Friday, 11 September 2026

Tip : Black Hair

हम इंसानों की एक फितरत होती है, कि हम कभी भी बूढ़ा नहीं होना चाहते हैं। उसे जितना रोका सकते हैं, रोकना चाहते हैं।

Ageing को रोका तो नहीं जा सकता है, पर हाँ थोड़ा delay अवश्य किया जाता है।

Ageing में एक effect बालों का सफ़ेद होना भी है।

बाल लम्बे समय तक काले कैसे रहें और उनके बारे में और जानकारी आपको इन links को click करके मिल जाएगी-

पर अगर हो गए हैं तो उन्हें naturally काला कैसे किया जाए, आज उसकी ही tip share कर रहे हैं…

Black Hair


Ingredients :

  • Onion Seeds - 1 tbsp.
  • Gooseberry - 1 tbsp. 
  • False Daisy - 1 tbsp.
  • Curd - 1 tbsp.


Method :

  1. मगरैल को थोड़ा-सा भून कर पीस लें, उसमें आंवला powder और भृंगराज powder डालकर मिला लें, उसमें दही डालकर अच्छे से mix कर लीजिए। 
  2. इसे सिर पर लगाकर 15 min रखें, फिर धो लें।
  3. ऐसा सात हफ्ते में एक दिन करके result खुद देखें कैसा रहा।
  4. अगर आप संतुष्ट हों तो आगे भी जारी रखें।

Note:

सारी ही natural चीजें हैं, अवश्य फायदा करेंगी और अगर न करें तो भी नुकसान बिल्कुल नहीं करेगी।


Disclaimer :

The tips and remedies mentioned above are only for general information, and have been stated on the basis of experiences. They might be beneficial, but no guarantee about effective results could be taken. It can also never substitute any kind of medication. Consult a doctor for more information and before any kind of medication. Remember, only doctors can completely help someone become healthy and healthier.

Thursday, 10 September 2026

Story of Life : मजबूरी का सौदा (अंतिम भाग)

मजबूरी का सौदा (भाग-1) के आगे…

मजबूरी का सौदा (अंतिम भाग)


उसने पूरे गांव में मुनादी करवा दी, कि जिसने-जिसने भी उससे पैसे उधार लिए थे, वो सब जिस भी हालात में हैं, आज तुरंत ही उसके घर पर पहुंचे।

अब पैसा उधार लिया था, तो जाना तो पड़ता ही। सब पहुंच कर हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाने लगे, थोड़ी और मोहलत दे दें वो जल्दी ही सारा पैसा चुका देंगे। वैसे भी उनके पास गिरवी रखने को और कुछ नहीं है।

रमाकांत ने सबको शांत किया और सबके सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि रमाकांत को आज क्या हो गया है?

रमाकांत ने कहा- “शिवा मेरा एकलौता बेटा है और बहुत बीमार है। उसका बहुत इलाज कराया है, गांव में बड़े-बड़े शहरों के बड़े-बड़े hospitals में दिखाया पर कोई उसे ठीक नहीं कर पा रहा है।”

“फिर एक बहुत महान बाबा के पास गया, तो उन्होंने कहा कि मेरे काम के दुष्प्रभाव के कारण ही मेरा बेटा इतना बीमार पड़ गया है और ठीक नहीं हो रहा है।”

“उनका कहना था कि तुम लोगों को पैसे उधार देकर तुम्हारी मदद नहीं कर रहा हूं, बल्कि बदले में अपने और अपने परिवार के लिए हाय एकत्रित कर रहा हूं। मैं मजबूरी का सौदा करता हूं।”

“इसलिए आज मैं तुम लोगों के सारे पशु, ज़मीन, घर वापस कर रहा हूं। और आगे से ब्याज पर पैसा नहीं दूंगा।”

यह सुनकर सब बहुत खुश हो गये कि उनके पशु, जमीन और घर वापस मिल जाएंगे। पर जब पता चला कि आगे से पैसा उधार नहीं मिलेगा, सुनकर सब दुःखी भी हो गये कि आगे ज़रूरत पड़ने पर किससे पैसा उधार मांगगे?

सब समवेत स्वर में बोलने लगे, “साहूकार जी, भले हमारा सब कुछ गिरवी रखा रहने दीजिए, पर अगर आप पैसा उधार नहीं देंगे तो हम किस दर पर जाएंगे? कौन हमारा माई-बाप है?”

रमाकांत ने कहा- “मैंने ब्याज पर पैसा देने को मना किया है, उधार देने को नहीं। मैं ज़रूरतमंदों को पैसा उधार दे दूंगा, लेकिन दोबारा उधार पहले का पैसा चुकता हो जाने पर ही दूंगा।”

रमाकांत साहूकार के दयावान स्वरूप को देखकर गांव वालों ने उसकी खूब जय-जयकार की, फिर उसके बेटे शिवा के जल्दी ठीक होने की कामना करते हुए वो ख़ुशी-ख़ुशी अपने घर लौट गए।

चंद दिनों में ही शिवा के स्वास्थ्य में सुधार होने लगा और वह पूर्णतः ठीक हो गया।

रमाकांत समझ चुका था कि मजबूरी का सौदा करके नहीं, बल्कि मजबूरों की मदद करने में सच्ची खुशी है।

रमाकांत को पूरे गांव ने सिर आंखों पर बैठा लिया, अब उसके पास बहुत अधिक धन-दौलत नहीं थी, पर लोगों के मन में उसके लिए मान-सम्मान और प्यार बहुत अधिक था..

Wednesday, 9 September 2026

Story of Life : मजबूरी का सौदा (भाग-1)

मजबूरी का सौदा (भाग-1)


रमाकांत साहूकार ब्याज पर पैसा उधार दिया करता था। उसकी चौखट पर न जाने कितने गरीबों की line लगी रहती थी।

ऐसा नहीं है कि रमाकांत ने नया धंधा शुरू किया था, साहूकारी का काम उसका पुश्तैनी था। पर उसके बाप-दादा ब्याज दर कम रखते थे।

लेकिन रमाकांत का मानना था कि जब यही एक धंधा करना है, तो मुनाफे के साथ करेंगे। 

अधिक दर होने के कारण ब्याज के लिए पैसे न चुकाने के कारण उनकी बैल, जमीन, घर, धीरे-धीरे सब गिरवी रख जाते थे। पर कर्जा फिर भी ख़त्म नहीं हो पाता था। 

गरीब करते भी क्या? पूरे गांव में उसके जितना अधिक पैसा कोई नहीं देता था। एक वही था, जो ज़रूरत पड़ने पर सबसे अधिक पैसा दे देता था।

साथ ही वो कोई बेईमानी भी नहीं करता था, क्योंकि वो पैसे देते समय ही ब्याज दर बता देता था, इस हिदायत के साथ कि पैसा न चुकाने पर पशु, जमीन और घर गिरवी रख लेगा।

ऐसा होते-होते गांव के लगभग आधे घरों के लोगों के पशु, जमीन और घर गिरवी हो गये थे। अब वे अपना खेत जोतते थे, पर उसका ¼ पैसा अपने पास रख पाते थे, बाकी सब रमाकांत के घर पहुंच जाता।

इस तरह से बिना मेहनत और कामकाज के रमाकांत बहुत धनाढ्य व्यक्ति हो गया।

एक दिन…

आगे पढ़ें, मजबूरी का सौदा (अंतिम भाग) में…