Friday, 30 October 2026

Tip : Kitchen Hacks

आज आपके लिए कुछ ऐसे kitchen hacks share कर रहे हैं, जिनसे आपकी बहुत-सी छोटी-छोटी problems solve हो जाएँगी।

इन hacks को हमें Prayagraj से Rashmi Srivastava जी ने भेजा है, जो kitchen की छोटी-छोटी problems को चुटकियों में solve कर देती हैं।

रश्मि जी आपका अनेकानेक आभार…

Kitchen Hacks


(I) Milk spills while boiling :

  • Problem- Kitchen में बहुत बार हमारी ज़रा सी लापरवाही से दूध उफन कर गिर जाता है, और आपने notice किया होगा कि इससे दूध की मलाई का portion निकल जाता है।
  • Solution- रश्मि जी का कहना है कि, जब दूध उफन जाने से मलाई निकल जाए, तो उसी समय एक बार और उबाल लाकर gas off कर दीजिए, आपके दूध में पहले के समान ही मलाई आ जाएगी।


(II) Pressure Cooker Mess :

  • Problem- अक्सर pressure cooker थोड़ा पुराना होने से, या दाल, सब्जी में अधिक पानी डालने से cooker हर बार सीटी बजाने के साथ बहुत सारा पानी भी फेंकता है, जिससे बहुत mess होता है।
  • Solution- रश्मि जी का कहना है कि अगर आप सीटी लगाने से पहले ढक्कन में सीटी वाली जगह पर एक tissue paper लगाकर फिर whistle लगाएँ, तो सीटी के साथ निकलने वाला पानी tissue paper soak लेगा और mess नहीं होगा।


(III) Pichka Paratha-Kachori :

  • Problem- आप को बता दें, अगर भरवां पराठा, कचौड़ी, आदि, सेंकते हुए फूल जाती हैं, तो उसमें अंदर तक even heating होने से taste enhance हो जाता है।
  • Solution- रश्मि जी का कहना है कि अगर आप भरवां पराठा, कचौड़ी बनाते समय उसमें थोड़ा-सा सूखा आटा डाल देंगे तो उनके फूलने की chances बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं, जिससे बने हुए पराठे, कचौड़ी बहुत स्वादिष्ट बनती है।
आपकी kitchen related कोई problem हो तो share कीजिएगा, हम उसे भी solve करने की कोशिश करेंगे।
So stay tuned!

Thursday, 29 October 2026

Poem : इस करवाचौथ व्रत

दूर बैठे हैं पति तो, सखी ईश्वर से कर रही मनुहार।

हे ईश्वर, लौट आए पति तो करवाचौथ का व्रत पूर्ण हो हर बार…

इस करवाचौथ व्रत 


बैठे हो जो दूर जाकर,

जिंदगी में दूर तलक, 

तन्हाई दिखाई देती है।

जो आगोश में लेते हो,

तो जिन्दगी में हर तरफ, 

शहनाई सुनाई देती है।।

गुमसुम गुपचुप हम,

कब तक बैठे रहेंगे?

एक दूसरे से दूर रहकर,

विरह वेदना सहते रहेंगे?

खत्म हो अब अश्कों का तराना,

मिलन हो फिर से हमारा।

गूंजे फिजाओं में हमारे,

प्यार का अफसाना।।

कहते हैं कि पूरे मन से मांगो,

तो पूरी कायनात भी साथ आती है।

करने पूरी दिल की हसरत,

वो भी साथ निभाती है।।

तो चलो हम इसे आजमाते हैं,

अपनी दुआओं के साथ।

कायनात की शक्ति भी मिलाते हैं,

देखते है कि हमारे नसीब में, 

क्या-क्या आता है।

क्या छूटा हुआ साथ?

एक बार फिर से मिल पाता है, 

इस करवा चौथ पर यही है

ईश्वर से प्रार्थना,

मिल जाए साथ पिया का,

दिल से यही है आराधना।।


हे देवी माता, करवाचौथ व्रत पर सभी सुहागिनों को अपने पति का साथ और प्यार प्रदान करें।

क्योंकि जब हो पति-पत्नी का साथ, तभी हो करवाचौथ व्रत की पूर्णता का एहसास।

आप सभी को करवाचौथ व्रत पर विशेष शुभकामनाएँ!

Wednesday, 28 October 2026

Article : कहाँ कब निकलेंगे चंद्रमा?

कल सुहागिनों का सबसे बड़ा और सबसे favourite fast करवाचौथ है, जिसकी तैयारी वो बहुत जोर-शोर से करती हैं।

Dress, jewellery, मेंहदी, श्रृंगार; सब कुछ इतना perfect रखना चाहती हैं कि पिया जी की उनसे नज़रें ही न हटें।

पर इन सब के अलावा दो और बहुत बड़ी बातें होती हैं, कि करवाचौथ व्रत का पूजा-मुहूर्त क्या है, और चन्द्र देव कब दर्शन देंगे?

तो बस, हर बार की तरह इस बार भी आपके इस प्रश्न के उत्तर के साथ आज की post ready है…

कहाँ कब निकलेंगे चंद्रमा?


पूजा का शुभ मुहूर्त शाम के 5:38 से रात के 6:56 बजे तक है।

चतुर्थी तिथि की समाप्ति: रात 10:09 बजे तक 

करवाचौथ (29 October 2026) पर विभिन्न प्रमुख शहरों में चंद्रोदय (moonrise) का समय इस प्रकार रहेगा:

  • Kolkata- रात 7:47 बजे
  • Prayagraj- रात 8:02 बजे
  • Kanpur- रात 8:05 बजे
  • Varanasi- रात 8:05 बजे
  • Lucknow- रात 8:06 बजे
  • Agra- रात 8:18 बजे 
  • Delhi- रात 8:21 बजे
  • Ghaziabad- 8:16 बजे 
  • Noida- 8:17 बजे 
  • Dehradun- रात 8:14 बजे
  • Gurugram- रात 8:22 बजे
  • Indore- रात 8:34 बजे 
  • Bhopal- रात  8:26 बजे 
  • Gwalior- रात 8:20 बजे 
  • Narmadapuram (Hoshangabad)- रात 8:26 बजे 
  • Jaipur- रात 8:31 बजे 
  • Bengaluru- रात 8:52 बजे 
  • Ahmedabad- रात 8:53 बजे
  • Mumbai- रात 9:00 बजे 

अगर आप को किसी विशेष शहर के विषय में जानकारी चाहिए, तो कृपया comment box में बता दें।

Timings तो आपको बता दीं, पर साथ में एक ऐसी बात भी है, जो शायद सुहागिनों को अच्छी न लगे।

मौसम विभाग ने Eastern Uttar Pradesh में भारी से बहुत भारी बारिश और गरज-चमक (heavy thinderstorms) का alert जारी किया है। Eastern Uttar Pradesh में भी गरज-चमक और तेज हवाएँ चलने की आशंका है। मध्य प्रदेश के भी कई शहरों में भारी बारिश होने की forecast की गई है।

ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं को चाँद के दीदार के लिए इंतजार करना पड़ सकता है या शायद चाँद देखना मुमकिन न हो। 

Indian Meteorological Department (IMD) की सूचना के अनुसार बादलों के कारण चाँद हर शहर में देर से दिखेगा, अतः हर शहर का दिया हुआ संभावित समय बदल सकता है।

हालांकि Jaipur, Bengaluru, Ahmedabad, Mumbai आदि क्षेत्रों वाले शहरों (western and southwestern India) में बारिश की forecast नहीं है।

अगर आप को सही समय पर चाँद दिख जाए तो बहुत अच्छी बात है। यदि निर्धारित समय होने पर भी बादल न हटें, तो चंद्रदेव का स्मरण करें और पंचांग के अनुसार जिस दिशा से चंद्रमा का उदय होना चाहिए, उस दिशा की तरफ मुख करके अर्घ्य दें। ऐसा शास्त्र सम्मत है।

सभी सुहागिनों को करवाचौथ व्रत पर विशेष शुभकामनाएँ!

Tuesday, 27 October 2026

Recipe : Thecha

दीपावली के त्यौहार को विभिन्न तरह के dishes को बनाकर tasty और चटपटी दीपावली बनाते हैं।

इसी series में आगे आपके लिए Maharashtra की special Thecha की recipe share कल रहे हैं।

Thecha एक fiery और coarse Maharashtrian condiment है, जिसे traditionally mortar and pestle से बनाते हैं।

यह एक ऐसी side dish है, कि जिस किसी dish के साथ इसे serve करेंगे, उस dish में चार चांद लग जाएँगे…

Thecha


Ingredients :


Method :

  1. Mortar and pestle में सारे ingredients को मोटा-मोटा तोड़कर डाल लें। 
  2. फिर इसे coarsely pounded grind कर लें।

Nothing more! Two steps and your spicy and tasty Thecha is ready to serve.


Tips and Tricks :

  • वैसे इसकी कोई tips and tricks नहीं है, क्योंकि traditionally तो बहुत fiery और nutty होता है, chillies और garlic की generous amount के कारण।
  • पर अगर आप घर पर बना रहे हैं, तो इसे अपने according customise कर सकते हैं। मतलब chilli कितनी डालनी है, लहसुन का amount कितना रखना है, etc. पर chillies और garlic डालिए अवश्य।
  • इसमें आप raw or roasted peanuts डाल सकते हैं, लेकिन roasted peanuts डालने से taste enhance हो जाता है। 
  • इसे आप airtight container में रखकर refrigerator में रखकर 1 week चला सकते हैं, वैसे इसे बनाने में ज्यादा मेहनत और time नहीं लगता है, अतः अगर आप इसे fresh बनाएंगे तो यह ज्यादा tasty लगेगा।

तो बस फिर। इस Thecha को आज ही बनाएँ और इस दीपावली को अधिक स्वादिष्ट बनाएँ!

Monday, 26 October 2026

Recipe : Nachos & Cheese Dip

आपके साथ Mexican Cuisine की tacos की recipe share कर चुके हैं, जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया। साथ ही nachos की demand भी की है।

Nachos बहुत ही nutritious होते हैं, क्योंकि वो maize flour से बने होते हैं। पर बात जब festival की है, वो भी दीपावली की, तो Nachos के साथ उसका complementary Cheesy Dip भी share कर रहे हैं।

तो चलिए, झटपट देख लेते हैं कि कैसे बनता है यह…
Nachos & Cheese Dip

Ingredients :
For Nachos -
  • Maize flour - 1 cup 
  • All purpose flour - ½ cup
  • Oil - 1 tbsp. & extra for deep-frying
  • Salt - as per taste
  • Warm water - about ½ cup
For Cheese Dip-
  • Cheese slices - 4
  • Milk - ½ cup 
  • Tomato sauce - optional

Method :
For Nachos-
  1. एक large bowl में मक्के का आटा, मैदा, नमक, oil व warm water डालकर semi-stiff dough prepare कर लीजिए।
  2. Dough से छोटी-छोटी गोलियाँ तोड़ लीजिए। अब इनकी रोटियाँ बना लें।
  3. हर रोटी को fork से prick कर लीजिए। फिर diamond shape में cut कर लीजिए।
  4. Oil को wok में गर्म होने के लिए रख दीजिए।
  5. Medium slow flame पर golden brown होने तक fry कर लीजिए।
For Cheese Dip-
  1. एक glass bowl में cheese slices को तोड़कर डालें, फिर उसमें ½ cup milk डालकर 1 minute के लिए microwave कर लीजिए।
  2. 1 minute में cheese melt हो जाएगा, अब उसे अच्छे से mix करें, जिससे cheesy और creamy texture आ जाए।
  3. अगर आप को थोड़ा tangy flavour पसंद है तो 1 tbsp. tomato sauce add कर दीजिए।
Relish your nutri-licious Nachos with a creamy Cheese Dip!


Tips and Tricks :
  • Maize flour बहुत जल्दी runny हो जाता है, इसलिए पानी slowly डालकर dough prepare करें।
  • Warm water डालने से कम पानी में ही dough prepare हो जाता है।
  • मैदा डालने से अच्छी binding आ जाती है, इससे taco shells ready करना easy हो जाता है। पर मैदा ½ cup से अधिक नहीं डालें, वरना crisp, texture, और taste नहीं आएगा।
  • इसे घी में मत बनाइएगा, वरना texture बहुत देर तक sustained नहीं रहेगा।
  • Maize flour से ही taste और crisp आता है।
  • रोटी को fork से prick अवश्य कीजिएगा, क्योंकि fry करते समय अगर Nachos फूल गए तो soft हो जाएँगे और shape contain नहीं रहेगा।
तो healthy Nachos घर पर ही बनाएँ और अपने प्यारे बच्चों को खुश कर दें…

Sunday, 25 October 2026

Recipe : Besan-Pyaaz Paratha

नवरात्रि पर्व का समापन विजयादशमी पर्व के साथ हो गया, पर त्यौहार! उनकी तो लड़ी लगी ही हुई है, अभी हिन्दुओं का सबसे बड़ा पाँच-दिवसीय पर्व दीपावली का आगमन होना है।

पंच दिवसीय दिन अलग-अलग व्यंजन बनाने का प्रावधान है तो चलिए इस बार कुछ different cuisine के साथ दीपावली का स्वागत करते हैं।

आज share कर रहे हैं Rajsthan ki delicacy, बेसन-प्याज़ का पराठा।

इसे आप तब भी enjoy कर सकते हैं, जब आप के पास सब्जियाँ न हो। Easily और instantly prepare होने वाली dish की recipe देख लेते हैं…

बेसन-प्याज़ पराठा

Ingredients :
  • Wheat flour - 2 cups
  • Gram flour - 3 to 4 tbsp.
  • Onion - 2 (medium)
  • Salt - as per taste 
  • Green chilli -a s per taste 
  • Ginger - 1 inch 
  • Coriander leaves - handful
  • Coriander seeds - ½ tsp.
  • Fennel seeds - ½ tsp.
  • Carom seeds - ½ tsp.
  • Asafoetida - ½ tsp.
  • Cumin seeds - 1 tsp.
  • Red chilli powder -  1 tsp./as per taste 
  • Turmeric powder - ½ tsp.
  • Ghee - for shallow fry 

Method :
  1. आटा में 1 pinch नमक डालकर नरम-मुलायम dough तैयार कर लें।
  2. जब dough नरम हो जाए, तो उसमें घी डालकर एक बार और अच्छे से गूंथ लें।
  3. Dough को 10-15 मिनट के लिए गीले कपड़े से ढककर रख दें ताकि यह set हो जाए।
  4. साबुत धनिया और सौंफ को दरदरा कूट लें। एक wok में 1 tsp. घी गर्म करें।
  5. इसमें हींग, जीरा, कुटा हुआ धनिया, सौंफ और जीरा डालकर चटकाएँ।
  6. अब इस में बेसन डालकर हल्का-सा भूनकर कच्चापन दूर कर लें।
  7. Gas off करके उसमें छोटा-छोटा कटा हुआ प्याज डालकर धनिया, हरी मिर्च, नमक और अमचूर डालकर अच्छी तरह mix कर लें। 
  8. इस मसाले में थोड़ा-सा पानी डालकर slightly soft dough prepare कर लीजिए।
  9. फिर इस मसाले के dough की छोटी-छोटी गोलियां बना लीजिए।
  10. आटे की एक लोई लेकर उसकी छोटी-छोटी कटोरी-सी बना लें।
  11. इस पर हल्का घी लगाएँ और तैयार किए हुए बेसन-प्याज के मिश्रण की गोली भरकर कटोरी को बंद कर ball shape का गोला तैयार कर लें (जैसे कचौड़ी या आलू के पराठे की गोली तैयार करते हैं)।
  12. इस गोले को चपटा करके सूखे आटे की मदद से हल्के हाथ से‌ गोल बेल लें।
  13. गरम तवे पर पराठा डालें।
  14. एक तरफ से सिकने के बाद पलट लें और घी लगाकर दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेक लें।
Enjoy your Besan-Pyaaz Parathas with curd, chutney, or dip of your favourite choice!


Tips and Tricks :
  • बेसन प्याज़ के mix में थोड़ा-सा पानी डालकर soft dough prepare करके उस की गोलियां बनाकर भरने से पराठे बनाना ज्यादा easy और even होगा।
  • साथ ही पराठे बनने के बाद खाने में उसका भरावन फैलेगा नहीं।
  • प्याज़ के लच्छे से छोटा-छोटा कटा प्याज लेने से पराठा ज्यादा easily और even बनेगा।
  • ध्यान रखिएगा कि प्याज़ में नमक डालने से पानी छोड़ता है। अतः इस मसाले में पानी हिसाब से डालें, जिससे dough ज्यादा गीला न हो।
  • बेसन की गोली भरने के बाद गोले का चिपकाया हुआ भाग हथेली की तरफ करके गोल-गोल कीजिए, इस तरह से गोली seal हो जाएगी और गोला even बनेगा।
सारे tips और tricks follow करके स्वादिष्ट बेसन-प्याज़ पराठा बनाएं और त्यौहार में चार चांद लगाएँ!

Wednesday, 21 October 2026

India's Heritage : Sindoor Khela

(I) Navratri Ending :

कल नवरात्रि पर्व का समापन विजयादशमी पर्व के हर्षोल्लास के साथ हो गया। पर क्या सब जगह हो गया?

नहीं। पर कहाँ रह गया था? पश्चिमी बंगाल और बंगाली समाज में आज विजयादशमी पर्व था।

उनका विजयादशमी पर्व को लेकर अलग cultural recognition है।

विजयादशमी पर्व पर विशेष रूप से सिंदूर खेला किया जाता है।

क्या होता है सिंदूर खेला?

दुर्गा माता के आगमन का बंगाली समाज में क्या पर्याय है? आज इसी को India's Heritage segment में share कर रहे हैं…

सिंदूर खेला


(II) The Ritual :

सिंदूर खेला West Bengal और Bengali community में दुर्गा पूजा के अंतिम दिन (विजयादशमी) को मूर्ति विसर्जन से ठीक पहले मनाई जाने वाली एक प्रमुख और पारंपरिक रस्म है।

इसका शाब्दिक अर्थ है ‘सिंदूर का खेल’।

इस रस्म से जुड़ी कुछ मुख्य बातें और परम्पराएँ हैं, आइए जानते हैं कि वो क्या हैं?


(III) Major Details :

  • Farewell of Maa Durga- ऐसा माना जाता है कि दुर्गा पूजा में माँ दुर्गा अपने मायके (पृथ्वी) आती हैं, उनके भव्य स्वागत के लिए जगह-जगह पूजा-पंडाल तैयार किए जाते हैं। षष्ठी से लेकर विजयादशमी पर्व तक रोज पंडाल में माँ दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है, खिचड़ी, पूड़ी-सब्जी इत्यादि का दोपहर में भोग प्रसाद खाया जाता है। शाम से रात तक विभिन्न भव्य और cultural programmes होते हैं। रात में खाना मुख्यतः विभिन्न पंडालों में दुर्गा माता के दर्शन के दौरान बाहर ही खाया जाता है। और विजयादशमी के दिन माँ दुर्गा को मायके से ससुराल (कैलाश) लौटने से पहले विदा किया जाता है।
  • Debi Boron- Immersion से पहले महिलाएँ माँ दुर्गा की आरती करती हैं, पान के पत्ते से माँ के मुखमंडल को स्पर्श करती हैं तथा उनके माथे व चरणों में सिंदूर व मिठाई अर्पित करती हैं। इस अनुष्ठान को ‘देबी बोरोन’ कहा जाता है।
  • Applying Sindoor- माँ को सिंदूर चढ़ाने के बाद महिलाएँ आपस में एक-दूसरे के माथे, गालों और चेहरे पर सिंदूर लगाती हैं। जो ऐसा प्रतीत होता है, मानो सिंदूर से “होली” के समान खेला जा रहा है।
  • Traditional Outfits- बंगाली समाज में red border वाली सफेद saree को विशेष मान्यता प्राप्त है। और हर शुभ अवसर जैसे दुर्गा पूजा, विवाह, पूजा-पाठ इत्यादि में इसे पहना जाता है। दुर्गा पूजा वहाँ का सबसे बड़ा त्यौहार व उत्सव है।
  • इस उत्सव में महिलाएँ आमतौर पर लाल border वाली सफेद साड़ी (‘लाल पाड़ साड़ी’) और हाथों में शंख और लाल चूड़ियाँ (‘शंखा-पोला’) पहनती हैं।
  • Dhol & Dance- जैसे Punjab में ढोल, वैसे ही Bengal में ढाकी को विशेष स्थान दिया गया है। और हर शुभ अवसर पर ढाकी वाले को बुलाया जाता है। अतः षष्ठी में मातारानी की मूर्ति की स्थापना के साथ ही ढाकी वाले आ जाते हैं और विजयादशमी पर्व पर मूर्ति विसर्जन तक रहते हैं। इस रस्म के दौरान पारंपरिक ढाकी (ढोल) की थाप, शंखनाद और उल्लास का माहौल होता है।
  • Importance- यह रस्म महिलाओं द्वारा एक-दूसरे के सुहाग की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य, पारिवारिक सुख और समृद्धि की कामना के लिए मनाई जाती है।

बोलो दुग्गा माई के जोय!

Tuesday, 20 October 2026

Poem : बस एक अपराध

आज शारदीय नवरात्र का समापन है, माँ दुर्गा और भगवान श्रीराम के विजयादशमी पर्व के साथ।

माँ दुर्गा और भगवान श्रीराम की कृपादृष्टि सदैव बनी रहे!

बस एक अपराध


राम और रावण के युद्ध में,

हुआ था बहुत रक्तपात।

रावण के अहंकार ने,

पूरा वंश कर दिया समाप्त।।


सोने की थी लंका उसकी,

राज्य में थी खुशियाँ अपार।

बस एक ही गलती से,

सब हुई तार-तार।।


त्रिकाल दर्शी, प्रकांड विद्वान,

भक्त शिरोमणि, था बहुत महान। 

सब क्षणभंगुर हो गया था

 पर-स्त्री का जब किया अपमान।।


पर, क्या एक अपराध ही,

होता है सब पर भारी?

शायद क्षम्य हो जाता,

गर साधु वेष न‌ धरता अहंकारी।।


उस अपराध में शामिल था,

संत समाज का भी अपमान।

जिन्हें समझा जाता है,

 ईश्वर के समान।।


गर वो, एक अपराध न करता वो,

साधु रूप न धरता वो।

तो इस तरह युगों-युगों तक, 

अपराध बोध में न जलता वो।।


आइए, हम सब प्रभु श्रीराम से प्रार्थना करें कि हमें छोटे-बड़े सभी पापों से मुक्त रखें और अपने श्रीचरणों में रखकर हमारी भक्ति स्वीकार करें।

जय श्रीराम!

Monday, 19 October 2026

Bhajan (Devotional Song) : माँ नसीबों से ज़्यादा दे रही हैं

आज नवरात्रि पर्व की नवमी में माँ के श्रीचरणों में यह भजन समर्पित कर रहे हैं।

हे मातारानी, हम सब पर अपनी कृपादृष्टि सदैव बनाए रखें!

माँ नसीबों से ज़्यादा दे रही हैंं


बिन पानी के नाव खे रही हैं, 

माँ नसीबों से ज़्यादा दे रही हैं।


मेरा छोटा-सा घर, महलों की रानी हैं माँ।

मेरी औकात क्या महारानी हैं माँ।

फिर भी साथ मेरे रह रही हैं, 

माँ नसीबों से ज़्यादा दे रही हैं।।


भूखा उठता हूँ मैं, भूखा सोता नहीं।

दुःख मुझ पर पड़े, तब भी रोता नहीं।

दिन-रात खबर ले रही हैं,

माँ नसीबों से ज़्यादा दे रही हैं।।


माँ के भक्त हैं एक से एक बड़े।

उनके चरणों में कंकड़ के जैसे पड़े।

फिर भी दर्शन मुझे दे रही हैं, 

माँ नसीबों से ज़्यादा दे रही हैं।।


कहना चाहूँ बहुत, कह पाता नहीं।

उनके बिना तो अब, रह पाता नहीं।

दिल से आवाज़ यह आ रही है,

माँ नसीबों से ज़्यादा दे रही हैं।



पूरे भजन का video YouTube पर देखने के लिए link पर click करें-

Sunday, 18 October 2026

Recipe : Paneer Pops (the airfryer style) & Phalahari Chutney

नवरात्रि पर्व चल रहा है, जिसमें बहुत लोग पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं। यदि आप भी एक ही चीज खाकर bore हो गये हैं, तो हमारे fast special recipes के link पर‌ click करें- https://shadesoflife18.blogspot.com/search/label/Recipes%20-%20Fasts?m=0

आज इसी segment में एक और recipe share कर रहे हैं, यह easily और instantly बनने वाली less fat और most healthy dish है।

और सबसे बड़ी बात, यह fast की और recipes की तरह आप के carbs और fat में add-on नहीं करेगी। साथ ही आपके साथ ऐसी फलाहारी chutney share करेंगे, जो हर dish के साथ चार चांद लगा देगी।

Paneer Pops (the airfryer style) & Phalahari Chutney



Ingredients :

  • Fresh creamy paneer - 100 gm.
  • Almonds - 8 to 10 
  • Foxnuts - 50 gm.
  • Thick & creamy curd - 2 tbsp. 
  • Fresh coriander leaves - handful
  • Ginger - 1 inch
  • Green chillies - optional 
  • Pink salt - as per taste 
  • Ghee - 1 tbsp.


Method :

  • Foxnuts को crispy होने तक dry roast कर लीजिए, फिर इसे coarsely grind कर लीजिए।
  • एक mixer grinder jar लीजिए, उसमें धनिया, अदरक, दही, बादाम, और 5 से 7 मखाने में स्वादानुसार सेंधा नमक डालकर fine और thick paste बना लें।
  • पनीर के cubes काट लीजिए। इनको fine paste में अच्छे marinate कर दीजिए।
  • फिर इसे मखाने के coarse powder पर roll कर दीजिए, जिससे पूरे पनीर cubes पर मखाने की coat लग जाए।
  • Airfryer को 200°C पर preheat करें।
  • अब पनीर के टुकड़ों को silicon mould/steel plate में place कर दीजिए।
  • घी को गर्म कर लीजिए और सभी paneer pieces पर थोड़ा-थोड़ा sprinkle कर दीजिए।
  • 180°C पर 5 minutes और 200°C पर 5 minutes के लिए airfryer कर लीजिए। 
  • जो paste बचे, उसमें थोड़ा-सा पानी डालकर एक बार फिर grind कर लीजिए।

Crispy Paneer Pops and Phalahari Chutney is ready to serve. Enjoy your fast without any guilt!


Tips and Tricks :

  • पनीर पानी में भीगा हुआ न लें, otherwise वो बहुत ज्यादा पानी release करेगा।
  • मखाना भूनकर दरदरा ही पीसें, यही paneer pops को crispy और crunchy texture और taste देगा।
  • पनीर के cubes होने से coating अचछी‌ हो जाती है, हालांकि मखाने की coating के बाद proper cubic texture नहीं रहता है। 
  • हमने घी use किया है, क्योंकि घी को व्रत के भोजन के लिए ज्यादा appropriate मानते हैं। साथ ही घी से fast के लिए prepare की गई dish का taste enhance हो जाता है।
  • हम ने creamy paneer और thick and creamy curd लिया है, इसी से हम ghee or oil की quantity reduce करेंगे। इसलिए ध्यान रखिएगा कि curd creamy और thick रहे।
  • Curd thick न होकर runny होने से marinate करने में problem होगी।
  • आप घी डालना avoid करके इसे oil free भी बना सकते हैं, पर हमने थोड़ा-थोड़ा घी सिर्फ इसलिए डाला है, जिससे airfryer करते समय मखाने जल न जाएँ।
  • धनिया, अदरक, बादाम, हरी मिर्च, दही और मखाने से तैयार marination Paneer Pops के taste को next level पर ले जाता है।
  • Paneer pops के marination और coating के बाद बचे धनिया, marination paste, और coarse foxnut powder को आप mixer grinder jar में डालकर grind कर लीजिए। 
  • कुछ भी waste नहीं होगा और चटनी के साथ pops में चार चांद लग जाएंगे।
  • अगर आप के पास airfryer नहीं है, तो आप इसे pan में shallow fry भी कर सकते हैं। 

तो आज की शाम इसे ही माता रानी को प्रसाद स्वरूप चढ़ाएँ और चाय के साथ लुत्फ उठाएँ।

व्रत न होने पर भी आप इसे evening tea और kitty party or parties में as a starter serve कर सकते हैं।

जय माता दी! 

Saturday, 17 October 2026

India's Heritage : सप्तमी, अष्टमी‌ व नवमी अति-विशेष क्यों?

(I) The Major Dates :

सनातन धर्म में नवरात्रि पर्व का बहुत महत्व है। फिर शारदीय नवरात्रि पर्व का महत्व और अधिक माना जाता है।

और उसमें भी सप्तमी, अष्टमी‌ व नवमी को बहुत अधिक महत्वपूर्ण समझा जाता है। पर क्यों?

आज के India's Heritage segment में इसे ही share कर रहे हैं…

सप्तमी, अष्टमी‌ व नवमी अति-विशेष क्यों?


(II) Goddess Durga's Avatars :

सप्तमी, अष्टमी और नवमी नवरात्रि की सबसे महत्वपूर्ण तिथियां हैं, क्योंकि ये देवी दुर्गा के उग्र और शांत रूपों (कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री) की पूजा और उनकी शक्ति को समर्पित हैं।

इस समय विशेष हवन, कन्या पूजन, और माँ दुर्गा की विजय का उत्सव मनाया जाता है। यहाँ माता की असीम कृपा से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।


(III) Major Reasons :

  • Supreme Forms- सप्तमी को माँ कालरात्रि, अष्टमी को माँ महागौरी और नवमी को माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती है, जो शक्ति के सर्वोच्च स्वरूप हैं। 
  • Key Role of Kanya Pujan- अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन (कन्याओं को देवी का रूप मानकर भोजन कराना) किया जाता है। यह नवरात्रि पर्व का मुख्य भाग माना जाता है। जिससे माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। 
  • Receiving Asht Siddhis- इन दिनों की साधना से साधक को अणिमा, गरिमा, लधिमा, ईशित्व एवं वशित्व जैसी आठों सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।
  • Symbol of Victory and Peace- नवमी तिथि को माता ने असुरों (महिषासुर) का संहार किया था, इसलिए यह विजय, सुख-समृद्धि और ज्ञान का प्रतीक है। 
  • Completion of Yajna and Havan- इन दिनों किए गए हवन और उपवास से mental peace, energy में वृद्धि और आध्यात्मिक लाभ मिलता है, जो पिछले दिनों के व्रत को पूर्णता देते हैं। 
  • Yogini Worship- अष्टमी को महालक्ष्मी (ईशान कोण) और नवमी को ब्रह्माणी (पूर्व दिशा) योगिनियों की पूजा का भी विधान है।

संक्षेप में, ये दिन आध्यात्मिक ऊर्जा, आत्म-शुद्धि और माँ दुर्गा के दिव्य आशीर्वाद को प्राप्त करने के सबसे उत्तम समय माने जाते हैं।

यही कारण है नवरात्रि पर्व में सप्तमी, अष्टमी व नवमी को अति-विशेष कहते हैं। यही कारण है, इन्हें महासप्तमी, महाअष्टमी व महानवमी कहते हैं।

दुर्गा माता की जय!

Friday, 16 October 2026

India's Heritage : षष्ठी क्यों विशेष?

आज शारदीय नवरात्रि पर्व की षष्ठी है, जो कि बहुत विशेष है। पर आखिर किस तरह से विशेष?

आइए, बताते हैं आपको। 

सनातन धर्म में दोनों नवरात्रि (चैत्र और शारदीय) पर्व के प्रथम दिवस से ही विशेष मानते हैं।

लेकिन बंगाली समाज में, जिसमें दुर्गा माता को मुख्य विशेषता प्रदान की जाती है, उसकी मान्यता सनातन धर्म से कुछ अलग है।

वहाँ शारदीय नवरात्रि पर्व को अधिक महत्व दिया जाता है, तथा वहाँ नवरात्रि पर्व नवरात्र से एक दिन पहले, यानी महालया से प्रारंभ मानी जाती है।

महालया की क्या विशेषता है, यह हम आपको अगले साल महालया के दिन ही बताएंगे। आज षष्ठी है, तो विशेषता भी षष्ठी पर्व की ही बताते हैं…

षष्ठी क्यों विशेष?


आप कहेंगे कि हम तो बंगाली नहीं हैं, फिर कैसे बताएँगे?

तो ऐसे, कि हमारे पति की पहली posting Durgapur (West Bengal) में ही थी।

साथ ही अभी भी, हम जब दिल्ली में रहते हैं, तो यहाँ भी शारदीय नवरात्रि पर्व Bengali culture से ही मनाते हैं।

पंडाल अपनी पूर्ण सजावट से सुसज्जित हो चुका है, माता रानी का आगमन हो चुका है और इस विशेष आयोजन ने ही हमें आज की post India's Heritage segment में लिखने को प्रेरित किया है‌।

हाँ तो आप को बता दें, महालया से प्रारंभ तो होता है, लेकिन वो rituals केवल मातारानी की मूर्ति के लिए होता है।

लेकिन माता रानी के पंडाल की सम्पूर्ण सजावट और माता रानी का आगमन नवरात्रि पर्व की षष्ठी में ही होता है।

बंगाली पूजा-पंडालों में माँ दुर्गा का आगमन और उनका आह्वान मुख्य रूप से महाषष्ठी की शाम को ‘Bodhan’ नामक अनुष्ठान के साथ होता है।

महाषष्ठी की शाम को देवी का बोधन और आह्वान किया जाता है, जिससे उनकी आंखें खोली जाती हैं और प्राण-प्रतिष्ठा की प्रक्रिया होती है।

एक विशेष परंपरा के अंतर्गत इससे पहले पंचमी के दिन ‘कल्पारंभ’ और बेल के पेड़ के नीचे मां को निमंत्रण देने की रस्म होती है, और षष्ठी की संध्या बेला में माँ का पंडाल में वास्तविक आगमन माना जाता है।

जिसमें माँ दुर्गा की विशाल मूर्ति महिषासुर का मर्दन करते हुए, और माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती, गणेश जी और कार्तिकेय जी की मूर्तियां होती है।

दुर्गा माता की मूर्ति से थोड़ी छोटी बाकी मूर्तियां होती हैं। सभी भगवान जी की मूर्तियाँ अपने-अपने वाहन‌ पर आसीन होती है।

इस तरह से बंगाल में शारदीय नवरात्रि पर्व का मुख्य आरंभ षष्ठी से आरंभ होकर विजयादशमी पर्व तक सिंदूर खेला के पश्चात् मूर्ति विसर्जन तक होता है।

नवरात्रि पर्व के षष्ठी के साथ ही वो पूर्णतः माँ को समर्पित हो जाते हैं। इन दिनों पढ़ाई-लिखाई, कामकाज, सब माँ को समर्पित रहता है।

घर में विभिन्न कार्य जैसे भोजन इत्यादि बनाना सब पंडाल में ही रहता है। अर्थात् सब को छोड़कर, सिर्फ और सिर्फ माँ की भक्ति।

विभिन्न तरह के cultural programmes भी पंडाल में आयोजित किए जाते हैं।

इसलिए ही बंगाल को आज भी culturally rich कहा जाता है।

यही कारण है कि षष्ठी को शारदीय नवरात्र में विशेष महत्त्व दिया जाता है।

वैसे हमारे लिए यह एक और कारण से भी विशेष है, क्योंकि शारदीय नवरात्रि पर्व की षष्ठी को ही मातारानी ने हमें कन्या रूपी बहुमूल्य रत्न प्रदान कर माँ बनने का विशेष सौभाग्य प्रदान किया था।

बोलो दुग्गा माई की जोय!

Thursday, 15 October 2026

India's Heritage : The Rise of Navadurga

(I) Her Emergence :

नवरात्रि पर्व चल रहा है, जिसमें जग-जननी माँ जगदम्बा की पूजा-अर्चना करते हैं। पर माँ दुर्गा का प्रकटीकरण किस प्रकार हुआ?

किस कारण हुआ? और वो शक्ति स्वरूपा क्यों कहलाती हैं। वो इतनी विशेष क्यों है? महिषासुर कौन था, उसे किस से और वरदान प्राप्त था। माँ दुर्गा क्यों उन्हें महिषासुरमर्दिनी कहा जाता है?

ऐसे बहुत से प्रश्न दिमाग में घूमते हैं। इन्हीं प्रश्नों के उत्तर share कर रहे हैं आज के India's Heritage segment में…

The Rise of Navadurga


(II) Traditional Stories :

पौराणिक कथाओं के अनुसार माँ दुर्गा का जन्म देवताओं के सामूहिक तेज (ऊर्जा) से हुआ था। इसकी मुख्य कहानी कुछ इस प्रकार है।

महिषासुर नाम का एक अत्याचारी दुराचारी राक्षस था, लेकिन उसमें बहुत अधिक बल तब आया, जब उसने भगवान ब्रह्मा की कठिन तपस्या करके यह वरदान प्राप्त किया था कि किसी भी पुरुष या देवता के हाथों उसकी मृत्यु नहीं होगी।

ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त कर वही हुआ, जो होना था। महिषासुर के अत्यंत अहंकारी और बलशाली हो गया।

उसने स्वर्ग पर आक्रमण कर देवराज इंद्र को हरा दिया और देवताओं को स्वर्ग से बाहर निकाल दिया।

महिषासुर के अत्याचारों से त्रस्त होकर सभी देवता भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महादेव (शिव) के पास सहायता मांगने पहुँचे।

देवताओं की बात सुनकर त्रिमूर्ति ने विचार-विमर्श किया कि अब कुछ ऐसा करना चाहिए, जिससे महिषासुर का अत्याचार समाप्त हो जाए।

लेकिन रुकावट ब्रह्मा जी का वरदान बन रहा था। उनके अनुसार कोई भी पुरुष या देवता महिषासुर का अंत नहीं कर सकता था।

सोचा किसी देवी से महिषासुर का अंत करने को कहा जाए। लेकिन वरदान के पश्चात् महिषासुर अत्यंत बलशाली हो चुका था।

साथ ही त्रिदेव यह भी चाहते थे कि उसे अधिक मौके न दिए जाएँ और एक भी बार के युद्ध के साथ महिषासुर के अत्याचार को समाप्त कर दिया जाए।


(III) Shakti's Rise :

इस सोच के साथ ही माँ दुर्गा का प्रकटीकरण इस प्रकार हुआ।

  • त्रिदेवों और सभी देवताओं के शरीर से एक दिव्य और तेजस्वी ऊर्जा (तेज) प्रकट हुई।
  • भगवान शिव के तेज से माँ का मुख बना।
  • भगवान विष्णु के तेज से भुजाएँ बनीं।
  • ब्रह्मा जी के तेज से चरण बने।
  • अन्य सभी देवी-देवताओं के तेज से शरीर के विभिन्न अंग और दिव्य शक्तियाँ प्रकट हुईं।
  • इस प्रकार समस्त शक्तियों के पुंज से एक अद्युत और त्रिलोकी शक्ति माँ दुर्गा (आदिशक्ति) का प्रकटीकरण हुआ।

(IV) Her Accessories :

जब शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा का प्रकटीकरण हो गया, तो निर्धारित किया गया कि माँ दुर्गा को विभिन्न अस्त्र-शस्त्र से सुसज्जित किया जाए।

अतः त्रिदेवों व देवताओं द्वारा माँ दुर्गा को अस्त्र-शस्त्र और सवारी प्रदान किए गए।

प्रकटीकरण के बाद सभी देवताओं ने माँ दुर्गा को अपने-अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए।

  • भगवान शिव ने त्रिशूल दिया।
  • भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र दिया।
  • इंद्र देव ने वज्र प्रदान किया।
  • वरुण देव ने शंख और पाश दिया।
  • हिमालय पर्वत ने सवारी के लिए सिंह (शेर) भेंट किया।

इस तरह से शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बा का प्रकटीकरण हुआ। इसके पश्चात् माँ दुर्गा ने महिषासुर के साथ भीषण युद्ध किया और उसका वध किया।


इस प्रकार माँ जगदम्बा का प्रकटीकरण हुआ, महिषासुर के मर्दन के लिए, उसके बाद ही उनका नाम महिषासुरमर्दिनी पड़ा।

उनके अंदर त्रिदेवों व देवताओं की शक्ति समाहित थी, इसलिए ही उन्हें शक्ति-स्वरूपा कहा जाता है, और इसलिए वह विशेष भी हैं।

बोलो दुर्गा माता की जय!

माँ, आपके सभी भक्तों पर आपकी अनुकम्पा बनी रहे।

कल आपको बताएंगे कि सप्तमी, अष्टमी, और नवमी को अधिक महत्वपूर्ण क्यों मानते हैं? उन्हें महासप्तमी, महाअष्टमी, महानवमी क्यों कहते हैं?

Stay tuned…

Tuesday, 13 October 2026

Recipe : Aloo Lachcha Tikki

नवरात्रि चल रही है और बहुत से लोग पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं, जिसमें वो फलाहारी व्यंजन ही खाते हैं। पूरे नौ दिन तक फलाहारी व्यंजन खाना हो तो variety भी चाहिए। 

आप इसके लिए हमारे fast special segment के link पर click कर सकते हैं- https://shadesoflife18.blogspot.com/search/label/Recipes%20-%20Fasts?m=0

इसी segment में आज एक और recipe share कर रहे हैं। और यह recipe जितनी easily prepare होगी, उतनी ही all time favourite भी है।

वो है आलू की टिक्की, super crispy, but without rice flour, corn flour etc…

आलू लच्छा टिक्की


Ingredients :

  • Boiled potatoes - 2 (medium)
  • Grated potatoes - 6 (medium)
  • Pink salt - as per taste 
  • Pure ghee - shallow frying


Method :

  1. उबले आलू को mash करके fine paste बना लीजिए।
  2. अब इसमें सेंधा नमक और आलू के लच्छे डालकर अच्छे से mix कर लीजिए।
  3. अब इसे टिक्की जैसा shape दे दीजिए।
  4. Pan पर शुद्ध देसी घी डालकर आलू की टिक्की को दोनों तरफ से golden brown होने तक shallow fry कर लीजिए।

Your scrumptious Aloo Lachcha Tikki is ready to serve!


Tips and Tricks :

  • इसमें उबले और कच्चे आलू के combination से टिक्की बनाते हैं।
  • पर ध्यान रखिएगा कि उबला आलू, सिर्फ इतना ही होना चाहिए, जितनी से binding हो, extra होने से टिक्की में proper crisp नहीं आएगा।
  • इसमें उबले आलू से binding होती है, जो binding के साथ टिक्की को अंदर से soft और moist बनाता है। और कच्चे आलू से crispy texture आता है।
  • यही कारण है कि इस टिक्की में rice flour और corn flour की requirement न तो binding के लिए चाहिए, न crispy texture के लिए चाहिए।
  • जबकि ऐसी बनी टिक्की का taste और crisp गजब का आता है, इसलिए आप इसे व्रत में बना सकते हैं।
  • और आलू की टिक्की की चाट के लिए भी...

व्रत न होने से भी ऐसे ही बनाएँ, और as a chaat relish करें…


Monday, 12 October 2026

India's Heritage : The Navrang of Navratri

शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो चुका है (11 October से 19 October 2026) जो नौ दिनों का है।

शरद ऋतु में जग-जननी माँ जगदम्बा ने महिषासुर मर्दन करने में नौ रूप धारण किए थे, इसलिए ही इन्हें शारदीय नवरात्रि पर्व कहा जाता है। 

नौ रूप, नौ दिनों, और हर एक दिन के लिए नौ रंग निर्धारित रहते हैं। वो नौ रंग कौन से हैं और किस कारण से विशेष दिन के लिए विशेष रंग निर्धारित रहते हैं?

आइए, आज इसे ही share कर देते हैं, जिससे कि आप इन नौ दिनों में उसके अनुसार ही वस्त्र धारण करें और माता रानी को प्रसन्न कर उनकी कृपा प्राप्त करें।

नवरात्रि के नवरंग


नौ दिनों के शुभ रंग और देवी के स्वरूपों की सूची इस प्रकार है।

  • Day 1 (11) {प्रतिपदा}- माँ शैलपुत्री की पूजा:- नारंगी (orange) [उत्साह और positivity का प्रतीक] धारण करें 
  • Day 2 (12) {द्वितीया}- माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा:- सफेद (white) [शांति और पवित्रता का प्रतीक]
  • Day 3 (13) {तृतीया}- माँ चंद्र घंटा की पूजा:- लाल (red) [साहस और शक्ति का प्रतीक]
  • Day 4 (14) {चतुर्थी}- माँ कूष्मांडा की पूजा:- Royal Blue [भव्यता और स्थिरता का प्रतीक]
  • Day 5 (15) {पंचमी}- माँ स्कंदमाता की पूजा:- पीला (yellow) [खुशी और बुद्धिमत्ता का प्रतीक]
  • Day 6 (16) {षष्ठी}- माँ कात्यायनी की पूजा:- हरा (green) [प्रकृति और नए जीवन का प्रतीक]
  • Day 7 (17) {सप्तमी}- माँ कालरात्रि की पूजा:- धूसर (grey) [संतुलित सोच का प्रतीक]
  • Day 8 (18) {अष्टमी}- माँ महागौरी की पूजा:- बैंगनी (purple) [महत्वाकांक्षा और आध्यात्मिकता का प्रतीक]
  • Day 9 (19) {नवमी}- माँ सिद्धिदात्री की पूजा:- मोर हरा (peacock green) [समृद्धि और विशिष्टता का प्रतीक]

माँ का हर रूप निराला है, और उनके हर दिन का हर रंग अनोखा है। वैसे तो हर रंग माँ की विशेषता के अनुरूप ही निर्धारित किए गए हैं।

लेकिन पूजा-पंडाल kitty party इत्यादि के लिए रंगों का महत्व है। अन्यथा, माँ को जिन रंगों से सबसे अधिक प्रसन्न कर सकते हैं वो नौ रंग हैं:-

  • भक्ति का रंग
  • समर्पण का रंग
  • आस्था का रंग
  • अटूट विश्वास का रंग
  • अटूट श्रद्धा का रंग
  • सत्यनिष्ठा का रंग
  • दया का रंग
  • कर्तव्यनिष्ठता का रंग
  • प्रेम का रंग

जो इन नौ रंगों में रंगा हुआ है, माँ उससे सदैव प्रसन्न रहती हैं, अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखती हैं।

बाकी वस्त्रों का रंग तो बाह्य आवरण है, उनसे ज़्यादा आंतरिक रंगों का महत्व है, उन रंगों में खुद को रंग कर भक्ति में लीन हो जाएँ।

जयकारा शेरावाली दा!

Sunday, 11 October 2026

Bhajan (Devotional Song): मैने तेरे ही भरोसे मैय्या,

आज से शारदीय नवरात्र आरंभ हो गया, माँ के आगमन पर यह भजन हम सभी भक्तों की ओर से जग-जननी माँ दुर्गा, जगदंबा के श्री चरणों में समर्पित है।

माँ के स्वरूप, माँ लक्ष्मी, माँ काली, माँ शारदा को समर्पित है…

मैंने तेरे ही भरोसे मैय्या



मैंने तेरे ही भरोसे मैय्या,

सागर में नैया डाल दई।।

काहे की वा नाव बनाई,

काहे की पतवार,

मैय्या काहे की लगा दी जंजीर,

सागर में नैया डार दई।

मैने तेरे ही भरोसे मैय्या,

सागर में नैया डाल दई।।


दुर्गा नाम की नाव बनाई,

भक्ति की पतवार,

ओ मैय्या ज्ञान की लगा दी जंजीर,

सागर में नैया डार दई।

मैने तेरे ही भरोसे मैय्या,

सागर में नैया डाल दई।।


कौन सखी वामें बैठनहारे,

कौन है खेवनहार,

मैय्या कौन लगाहे बेड़ा पार,

सागर में नैया डार दई।

मैने तेरे ही भरोसे मैय्या,

सागर में नैया डाल दई।।


शारदा मैया बैठनहारी,

काली खेवनहार,

मोरी लक्ष्मी जी लगावे बेड़ा पार,

सागर में नैया डार दई।

मैने तेरे ही भरोसे मैय्या,

सागर में नैया डाल दई।।


भक्तों की है आस मैय्या से,

चरणन में बलिहार,

मोरी दुर्गा जी लगाहे बेड़ा पार,

सागर में नैया डार दई।


मैने तेरे ही भरोसे मैय्या,

सागर में नैया डाल दई।।


मैंने तेरे ही भरोसे मैय्या,

सागर में नैया डाल दई।।




पूरे भजन का आनंद लेने के लिए इस link पर click करें-

हे माँ, आपके ही श्रीचरणों में अपनी जीवन-रूपी नैय्या डाल दी है। माँ, हम सभी भक्तों का कल्याण करें।

शारदीय नवरात्रि पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएँ !


बोलो दुर्गा माई की जय!

Saturday, 10 October 2026

India's Heritage : दानवीर कर्ण के पितृ

पितृपक्ष चल रहे थे, जिनका समापन आज, सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। सर्वपितृ अमावस्या को सनातन धर्म में बहुत बड़ा दिन माना जाता है।

कहा जाता है कि अगर आप को अपने पितरों की तिथि नहीं याद है, या किसी वजह से आप पूजा-अर्चना नहीं कर सकें हैं, तो आज के दिन पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

जैसा कि नाम से ही विदित है, सर्वपितृ अर्थात सभी पितरों के लिए, तो इस एक दिन पूजा-अर्चना, दान-पुण्य, हवन इत्यादि करने से आप अपने सभी पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं, तृप्त कर सकते हैं।

अब कुछ प्रश्न मन में आते हैं, कि “पितृपक्ष का आरंभ कब से हुआ? क्या पितृपक्ष का औचित्य सनातन धर्म में समझाया गया है? क्या किसी पौराणिक कथा में इसका वर्णन है?”

दानवीर कर्ण के पितृ


जी हाँ, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस कथन की पुष्टि करने के लिए एक कहानी का वर्णन है।

और इस कहानी का मुख्य पात्र कोई और नहीं, बल्कि जगत में दानवीर के नाम से सुप्रसिद्ध कर्ण है।

आइए, उसी कथा से समझते हैं कि क्यों आवश्यक है, पितृपक्ष में अन्नदान का महत्व।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, पितृपक्ष और श्राद्ध की शुरुआत महाभारत काल और दानवीर कर्ण की इस प्रसिद्ध कथा से जुड़ी मानी जाती है-

कहा जाता है, महाभारत के युद्ध में मृत्यु के बाद जब दानवीर कर्ण की आत्मा स्वर्ग पहुंची, तो उन्हें भोजन के रूप में सोना और रत्न परोसे गए।

  • Gold Cuisines- वहाँ भूख लगने पर कर्ण को भोजन की थाली परोसी गई। कर्ण ने जब भोजन ग्रहण करना चाहा, तो सारा भोजन सोने के टुकड़े और आभूषण में बदल जाता था। कर्ण यह देखकर हैरान हो गया, तब कर्ण ने देवराज इंद्र से इसका कारण पूछा।
  • Indra Dev's Reply- इंद्रदेव ने कर्ण को बताया कि उन्होंने जीवनभर सोना और धन तो दिल खोलकर दान किया था, लेकिन अपने पूर्वजों (पितरों) के निमित्त कभी अन्न, जल या तर्पण नहीं किया था।
  • Lack of Knowledge and Penance- कर्ण ने विनम्रता से कहा कि वे तो जीवनभर यह जानते ही नहीं थे कि उनके असली माता-पिता और पूर्वज कौन हैं, क्योंकि उनका पालन-पोषण राधा और अधिरथ ने किया था। इसलिए उन्होंने कभी उनके नाम से श्राद्ध या अन्नदान नहीं किया।
  • An Opportunity- कर्ण की यह समस्या और उनकी उदारता को देखकर उन्हें अपनी भूल सुधारने के लिए 15 से 16 दिनों के लिए पुनः पृथ्वी पर लौटने की अनुमति दी गई।
  • Donation and Food- धरती पर आकर कर्ण ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए 16 दिनों तक विधि-विधान से श्राद्ध किया, पिंडदान किया, तर्पण किया और जरूरतमंदों को भरपेट अन्न, जल व वस्त्रों का दान किया।
  • Beginning of Pitri-Paksha- जब कर्ण के ये 16 दिन पूरे हुए और वे वापस स्वर्ग लौटे, तब उनकी भोजन की थाली सोने के बजाय असली अन्न से भरी हुई थी। मान्यता है कि कर्ण द्वारा किए गए इन्हीं 16 दिनों के अनुष्ठान के बाद से ही पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष) की शुरुआत हुई, ताकि लोग अपने-अपने पितरों को याद कर उनका तर्पण कर सकें।

सनातन धर्म में पौराणिक कथाओं के माध्यम से हमें सरल व सटीक उपाय बताए जाते हैं, जिससे हम सहजता से उसे अपना सकें। 

सभी पितरों को सादर प्रणाम, आप सब की कृपादृष्टि सदैव हम सभी पर बनी रहे...

Friday, 9 October 2026

Article : Organic Revolution

(I) Our Inspiration :

आज का यह article कोई information को share करने के लिए नहीं डाल रहे हैं, बल्कि एक appeal, एक awareness के लिए डाल रहे हैं।

इसलिए इसे जितना हो सके forward कीजिए, अगर आप भी Cancer से खुद को और अपने परिवार को बचाना चाहते हैं तो।

यह article movie The India Story देखने के बाद लिखने की प्रेरणा मिली। इसमें Green Revolution को रोक लगाकर अब Organic Revolution करने की appeal की गई है।

जो कितनी आवश्यक है, उसे समझने से पहले यह जानते हैं कि green revolution क्या है, यह क्यों शुरू किया गया था, और अब इसकी आवश्यकता क्यों नहीं है…

Organic Revolution


(II) The Requirement :

1966 की बात है, Tashkent (Uzbekistan) में रहस्यमय तरीके से भारत के Prime Minister Lal Bahadur Shastri Ji की मौत हो गई। 

इसके पीछे किसका हाथ था? आखिर क्या राजनैतिक कारण था? आज तक clear नहीं हुआ है। 

उस समय देश में भुखमरी जैसे हालात पैदा हो गये थे, अतः कोशिशें की जाने लगी कि किस तरह से produce बढ़ाई जाए, कैसे देश को भुखमरी से निकाल कर self-dependent बनाया जाए।

भारत में Green Revolution की शुरुआत 1960 के decade के उत्तरार्ध (लगभग 1966-67) में हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य देश को produce के मामले में आत्मनिर्भर बनाना था।

Green Revolution agriculture में आधुनिक techinques, HYV (High Yield Variety) seeds और chemical fertilizers के प्रयोग से produce में भारी वृद्धि करने की एक ऐतिहासिक पहल है।


(III) Historical Overview :

  • International Father- Norman Borlaug को international level पर green revolution का father माना जाता है।
  • Indian Father- Dr. M.S. Swaminathan India में green revolution के प्रमुख pioneer और father थे।
  • Word Usage- ‘Green Revolution’ शब्द का सबसे पहले प्रयोग William Gaud ने किया था।


(IV) Major Details :

  • HYV seeds- High Yielding Variety seeds का उपयोग विशेषकर गेहूं और चावल के लिए किया गया। इससे भारत को अनाज के Import पर निर्भर नहीं रहना पड़ा।
  • Ploughing- Wells और advanced ploghing साधनों का विस्तार।
  • Fertilisers & Pesticides- Chemical fertilizers और pesticides का बड़े पैमाने पर प्रयोग।
  • Machinery- Traditional तौर-तरीकों की जगह tractor, harvester, tubewell, thresher और advanced agricultural implements का उपयोग शुरू हुआ।


(V) Positive Impacts :

  • Food Sufficient- भारत अनाज के मामले में self-dependent बन गया और भुखमरी की समस्या में कमी आई।
  • Higher Produce- Wheat और paddy के उत्पादन में record-breaking तीन गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। 
  • Economic Increase- विशेष रूप से Punjab, Haryana और western Uttar Pradesh के farmers की income बढ़ी और वे subsidence farming से निकलकर commercial farming की ओर अग्रसर हुए।
  • More Employment- Farming prodyce बढ़ने, harvesting के चक्र में तेजी आने और machinery से rutal areas में employment के नए अवसर पैदा हुए।


(VI) Negative Impacts :

  • Regional Inequality- Green Revolution का लाभ मुख्य रूप से Punjab, Haryana और western Uttar Pradesh तक ही सीमित रहा, जबकि देश के अन्य पिछड़े हिस्से इससे वंचित रह गए।
  • Urban-Rural Divide- Advanced agricultural techniques (बीज, उर्वरक, machines) महंगी होने के कारण इसका पूरा लाभ बड़े और अमीर किसानों को मिला, जबकि छोटे व गरीब किसान पीछे छूट गए।
  • Barren Land- Chemical fertilizers और pesticides के अंधाधुंध इस्तेमाल से मिट्टी की natural fertility घटने लगी और भूमि barren होने लगी।
  • Groundwater reduction- धान और गेहूं जैसी अधिक पानी चाहने वाली crops के कारण अंधाधुंध नलकूप चलाए गए, जिससे कई क्षेत्रों में groundwater level काफी नीचे चला गया।
  • Nature Degradation- Chemical व pesticides के अवशेषों से water और air pollution बढ़ा, जिसका बुरा प्रभाव human health और biodiversity पर भी पड़ा।


(VII) Emergence of Cancer :

नकारात्मक प्रभाव में मुख्य रूप से भूमि और मिट्टी की उर्वरता पर असर तथा nature और health को नुकसान शामिल है।

Chemical fertilizers और pesticides के अंधाधुंध इस्तेमाल से सबसे अधिक संकट जो उभर कर सामने आया, वो है cancer जैसी खतरनाक बीमारी का बहुत तेजी से फैलना।

रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से बचने और मिट्टी की उर्वरता, पर्यावरण व स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए organic और natural कृषि पद्धतियों को अपनाने की एक महत्वपूर्ण पहल है, जैविक क्रांति।


(VIII) Main Details :

  • Budget Reduction- Organic तकनीकों और prodyce के उपयोग से खेती की लागत traditional chemical farming के मुकाबले लगभग आधी (50% तक) रह जाती है। मतलब मेहनत अधिक और पैदावार कम।
  • Fertility increase- Urea और अन्य chemicals के अत्यधिक उपयोग से खराब हुई मिट्टी की उपजाऊ क्षमता और उसकी softness manure व vermicompost से फिर से बहाल होती है।
  • Natural Fertilizers- Crops को कीटों से बचाने के लिए नीम, धतूरा और सीताफल जैसी प्राकृतिक पत्तियों के fermented घोल का उपयोग किया जाता है।
  • Better Profit- Organic रूप से उगाए गए अनाज, सब्जियां और अन्य उत्पाद market में सामान्य उत्पादों की तुलना में अधिक कीमत पर बिकते हैं, जिससे किसानों की income बढ़ती है।

 

(IX) The Summary :

हरित क्रांति के प्रभाव को कम करने का सटीक उपाय जैविक क्रांति ही है। लेकिन उसके साथ ही यह भी सुन लें कि organic grains, fruits और vegetables अधिक costly होते हैं।

लेकिन एक बार अपने सीने पर हाथ रखकर अवश्य सोचिएगा, कि आपके लिए धन अधिक महत्वपूर्ण है या अपने और परिवार का स्वास्थ्य?

Organic food items थोड़े महंगे अवश्य होते हैं, लेकिन अब भारत की paying capacity और saving इतनी अवश्य बढ़ी हुई है कि हम अपने और अपने परिवार के स्वस्थ को priority प्रदान करें।

हर कोई अधिक लाभ की कामना करता है, अगर हम अधिक खर्च करने को तैयार होंगे, तो किसान भी अधिक खर्च और मेहनत करने को तत्पर होगा। 

हम संकल्प लें कि केवल organic products ही लेंगे, और उसकी बिक्री को बढ़ावा दें। तो वो दिन दूर नहीं, जब organic revolution आ जाए और सभी किसान केवल organic farming करें। 

इससे पर्यावरण के साथ-साथ स्वास्थ्य नवाब भी होगा…