Sunday, 9 August 2026

India's Heritage : Kanwar Yatra

सावन का पावन माह और कांवड़ यात्रा एक-दूसरे के पूरक हैं। पर क्या महत्व है सावन माह में कांवड़ यात्रा का, उसके क्या नियम हैं, किसने आरंभ की थी और भक्त को क्या लाभ मिलता है इस कठिन यात्रा को कर के?

आज India's Heritage segment में इसी पर चर्चा करते हैं। कांवड़ यात्रा महादेव के अनन्य भक्त निकालते हैं। यह बहुत ही कठिन यात्रा या कहें बेहद कठोर तप है।

कांवड़ यात्रा के दौरान यात्री कांवड़ (लकड़ी का पलड़ा) में कलश रखकर घर से निकलता है, फिर हरिद्वार या बैद्यनाथ धाम पहुंच कर गंगा मैय्या का जल कलश में भरकर महादेव पर जल अर्पित करता है, तत्पश्चात गंगा मैय्या से पुनः जल भरकर अपने घर की ओर आ जाता है।

इस यात्रा को वह पैदल चलकर पूर्ण करता है, बहुत से कांवड़ यात्री चप्पल-जूते इत्यादि भी नहीं पहनते हैं, वहीं कुछ कांवड़िए लोग गाड़ियों में भरकर नाचते-गाते हुए भी जाते हैं…

कांवड़ यात्रा


I. कांवड़ यात्रा का कारण :

कांवड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति अटूट भक्ति, तपस्या और मनोकामना पूर्ति के लिए की जाती है। इसमें भक्त पवित्र नदियों (विशेषकर गंगा) से जल लाकर सावन मास में शिवजी का जलाभिषेक करते हैं, जिससे शिव जी प्रसन्न होते हैं और भक्तों के कष्ट दूर होते हैं।


II. धार्मिक व पौराणिक मान्यताएं :

  • समुद्र मंथन- कथा है कि समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को शिवजी ने पिया था। उस विष की उष्णता/गर्मी को शांत करने के लिए देवताओं ने उनपर गंगाजल अर्पित किया था।
  • भगवान परशुराम- मान्यता है कि उन्होंने गढ़मुक्तेश्वर से गंगाजल लाकर उत्तर प्रदेश के बागपत (पुरा महादेव) में शिवजी का जलाभिषेक किया था।
  • लंकापति रावण- शिव भक्त रावण को भी पहला कांवड़िया माना जाता है, जो कावड़ में गंगाजल भरकर ले गया था। 
  • श्रवण कुमार- इन्होंने अपने अंधे माता-पिता को कावड़ में बैठाकर तीर्थ यात्रा कराई थी। 


III. यात्रा के मुख्य नियम :

इस यात्रा के कुछ मुख्य नियम भी हैं, जो इस प्रकार हैं।

  • शुचिता- यात्रा के दौरान पूरी तरह शाकाहारी भोजन, संयम और पवित्रता का पालन किया जाता है।
  • कठिन तप- अधिकांश भक्त नंगे पांव यात्रा करते हैं और कांवड़ को जमीन पर नहीं रखते।
  • शिव आराधना- पूरे मार्ग में 'बोल बम' के जयकारे गूंजते रहते हैं और भक्त शिवमय हो जाते हैं। 


IV. आध्यात्मिक व धार्मिक लाभ :

अंत मे यह भी जान लेते हैं कि इसका क्या लाभ है? जब इतना कठोर तप है तो इसके धार्मिक लाभ का भी विशेष महत्व है।

  • पापों से मुक्ति- ऐसा विश्वास है कि कांवड़ यात्रा के दौरान उठाए गए हर एक कदम से व्यक्ति के पिछले और वर्तमान जन्म के पाप कट जाते हैं। 
  • मनोकामना पूर्ति- भक्त अपनी किसी विशेष मन्नत या संकल्प के पूरा होने पर यह यात्रा करते हैं और जलाभिषेक के बाद उनकी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। 
  • वंश-कुल का कल्याण- इस कठिन तपस्या से न केवल कांवड़िया बल्कि उसके पूरे परिवार और कुल की उन्नति व सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।


V. मानसिक व शारीरिक लाभ :

  • संयम और अनुशासन- लंबी पदयात्रा करने से शरीर में सहनशक्ति, मानसिक दृढ़ता और अनुशासन की भावना विकसित होती है।
  • नकारात्मकता का अंत- यात्रा के दौरान निरंतर शिव मंत्रों (ॐ नमः शिवाय, बोल बम) के जाप से मन एकाग्र और शांत रहता है।
तो बोलो, हर हर महादेव!

Friday, 7 August 2026

Short Story : कोशिश

कोशिश 


संजना तकिया पर मुंह छिपाए लेटी थी। 

नहीं किसी से नाराज़गी के कारण नहीं, बल्कि इसलिए कि वो जीवन की परिक्षाओं को दे देकर थकने लगी थी।

यह वही संजना थी, जो कभी किसी भी situation से थकी नहीं थी, हारी नहीं थी। 

हर कठिनाइयों को दृढ़ता के साथ हराती थी। पर आखिर वो भी कब तक परेशानियों का सुदृढ़ और प्रसन्नता से सामना करें।

उसके चेहरे पर छाई मायूसी को देख कर सब ने मान लिया, कि अब संजना वो संजना नहीं रही।

पर संजना अब भी वही थी, लेकिन अब उसे इंतजार था कि उसके अपने उसे थामें, जिसकी कोशिश उसने जिंदगी भर की, अब वो कोशिश उसके अपने करें।

वो कोशिश करें, उसके दिल को समझने की। क्या वो कोशिश करेंगे? क्या रिश्तों की अहमियत है लोगों में, आज भी? 

या आधुनिकता के नाम पर रिश्तों को यूं ही तिलांजलि दी जाती रहेगी...

Monday, 3 August 2026

Bhajan (Devotional Song) : सब कुछ ही है तेरे हाथ

आज सावन का पहला सोमवार है, शिव-शंभू को प्रसन्न करने का पर्व।

अपना सर्वस्व समर्पित करते हुए उनसे प्रार्थना है कि मझधार में फंसी हुई नाव को पार लगा दें।

वो सर्वशक्तिमान है, सर्वज्ञ हैं, उनकी कृपा से सब संभव है।

हे प्रभु, हम सब पर कृपादृष्टि बनाएं…

सब कुछ ही तेरे हाथ


 मैं तो मैं हूँ,

मैं क्या जानूं,

तू तो जाने सारी बात।

जानूं मैं इतना ही जानूं,

सब कुछ ही है तेरे हाथ।


मैं तो मैं हूँ, 

मैं क्या जानूं,

मेरी हस्ती तेरे हाथों,

तेरे हाथों हैं जज़्बात।

जानूं मैं इतना ही जानूं,

सब कुछ ही है तेरे हाथ। 


मैं तो मैं हूँ,

मैं क्या जानूं,

दुःख मेरे कटते तेरे हाथों,

सुख मुझे मिलता तेरे साथ।

जानूं मैं इतना ही जानूं,

सब कुछ ही है तेरे हाथ।


मैं तो मैं हूँ,

मैं क्या जानूं, 

मझधार में नाव जो अटकी,

उसको लगा दो तुम तो पार।

जानूं मैं इतना ही जानूं,

सब कुछ ही है तेरे हाथ। 



हर हर महादेव!

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