Friday, 14 January 2022

Recipe : Til Gud Laddoo

शरद ऋतु में होने वाले सभी त्यौहारों में तिल के लड्डू का विशेष महत्व होता है। फिर चाहे वो लोहड़ी पर्व हो, मकर संक्रांति पर्व हो या सकट पर्व हो। सब में ही तिल के लड्डू का प्रसाद बनाया जाता है।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि, यह लड्डू जितने tasty होते हैं, उतने ही healthy भी। 

भारत के लगभग सभी प्रांतों में जनवरी माह में तिल के लड्डू बनाए जाते हैं। 

जिसमें तिल और गुड़ तो सभी लोग डालते हैं, हाँ प्रांत के अनुसार, इन्हीं लड्डूओं में कहीं मूंगफली, कहीं नारियल, कहीं काजू, बादाम, गुलाब की पंखुड़ियों, आदि डालकर भी बनाया जाता है।

पहले तो यह घर-घर में बनाए जाते थे, पर अब तो बाजार से ही मंगवा लिया जाता है। कोई बनाना भी चाहे तो उसे इसे बनाना नहीं आता है। 

इन लड्डुओं को बनाने की recipe आपको बहुत मिलेगी, पर उस तरह से बनाने से लड्डू, ज़्यादातर कड़े बनते हैं। जिससे उन्हें खाना भी एक बड़ी चुनौती या समस्या बन जाती है।

तो चलिए आज इसकी authentic recipe ही share कर देते हैं। इनको बनाना बहुत easy है, साथ ही यह ऐसे बनेंगे कि कोई भी एक खाकर, दूसरा मांगे बिना नहीं रहेगा।

तिल-गुड़ लड्डू



Ingredients :

White Sesame seeds - 300 gm.

Jaggery - 250 gm.

Green cardamom - 3 to 4.

Clarified butter (ghee) - 1 tbsp.


Method :

  1. तिल को अच्छे से साफ करके, धोकर सूखने के लिए फैला दीजिए।
  2. एक heavy bottom wok(कड़ाही) लीजिए। 
  3. सूखे हुए तिल को धीमी-धीमी आंच पर 3 to 5 minutes तक लगातार चलाते हुए हल्का सा भून लीजिए।
  4. गुड़ को मोटा-मोटा (coarsely) काट लीजिए।
  5. अब mortar and pestle, इमाम दस्ता या ओखली व मूसल, जो भी आप के पास हो, उसमें गुड़ और तिल डालकर दोनों को अच्छे से कूट लीजिए। 
  6. इसे तब तक कूटना है, जब तक गुड़ और तिल मिल ना जाएं, साथ ही गुड़ कूटने से ऐसा soft हो जाएगा कि आप इससे लड्डू बना सकेंगे। 
  7. अब तिल और गुड़ mix को निकाल कर उसमें cardamom seeds और घी मिला दीजिए।
  8. अब हाथों में हल्का-सा घी लगाकर तिल-गुड़ mix से लड्डू बना लीजिए।

Now, mouth melting, healthy and tasty Til gud laddoo is ready to serve. 


Tips and Tricks :

  • कूटकर बनाने से लड्डू कड़े नहीं बनते हैं। 
  • अगर आप को मूंगफली, काजू और बादाम आदि भी डालना है, तो उन्हें भी भूनकर ही डालिए।
  • गुलाब की पंखुड़ियों को भी लड्डू बनाते समय डालते हैं।
  • आप cardamom seeds को दरदरा पीस कर या महीन पीस कर भी डाल सकते हैं।
  • भूनने से, taste and aroma, दोनों ही enhance हो जाते हैं, साथ ही लड्डूओं की shelf life भी बढ़ जाती है।
  • आप तिल और गुड़ की quantity दोनों को अपने taste के according कम ज्यादा कर सकते हैं।
  • तिल भूनते समय ध्यान रखिएगा कि उसे लगातार चलाते हुए भूनें, अन्यथा तिल बहुत जल्दी जल जाते हैं। 
  • अगर तिल जल जाते हैं, तो उससे बने लड्डू कड़वे लगेंगे। अतः अगर तिल जल गये हैं तो उससे लड्डू ना बनाएं।
  • आप तिल को बिना भूनें भी लड्डू बना सकते हैं। पर भुने हुए तिल से बने लड्डू ज्यादा सौंधे बनते हैं। जिससे उसका taste भी enhance होता है और लड्डू की shelf life भी increase होती है।
  • आप सफ़ेद की जगह काले तिल भी use कर सकते हैैं, पर याद रखियेगा कि काले तिल में बहुत धूल होती है। अतः इन्हें अच्छी तरह से धोकर साफ करना बहुत जरूरी है, वरना लड्डू किसकिसाने लगेगा। जिससे आपकी सारी मेहनत बर्बाद हो जाएगी। 
  • यह लड्डू आप की immunity boost करेंगे तो यह आप को corona virus से भी बचाएगा।

बस तो अब सोच क्या रहे हैं, आज ही बनाएं, तिल-गुड़ के स्वादिष्ट लड्डू और पूरे परिवार को healthy बनाएं।  

तिल-गुड़ लड्डू को जनवरी माह में आने वाले सभी त्यौहार में क्यों बनाते हैं? और तिल-गुड़ लड्डू के health benefits क्या हैं? किस तरह के patience के लिए, तिल-गुड़ लड्डू रामबाण औषधि के समान हो जाएगा, अगर आप भी यह सब जानना चाहते हैं तो मकर संक्रांति पर click करें।

आप सभी को लोहड़ी, मकर संक्रांति पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏🏻

Tuesday, 11 January 2022

Article : मोदी जी की पंजाब रैली???

मोदी जी की पंजाब रैली???




मोदी जी का पंजाब रैली से वापसी, एक बहुत बड़ा सवाल बन गया है...

हर party उसको अलग-अलग तरह से present कर रही है।

BJP वाले बोल रहे हैं कि मोदी जी की सुरक्षा व्यवस्था में बहुत बड़ी चूक की गई है। मोदी जी की जान को दांव पर लगाया गया था।

वहीं कांग्रेस वाले बोल रहे हैं कि ऐसा कुछ नहीं है, जब मोदी जी का किसी तरह का अनिष्ट ही नहीं हुआ, तो किस बात की चूक? 

वहीं कुछ यह भी कह रहे थे कि प्रधानमंत्री जी के काफिले को, एक बार 20 minutes खड़े रहना पड़ा, तो कौन सी बड़ी बात हो गई? आम आदमी को तो कितनी बार इससे ज्यादा देर भी खड़े होना पड़ता है।

इस तरह की और भी बहुत सी बयानबाज़ी की जा रही है...

आप लोगों का क्या सोचना है? 

अगर BJP की बात पर ध्यान दिया जाए तो वो पूरी तरह से ग़लत नहीं हैं, क्योंकि जहाँ मोदी जी के काफिले को रुकना पड़ा था, वहाँ से पाकिस्तान border लगभग 30 km दूरी पर था और यह सर्वविदित है कि पाकिस्तान हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है और हमेशा हमारे देश, भारत को खतरा पहुंचाने और उसे नीचा दिखाने को तत्पर रहता है। 

तो उनकी काफ़िले का रुकना, उनकी जान से एक तरह का दांव खेलना तो था ही....

फिर, जिसने देश की सुरक्षा को इतना सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो, ऐसे इंसान की अपने ही देश में, सुरक्षा में कमी, क्या किसी विडंबना से कम है?

अब कांग्रेस की बात देखते हैं, वो कह रहें हैं कि कुछ अनिष्ट तो नहीं हुआ, फिर चूक की क्या बात है?

तो क्या अनिष्ट हो जाने के बाद ही यह माना जा सकता है कि सुरक्षा में चूक हुई है? क्या संभावना होने पर उसे चूक नहीं माना जा सकता है?

अगर अनिष्ट होता, तो क्या हो सकता था?

काफ़िला आगे बढ़ता और किसानों से झड़प होती तो कुछ लोग मर जाते, जिससे देश में कोहराम मच जाता।

या, भगवान ना करे, पर कुछ अनिष्ट मोदी जी के साथ हो जाता, तो देश में गृहयुद्ध छिड़ जाता या इंदिरा गांधी जी के मरणोपरांत जैसा दृश्य तो हो ही जाता।

दोनों ही सूरत में बड़ा अनिष्ट ही होता, जो देश के लिए किसी भी तरह से हितकर नहीं है।

ऐसे में कांग्रेस का कहना किस हद तक सही है, यह तो आप सभी समझ रहे होंगे...

अब बात करते हैं उनकी जो कह रहे हैं कि, "एक बार 20 minutes खड़े रहे तो कौन सी बड़ी बात हो गई? आम आदमी को तो कितनी बार इससे ज़्यादा देर भी खड़े होना पड़ता है"...

वैसे आम आदमी को तो छोड़ दीजिए, यह सोचिए आम मंत्री के काफिले को कितनी देर खड़े रहना पड़ता है सड़क पर? बिल्कुल भी नहीं...

वैसे तो, एक आम आदमी और मंत्री में ही फर्क होता है, फिर वो तो देश के प्रधानमंत्री हैं।

काम की जिम्मेदारी और जवाबदेही दोनों ही प्रधानमंत्री की सबसे ज़्यादा होती है।

उनका पद, बाकी सब से ज़्यादा ऊंचा होता है, तो उनका सम्मान भी ज़्यादा होगा और उनकी सुरक्षा भी ज़्यादा होनी चाहिए।

वैसे भी देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री केवल किसी एक party के नहीं होते हैं, वो उससे ऊपर होते हैं। ‌वो देश का गर्व होते हैं और उनकी सुरक्षा देश का सम्मान होता है।

इंदिरा गांधी जी, राजीव गांधी जी या मोदी जी, किसी के भी साथ हुई इस तरह से सुरक्षा में  चूक, वो भी अपने ही देश में, निंदनीय है, अशोभनीय है, अस्वीकार्य है...

ऐसा हमारा मानना है, आप का क्या सोचना है बताइएगा ज़रुर...

Monday, 10 January 2022

Poem : ना जाने कब तक....

 ना जाने कब तक....


यह मास्क जब चेहरे से हटेंगे,

दुनिया के रुख बदल चुके होंगे,

किसी का बचपन गुजर चुका होगा,

कहीं जवानी ढल चुकी होगी।

कहीं रौनक-ए-बहार होगी,

कहीं ढल चुकी बयार होगी,

शायद कुछ चेहरे,

इतने भी बदल जाएं कि,

वो पहचान में भी ना आएं।

ना जाने कब तक हमें,

यूं कैद में रहना होगा,

ना जाने कब तक,

अपनों के बिना जीना होगा।

ना जाने कब तक हमें हसरतें,

यूं सीने में दबानी होगी,

ना जाने कब तक मास्क को,

अपनी निशानी बनानी होगी,

ना जाने कब तक....।।