षष्ठी}- माँ कात्यायनी की पूजा:- हरा (green) [प्रकृति और नए जीवन का प्रतीक]
  • Day 7 (17) {सप्तमी}- माँ कालरात्रि की पूजा:- धूसर (grey) [संतुलित सोच का प्रतीक]
  • Day 8 (18) {अष्टमी}- माँ महागौरी की पूजा:- बैंगनी (purple) [महत्वाकांक्षा और आध्यात्मिकता का प्रतीक]
  • Day 9 (19) {नवमी}- माँ सिद्धिदात्री की पूजा:- मोर हरा (peacock green) [समृद्धि और विशिष्टता का प्रतीक]

माँ का हर रूप निराला है, और उनके हर दिन का हर रंग अनोखा है। वैसे तो हर रंग माँ की विशेषता के अनुरूप ही निर्धारित किए गए हैं।

लेकिन पूजा-पंडाल kitty party इत्यादि के लिए रंगों का महत्व है। अन्यथा, माँ को जिन रंगों से सबसे अधिक प्रसन्न कर सकते हैं वो नौ रंग हैं:-

  • भक्ति का रंग
  • समर्पण का रंग
  • आस्था का रंग
  • अटूट विश्वास का रंग
  • अटूट श्रद्धा का रंग
  • सत्यनिष्ठा का रंग
  • दया का रंग
  • कर्तव्यनिष्ठता का रंग
  • प्रेम का रंग

जो इन नौ रंगों में रंगा हुआ है, माँ उससे सदैव प्रसन्न रहती हैं, अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखती हैं।

बाकी वस्त्रों का रंग तो बाह्य आवरण है, उनसे ज़्यादा आंतरिक रंगों का महत्व है, उन रंगों में खुद को रंग कर भक्ति में लीन हो जाएँ।

जयकारा शेरावाली दा!

Sunday, 11 October 2026

Bhajan (Devotional Song): मैने तेरे ही भरोसे मैय्या,

आज से शारदीय नवरात्र आरंभ हो गया, माँ के आगमन पर यह भजन हम सभी भक्तों की ओर से जग-जननी माँ दुर्गा, जगदंबा के श्री चरणों में समर्पित है।

माँ के स्वरूप, माँ लक्ष्मी, माँ काली, माँ शारदा को समर्पित है…

मैंने तेरे ही भरोसे मैय्या



मैंने तेरे ही भरोसे मैय्या,

सागर में नैया डाल दई।।

काहे की वा नाव बनाई,

काहे की पतवार,

मैय्या काहे की लगा दी जंजीर,

सागर में नैया डार दई।

मैने तेरे ही भरोसे मैय्या,

सागर में नैया डाल दई।।


दुर्गा नाम की नाव बनाई,

भक्ति की पतवार,

ओ मैय्या ज्ञान की लगा दी जंजीर,

सागर में नैया डार दई।

मैने तेरे ही भरोसे मैय्या,

सागर में नैया डाल दई।।


कौन सखी वामें बैठनहारे,

कौन है खेवनहार,

मैय्या कौन लगाहे बेड़ा पार,

सागर में नैया डार दई।

मैने तेरे ही भरोसे मैय्या,

सागर में नैया डाल दई।।


शारदा मैया बैठनहारी,

काली खेवनहार,

मोरी लक्ष्मी जी लगावे बेड़ा पार,

सागर में नैया डार दई।

मैने तेरे ही भरोसे मैय्या,

सागर में नैया डाल दई।।


भक्तों की है आस मैय्या से,

चरणन में बलिहार,

मोरी दुर्गा जी लगाहे बेड़ा पार,

सागर में नैया डार दई।


मैने तेरे ही भरोसे मैय्या,

सागर में नैया डाल दई।।


मैंने तेरे ही भरोसे मैय्या,

सागर में नैया डाल दई।।




पूरे भजन का आनंद लेने के लिए इस link पर click करें-

हे माँ, आपके ही श्रीचरणों में अपनी जीवन-रूपी नैय्या डाल दी है। माँ, हम सभी भक्तों का कल्याण करें।

शारदीय नवरात्रि पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएँ !


बोलो दुर्गा माई की जय!

Saturday, 10 October 2026

India's Heritage : दानवीर कर्ण के पितृ

पितृपक्ष चल रहे थे, जिनका समापन आज, सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। सर्वपितृ अमावस्या को सनातन धर्म में बहुत बड़ा दिन माना जाता है।

कहा जाता है कि अगर आप को अपने पितरों की तिथि नहीं याद है, या किसी वजह से आप पूजा-अर्चना नहीं कर सकें हैं, तो आज के दिन पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

जैसा कि नाम से ही विदित है, सर्वपितृ अर्थात सभी पितरों के लिए, तो इस एक दिन पूजा-अर्चना, दान-पुण्य, हवन इत्यादि करने से आप अपने सभी पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं, तृप्त कर सकते हैं।

अब कुछ प्रश्न मन में आते हैं, कि “पितृपक्ष का आरंभ कब से हुआ? क्या पितृपक्ष का औचित्य सनातन धर्म में समझाया गया है? क्या किसी पौराणिक कथा में इसका वर्णन है?”

दानवीर कर्ण के पितृ


जी हाँ, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस कथन की पुष्टि करने के लिए एक कहानी का वर्णन है।

और इस कहानी का मुख्य पात्र कोई और नहीं, बल्कि जगत में दानवीर के नाम से सुप्रसिद्ध कर्ण है।

आइए, उसी कथा से समझते हैं कि क्यों आवश्यक है, पितृपक्ष में अन्नदान का महत्व।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, पितृपक्ष और श्राद्ध की शुरुआत महाभारत काल और दानवीर कर्ण की इस प्रसिद्ध कथा से जुड़ी मानी जाती है-

कहा जाता है, महाभारत के युद्ध में मृत्यु के बाद जब दानवीर कर्ण की आत्मा स्वर्ग पहुंची, तो उन्हें भोजन के रूप में सोना और रत्न परोसे गए।

  • Gold Cuisines- वहाँ भूख लगने पर कर्ण को भोजन की थाली परोसी गई। कर्ण ने जब भोजन ग्रहण करना चाहा, तो सारा भोजन सोने के टुकड़े और आभूषण में बदल जाता था। कर्ण यह देखकर हैरान हो गया, तब कर्ण ने देवराज इंद्र से इसका कारण पूछा।
  • Indra Dev's Reply- इंद्रदेव ने कर्ण को बताया कि उन्होंने जीवनभर सोना और धन तो दिल खोलकर दान किया था, लेकिन अपने पूर्वजों (पितरों) के निमित्त कभी अन्न, जल या तर्पण नहीं किया था।
  • Lack of Knowledge and Penance- कर्ण ने विनम्रता से कहा कि वे तो जीवनभर यह जानते ही नहीं थे कि उनके असली माता-पिता और पूर्वज कौन हैं, क्योंकि उनका पालन-पोषण राधा और अधिरथ ने किया था। इसलिए उन्होंने कभी उनके नाम से श्राद्ध या अन्नदान नहीं किया।
  • An Opportunity- कर्ण की यह समस्या और उनकी उदारता को देखकर उन्हें अपनी भूल सुधारने के लिए 15 से 16 दिनों के लिए पुनः पृथ्वी पर लौटने की अनुमति दी गई।
  • Donation and Food- धरती पर आकर कर्ण ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए 16 दिनों तक विधि-विधान से श्राद्ध किया, पिंडदान किया, तर्पण किया और जरूरतमंदों को भरपेट अन्न, जल व वस्त्रों का दान किया।
  • Beginning of Pitri-Paksha- जब कर्ण के ये 16 दिन पूरे हुए और वे वापस स्वर्ग लौटे, तब उनकी भोजन की थाली सोने के बजाय असली अन्न से भरी हुई थी। मान्यता है कि कर्ण द्वारा किए गए इन्हीं 16 दिनों के अनुष्ठान के बाद से ही पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष) की शुरुआत हुई, ताकि लोग अपने-अपने पितरों को याद कर उनका तर्पण कर सकें।

सनातन धर्म में पौराणिक कथाओं के माध्यम से हमें सरल व सटीक उपाय बताए जाते हैं, जिससे हम सहजता से उसे अपना सकें। 

सभी पितरों को सादर प्रणाम, आप सब की कृपादृष्टि सदैव हम सभी पर बनी रहे...