Wednesday, 7 September 2022

Article : आधुनिकता कहीं अंत तो नहीं!!

आधुनिकता कहीं अंत 

तो नहीं!!

हम लोग आधुनिकता की अंधी दौड़ में दौड़ते हुए ना जाने किस राह पर चलते जा रहे हैं? शायद अंत की ओर...

आप कहेंगे कि, यह हम कैसे कह रहे हैं? तो हम आपको बहुत सारे प्रमाण देते हैं। फिर आप ही बताइएगा कि क्या सही है...

आज कल हम सभी के पास अपने बचपन से ज़्यादा सुख-समृद्धि है। पहले से दूध, दही, मेवा, मिठाई, अनाज, फल-सब्जियां, आदि सभी सामान तो हमारे पास बचपन से ज़्यादा है।

पंखा, कूलर, एसी, मोटरसाइकिल, कार, फ्रीज, टीवी, आदि, जिसने बचपन में जिसका भी सुख लिया है, उससे ज्यादा ही सबके पास..

फिर भी ना हम स्वस्थ हैं, ना सुखी, ना चिंताओं से मुक्त, ना संतुष्ट... 

क्यों? आखिर ऐसा क्यों? 

जब सब ही पहले से बेहतर, आधुनिक और सुव्यवस्थित है, तो ऐसा क्यों?...

इसका कारण है, कुछ घटक 

  1. आधुनिकता, जो सबसे पहले पायदान पर है...
  2. धनलोलुपता, एक और बहुत बड़ा कारण...
  3. अनावश्यक भूख (आगे बढ़ने की, महत्वकांक्षाओं की)...
  4. बहुत अधिक दवाओं का उपयोग...
  5. अपनों से दूरी...

चलिए सबके बारे में एक, एक करके सोचते हैं..

पहले खाना बनाने के लिए और खाना खाने के लिए, मिट्टी, तांबे, लोहे के बर्तन इस्तेमाल होते थे। चूल्हे पर खाना बनता था, मटके में पानी होता और जमीन में बैठकर खाते थे। लोग खूब घी, मक्खन, दूध, दही, मीठा, तीखा खाते, पर तब लोग, सुखी भी थे, स्वस्थ भी और संतुष्ट भी...

फिर हो गया, 

आधुनिकता का प्रवेश,

चूल्हे की जगह, गैस और माइक्रोवेव ने ले ली, बर्तन भी बदल गये, प्लास्टिक स्टील और एल्यूमीनियम की बहुतायत हो गई, मटके की जगह, RO और refrigerator ने ले ली। ज़मीन की जगह dinning table ने ले ली। घी, मक्खन की जगह, olive oil, refined oil ने ले ली। 

Gym, aerobics सब शुरू हो गया, पर results -

लोग, ना सुखी हैं, ना स्वस्थ और ना संतुष्ट...  

धनलोलुपता 

धनलोलुपता के आगे, सब फीका, ना बचपन, ना मासूमियत, ना बच्चे की किलकारी, ना प्यार, ना ममता। 

बहुत अधिक धन कमाने की चाह में, जो चीजें हमें खुशी देती है, उसे खुद से दूर करते जा रहे हैं। हम अपना पूरा ध्यान और समय, सिर्फ और सिर्फ, इस उधेड़बुन में निकाल देते हैं कि धन कैसे प्राप्त करें। 

अनावश्यक भूख (आगे बढ़ने की, महत्वकांक्षाओं की)

हमें जितने की आवश्यकता है, उससे बहुत ज्यादा पाने की हमारी चाह ने हमें बहुत अधिक महत्वाकांक्षी बना दिया है। जिसके कारण, हम जरुरत से ज्यादा ही busy हो गये हैं और उसमें हम अपने अतुलनीय सुख की तिलांजलि दे रहे हैं।

पहले खेती होती थी, तब बीज से लेकर खाद तक, सब natural होता था। फसल का उत्पादन थोड़ा कम होता था। अनाज, फल-सब्जियों का रखरखाव भी natural होता था, अनाज सालों और दिनों, फल-सब्जियां सही बने रहते थे।

ऐसे ही दूध के साथ भी था, गाय-भैंस, जितना दूध देती थी, उसे ही घर घर पहुंचाया जाता था। ऐसे अनाज और दूध को जब लोग खाते थे, तो स्वस्थ रहते थे। 

लोगों के पास समय था, एक दूसरे को समझने का, सुख-दुख साझा करने का, इसलिए सुखी भी थे और संतुष्ट भी... 

बहुत अधिक दवाओं का उपयोग

अब बहुत अधिक दवाओं का उपयोग होने लगा है; वैसे यह भी आधुनिकता का ही दूसरा रूप है। आज हर चीज के लिए दवाएं मौजूद है।

खेतों में पैदावार बढ़ानी हो - दवा डाल दो - फसल दोगुनी-चौगुनी हो जाएगी; अनाज, सब्ज़ी, फल, सब double size के हो जाएंगे। 

फिर इन सब को लंबे समय तक store करके रखना हो, तो फिर वही, दवा डाल दो। ऐसे ही गाय-भैंस को injections लगाकर, अधिक दूध निकाल लेते हैं...

अब जब हर step पर दवा ही डलेगी, तो आप को क्या लगता है? 

नहीं समझे, ऐसे अनाज और फल-सब्जियों को digest करने के लिए दवा ही खानी पड़ेगी या इन्हें खाने से जब स्वास्थ्य खराब होगा तो उसके लिए दवाएं खाइए।

मतलब बात दवा से शुरू हो कर दवा पर ही खत्म हो रही है।

और लोग हैं कि तबियत ख़राब होने का सारा ठीकरा, घी, सरसों तेल, मक्खन, दूध, मिठाई, नमक पर फोड़कर, उसकी जगह olive oil, margarine, refind oil, rock salt, sugar free, etc. को देकर, नित नए विकल्प खोजते रह रहे हैं। 

जनाब, घी तेल बदलने से नहीं, बल्कि आप को खुद को बदलने की आवश्यकता है...

आवश्यकता है, उस सोच की, जिसमें मंथन किया जाए कि हमें किस हद तक, आधुनिकता चाहिए? हर आधुनिक वस्तुएं बेकार नहीं है, पर यह विचार एक बार अवश्य करें कि उसका प्रभाव, आपके भविष्य में कितना कारगर सिद्ध होगा।

जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए धन आवश्यक है, पर धन ही जीवन नहीं है, एक बार विचार अवश्य करिएगा कि आप कहीं बहुत अधिक धन कमाने की चाह में, उस धन से भी ज्यादा बेशकीमती लम्हे खो तो नहीं रहे हैं? क्योंकि आप कितना भी ज्यादा कमा लीजिए, वो बेशकीमती पल और खुशियां वापस नहीं आने वाले... 

अपनों से दूरी

जो आप को सबसे ज्यादा सुखी, स्वस्थ और संतुष्ट कर सकता है, वो है, आप कितने ज़्यादा naturally रह रहे हैं, कितने संतोषी हैं, कितने positive attitude वाले हैं, आधुनिकता की अंधी दौड़ में कितना शामिल हैं, कितना ज्यादा अपनों को महत्व देते हैं, आप कितना कम स्वार्थी हो, कितना अपनों के साथ रहते हैं...

बस यही है, जो हमारी भारतीय संस्कृति की विशेषता थी, जिसे हम धीरे-धीरे छोड़ते जा रहे हैं, कभी आधुनिकता के नाम पर, कभी व्यस्तता के नाम पर, कभी जरूरत के नाम पर।

जिस दिन हम अपनी संस्कृति को समझ जाएंगे, उस दिन से हम स्वस्थ रहेंगे, सुखी भी होंगे और संतुष्ट भी...

अंत आने से पहले एक बार विचार अवश्य करें - धुनिकता कहीं अंत तो नहीं??

Monday, 5 September 2022

Poem : सूर्य सा दीप्तिमान

हम सभी के जीवन में शिक्षक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं क्योंकि हमें, जन्म तो माता-पिता देते हैं पर हमें अस्तित्व, शिक्षक ही प्रदान करते हैं।

अतः उन्हें अस्तित्व निर्माता कहना, अतिश्योक्ति नहीं होगा...

आज की मेरी यह काव्य प्रस्तुति, सभी शिक्षकों को समर्पित है।

सूर्य सा दीप्तिमान 




दीप था मैं कोरा,

प्रकाश मुझमें भर दिया।

जिंदगी के तिमिर को,

आप ने रोशन कर दिया।


था नहीं कोई वजूद मेरा,

ज्ञान मुझमें भर दिया।

दिशाहीन से अस्तित्व का,

मार्ग प्रशस्त कर दिया।


मार्ग में थे कंटक हजारों,

क्षित-विक्षित करने के लिए।

आपके सानिध्य ने मेरा,

हौसला बुलंद कर दिया।


हे गुरुवर आप मेरा,

शत् शत् प्रणाम स्वीकारिए।

आप के अथक प्रयासों ने मेरा,

जीवन सौंदर्य से भर दिया।


था मैं मात्र दीप कोरा,

मुझको प्रकाशित कर दिया।

जीवन के तिमिर को दूर कर,

सूर्य-सा दीप्तिमान कर दिया।


आज शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर, अपने सभी गुरुजनों को सादर प्रणाम 🙏🏻🙏🏻

 Happy Teacher's Day 💐

Friday, 2 September 2022

Article : Railway ticket Concession for senior citizens

 वर‍िष्‍ठ नागर‍िकों को रेल टिकट छूट

आज के हमारे article का topic देखकर, बहुत से लोग बोलेंगे, Ma'am आप क्या बात कर रही हैं? वरिष्ठ नागरिकों को टिकट में छूट तो पहले मिला करती थी। 

पर after corona pandemic, सरकार ने इस scheme को बंद कर दिया‌ है।

भाजपा सरकार, लोगों के हित की schemes लाती कम और बंद ज्यादा करती है। इन्हें केवल पूंजीपति वर्ग की चिंता है, वरिष्ठ नागरिकों से इन्हें क्या मिलेगा, जो उनकी चिंता करें।

तो हम यही कहेंगे कि आप की सोच आप तक...

पर हाँ, कुछ फेरबदल के साथ रेलवे टिकट पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए, पुनः छूट की scheme लायी गई है, जिस पर ही यह article आधारित है। 

तो आज का यह article, शायद हमारे देश के senior citizens के लिए good news हो और उनके चहरे पर मीठी मुस्कान ले आए...

अब senior citizens को रेल के टिकट में भारी छूट मिलेगी, जिससे टिकट की दर में भारी concession  मिल जाएगा।

Indian railways के सूत्रों से मिली जानकारी के according टिकट पर छूट के ल‍िए age के criteria  में बदलाव किए जा सकते हैं। 

यह भी उम्‍मीद है क‍ि सरकार  discounted fare की सुविधा 70 वर्ष से ऊपर वाले लोगों के ल‍िए ही provide कराए। उन्हें railway ticket पर 40% तक का Concessions मिल सकता है।

यह सुव‍िधा पहले 58 वर्ष की महिलाओं और 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके पुरुष या इससे ज्‍यादा उम्र वालों के ल‍िए थी। 

इस scheme के फेर-बदल का, मुख्य कारण बुजुर्गों के लिए subsidy plan बरकरार रखते हुए इन concession को देने से रेलवे पर पड़ने वाले financial burden का adjustment करना है।

आपको बता दें Covid pandemic यानी मार्च 2020 से पहले रेलवे, 58 वर्ष या इससे ज्‍़यादा उम्र वाली महिलाओं को किराये में 50 प्रत‍िशत की और 60 वर्ष या इससे ज्‍़यादा की उम्र वाले पुरुषों को 40 प्रत‍िशत का concession देता था।

यह concession सभी class (first AC, second AC, third AC, sleeper, general) में रेल का सफ़र करने पर म‍िलती थी।

लेकिन corona pandemic के बाद train movement के resume होने पर यह facility खत्म कर दी गई. रेलवे के इस फैसले को काफी लोगों ने criticize भी किया था।

Senior citizens concession देने के अलावा, रेलवे में इस पर भी विचार किया जा रहा है कि सभी ट्रेनों में 'Premium tatkal'  योजना शुरू की जाए। इससे high Revenue मिलने में मदद मिलेगी, जो कि concession के burden को bear करने में helpful रहेगा।

अभी यह scheme करीब 80 trains में लागू कर दी गई है। प्रीमियम तत्काल योजना रेलवे द्वारा शुरू किया गया एक reservation है, जो कुछ सीटें dynamic rental pricing  के साथ reserve करता है। 

यह reservation, last moment में journey plan करने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए है जो थोड़ा अतिरिक्त खर्च करने को तैयार हैं।