Thursday, 12 March 2020

Article: Corona Virus या डरona Virus


Corona Virus या डरona Virus

चीन से फैला करोना virus, आज विश्व में सर्वत्र व्याप्त होता जा रहा हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा।

पर आप लोगों ने ध्यान दिया, जितना तेज़ी से वो फैल नहीं रहा, उससे ज्यादा तेज़ी से उसका डर सब में व्याप्त हो रहा है।

Whatsapp, twitter, facebook सब में करोना virus के भारत में आने के पहले से ही treatment share होना शुरू हो गए थे, मतलब उसके आने से पहले से हम डरे हुए थे। तो जिसके आने का इतना इंतज़ार था, वो आ भी गया।

पर वो भारत में अभी भी इतना नहीं आया है, कि हम डर के साये में जीने लगें।

ना जाने डर के कारण कितनी ही जगह होली खेली नहीं गयी! सूनी कर दी गयी। पर क्या आप बच्चों को रोक पाये? नहीं ना, उन नन्हें नौनिहालों ने बता दिया कि डर के आगे जीत है - और सब निकल लिए, गुलाल और पिचकारी के साथ अपनी टोली में। 

हमारा आप से कहना सिर्फ़ इतना है, डरिए मत, सतर्क रहें।

मतलब आप काम मत रोकिए, पर साफ-सफाई का भरपूर ध्यान रखिए। जो precaution जरूरी हैं, उन्हें करिए भी, पर डरिए मत।

यूं डर के साये में ज़िंदगी बसर नहीं होती...
ना गिरें, इसके लिए बचना भी होता है,
गर, गिर ही जाएँ, तो संभलना भी होता है...
ज़िंदगी को अपनी रवानगी में बहने दीजिये,
खुशी के पल को साथ में रहने दीजिये...
समेट लो, जितना समेटा जाए,
पर ज़िंदगी रेत है जनाब,
वो किसी के हाथ में ना रुक पाए...

Wednesday, 11 March 2020

Kids' Story: Advay the Hero: पिचकारी


Advay the Hero: पिचकारी


होली आने वाली थी।


Advay के पापा बोले, तुम्हारी पुरानी पिचकारी देख लेता हूँ, शायद वो ठीक हो।

Advay स्कूल चला गया पापा ने पिचकारी check की, वो ठीक थी। पापा भी office चले गए।


जब शाम को पापा आए तो उन्होने, Advay से कहा, बेटा वैसे तो तुम्हारी पिचकारी बिलकुल ठीक है, पर फिर भी तुम्हरा  मन हो तो नयी पिचकारी ले आऊं..

वो बोला, नहीं तब क्यों चाहिए? बेकार पैसा बर्बाद करने से क्या फायदा?..

Advay के घर Maid बसंती काम करने आई हुई थी। 

वो जाते वक़्त माँ से बोलने लगी, भाभी त्यौहार आते हैं, तो मुझे समझ नहीं आता हैकि क्या करूँ? गुझिया, पापड़ बनाऊँ या सूरज के लिए पिचकारी लेने जाऊँ? 

अबकी 4 साल का हो गया है तो, मान भी नहीं रहा है, बिना पिचकारी लिए।
 
तो ला दो, उसके लिए, माँ ने कहा। 

अरे कहाँ से लाऊं, ना तो मेरे पास इतना पैसा है ना समय ही है, कि दोनों ही काम कर लूँ। पापड़ गुझिया नहीं बनाऊँगी, तो त्यौहार सूना लगेगा। 

तो वही बनाऊँगी, कहते हुए वो चली गयी।

Advay पापा के पास आ कर बोला, पापा मुझे नई पिचकारी लेनी है। 

क्यों? क्या हुआ, अभी तो तुम नई लेने से मना कर रहे थे? वो पिचकारी चल नहीं रही है क्या? 

नहीं चल तो रही है, पर मुझे नई ही चाहिए, Advay अपनी बात पर अडिग था। 

माँ बोलीं चले जाइए, इसके सब friends नई लाए हैं। शायद वही कुछ देख कर बोल रहा होगा।

उसके पापा ने उसे बहुत बढ़िया, नई पिचकारी दिला दी। 

नई पिचकारी देखकर Advay की आंखें चमक उठीं, पापा वही पिचकारी लाए थे, जैसी लेने का उसका बहुत दिनों से मन था...

अगले दिन जब बंसती काम करके जाने लगी, तो Advay ने बंसती को पिचकारी दे दी। और कहा आंटी, यह पिचकारी सूरज के लिए होली का gift है।

बंसत ने खुश होते हुए पूछा, मेरे सूरज के लिए, इतनी अच्छी पिचकारी!...

हाँ आंटी, होली में तो सबके पास पिचकारी होनी चाहिए...

बसंती ने भरी आंखों से भर-भरकर आशीर्वाद दिए, बाबू भगवान आपको खूब दें, आपको खूब सफलता मिले, आप की लंबी उम्र रहे। 

मेरे लिए आप हमेशा फ़रिश्ता बनकर आते हो

माँ समझ गईं कि Advay अपने लिए नहीं बल्कि सूरज के कारण नई पिचकारी मंगा रहा था।

बसंती के जाने के बाद, माँ ने बोला, बेटा तुम्हे पिचकारी सूरज को देनी थी तो, अपनी पुरानी वाली दे देते, वो भी तो ठीक थी। 

नहीं मां, वो तो मेरी थी, जब वो ठीक थी तो मैं नई क्यों लेता? पैसे थोड़ी ना बर्बाद करता... 

और सूरज के पास तो पिचकारी थी नहीं, तो उसके लिए तो नयी ही मंगानी पड़ती ना?

पर बेटा बता देते कि सूरज के लिए मंगा रहे हो तो, पापा इतनी महंगी पिचकारी ना लाते... 

आगे उसे हमेशा अच्छी पिचकारी की आस रहेगी, जो उसे बसंती कभी नहीं दिला पाएगी। जो अच्छा नहीं हुआ... 

माँ, उसे कभी तो अच्छी पिचकारी भी मिलनी चाहिए...

यह बात भी ठीक है बेटा, तुम्हारा मन बहुत अच्छा है। भगवान की कृपा तुम पर बनी रहे...

होली वाले दिन सूरज, अपनी नई और बहुत बढ़िया पिचकारी के साथ बहुत खुश था। उसे खुश देखकर बसंती भी बहुत खुश थी, कि आज फिर बाबू (Advay) ने उसके घर खुशियाँ बिखेर दी थी। 

आज भी बसंती, Advay के लिए भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि, हे भगवान Advay को हमेशा खुश रखें 🙏🏻

Tuesday, 10 March 2020

Poem : होली

होली


होली रंगों का त्यौहार,
खुशियाँ समायी इसमें हजार।
छोटे-बड़े का भेद नहीं,
मस्ती-धमाल इसमें करें अपार।

रंग, गुलाल और भर पिचकारी,
बच्चों ने कर ली, होली की तैयारी।
था, जिसका इंतजार बच्चों को,
आ गई, वो होली प्यारी।

लाल, पीला, हरा, गुलाबी,
रंगों की छटा निराली।
मनभावन सब ही लग रहे,
हो बहन, बेटी, भाभी या साली।

दुश्मन इसमें, दोस्त बन जाएँ,
भूल नाराजगी, गले लग जाते।
गुझिया की मीठी मिठास से,
सब-के-सब एक हो जाते।

है गुझिया और मालपुआ की मिठास तो,
नमकीन, चटपटा भी रस घोले।
दही-बड़े, मठरी, पापड़,
खाने के लिए सब मुँह खोलें।

ठंडाई, सबके मन भाती,
भांग भी बहुतों को रास आती।
गीत-संगीत में झूम उठें सारे,
पानी भरे गुब्बारे बच्चे मारें।

 सबका खुश रहे जीवन संसार,
रंग, उत्साह, उमंग रहे बरकरार।
आप सभी को शुभ रहे,
होली का पवित्र त्यौहार।

💐होली के पावन अवसर पर आप सब को हार्दिक शुभकमनाएं 💐