Monday, 31 August 2026

Article : Ageing - A Process

I. Introduction :

उम्र बढ़ने का कोई एक “दिन” नहीं होता, बल्कि यह एक continuous process है जो विभिन्न physical, mental और social परिवर्तनों का एक combination है।

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि 45 से 55 years की आयु के बीच उम्र बढ़ने की process तेज हो जाती है, खासकर blood vessels पर इसका असर सबसे ज्यादा होता है। 

हालांकि, स्वस्थ lifestyle, exercise, balanced diet और mental health का ध्यान रखकर आप उम्र बढ़ने की process को धीमा कर सकते हैं और जीवन की quality बनाए रख सकते हैं…

Ageing - A Process


II. Physical Symptoms :

  • Blood Vessels- 45 से 55 years की आयु के बीच blood vessels सख्त होने लगती हैं, जिससे शरीर के विभिन्न अंगों पर असर पड़ता है। 
  • Weakened Muscles-  उम्र बढ़ने के साथ muscles की ताकत स्वाभाविक रूप से कम होती है, लेकिन exercise से इसे रोका जा सकता है। 
  • Neural Reduction- Neurons में गिरावट आती है, जिससे नई जानकारी को process करने में अधिक समय लगता है। 
  • Hormonal Changes- महिलाओं में menopause (रजोनिवृत्ति) के दौरान hormonal बदलाव होते हैं जो उम्र बढ़ने से जुड़े होते हैं। 


III. Slowing Down Ageing :

  • Controlled Exercise- Physical fitness मस्तिष्क कोशिकाओं को संरक्षित करने और neurogenesis (नई कोशिकाओं का जन्म) को बढ़ावा देती है, जिससे उम्र बढ़ने की गति धीमी होती है। 
  • Balanced Diet- Antioxidants से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे जामुन, मछली और dark chocolate का सेवन त्वचा और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। 
  • Adequate Sleep- 7 से 9 घंटे की निर्बाध गहरी नींद mental health के लिए ज़रूरी है और समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखती है। 
  • Mental Care- Mental रूप से सक्रिय रहना और सकारात्मक दृष्टिकोण रखना स्वस्थ उम्र बढ़ने में मदद करता है। 


IV. Summary :

उम्र बढ़ना एक प्राकृतिक process है। इसे रोकने के बजाय, स्वस्थ आदतों को अपनाकर आप उम्र बढ़ने के साथ जीवन की quality में सुधार कर सकते हैं और सक्रिय रह सकते हैं। 

Saturday, 29 August 2026

Article : यादों का झरोखा

कभी-कभी लगता है कि पुराने दिन कितने अच्छे थे, हम सब मिलकर कितना आनंद करते थे।

काश कोई ऐसा दरवाजा होता है, जिससे हम अपने पुराने दिनों में लौट जाते, और यादों की गलियों में घूम आते।

पर कोई दरवाजा नहीं होता है पुराने दिनों में जाने का। हाँ, लेकिन यादों का झरोखा अवश्य होता है…

यादों का झरोखा


इसको खोलकर आप उन पलों को चंद क्षणों में जी अवश्य लेते हैं। और वो हम सबके मन में मौजूद होता है, कभी समय निकाल कर खोल कर देखिए, याद आएगा।

कि दिन-रात भाईयों-बहनों के साथ मिलकर, कुछ भी काम करने का आनन्द ही कुछ और था। काम तो खूब करते थे, पर जिम्मेदारियां कुछ नहीं थी। 

सिर पर माता-पिता का हाथ था, जिसने यह कभी न खत्म होने वाली बेहद थकाने वाली जिम्मेदारियों का एहसास ही नहीं होने दिया।

अपनों का साथ, माँ-पापा का आशीर्वाद, इससे कभी जिंदगी बोझिल ही नहीं हुई। हमेशा आगे बढ़ते जाने और कुछ पाने का नाम ही लगा जिंदगी।

वो दादी-नानी की कहानियों का भंडार,

उनके अनुभवों का निचोड़ है संसार।

मामा-मामी और मौसी-मौसा का ढेर सारा प्यार।

चाचा-चाची के साथ मस्ती अपार,

और बुआ-फूफा के आने का इंतजार।

वो सहेलियों के संग घंटों की बातें,

किसी के घर आने पर स्वागत-सत्कार।

अपने तो छोड़ो, पराए लोगों से भी मिलता था प्यार।

न जाने हम कब इतने बड़े हो गए,

अपनों से ही दूर जाकर खड़े हो गए। 

वो पुराने दिन थे कितने अच्छे, 

ज़िंदगी में वही लगते थे सच्चे।

आने वाले और बीते हुए कल के लिए कितना अच्छा लिखा है, एक बार सोचिएगा ज़रूर‌-

वो कल जिसे हमने देखा नहीं,

उसके लिए जिंदगी, 

भागी-दौड़ी चली जाती है। 

और वो कल जो बीत चुका,

उसकी खूबसूरत यादें ही,

ज़िंदगी को जिंदगी बनाती हैं। 

15 दिन, महीना, 6 महीना, साल, दो साल में एक बार यादों का झरोखा अवश्य खोलना चाहिए। ऐसा करने से मन में तरावट और ताजगी आ जाएगी, फिर आपको जिंदगी बोझिल नहीं लगेगी।

Stay healthy, stay happy :)

Friday, 28 August 2026

Story of Life : राखी का सौदा (अंतिम भाग)

राखी का सौदा (भाग-1) के आगे…

राखी का सौदा (अंतिम भाग)


कृतिका ने हाँ तो कह दिया, पर उसको विश्वास नहीं था कि उसके भैया उससे राखी बंधवाए बिना रह लें। वो राखी में आई तो उसने देखा कि घर पर सचमुच ताला लगा था। 

यह देखकर उसके आंसू छलक आए, भैया ने ऐसा कैसे कर लिया, वो पलटी ही थी कि उसका ध्यान गया कि ताला सिर्फ सामने लगा था, back entry पर नहीं।

वो समझ गई कि भैया-भाभी घर पर ही हैं, क्योंकि कृष security के मामले में बहुत particular था। सब जगह lock लगाकर ही वो घर से निकलता था।

कृतिका ने पीछे के door को ऐसे knock किया, जैसे राधेश्याम दूध वाले भैया करते थे। सुहाना ने दूध वाला समझकर दरवाजा खोल दिया।

पर सामने कृतिका को देखकर सकपका गई। कृतिका भी दनदनाते हुए गुस्से में सीधे कृष के कमरे में पहुंच गई।

“भैया, घर पर रहने के बाद भी ऐसा भी क्या हो गया कि राखी न बंधवाना पड़े, इसके लिए झूठ बोला आपने? अपनी बहन से बस इतना ही प्यार है आपको…” आदि, आदि।

कृतिका बोले जा रही थी और कृष सब कुछ चुपचाप सुन रहा था। तभी सुहाना आ गई और उसने झूठ बोलने का सारा कारण बताया।

सुनकर कृतिका फूट-फूटकर रोने लगी, और कहने लगी, “भैया आपने मुझे पराया कर दिया! आप एक बार अपनी परेशानी बताते, तो क्या मैं मदद न करती?”

“आप ने यह किस तरह से सोच लिया कि मैं यहां आपसे दुनिया भर के सामान लेने आती हूँ, और अगर कम दिया, तो फ़र्क पड़ जाएगा।”

“भैया, राखी का अर्थ यह नहीं है कि हमेशा भाई ही रक्षा करेगा, हमेशा वो ही बहन को देगा। बल्कि ज़रूरत पड़ने पर बहन भी दे सकती है, रक्षा कर सकती है।”

यह कहकर कृतिका ने कृष के account में 50 lakhs रुपये transfer कर दिए।

“अरे कृतिका, यह क्यों? मैं अपनी छोटी बहन से पैसा नहीं ले सकता, क्यों पाप चढ़ा रही है?”

“नहीं भैया, ऐसा कुछ नहीं है और मैंने जो दिया है, सब आपका ही दिया हुआ और अभी भी बहुत है, मेरे पास आपका दिया हुआ, अतः और लगे तो बोल दीजिए मैं transfer कर दूंगी। और हाँ भाभी, भैया तो कुछ बोलने से रहे तो आप ही बता दीजिएगा।”

“और सबसे बड़ी बात भैया, कि बहनें भाई के पास राखी का सौदा करने नहीं आती हैं, दुनिया भर के सामान बटोरने नहीं आती हैं, बल्कि वो आती हैं, अपने भैया-भाभी का प्यार बटोरने, उनके संग बिताए पलों की यादें समेटने, रिश्ते को अटूट करने और उनके सुख-दुख में जिंदगी भर जुड़े रहने के लिए। क्योंकि राखी कोई बंधन नहीं है बल्कि एक डोर है, जो मजबूती से भाई-बहन को जोड़कर रखती है।”

“राखी के धागे में बंधी होती है,

प्यार की सबसे मजबूत गांठ।

दुआ है हमेशा खुश रहो भाई,

तुम्हारी राह हो आसान।।”

इसके साथ ही कृतिका ने घर में लगे सारे locks खोल दिए, फिर अपने साथ लाए राखी व मेवा मिठाई से टीका-रुचना किया। 

पूरा दिन पुरानी यादों को ताज़ा किया गया, फिर कृतिका चली गई, भैया-भाभी के मन में राखी का सही अर्थ बताकर।

लौटते हुए उसने खूब सारे सामान खरीद लिए, जिससे उसके भाई का मान उसके ससुराल में कम न हो।

कृतिका ने इतने पैसे दे दिए थे, कि कृष का business जल्द ही वापस flourish करने लगा।

अगली राखी में फिर से कृतिका का धूम-धड़ाके के साथ स्वागत किया, अब की बार राखी के तोहफे के साथ 50 lakhs भी दिए, यह कहकर कि तुमने अपने भाई का मान बचाने के लिए दिए थे, अब मान बनाए रखने के लिए ले लो।

कृष की इस बात के आगे कृतिका कुछ नहीं बोली और उसने मान के रुपये रख लिए।


आप सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ!