Monday, 10 October 2022

Article : World Mental Health Day

 विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस  



आज World Mental Health Day है तो सोचा इसी विषय पर थोड़ा विचार विमर्श करते हैं।

इस topic पर article लिखने से पहले आप को यह बता दें कि, कुछ लोगों के मन में यह बहुत बड़ी भ्रांति है कि mental health के regarding बात चल रही है तो मतलब किसी के पागल होने के विषय में बात की जा रही होगी। तो सबसे पहले यह, कि ऐसा सोचना ही सबसे बड़ा पागलपन है। क्योंकि जैसे physical health से related बहुत सारे issues होते हैं, ऐसे ही mental health के regarding भी issues होते हैं। 

और यह तो आप अच्छे से जानते ही होंगे कि हर health issue का एक treatment होता है, वैसे ही mental health issues का भी होता है।

Origin of the day

World mental health day पहली बार 10 अक्टूबर 1992 को मनाया गया था। यह World Federation for Mental Health की एक पहल थी, जो 150 से अधिक सदस्य देशों की एक global organization है। 

Mental health से related सबसे बड़ा issue है dipression

Dipression, एक आम समस्या है, दूसरे शब्दों में कहें तो, dipression means mental stress.

जिसमें इंसान अपनी वर्तमान परिस्थितियों से जूझते जूझते थकने लगता है, और एक दिन हार जाता है और वही से dipression का शिकार होने लगता है।

यह समस्या लोगों को पहले भी होती थी, पर कोरोना वायरस (COVID 19) महामारी के आने से इस problem को बहुत लोगों ने face किया है।

हालांकि अभी, हम सभी Covid से निपटने में तो सक्षम हो गए हैं, फिर भी बहुत से लोग dipression की  समस्या से जूझ रहे हैं।

 WHO की report के मुताबिक, international level पर आठ में एक शख्स  mental disorder का शिकार है। 

Mental stress आत्महत्या का एक बड़ा कारण है। WHO की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में दुनियाभर में 7 लाख 3 हजार लोगों ने आत्महत्या की थी। 

इनमें 58 प्रतिशत लोगों की उम्र 50 वर्ष से अधिक थी। आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि 20 वर्ष से 35 वर्ष तक युवा सबसे ज्यादा सुसाइड करते हैं, इनकी संख्या 60 हजार से पार है. इनमें ज्यादातर low and middle class families  से आने वाले युवा शामिल हैं।

Covid pandemic से यह बहुत खुलकर सामने आया है कि metal health पर  socially cutoff का बहुत प्रभाव पड़ता है। बहुत दिनों तक अपनों से ना मिल पाना और लंबे समय तक घरों में कैद रहना, mental stress को बहुत तेजी से बढ़ा देता है। मतलब आप समझ रहे हैं, बहुत ज्यादा अकेलापन, खालीपन..., Mental stress भी बढ़ाता है और dipression भी...

इस स्थिति ने हजारों भारतीयों की mental health को प्रभावित किया है। 

चलिए अब देखते हैं कि, मानसिक तनाव नहीं हो उसके लिए क्या करें?

मानसिक तनाव कैसे दूर करें?

तनाव को खुद पर हावी न होने दें -  

अगर आप को किसी काम से बहुत ज्यादा stress हो रहा हो तो कुछ समय के लिए उस काम को करना छोड़ दें, साथ ही उसके बारे में सोचना भी छोड़ दे। मन को थोड़ा शांत करें, फिर काम शुरू करें, आप अपने आपको थोड़ा सा तनाव मुक्त पाएंगे। पर इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप अपने काम से भागने लगे। अपने काम से भागने से आप stress free नहीं होंगे बल्कि एक दिन dipression का शिकार अवश्य हो जाएंगे।अपने काम से stress free होने के लिए, कुछ time mind divert कर लें और फिर पुनः अपना काम करें।

Stress free रहने के लिए वो काम करें जो आपको पसंद है- दुनिया क्या कर रही है, दुनिया क्या सोचेगी, इस धारणा को मन से बिल्कुल निकाल दीजिए।  Mental stress का यह बहुत बड़ा कारण होता है। भेड़ चाल, हमेशा stress देती है। हमेशा वो काम करना चाहिए जो आप को सुख दे। क्योंकि जब आप काम करने से खुश होंगे, सफल भी तभी होंगे। और हाँ एक बात याद रखियेगा, सफलता आप को किसी भी काम से मिल सकती है। बस continuous efforts जरुरी है।

Mental health को दुरुस्त रखने के लिए योग और  excercise करें-  यह तो आप को पता ही होगा कि योग और excercise सभी तरह की health के लिए आवश्यक है, फिर वो चाहे physical health हो या mental health. 

पर साथ ही एक बात यहाँ, यह भी जरूरी है कि, योग और excercise भी किसी के कहने या बताने से मत करिए, (यहाँ किसी के मतलब doctor से बिल्कुल नहीं है, doctor अगर आप से किसी exercise को करने के लिए कह रहे हैं तो वो आप की healthy रहने के लिए आवश्यक है, उसे जरूर से करें) बल्कि वो भी वही और उतनी ही देर करें, जितना करने से आपको सुख मिले। पर जो भी करें, हो सके तो उसका नियम बना लें।

थोड़ी परेशानी होने पर भी doctor से बात करें- अगर आप को mental stress या dipression रह रहा है तो इस विषय में doctor से बात करने में ना तो हिचकें और ना ही doctor के पास जाने में देर करें। इस डर से लोग क्या कहेंगे, आप का doctor के पास ना जाना, आपकी ही health down करेगा।

नशे से दूर रहें - बहुत से लोग stress से बचने के लिए, दुनिया भर का नशा जैसे तम्बाकू, गुटखा खाना,  smoking करना या शराब पीने, drugs लेने का काम करने लगते हैं।

उनसे ऐसा करने को मना करो तो वह कह देते हैं कि इससे stress कम हो जाता है।

अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो यह बिल्कुल ग़लत धारणा है। नशे में रहने के कारण, कुछ समय आप को ऐसा अनुमान लग सकता है, पर अगर लम्बे समय तक के लिए देखें तो कोई भी नशा, stress कम नहीं करता है, बल्कि आप को physically and mentally weak ही करता है। 

आप मानेंगे नहीं, पर हद से ज्यादा चाय और कॉफी पीना भी एक नशा ही है, वो भी आपको नुकसान ही पहुंचाती है। अगर हो सके तो एक दो बार ही चाय और कॉफी पीएं, वो भी एक छोटा कप ही, और अगर छोड़ सकें तो छोड़ दीजिए। हम यह लिख रहे हैं तो आप कहेंगे कि खुद पीती हैं तो कुछ नहीं... तो हम आपको बता दें कि हम चाय नहीं पीते हैं, हाँ काॅफी पीते हैं, पर वो भी occasionally.

अच्छी नींद लें -

Mental stress ना हो, इसके लिए अच्छी और भरपूर नींद आवश्यक है। तो कोशिश करिए कि नींद से कोई compromise नहीं करें।

Healthy food खाएं -

 healthy food भी mental stress को कम करता है, तो healthy food खाएं। पर इसका मतलब यह नहीं कि आप चटर-पटर, चाट-पकौड़ी  बिल्कुल नहीं खाएं। आप इस तरह की चीजें भी बीच बीच में खा सकते हैं। लेकिन ध्यान रखिएगा कि रोज़ रोज़ यही सब ही ना खाएं और साथ ही इनके amount का भी ध्यान रखें। बहुत ज्यादा amount में इन्हें खाना भी नुकसान दायक होता है। 

Believe in yourself - 

अपने ऊपर विश्वास रखना कभी मत छोड़िए, क्योंकि mental stress को खत्म करने के लिए सबसे ज्यादा जरुरी यही होता है। 

विश्वास मानिए, आप से अच्छा उस काम को कोई नहीं कर सकता है। जब आप इस विश्वास को अपने अंदर रखेंगे तो आप को कभी भी dipression नहीं होगा। 

मतलब आप को कभी dipression ना हो, यह सबसे ज्यादा आप पर निर्भर करता है।

Positive attitude रखना - 

हमेशा positive attitude रखें, और उनके साथ ही अपना उठना-बैठना ज्यादा रखें जो positive attitude वाले हों। मतलब अपने लोगों से मिलें, बातचीत करें, सुख दुःख बांटें...

साथ ही यह भी याद रखें कि जिंदगी में हर किसी को ग़म है, पर उस ग़म से बाहर वही निकल पाता है, जिसे उससे बाहर निकलने की इच्छा हो। अगर आप अपने ग़म को बहुत बड़ा बना लेंगे तो कभी बाहर नहीं निकल सकते हैं। साथ ही वो आपका mental stress भी बढ़ाएगा और बढ़ते बढ़ते आप को dipression का patient भी बना देगा।

तो जैसे आप अपनी physical health का ध्यान रखते हैं। Mental health का भी ध्यान रखें, खुश रहें, आत्मविश्वासी बने, दृढनिश्चय रहें, बड़ों की सेवा करें, साथ के लोगों के साथ समय व्यतीत करें व बच्चों को खूब प्यार करें और हाँ ईश्वर पर अटल विश्वास रखें। जब वो साथ हैं तो सब अच्छा ही होगा।

विदेशों में companies में physical health के साथ ही mental health पर भी ध्यान दिया जाता है।

पर अब भारतीय कंपनियों ने भी कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी आरंभ कर दी है। मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों से निपटने वालों की मदद करने के लिए कई संगठन नए तरीकों को विकसित करने और लागू करने के लिए आगे आए हैं। 

तो चलिए World Mental Health Day से ही थोड़ा ध्यान mental health पर भी रखना शुरू कर देते हैं।

Happy World Mental Health Day 😊 🎉

Be Happy, stay Healthy 😊


Friday, 7 October 2022

Story of Life : दो बोल प्यार के

 दो बोल प्यार के 


अंकित, आज बहुत ही smart लग रहा था, अपने सपनों की रानी को लेने जो जाने वाला था।

अंकित, लम्बा-चौड़ा,गोरा बांका जवान, शहर का सबसे बड़ा businessman था, उसके चेहरे पर वो तेज़ था कि जिस की नजर एक बार उस पर गई, तो वहाँ से हटती ही नहीं थी। 

Five-star hotel से बारात चलनी थी, सभी अपने अपने कमरे में बैठे, दुनिया भर के पकवानों का मजा ले रहे थे। पूरे hotel से कहकहों की आवाजें आ रही थी।

पर अंकित के माथे पर पसीना छलछला रहा था, वो बहुत बेसब्री से ना जाने किस का इंतजार कर रहा था।

तभी अंकित का एक employee, मनीष कमरे में आकर बोलता है, सर आप को AC room में भी इतना पसीना क्यों आ रहा है? 

नहीं कुछ नहीं?

बैंड-बाजा भी आ चुका और सारे बाराती भी, I think अब आप को सभी को चलने के लिए बोल देना चाहिए। 

नहीं मनीष, अभी नहीं...

 आप किस का इंतजार कर रहे हैं? 

उनका, जिनके आए बिना, मै दूल्हा नहीं बन सकता हूंँ। 

ऐसा भी कौन है सर?

मेरी माँ! 

आप की माँ...? 

सब जानते थे कि, मनीष के पिता के अलावा, दुनिया में उसका कोई अपना नहीं था, और वो भी चंद साल पहले स्वर्ग सिधार गए थे। फिर माँ...

हाँ माँ, अंकित ने आत्मविश्वास से भरे हुए कहा... 

आज मुझे सबसे उन्हें मिलवाना है और उनके आए बिना मै बग्गी पर नहीं चढूंगा।

तभी hotel के gate पर Rolls Royce car आकर रूकी। 

सभी उत्सुकता से देख रहे थे कि कौन आया है?

तीन चार guards के owner के साथ, उसमें से एक सादगी के रंग में रंगी अधेड़ावस्था की महिला निकली। 

जैसे ही अंकित को पता चला, वो दरवाजे पर ही आकर, उन्हें दंडवत प्रणाम करने लगा। इतनी बड़ी कार भेजने की क्या जरूरत थी? 

माँ, आप से ही है सबकुछ...

आह! मेरा प्यारा बच्चा, कहकर उस महिला ने अंकित को अपने अंक में समेट लिया। 

माँ की सारी रस्में उन्होंने ही पूरी की..

अंकित ने बहुत प्यार से उन्हें अपने साथ बग्गी पर बैठा लिया। 

बारात अपने गंतव्य स्थान को चल दी।

कुछ समय बारात को आया देखकर, लड़की वाले स्वागत सत्कार में लग गए...

जहाँ से शादी हो रही थी, वहाँ की भव्यता देखते ही बन रही थी। साज-सज्जा, सुख सुविधा से लैस थी वो जगह...

अंकित, उस महिला का हाथ पकड़ कर ही stage पर चढ़ा और अपने पास ही उसने उन्हें बैठाया। 

जब अंजली जयमाल के साथ stage पर आयी तो अंकित ने उससे कहा, आज मैं सबको पहले माँ के बारे में सब बताऊंगा, फिर ही विवाह करूंगा।

यह कहकर वो बोला, यह निखिला Ma'am हैं, मेरी माँ, मेरी गुरु... आज मैं जो कुछ हूँ, इन्हीं की वजह से हूँ... मेरी माँ, मुझे बचपन में ही छोड़कर, भगवान के पास चली गई थीं। उनके जाने से मैं बिल्कुल टूट गया था, शायद ज्यादा दिन जीवित भी नहीं रहता, पर तब निखिला Ma'am मेरे जीवन में आईं, मेरे लिए नया जीवन लेकर, इनके नेह स्पर्श और आत्मविश्वास ने मुझे जिंदगी में सफलता के मुकाम पर पहुंचा दिया।

 जब अंकित यह बोल रहा था, निखिला Ma'am की आंखों से अविरल धारा बह रही थी। 

रुक जा अंकित यह सच नहीं है... आज मुझे सच बोलना ही होगा...

कहकर निखिला जी ने बोलना शुरू किया, मैं एक primary school की teacher थी। बच्चों को पढ़ना और उनका जीवन संवारना ही है मेरा काम था। और मैं यह बाखूबी करती भी थी।

अंकित को मैंने 4th class से पढ़ाना शुरू किया। यह बहुत ही dull and careless बच्चा था, जिसका पढ़ाई-लिखाई में बिल्कुल मन नहीं लगता था।

ऐसा मेरे साथ कभी नहीं हुआ कि मैं बच्चे में भेदभाव करुं, पर इसकी आंखों का खालीपन, मुझे अंदर तक भेद जाता था और उसके अनमने मन से मुझे बहुत चिढ़ मचती थी और धीरे धीरे ना जाने कैसे मुझे इससे नफरत होने लगी।  

और वो नफरत ऐसी थी कि मुझे इसमें गुण दिखने ही बंद हो गए और जब मैंने इसका result बनाया तो उसमें मैंने इसके बहुत सारे अवगुणों का बखान कर दिया।

जब वो result, principal के पास पहुंचा, तो उन्होंने मुझे बुलाया और कहा कि आप ने एक छोटे से बच्चे का इतना negative result क्यों बनवाया है? 

सर, अंकित ऐसा ही है, वो किसी में भी अच्छा नहीं है।

अगले दिन मुझे results distribute करने थे, वहाँ मैंने देखा कि, अंकित के पीछे की class के results भी रखे थे।

मैंने उन्हें देखना शुरू किया, अंकित बहुत अच्छा बच्चा था, पर फिर दूसरी class से उसके performance में अंतर आने लगा, कारण जानने पर पता चला कि उसकी माँ को कैंसर हो गया था।

फिर तो उसकी performance, माँ की गिरती तबियत के साथ गिरती ही गई। और जिस दिन उसकी माँ, भगवान के पास गई, तब से वो पूरी तरह टूट गया है और तब से वो ऐसा अनमना रहने लगा है।

जब मैंने यह पढ़ा, मेरा अंतर्मन ग्लानि से भर गया। मुझे खुद से घृणा होने लगी मैंने तुरंत से अंकित का result फाड़ दिया। और उसके पिता से कहा कि उसका result अभी नहीं बना है।

अगले दिन से मेरे मन में अंकित के लिए भाव बदल गए थे। मैंने अंकित को बहुत सारा प्यार देना शुरू कर दिया और वो भी मेरे प्यार से पुनः खिलने लगा।

एक ही साल में यह बच्चा, पहले जैसा बन गया। 5th class, उन्हें पढ़ाने वाली मेरी आखिरी class थी, सभी बच्चे मेरे लिए, रंग-बिरंगे कागजों में लपेट कर दुनिया की छोटी छोटी चीजें लेकर आए।

अंकित भी एक पुराने कागज में कुछ लेकर आया था और उसने मुझे वो थमाया। 

मैंने सबसे पहले वही देखा, उसमें एक कंगन था, जो कि बहुत पुराना था, उसकी design टूट-फूट चुकी थी। साथ ही वो एक इत्र की शीशी भी लाया था, जिसमें इत्र लगभग खत्म था। 

मैंने उस इत्र को लगा लिया और उस कड़े को पहन लिया। जैसे ही मैंने ऐसा किया, अंकित ने बहुत प्यार से मुझे माँ कहा और मुझसे लिपट गया।

उस इत्र के कारण, उसे मुझसे अपनी माँ की महक आ रही थी, जिसने उसमें प्राण फूंक दिया।

उस दिन, मैं उसके प्यार में ऐसे पिघल गई कि उसकी माँ ही बन गई। और तब से हम दोनों का रिश्ता बन गया।

Ma'am, मैं जानता हूँ कि आप मुझे पसंद नहीं करती थीं, पर जब से आप ने मुझे दो बोल प्यार के, बोलने आरंभ किए थे, उन्हीं पलों ने मुझे पुनः जिंदा कर दिया था, मुझे आप में अपनी माँ मिल गई थीं।

अंकित और अंजली ने झुककर निखिला जी के चरणों को छुआ। फिर निखिला जी के आशीर्वाद से विवाह सम्पन्न हुआ।

आप के दो मीठे बोल किसी को जीवन भी प्रदान कर सकते हैं, ऐसा अवसर मिलने पर चूक मत जाइएगा। किसी की जिंदगी में फूल बिखेरने का कार्य भी ईश्वर कुछ खुशनसीब लोगों को ही देते हैं, अगर आप को ईश्वर ने इसके लिए चुना है तो अपने जीवन पर फक्र महसूस कीजिएगा और पुन्य अवश्य कीजियेगा।

Thursday, 6 October 2022

Article: Seat belt rules modified!

Seatbelt के बदले नियम! 

आज हम अपना यह article, एक information के साथ लाए हैं, जो कि बहुत लोगों को पता भी होगी, पर शायद सबको नहीं पता हो, लेकिन पूरी बातें, बहुत कम लोग ही जानते होंगे, यह तय है। 

चलिए छोड़ते हैं कि किस को क्या पता है और किस को क्या नहीं; हम आपको सब कुछ सिलसिलेवार तरीके से बताते हैं।

अब आप को पीछे की seats पर भी सीट बेल्ट लगानी होगी; नहीं लगाने से चालान कटेगा।

ऐसा बिल्कुल मत समझिएगा कि यह information कोरी बकवास है। यह बिल्कुल सही news है।

इसे दिल्ली में implement भी कर दिया गया है और आप के state में भी यह जल्द शुरू हो जाएगा।

अगर safety के point of view से देखेंगे तो यही समझ में आएगा कि यह बहुत अच्छा decision है।

आपको यह तो अच्छे से पता होगा ही कि seatbelt क्यों लगाते हैं?

बिल्कुल सही, accidents को रोकने के लिए या उनकी severity को कम करने के लिए...

तो, accident के time जितनी safety की requirement आगे बैठे लोगों को है, उतनी ही पीछे बैठने वाले लोगों को भी requirement है। पर अगर गहराई से सोचेंगे तो आपको भी एहसास होगा कि पीछे बैठने वालों को seatbelt की requirements अधिक है।

ऐसा इसलिए क्योंकि, mostly आगे बैठने वालों को accident होने की संभावना पहले समझ आ सकती है, जिससे वो alert हो सकते हैं और accident टलने की संभावना बढ़ जाती है।

जबकि पीछे बैठने वालों की alertness, आगे वालों के competitively कम रहती है, जिसके कारण accident की severity बढ़ जाती है। 

पीछे की seats पर भी seatbelt लगानी mandatory है, यह मुद्दा भी एक high-profile case के कारण ही हुआ है। जिसमें आगे बैठे दोनों लोग सुरक्षित रहे और पीछे बैठे दोनों लोगों की death हो गई। तो इस बात को seriously लीजिए।

वैसे भी, पीछे वाली सीट पर, mostly, ladies, kids and elders बैठते हैं तो उनकी safety का ध्यान और ज़्यादा रखने की जरूरत होती है।

चलिए यह बात तो हुई, seatbelt लगाने की necessity की...

पर अब यह safety rule बन गया है कि पीछे बैठने वालों को भी seatbelt लगानी होगी। अगर आगे बैठने वाले seatbelt लगाएं और पीछे बैठने वाले नहीं लगाए हैं तब भी चालान कटेगा, so be aware!

अधिकतर 4 wheelers में पीछे की seats के लिए belts तो होती है मगर न बांधने पर reminder alert नहीं बजता है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि backseat पर belt reminder को भी अनिवार्य बनाया जाएगा। अगर गाड़ी चल रही है तो सभी seats पर belt लगाना अनिवार्य है। Motor Vehicle Act की धारा 194B के अनुसार, seatbelt न लगाने पर 1,000 रुपये का चालान कटता है।

अब ऐसे में बहुत से लोगों का सवाल होगा कि:

अगर हमारे 4 wheeler में पीछे seatbelt ना हो तो?

अगर पीछे बच्चे बैठे हों तो?

अगर पीछे तीन लोग बैठे हों तो, तीसरा कैसे seatbelt लगाएगा? 

तो सुनिए इनके जवाब।

अगर आप के 4 wheeler में seatbelt नहीं है तो आप दोषी नहीं माने जाएंगे, ना ही आपका चालान कटेगा। पर अगर seatbelt का provision है और आपने तब भी सीट बेल्ट नहीं लगाया है, तो जिसका 4 wheeler है, उसका चालान कटना तय है।

बच्चे आगे बैठें या पीछे, seatbelt लगानी होगी; नहीं लगाने से चालान कटेगा।

पीछे की seats में, generally, दो लोगों के लिए seatbelt का arrangement होता है, इसलिए दोनों को ही seatbelt लगानी होगी। ऐसे में तीन लोगों के बैठने पर seatbelt नहीं लगी होने का ₹1000 के साथ ही overloading होने का भी 1000 रुपए का चालान कट सकता है। 

पर अगर तीन seatbelt का provision है तो, तीनों लोग seatbelt लगाकर बैठ सकते हैं, तब चालान नहीं कटेगा।

जैसा कि नियमों द्वारा ज्ञात हुआ, हमने वे सभी बातें आपको बता दी हैं। अगर आप के कोई और सवाल हों या आप हम सबके साथ कोई अन्य information share करना चाहें, तो comment box में अवश्य बताएँ।

Be aware and be safe 😊