Sunday, 22 April 2018

Nutritious Tiffin Recipe : Fruit Sandwich

Fruit Sandwich

This innovative recipe of mine is very nutritious and mouth watering. It attracts children too.

                                                    serves 6

Ingredients:

  • Bread                                    12 slices small sized
  • Amul Fresh Cream                200ml
  • Icing sugar                             according to taste
  • Mango                                   1 medium sized
  • Pomegranate                         1 small sized
  • Grapes                                   10-12 no.
  • Orange                                   1 medium sized

Method:

  1. Mix icing sugar in Amul fresh cream & whip for a consistency. If, you are health conscious, then sugar can be dropped.
  2. Peel mango & orange. For best result, also peel grapes & each segment (फांक) of orange. Dice the pulp into small size as shown in the Fig-2.
  3. Remove corners of the bread slices.
  4. Apply little thick layers of the cream on each slice.
  5. Now, put all the fruits on every slice & cover them with another slice of bread, making sandwich.
  6. Refrigerate it for 5-10 minutes, to let it set.
  7. Now, cut them into triangles.
  8. Then, wrap in cellophane food grade sheet and pack it in the tiffin.

Fig-1
Fig-2

Note: For best results:

  • Use fresh & soft bread.
  • Use Amul fresh cream as it is consistent.
  • Peel the fruits as mentioned above before cutting them.
  • All the fruits should be sweet in taste. If they are a little bit soury, add sugar to sweeten them.
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Saturday, 21 April 2018

Kids Story : तोड़ने का नतीजा



समस्या: खिलौने बहुत तोड़ता है
                         
               कहानी:तोड़ने का नतीजा।   


राजू अपने माँ-पापा का अकेला बेटा है। उसके पापा उसके लिए बहुत खिलौने लाते थे। पर कुछ ही दिन बाद राजू के सारे खिलौने टूट जाते थे, क्योंकि वो खिलौनों से ना तो ठीक से खेलता था और ना ही ठीक से रखता था।
एक बार गर्मी की छुट्टी में वो अपने माँ-पापा के साथ अपने मामा के यहाँ गया। उनकी बेटी स्नेहा के साथ उसे बहुत मज़ा आया। क्योंकि उसका घर ढेर सारे अच्छे-अच्छे खिलौनों से भरा हुआ था। और तो और उसके सारे खिलौने बहुत अच्छे से रखे थे और स्नेहा उनसे खेलती भी अच्छे से थी।
दोनों बच्चे दिन भर खेलते, और जब थक जाते तो स्नेहा सारे खिलौने संभाल के रख देती।
कुछ दिन बाद राजू अपने घर आ गया, पर उसकी खिलौने तोड़ने और ठीक से ना रखने की आदत नहीं छूटी।
एक साल बीत गया और अगली छुट्टी में भी वो मामा के यहाँ जाने की ज़िद करने लगा। उसे याद था कि उसने पिछले साल कितने मज़े किए थे।
अबकी बार तो स्नेहा के पास पहले से दोगुने खिलौने थे, ये देख कर राजू चौंक गया।
उसने अपने माँ-पापा से कहा कि देखिये मामा जी स्नेहा को कितने खिलौने दिलाते हैं! मैं पिछले साल आया था तो भी कितने सारे खिलौने थे अबकी तो और भी ज़्यादा हैं। राजू की ये बात उसके मामा भी सुन रहे थे। उन्होने राजू को बुलाया और बोले बेटा ध्यान से देखो कि आधे से ज़्यादा खिलौने क्या वही नहीं हैं जिनसे तुम पिछले साल खेले थे? असल में बात ये है कि स्नेहा अपने खिलौनों से अच्छे से खेलती है और फिर उन्हें  संभाल के रखती है। वैसे जितना मैं जानता हूँ कि तुम्हारे पापा भी खिलौने कम नहीं दिलाते पर बात ये है कि तुम उन्हे ठीक से नहीं रखते
अब राजू सोचने लगा मामा तो ठीक ही कह रहे हैं कि पापा तो मुझे बहुत खिलौने दिलाते हैं पर गलती मेरी ही है। अगर उसने भी स्नेहा कि तरह खिलौने ठीक से रखे होते तो आज उसके पास स्नेहा से भी ज़्यादा खिलौने होते। अब राजू को समझ आ गया था कि संभाल के रखने से ही सब-कुछ बढ़ता है।

Friday, 20 April 2018

Article : सुख आपकी मुट्ठी में

सुख आपकी मुट्ठी में                 

सुख क्या है? कहाँ है? कोई नहीं जानता? वो ना तो महलों में है, ना झोपड़ों में, ना संपन्नता में हैना ही विपन्नता में, तो है कहाँ?

नहीं, मैं भी नही जानती।  

लेकिन अपने अनुभवों और बड़े बुजुर्गों की नसीहतों से यही ज्ञात हुआ है कि, सुख आपकी मुट्ठी में ही है,

क्या हुआ? हैरानी हो रही है? चलिये हम बताते हैंकैसे।  

बस एक शब्द अपनी ज़िंदगी से बाहर निकालना है, वो है तुलना(बराबरी)।  

जी हाँ, बस यही एक शब्द है, जो हमारी भरी हुई मुट्ठी को खाली कर देता है।  

कभी किसी से तुलना नही करनी चाहिए, क्योंकि हम जब किसी से तुलना करते हैं, तो बहुत ज्यादा पक्षपाती हो जाते हैं, हम जिससे तुलना कर रहे होते हैं, उसकी केवल उन्हीं बातों या आदतों पर अपना ध्यान केन्द्रित करते हैं, जो हमारे पक्ष में हैं, और उन बातों को बड़ी आसानी से नज़र-अंदाज़ कर देते हैं, जो हमारे विपक्ष में हैं।  
ऐसा कैसा हो सकता है, कि कोई सर्वगुण सम्पन्न हो, और दूसरा सर्वगुण विपन्न हो, आखिर सबको बनाया तो एक ही ईश्वर ने है, वो पक्षपाती नहीं हैं, उनके लिए सब समान हैं।

हमारी असन्तुष्टता का सबसे बड़ा कारण तुलना ही है, वो भी एकपक्षी, क्योंकि कुछ भी grey हीं होता है, हर तथ्य में एक पक्ष सफेद होता है, तो एक काला भी होता है, हर बात के पीछे कोई न कोई कारण भी होता है, कोई सफल है, धनवान है, प्रसिद्ध है या सब का प्रिय है, तो उसके पीछे 

उसका अथक परिश्रमत्याग, अपनापन, समय की प्राथमिकता, बड़ो की सेवा से मिला आशीर्वाद भी शामिल होता है

अगर आप दोनों पक्षों को समभाव से देखते हैं, और वही आपके जीवन का लक्ष्य है, तो पूर्ण प्रयास रें, कदापि आप उससे भी अधिक सफल हो जाएँ, अन्यथा एकपक्षीय  तुलना करके, आप अपने सुखहाल जीवन को दुख के अंधकार में ढकेल देते हैं, और मृगतृष्णा के पीछे भागते भागते थक जाते हैं, जिससे ईश्वर ने जो आपको अच्छा दिया है, उसे भी गवां देते हैं