Wednesday, 18 March 2020

Stories of Life : अनोखा तोहफ़ा


अनोखा तोहफ़ा


अभिषेक और अनीता की शादी तय हो गयी थी, courtship period चल रहा था। किसी की भी ज़िंदगी के सबसे हसीन पल होते हैं courtship period, सपनों की दुनिया से भी ज्यादा खूबसूरत। उनके भी थे, नया-नया mobile चला था, तब whatsapp नहीं हुआ करता था। call and sms का ज़माना था।

दोनों ही बहुत कलाकार आशिक थे, तो उनके sms में, प्यार की मीठी नोकझोंक, शायरी, फिल्मी songs, या कभी ऐसे sms भी होते थे, कि पढ़कर लगे कि साथ ही रह रहे हैं, ऐसे dialogue भी होते थे। पर उनके sms में ऐसी कोई बात नहीं होती थी, कि कोई दूसरा पढ़े तो शर्म से तार-तार हो जाए।

अनीता तो अपने sms कभी भी अपनी बहन और माँ को पढ़वा देती थी। कहीं कुछ ढका-छुपा नहीं था। वैसे अभिषेक इस बात से अंजान था, कि उनके बीच की प्यार की बातों का आनन्द पूरा घर ले रहा था।

4 महीने का हसीन पल कब ख़त्म होने को आ गया पता ही नहीं चला, आखिरी के दिनों में अभिषेक अनीता से बोला, हमारा courtship period ख़त्म होने को आ गया है, तो मैंने सोचा है, तुम्हें बहुत ही अनोखा तोहफ़ा दूँगा, जो तुम्हें बहुत ही अच्छा लगेगा।

अब तो अनीता तोहफ़े में ना जाने क्या-क्या हसीन ख़्वाब सजाने लगी, खूब बड़ा rose bouquet, ख़ूब सारी chocolates, कोई सुंदर-सी dress, या शायद सोने या diamond का set
अनीता रोज़ ही पूछने लगी, कब भेजोगे, और अभिषेक हमेशा कहता थोड़ा सब्र कर लो।

अब शादी को सिर्फ चार दिन बचे थे, तो अभिषेक बोला, अब तो 
हम दोनों के घरों में मेहमान आने लगेंगे और rituals भी शुरू हो जाएंगे, तो मैंने तुम्हें तुम्हारा तोहफ़ा...

आगे पढ़ें, अनोखा तोहफ़ा (भाग- 2) में...

Tuesday, 17 March 2020

Article : गर्व से कहें, हम हिन्दुस्तानी

गर्व से कहें, हम हिन्दुस्तानी

सच है, जिन्दगी तब तक है, जब तक हम जिंदा हैं।

अरे, नहीं जनाब, हमारे कहने का यह मतलब कतई नहीं है कि आप, तब तक जिंदा हैं, जब तक आप की आत्मा आप के अन्दर है।

नहीं, बिल्कुल भी नहीं, बहुतों को हम ने सब ठीक होने के बाद भी मरे के सामान देखा है।

हमारे कहने का अर्थ है, जब तक आप जिंदादिल रहते हैं, तब तक यमराज भी सामने खड़े हों, ले नहीं जाते हैं।

और आप को पता है, जो जिंदादिल होते हैं, उनके सामने ही कठिन परिस्थितियां घुटने टेकती हैं।

अब सांच को आंच क्या!

जिस कोरोना virus से पूरे विश्व में सब डर रहे हैं, वहीं अपने India में, उस पर jokes, songs, poems, stories and articles लिखे जा रहे हैं। 

घर-घर में लोग घरेलू उपचार बता रहे हैं, कोई लौंग, इलाइची, कपूर, जावित्री रखने को बोल रहा है, तो कोई प्याज़ में नमक डालकर खाने की सलाह दे रहा है।

कोरोना भी सोच रहा होगा, India वालों को बस topic मिलना चाहिए, बाकी ग्रन्थ, उपन्यास, jokes, songs वो सब बना सकते हैं। घरेलू उपचार भी हर बड़ी बीमारी का होता है।

शायद, भारत एक मात्र ऐसा देश है, जहाँ डर से मिली छुट्टी को लोग enjoy कर रहे हों, और जिन्हें नहीं मिल रही है, वो कुढ़ रहे हों।

इसी कारण कोरोना ने भारत में घुटने टेक दिए हैं।

हम भारतवासियों के लिए यह गर्व की बात है कि भारत में कोरोना virus से संक्रमित रोगियों का उपचार किया जा रहा है, और वह पूर्णतया स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त कर रहे हैं।

भारत में कोरोना पर बहुत जल्दी नियंत्रण पा लेने का बहुत अधिक श्रेय मोदी जी को है।

उनकी दूरदर्शिता के चलते ही school, college, offices, malls, cinema halls close कर दिए गए, जिसके चलते स्थिति में नियंत्रण पाना संभव हो पा रहा है।

साथ ही कोरोना से यह भी सिद्ध हुआ है कि भारतीय संस्कृति ही सर्वश्रेष्ठ है।

लोगों से मिलने पर नमस्कार करना ही सबसे ज्यादा उचित है, ना कि बात बात पर हाथ मिलाना, एक-दूसरे को touch करना।

वहीं अंतिम संस्कार में भी भारतीय संस्कृति का अग्नि दाह-संस्कार ही सर्वोपरि माना गया है।

आज जहाँ-जहाँ भी दफनाने की प्रक्रिया थी, सब जगह अग्नि दाह-संस्कार किया जा रहा है।

तो आप गर्व किजिए, आप सबसे अच्छे देश और सबसे अच्छी संस्कृति से जुड़े हैं।

और इसके उत्थान में सहयोग प्रदान कीजिए।

इसका विकास और विस्तार कीजिए और गर्व से कहें कि हम हिन्दुस्तानी हैं।

जय भारत, जय भारती 🙏

Monday, 16 March 2020

Short Stories : नाना जी का चश्मा


नाना जी का चश्मा 

हाँ तो कहानी कुछ यूँ है, कि हमारा बचपन आजकल जैसा तो था नहीं, कि बस पूरी ज़िंदगी अकेले में gadgets के साथ गुज़ार दी।

गर्मी की लंबी छुट्टियाँ हुआ करती थी, जिसमें कभी दादी, कभी नानी के घर जाया करते थे। तो बस, हम खूब सारे बच्चे, दिन-दिन भर मस्ती में गुजार दिया करते थे।

जब हम नानी के घर जाते थे, तो हम बच्चों की धमा-चौकड़ी 
नाना जी के इर्द-गिर्द हुआ करती थी, क्योंकि वो बहुत मस्त थे, तो हमारी मस्ती से गुस्सा नहीं होते थे। बाकी बड़ों से ज्यादा उधम करने पर डांट पड़ जाती थी।

पर नाना जी की एक आदत थी, कि वो अपना चश्मा यहाँ- वहाँ रखकर भूल जाया करते थे, तो बस आए दिन चट्ट...... की आवाज़ होती, और हम सब में किसी एक की कान खिंचाई.......

इस कारण से बच्चे बहुत परेशान रहते, साथ ही जब तक टूटा चश्मा बन नहीं जाता, नाना जी को भी परेशानी झेलनी पड़ती।

पर नाना जी जितने मस्त-मौला थे, उससे बहुत ज्यादा बुद्धिमान भी।

तो उन्होंने ऐसी युक्ति निकली, कि अब ना तो उनका चश्मा टूटता था, बल्कि उन्हें बहुत जल्दी मिल भी जाता था।

अब आप सोच रहे होंगे, ऐसी भी क्या युक्ति निकली?

कुछ नहीं, बस उन्होंने ऐलान कर दिया, अब से उनका चश्मा जिससे टूटेगा, वो ही चश्मा बनवाएगा। और अगर किसी बच्चे से टूटेगा तो....., उसकी कान खिंचाई नहीं की जाएगी, बल्कि उसके मम्मी-पापा बनवाएंगे। और बाद में जब भी बच्चे के पास पैसा इक्कठा होगा, उससे ले लिया जाएगा।

दरअसल जब भी कोई मेहमान घर से जाता था, तो हम बच्चों को दस-पाँच रुपए देकर जाता था, वही हमारी कमाई होती थी। पर यकीन जानिए बहुत कमाई हो जाती थी, क्योंकि मेहमानों का तांता लगा ही रहता था।

हाँ जी, तो उस ऐलान से हुआ यूँ, कि हम बच्चे तो बच्चे, बड़े भी उनका चश्मा संभाल कर रखने लगे। जिससे अब नाना जी का चश्मा उनको हमेशा मिल जाता था, टूटता नहीं था, और न ही होती थी हम बच्चों की कान खिंचाई....... 

तो अब चश्मे के टूटने की चिंता से सब मुक्त थे, या यूँ कहें, अब नाना जी को छोड़, बाकी सबको नाना जी के चश्मे की चिंता रहती थी।

तो जय हो नाना जी की ..........