Tuesday, 31 March 2026

Poem : डेढ़ इंच के परमवीर

मौसम बदल रहा है, साथ ही बढ़ रही है मच्छरों की संख्या...

पर सीखो तो, यह छोटा सा जीव भी हमें बहुत कुछ सीखा जाता है। 

आज की कविता उसी को बयां करती हुई...

डेढ़ इंच के परमवीर


उनकी आठ दिन की ज़िंदगी,

हमारे अस्सी साल पर भारी। 

जो तबीयत से काट लिया एकबार,

तो समझो, अस्पताल जाने की तैयारी।।


हमारे पास उन्हें मारने के,

तरीके हैं कई हजार।

और उनके पास सदियों से,

रहा सिर्फ एक हथियार।।


उन्हें देखकर फिर क्यों, 

हम बहुत अधिक डर जाएं?

होने वाली ढेरों बीमारियों को, 

सोच-सोचकर घबराएँ?


वो डेढ़ इंच के परमवीर,

डटकर सामने खड़े हो जाएं। 

हम पर हमला करने को,

अपनी विशाल सेना ले आएं।।


वो छोटा-सा जीव,

दुनिया को यही सिखाता है।

डटकर खड़े रहना ही,

वर्चस्व तुम्हें दिलाता है।।

No comments:

Post a Comment

Thanks for reading!

Take a minute to share your point of view.
Your reflections and opinions matter. I would love to hear about your outlook :)

Be sure to check back again, as I make every possible effort to try and reply to your comments here.