Tuesday, 12 July 2022

Poem : तुझको परिणाम मिलेगा

आज हमारे बच्चे, युवावस्था की दहलीज पर कदम रखने जा रहे हैं। इसमें से कुछ NEET, JEE, BHABHA, Agnipath, और भी बहुत से competition दें रहे हैं।

उन सभी में, साथ ही आने वाले समय में और भी युवावस्था की दहलीज में कदम रखने वाले सभी बच्चों में, जोश, उत्साह और हिम्मत को प्रेरित करने वाले एक गीत को प्रस्तुत कर रहे हैं।

सारे ही बच्चों को all theक्ष best, साथ ही बहुत सारा आशीर्वाद... सभी अपने लक्ष्य को प्राप्त करें...

तुझको परिणाम मिलेगा  


मेहनत तू किए जा,

तुझको परिणाम मिलेगा।

कोई चाहे या ना चाहे,

तुझको तो नाम मिलेगा।।


लम्बी कितनी डगर हो,

चाहे कितना कठिन सफर हो।

तू रुकना नहीं, तू झुकना नहीं,

तुझको मुकाम मिलेगा।।


मेहनत तू किए जा,

तुझको परिणाम मिलेगा।

कोई चाहे या ना चाहे,

तुझको तो नाम मिलेगा।।


वक्त लगे, लग जाए, 

तेरी हिम्मत हार ना पाए।

तू डरना नहीं, तू गिरना नहीं, 

मनचाहा काम मिलेगा।।


मेहनत तू किए जा,

तुझको परिणाम मिलेगा।

कोई चाहे या ना चाहे,

तुझको तो नाम मिलेगा।।


जो हार कभी ना माने

ईश्वर, भी साथ हैं उसके।।

यह विश्वास जिसने किया है

उसको पैगाम मिलेगा 


मेहनत तू किए जा

तुझको परिणाम मिलेगा

कोई चाहे या ना चाहे 

तुझको तो नाम मिलेगा 




Thursday, 7 July 2022

India's Heritage. : Churu Fort - An Interesting Tale

आज आप के लिए India's Heritage segment में, एक ऐसी कहानी लाएं हैं जो भारत की समृद्धि और सुदृढ़ता की जीती जागती मिसाल है।

एक ऐसी कहानी जिसमें, देशप्रेम भी है, सुरक्षा व्यवस्था की अनुपम छटा भी है और समृद्धि तो ऐसी कि आप दांतों तले उंगली दबा लेंगे।

चूरू किले की अद्भुत कहानी


बात बहुत पुरानी है, जब भारत में राजे-रजवाड़ों का राज्य था।

उस समय में राजा अपने राज्य या किले की रक्षा के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रहते थे। यहां तक कि राज्य प्रेम के आगे, वो सोने-चांदी, हीरे-जवाहरात की भी कीमत नहीं समझते थे। 

आज हम आपको एक ऐसे ही एतिहासिक किले की कहानी सुनाने जा रहे हैं, जो इतिहास में अमर है, क्योंकि वहां जो घटना घटी थी, वो न तो दुनिया में कहीं और घटी है और न ही कभी घटेगी।  

इस घटना की वजह से ही किले का नाम विश्व इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया है।

तो चलिए और पहेली नहीं बुझाते हैं, हम बात कर रहे हैं चूरू किले की, जो राजस्थान के चूरू जिले में स्थित है। वर्ष 1694 में ठाकुर कुशल सिंह ने इस किले का निर्माण करवाया था। इस किले के निर्माण के पीछे मकसद आत्मरक्षा के साथ-साथ राज्य के लोगों को भी सुरक्षा प्रदान करना था। 

यह किला दुनिया का एकमात्र ऐसा किला है, जहां युद्ध के समय गोला बारूद खत्म हो जाने पर तोप से दुश्मनों पर चांदी के गोले दागे गए थे। 

यह इतिहास की बेहद ही हैरान कर देने वाली घटना थी, जो वर्ष 1814 में घटी थी। उस समय इस किले पर ठाकुर कुशल सिंह के वंशज ठाकुर शिवजी सिंह का राज था। 

इतिहासकारों के मुताबिक, ठाकुर शिवजी सिंह की सेना में 200 पैदल और 200 घुड़सवार सैनिक थे, लेकिन युद्ध के समय सेना की संख्या अचानक से बढ़ जाती थी, क्योंकि यहां रहने वाले लोग अपने राजा के लिए कुछ भी कर गुज़रने को तैयार रहते थे और इसलिए वो एक सैनिक की तरह दुश्मनों से लड़ते थे। 

इस का अर्थ यह है कि राज्य में सभी को सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता था। जिससे राज्य पर दुश्मन के आक्रमण करने पर, सब डटकर मुकाबला कर सके। और जब राज्य में शांति व्यवस्था रहे, तब कुछ लोग सेना का हिस्सा बने रहे और बाकी जीवन यापन से जुड़े अन्य कार्य, जैसे खेती, व्यापार, दुग्ध उत्पादन आदि जैसे अन्य कार्य करते थे। जिससे राज्य समृद्ध और सुदृढ़ रहे।

वहां की प्रजा केवल सेना का हिस्सा नहीं बनती थी, बल्कि वह अपने राजा ठाकुर शिवजी सिंह और राज्य की रक्षा के लिए अपनी धन-दौलत तक लुटा देती थी।

1814, अगस्त का महीना था। जो चूरू के किले पर काल बनकर आया था।

बीकानेर रियासत के राजा सूरत सिंह ने अपनी सेना के साथ चूरू किले पर हमला बोल दिया। इधर, ठाकुर शिवजी सिंह ने भी अपनी सेना के साथ उनका डटकर मुकाबला किया, लेकिन कुछ ही दिनों में उनके गोला-बारूद खत्म हो गए।

गोला-बारूद की कमी देख राजा चिंतित हो गए, लेकिन उनकी प्रजा ने उनका भरपूर साथ दिया और राज्य की रक्षा के लिए अपना सोना-चांदी, सब राजा पर न्यौछावर कर दिए। 

जिसके बाद ठाकुर शिवजी सिंह ने अपने सैनिकों को आदेश दिए कि दुश्मनों पर तोप से चांदी के गोले दागे जाएं। इसका असर ये हुआ कि दुश्मन सेना ने हार मान ली और वहां से भाग खड़े हुए। यह घटना चुरू के इतिहास में अमर है।

अगर आप समझ सकें तो हमारा इतिहास, हमें यह शिक्षा दे रहा है कि देश की सुदृढ़ सुरक्षा के लिए यह आवश्यक नहीं है कि सेना विशाल हो।

बल्कि कोई भी देश तब ज़रुर सुदृढ़ और सुरक्षित रहता है, जब उस देश का हर नागरिक, देशप्रेमी हो, सैनिक हो- अर्थात हर नागरिक को सैन्य प्रशिक्षण दिया गया हो। 

जिससे, जब दुश्मन आक्रमण करे तो हर नागरिक, दुश्मन की ईंट से ईंट बजा देने में सक्षम हो। 

और जब शांति रहे, तब कुछ सैनिकों को छोड़कर अन्य लोग जीवन की आवश्यकताओं से जुड़े कार्य करके देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करके देश को सफलता के शीर्ष पर पहुंचा दें।

यही है अग्निपथ योजना, जिसमें देश के हर युवा (चाहे पुरूष हो या महिला) को अग्निवीर बनाने की कोशिश की जा रही है। 

जिससे देश इतना सशक्त हो जाए कि दुश्मन हमारे देश पर आक्रमण करने की सोच भी ना रख सके। और साथ ही हम अन्य क्षेत्रों में भी आगे बढ़ते जाएं, जिससे अर्थव्यवस्था भी इतनी सुदृढ़ रहे कि देश सफलता के शीर्ष पर रहे। 

देश के दुश्मन, चाहे वो बाहर के हों या देश के भीतर हों, कोई नहीं चाहेगा कि भारत सफ़ल और सुदृढ़ बनें।

तो यह हमें सोचना है कि क्या उचित है, क्या अनुचित, क्योंकि हम तभी सुखी होंगे, जब देश सफ़ल और सुदृढ़ रहेगा।


जय हिन्द जय भारत 🇮🇳

Tuesday, 5 July 2022

Short Story: Car की सफाई

 कार की सफ़ाई


रघु गांव से अपने परिवार के साथ नया आया था। उसे खेती-किसानी के अलावा कोई काम नहीं आता था। 

उसने मेहनत मजदूरी का काम पकड़ लिया, पर कुछ ही दिनों बाद उसकी तबियत बिगड़ गई।

अब उससे मेहनत मजदूरी नहीं हो पा रही थी, उसकी पत्नी रत्ना ने दो घरों में काम पकड़ लिया। उसी से जैसे तैसे गुजर हो रही थी।

एक दिन रघु को अपने गांव का घनश्याम मिल गया, वो रघु को देखकर बड़ा खुश हुआ, उसने रघु पर प्रश्नों की झड़ी लगा दी, बोला यहां क्या कर रहा है? अभी तक मिलने क्यों नहीं आया? कोई काम धंधा कर रहा है या मजबूरी की रोटी तोड़ रहा है?

रघु दुःखी होता हुआ बोला, सौ बात की एक बात, आए थे गांव की गरीबी से बाहर निकलने के लिए, यहां भूखमरी ने घेर लिया। 

चल कोई नहीं, तेरे यार के रहते तू भूखा नहीं मरेगा। मैं यहां कार सफाई का काम करता हूं। तुझे भी 8-10 cars की सफाई का काम दिला देता हूं। सुकून से जिंदगी कट जाएगी। 

रघु ने 8-10 कारों की सफाई का काम शुरू कर दिया। रत्ना और रघु के पैसों से जिंदगी ठाठ-बाट से तो नहीं पर चैन से कटने लगी।

रघु का बेटा राघव बड़ा मेहनती और पढ़ने में होशियार था। एक सरकारी स्कूल में वो लगन से पढ़ाई-लिखाई कर रहा था।

बारहवीं की परीक्षा में अव्वल आने पर वह सीधे रघु के पास पहुंच गया, उसे अपने अच्छे नंबरों से पास होने की खुशखबरी सुनाने।

वहां रघु, खन्ना जी की कार साफ कर रहा था। और खन्ना जी कार का wiper टूटने की वजह से रघु की खूब फटकार लगा रहे थे। 

रघु बोला रहा था, साहब यह पहले से टूटा होगा, मैंने नहीं तोड़ा, वैसे भी काफी पुराना हो गया था। 

खन्ना जी का स्वर और तेज़ हो गया, अच्छा चोरी ऊपर से सीना जोरी... एक तो तोड़ दिया, ऊपर से बहस कर रहा है। बहुत दिमाग ख़राब हो गये हैं, तेरे...

आखिरकार वो रघु की उस महीने की तनख्वाह काटकर ही माने। सब बात ख़त्म कर खन्ना जी, फोन पर अपनी पत्नी से बातें करने लगे, खन्ना जी बताने लगे, कैसे उल्लू बनाकर, पहले से टूटे हुए whipper का पैसा, अनपढ़ गवांर मूर्ख रघु से वसूल लिया। फिर बोले, तुम बहुत दिनों से pizza के लिए बोल रही थीं, आज उन पैसों से pizza मंगाएंगे। 

फिर मक्कारी से भरी हंसी के साथ gate से बाहर चले गए।

राघव, दूर खड़ा खन्ना जी की सारी हरकतें देख और सुन रहा था। उसके तन बदन में आग लग गई। उसके पास होने की खुशी काफूर हो चुकी थी।

अगले दिन से राघव दिन भर, घर से बाहर रहता और रात को भी बहुत late आता।

रघु और रत्ना, दोनों इस बात से बहुत परेशान थे, पर राघव उन्हें कुछ नहीं बताता। 2 साल बीत गए।

एक दिन रात के 9 बजे, रघु के घर के आगे एक कार आकर खड़ी हुई और बहुत तेज हॉर्न बजाने लगी।

बार बार हॉर्न की आवाज सुनकर, रघु और रत्ना दोनों बाहर आए, उनके बाहर आते ही हॉर्न की आवाज बंद हो गई।

उन्होंने देखा, एकदम नयी चमचमाती आलीशान कार घर के बाहर खड़ी हुई थी। और इधर उधर कोई दिखाई नहीं दे रहा था। तभी राघव सामने से चला आ रहा था।

राघव को देखकर, रघु बोला, ना जाने किस की नई कार है।

राघव बोला, आज से आप को बस यही कार बहुत मन लगाकर साफ करनी है। मैंने सुना है, जिस कार की सफाई आप करते हैं, वो कभी पुरानी नहीं होती है।

हां, तू परेशान मत हो, मैं बहुत मन से इसकी सफाई करुंगा। पर यह तो बता, यह किसकी कार है। 

राघव ने कार की चाभी, रघु को देते हुए कहा, आपकी...

मेरी!?...

हां आप की!

अब से आप और मां कोई काम नहीं करेंगे।

यह कह कर राघव ने पिछले 2 साल की सारी बातें बताते हुए कहा, जिस दिन खन्ना जी आप की डांट लगा रहे थे। उसी दिन मैंने सोच लिया था कि बहुत मेहनत करुंगा, लेकिन बहुत जल्द ऐसी कार दूंगा आप को।

अब से आप सिर्फ इस कार की सफाई करेंगे, और मैं मेहनत कर के आप को जमाने की सारी खुशियां दूंगा।

अगले दिन से रघु, कार की सफ़ाई के काम के लिए नहीं गया।

खन्ना जी उसके घर गये, देखा रघु नयी चमचमाती कार की सफाई कर रहा था।

वो गुस्से से चिल्लाने लगे, यहां कार की सफाई कर रहा है और हमारे यहां नहीं आया।

रघु बोला, अब से मैं सिर्फ इसी कार की सफाई करूंगा।

अबे, ऐसे कौन से रईस की कार है कि जो तू किसी और की कार की सफाई नहीं करेगा।

राघव बोला, मेरे पिता जी की।

रघु! तुमने कार खरीद ली?

मैं कहां साहब, बेटे ने दी है...

खन्ना का मुंह छोटा सा रह गया क्योंकि यह कार उसकी कार से ज्यादा आलीशान थी।

वो समझ गया कि अब उसे अपनी कार की सफाई खुद ही करनी पड़ेगी।