Monday, 7 February 2022

Article : लता दी, एक स्वर युग...

 लता दी, एक स्वर युग...



लता दी, भारत की स्वर कोकिला, जिनकी सुरीली आवाज़ से भारत गूंजायमान हो गया था। उनका शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया है, पर उनके स्वर और सुरीली आवाज़, भारत के कण-कण में समाहित थे, हैं और रहेंगे।

उनके पिता जी‌ (दीनानाथ मंगेशकर) बहुत बड़े मराठी theatre actor, Hindustani classical vocalist थे। उनके पास बहुत से शिष्य, संगीत का ज्ञान लेने के लिए आते थे। एक बार एक शिष्य को पिता जी, बहुत ही कठिन, राग पूरिया धनाश्री (जो कि एक सायंकालीन संधि प्रकाश राग है) सिखा रहे थे और लता दी, जो कि मात्र 5 साल की थी, कमरे के बाहर खड़ी सुन रहीं थीं।

जब पिता जी, किसी काम से बाहर गए, लता दी अंदर जाकर बोलीं, बाबा ऐसे नहीं, ऐसे गाते हैं। पिता जी ने लता दी को पहली बार गाते हुए सुना था। वो बहुत प्रसन्न हुए और तभी से उनकी दीक्षा, पूरिया धनाश्री राग के साथ ही प्रारंभ कर दी।

जब वो 9 साल की थीं, पिता जी के साथ stage performance देने लगीं।

मात्र 13 साल की उम्र में उनके सिर से पिता जी का साया उठ गया। और सम्पूर्ण परिवार की जिम्मेदारी उनके नन्हे कंधों पर आ गई। जिसे उन्होंने बखूबी निभाई।

अतः 13 साल की उम्र से ही लता दी ने playback singing शुरू कर दी। 

उस समय से प्रारम्भ हुआ उनका career, 7 दशकों तक बुलंदी पर रहा, उसके बाद, गीतों के गिरते स्तर के कारण, उन्होंने बहुत चुनिंदा गीतों को ही अपनी आवाज़ दी।

लता दी को स्वर कोकिला क्यों कहा गया, उसके पीछे का कारण यह है कि संगीत के प्रति ऐसी लहर आजादी से पहले नहीं थी। उस समय गाने तो लिखे जाते थे लेकिन ऐसा कंठ नहीं था जो इन गानों को एक ऊंचाई दे सके। तब प्रदार्पण हुआ सुर कोकिला लता मंगेशकर का, जिनके गाए गानों में आम आदमी से लेकर अपने क्षेत्र के शिखर पर बैठे हर व्यक्ति तक की भावनाओं को आवाज मिली।

जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ती रही, उनकी आवाज़ का जादू भी दिनों-दिन परवान चढ़ता रहा। उनकी बढ़ती उम्र का प्रभाव कभी भी उनके संगीत के आड़े नहीं आया।

उस आवाज़ में जो कशिश थी, जो अल्हड़ जवानी थी, जो सुरीला सुर था, वो उनके हर गीत को बेमिसाल बनाता था। 

उनके लिए, बड़े-बड़े गायक कहा करते थे कि यह आवाज़ तो कभी बेसुरी होती ही नहीं है।

उनके गाये पहले गीत "पांव लगूं कर जोरी" से अंतिम गीत, "लुका-छिपी" तक के सभी गीतों में उनकी आवाज़ का जादू चढ़ता ही गया।

उनके गीत, हर्ष में, विषाद में, भक्ति में शक्ति में, प्रेम में, परिहास में सभी रंगों में रंगे थे। 

उनके गाए गीतों से बच्चों को सोते से उठाते हैं, "जागो मोहन प्यारे" ईश्वर की प्रार्थना करनी हो तो, " हम को मन की शक्ति देना" बच्चों को शिक्षा देनी हो तो," बच्चे मन के सच्चे", जब उन्हें सुलाना हो, "आ जा रही आ, निंदिया तू आ", जवां हो जाएं तो, " सोलह बरस की बाली उमर को सलाम", "जब प्यार किया तो डरना क्या",मन की तमन्नाओं को उड़ान देनी हो तो, " आज फिर जीने की तमन्ना है", जब दिल टूट जाए तो,"अजीब दास्तां है ये",  बीता ना बिताए रैना,  "तेरे बिना ज़िंदगी से कोई शिकवा तो नहीं", और जब प्यार वापस आ जाए तो, "बाहों में चले आओ", जब देश भक्ति जागे तो"ए मेरे वतन के लोगों", और जब परिपक्वता आ जाए तो, तेरे लिए हम हैं जिए". इसलिए लता दी, आदि भी हैं और अनंत भी... या यूं कहें कि वो अलौकिक हैं।

यही कारण था कि लता मंगेशकर, लता दी बनकर सबके दिलों में उतर गई और सबकी लता दी बनकर उनसे संगीत का मीठा रिश्ता बना लिया।

लता दी हमेशा चप्पल उतार कर ही गीत गाती थीं, उनके लिए गीत गायन, ईश्वरीय भक्ति थी, साधना थी, अराधना थी और जहाँ ईश्वर का साथ हो, वहाँ सफलता सिद्धी बन जाती है

उन्होंने, विभिन्न भारतीय भाषाओं में 30,000 से अधिक गाने गाए हैं। अपने सात दशकों से अधिक के career में उन्होंने ‘जरा आंख में भर लो पानी’, ‘आज फिर जीने की तमन्ना है’, ‘अजीब दास्तान है ये’, तुझे देखा तो यह जाना सनमहमको हमीं से चुरा लो’, "जब प्यार किया तो डरना क्या’, ‘नीला आसमां सो गया’ और ‘तेरे लिए’ जैसे कई यादगार tracks को अपनी आवाज दी है.।मोहम्मद रफ़ी, किशोर कुमार सहित कई singers के साथ उन्होंने कई सदाबाहर गाने दिए।

वह भारत के तीनों सर्वोच्च नागरिक सम्मान (भारत रत्न, पद्म भूषण और पद्म विभूषण) सहित तीन राष्ट्रीय और चार फिल्मफेयर पुरस्कारों से नवाजी जा चुकी हैं।

उन्हें साल 1989 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। साल 2001 में लता मंगेशकर को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' दिया गया था। 

आज स्वर साम्राज्ञी लता दी, हमारे बीच सशरीर नहीं हैं, पर अगर उन्हें संगीत जगत का स्वर युग कहा जाए, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। 

अपने हजारों गानों के माध्यम से वो अमर आवाज़ हमेशा हम सब के साथ रहेगी, उनकी याद बनकर, उनकी पहचान बनकर...

और उनका जीवन संघर्ष और परिवार के लिए समर्पण, सबको प्रेरित करेगा, सफलता की बुलंदियों को छूने के लिए...

उनके बहुत से अमर गीतों में से:

ऐ मेरे वतन के लोगों...

रहे ना रहें हम, महका करेंगे... 

मेरी आवाज़ ही पहचान है...

इन गीतों ने उन्हें बहुत पहले ही अमर कर दिया था।

आज लता दी, एक स्वर युग को कोटि-कोटि प्रणाम और अश्रूपूरित श्रद्धांजलि 🙏🏻💞

Saturday, 5 February 2022

Recipe : Tehri

बसंतोत्सव, बसंत पंचमी पर्व और सरस्वती पूजा सब एक ही पर्व के विभिन्न नाम है। जो अपनी अलग ही छटा बिखेरता है। माँ सरस्वती की पूजा अर्चना होती है। बसंतोत्सव है तो हर तरफ पीले ही पीले रंग की बहार दृष्टिगत होती है। 

माँ का श्रृंगार पीला, जो पुष्प अर्पित किए जाते हैं वो पीले, भक्तगणों के वस्त्र पीले और चढ़ने वाला प्रसाद भी पीला।

माँ सरस्वती की पूजा अर्चना होती है इसलिए जिन लोगों के घरों में गुरु अराधना होती है, वहाँ इसे गुरु पूजन दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

बचपन से इसमें बनने वाला भोग तहरी, जिसके विभिन्न नाम है, मसाला भात, वेज़ पुलाव आदि..  हमें बहुत पसंद है।

यह जितनी tasty होती है, उतनी ही healthy भी। 

तो चलिए आज ही इसकी recipe share कर देते हैं, और सभी को स्वादिष्ट भोग तहरी का भोज कराते हैं।

तहरी




Ingredients :

  • Rice - 2 bowl 
  • Paneer diced- ¼ bowl
  • Pea - ¼ bowl 
  • Carrot - ¼ bowl 
  • Cauliflower -¼ bowl
  • Potato diced - ¼ bowl
  • Cumin - ½ tsp.
  • Ginger - ½ inch
  • Clove - 2 to 3
  • Black pepper kernels - 6 to 8
  • Cinnamon stick - ½ inch
  • Bay leaf - 1 medium
  • Green Cardamom - 2 to 3
  • Turmeric powder - ½ tsp.
  • Coriander powder - 1tsp.
  • Red chilli powder - ½ tsp.
  • Salt - as per your taste
  • Mustard oil - 3 tbsp.


Method :

  1. Rice को अच्छे से धोकर, भिगोकर रख दीजिए।
  2. Ginger  को chop कर लीजिए।
  3. Pressure cooker में oil डालकर अच्छे से गर्म कर लीजिए।
  4. गर्म तेल में जीरा व अदरक को डालकर गुलाबी भून लीजिए। इसमें सभी खड़े मसाले डालकर भून लें।
  5. अब इसमें सभी सब्जियों और सभी powders, spices (मसाले) व नमक को डालकर भूनें।
  6. चावल से पानी हटाकर निथार लें।
  7. निथरे हुए चावल को pressure cooker में डालकर slow flame पर थोड़ी-थोड़ी देर में चलाते हुए ½ hours तक अच्छे से भून लीजिए।
  8. अब इसमें पानी डाल दीजिए।
  9. Pressure cooker का ढक्कन बन्द करके high flame पर रख दीजिए।
  10. 1 सीटी high flame पर दे दीजिए, फिर पांच मिनट के लिए flame slow कर दीजिए। उसके बाद gas off कर दीजिए।
  11. 7 to 10 minutes में pressure down हो जाएगा।
  12. Serving time में आप तहरी में 2tsp. घी (शुद्ध) ज़रुर से डालें।

Now yummy, tasty tehri is ready. You can serve it with chutney or raita.

Now it's tip and tricks time.


Tips and Tricks :

  • चावल को बहुत देर तक नहीं भिगाएं, अन्यथा तहरी खिली-खिली नहीं बनेगी। 
  • तहरी बनाने के लिए mustard oil ही सबसे अच्छा रहता है, क्योंकि उसी से उसका taste, texture and flavour सबसे अच्छा आएगा।
  • सारी सब्जियाँ एक बराबर सी काटें, इससे तहरी देखने में भी अच्छी लगती है और taste भी uniform रहता है, जो तहरी को लाजवाब बनाता है।
  • गोभी और पनीर के टुकड़े बहुत छोटे मत रखिएगा, वरना वो तहरी में घुल जाएंगे और उनका prominent taste नहीं आएगा। 
  • खड़े गर्म मसालों को अवश्य डालिएगा, इन से तहरी की  tempting aroma enhance होती है। आप चाहें तो खड़े गर्म मसालों को serving से पहले हटा भी सकते हैं।
  • आप चाहें तो इसमें dry fruits जैसे cashews (काजू), almonds (बादाम) और raisins (किशमिश) आदि.. भी add कर सकते हैं। 
  • अगर आप onion and garlic  खाते हैं तो, छौंकने के समय 2 medium size onion को लम्बा काट कर व 4 to 5 garlic cloves को chop करके सुनहरा होने तक भून लें, फिर उसमें खड़े मसाले डालकर भूनें।

  • चावल को भूनने के लिए डालने से पहले पानी अच्छे से निकला हुआ होना चाहिए। वरना तेल में पानी जाने से चावल सब्जियों के साथ अच्छे से भुनेगा भी नहीं और तेल के छींटे आने से हाथ भी जलने का डर रहता है।
  • चावल और सब्जियाँ जितना अच्छे से भुने रहेंगे, तहरी उतनी ही खिली-खिली बनेगी।
  • चावल में पानी इतना डालना है कि चावल और सब्जियाँ डूब जाए। पानी चावल से approx. 1 inch ऊपर रहेगा।
  • ध्यान रखिएगा कि पानी की quantity proper रहनी चाहिए। पानी कम होने से तहरी जल जाएगी और पानी ज्यादा से खिली-खिली नहीं बनेगी और बहुत स्वादिष्ट भी नहीं लगेगी। 

तो इंतज़ार किस बात का है, बसंतोत्सव में तहरी का भोग/प्रसाद तैयार कीजिए जिससे माता रानी और परिवार वाले सभी खुश हों।

आप सभी को बसंतोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ 💐🙏🏻

Friday, 4 February 2022

Skit : पेड़ों की रक्षा, जीवन सुरक्षा

अद्वय के द्वारा लिखी first skit An Adventurous Day को आप सभी द्वारा बहुत appreciate किया गया और आप सबने उसे बहुत सारा आशीर्वाद भी दिया, उसके लिए आप सबका का ह्रदय से अनेकानेक आभार ❤️🙏🏻

आज उसके ही द्वारा लिखा गया पहला हिन्दी नाटक साझा कर रहे हैं। आप सभी से अनुरोध है कि उसके इस नाटक को भी वही प्यार और आशीर्वाद प्रदान कीजिएगा 🙏🏻

अपने बेटे अद्वय द्वारा रचित पहले हिन्दी नाटक को आप सब के साथ साझा करते हुए अत्यंत गर्व व हर्ष की अनुभूति हो रही है 😊

विषय - पेड़ पौधे


 पेड़ों की रक्षा, जीवन सुरक्षा




सूत्रधार-

एक नन्हा पौधा, अंधकार से भरे भूगर्भ से बाहर निकल कर प्रकाश में आने वाला है, वो महसूस करना चाहता है, ठंडी-ठंडी हवा, सुगंधित पुष्प की खुशबू, हरियाली, और देखना चाहता है रंगीन दुनिया, खिलखिलाना चाहता है अपनी माँ और दोस्तों के साथ।

नन्हा पौधा -

माँ मैं बाहर आ गया...

सूत्रधार-

माँ उसे प्यार से निहारती है

पीपल का पेड़ -

आ मेरे लाल...

नन्हा पौधा -

माँ जैसा मैंने सोचा था, यह प्रकाश से भरी, हरियाली से सजी दुनिया उससे भी ज्यादा खूबसूरत है।

पीपल का पेड़ -

हाँ बेटा, जब तक कोई प्रदूषण ना फैलाए और हम पर बुरी नज़र ना डाले तब तक...

नन्हा पौधा -

बुरी नज़र! क्या मतलब?

सूत्रधार-

वो अभी बात कर ही रहे थे तभी...

Car की आवाज़... भुर्ररर.. भुर्ररर.. पों... पों...

नन्हा पौधा -

(खाँसने की आवाज़) ऊंह ऊंह..

माँ यह गंदा, काला धुआं कैसा?

पीपल का पेड़ -

(खाँसने की आवाज़), ऊंह अंह...

 यह वाहन से निकलता धुंआ है बेटा

जयंत - 

यह पेड़ भी ना, कहीं भी उग कर जगह छोटी कर देते हैं।

अभी जगमोहन को बोलता हूं, इस बड़े पेड़ को काटने को।

ट्रिन ट्रिन ट्रिन ट्रिन...

जगमोहन -

हेलो sir

जयंत -

हेलो जगमोहन...

ठंड इतनी पड़ रही है, तुम्हें लकड़ी नहीं चाहिए?

जगमोहन -

चाहिए साहब...

जयंत -

तो एक काम करो, वो जो मेरे घर के सामने का पीपल का पेड़ है, उसे काट दो। मुझे वहाँ अपनी दूसरी car खड़ी करनी है। 

जगमोहन - 

Sir जी, वो तो बहुत मोटा पेड़ है, 100 रुपए लगेंगे और सारी लकड़ियां भी मेरी..

जयंत - 

ठीक है, आकर काटो..

जगमोहन -

जी sir...

पत्नी खुश हो जाएगी, चूल्हे और हाथ तापने की लकड़ी का अच्छा इंतजाम हो गया।

सूत्रधार -

जगमोहन लकड़ी काटने को चला जाता है।

जगमोहन -

खट खट खट

पीपल का पेड़ -

आह, आह, आह

नन्हा पौधा -

माँ, दुनिया बहुत खराब है।

सूत्रधार-

तभी पेड़ की एक डाल नन्हे पौधे पर गिर जाती है और वो दब जाता है। 

नन्हा पौधा -

आह.... माँ.... 

सूत्रधार -

पीपल का पेड़ कराहता रहता है और जगमोहन पेड़ काट देता है।

जयंत पेड़ कटने के बाद अपनी car वहाँ खड़ी कर के घर चला जाता है।

2 दिन बाद....

जयंत -

क्या हुआ नीलम? यह डाक्टर साहब क्यों आए हैं?

नीलम -

क्या बताऊं सूरज आज बहुत खांस और हांफ रहा था।

डॉक्टर -

आप के बेटे को ठीक से oxygen नहीं मिल पाने के कारण उसकी यह हालत हो गई है।

आपके घर के सामने पर जो पीपल का बड़ा-सा पेड़ था, उसे ना जाने किसने कटवा दिया? वो आते-जाते लोगों को छांव देता था और भरपूर oxygen भी।

ना जाने क्यों लोग हरे-भरे पेड़ को काट कर अपने लिए ही मुसीबत लाते हैं?

चलिए मैंने दवा लिख दी है, शायद सूरज को 2-4 दिन में आराम आ जाए।

नीलम - 

Thank you doctor साहब।

सूरज -

मम्मी जब मैं आ रहा था तो जगमोहन अंकल पेड़ काट रहे थे, और उससे वहाँ उगा छोटा-सा पौधा भी दब गया।

नीलम -

बेटा इसके लिए सिर्फ जगमोहन जिम्मेदार नहीं है। 

सूरज -

तो कौन है?

नीलम-

बेटा, जगमोहन तो अनपढ़ है, उसको पेड़ काटने को किसी ने कहा होगा, जिसे इतनी भी समझ नहीं है कि पेड़ के बिना जीवन असंभव है।

जयंत -

मुझे माफ़ कर दो, वो बेवकूफ इंसान मैं ही हूं।जिसने ज़रा सी बात के लिए हरा-भरा पेड़ कटवा दिया।

सूरज -

पापा चलिए, हम उस छोटे पौधे से लकड़ी हटाकर उसे बचा लेते हैं, कल वही हमको जीवन देगा। 

सूत्रधार -

तीनों वहां जाते हैं, नीलम और जयंत मिलकर उस कटी हुई डाल को हटा देते हैं।

सूरज उस नन्हे पौधे से कहता है: 

सूरज -

I love you छोटे पौधे, क्या तुम मेरे दोस्त बनोगे? मैं हमेशा तुम्हारा ध्यान रखूंगा।

सूत्रधार -

छोटा-सा पौधा बड़े प्यार से सूरज को देखता है, तभी उसे माँ की कही हुई बात याद आ जाती है और सोचता है...  

नन्हा पौधा -

दुनिया अच्छी है, जब तक किसी की बुरी नज़र न पड़े। 

सूत्रधार -

जब तक हम पेड़ पौधों का ध्यान रखेंगे, पेड़ हमें जीवन देंगे, उनके बिना जीवन असंभव है। पेड़ पौधों का ध्यान रखें और किसी भी तरह का प्रदूषण न करें। पेड़ों की रक्षा, जीवन सुरक्षा... 

धन्यवाद। 



यह एक नाटक नहीं बल्कि जीवन की सच्चाई है, इसे स्वयं भी पढ़ें और बच्चों को भी सुनाएं, पसंद आने पर साझा भी करें और अमल भी।

एक बार पुनः आप सबसे कह रहे हैं कि आप सब इस नाटक को अपने बच्चों के school के लिए use कर सकते हैं। 

साथ ही अगर आप को अन्य किसी विषय पर कहानी, नाटक आदि चाहिए हों तो comment box पर लिख कर बता दें। हम उसे भी शीघ्र post कर देंगे 🙏🏻😊