Friday, 23 April 2021

Article : Election आखिर क्यों?

 Election आखिर क्यों?



मैं BJP सरकार की बहुत बड़ी supporter हूँ। क्योंकि यही एक ऐसी सरकार है, जिसने निज हित से पहले देश के लिए सोचा है।

एक से एक महान कार्य किए - 

राम मंदिर

370 article 

3 तलाक 

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ 

राफेल

घर घर गैस सिलेंडर पहुंचाना

गांवों का विकास 

Lockdown

Safety के  लिए exam रद्द

हिन्दुत्व को प्रोत्साहन, आदि......

बहुत से महान किए हैं।

तब election को लेकर आखिर क्यों, मोदी जी, इतने निर्मोही हो गये?

क्यों उन्हें नहीं दिख रहा है खूनी मंजर।

जिसकी भी election में duty लग रही है, हरेक corona की चपेट में आ रहा है। कितनों का तो जीवन भी शेष हो जा रहा है।

आखिर क्यों है election जरुरी, जीवन से भी ज्यादा?

जब इतने बड़े बड़े कार्यों को रोक दिया गया है या online शुरू कर दिया है, तो election के लिए इतना हड़बड़ी क्यों?

क्या उसे चंद दिनों के लिए स्थगित नहीं किया जा सकता है।

या उसके लिए कोई online type arrangment नहीं किया जा सकता है?

क्यों election में duty देने वालों और vote देने जाने वालों के जीवन से खेला जा रहा है? मेरी समझ से यह सब परे है।

मोदी जी, आप का देशवासियों के लिए प्रेम, देखते हुए आप से अनुरोध है कि इस आकरण संकट को समाप्त करें। 

चाहे तो election स्थगित कर दीजिए, अन्यथा online type arrangment करवा दिया जाए।

प्रजा होगी, तभी राजा रहेगा। वरना लाशों के ढेर पर तो सत्ता भी नहीं चलेगी।

भारत, बहुत उम्मीद से BJP को सत्ता में लेकर आया है, बहुत से कार्यों में यह सिद्ध भी हुआ है। तो बाकी कार्यों में भी यह ध्यान में रखा जाए, ऐसा निवेदन है।

Thursday, 22 April 2021

Poem: पृथ्वी दिवस

पृथ्वी दिवस



जिंदगी रुकी रुकी हमारी,

पर वक्त बदलता जाता है।

एक-एक करके हर,

त्यौहार निकलता जाता है।।


जी रहे थे, इस गुमान में,

सब है हमारी मुट्ठी में।

हर क्षण पता यह चलता है,

सब रेत सा फिसलता जाता है।।


धरा है कितनी सुंदर,

जिसने कितना कुछ है दिया।

अतिशय पाने की कामना में,

इंसान ने सब कुछ तबाह किया।।


काटे वृक्ष, नदियाँ पाटी,

हरियाली को मिटा दिया।

कंक्रीट की दुनिया की खातिर,

सब कुछ ही स्वाहा किया।।


जिसकी जो तासीर है,

वो, वही तो देता है।

कंक्रीट की दुनिया,

सबको पत्थर बना देता है।।


इस महामारी ने शायद,

तुमको कुछ बताया हो?

है प्राणवायु कितनी आवश्यक,

तुमको समझ में आया हो?


अब तो समझो सपूत मेरे,

अब तो कुछ ध्यान दो।

धरा हो हरी-भरी,

इसके लिए योगदान दो।।


करो वृक्षारोपण,

ना हो नदियों का शोषण।

जीवन है केवल इससे,

हो हरियाली का प्रत्यारोपण ।।


आओ हम सब मिलकर,

जीवन को सुखमय बनाए।

पृथ्वी दिवस पर हम सब, 

एक-एक वृक्ष लगाएं।।


Happy Earth Day to all of you🌍


Wednesday, 21 April 2021

Poem : श्री राम जय राम जय जय राम

 आज आप सब के साथ मुझे आगरा की उत्कृष्ट साहित्यकार व संस्कृत और हिन्दी की प्रकांड विद्वान श्रीमती गीता लाल जी की कविता को साझा करते हुए अपार प्रसन्नता हो रही है।

प्रभु श्रीराम जी के जन्मोत्सव, रामनवमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏🏻🌹💐🕉️

प्रभु श्रीराम जी, कोरोना रूपी महामारी से हम सभी की रक्षा करें।

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया,

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुख भागभवेत....🙏🏻🕉️


अपनी कविता के माध्यम से गीता जी ने, भगवान श्रीराम जी के अवतरण व प्रभु श्रीराम जी की महानता से जुड़े कुछ क्षणों का बखूबी वर्णन किया है। आइए, हम सब उनके साथ प्रभु श्रीराम जी की भक्ति में लीन होकर, कविता का आनन्द लें।


श्री राम जय राम जय जय राम




दिग् दिगंत में गुंजारित 

हो रहा राम का यशगान,

श्री दशरथ, माँ कौशल्या के, 

राजप्रसाद में, अवतरित हुए श्री राम।


तिथि थी नवमी, मास था

 मधुमास का, प्रकृति का वरदान।

सहज सुन्दर सुभग श्यामल 

अति सौन्दर्यवान थे, प्रभु श्रीराम।


थे पूर्ण पुरुष, सत्य सनातन, 

परम मर्यादित, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम।

अति करुणावान थे प्रभु, 

परम कृपा निधान, 


तभी तो जग में, 

कहलाए 

भक्त वत्सल, 

शरणागत वत्सल श्री राम।


शबरी के उच्छिष्ट बेर, 

खाकर दिया था, 

भक्ति मुक्ति का दान।


पति से शापित अहिल्या का, 

चरण कमल स्पर्शित करा, 

किया कल्याण।


रावण प्रताड़ित विभीषण को 

शरण देकर, दिया अभय दान।

राजतिलक कर, लंकेश संबोधित कर,

 उसका बढ़ाया मान।


आदर्श पुत्र थे, शासक आदर्श, 

न्याय प्रिय थे परम महान,

 श्री राम के न्याय का 

करते सभी बखान।


राम नाम है अति पावन, 

अभिमत फलदाता, 

उल्टा राम नाम जपते जपते, 

वाल्मीकि बने, आदि कवि महान।


सकल सुमंगल दायक,

 श्री रधुनायक श्री राम।

जय श्री राम जय श्री राम, 

नहीं उनके कोई समान।


जय श्री राम जय श्री राम, 

राम राम श्री राम।