संजना ने ऋतिक से कहा, “सुनो ना, आटा खत्म हो गया है, लेकर आते हैं।”
“क्या लेकर आते हैं संजना, वो भी online marketing के जमाने में? कौन खड़ा होगा घंटों bill की line में?”
“जाकर लाएं या order करें, आएगा तो एक ही चीज़।”
“अरे order कर दो। साथ में और भी जो कुछ मंगाना हो, उन सबका भी order कर दो।”
“ऋतिक bedroom की ओर बढ़ गया, और संजना याद कर करके सामान के order की list prepare करने लगी।”
शाम के समय संजना फिर बोली, “आज बहुत दिनों बाद Sunday free मिला है, चलो न movie देखकर आते हैं।”
“अरे यार! एक Sunday मिला है, आराम कर लो, फिर रात में Netflix में movie देखेंगे, तुम कुछ चटपटा-सा बना लेना। वहां जाकर 4 गुना दाम का popcorn खाने से अच्छा है घर में ही देख लें।”
“कौन-सी देखें? संजना ने उत्सुकता से पूछा।”
“अरे कोई भी लगा लो, सब एक-सी ही लगती हैं। उसने बेरुखी के साथ जवाब दिया।”
“यह कहकर ऋतिक नींद के आगोश में चला गया और संजना अकेली बैठी ढूंढती रही कि कौन-सी movie देखें।”
कुछ दिनों बाद संजना ने ऋतिक से कहा, “चलो न कहीं घूम कर आते हैं।”
“अरे यार, अभी कुछ दो-तीन साल पहले गये तो थे। इस साल मेरे पास बिल्कुल समय नहीं है।”
ऋतिक ने बड़ी तल्खी से जवाब दिया और फिर laptop में काम करने लगा और पिछली बार की photo को देखकर संजना मन बहलाने लगी।
दिन महीने साल बदलते रहे, और संजना और ऋतिक की जिंदगी जिम्मेदारियां निभाने और इसी तरह से घर में रहकर ही सब करने में व्यतीत होती गई।
बच्चों की ज़िम्मेदारियों से free होकर job से retire होने के बाद एक दिन ऋतिक ने संजना से कहा, “बहुत दिन हो गए, चलो कहीं घूम कर आते हैं।”
संजना की प्रसन्नता से बाछें खिल गईं, वो तुरंत मान गई।
दोनों घर से निकलकर कुछ दूर ही चले थे और थककर चूर हो गए और घर लौट आए।
कुछ देर बाद, ऋतिक bedroom से बाहर आ गया, संजना अभी भी सामान order करने की list बना रही थी।
“संजना, चलो आटा लेकर आते हैं।”
“अरे क्या हुआ? मैं list बना रही हूं online order करने के लिए।”
“नहीं, चलो लेकर आते हैं। थोड़ा समय मिल जाएगा साथ में, फिर चलेंगे movie देखने, बहुत दिन हो गए हैं।”
संजना चलने को तैयार हुई तो ऋतिक ने उसे गले से लगा लिया और बोला, “वक्त बहुत तेजी से निकल रहा है। पर हम हर पल को जीएंगे, जितना हो सकेगा, उतना अधिक समय एक-दूसरे के साथ बिताएंगे।”
संजना कुछ समझ नहीं पा रही थी, पर ऋतिक जब bedroom में चला गया था, तब सपने में वो retire होने तक के दिन जी आया था और अच्छे से समझ गया था, कि ज़िन्दगी को समय से साथ में बिताने में ही सुख है।
एक बार वक्त गुजर जाता है, तो फिर वो पल नहीं जी पाएंगे, जो जिंदगी है। जिंदगी सिर्फ भागमभाग नहीं है, बल्कि कुछ पल ठहर कर जी लेना ही जिंदगी है, समय से कुछ बेहतरीन और यादगार पल चुरा लेना ही जिंदगी है।
“आ संजना, जिंदगी जी लें, एक साथ हर जगह...”
अगर आप भी जिंदगी में साथ न रहकर ऐसे ही जिंदगी बिता रहे हैं तो मत रहिए ऐसे, अपने जीवनसाथी को खूब समय दें और जी लें जिंदगी। क्योंकि काम तो जिंदगी-भर रहेगा, पर यह वक्त पलट कर नहीं आएगा, जिसमें एक-दूजे को समय दे सकते थे और सही मायने में जिंदगी जी सकते थे…


