आज का यह article एक सच्ची घटना पर आधारित है, और आप सभी को सचेत करने के लिए डाल रहे हैं।
साथ ही कुछ information भी, एक बार अंत तक अवश्य पढ़ें, सचेत और सुरक्षित रहें…
बात कुछ दिन पहले की, एक premium train की है, train का नाम mention करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ऐसी घटना किसी भी train में हो सकती है। जब एक premium train में ऐसा घटना हुई, तो किसी में भी होना कौन बड़ी बात है।
Train मुम्बई से दिल्ली की ओर जा रही थी। जगह का नाम इसलिए mention किया, क्योंकि source and destination दोनों ही बड़े शहर थे।
अब घटना विस्तार से जानते हैं…
Seat or Scam?
हम लोग BDTS (Bandra Terminus) से चढ़कर NZM (Hazrat Nizamuddin) को आ रहे थे। एक यात्री मुम्बई से चढ़कर मथुरा को आ रहा था। वो एक businessman था और premium trains से आता जाता था, तो उसे tickets के regarding rules पता थे।
आप लोगों की जानकारी के लिए बता दें कि आप जब online ticket book करते हैं, तो अगर waiting ticket है और train चलने के पहले भी अगर waiting बरकरार रहती है तो आप का ticket अपने आप automatically cancel हो जाएगा।
But अगर आप ने ticket उसकी window से (means offline) book किया है, और train चलने से पहले आप का ticket waiting category में ही रहता है, फिर भी automatically cancel नहीं होगा। वो cancel तभी होगा, जब आप ticket window पर जाकर cancel कराएंगे।
अतः आपका window से book किया हुआ ticket waiting category में होने के बावजूद आपको train में चढ़ने के लिए eligible रखेगा। हाँ, seat मिलेगी कि नहीं, वो berth availablity पर depend करता है। तो आप को उस दिन की बात बताते हैं।
उसने ticket window से ticket book की थी। Ticket waiting ही थी। जब उसने ली थी, तब 53 waiting थीं, जो train में चढ़ने पर 10 पर पहुंच गई थीं, but still RAC or clear की category में नहीं आई थी।
वो पूरी तरह आश्वस्त था कि कुछ देर में जब TT आएगा, उसे seat available हो जाएगी। TT ticket check करने आया तो उसकी window की waiting ticket देखकर बोला situation देखकर बताएगा।
गाड़ी ने अपनी रफ़्तार पकड़ ली। हमारे साथ ही वो भी BDTS से चढ़ा था। बोरिवली पर हमारी berth set के सभी passengers आ गये, अतः उसे seat से उठना पड़ा। एक-दो TT आए इस बीच, पर किसी ने उसे confirmed berth नहीं दी।
रात गहराना शुरू होने लगी। हमारी side-upper and side-lower seat थी, एकदम दरवाजे से लगी। हमें train में sound sleep नींद नहीं आती है, फिर gate से लगी seat, बार-बार खुलने-बंद होने से disturbance और सबसे बड़ी बात, हमारी तबीयत काफ़ी खराब थी, अतः बिल्कुल भी नींद नहीं आ रही थी।
अब आगे की बात सुनिए। Attendant ने gate से लगी berth पर कुछ सामान रखकर उसपर चादर डालकर एक उबड़-खाबड़ बैठने की जगह बना रखी थी। वह आदमी उसी पर बैठकर अगले TT के आने का इंतजार करने लगा।
तभी उस attendant ने मुम्बई-जैसी भाषा में उससे कहा, “आपको clear-seat मांगने का है, तो ₹1000 दो, तुरंत एकदम मस्त seat दूंगा।” Premium trains के ticket already महंगे होते हैं, उस पर सीधे ₹1000 और, उसने ₹1000 देने से मना कर दिया और TT का इंतजार करने लगा।
अब वो attendant हर आधे-घंटे में इधर-उधर से आता और ₹1000 में seat offer की बात करता, पर वो आदमी ₹1000 देने को राज़ी नहीं हुआ। अंततः उस आदमी का इंतजार खत्म हुआ, रात के लगभग 2 बजे एक TT आया।
उसने उससे seat availablity की बात की। TT ने availablity के लिए मना कर दिया। कहा अगर ₹600 दे, तो confirm seat दे सकता है। आदमी मरता, क्या न करता, उसने ₹500+₹200 के notes दिए, साथ ही उसने attendant की शिकायत भी कर दी।
Attendant को TT ने हड़काया, “क्या रे, क्या खाली-पीली परेशान करता है।” उस आदमी ने पूछा, “सर कौन-सी seat है?” वो बोला, “अभी आकर बताता हूँ।” “पर सर ₹100 तो दे दीजिए, मैंने आपको ₹700 दिए थे।”
“आता है, देता है न आकर, घाई-घाई क्यों करता है।”
आधे घंटे में फिर attendant बोला, “चलो ₹600 दो, अभी मस्त seat दिलाता है।” अब तो वो TT को पैसा दे चुका था, फिर क्यों पैसे देता। 15 minutes बाद वो attendant बोला, “फिर दूसरी जगह देख लो, यहां से जगह खाली करने का।”
रात के तीन बज रहे थे और वो आदमी मथुरा के आने के इंतजार में लुटा हुआ इधर-उधर घूम रहा था। न उसको seat मिली, न पैसे, क्योंकि वो TT लौटकर ही नहीं आया। मुम्बई में लोग बड़े ईमानदार होते हैं, सब झूठ। TT और attendant दोनों मुम्बई से थे।
Tourists और मजबूर इंसान को हर जगह बेवकूफ ही बनाते हैं, लूटते ही है, चाहे मुम्बई हो, कलकत्ता हो, लखनऊ हो, दिल्ली, जयपुर, बनारस, मथुरा इत्यादि हर जगह। अभी तक दो ही जगह मिलीं, जहाँ “अतिथि देवो भव:” दिखा, ऋषिकेश और उज्जैन।
At least हमें तो, पर आपका क्या experience रहेगा, भगवान जाने। अब इस घटना से बचने का केवल एक उपाय है कि ऐसे waiting ticket से भी तभी यात्रा करें, जब आपके साथ और भी लोग हों, जिनकी confirmed seat हो, जिससे लेटकर नहीं, तो कम से कम seat पर बैठकर तो जा सकें। विशेषता ठंड की रातों में, उन्हें काटना और कष्टप्रद होता है।
Ticket train में खरीदने से आपको seat मिलेगी या धोखाधड़ी, नहीं पता। जागरूक रहिए, सजग रहिए, सावधान रहिए, प्रसन्न रहिए। ऐसी ही और जानकारी के लिए, जुड़े रहें...


