माँ भगवती नें दुर्गम के साथ जब अंतिम युद्ध किया, तब उन्होंने भुवनेश्वरी, काली, तारा, छीन्नमस्ता, भैरवी, बगला तथा दूसरी अन्य महा शक्तियों का आह्वान कर के उनकी सहायता से दुर्गम को पराजित किया था।
इस भीषण युद्ध में विकट दैत्य दुर्गम को पराजित करके उसका वध करने पर माँ भगवती दुर्गा नाम से प्रख्यात हुईं।
क्यों पड़ा नाम दुर्गा?
दुर्गा नाम इस कारण पड़ा, क्योंकि माता ने प्राचीनकाल में दुर्गम नामक एक भयानक असुर का वध किया था, और इसी ‘दुर्ग’ (अर्थात् ‘असुर’) का वध करने के कारण उन्हें देवी दुर्गा कहा जाने लगा।
देवी भागवत जैसे पौराणिक ग्रंथों में इस घटना का विस्तार से वर्णन है, जिसमें बताया गया है कि दुर्गम असुर ने वेदों को छिपाकर संसार में असंतुलन पैदा कर दिया था, जिसे देवी ने अपने वध से समाप्त किया।
आइए, इस घटनाक्रम व पौराणिक कथा को विस्तार से समझते हैं।
असुर दुर्गम का अत्याचार :
एक प्राचीन असुर था जिसका नाम दुर्गम था। उसने ब्रह्माजी से वरदान पाकर वेदों को छिपा दिया था, जिससे दुनिया में अज्ञानता और पाप फैल गया था।
देवताओं की रक्षा :
देवताओं ने देवी उमा से इस संकट को दूर करने के लिए प्रार्थना की।
देवी दुर्गा का प्राकट्य :
देवताओं की रक्षा के लिए, देवी उमा ने दुर्गा का रूप धारण किया और दुर्गम असुर से युद्ध किया।
दुर्गम का वध :
भयंकर युद्ध के बाद, देवी दुर्गा ने दुर्गम असुर का वध किया और देवताओं को देवलोक वापस दिलवाया।
नाम की उत्पत्ति :
दुर्गम नामक असुर का वध करने के कारण ही देवी उमा को दुर्गा नाम से भी जाना जाने लगा।
जयकारा शेरावाली दा, बोलो सांचे दरबार दी जय!

No comments:
Post a Comment
Thanks for reading!
Take a minute to share your point of view.
Your reflections and opinions matter. I would love to hear about your outlook :)
Be sure to check back again, as I make every possible effort to try and reply to your comments here.