Saturday, 18 July 2026

Story of Life : वो कौन था (भाग-2)

वो कौन था (भाग-1) के आगे…

वो कौन था (भाग-2)


सबने सुना पर कोई सामने नहीं आया, और तृषा को परेशान करने का सिलसिला पुरजोर चलता रहा। एक दिन तृषा ने तंग आकर hospital से resign करने का मन बना लिया और सीधे पहुंच गई कुशल के पास।

कुशल ने एक बार फिर सबको बुला लिया।

ऐसा क्या है जो एक lady हमारे यहां safe नहीं रह सकती है। धिक्कार है कि हम doctors के बीच भी कोई अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहा है।

रोहित, विनय, समीर पहले से ही hospital में appointed थे। तृषा की joining के साथ राघव, दीपक, सुगंधा और निशा ने join किया था।

सारे doctor एक से एक शरीफ़ थे, कि किसी पर भी इल्ज़ाम लगाना उनकी dignity को चोट पहुंचाना था।

फिर ‌‌तृषा के अलावा बाकी भी जो lady doctors थीं, उन्हें कोई problem नहीं थी। ऐसा नहीं था कि वो साधारण नयन नक्श की हों।

सबसे सुंदर तृषा थी, पर बाकी भी लगभग उसकी टक्कर की थीं। पर तृषा के साथ होनी वाली घटनाओं के कारण सब तृषा के लिए चिंतित रहते थे। 

ऐसा इसलिए भी था, क्योंकि hospital का माहौल बहुत friendly और homely था। सब एक-दूसरे को लेकर बहुत concerned रहते थे।

इन सबके बावजूद कोई उस stalker को पकड़ नहीं पा रहा था। वो इतना ज्यादा शातिर था कि सबकी मौजूदगी में भी अपने काम को बखूबी अंजाम दे रहा था।

“कुशल सर, मैं तंग आ चुकी हूं इन सब हरकतों से, please मेरा resignation स्वीकार करें और मुझे जाने दें।”

तृषा का resignation, सबके लिए यह खबर shocking थी, वैसे भी शहर के सबसे अच्छे hospital से किसी doctor का resign करना अपने आप में बड़ी news थी।सब उससे रुकने को कहने लगे।

कुशल ने हाथ जोड़कर तृषा से request की, कि बस एक हफ्ते का समय और दे, वो जरूर से उस imposter को ढूंढ निकालेगा।

फिर वो सबकी तरफ मुखातिब होते हुए बोला, मुझे आप सबका साथ चाहिए इस काम में....

उसने hospital में CCTV cameras और बढ़ा दिए, जिससे यह काम और मुस्तैदी से किया जा सके।

पर दो दिन बाद ही यह क्या हुआ, जिसे देखकर सब हतप्रभ रह गए...

आगे पढ़ें, वो कौन था (अंतिम भाग) में…

Friday, 17 July 2026

Story of Life : वो कौन था (भाग-1)

वो कौन था (भाग-1)


कुशल अपने नाम-सा हर काम में कुशल था, वो बहुत नामी doctor था। कारण?

उसका diagnostics बहुत कमाल का था, उसे बीमारियां समझने के लिए किसी भी तरह के test की आवश्यकता नहीं होती थी।

बस patient का सामने होना उसके लिए काफी था, patient की condition और symptoms से वो बहुत जल्दी समझ जाता था कि बीमारी क्या है।

उसे genius doctor कहा जाता था और उसके patients ने उसे भगवान का दर्जा दिया हुआ था। 

इन सबके बाद भी वो बेहद सरल और शालीन इंसान था। उसने अपनी fees हद की बढ़ाकर नहीं रखी थी।

उसका genius doctor होना और nominal fees होने के कारण उसके यहां patients का तांता लगा रहता था।

उसने अपने लिए कभी समय ही नहीं निकाला और अपना जीवन medical को समर्पित कर दिया।

अपनी मेहनत और अथक प्रयास से उसने एक बड़ा hospital खोल लिया और उसमें अपने जैसे ही capable और dedicated doctors appoint किए। 

कुशल का hospital दो buildings में बंटा हुआ था, जहां अमीर-गरीब हर तरह के patients का उनकी हैसियत के अनुसार arrangements था।

Hospital बहुत अच्छे से चल रहा था, जब तक वहां तृषा नहीं आई थी। नहीं, तृषा में कोई कमी नहीं थी, बहुत अच्छी और सरल लड़की थी, और साथ में बेहद खूबसूरत।

उसके आने के कुछ दिन बाद से ही अजीब-अजीब सी हरकतें होने लगी। तृषा के locker से कुछ भी सामान गायब होने लगे, उसके सामान दूसरे locker में मिलने लगे।

कभी कोई उसके room में I love you का card रख जाता, तो कभी bathroom में I love you Trisha लिख जाता, यह सब देखकर तृषा पत्ते-सी कांपने लगती।

एक दिन कुशल ने सारे staff को बुलाया और कहा कि जो कुछ हो रहा है, वो कोई staff वाला ही कर रहा है, क्योंकि तृषा के room and locker तक कोई और नहीं पहुंच सकता है।

इसलिए आज से सब शक के घेरे में रहेंगे और जो कोई भी निकला, उसके साथ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अच्छा होगा कि कोई सामने से आकर बता दे, या मुझे भी आकर बता सकता है, मैं उसकी पहचान किसी को नहीं बताऊंगा। और तब शायद उसकी सज़ा कम कर दी जाए।

सबने सुना, पर कोई सामने नहीं आया, और तृषा को परेशान करने का सिलसिला पुरजोर चलता रहा। एक दिन तृषा ने तंग आकर…

आगे पढ़ें, वो कौन था (भाग-2) में…

Thursday, 16 July 2026

Article : जिंदगी Tier-2 Cities में

छूटा तेरा दर,

तो तेरी बहुत याद आई।

न लौट पा रहा तेरे दर पर,

कटती नहीं है तन्हाई।।

न जाना था कि कितने अच्छी जगह रहते थे, न जाना था कि बिछड़ कर याद करेंगे इतना, पर जनाब सच कहते हैं, जिंदगी महानगरों में नहीं नगरों में ही जिंदा है आज भी।

यह शहर इतने advanced हैं कि आप सब पा जाओगे और ऐसे भी नहीं हैं कि जिसमें आप खो जाओगे।

आज बात कर रहे हैं उन शहरों की जो महानगर , जैसे Delhi, Mumbai, Kolkata, Chennai आदि नहीं हैं, अभी भी नगर ही हैं, जैसे Lucknow, Agra, Prayagraj, Kanpur आदि, कुछ इनसे भी थोड़े‌ छोटे नगर जैसे Mathura, Vrindavan, Ayodhya, Haridwar, Rishikesh आदि…

जिंदगी Tier-2 Cities में


यह नगर जिन्हें tier-2 cities भी कहते हैं, जिंदगी आज भी यहीं बसती है, महानगरों में नहीं।

महानगरों में लोग सिर्फ और सिर्फ भाग रहे हैं, कुछ बन जाने के लिए, कुछ पाने के लिए, इस बात से बेखबर कि उसके कारण ही वो दूर होते चले जा रहे हैं, अपनों से, सुकून भरे पलों से।

महानगरों में कितने ही लोग ऐसे होंगे, जो यह तक नहीं जानते हैं कि उनका पड़ोसी कौन है? और कितने तो ऐसे भी होंगे, जिन्होंने अपने पड़ोसी से कभी बात भी नहीं की होगी। 

वैसे पड़ोसियों की बात छोड़ दें तो कितनों ने अपनों से ही न जाने कब से बात नहीं की है।

वहीं बात करें अगर tier-2 cities की, तो आज भी वहां रिश्ते-नाते, दोस्ती-यारी, पास-पड़ोस निभाया जा रहा है। एक की परेशानी सबके लिए दुःख का कारण होता है और एक की खुशी सबका उत्सव।

अगर दूरी की बात करें तो न तो सड़कों पर इतनी दूरी है, न दिलों में कि एक साथ वक्त न बिताया जाए।

अगर महंगाई की बात करें तो हो सकता है वहां दो पैसे कम कमा रहे हों लोग, पर खर्चा भी 4 पैसे कम ही होगा। फिर वो चाहे रोज़मर्रा की जिंदगी का हो, जैसे किराया, साग-सब्जी, कपड़ा, आदि या पढ़ाई-लिखाई, महरी, घूमना-फिरना, hotel इत्यादि।

In short बोलें तो सुकून से जिंदगी व्यतीत की जा सकती है, प्यार-मोहब्बत, जिम्मेदारी और मस्ती के साथ।

और सचमुच में जिंदगी यही है, तो जब तक आपकी मजबूरी न हो, अपने प्यारे से शहर को मत छोड़िए। महानगर, सिर्फ मृग मरीचिका है, छलावा है, इसके लिए लालायित होना अपने हिस्से में केवल अंतहीन दौड़ लाना और अपनों से दूर होना है। अपनों के बीच रहिए, ख़ुश रहिए…