पवनपुत्र, मारुति, केसरी नंदन, अंजनी सुत, संकटमोचन, महावीर, बजरंग बली, ऐसे और बहुत से नामों के स्वामी भक्त शिरोमणि हनुमानजी के जन्मोत्सव पर विशेष शुभकामनाएँ!
हे संकटमोचन, हर कष्ट हरो, हर एक को सुखी करो।
पूरे संसार में सिर्फ हनुमानजी ही हैं, जिनका जन्मोत्सव, साल में दो बार मनाया जाता है। पर क्यों?
इसे ही कविता में ढालने का प्रयास किया है। आइए इस कविता के माध्यम से उनका आशीर्वाद प्राप्त करें…
हनुमान जी का जन्मोत्सव
ईश्वर जो हैं, सर्व शक्तिमान,
भक्तशिरोमणि हनुमान।
क्यों दो-दो दिन होता है,
उनके जन्मोत्सव का प्रावधान?
एक कार्तिक, एक चैत्र,
क्या दोनों एक समान?
क्यों दो-दो दिन होता है,
उनके जन्मोत्सव का प्रावधान?
कार्तिक मास की चतुर्दशी को,
भए प्रगट वीर हनुमान।
उनके जन्मोत्सव का यही है
शुभ प्रथम प्रावधान।।
पिता केसरी, माता अंजना,
मारुति रखा था नाम।
छोटे से पवनपुत्र
करते थे बड़े-बड़े काम।।
भूख की पीड़ा से पीड़ित,
हो रहे थे व्याकुल परेशान।
सूर्य को ही निगल गये
वो, फल आम का जान।।
इन्द्र ने करके व्रज प्रहार,
किया सूर्य निकालने का काम।
टूटी इससे मारुति की ठुड्ढी,
तब से वो कहलाए हनुमान।।
कुपित हो गये पवनदेव,
पुत्र की ऐसी गति जान।
नहीं रहेगी वायु कहीं भी,
गर पुत्र में फिर न आए प्राण।।
ईश्वरीय आशीष से,
मारुति में आ गयी जान।
चैत्र की पूर्णिमा थी उस दिन,
हुआ जब दूसरे जन्म का प्रावधान।।
दिन विशेष दोनों ही,
दोनों ही एक समान।
इसलिए ही जन्मोत्सव के
उनके हैं दो-दो प्रावधान।।
हनुमान जी की कृपा से,
होते सफल, सुजान।
प्रातः स्मरण जो करे उनका,
उसका सदा होए कल्याण।।
आप सभी को हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ।
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