मेरी जगदम्बा
आती हैं संग में लेकर बहार,
लाती हैं संग में खुशियां अपार,
बड़े दिलवाली हैं मेरी जगदम्बा।
आशीष देने आई हैं मेरी जगदम्बा।
माँ दर्शन देने आएं तो,
उनकी पायलें बजती हैं ऐसे,
उनकी रून-झुन सुन ले जो,
वो भक्त दीवाना न हो कैसे?
भक्तों की महारानी हैं माँ जगदंबा।
बड़े दिलवाली हैं मेरी जगदम्बा।
आशीष देने वाली हैं मेरी जगदम्बा।
माँ दर्शन देने आएं तो,
उनके कंगन खनकते हैं ऐसे,
उनकी खनखन सुन ले जो,
वो भक्त दीवाना न हो कैसे?
भक्तों की महारानी हैं माँ जगदंबा।
बड़े दिल हैं मेरी जगदम्बा।
आशीष देने वाली हैं मेरी जगदम्बा।
माँ दर्शन देने आएं तो,
उनके बिंदिया चमकती है ऐसे,
उसकी चमक देख ले जो,
वो भक्त दीवाना न हो कैसे?
भक्तों की महारानी हैं माँ जगदंबा।
बड़े दिलवाली हैं मेरी जगदम्बा।
आशीष देने वाली हैं मेरी जगदम्बा।
बन-संवर के निकले,
आया नवरात्रि का जो महीना,
हर कोई समझे यह,
माँ का दर्शन उसी को ही मिलना।
भक्तों की महारानी हैं माँ जगदंबा।
बड़े दिलवाली हैं मेरी जगदम्बा।
आशीष देने वाली हैं मेरी जगदम्बा।
(आने से जिसके आए बहार, जाने से जिसके जाए बहार की तर्ज़ पर)
आप सभी को चैत्र नवरात्र पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएँ!
विक्रम संवत नववर्ष 2083 की आप सभी को विशेष शुभकामनाएँ!
