(I) Mohini Avatar :
आज मोहिनी एकादशी है। भगवान श्रीहरि के मोहिनी स्वरूप की आराधना की एकादशी। ऐसे स्वरूप की जिसका जो नाम है, वही प्रभाव भी। अर्थात् ईश्वर की साधना में मोहित होकर सर्वस्व प्राप्त कर लेना।
जी हाँ, सर्वस्व प्राप्त कर लेना। मुख्यतः कहा जाता है कि ईश्वर की आस्था में लीन होकर सर्वस्व न्यौछावर कर दो, पर यह ऐसा व्रत है, जो आपको सांसारिक सुखों की प्राप्ति से लेकर मोक्ष तक सब प्रदान करता है।
(II) Vishnu's Dashavatar :
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु के प्रमुख 10 अवतार (दशावतार) माने जाते हैं, जो पृथ्वी पर धर्म की स्थापना के लिए लिए गए थे। हालांकि श्रीमद्भागवत पुराण और अन्य ग्रंथों में मुख्य रूप से 24 अवतारों का भी वर्णन मिलता है। ये हैं विष्णुजी के दशावतार :
- मत्स्य (मछली)
- कूर्म (कछुआ)
- वराह (सूअर)
- नरसिंह (नर-सिंह)
- वामन (बौना ब्राह्मण)
- परशुराम
- राम
- कृष्ण
- बुद्ध
- कल्कि (भविष्य का अवतार)
इनमें से अब तक 23 अवतार अवतरित हो चुके हैं, जबकि 24वां (कल्कि अवतार) अभी होना बाकी है। इनके अलावा देवताओं की रक्षा हेतु भगवान श्रीहरि विष्णु जी ने एक स्वरूप भी धरा था और वो था मोहिनी का स्वरूप।
भगवान विष्णु जी का स्त्री स्वरूप सम्पूर्ण ब्रह्मांड में उपस्थित सबसे ज्यादा खूबसूरत स्त्री स्वरूप। प्रभु श्रीहरि विष्णु का हर स्वरूप मन को मोह लेता है, लेकिन भगवान श्रीहरि का मोहिनी स्वरूप हर एक को सर्वाधिक मोहित करता है।
आइए जानते हैं इसके विषय में...
Mohini Ekadashi
(III) Ekadashi :
हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व है। बता दें कि एक साल में कुल 24 एकादशी होती है। लेकिन इस साल अधिकमास होने के कारण कुल 26 एकादशी पड़ने वाली है। ऐसे ही वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है।
वैशाख के शुक्लपक्ष में मोहिनी नाम से प्रसिद्ध एकादशी आती है। मोहिनी एकादशी को उपवास करने आपके लिए एक नहीं कई लाभ होते हैं। भगवान विष्णु की कृपा तो मिलती है, साथ ही सभी पाप भी नष्ट हो जाते हैं। अनेक जन्मों के किए हुए महापाप भी नष्ट हो जाते हैं। इसलिए मोहिनी एकादशी का व्रत जरूर करना चाहिए।
पहले जान लेते हैं कि भगवान श्रीहरि ने मोहिनी स्वरूप क्यों धारण किया था।
(IV) Reason behind Mohini :
पौराणिक कथा के अनुसार यह सतयुग में समुद्र मंथन को अंतिम स्वरूप प्रदान करने के लिए भगवान श्री हरि ने मोहिनी स्वरूप धारण किया था। पर ऐसा क्या हुआ था, जिसके कारण समुद्र मंथन हुआ था? आइए विषयवार इस को समझते हैं।
(V) Samudra Manthan :
- Time- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह घटना सत्ययुग में हुई थी।
- Reason- ऋषि दुर्वासा के श्राप से इंद्र और अन्य देवता श्रीहीन (शक्तिहीन) हो गए थे, जिसे पुनः प्राप्त करने के लिए मंथन आवश्यक था।
- Equipments- मंदराचल पर्वत को मथानी और वासुकी नाग को रस्सी (नेती) बनाया गया था।
- Base- भगवान विष्णु ने कूर्म (कछुआ) अवतार लेकर मंदराचल पर्वत को अपने कवच पर धारण किया था।
- Conclusion- मंथन से 14 रत्न निकले, जिनमें विष (हलाहल), अमृत कलश, माता लक्ष्मी, और ऐरावत हाथी जैसे बहुमूल्य रत्न शामिल थे।
आपको बता दें कि भगवान श्रीहरि ने मोहिनी रूप धर कर देवताओं को अमृतपान कराया था, इसलिए मोहिनी एकादशी का व्रत बहुत खास है।
मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय जब अमृत निकला था, तब उसे राक्षसों से बचाकर देवताओं को प्रदान करने के लिए भगवान श्री विष्णुजी ने मोहिनी अवतार धारण किया था और धर्म की रक्षा की थी।
इसी कारण मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णुजी की विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और हर तरह के पापों से भी मुक्ति मिल सकती है।
(VI) Date & Time in 2026 :
मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन व्रत में मोहिनी एकादशी व्रत कथा का श्रवण करें, ये हजारों गायों को दान करने के समान पुण्य देता है।
ये व्रत तमाम तरह के मोह, बुरे कर्म से मुक्ति दिलाकर सही राह पर चलने की शक्ति देता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति के तमाम पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे राजसुख प्राप्त होता है। अगर आपको मोहिनी एकादशी व्रत की सम्पूर्ण कथा जाननी है, तो हम अगली मोहिनी एकादशी में उसे ही साझा करेंगे।
साथ ही आप को आगे यह भी बताएंगे कि दशमी-एकादशी योग या एकादशी-द्वादशी योग में से कौन-सा अधिक शुभ मुहूर्त है। अतः जुड़े रहें Shades of Life से आस्था और विश्वास के साथ।
बोलो भगवान श्रीहरि की जय!


