Thursday, 5 March 2026

Article : होली भाईदूज

हमारे हिन्दू धर्म में हर रिश्ते का अपना अलग महत्व है, जितना मान और प्रेम माता-पिता, पति-पत्नी और बच्चों के रिश्ते को दिया जाता है, उतना ही मान और प्रेम भाई-बहन के रिश्ते को भी दिया जाता है।

इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है रक्षाबंधन और भाईदूज, पर क्या आप जानते हैं कि भाईदूज साल में दो बार आता है? दो बार?

जी हाँ, दीपावली के बाद का भाईदूज, जिसे सब जानते हैं, विभिन्न नामों के साथ जाना जाता है, जैसे भाईदूज, यमद्वितीया, भाईफोटा इत्यादि। दूसरा भाईदूज होली के रंगोत्सव के दूसरे दिन होता है।

हालांकि बहुत से लोगों के घरों में सिर्फ दीपावली के पश्चात् यमद्वितीया ही मनाया जाता है। लेकिन होली के पश्चात मनाए जाने वाले भाईदूज की भी बराबर से मान्यता है।

आइए जानते हैं, इस विषय में, और इसके पीछे की पौराणिक कथा को भी…

होली भाईदूज


(I) संक्षिप्त विवरण :

हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। इसे भ्रातृ द्वितीया भी कहा जाता है। यह पावन पर्व भाई-बहन के अटूट स्नेह और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।

इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। विवाहित बहनें विशेष रूप से अपने भाइयों को घर आमंत्रित करती हैं और प्रेमपूर्वक, होली पर बनाए विभिन्न पकवान और भोजन कराती हैं। 

मान्यता है कि भाई दूज के दिन बहन के घर जाकर भोजन करने से भाई की आयु में वृद्धि होती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।


(II) पौराणिक कथा :

होली के बाद मनाए जाने वाले भाई दूज से जुड़ी एक लोकप्रचलित कथा इस प्रकार है-

एक नगर में एक वृद्धा अपने बेटे और बेटी के साथ रहती थी। समय के साथ बेटी का विवाह हो गया। एक बार होली के बाद बेटे के मन में अपनी बहन से मिलने और उससे तिलक कराने की तीव्र इच्छा जागी।

उसने अपनी माँ से बहन के घर जाने की अनुमति मांगी। पहले तो माँ ने टालने की कोशिश की, लेकिन बेटे के बार-बार आग्रह करने पर उसे जाने की अनुमति दे दी। बहन का गांव दूर था, रास्ते में नदी, जंगल इत्यादि पड़ने थे।

घर से निकलने के कुछ समय बाद, रास्ते में उसे एक नदी मिली। नदी बहुत उफान पर थी, मानो बोल उठी- “मैं तुम्हारा काल हूँ, जैसे ही तुम मेरे जल में उतरोगे, डूब जाओगे।”

यह सुनकर वह घबरा गया, पर साहस जुटाकर बोला- “पहले मैं अपनी बहन से तिलक करवा लूँ, उसके बाद तुम मेरे प्राण ले लेना।”

आगे बढ़ने पर जंगल में एक भयंकर शेर मिला। वह उसे खा जाने के लिए गुर्राता हुआ आगे बढ़ने लगा, उसने शेर से भी वही विनती की। 

थोड़ी दूर चलने पर एक सांप ने उसके पैर लपेट लिए। युवक ने उससे भी निवेदन किया कि पहले बहन से मिल लेने दे, फिर जो दंड देना हो दे देना।

किसी तरह वह अपनी बहन के घर पहुंच गया। बहन ने भाई को देखते ही स्नेह से गले लगाया, तिलक किया और प्रेमपूर्वक भोजन कराया। भोजन करते समय भाई को उदास देखकर बहन ने उसके दुख का कारण पूछा। तब भाई ने रास्ते में मिली सभी बाधाओं की बात बता दी। 

बहन अपने भाई को असीम स्नेह करती थी, रास्ते की बाधाएं सुनकर वह बोली- “भाई! तुम चिंता न करो, मैं तुम्हें घर तक छोड़कर आऊंगीं।”

वह कुछ तैयारी के साथ भाई के साथ हो गई। उसने शेर के लिए मांस, सांप के लिए दूध और नदी के लिए ओढ़नी साथ ले ली।लौटते समय सबसे पहले शेर मिला। बहन ने उसके आगे मांस डाल दिया, जिससे वह शांत हो गया।

आगे सांप मिला तो उसने उसके सामने दूध रख दिया, और वह भी शांत हो गया। जब वे नदी के पास पहुंचे तो लहरें पुनः तेज उठने लगीं। बहन ने श्रद्धा से नदी को ओढ़नी अर्पित की, जिससे नदी भी शांत हो गई और दोनों सुरक्षित पार हो गए।


(III) धार्मिक मान्यता :

इस प्रकार बहन ने अपने प्रेम, बुद्धिमत्ता और साहस से भाई पर आने वाली हर विपत्ति को टाल दिया। तभी से मान्यता है कि चैत्र मास की द्वितीया तिथि, अर्थात होली के अगले दिन, भाई दूज का पर्व मनाया जाता है।

इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक कर उनकी लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।


(IV) अन्य कारण :

वैसे आपको हर बहन के मन की बात बताते हैं कि विवाह उपरांत, भाई के प्रति और अधिक स्नेह भाव बढ़ जाता है। 

वो अपने भाई की हर विपदा से लड़ जाती हैं, और सदैव अपने भाई की सुरक्षा और समृद्धि की कामना करती है। तो जिन भाइयों की बहन हैं, वो अपने सौभाग्य को सराहा सकते हैं।

आप सभी को होली भाईदूज की हार्दिक शुभकामनाएँ!