Monday, 2 March 2026

Recipe : Kanji Vada

आपको दो दिन पहले गाजर के पानी वाले अचार की recipe share की थी, साथ ही promise किया था कि आप इसे बनाएं, फिर हम आपको instantly prepare होने वाले कांजी वड़ा की recipe share करेंगे।

तो आपको बता दें, कि गाजर के पानी वाले अचार को सिंधी अचार और oil-free गाजर का या mix पानी वाला अचार भी कहते हैं। साथ ही इस पानी वाले अचार का पानी ही कांजी होता है। तो चलिए, recipe शुरू करते हैं।

Kanji Vada



(I) Method :

  1. सबसे पहले आप इस (अचार) का पानी लीजिए।
  2. बड़े के batter से छोटी-छोटी गोलियां बनाकर तल लें।
  3. इन गोलियों को गर्म पानी में डालकर हल्के हाथों से निचोड़ लीजिए, जिससे extra पानी निकल जाए।
  4. इन गोलियों को कांजी के पानी में, serving करने के 4-6 घंटे पहले डाल दीजिए।
  5. Serving के time कांजी वड़ा को glass में डाल लीजिए।
  6. उसे finely chopped धनिया पत्ती, भुना जीरा और लाल मिर्च powder से garnish कर लीजिए।

Your Kanji Vada is ready to boost your gut health and your taste buds, both at the same time. Enjoy!

नीचे कांजी और वड़ा दोनों का link डाल देते हैं, for a perfect Kanji Vada recipe


(II) Links :


तो इंतज़ार किस बात का? आज ही बनाइए Kanji Vada और मज़े से खाइए और खिलाइए अपने परिवार को रंगोत्सव के सभी पकवान।

वैसे भी आपने सीखीं दो अलग-अलग recipes; गाजर के पानी वाले अचार और वड़े की। इन recipes से आपने बनाई यह recipe, Kanji Vada. ऐसी ही multi-use recipes के लिए जुड़े रहें Shades of Life से…

Sunday, 1 March 2026

Article : होलिका दहन - पूजन विधि, तिथि व शुभ मुहूर्त

हिन्दू धर्म में बहुत से देवी-देवता और अनेकानेक छोटे-बड़े त्योहार हैं, जिसमें दो मुख्य त्योहार हैं; दीपावली और होली।

दोनों की अलग छटा, अलग उत्सव, कोई किसी से कम नहीं, एक अमावस्या को, तो एक पूर्णिमा को।

इस साल होलिका दहन व रंगोत्सव होली में एक दिन का अंतर है। ऐसा क्यों है, और होलिका दहन का शुभ मुहूर्त क्या होगा, जान लेते हैं।

होलिका दहन - पूजन विधि, तिथि व शुभ मुहूर्त


होलिका दहन, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, हर साल यह पर्व फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है।

साल 2026 में होली की तारीख को लेकर लोगों के मन में थोड़ा confusion है कि होलिका दहन 2 मार्च या 3 मार्च, कब मनाया जाएगा?


(I) तिथि :

2 या 3 मार्च-

कहीं 2 मार्च तो कहीं 3 मार्च को दहन की चर्चा हो रही थी। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि 3 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। पंचांग के अनुसार यह इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च 2026, सोमवार की रात को किया जाएगा। हालांकि इस बार भद्रा का साया भी रहेगा, जिस वजह से सही मुहूर्त का विशेष ध्यान रखना जरूरी होगा।

पूर्णिमा व भद्रा का संयोग-

पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च 2026 को शाम के 5:18 से हो रही है। इसी समय भद्रा का वास भी शुरू हो जाएगा, जो पूरी रात और अगली सुबह 3 मार्च को 4:56 बजे तक प्रभावी रहेगा। 

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, भद्रा काल में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करना वर्जित माना गया है। 

खासतौर पर होलिका दहन जैसे पर्व पर भद्रा का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। शास्त्रों में भद्रा को अशुभ योग माना गया है। मान्यता है कि भद्रा में किए गए शुभ कार्यों का फल विपरीत हो सकता है।


(II) शुभ मुहूर्त :

पंचांग के अनुसार इस वर्ष होलिका दहन का सबसे उपयुक्त और शास्त्रसम्मत समय रात 12:50 बजे से 2:02 बजे के बीच रहेगा। इस दौरान भद्रा का पुच्छ काल माना जा रहा है, जो होलिका दहन के लिए अनुकूल माना जाता है।

अतः होलिका दहन का सबसे उपयुक्त मुहूर्त कुल 1 घंटा 12 मिनट का है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी समय में होलिका दहन करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

तो आप समझ गए होंगे कि इस साल के पहले चंद्रग्रहण और भद्रा काल के कारण, होलिका दहन 2 मार्च की रात को किया जाएगा, 3 मार्च को चंद्रग्रहण है अतः रंगोत्सव 4 मार्च को मनाया जाएगा।

हालांकि सबके घर में भिन्न-भिन्न तरह से सभी पूजा-अर्चना की जाती है, लेकिन होलिका दहन की अग्नि के समीप की जाने वाली पूजा विधि इस प्रकार है।


(III) पूजा विधि :

होलिका दहन से पहले परिवार के साथ विधि-विधान से पूजा करना शुभ माना जाता है।

होलिका के चारों ओर परिक्रमा करें।

कच्चा सूत, गेहूं की बालियां, नारियल और जल अर्पित करें।

साथ में होली उत्सव के लिए जो भी पकवान बनाए या आपने खरीदे हैं, जैसे गुजिया, मठरी, पापड़, मालपुआ, दही बड़े इत्यादि उनको भी साथ में लाएं और उनका अर्पण कर पकवानों को प्रसाद रूप में परिवर्तित करें।

“ॐ होलिकायै नमः” मंत्र का जाप करें।

परिवार की सुख-समृद्धि और बुरी शक्तियों के नाश की प्रार्थना करें।

अगले दिन होलिका की राख को तिलक के रूप में लगाना भी कई जगह शुभ माना जाता है।


(IV) पूजन मंत्र :

  • मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वज:, मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
  • ॐ वासुदेवाय विघ्माहे वैधयाराजाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात्।
  • ॐ तत्पुरुषाय विद्‍महे अमृता कलसा हस्थाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात्।


आप सभी को होलिका दहन व रंगोत्सव होली पर हार्दिक शुभकामनाएं।

Saturday, 28 February 2026

Recipe : गाजर का पानी वाला अचार

होली आने वाली है, जो साथ लाएगी बच्चों में उत्साह, जवानों में उमंग व संग में प्रेम, सौहार्द और अपनेपन का रंग। पकवानों की बहार होगी, सबके संग मिल मस्ती हजार होगी।

पर रंग में भंग तब पड़ जाता है, जब इतने पकवानों को खाकर पेट डांवाडोल हो जाता है। पर इस होली नहीं होगा, अगर आप Shades of Life को follow करते हैं, क्योंकि इस बार हम जो share कर रहे हैं, उसके साथ आपका होली का मजा चौगुना हो जाएगा।

आइए झट-पट इसकी recipe देख लेते हैं…

गाजर का पानी वाला अचार


(I) Ingredients :

  • Red Carrot - 100 gm.
  • Rai (small mustard seeds) - 1 tbsp. 
  • Turmeric powder - ½ tsp.
  • Salt - as per taste
  • Asafoetida - 1 tsp.
  • Black salt - ½ tsp.
  • Water - 1 litre


(II) Method :

  1. एक भगौने में एक litre पानी को गर्म होने रख दीजिए।
  2. गाजर को छीलकर उसके fingers काट लीजिए (जैसे french fries ready किए जाते हैं)।
  3. पानी में नमक, हींग, और गाजर डालकर एक खौल आने तक पकाएं।
  4. राई को coursely grind कर लीजिए। Ground राई व काला नमक इस पानी में डाल दीजिए।
  5. पानी को कांच की शीशी में पलट दीजिए और बरनी के मुंह को कपड़े से बांध दें।
  6. अब बरनी को दो से तीन दिन के लिए धूप में रख दीजिए।

Your tangy and tasty digestive Carrot Water Pickle is ready.


(III) Tips and Tricks :

  • गाजर fresh and red लीजिए, इससे स्वाद अच्छा आता है।
  • गाजर को किसी भी shape में काट सकते हैं। Fingers वाला देखने में अच्छा लगता है।
  • आप पानी बिना उबाले भी इसे बना सकते हैं, फिर इसे बनने में 4 to 6 days लग जाते हैं। बहुत बार सही स्वाद का नहीं भी बनता है।
  • इसमें खट्टा स्वाद राई के fermentation से आता है। खट्टा करने के लिए नींबू रस या सिरका इत्यादि बिल्कुल न डालें।
  • राई दरदरा ही पीसकर डालें, महीन नहीं करना है। 1 tbsp. से अधिक न डालें, वरना पानी कसैला हो जाएगा।
  • हल्दी हल्के से पीले tinch के लिए, या पीला रंग करने के लिए डालना है, आप अपनी पसंद के अनुसार डाल सकते हैं।
  • आप चाहें तो mix veg भी ले सकते हैं, जैसे गाजर के साथ मूली, गोभी, हरी मिर्च इत्यादि। 
  • इसमें अपनी पसंद अनुसार, सौंफ, अजवाइन, काली मिर्च, लाल मिर्च पाउडर आदि डाल सकते हैं। हमने नहीं डाला है, क्योंकि हमने इसे पाचक जल बनाया है। इसमें हींग, राई, नमक का बहुत ही soothing effect आता है। इसलिए गाजर भी हमने कम डाली है, केवल fermentation process fast करने के लिए।
  • कम गाजर डालने और कोई अन्य सब्जियां न डालने का एक कारण और है कि सब इसका पानी अधिक पसंद करते हैं, साथ में गाजर या सब्जियों को खाना पसंद नहीं करते हैं। और वो इसलिए भी क्योंकि यह एक appetizer drink है, खाने के साथ खाया जाने वाला अचार नहीं है।
  • पानी पूरी तरह तैयार है, इसकी पहचान खट्टी-सी खुशबू और स्वाद होता है।
  • साथ ही अचार के पूरा बनते ही गाजर ऊपर की तरफ आ जाती है।
  • हींग जरूरी है, इससे पाचन क्रिया अच्छी हो जाती है।


तो सोचिए मत, आज ही बना लीजिए, easily and instant बनने वाला, oil free अचार, जो खाने के साथ नहीं बल्कि उससे पहले या बाद में खाया जाता है, पकवानों के पाचन के लिए।

होली के पकवानों की list में इसे भी शामिल कर लीजिए, क्योंकि यह होली का पूरा मज़ा बनाए रखेगा।

ज्यादा सोचा तो होली आकर निकल जाएगी और यह नहीं बन पाएगा, आपके मेहमानों के लिए। और एक secret बताएं, आप इसे तैयार कीजिए। उसके बाद हम तुरंत तैयार होने वाले कांजी वड़ा की विधि दो दिन में बताते हैं।

So stay tuned… 

Wednesday, 25 February 2026

Tip : Leftover का Makeover

खाना जब बच जाता है, तो उसका क्या किया जाए, यह सोच-सोचकर दिमाग ख़राब होता है और refrigerator पूरा भर जाता है सो अलग। पर आप परेशान न हों, आप Shades of Life से जुड़े हैं, जिसके पास हर बात का हल है।

आज की tip एक ऐसी tip है, जिसकी requirement हर घर को होती है। तो आज कुछ ऐसी ही, रोज़ के बचे हुए खाने, जैसे सब्जी, रोटी, दाल चावल आदि के makeover recipes की tip share कर रहे हैं।

यह tip आपको help करेगी, साथ ही आप aware रहेंगे कि आप जो dishes restaurants में, hotels में order करते हैं, उन्हें कैसे prepare करते हैं।

Leftover का Makeover


(1) Leftover Sabjis-

  1. अगर सब्जियां बच गई हैं तो आप उन्हें mash करके, उसमें bread crumbs मिलाकर, उनके cutlets बना सकते हैं। पर ध्यान रखिएगा, कि वो सब्जियां आलू base हों, जैसे Aloo Matar, Aloo Shimla-Mirch और Aloo Gobhi etc. इनके बने cutlets बहुत tasty होंगे, और सब्जी से ज्यादा इसे चाव से खाया जाएगा। Hotels, restaurants and trains में mostly ऐसे ही cutlets बनाए जाते हैं। 
  2. आप कहेंगे कि अब तो गर्मी आ रही है, कद्दू, बैंगन, लौकी, भिंडी बचेगी, तो क्या उनके cutlets अच्छे लगेंगे? नहीं, उन सब्जियों को मिलाकर, pressure cooker में डालें, फिर उसमें थोड़ा पानी डालकर एक whistle दे दीजिए (अगर सब्जियां gravy वाली हैं तो पानी न डालें), फिर उसको mixer-grinder jar में डालकर puree कर लीजिए।कढ़ाही में घी डालकर थोड़ा कटा हुआ प्याज, लहसुन और capsicum डालकर भूनें, फिर थोड़ा उबला आलू mash करके डाल दीजिए, साथ ही जो puree बनाई थी, उसे भी डालकर मक्खन के साथ अच्छे से भून लें। मस्त भाजी तैयार हो जाएगी, पाव के साथ शाम की चाय का लुत्फ उठाएं।
  3. बची हुई सब्जी को mash करके आप भरवां पराठा और कचौड़ी भी बना सकते हैं।


(2) Leftover Rice-

  1. बचे हुए चावल से Jeera Rice, Mix-Veg Pulao और Biryani जैसी सभी dishes ready कर सकते हैं। अधिकतर hotels और restaurants में rice की सारी dishes leftover rice से ही बनती हैं, बस वो बासी कितना होगा, यह उस दिन की availability पर depend करता है।
  2. बाकी बचे हुए चावल से आप चावल वड़ा और चावल सेव भी बना सकते हैं, यह भी बहुत स्वादिष्ट बनते हैं, इसकी recipes के link नीचे दिए हैं।


(3) Leftover Dal-

  1. बची हुई दाल को आटे में डालकर dough prepare कर लीजिए, मस्त परांठे बनते हैं।
  2. दाल को सूजी में डालकर, उसमें कटे हुए प्याज, धनिया-पत्ती डालकर, उसके cutlets बना सकते हैं।
  3. दाल-चावल को mix करके उसका puree कर लीजिए, और उसके पापड़ बना लीजिए, बढ़िया कुरकुरे पापड़ तैयार।
  4. दाल को puree कर लीजिए, उसमें‌ चावल का आटा, महीन कटा आलू, प्याज़, धनिया पत्ती डालकर झट-पट भजिया तैयार कर लीजिए।


(4) Leftover Roti/Chapati-

यह article अवश्य पढ़िएगा, क्योंकि सब leftover का लेते हैं सिवाय रोटी के, और इसका makeover भी आपको घर पर बनाने से ही मिलेगा। इनकी recipes हम पहले डाल चुके हैं, तो आज उनके links आपके साथ फिर से share कर रहे हैं।

Lasagna Indicana एक Mexican Cuisine का Indian version है।

  1. इसके अलावा आप रोटी में हल्का-सा पानी लगाकर पराठा सेक सकते हैं।
  2. रोटी में आलू का मसाला लगाकर roll कर लीजिए, उसे cornflour के पतले घोल में dip करके fry कर लीजिए, स्वादिष्ट roll तैयार हैं। मसाला लगाते समय रोटी को हल्का गीला कर लीजिएगा। इससे रोटी easily roll होगी।


रोज के खाने का इतना tasty makeover और फिर वो भी बचे हुए खाने का, आपकी तारीफ़ भी होगी और आपकी tension भी ख़त्म होगी कि बचे हुए खाने का क्या करें। तो बस सोचना क्या है, बना डालिए, अपनों को और खुद को प्रसन्न कीजिए।

जो dishes यहाँ mentioned हैं, अगर आपको उनमें से किसी की detailed recipe चाहिए, तो comment section में हमें बता दीजिए। वरना आने वाले दिनों में हम सबकी recipes डालेंगे ही। So stay tuned…

Tuesday, 24 February 2026

Short Story : सफलता का घमंड

सफलता का घमंड


रघुवीर, एक सीधा-सीधा रिश्तों को जोड़कर रखने वाला संस्कारी व्यक्ति था। वो हमेशा रिश्तों को बनाए रखने के लिए झुक जाता, वो सही हो या ग़लत, रिश्तों के मान से बढ़कर उसके लिए स्वयं का सम्मान भी नहीं था।

पर उसकी इस खूबी को लोगों ने उसकी कमजोरी समझ ली, और सब उससे अपने मन का करवाते रहते। वो भी सहन करता गया, इस इंतज़ार में कि एक दिन सब समझेंगे, पर वो दिन कभी नहीं आया।

इस बीच उसने अपने आपको सुदृढ़ करने का प्रयास जारी रखा, ईश्वर की कृपा से वो दिन उसकी जिंदगी में जल्द ही आ गया, वो बहुत प्रतिष्ठित व्यापारी बन गया। अब उसका अस्तित्व लोगों के लिए बदल गया था। लोगों का व्यवहार उसके लिए अधिक सम्मानजक हो गया था।

अब तक वो भी रिश्तों को मजबूत बनाए रखने की कवायद से थक चुका था। नतीजतन, अब वो रिश्ते तभी निभाता था, जब अगले उसे मान दें, उसकी सही सोच को समझें, अन्यथा वो लोगों से किनारा कर लेता।

कुछ तो ऐसे थे, जो समझने लगे कि रिश्ते जोड़कर रखना, केवल उसका दायित्व नहीं है और उन्होंने उसे समझा और उसका साथ दिया।

पर वहीं, जो अपनी ही चलाना चाहते थे, वो कहने लगे कि इसे अपनी सफलता पर घमंड हो चला है, पहले तो कैसे रिश्ते निभाने के लिए झुक जाता है। अब तो जैसे इसे कुछ पड़ी ही नहीं है। 

पर अब रघुवीर समझ चुका था, अगर रिश्ते निभाए जाते हैं तो दोनों तरफ से, एकतरफा निभाए गए रिश्ते सिर्फ बोझ होते हैं, जो दूसरे आप पर जिंदगी-भर डालना चाहते हैं।

उसे अब इस बात की कोई परवाह नहीं थी कि एकतरफा न निभाए जाने को लोग उसकी सफलता का घमंड समझते हैं या उसकी अपने मान की रक्षा।

वैसे उसके पास आज भी बहुत से रिश्ते थे, सच्चे रिश्ते, जो दोनों तरफ से निभाए जा रहे थे, जिनको निभाने का बोझ किसी एक पर नहीं था।

Monday, 23 February 2026

Article : Visionary India

भारत की हर क्षेत्र में बढ़ती हुई सफलता, बहुत से लोगों को शायद दिखाई नहीं दे रही होगी या शायद देखना या मानना नहीं चाह रहे हों। क्योंकि उन्हें देश के विकास से क्या?

उनका कितना विकास हो रहा है, उनके परिवार को आटा-दाल free में मिल रहा है, तो विकास है, अन्यथा होता रहे दुनिया-जहान में कुछ भी, उनकी बला से। क्या आपकी भी ऐसी ही सोच है?

क्या देश का चौतरफा विकास, आपके लिए कोई मायने नहीं रखता है? अगर रखता है, तो आपकी देशभक्ति को प्रणाम।

और अगर नहीं रखता है, तब भी एक बार इस तरह से सोचिए, शायद भारत देश में जीवन-यापन करना आपको गौरवान्वित करने लगे।

इन दस सालों में नज़र घुमाकर देखिए, एक नया भारत दिखेगा।

Visionary India


आपको एक ऐसा भारत दिखेगा, जिसका infrastructure सुदृढ़ हो चुका है।Railways और railway stations की स्थिति पहले से बेहतर हो चुकी है। उनकी स्वच्छता देखते ही बनती है।

Railways के साथ ही metro भी अपने अस्तित्व को सम्पूर्ण भारत में विस्तारित करती जा रही है, जिसकी सुविधा, उपलब्धता, स्वच्छता के विषय में कुछ कहने की आवश्यकता ही नहीं है, उसके लिए तो बस एक शब्द है- सर्वोत्तम।

खेती-किसानी में नये-नये उपकरणों का उपयोग, उन्नत बीज, खाद, कीटनाशक आदि का ज्ञान और उपयोग व उपज का उचित दाम प्रदान करने के बढ़ते प्रयास, एक नई दिशा प्रदान कर रहे हैं। हालांकि इस क्षेत्र में अभी सरकार को अपने प्रयासों को और सुदृढ़ करना चाहिए, क्योंकि जब अन्नदाता प्रसन्न होगा, देश सम्पन्न होगा।

अगर अर्थव्यवस्था देखें, तो भारत विश्व की (nominal) GDP में चौथे स्थान पर आ चुका है। खेलकूद में भी हर ओर भारत का तिरंगा लहरा रहा है।

रक्षातंत्र इस कदर सशक्त और समृद्ध हो चुका है कि पूरे विश्व में भारत के इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की प्रशंसा की जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग में बढ़ती हुई आत्मनिर्भरता, और नए-नए स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण अपने आप में एक मिसाल है।

मंदिरों का पुनरोद्धार, भारतीय संस्कृति का सुदृढ़ीकरण, देश के मूल को पुनर्स्थापित करना, भारत को एक बार फिर सर्वश्रेष्ठ बना रहा है।

कहा जा रहा है कि आने वाले समय AI का जमाना है, जिसमें जो देश अग्रणी भूमिका निभाएगा, वो विश्वगुरु कहलाएगा।

अभी हाल में ही हुआ AI Summit दर्शाता है कि भारत अब सर्वाधुनिक क्षेत्र में भी बहुत आगे निकलता जा रहा है। उस पर हमने कल एक article डाला था, जिस को आप इस link पर click करके पढ़ सकते हैं - https://shadesoflife18.blogspot.com/2026/02/article-ai-is-now-bharatiya.html?m=1


दूसरे शब्दों में भारत ‘Visionary India’ बन चुका है, जिसका अर्थ है ‘दूरदर्शी भारत’ या ऐसा भारत जो भविष्य की जरूरतों और संभावनाओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रहा है। यह एक प्रगतिशील राष्ट्र की कल्पना को दर्शाता है, जो innovation और long-term plans के माध्यम से एक आधुनिक और विकसित देश बनने की राह पर अग्रसर है।

अब वो दिन दूर नहीं, जब भारत विश्वगुरु बनेगा और सम्पूर्ण विश्व को कल्याण की ओर ले जाएगा। 

जय हिंद, जय भारत 🇮🇳

Sunday, 22 February 2026

Article : AI is now Bharatiya

The 21st century is the century with booming Artificial Intelligence, and so is the current generation. India had hosted an international AI Summit, which is a matter of pride itself. This article written by Advay leads us to this viewpoint…


In the present-day world with thriving technology, where one single click is capable of modifying the entire world, India would also have to level up. The fourth largest country (as per nominal GDP) with a population of more than 140 crores, has to move beyond aspirational frameworks toward concrete and measurable impact which addresses both Artificial Intelligence’s (AI’s) promises and perils.

With this thought, the Hon’ble Prime Minister of India, Shri Narendra Modi welcomes 20 Government-Heads from 110+ countries, 5 lakhs+ participants, and 550 global summit events to the first-ever global AI summit hosted in the Global South, the “India AI Impact Summit 2026”.

AI is now Bharatiya


AI has been completely implied and vested in every nook and corner of India. Peasants use AI-powered vernacular chatbots for agricultural advice, doctors adopting AI-based platforms to assist healthcare workers with patient histories, corporate-workers saving an hour daily with AI-coded bots. This demonstrates the current significance and usage of AI in India at the same time, posing challenges like disrupting employment patterns, exacerbating biases, and accelerating energy consumption.

All these jeopardies underscore the necessity of hosting an international AI summit in the Global South, placing human welfare, environmental sustainability, and economic transformation at the core.

It not only tackles the AI-related pitfalls, but also positions AI leadership as both, an opportunity and a responsibility for the largest democracy in the world. The 1.5 lakh+ startups of India would benefit from this as well as represent India in the international market. It also serves as a chance of disputing the backward thinking of the West that India is an underdog nation.

A key moment in the building of “Viksit Bharat 2047”, has infrastructure pledges crossing the benchmark of USD ($) 250 billion, accounting to around INR 2 lakh crores!

Chartering the path onto becoming a developed nation, India also does not forget its humility and humbleness. The theme of the Summit is “Sarvajana Hitaya, Sarvajana Sukhaya”, a Sanskrit phrase which translates to “welfare for all, happiness for all”.

The Summit is anchored by 3 ‘Sutras’, or foundational pillars-

  • People (ensuring inclusion in deployment)
  • Planet (accelerating climate resilience)
  • Progress (equitable access to opportunity).

The deliberations would be organized around 7 interconnected ‘Chakras’, or areas of multilateral cooperation-

  • Human Capital (inclusive workforce transition)
  • Inclusion for Social Environment (advancing socio-economic outcomes)
  • Safe and Trusted AI (robust safeguards)
  • Resilience, Innovation, and Efficiency 
  • Science (global scientific collaboration)
  • Democratizing AI Resources (universally accessible and affordable)
  • Economic Growth and Social Good (productivity, innovation, and growth)

To conclude with, the figures are not as important as the confidence exhibited by India and its citizens. India is not just participating in the technological transformation, but also shaping it.

By the way, advancing India in the field of AI is not just the responsibility of the government and the ministries, but also of every citizen, rich or poor, young or old. Let us all pledge, to transform our developing India into a developed India, as soon as possible, with all might and willpower, contributing by making the smallest yet the most impactful steps.

Jai Hind, Jai Bharat!

Saturday, 21 February 2026

Article : Delhi- Wrongly Infamous for AQI

प्रदूषण का नाम लिया जाए, और दिल्ली का नाम न आए, यह तो संभव ही नहीं है। इतनी अधिक बदनाम है दिल्ली, मानो यहां के अलावा बाकी सारी जगहों में तो एकदम शुद्ध हवा चलती हो।

वैसे दिल्ली को बदनाम करने में खुद दिल्ली वालों का बेहद बड़ा हाथ है, इसे polluted करने में और उससे ज़्यादा हंगामा मचाने में भी। सिर्फ और सिर्फ अपने आप को sofes and hi-fi दिखाने के लिए।

मन किया, चलो पता किया जाए कि आखिर भारत में और कितने शहर ऐसे हैं, जहां दिल्ली जितना या थोड़ा कम-ज्यादा AQI (Air Quality Index) होता है।

तो web browser पर डाला, “दिल्ली जितना प्रदूषण और कितने शहरों में है?”

और फिर जो आया, वो मेरी सोच नहीं है, बल्कि उस web browser द्वारा दिया गया AI Overview है।

Delhi- Wrongly Infamous for AQI


तो चलिए, पहले यह जान लेते हैं कि कौन-कौन से वो शहर हैं, जहां लगभग उतना ही प्रदूषण है, जितना दिल्ली में। पर वहां प्रदूषण के नाम पर शोर नहीं मचता, वहां की हवा में लोगों का दम भी नहीं घुटता और चक्कर भी नहीं आते।

दिल्ली जितना प्रदूषण कई भारतीय शहरों में है, खासकर उत्तर भारत में, जिनमें दिए गए शहरों की सूची शामिल हैं।


(I) Cities with Delhi-like AQI.

1. NCR (National Capital Region):

2. Uttar Pradesh:

3. Bihar:

4. Other Cities:

  • Jaipur (Rajasthan)
  • Chandigarh (UT- Union Territory)
  • Kolkata (West Bengal)
  • Mumbai (Maharashtra)
  • And some north-eastern cities (e.g. Byrnihat, Assam)

यहाँ अक्सर AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) दिल्ली के बराबर या उससे भी ज़्यादा हो जाता है, खासकर सर्दियों में।


(II) Major Causes of such AQI.

1. Traffic Jam: मुम्बई और कलकत्ता में हद की भीड़, सड़कें बहुत अच्छी अवस्था में न होना, जिससे traffic jam की अधिकता। इसलिए समुद्र होने के बावजूद, अगर आप traffic jam में फंसे, तो आपको pollution झेलना ही पड़ेगा और वो भी घंटों तक।

2. Topography: उत्तरी भारत के मैदानी इलाकों में प्रदूषण जमा हो जाता है. 

3. Seasonal Effects: सर्दियों में प्रदूषण का स्तर कई गुना बढ़ जाता है, जिससे कई शहर एक साथ गंभीर वायु गुणवत्ता का सामना करते हैं।

4. Pollution Impacts: प्रदूषण अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में भी फैल रहा है, जैसा कि श्री गंगानगर और सिवानी जैसे शहरों में देखा गया है।


एक appeal दिल्ली वालों से भी, कि अपना दिमाग दिल्ली को स्वच्छ करने में लगाइए, न कि उसको बदनाम करने के लिए, क्योंकि दिल्ली आप की अपनी है 🙏🏻

तो कैसी लगी, AI की ये report? कुछ लोगों के लिए कड़वी ज़रूर होगी, पर 100% सच्ची है। ऐसी और interesting reports के लिए stay tuned, at Shades of Life

Friday, 20 February 2026

Article : एकांत का शोर

आज की यह post एक अजीब से एहसास की दास्तान है। एक ऐसी दास्तान, जिसका अनुभव किसी को कभी न हो।  शायद हुआ भी न हो, क्योंकि यह एक विकट परिस्थिति है, जिससे बहुत कम लोगों को रूबरू होना पड़ता है।

और वो एहसास है, एकांत के शोर का।

एकांत का शोर


आप कहेंगे कि आजकल एकांत का एहसास कौन-सा नया है। Joint family का culture तो लगभग खत्म ही हो चुका है, फिर बच्चों का बड़े शहरों और विदेशों में बसना, इसको बहुत बढ़ावा दिया जा रहा है। सही है, यह भी बहुत भयावह है, पर अब यह कटु सत्य बनता जा रहा है, जो अगर आप अपने परिवार में रोक सकें तो आप बहुत भाग्यशाली होंगे।

पर हम आज उस एकांत की बात कर रहे हैं, जब आप सबके बीच में हों, सब बेइंतहा आपका ध्यान रख रहे हों, आपके लिए तन-मन-धन से समर्पित हों, आप को सब दिख रहा हो, सबका एहसास भी हो, पर फिर भी आप नितांत अकेले हों, असमर्थ हों। 

आप कहेंगे कि हम क्या कहना चाह रहे हैं, कुछ समझ नहीं आ रहा है? जी हांँ, ऐसी ही परिस्थिति थी, जब weather और doctor की लापरवाही के कारण pneumonia और मेरे दोनों कानों में infection हो गया, जो कि कान की हड्डियों तक पहुंच चुका था, साथ ही कान के पर्दे में छेद हो गया था। तो कान में बेहद दर्द और हमें सुनाई देना लगभग बंद हो गया।

लगभग, मतलब बिल्कुल कान के पास आकर और जोर से कोई बोले तभी सुनाई दे रहा था। अन्यथा इशारे से बातें। एक तो सुनाई नहीं दे रहा था, और ऊपर से pneumonia के कारण सांस न ले पाना और अतिशय कमजोरी, सीने में दर्द, कान के पर्दे में छेद होने की वजह से ear drops, कान से निकल कर मुंह में आ जाती, जिससे मुंह बेहद कसैला हो जाता, जिससे खाना खा पाना दूभर, इत्यादि।

मतलब कि एक बहुत भयावह और लगभग तोड़ देने वाली स्थिति, पर इस स्थिति के साथ ही एक और एहसास, एकांत के शोर का। एकांत का शोर, मतलब?

कुछ सुनाई नहीं दे‌ रहा था, पूरी दुनिया से पूरी तरह से कट गए थे, क्योंकि न किसी की बात सुन‌ पा रहे थे और pneumonia के कारण बहुत सांस फूल रही थी, तो किसी से कुछ बात भी कर पाना मुश्किल हो रहा था।

इस तरह से सबके मध्य रहकर भी नितांत एकांत में पहुंच जाना बहुत भयावह था। 

पर एकांत में शोर? 

वो क्या था? 

वो था, उस समय अपने शरीर के अंदर की आवाज सुनाई देना। 

मतलब?

मतलब दिल की धड़कन(heart beat), जो कि तबीयत खराब होने के कारण 72 से बढ़कर 150 हो गई थी। हर पल ऐसी प्रतीत हो रही थी, मानो दिमाग में लगातार कोई हथौड़े चला रहा हो, कभी तो मन करता कि यह धड़कन रुक जाए, तो चैन आए।

अपना बोलना, सबसे तेज़ खुद को ही सुनाई देना, कुछ खा रहे होते तो उससे तेज़ कुछ नहीं सुनाई देना और बहुत सारी बातों का मंथन, हर पल को सालों में बदल रहा था। 

ईश्वर ने हमें 5 इंद्रियां दी है। जो कोई उनमें से किसी एक से भी वंचित हैं, तो उसका जीवन बहुत कठिन होता है। किन्तु वो व्यक्ति जो पहले पूर्णतः स्वस्थ हो, पर किसी कारणवश उसकी कोई इंद्री, कुछ समय या हमेशा के लिए ख़राब हो जाए, तो उसके लिए जीवन असहनीय हो जाता है।

क्योंकि जिसके पास पहले से ही नहीं था, उसे पूर्ण अनुभव नहीं होता है कि वो क्या क्या खो रहा है। 

जबकि, जो सब अनुभव कर चुका हो, उसका उस अनुभव के बाद वंचित होना बेहद कष्टकारी होता है।

पर अब कुछ बेहतर स्थिति है, थोड़ा-थोड़ा सुनाई देना, कुछ-कुछ बातें भी कर लेना, मेरा blog में वापसी, सब आप लोगों का प्यार है, जिसने एक बार फिर दिल को आप सब से जोड़ दिया।

चलिए, कल से फिर से एक बार खुशनुमा सफ़र शुरू करते हैं, एक नई शुरुआत के साथ, पर सोच में बहुत कुछ बदल गया है, शायद इसकी झलक आगे की posts में भी दिखे।

आप सभी को बहुत सारा धन्यवाद, जिन्होंने मेरे स्वास्थ्य के लिए मंगलकामनाएं की 🙏🏻 

हे ईश्वर, आप से प्रार्थना है कि, सबको ही सम्पूर्णता प्रदान करें और किसी को सुख प्रदान कर यूं कभी वंचित न करें।

Sunday, 15 February 2026

Bhajan : भोलेनाथ जी

भोलेनाथ जी


हाथ जोड़कर खड़े भक्त हैं

सुन लो भोलेनाथ जी

कृपा दृष्टि कर दो हम-सब पर

अरज लिए हैं आज जी

ओ शंभू नाथ जी

हाँ भोलेनाथ जी - 2


जब तुम हो शिरोधार्य मेरे 

फिर क्यों विपदा मुझको है घेरे 

त्रिशूल उठाकर कर दो 

तुम उन सबका नाश जी 

ओ शंभू नाथ जी 

हाँ भोलेनाथ जी -2 


देवों के देव हो तुम ही 

त्रिकाल, महाकाल जी

शरण तुम्हारे बैठे हैं हम

भक्ति करो स्वीकार जी

ओ शंभू नाथ जी 

हाँ भोलेनाथ जी - 2 


शिव गौरा के पवित्र मिलन से 

बढ़कर कुछ नहीं बात जी

आई अनोखी रात जी

शिवरात्रि है आज जी 

ओ शंभू नाथ जी 

हाँ भोलेनाथ जी -2 



"ॐ नमः पार्वती पतये हर हर महादेव" 



आप सभी को महाशिवरात्रि पर्व शुभ हो, महादेव और माता पार्वती का आशीर्वाद हम सब पर सदैव बना रहे 🙏🏻 

Thursday, 5 February 2026

Poem : उम्मीद

उम्मीद

हर रोज़ उम्मीदों को,
जुड़ते टूटते देखा है।
हम जो थे अब तक
आशाओं से भरे हुए,
उन आशाओं को 
क्षण-क्षण 
बिखरते देखा है।
जीने की जो इच्छा है,
उसको तिल-तिल 
छूटते देखा है। 
हमने बहुत पास से 
खुद को बदलते देखा है। 
ज़िंदगी गुजार दी 
जिन रिश्तों को संवारने में,
उन्हीं रिश्तों को हर पल 
बदलते हुए देखा है।। 

Wednesday, 4 February 2026

Poem : शोर

शोर 


जब से इन कानों ने,

सुनना बंद किया। 

शोर बहुत धड़कनों

का सुनाई दिया,

सपनों का सुनाई दिया, 

अपनों का सुनाई दिया,

बेइंतहा तन्हाई का

सुनाई दिया।

और बस एक ही 

बात समझ आई,

न किसी से उम्मीद करो,

न किसी को उम्मीद दो,

क्योंकि अपने हिस्से की

लड़ाई खुद लड़नी होती है।

कोई दावे कर ले जितने, 

साथ कोई चला नहीं करता।

Wednesday, 14 January 2026

Poem : Makar Sankranti

मकर संक्रांति पर्व को किस दिन मनाया जाएगा, इसमें पशोपेश थी, अतः अभी यह कविता डाल रहे हैं। आप सभी को मकर संक्रांति पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएँ। जो आज यह पर्व कर रहे हैं उन्हें आज की शुभकामनाएँ, जो कल पर्व करेंगे उनको कल के लिए शुभकामनाएँ।

सूर्य देव की कृपा सब पर सदैव बनी रहे, सबके जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रकाश रहे 🙏🏻🌞

मकर संक्रांति


हे सूर्य देवता! यह बतलाओ,

इस संक्रांति पर्व पर,

क्या मेरे घर भी आओगे?

अपने शुभाशीष को,

घर पर मेरे बरसाओगे?

क्या सुखद-सुनहरी धूप,

घर आंगन पर मेरे,

आशीष बन कर चमकेंगी?

क्या आशा की किरणें

मेरे घर आंगन में दमकेंगी?

क्या, मेरे परिवार में फिर से,

जल्दी वो खुशियां चहकेंगी?

क्या जल्दी हम सब फिर,

एक साथ रह पाएंगे? 

हे सूर्य देवता! फिर से,

जल्दी कर दो सब वैसा,

खिचड़ी, तिल लड्डू, पैसा 

हम तुम पर सब चढ़ाएंगे। 

तुम तक पहुंच सकें, 

फिर वैसी पतंग उड़ाएंगे।

हर वर्ष उल्लास से भरा,

फिर हम भी मकर संक्रांति मनाएंगे।।

Thursday, 1 January 2026

Poem : सुख मिले जीवन पर्यन्त

सुख मिले जीवन पर्यन्त

नई सुबह का नया ख्याल, 
मन में उठ रहा सवाल,
क्या शुभ होगा 
2026 का यह साल?

क्या होगा विरह का अंत? 
क्या सुख मिलेगा जीवन पर्यन्त?
क्या पपीहा गाएगा मल्हार?
शुभ होगा क्या नववर्ष इस बार?

क्या, यह नववर्ष है ऐसा?
जो सोचे, उसको मिल जाए वैसा?
क्या सफलता मिलेगी अपार?
क्या पुलकित होगा घर-संसार?

सवाल कई हैं, 
नहीं है अंत। 
आशा है ईश्वर से यही,
सुख मिले जीवन पर्यन्त।।

आपको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।