Thursday, 6 April 2023

India's Heritage : भगवान हनुमान - प्रेरणा स्त्रोत

आज हनुमान जन्मोत्सव है। कहते हैं कलयुग में अभी भी जीवित देवता के रूप में संकटमोचन हनुमान जी विराजमान हैं।

चैत्र शुक्ल पक्ष ईश्वर के आशीष से परिपूर्ण है,  क्योंकि इसकी नवमी पर प्रभू श्रीराम जी का जन्म हुआ और पूर्णिमा पर संकटमोचन रामभक्त हनुमान जी का। 

भगवान हनुमान जी के जीवन से जुड़ी हुई बहुत सी बातें हमें सफलतापूर्वक जीवन संचालित करने की प्रेरणा देती है, जैसे, प्रभू श्रीराम की अनन्य भक्ति, निर्भय रहने की कला, विश्वास, बुद्धि, संयम, सही निर्णय लेने की क्षमता, इन जैसे और भी अनेकों गुण हैं जो इस बात को सिद्ध करते हैं।

हनुमान जी विश्वास के देवता हैं, इसका तात्पर्य है कि विश्वास दोनों तरह से हो, परमात्मा पर भी, स्वयं पर भी, बाहर भी, भीतर भी। 

उनके जीवन से प्रेरणा लें तो, उन्होंने बाल्यकाल से जीवनपर्यंत तक यही सिद्ध किया, कि भरोसा ही एकमात्र चीज है जो सूर्य को मुंह में रख लेने से लेकर समुद्र लांघने तक जैसे अनेक कार्यों को करवा लेता है। 

इंसान के जीवन की धुरी तीन भाव में निहित होती है, पहला हर्ष, दूसरा शोक और तीसरा भय। हर्ष यानी खुशी, शोक यानी दुःख, भय का मतलब डर। 

देखा जाए तो तीसरा भाव, भय ही यह निर्धारित करता है कि हर्ष मिलेगा या शोक..

क्योंकि डर ही सफलता के रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट है। जहां एक ओर डर असफलता का भी होता है, वहीं दूसरी ओर सफलता को बरकरार रखने का भी होता है, भय बाहरी भी होता है, भीतर का भी होता है। डर कोई भी हो, ये हमें जिंदगी में आगे बढ़ने से रोकता है। 

आज के विरासत के इस अंक में भगवान हनुमान जी के जन्मोत्सव पर उनके जीवन से जुड़ी हुई कुछ कहानियों को साझा कर रहे हैं, जो कि रामायण में वर्णित हैं। 

प्रसंग त्रेतायुग के हैं, लेकिन इसके अर्थ को पूर्णतया समझने का प्रयास करेंगे तो यह हर युग कि समस्याओं का समाधान हैं

इन कहानियों के माध्यम से आप समझिएगा कि अपने ऊपर डर को हावी होने से कैसे रोका जा सकता है और कैसे अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं..

भगवान हनुमान - प्रेरणा स्त्रोत



कहानी-1ः समस्या या समाधान : 

यह कहानी संयम की है...

प्रसंग तब का है, जब रावण ने सीता का हरण कर लिया था, तो उनकी खोज में भगवान राम व लक्ष्मण जंगल में भटक रहे थे, शबरी के कहने पर, वे सुग्रीव से सहायता मांगने की दिशा में आगे बढ़ चले। 

इधर सुग्रीव अपने भाई बाली से बचने के लिए ऋष्यमूक नाम के पर्वत पर रहते थे क्योंकि बाली एक शाप के कारण इस पर्वत पर नहीं आ सकता था।

खोज करते करते, प्रभू श्रीराम और लक्ष्मण ऋष्यमूक पर्वत तक आ गए।

ऋष्यमूक पर्वत के पास दोनों को देखकर सुग्रीव घबरा गए। उन्हें लगा कि बाली खुद नहीं आ सकता है तो उसने मुझे मारने के लिए योद्धा भेज दिए हैं। 

सुग्रीव ने हनुमान जी से कहा कि वो उनकी रक्षा करें। हनुमान जी ने जवाब दिया कि बिना ये समझे कि वो लोग कौन हैं, कोई फैसला नहीं करना चाहिए। पहले उनके पास जाकर ये पता करना चाहिए कि ये दो लोग कौन हैं?

हनुमान जी ने अपना रूप बदला और ब्राह्मण बनकर पहुंच गए, प्रभू श्रीराम व लक्ष्मण के पास...  जब बात की तो पता चला ये वो ही राम हैं, जिनका नाम हनुमान दिन-रात जपा करते हैं। यह कोई दुश्मन नहीं हैं , यह तो सुग्रीव से मदद मांगने आए हैं। दूर से जो समस्या दिख रही थी, वो दरअसल समाधान थी। 

हनुमानजी सिखाते हैं, किसी भी परिस्थिति से डरें नहीं, उसे समझने की कोशिश करें। हो सकता है, जिसे आप समस्या समझ रहे हों वो आपके लिए मददगार साबित हो।


कहानी-2ः  सही निर्णय

डर को जीतने की कला में हनुमानजी निपुण हैं। कई घटनाएं हैं, जिन्होंने उनके मन में भय पैदा करने की कोशिश की होंगी, लेकिन वे बुद्धि और शक्ति के बल पर उनको हरा कर आगे बढ़ गए।

डर को जीतने का पहला management funda, यहीं से निकला है कि अगर आप विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ना चाहते हैं तो बल और बुद्धि दोनों से काम लेना आना चाहिए। जहां बुद्धि से काम चल जाए वहां बल का उपयोग नहीं करना।

यह कहानी, बुद्धि और सही निर्णय की है...

रामचरित मानस के सुंदरकांड का यह प्रसंग है, जब माता सीता की खोज में हनुमान जी समुद्र लांघना था। 

जब वह समुद्र लांघ रहे थे, तो उनको बीच रास्ते में सुरसा नाम की राक्षसी ने रोक लिया और हनुमान जी को खाने की जिद करने लगी।

हनुमान जी ने बहुत मनाया, लेकिन वो नहीं मानी। वचन भी दे दिया, राम का काम करके आने दो, माता सीता का संदेश उनको सुना दूं फिर खुद ही आकर आपका आहार बन जाऊंगा, पर सुरसा फिर भी नहीं मानी।

वो हनुमान को खाने के लिए अपना मुंह बड़ा करती, हनुमान उससे भी बड़े हो जाते। वो खाने की जिद पर अड़ी रही, लेकिन उसने हनुमानजी पर कोई आक्रमण नहीं किया।

इससे हनुमानजी समझ गये कि मामला मुझे खाने का नहीं है, यहां सिर्फ ego की समस्या है। उन्होंने तत्काल सुरसा के विराट स्वरूप के आगे खुद को लघु रूप में कर लिया। फिर उसके मुंह में से घूमकर निकल आए।

सुरसा अपने आगे उनका लघु रूप देखकर प्रसन्न हो गई। उसने हनुमानजी को अनेकों आशीर्वाद दिए और लंका के लिए जाने दिया।

जहां मामला ego satisfaction का हो, वहां बल नहीं, बुद्धि का इस्तेमाल करना चाहिए, यह हनुमानजी ने सिखाया है, कि बड़े लक्ष्य को पाने के लिए अगर कहीं झुकना भी पड़े, झुक जाइए। 

कहानी-3ः समय और काम का तालमेल 

इस कहानी का प्रसंग भी उसी रास्ते में घटा। समुद्र लांघकर हनुमानजी लंका पहुंच गए। 

लंका के मुख्यद्वार पर लंकिनी नाम की राक्षसी मिली। रात्रि के समय हनुमानजी लघु रूप में ही लंका में प्रवेश कर रहे थे, उसी समय, उन पर लंकिनी की नजर पड़ गई,  उसने हनुमानजी को रोक लिया। यहां परिस्थिति दूसरी थी, समय कम और काम ज्यादा था। लंका में रात के समय ही चुपके से घुसा जा सकता था।  हनुमान ने लंकिनी से कोई वाद-विवाद नहीं किया। सीधे ही उस पर प्रहार कर दिया। लंकिनी ने रास्ता छोड़ दिया।

जब मंजिल के करीब हों, समय का अभाव हो और परिस्थितियों की मांग हो, तब बल का प्रयोग अनुचित नहीं है। 

हनुमान ने एक ही रास्ते में आने वाली दो समस्याओं को अलग-अलग तरीके से निपटाया। जहां झुकना था वहां झुके, जहां बल का प्रयोग करना था, वहां वो भी किया। सफलता का पहला सूत्र ही ये है कि बल और बुद्धि का हमेशा संतुलन होना चाहिए। समय और काम का सही तालमेल होना चाहिए,  इसी से सफलता मिलेगी


कहानी-4ः प्रभावित ना होना : 

यह प्रसंग, हनुमानजी का माता सीता से लंका की अशोक वाटिका में मिलने के पश्चात् का है, जब हनुमानजी ने पूरी वाटिका को उजाड़ दिया था और रावण के सबसे छोटे बेटे अक्षयकुमार को भी मार दिया। मेघनाद ने उन्हें नागपाश में बांधकर रावण की सभा में प्रस्तुत किया।  लंकापति रावण की सभा का ऐसा प्रताप व वैभव था कि जिसका बखान संभव नहीं। वहां देवता और दिग्पाल हाथ जोड़े, डरे हुए केवल रावण की भृकुटियों को ही देख रहे हैं।

रावण के वैभव और बल को देखकर भी हनुमानजी तनिक विचलित नहीं हुए। 

दुश्मन और बुरे लोगों के वैभव को देखकर उससे प्रभावित ना होना, ये बहुत कठिन काम है। शत्रु के सामने बिना भय के रहें। उसकी ताकत और सामर्थ्य से प्रभावित ना हों। यही हनुमानजी सिखाते हैं। 

आपकी पहली जीत वहीं हो जाती है, जब आप उसके प्रभाव में नहीं आते। अगर उसके वैभव का लेश मात्र भी असर आपके मन पर हुआ तो फिर जीत की राहें मुश्किल हो जाती हैं। रावण की पहली हार उसी समय हो गई, जब हनुमानजी ने उसके सामने बिना किसी संकोच के उसकी गलतियों को गिना दिया।

अक्सर लोग यहां चूक जाते हैं। दुश्मन के सामने जाते ही आधे तो उसकी शक्ति के आगे झुक जाते हैं। हनुमान के मन में ये बात दृढ़ थी कि रावण का जो भी वैभव है वो अधर्म से पाया हुआ है, पाप की कमाई है। इसलिए यह बहुत कीमती होते हुए भी बेकार ही है।

कहानी-5ः कुशल नीति 

आज के co-operate culture में भगवान हनुमानजी से यह गुण सीखना काफी जरूरी है।

यह प्रसंग तब का है, जब हनुमानजी ने रात्रि में लंका में प्रवेश कर माता सीता की खोज आरंभ कर दी थी, उसी के साथ ही वो लंका की स्थिति का अवलोकन भी कर रहे थे।

हनुमान ने जब विभीषण के घर के बाहर तुलसी का पौधा, स्वस्तिक और धनुष बाण के चिह्न देखे तो समझ लिया, राक्षसों के शहर में यह किसी सज्जन व्यक्ति का घर है।

हनुमानजी ने, लंका के सशक्तिकरण को देखकर समझ लिया था कि अगर लंका को जीतना है तो किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत पड़ेगी जो इस जगह और यहां के लोगों के बारे में अच्छे से जानता हो। 

उन्होंने विभीषण से दोस्ती की और बातों-बातों में उन्हें भगवान श्रीराम के गुणों के बारे में बताया। सीधे ये नहीं कहा कि तुम हमारे खेमे में शामिल हो जाओ, बस विभीषण के मन में उत्सुकता का एक बीज बो दिया। 

उन्होंने बिना सीधे कोई बात कहे, विभीषण को राम की शरण में आने का संकेत दे दिया था।

जब लंकापति रावण ने विभीषण का अपमान कर उसे लंका से निकाला तो विभीषण को हनुमान की कही बात याद आई कि श्रीराम अपनी शरण में आए हर व्यक्ति की रक्षा करते हैं। वो सीधा प्रभू श्रीराम की शरण में पहुंच गया। 

ये कहानी सिखाती है कि जब भी आप अपने दुश्मन के खेमे में जाएं तो वहां भी अपने लिए ऐसे लोगों को चुनें जो जीतने में आपकी मदद कर सकते हों। 

भगवान हनुमान जी के जीवन से जुड़े अनेकानेक प्रेरणा प्रसंग हैं, जो हमें जीवन को सही अर्थों में जीने की प्रेरणा देते हैं...

यह चंद प्रसंग हैं, जिन्हें आप के सामने प्रस्तुत किया है, जिससे आप सफलता की राह पर चलें।

पर विश्वास सदैव दोनों पर रखकर, परमात्मा पर भी और अपने पर भी, और हाँ, यह अटल सत्य है कि सद्कार्यों को करेंगे, तभी ईश्वर साथ देंगे।

भगवान हनुमान जी जन्मोत्सव पर हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏻💐 

संकटमोचन हम सब के संकटों को दूर करें हम सब पर सदैव अपनी कृपा दृष्टि बनाएं रखें 🙏🏻🙏🏻

हनुमानजी के जन्म दिवस को क्या और क्यों कहते हैं जानने के लिए पढ़ें हनुमान जन्मोत्सव या जयंती 

Tuesday, 4 April 2023

Recipe: Mug Cake

HOSTEL, PG Special

हमने बहुत सी recipes डाली है, जिसे आप लोगों के द्वारा बहुत पसंद भी किया गया है। Corona के समय तो हर रोज ही recipes डाली थी। जिसमें हर variety की dishes थीं।

जिसको देखते हुए हमारे youngsters की demand है कि हम कुछ recipes ऐसी भी डाल दें, जो hostel या PG में भी बनायी जा सके। जिससे वो भी tasty खाना खा सकें।

Hostel या PG में कुछ भी ऐसी चीजें नहीं होती है कि cooking easy हो, but no फिक्र, जब आप जुड़ें हैं shades of Life से...

अभी हम कुछ dishes आपको ऐसी भी बताते रहेंगे।

अगर आप की भी यही requirements है तो जुड़े रहिएगा, shades of Life से

आज की dish है Mug Cake...

आप कहेंगे कि एक Hostel और PG में कहां से हम microwave oven लाएं है mug cake बनाने के लिए?

अरे, अरे! Microwave oven लाने की कोई आवश्यकता नहीं है।

आप प्रश्न करेंगे फिर संभव ही कैसे होगा mug cake बनाना?

बनेगा जी, बिल्कुल बनेगा, और बिना microwave oven के भी, बस आप पूरी recipe ठीक से पढ़िएगा और tips and tricks ठीक से follow कीजिएगा...

Mug cake



Ingredients :

  • Dark fantasy vanilla crème sandwich biscuits - 2 packets (100 grams x 2)
  • Milk - 1 cup 
  • Eno - 1 sachet


Method :

  1. आप normal size के 4 cups ले लीजिए। (Tea cups)
  2. सबमें एक बराबर quantity (4-5 in each cup) के बिस्कुट तोड़ कर डाल दीजिए।
  3. अब सबमें ¼ cup lukewarm milk डाल दीजिए। 1-2 minute में ही biscuit dissolve हो जाएगा, अब इसे spoon की सहायता से अच्छे से mix कर दीजिए। जिससे smooth solution बन जाए..
  4. अब eno sachet से ¼ powder हर cup में डालकर mix कर लीजिए। 
  5. अब इसे preheated equipment में डालकर cake prepare कर लीजिए।
  6. अब इसमें melted chocolate, crushed chocolate, cream और crushed gems से top-up कर लीजिए। अपने taste के according topping कर लीजिए।

Now your exceedingly mouthwatering Mug Cake is ready to serve... 

Perfect mug cake के लिए, इन tips and tricks‌ को ज़रूर से follow कीजिएगा..


Tips & Tricks :

  • आप कहेंगे कि equipment से क्या मतलब है? आखिर किस में हमने cake बना लिया? तो आपका equipment वो होगा जो आपके पास है। तो अब आते हैं कि आप के पास है क्या?
  • अगर आप के पास microwave oven है तो आप चारों cup एक साथ 2 minutes  के लिए microwave mode में रख दें, Cake ready हो जाएगा। 
  • आप convection mode में भी रख सकते हैं, पर उसमें time लगेगा।
  • अगर आप के पास induction plate है, तो sauce pan में पानी भर कर उसे boil होने रख दीजिए।
  • जब पानी उबल जाए तो सारे cup इसमें रख कर 5  minutes के लिए medium to slow flame पर ढककर रख दीजिए। Cake ready हो जाएगा...
  • पानी का amount ऐसा होना चाहिए कि सिर्फ आधा कप ही पानी में डूबे, जिससे पानी अंदर ना आए।
  • अगर आप के पास electrical kettle है तो पहले उसमें पानी boil कर लीजिए। फिर biscuits का घोल steel के glass में डाल दें। 
  • अब 2 to 4 min के लिए glass को केतली में रखकर glass cake बना ले। 
  • इसमें भी पानी का amount ऐसा होना चाहिए कि सिर्फ आधा गिलास ही पानी में डूबे, जिससे पानी अंदर ना आए।
  • अगर आप steel utensils use करेंगे तो, cake जल्दी बनता है। ऐसा इसलिए क्योंकि steel, heat का good conductor है।
  • दूसरा अगर आप एक बड़ा सा mug में cake बना रहे हैं तो आप को time ज़्यादा लगेगा। क्योंकि ceramic heat का good conductor नहीं है दूसरा बड़ा mug होने से उसके side wall भी ज्यादा thick होगी। तो cooking process में time लगेगा..
  • हमने dark fantasy cream biscuit लिया है, आप चाहें तो Bourbon, Oreo या और कोई भी अपनी पसंद के cream flavour biscuits, जैसे orange, mango, strawberry etc. ले सकते हैं। 
  • आप चाहें तो बिना cream वाले biscuits भी ले सकते हैं, पर फिर उसमें एक चम्मच fresh cream or 2 चम्मच दूध वाली मलाई डालनी होगी। इससे cake moist बनता है। साथ ही 1tsp sugar भी add करनी होगी..
  • अगर आप को coffee flavour पसंद है तो आप biscuits के solution में थोड़ा सा coffee powder भी add कर सकते हैं। 
  • आप eno की जगह baking powder भी डाल सकते हैं, वो हर mug में ½ tsp डलेगा। 
  • Biscuit solution ¾ cup से ज़्यादा मत रखियेगा, वरना cake overflow हो जाएगा।
  • Cake के ऊपर, अपनी पसंद की topping भी ज़रूर डालिएगा, वो cake के taste में चार चांद लगा देती है।
  • Dark fantasy cream biscuits का mug cake सबसे tasty बनता है।
  • हमने mug and glass दोनों में ही ½ portion solution ही लिया है, क्योंकि हमें Clear pics चाहिए थी।
  • आप ¾ portion solution लीजिएगा तो cake, full mug तक बनेगा.. 


बहुत ही tasty, easily and instantly बनने वाली dish है। बच्चे भी इसे बहुत आसानी से बना लेते हैं।

एक बार try ज़रूर करें। बाकी यह ‌हमारा दावा है कि अगर आप ने एक बार बना लिया, तो बार-बार बनाएंगे 😊


Friday, 31 March 2023

Article : एक सुबह नवरात्र वाली

 एक सुबह नवरात्र वाली 



इस बार नवरात्र के अष्टमी वाले दिन सुबह सुबह ही कुछ सामान लेने के लिए घर से निकले थे।

ऐसा बहुत दिनों बाद हुआ था कि हम सुबह सुबह निकलें वो भी अकेले...

क्योंकि शादी के बाद से ही हम दोनों साथ ही जाते थे बाज़ार, या कभी यह अकेले जाते थे।

पर इस बार सप्तमी की रात यह देर से लौटे थे और अष्टमी - नवमी में कोई छुट्टी नहीं थी, कि दोपहर में नींद पूरी कर लें तो अष्टमी के दिन, इनका जल्दी उठने का कोई विचार नहीं था।

और बिटिया?

आज कल के बच्चे, उनके तो कहने ही क्या, वो तो रात को ही दिन बना कर रखते हैं, घंटों देर रात तक पढ़ते हैं तो उनसे सुबह बहुत जल्दी उठने की उम्मीद करना ही ग़लत है।

तो सोचा, सुबह हम ही चले जाते हैं।

Maid 7: 30 तक आ जाती है तो हमारा target उसके आने से पहले लौट आना था। 

साथ ही क्योंकि किसी की छुट्टी नहीं थी, तो सुबह के काम की भागदौड़ भी पूरी थी और माता रानी की पूजा भी...

तो बस सुबह 5 बजे उठ कर नहा धोकर, माता रानी की पूजा अर्चना कर के, बेटी का tiffin ready किया, खाने की सारी तैयारियां कर दी।

और 6:45 पर चल दिए बाज़ार.. 

बहुत दिनों बाद, सुबह निकल थे। जैसा कि आप सब जानते हैं, इस बार दिल्ली और उत्तर प्रदेश से गुलाबी ठंड का मौसम जा ही नहीं रहा है तो बस उस दिन भी मौसम गुलाबी ही था। बीच-बीच में ठंडी हवाओं के झोंके भी चल रहे तो उनसे सिरहन सी दौड़ जाती थी। 

सुबह का समय था तो ट्रेफिक भी नहीं के बराबर था, अतः बहुत शांति थी। इस वजह से हर हलचल दिखाई भी दे रही थी और सुनाई भी दे रही थी।

सुबह का समय था तो बहुत सी दुकानें अभी भी बंद थी, लेकिन चंद दुकानें और ठेलों पर साफ सफाई आरंभ हो चुकी थी।

कहीं झाड़ू लग रही थी तो कहीं dusting हो रही थी। वहीं कुछ दुकानों की साज सज्जा प्रारंभ हो चुकी थी। सजती हुई बड़ी बड़ी दुकानें मानो इठलाकर अपनी सफलता की कहानियां कह रही थीं। 

कुछ ठेले वाले अपने ठेले पर फलों या सब्जियों को सजा रहे थे।

हांलांकि, जो ज्यादा सफाई दार दुकानदार थे, वो दुकान के साथ साथ दुकान के सामने की सड़क पर भी झाड़ू लगा रहे थे, कुछ-एक पानी का छिड़काव भी कर रहे थे।

मंदिरों में भी साफ-सफाई हो चुकी थी। वहां पर भजन चल रहा था। कुछ लोग, जिनकी शुरुआत ही देव दर्शन से होती है, वो पूजा अर्चना के लिए मंदिर में मौजूद थे। कुछ अष्टमी होने के कारण मंदिर में आए थे। इसलिए मंदिर के घंटे-घड़ियाल भी बीच-बीच में बज रहे थे।

कुल मिलाकर, शांति और ताजगी से भरपूर माहोल था। हम ने दुकान पहुंच कर सामान खरीदे और लौट चले घर की ओर...

7 बजे के ऊपर का समय हो चुका था।

लौटते समय बहुत से घरों से हवन होने की खुशबू आ रही थी, कहीं कहीं से शंखनाद भी सुनाई दे रहा था..

लौटते समय थोड़ी थोड़ी दूरी पर कन्याओं की टोली दिखाई दे रही थी, सभी अपनी बातों में खोई हुई...

इसमें कुछ कन्याएं बहुत छोटी थी, शायद 3-4 साल की होंगी। उनकी टोली में 3 साल से 12 साल तक की कन्याएं थीं। सभी भारतीय परिधान में, कोई सलवार सूट में तो कोई लहंगा-चोली में... सभी सजी-धजी थीं।

सभी बहुत ही खूबसूरत लग रही थीं, उनके चेहरे की खुशी से ऐसी दिव्यता आ रही थी, मानो साक्षात माता रानी के नौ रुपों के दर्शन हो रहे हों...

उन्हेंं देखकर पहले तो मन में यही आया कि कन्याओं को खाने जाने के लिए इतना तैयार होकर आने की क्या आवश्यकता?

पर अगले ही पल विचार आया कि यह सब गरीब घरों की बच्चियां हैं। जहां दोनों समय खाना नसीब हो, यह भी आवश्यक नहीं है। फिर यह तो कन्या हैं, इन्हें तो खाना सबसे आखिर में और बचा खुचा ही मिलता होगा...

और आज तो इन्हें ना केवल खाना मिलेगा, बल्कि बहुत ही अच्छा और स्वादिष्ट खाना मिलेगा। फिर खाने के साथ ही, रुपए, पैसे, तोहफा आदि भी मिलेगा। लेकिन उसके साथ जो सबसे बड़ी चीज़ है, वो है importance, भरपूर सम्मान!.. जो इन्हें साल में दो बार 10-12 साल की होने तक मिलता है...

सच है ना, जिस कन्या के जन्म से ही पूरा घर शोकाकुल हो जाता है। नवरात्र में उसको ही देवी रुप में पूजा जाता है। नवरात्र में उन्हीं कन्या का बुलावा, छोटे छोटे घरों से लेकर बड़े बड़े महलों तक के लिए आता है...

ऐसे में उनके लिए साल में यह दो बार के दिन, किसी महोत्सव से कम नहीं हैं और महोत्सव में तो सजना-धजना बनता ही है।

घर पहुंच कर, एक अनोखी अनुभूति का एहसास था, सुबह की ताजगी और लौटते समय में कन्याओं के अधरों की मीठी मुस्कान ने दिल को भीतर तक सुख से भर दिया था।

हम 7:20 पर घर आ चुके थे। घर में पति, बेटी-बेटा सब सो रहे थे। Maid भी अभी तक नहीं आई थी। हम अपने बाकी कामों को ख़त्म करने में जुट गए।

थोड़ी देर में सब उठ गए, maid भी आ गई थी और दिन चल पड़ा अपनी रफ़्तार से...

पर क्या सभी घरों में और समाज में हर रोज लड़की को देवी रुप में मान सम्मान मिल सकता है? 

अगर आप सच में देवी भक्त हैं तो जरूर मिल सकता है😊 तो सोचिएगा जरुर ...

अम्बे मैया की जय 🚩