एक प्रश्न मन में उठता है कि आखिर सावन माह ही इतना विशेष क्यों? और यह माह ही शिव जी इतना प्रिय क्यों है, क्या है इसका कारण?
शिव जी का प्रिय माह और समर्पित दिन है आज, सावन का दूसरा सोमवार। तो इससे अच्छा कौन-सा दिन हो सकता है, इस जानकारी के लिए। फिर आज आपके समक्ष इसे ही प्रस्तुत कर रहे हैं…
सावन शिव को क्यों मनभावन?
धार्मिक व पौराणिक कारण :
इस के कुछ धार्मिक व पौराणिक कारण हैं, तो चलिए उन्हें जान लेते हैं।
(1) समुद्र मंथन -
हिन्दू धर्म का एक बहुत बड़ा प्रसंग है, समुद्र मंथन, जिसमें बहुत से देवताओं व राक्षसों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।समुद्र मंथन के दौरान कुल 14 दिव्य रत्न (मूल्यवान वस्तुएं) निकले थे। इनमें कालकूट (हलाहल) विष, कामधेनु गाय, उच्चैःश्रवा घोड़ा, ऐरावत हाथी, कौस्तुभ मणि, कल्पवृक्ष, रंभा अप्सरा, माता लक्ष्मी, वारुणी (मदिरा), चंद्रमा, पारिजात वृक्ष, पांचजन्य शंख, भगवान धन्वंतरि और अमृत कलश शामिल हैं।
इसमें सबसे पहले निकला था कालकूट (हलाहल) विष, जिसे कोई धारना नहीं करना चाहता था। उस प्रसंग का विस्तार इस प्रकार है।
- विष पान- सावन मास में ही समुद्र मंथन हुआ था। संसार की रक्षा के लिए शिव जी ने हलाहल विष पिया और नीलकंठ कहलाए। विष की गर्मी शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल चढ़ाया। तभी से शिवलिंग पर जल अभिषेक की परंपरा शुरू हुई।
- माता पार्वती का तप- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सावन (श्रावण) महीने में सोमवार का व्रत और निराहार रहकर कठोर नियमित तपस्या की थी। उन्होंने बालू (रेत) का शिवलिंग बनाकर उसकी विधिवत पूजा की और अपना यह व्रत पूरा किया था, जिससे प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था।
एक और पौराणिक कथा इस प्रकार है, जिसके कारण शिव जी सावन माह पसंद है।
(2) ससुराल आगमन -
- शिव का ससुराल आगमन- मान्यता है कि सावन में शिव जी अपने ससुराल आते हैं, जहां उनका स्वागत जलाभिषेक से होता है।
यह सब कारण हैं, कि क्यों शिव जी को सावन का महीना सर्वप्रिय है।
भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा हम सब पर सदैव बनी रहे!
हर हर महादेव!


