Saturday, 14 March 2026

Article : The Politics of Petroleum

Iran और Israel के युद्ध में एक word बहुत अहम भूमिका निभा रहा है, और वो है Strait of Hormuz. “पर क्यों, युद्ध से ज्यादा यह महत्वपूर्ण कैसे है?”

“इससे सभी देश इतने affect क्यों हो रहे हैं?” “आखिर क्या है, इसके पीछे की वजह?”

आपके मन में भी ऐसे ही सवाल उठ रहे हैं ना? तो चलिए, इन सब का जवाब ढूंढते हैं, आज के इस article के साथ…

The Politics of Petroleum


(I) Closure of Strait of Hormuz: 

सबको लगता है कि Iran Strait of Hormuz को बंद कर सकता है। पर यह सरासर गलत है, Iran ने इसे बंद नही किया है। बंद किया है, तो London (UK - United Kingdom) ने।

पर उसकी सरकार ने नहीं, बल्कि insurance companies ने। पूरी दुनिया में कच्चे तेल का सबसे बड़ा source लगभग बंद ही हो गया।


(II) Cargo Ships and Missiles: 

हर दिन, करीबन 107 cargo ships सामान्य रूप से चला करते थे। पूरी दुनिया के लिए energy की lifeline. पर आखिरी हफ़्ते? सारे आंकड़े बदल गए।

केवल 19 ships चले। Traffic में 81% गिरावट देखी गई। एक भी missile नहीं। बस एक निर्णय, insurance companies ने coverage withdraw कर लिया।

आइए पहले यह समझते हैं की आखिरकार global shipping काम करती कैसे है।


(III) Global Shipping: 

सम्पूर्ण विश्व के 90% जहाज 12 maritime insurance clubs द्वारा insured हैं। ये clubs reinsurance markets पर निर्भर हैं, जिनमें से अधिकतर London में स्थित हैं।

जब युद्ध का risk बढ़ता है, तो reinsurers coverage वापस ले सकते हैं। और जब वो होता है, तब न ही कोई insurance, न ही कोई जहाज, और न ही कोई trade.

एक USD (United States Dollar - $) 150 million, या करीब 14 हज़ार करोड़ रुपये, का tanker insurance के बिना एक inch तक आगे नहीं बढ़ सकता।

मतलब Strait of Hormuz किसी navy द्वारा blocked नहीं था, blocked था तो एक spreadsheet के द्वारा। अब सवाल यह उठता है, कि इसका बुरा असर किस पर पड़ रहा है?


(IV) The Victims: 

  1. Iran- यहाँ के अधिकतर oil exports Hormuz के through निकलते हैं। अगर shipping कम होती है, तो; Iran export नहीं कर सकता, उसका war revenue गायब हो जाएगा। मतलब rhetorically, यह युद्ध सबसे पहले Iran को ही घायल करेगा।
  2. China- चीन Hormuz disruption के लिए सबसे exposed देश है। Hormuz से ~40% चीनी कच्चे तेल के आयात pass करते हैं, ~90% Iranian oil exports चीन के पास जाते हैं, और Qatar के LNG (Liquefied Natural Gas) shipments भी Hormuz पार करके ही चीन पहुँचते हैं। तो अगर यह route बंद होता है, तो चीन की energy security काँपने लगती है। इसीलिए Beijing ने जल्द-से-जल्द quick escalation की मांग की।
  3. Gulf Countries- Saudi Arabia, UAE (United Arab Emirates), Qatar, Kuwait, Iraq. उनके oil exports इसी पर निर्भर हैं, क्योंकि Hormuz के through ~20 million (2 करोड़) barrels हर दिन जाते हैं। और हाँ, इसका कोई दूसरा रास्ता भी नहीं है।


(V) The British Entry: 

यहीं पर अंग्रेजों का financial system बड़ी शातिरता और शांति से इस कहानी का एक अहम भाग बन जाता है। सदियों से London ने maritime insurance को dominate किया है, चाहे वो Lloyd के markets हों या global reinsurance. 

इसका मतलब कि जब London यह निर्णय लेता है, कि इसका risk बहुत ज़्यादा है, तो global shipping थम जाती है, वो भी बिना किसी blockade की ज़रूरत के।


(VI) Aftermath:

  1. Russia- Short term में यह रूस के लिए सहायक होगा। अगर gulf exports धीमे होते हैं, तो; oil prices बढ़ जाएँगे, रूसी तेल ज़्यादा कीमती हो जाएगा, Asia शायद रूसी तेल को खरीदे। बढ़े दाम मतलब Moscow (Russia's capital) के लिए ज़्यादा पैसा और ज़्यादा profit.
  2. India- भारत अपने तेल का ~85% आयात करता है, जिसमें से अधिकतर Middle East से आता है। अगर Hormuz disruption आगे भी रहती है, तो; shipping costs बढ़ जाएँगी, कच्चे तेल के दाम spike करेंगे, inflation का दबाव और भी बढ़ेगा। पर भारत अपना फ़ायदा कर सकता है diversification से; वो तेल खरीदे रूस से, gulf देशों से, और अन्य suppliers से।


(VII) Summary:

अगर Hormuz unstable रहता है, तो सबको और pay करना पड़ेगा। तो इससे यह समझा जा सकता है; कि geopolitics को presidents, generals और missiles control करते हैं।

पर कभी-कभी, असली gatekeepers होती हैं acturaies जो लंदन में risk models चलाते हैं। वो हथियार नहीं उठाते, probability देखते हैं। और जब आंकड़े काम नहीं आते, तो trade पूरी दुनिया में कहीं भी कभी भी काम नहीं कर पाती।


(VIII) Takeaway: 

अगर आपको modern geopolitics समझनी है, तो यह याद रखिएगा कि आज के जमाने में दुनिया को सरकारें नहीं, बल्कि systems चलाते हैं।

Insurance systems, energy systems, और financial systems. Missiles headline बनाती हैं, और risk models वास्तविकता।


तो अब आपको समझ आ गया होगा, कि क्या वजह है। साथ ही यह भी ज्ञात हो गया होगा कि बड़ी-बड़ी लड़ाइयां युद्धभूमि में उतार कर लाखों-करोड़ों को स्वाहा कर के नहीं, बल्कि कूटनीति के साथ बिना लड़े भी जीती जाती हैं।

लोगों को लड़ने के लिए प्रेरित करा के नहीं, बल्कि विश्व में शांति व्यवस्था स्थापित करा के की जाती है। और इतिहास गवाह है, कि जो इसमें निपुण हैं वही विश्व गुरु बनेगा। इशारा और अर्थ, आप दोनों समझ रहे होंगे…