Tuesday, 21 July 2026

Story of Life : वो कौन था (अंतिम भाग)

वो कौन था (भाग-1),

वो कौन था (भाग-2),

वो कौन था (भाग-3)

वो कौन था (भाग-4) के आगे…

वो कौन था (अंतिम भाग)


“सर, यह आपको बहुत प्यार करती थीं, पर आपने इन्हें कभी तवज्जों ही नहीं दी। आपके medical world में डूब जाने के बाद यह धीरे-धीरे depression में चली गईं और एक दिन mental asylum में आ गईं।

“पर तुम्हें कैसे पता यह सब?”

“सर, मेरी बुआ जी यहां पर doctor हैं, तो उन्हीं से मिलने आया था। तभी मुझे तृषा दिखी, उसका पीछा किया तो वो इस कमरे में चली गई। मैंने बुआ जी से पूछा कि उस कमरे में कौन है, और तृषा वहां क्यों गयी है, तब पूरी बात पता चली। पर अब मैं जो आपको बताने जा रहा हूं, वो बात अविश्वसनीय है, और जिसके कारण ही आपके hospital को defame मिला।”

“ऐसा भी क्या बताने जा रहे हो? ज्यादा पहेली न पूछो, सीधा-सीधा बताओ।”

“सर, हमारे hospital में तृषा के साथ जो कुछ भी हुआ था, वो उसके साथ किसी और ने नहीं बल्कि खुद तृषा ने किया था, जिससे उस तमाशे के बाद hospital में resignation letter छोड़कर चली जाए और कुछ दिन बाद आपको और Srijan hospital को defame कर दें।”

यह सुनकर कुशल चौंक गया कि उसको बर्बाद करने के लिए तृषा इस हद तक गिर गयी। उससे रहा नहीं गया और वो सीधे रिया के कमरे में पहुंच गया।

कुशल को वहां आया देखकर तृषा सकपका गई और रिया खुशी से चहक उठी।

कुशल ने गुस्से से तमतमा कर तृषा की ओर देखा और कहा, “मुझे तुमसे इस तरह की उम्मीद बिल्कुल नहीं थी। मैं सोच ही नहीं सकता था कि कोई लड़की अपने को इस तरह से भी प्रताड़ित दिखा सकती है। क्यों, आखिर क्यों? क्या कसूर था मेरा!”

तृषा ने घृणा से कहा, “आप मेरी दीदी के, मेरे बचपन के खोने के दोषी हैं।”

“किस तरह से दोषी हो गया? मैंने तुम्हारी दीदी से कभी प्यार नहीं किया, तुम्हारी दीदी मुझसे प्यार करती थी, उसने कभी इज़हार नहीं किया, कि मैं जान पाता कि तुम्हारी दीदी मुझे चाहती है। तो मैं दोषी कैसे हो गया? मेरे doctor बनने की चाह हमेशा से मानवता की सेवा थी। क्या ऐसी सोच, ऐसी चाह गुनाह है? और तुमने मेरे hospital को defame करके न केवल मुझे नुकसान पहुंचाया है, बल्कि लाखों-करोड़ों उन मरीजों को भी नुकसान पहुंचाया है जिन्हें अच्छे treatment की आवश्यकता है। तुमने बदला लेने के जुनून में न केवल अपने स्त्री होने को, बल्कि अपने doctor होने को भी अपमानित और कलंकित किया है।”

कुशल की ऐसी बातों ने तृषा के साथ-साथ रिया को भी झकझोर दिया।

रिया अपनी छोटी बहन तृषा को बहुत चाहती थी, तृषा की इन हरकतों से क्रोधित होते हुए बोली, “तृषा, तूने मेरे देवता को अपमानित किया है, तूने गलत सोचा है कि मेरी तबीयत इनके कारण ख़राब हुई है। इन्हें तो पता ही नहीं था कि मैं इन्हें चाहती थी। मैं इनसे कभी अपने मन की बात बोल ही नहीं पाई।” कहकर रिया फूट-फूटकर कुशल के पैरों पर गिर गई।

“दीदी, मुझे माफ़ कर दो, आप ही मेरा सब कुछ थीं, आपकी ऐसी हालत देखकर मैं सिहर उठी थी, क्रोध से पागल हो गई थी और उसमें मैंने देवता तुल्य कुशल सर को और न जाने कितने मरीजों को नुक़सान पहुंचा दिया।”

“कुशल सर, मुझे माफ़ कर दीजिए, मैं आपकी स्त्री जाति की और doctor होने की गरिमा की गुनहगार हूं। मुझ नादान, नासमझ को माफ़ कर दीजिए।”

कुशल ने रिया के सिर पर प्यार से हाथ फेरा और उसके जल्दी ठीक होने की कामना कर तृषा से बिना कुछ बोले वहां से चला गया।

अगले दिन, बहुत से newspaper के front page पर तृषा का confession था कि सृजन hospital से सुरक्षित कोई जगह नहीं है। उसके साथ जो कुछ भी हुआ था, उसकी जिम्मेदार वो खुद है।

इसके कुछ दिनों बाद से ही वापस से सृजन hospital और doctor कुशल की fame हर जगह जगमगा उठी। जिस-जिस ने उल्टे-सीधे इल्ज़ाम लगाए थे, सबने माफी मांगी। सारे doctors लौट आए, including तृषा।

रिया का इलाज सृजन hospital में ही होने लगा, और वो बहुत तेजी से ठीक होने लगी…

Monday, 20 July 2026

Story of Life : वो कौन था (भाग-4)

वो कौन था (भाग-1),

वो कौन था (भाग-2)

वो कौन था (भाग-3) के आगे…

वो कौन था (भाग-4)


एक दिन राघव ने कुशल को आकर जो बताया, वो अविश्वसनीय था, ऐसा भी हो सकता है, वो सोच ही नहीं सकता था।

वो सीधा राघव के साथ वहाँ पहुंच गया, जहाँ से राघव को यह अविश्वसनीय खबर मिली थी। वो एक mental asylum था।

“राघव, यह मुझे कहाँ लाए हो?”

“Sir, उस जगह, जहाँ आपको अनबुझ पहेली का जवाब मिलेगा। आप बस चुपचाप मेरे पीछे-पीछे आइए।”

राघव के साथ कुशल चुपचाप चलता गया और finally राघव एक कमरे की खिड़की के सामने जाकर रुक गये। कमरे में मद्धम रोशनी थी, जो कि वहाँ एक लेटी हुई पर पड़ रही थी।

जब कुशल ने गौर से देखा तो चौंक गया, “अरे! यह तो रिया है।”

“हाँ Sir, यह रिया जी ही हैं।” राघव ने स्वीकृति में सिर हिला दिया।

“मेरी classmate, मेरी ही तरह बहुत होनहार, पर यह यहां कैसे पहुंच गई?” कुशल पुरानी यादों में खो गया...

“आपके कारण सर।”

“मेरे कारण! यह तुम क्या कह रहे हो? मैंने ऐसा क्या किया? मैंने इसके साथ कुछ बुरा किया था, ऐसा तो मुझे कुछ याद नहीं।”

“सर…

आगे पढ़ें, वो कौन था (अंतिम भाग) में…

Sunday, 19 July 2026

Story of Life : वो कौन था (भाग-3)

वो कौन था (भाग-1)

वो कौन था (भाग-2) के आगे…

वो कौन था (भाग-3)


उसने hospital में CCTV cameras और बढ़ा दिए, जिससे यह काम और मुस्तैदी से किया जा सके।

पर दो दिन बाद ही यह क्या हुआ, जिसे देखकर सब हतप्रभ रह गए।

तृषा का पूरा room गुलाब के फूलों से सजा हुआ था, और उसकी table पर खून से लिखा हुआ था, “तृषा, तुम्हें मेरी होने से कोई नहीं रोक सकता है!”

और वहीं एकदम गुमसुम-सी पीली पड़ चुकी तृषा खड़ी हुई थी, जिसकी आंसूओं से भरी आंखें मानो सबसे कह रही हों, ‘Please मुझे जाने दो, वरना मैं नहीं बचूंगी।’

कुशल ने आगे बढ़कर जब तृषा को थामा, तो तृषा बेहोश होकर उसकी बाहों में झूल गयी।

जब तृषा को होश आया तो वो बस एक ही रट लगाए हुए थी कि अब वो नहीं रुकेगी और चली जाएगी। 

कुशल ने CCTV footage देखी तो हैरान रह गया, तृषा के room के पास के सारे CCTV cameras बर्बाद किए जा चुके थे। अतः कुछ भी नहीं पता चला।

अगले दिन सुबह ही तृषा ने कुशल की table पर अपना resignation letter रख दिया और hospital छोड़कर चली गई।

एक अनबुझ पहेली-सी तृषा आई थी और चली गई।

दो दिन बाद ही हर newspaper की headline थी कि सृजन hospital में ladies staff safe नहीं हैं, इसलिए ही एक होनहार doctor तृषा ने तंग आकर hospital छोड़ दिया।

News का आना था कि हर ओर कुशल की चर्चा होने लगी कि कुशल ने ऐसा hospital खोलकर लोगों की भावनाओं से खेला है।

इस बदनामी के साथ hospital में आने वाले patients की संख्या घटने लगी और कुछ और male and female staff ने resign कर दिया।

अचानक से हुई इस घटना ने कुशल की बरसों की मेहनत तबाह करनी शुरू कर दी।

एक दिन राघव ने कुशल को आकर जो बताया, वो अविश्वसनीय था, ऐसा भी हो सकता है वो सोच ही नहीं सकता था।

वो सीधा राघव के साथ वहां पहुंच गया, जहां से राघव को यह अविश्वसनीय खबर मिली थी…

आगे पढ़ें, वो कौन था (भाग-4) में…