Friday, 6 December 2019

Article : इतनी जल्दी किस बात की


इतनी जल्दी किस बात की


आज कल सोच किस तरफ जा रही है, ना जाने

खुद की पढ़ाई के लिए समय चाहिए, job लगने के बाद settlement के लिए time चाहिए। शादी जल्दी करनी नहीं है। 32-35 में जब शादी हो जाएगी, तब family बढ़ानी नहीं है। 

एक दूसरे को समझने के लिए, understanding के लिए proper time चाहिए। उसमें भी 5-7 साल निकाल देंगे। मतलब 40-42 साल में parents बनेंगे। यानि आधी ज़िन्दगी, निकालने के बाद।

बस अब, time चाहिए वाली बात खत्म। बच्चा बेचारा साल भर का हुआ नहीं, कि उसके लिए play school की खोज शुरू।

और दो साल से ज्यादा तो माँ-पापा से झेला ही नहीं जाएगा।अरे भाई बहुत energetic है, बहुत active है, या कुछ बोलता नहीं है। अब और time नहीं दे सकते इसके लिए, आखिर कब तक इसके लिए अपने सारे काम छोड़ कर घर बैठे रहें, और माशा अल्लाह छोटे मियाँ पहुँचा दिये जाएंगे play school

नहीं जी, इतने से काम नहीं चलेगा। जहाँ school जाना शुरू हुआ नहीं कि कुछ ही दिनों में इन छोटे छोटे नौनिहालों पर लादना शुरू किया जाएगा, अपनी महत्वाकांक्षाओं का बोझ। उन्हें पढ़ाई तो गधा बनकर करनी ही है, साथ ही dance, music, games, abacus आदि से भी नहीं बक्शा जाएगा।

फिर जरा और बड़े हुए नहीं, कि दुनिया की tuition, वो कहाँ पीछा छोड़ने वाली हैं। तो लीजिये जो दुनिया भर की extracurricular activities कराई जाती है। उनमें से किसी में अगर बच्चे का मन रम गया है, तो उसे दरकिनार करके अब भागती हुई दुनिया का साथ देने के लिए दिन रात बस पढ़ो, पढ़ो, और पढ़ो। कभी भागते भागते tuition, कभी भागते भागते घर।

फिर बच्चा अपनी ज़िंदगी कब जिये?

जिएगा, ना वो भी आपकी ही तरह, उसके बाद सब कुछ late कर कर के।

आखिर हम सब कुछ balance करके क्यों नहीं चल सकते। पहले हमारे माँ-पापा की सही समय से शादी, फिर सही समय से ही बच्चेहो जाते थे। जिससे बच्चों को बचपन के लिए समय मिलता था।

अब शादी देर से, फिर बच्चे और देर से, पर बचपन ना जाने कहाँ खो गया? क्योंकि फिर हम चाहते हैं, बच्चों का सारा settlement time से हो जाए।  

क्या ऐसा नहीं हो सकता, सब कुछ समय से हो? किस बात की दौड़ है? जबकि सब होना समय से ही है।

क्यों हम बच्चों पर इतना बोझ डालते जा रहें हैं? क्यों उन्हें उनका बचपन जीने नहीं दे रहे हैं? किस बात की इतनी जल्दी है?


ज्यादा अच्छा ना होगा, समय से पढ़ें, समय से नौकरी, समय से शादी, समय से बच्चे।

जिससे उनके होने के बाद कुछ समय उन्हें भी अपने बचपने के लिए मिले। जिसके फलस्वरूप स्वस्थ, संतुष्ट, और सुदृन समाज का गठन हो।

बच्चों को भी उनके होने का एहसास होने दीजिये, इतनी जल्दी किस बात की है? उन्हें अपना बचपन तो जीने दीजिये।


Wednesday, 4 December 2019

Short Stories : दर्द

दर्द

कुछ लड़के, चिड़िया के घोंसले से अंडा गिरा कर बहुत खुश हो रहे थे। आने-जाने वाले तमाशा देख रहे थे, पर कोई कुछ नहीं बोल रहा था।

वही लड़के जब बड़े हुए तो उनके अपराध भी बड़े हो गए, अब बोलने वाले तो बहुत हो गये, पर सज़ा फिर भी नहीं मिली।

 लड़कों के अपराध और बढ़ गये, बात अब लड़कियों की अस्मत से देश की सुरक्षा तक पहुंच गई, क्योंकि वो आतंकवादी बन  चुके थे।

काश पहले दर्द पर ही सज़ा मिल जाती, या सही संस्कार दे दिए जाते, तो सब सुरक्षित रहते।

Tuesday, 3 December 2019

Kids Story : Advay the hero : मधुर संगीत

Advay the hero : मधुर संगीत


Advay के apartment में कुछ-कुछ दिन में एक छोटी सी चिड़िया आती थीवो ऐसे चहकती थीकि लगता था बहुत ही मधुर संगीत बज रहा हो।

इधर कुछ दिनों से चिड़िया का मीठा संगीत रोज़ सुनने को मिल रहा था। तो जिस दिशा से वो संगीत सुनाई देता थाबच्चे उस जगह गए। तो उन्होंने देखाउसने वहीं अपना घोसला बना लिया है। सारे apartment वाले बड़े खुश थेकि चिड़िया वहीं रहने लगी थीक्योंकि अब सब की सुबह उसके मीठे संगीत से होती थी।
कुछ दिन बाद वो और सुरीला चहकने लगी थी, building से उसका घोसला दिखता थातो बच्चों ने देखा उसके घोसले में अंडे थे।
अब तो वो बच्चे वहीं नीचे ही खेलतेओर उसके बच्चे के निकलने का इंतज़ार भी कर रहे थे।
कुछ दिन से चिड़िया ने गाना बिल्कुल ही छोड़ दिया। बच्चे सोचने लगेआखिर वो क्यों नहीं गाना गाती है?
सब उसके घोसले में झाँकने लगेउसमें एक भी अंडा नहीं थाना ही बच्चे थे।
सब सोचने लगे कि आखिर क्या हुआअंडे भी नहीं हैंऔर बच्चे भी नहीं हैं?
Advay ने notice किया कि उसका एक दोस्त जतिन जो कि बहुत बदमाश थाउसको छोड़कर बाकी सब दुखी थे। और चिड़िया भी जतिन को देखकर डर से चीं-चीं करने लगती थीवो समझ गयाकि हो ना हो इसने ही कुछ गड़बड़ की है।
अब सच्चाई का पता लगाना थाउसके लिए वो idea सोचने लगा। उसने जतिन  से कहाआजकल वो चिड़िया गाना नहीं गा रही हैतो मैंने अपने पापा से वैसी चिड़िया लाने को कहा हैपर पापा बोलेउस चिड़िया का हमे नाम नहीं पता है।
अभी वो डरी हुई हैइसलिए उसकी फोटो भी नहीं खींच सकते हैं। कहीं से उसका अंडा मिल जाता तो उसे दिखाकर दुकानदार से बहुत सारी चिड़िया ले आते। पर चिड़िया का अंडा लेना तो बहुत साहस का काम है।
जतिन बोलामैं तुम्हारे जैसा डरपोक नहीं हूँ। मैंने ही उस चिड़िया के तीनों अंडे निकाल लिए थेजिसमें से दो तो उसी समय फोड़ दिये। अंडे फोड़ते समय मुझे बहुत मज़ा आयाउसमें से पीले रंग का पानी निकल रहा था।
अच्छा और तीसरे का क्या कियावो!..... वो तो मैंने अपने पास रखा हैमैं उसमें से चिड़िया निकालूँगाऔर उसे अपने पास बड़ा करूंगा।
ओह! जतिन ये तुमने क्या कियातभी वो चिड़िया तुमसे डरती हैऔर गाना भी नहीं गाती।
तो क्या हुआजब मैं उस अंडे से चिड़िया निकालूँगातब वो गाना गाएगी।
नहीं जतिनतुम उसकी माँ जैसे नहीं बन सकते। माँ की जगह कोई नहीं ले सकता।
क्या तुम उसके बच्चे को अपने मुँह में कीड़ा भरकर खिला सकते होउसकी चोंच में अपने होंठ से पानी डाल सकते हो?
जतिन बोला कीड़े!...... छिः-छीःकैसी बात कर रहे होकीड़े मुँह में कैसे ले सकता हूँ। advay बोला- क्यों तुम्हें तो चिड़िया की माँ बनना है ना?
नहीं!....... नहीं बनना।
अगले दिन जब चिड़िया खाना लेने गयी थीतो advay ने जतिन से अंडा लेकर उसके घोसले में रख दिया। जब चिड़िया लौटीतो वो अंडे को थोड़ी देर तक देखती रहीफिर अपना घोसला तोड़कर चली गयी।
Advay को ये देखकर बहुत दुख हुआ। उसने अपनी माँ को सारी बात बताईवो बोलींचिड़िया अपने घोसले से हटे अंडे को फिर नहीं सेती है। पर वो कुछ दिन बाद फिर आएगीक्योंकि उसको एक अंडा वापिस मिल गया था।
कुछ दिन बाद वो चिड़िया फिर आईउसने फिर घोंसला बनायाऔर अबकी बार पाँच अंडे दिये। advay ने सारे दोस्तों से कहाअबकी बार हम सब इसके अंडे की निगरानी करेंगेजिससे कोई इसका अंडा ना तो तोड़ेना चोरी करे।
जतिन भी अबकी बार अंडे नहीं लेना चाहता थाक्योंकि advay ने उसे बताया थाकि फिर कीड़े मुँह में भरकर खिलाने होंगे।
कुछ दिन बाद चिड़िया के बच्चे हुएसारे ही मिलकर चहकते तो संगीत और मधुर लगता था।
एक दिन जतिन, advay के पास गया और बोलातुमने मुझे सिखा दिया कि किसी को तंग करने या मारने से नहींबल्कि उसकी रक्षा करने से मधुर संगीत सुनाई देता है।
धीमे-धीमे वहाँ बहुत सारी चिड़िया हो गईंऔर रोज़ उनके apartment में सुबह-शाम मधुर संगीत सुनाई देता।