Tuesday, 18 February 2020

Stories of Life: कोकिला (भाग - 4)

और कोकिला (भाग - 3) के आगे....

कोकिला - (भाग - 4)


अंधा! भास्कर अंधा है? कभी तो ऐसा नहीं लगा, सब काम perfectly करता है। नहीं शायद अंधा ही है, मुझे देख नहीं सकता, शायद इसलिए मुझे beautiful girl कहता है।

ना जाने कितने सवाल एक साथ कोकिला के मस्तिष्क में घूम गए।

भास्कर, कोकिला की तरफ मुड़ा, तुम राहुल की बात का बुरा मत मानना। वो जलता है मुझसे, तभी तुमको भी उल्टा-सीधा बोल गया।

मैंने बुरा नहीं माना, मुझे तो दोस्त भी भूतनी बुलाते थे, मैं हूँ ही इतनी काली और कुरूप। एक आप ही हैं, जो मुझे beautiful girl बुलाते थे, आज पता चला क्यों?

क्यों? भास्कर ने पूछा।

आप देख नहीं सकते ना, इसलिए।

किसने कहा, मैं देख नहीं सकता? मैं देखता हूँ मन की आँखों से, तुम सच में बहुत सुंदर हो। जिसने भी तुम्हारा नाम कोकिला रखा है, बिल्कुल सही रखा है, तुम कोयल से भी मीठा गाती हो। 

मैं तुम्हें ऊंचाइयों पर ले जाऊँगा, इतनी ऊंचाइयों पर जहाँ से तुम सबको सुंदर लगोगी। क्या तुम मेरा साथ दोगी?

भास्कर की बातों ने कोकिला में गजब का आत्मविश्वास भर दिया था।

दोनों का concert start हुआ तो उसकी देश विदेश में धूम मच गयी। stage में जाने से पहले कोकिला का भरपूर make-up होता।

अब कोई उसे भूतनी ना कहता, सब उसकी आवाज़ के दीवाने थे।

दोनों में प्यार हो गया।

एक दिन भास्कर के पास एक doctor आए, वे बोले, मैं आपकी आँखों का operation कर सकता हूँ...

आगे पढ़ें कोकिला (भाग - 5) में...

Monday, 17 February 2020

Stories of Life : कोकिला- (भाग-3)

 कोकिला - (भाग-1) और   

 कोकिला - (भाग-2) के आगे...

 कोकिला - (भाग-3) 

Beautiful girl! सुनकर कोकिला फिर से सकपका गयी, मेरी!.. मेरी किस लिए?

मैं एक concert करना चाह रहा था, जिसमें मुझे तुम्हारी जैसी मीठी आवाज़ ही चाहिए थी। तुम मेरी student नहीं बनना चाहती हो, कोई बात नहीं। क्या मैं तुम्हें join कर सकता हूँ। कोकिला ने इसकी स्वीकृति दे दी।

अब तो भास्कर और कोकिला आए दिन साथ साथ रहते। इससे college की बाकी सब लड़कियाँ बहुत जलती थीं।

एक दिन भास्कर कोकिला को अपने concert वाली जगह ले गया। वहाँ उसे अपना competitor राहुल मिल गया। राहुल कोकिला को देखकर बोला, क्या भास्कर कोई और नहीं मिली, एक अंधा, एक भूतनी, क्या जोड़ी बनी है। कोई नहीं आ रहा तेरे concert में।

भास्कर बोला, तुझे जो देखना था, तूने देखा। मेरी तो ये beautiful girl है, और तू देखना, मेरा show house full जाएगा।

अंधा! भास्कर अंधा है? कभी तो ऐसा नहीं लगा, सब काम perfectly करता है।  नहीं शायद अंधा ही है, मुझे देख नहीं सकता, शायद इसलिए मुझे beautiful girl कहता है।

ना जाने कितने सवाल एक साथ कोकिला के मस्तिष्क में घूम गए...

Sunday, 16 February 2020

Stories of Life : तृप्ति

तृप्ति


आज 25 साल बाद, देहरादून की हंसी वादियों में आस्था और सुगंधा की मुलाक़ात हो गयी,
आस्था पहले के ही समान दुबली-पतली, लंबे घने बालों की लहरती चोटी, माथे में लाल बिंदी, simple से सलवार सूट में भी बड़ी सुंदर दिख रही थी,
जबकि सुगंधा ने अच्छा खासा weight put on  कर लिया था, jeans top, short haircut में थी।

सुगंधा ने आस्था को तुरंत पहचान लिया, उसको पहचानते ही वो आस्था की ओर चल दी, आस्था के पास आते ही वो आस्था के गले लग गयी। आस्था को सुगंधा को पहचानने में थोड़ा वक़्त लगा, पर पहचानते ही, बस फिर क्या था, दोनों की ढेरों बातें शुरू हो गयी।

दोनों ही D.U. की पढ़ी हुई थीं। आस्था वहाँ की topper थी, सुगंधा भी पढ़ाई में second स्थान पर थी। सुगंधा हमेशा आस्था से आगे निकलने का प्रयास करती रहती थी, इसलिए जब उसकी अच्छी job लगी थी, वो तब से ही आस्था से मिलने के लिए आतुर थी।
आस्था से मिलते ही उसने सब से पहले उससे यही पूछा, तुमने कौन सी job join की?

आस्था ने बड़े ही सधे शब्दों में कहा – अपने बच्चों के भविष्य निर्माण की।

मतलब!

मैंने अपनी सफलता की ऊंचाइयों के बदले अपने बच्चों की सफलताओं को चुना है।

अरे यार, क्या पहेलियां बूझा रही हो, क्या कर रही हो साफ साफ बताओ, सुगंधा खीजते हुए बोली।
I am home maker- आस्था ने बताया।

ओह, तो तुम house wife हो! तुमने तो अपना जीवन ही बर्बाद कर लिया। तुम भूल गयी तुम DU topper हो, तुम्हें तो कोई भी job मिल सकती थी, तुम आज किसी company की MD/CEO होती। तब तुमने ऐसा क्यों किया, तुम्हारे husband का decision है? बहुत पुराने ख्यालत के हैं क्या? ये सारा सुगंधा एक ही सांस में बोल गयी।

अरे अरे रुक जा सुगंधा, सब बताती हूँ तुझे। यहीं पास में मेरा घर है, चल वहीं चलते हैं, तेरी पसंद के पकौड़े और coffee बनातीं हूँ, वहीं तेरे सारे सवालों के जवाब भी दे दूंगी।

आस्था का घर बहुत ही सुंदर, सुव्यवस्थित था। घर का एक एक समान बहुत सोच समझ के लिया हुआ लग रहा था, घर में घुसते ही भीनी भीनी सी सुगंध आ रही थी, जैसे किसी मंदिर में प्रवेश कर रहे हों। अंदर आते ही बहुत शांति और तृप्ति का एहसास हो हा था

अभी उन लोगों ने प्रवेश किया ही था, कि अंदर से.......

आगे पढ़ें तृप्ति (भाग-2) में