Tuesday, 11 August 2026

Recipe : Bread Poha

हरियाली तीज आने वाली है और ladies के लिए kitty का सबसे बड़ा event. Event बड़ा तो tension भी बड़ी कि क्या बनाया जाए, जो झटपट बन भी जाए और tasty भी हो। 

तो आप tension free हो जाइए, क्योंकि Shades of Life लाया है आपके लिए 4 snacks, जिसमें दो नमकीन हैं और दो मीठे।

सारे ही स्वाद में एक से बढ़कर एक, और main ingredient same होने के बावजूद सब के सब स्वाद में एक दूसरे से पूरी तरह अलग, पर tasty सारे।

एक और बात, कि आप इन dishes को tiffin में भी रख सकते हैं…

Bread Poha


Ingredients :

  • Bread - 4 to 5 slices
  • Onion - 1 (medium)
  • Tomato - 1 (big(
  • Potato - 1 (small, optional)
  • Fresh coriander leaves - handful 
  • Green chilli - as per taste 
  • Oil - 1 tbsp.
  • Salt - as per taste 
  • Sugar - 1-2 tsp. (as per taste)
  • Mustard seeds - 1 tsp.
  • Curry leaves - 5 to 6


Method :

  1. Bread के roughly छोटे-छोटे टुकड़े कर लें।
  2. प्याज़, टमाटर, धनिया पत्ती और हरी मिर्च को बारीक काट लें।
  3. Wok में oil डालकर गर्म करें। अब इस में सरसों दाने और करी पत्ता डालकर चटका लें।
  4. इसमें बारीक कटा हुआ प्याज और नमक डालकर saute कर लें। फिर इसमें sugar, बारीक कटा हुआ टमाटर, और हरी मिर्च डालकर तब तक भूनें, जब तक टमाटर हल्का-सा गल जाए।
  5. अब इसमें bread के टुकड़े डालकर अच्छे से चला दीजिए और उस पर थोड़ा-सा पानी छींट दें। 
  6. फिर ढक्कन लगाकर 2 to 5 minutes तक slow flame पर छोड़ दें।
  7. एक बार फिर अच्छे से चलाएं, जिससे bread में सब अच्छे से चिपक जाए और bread moist भी रहे।
  8. अब इसे finely chopped fresh coriander leaves से garnish कर दीजिए।

Your flavoursome and tempting Bread Poha is ready to be savoured. Enjoy it as it is, or with your favourite chutney, dip, or ketchup.


Tips and Tricks :

  • Bread fresh और रखी हुई दोनों लें सकते हैं, बस ध्यान रखिएगा कि bread अगर fresh नहीं है तो पानी का छींटा ज्यादा पड़ेगा।
  • अगर आप आलू भी डाल रहे हैं, तो उसे प्याज़ भूनने के बाद और टमाटर डालने से पहले डालना है। आलू डालने से juicy ज्यादा हो जाता है और बच्चों को ज्यादा पसंद आता है।
  • यह गर्म और ठंडा दोनों तरह से अच्छा लगता है, इसलिए आप इसे बच्चों के tiffin (lunch) में भी रख सकते हैं।
  • इसमें टमाटर थोड़ा ज्यादा डालते हैं, इसके दो कारण हैं- (I) टमाटर ज्यादा होने से bread में moisture अच्छा आता है। (II) Tangy flavour Bread Poha का taste enhance कर देता है।
  • Sugar थोड़ी तो जरूर से डालिए, इससे taste balance हो जाता है। वैसे 2 tsp. तक भी अच्छी लगती है, खट्टा-मीठा और चटपटा स्वाद बहुत अच्छा लगता है।
  • Mustard seeds, coriander leaves और curry leaves डालने से इसका taste दोगुना हो जाता है, नहीं होने से discard भी कर सकते हैं। 
  • अगर आप प्याज नहीं खाते हैं, तो उसे discard कर सकते हैं।

तो बनाइए यह झटपट से बनने वाली स्वादिष्ट dish…

Monday, 10 August 2026

India's Heritage : सावन शिव को क्यों मनभावन?

एक प्रश्न मन में उठता है कि आखिर सावन माह ही इतना विशेष क्यों? और यह माह ही शिव जी इतना प्रिय क्यों है, क्या है इसका कारण?

शिव जी का प्रिय माह और समर्पित दिन है आज, सावन का दूसरा सोमवार। तो इससे अच्छा कौन-सा दिन हो सकता है, इस जानकारी के लिए। फिर आज आपके समक्ष इसे ही प्रस्तुत कर रहे हैं…

सावन शिव को क्यों मनभावन?


धार्मिक व पौराणिक कारण :

इस के कुछ धार्मिक व पौराणिक कारण हैं, तो चलिए उन्हें जान लेते हैं।


(1) समुद्र मंथन -

हिन्दू धर्म का एक बहुत बड़ा प्रसंग है, समुद्र मंथन, जिसमें बहुत से देवताओं व राक्षसों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।समुद्र मंथन के दौरान कुल 14 दिव्य रत्न (मूल्यवान वस्तुएं) निकले थे। इनमें कालकूट (हलाहल) विष, कामधेनु गाय, उच्चैःश्रवा घोड़ा, ऐरावत हाथी, कौस्तुभ मणि, कल्पवृक्ष, रंभा अप्सरा, माता लक्ष्मी, वारुणी (मदिरा), चंद्रमा, पारिजात वृक्ष, पांचजन्य शंख, भगवान धन्वंतरि और अमृत कलश शामिल हैं।

इसमें सबसे पहले निकला था कालकूट (हलाहल) विष, जिसे कोई धारना नहीं करना चाहता था। उस प्रसंग का विस्तार इस प्रकार है।

  • विष पान- सावन मास में ही समुद्र मंथन हुआ था। संसार की रक्षा के लिए शिव जी ने हलाहल विष पिया और नीलकंठ कहलाए। विष की गर्मी शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल चढ़ाया। तभी से शिवलिंग पर जल अभिषेक की परंपरा शुरू हुई। 
  • माता पार्वती का तप- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सावन (श्रावण) महीने में सोमवार का व्रत और निराहार रहकर कठोर नियमित तपस्या की थी। उन्होंने बालू (रेत) का शिवलिंग बनाकर उसकी विधिवत पूजा की और अपना यह व्रत पूरा किया था, जिससे प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था।

एक और पौराणिक कथा इस प्रकार है, जिसके कारण शिव जी सावन माह पसंद है।


(2) ससुराल आगमन -

  • शिव का ससुराल आगमन- मान्यता है कि सावन में शिव जी अपने ससुराल आते हैं, जहां उनका स्वागत जलाभिषेक से होता है।


यह सब कारण हैं, कि क्यों शिव जी को सावन का महीना सर्वप्रिय है।

भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा हम सब पर सदैव बनी रहे!

हर हर महादेव!

Sunday, 9 August 2026

India's Heritage : Kanwar Yatra

सावन का पावन माह और कांवड़ यात्रा एक-दूसरे के पूरक हैं। पर क्या महत्व है सावन माह में कांवड़ यात्रा का, उसके क्या नियम हैं, किसने आरंभ की थी और भक्त को क्या लाभ मिलता है इस कठिन यात्रा को कर के?

आज India's Heritage segment में इसी पर चर्चा करते हैं। कांवड़ यात्रा महादेव के अनन्य भक्त निकालते हैं। यह बहुत ही कठिन यात्रा या कहें बेहद कठोर तप है।

कांवड़ यात्रा के दौरान यात्री कांवड़ (लकड़ी का पलड़ा) में कलश रखकर घर से निकलता है, फिर हरिद्वार या बैद्यनाथ धाम पहुंच कर गंगा मैय्या का जल कलश में भरकर महादेव पर जल अर्पित करता है, तत्पश्चात गंगा मैय्या से पुनः जल भरकर अपने घर की ओर आ जाता है।

इस यात्रा को वह पैदल चलकर पूर्ण करता है, बहुत से कांवड़ यात्री चप्पल-जूते इत्यादि भी नहीं पहनते हैं, वहीं कुछ कांवड़िए लोग गाड़ियों में भरकर नाचते-गाते हुए भी जाते हैं…

कांवड़ यात्रा


I. कांवड़ यात्रा का कारण :

कांवड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति अटूट भक्ति, तपस्या और मनोकामना पूर्ति के लिए की जाती है। इसमें भक्त पवित्र नदियों (विशेषकर गंगा) से जल लाकर सावन मास में शिवजी का जलाभिषेक करते हैं, जिससे शिव जी प्रसन्न होते हैं और भक्तों के कष्ट दूर होते हैं।


II. धार्मिक व पौराणिक मान्यताएं :

  • समुद्र मंथन- कथा है कि समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को शिवजी ने पिया था। उस विष की उष्णता/गर्मी को शांत करने के लिए देवताओं ने उनपर गंगाजल अर्पित किया था।
  • भगवान परशुराम- मान्यता है कि उन्होंने गढ़मुक्तेश्वर से गंगाजल लाकर उत्तर प्रदेश के बागपत (पुरा महादेव) में शिवजी का जलाभिषेक किया था।
  • लंकापति रावण- शिव भक्त रावण को भी पहला कांवड़िया माना जाता है, जो कावड़ में गंगाजल भरकर ले गया था। 
  • श्रवण कुमार- इन्होंने अपने अंधे माता-पिता को कावड़ में बैठाकर तीर्थ यात्रा कराई थी। 


III. यात्रा के मुख्य नियम :

इस यात्रा के कुछ मुख्य नियम भी हैं, जो इस प्रकार हैं।

  • शुचिता- यात्रा के दौरान पूरी तरह शाकाहारी भोजन, संयम और पवित्रता का पालन किया जाता है।
  • कठिन तप- अधिकांश भक्त नंगे पांव यात्रा करते हैं और कांवड़ को जमीन पर नहीं रखते।
  • शिव आराधना- पूरे मार्ग में 'बोल बम' के जयकारे गूंजते रहते हैं और भक्त शिवमय हो जाते हैं। 


IV. आध्यात्मिक व धार्मिक लाभ :

अंत मे यह भी जान लेते हैं कि इसका क्या लाभ है? जब इतना कठोर तप है तो इसके धार्मिक लाभ का भी विशेष महत्व है।

  • पापों से मुक्ति- ऐसा विश्वास है कि कांवड़ यात्रा के दौरान उठाए गए हर एक कदम से व्यक्ति के पिछले और वर्तमान जन्म के पाप कट जाते हैं। 
  • मनोकामना पूर्ति- भक्त अपनी किसी विशेष मन्नत या संकल्प के पूरा होने पर यह यात्रा करते हैं और जलाभिषेक के बाद उनकी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। 
  • वंश-कुल का कल्याण- इस कठिन तपस्या से न केवल कांवड़िया बल्कि उसके पूरे परिवार और कुल की उन्नति व सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।


V. मानसिक व शारीरिक लाभ :

  • संयम और अनुशासन- लंबी पदयात्रा करने से शरीर में सहनशक्ति, मानसिक दृढ़ता और अनुशासन की भावना विकसित होती है।
  • नकारात्मकता का अंत- यात्रा के दौरान निरंतर शिव मंत्रों (ॐ नमः शिवाय, बोल बम) के जाप से मन एकाग्र और शांत रहता है।
तो बोलो, हर हर महादेव!