Friday, 31 May 2024

Article : कारण भीषण गर्मी का

गर्मी अपने पुरजोर पर है, हर जीव त्राहि-त्राहि कर रहा है। फिर वो पेड़-पौधे हों या जीव-जन्तु, या हों पशु-पक्षी या इंसान, सब की हालत त्रस्त है।

ना पानी है ना छाया..., है तो बस कंक्रीट की दीवारें और पैसों की माया। और इसके जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ हम इंसान हैं और हमारा हद का स्वार्थ और अथाह लालच।

आधुनिकता की अंधी दौड़ और बेपनाह पाने की जिद्द ने हमें इस कगार पर ला दिया।

सोचिए जरा एक बार…

कारण भीषण गर्मी का

हमें नदी से पानी नहीं रेत चाहिए, वृक्ष से छाया नहीं लकड़ी चाहिए, पहाड़ों से औषधि नहीं पत्थर चाहिए, खेत से अन्न नहीं नकदी फसल चाहिए।

बस इस अंतहीन भूख ने नदियों को सुखाकर रेत समेट ली, और बना दी चौड़ी कंकरीली सड़क, पहाड़ तोड़कर बटोर लिए पत्थर मकान के लिए और पेड़ों का अस्तित्व बदलकर नक्काशीदार खिड़की और दरवाज़े बना डाले।

और अन्न, उसका तो कहना कि क्या, थोड़ा ज्यादा अनाज, थोड़ा और, थोड़ा और की इच्छा ने अन्न को धीमे-धीमे, slow poison बना दिया है। मतलब अन्न, जो कि जीवनदायनी होना चाहिए, वो और की चाहत में मौत का सामान हो गया ...

वाह रे इंसान! क्या छोड़ा पृथ्वी पर उसके अस्तित्व के लिए, उसे तुम्हें खुशहाल रखने के लिए?

कितनी सटीक हैं यह lines, जिसने भी लिखी है :


अब भटक रहे हैं !!

सूखे कुओं में झाँकते,

रीती नदियाँ ताकते,

झाड़ियां खोजते लू के थपेड़ों में,

बिना छाया के ही हो जाती सुबह से शाम !!

और गली-गली ढूंढ़ रहे हैं आक्सीजन,

फिर भी सब बर्तन खाली !!

सोने के अंडे के लालच में,

मानव ने मुर्गी मार डाली !!


बस सिर्फ यही और यही कारण हैं, भीषण गर्मी के...

और आपको पता है, प्रकृति में वो क्षमता है कि वो हर क्षण अपने को revive कर सकती है, अगर आज से भी हम प्रकृति को संवारने की ओर ध्यान केंद्रित करेंगे तो वो फिर से जीवन को सुख और समृद्धि से भर‌ देगी, यकीन ना हो तो याद कीजिए, lockdown के बाद पूरी प्रकृति rejuvenate हो गई थी... मात्र चंद महीनों में...

जीवन के लिए ज़रूरी है, जीवन प्रकृति का...

उसमें मौजूद रहना नदी, पेड़, पहाड़, दरिया, पशु-पक्षी का…

अगर सुख-चैन चाहिए तो इस बात का ध्यान तो रखना ही पड़ेगा…

दीपावली और होली पर उधम मचाने वालों, कुछ ध्यान दिनभर चलते AC और दौड़ती कारों पर रोक लगाने पर भी देना, त्यौहारों से रौनक कम करने से ज्यादा ज़रूरी है, अपने सुख का कुछ परित्याग...

कर सकेंगे??

Thursday, 30 May 2024

Satire : हाय हाय गर्मी

कुछ दिनों पहले ठंड पड़ रही थी, नहीं-नहीं हद की ठंड पड़ रही थी। इतनी की दांतों के साथ-साथ हड्डियां भी कीर्तन कर रही थी, और हवन भी चल रहा था शरीर में।‌ 

हवन! पर वो कैसे?

बताते हैं, हर बार मुंह खोलने के साथ ही धुआं जो निकलता था। 

सोचा चलो, किसी बाबा जी या किसी ओझा से बात की जाए तो शायद कुछ अच्छा हो जाए।

बारी बारी से दोनों के पास गए...

दोनों ने आश्वासन दिया, "बच्चा! परेशान मत हो, चंद दिनों की बात है, फिर सब अच्छा ही अच्छा..."

अपन भी लौट आए, पर अपने को कंपकंपाने से ना बचा पाए।

पर बात सही थी, ठंडक गुज़री, गर्मी आई...

हाय हाय गर्मी


पर यह क्या, अपने संग मच्छरों की बारात ले आई।

जहां देखो, मच्छरों की गुनगुनाहट, उनके ही प्रेम की गर्माहट...

चाहे जितने भी मार लो, उनकी बढ़ती जनसंख्या रोक ना पाएँ।

कछुआ छाप, mortein, all-out, fast card सब के सब fail... मच्छर हद के, कि जीवन हो जाए अझेल...

फिर अपन दोबारा भागे, अब कुछ करो उपाय, मच्छर से कैसे जान बचाएं...

दोनों ने आश्वासन दिया, "बच्चा! परेशान मत हो, चंद दिनों की बात है, फिर सब अच्छा ही अच्छा..."

सचमुच ऐसा ही हुआ, चंद दिनों के बाद, मच्छर रहे ना छिपकली, जाने कहां नदारद हो गए, पर हमें सुख चैन दे गए...

आह हा हा! पर यह क्या अपन भी अंडे की तरह उबलने लगे, सिर से लेकर पांव तक जलने लगे।

हर जगह, अब तवा-सी नज़र आती है, बैठते ही तशरीफ़ जल जाती है...

टस-टस पसीने की धार, गर्मी अपरम्पार!

इधर-उधर सब जगह हर कोई चिल्लाए, गर्मी-गर्मी, हाय-हाय, चैन कहीं मिल ना पाए।

ना पंखा ना कूलर भाए, दिन रात AC चलाए, फिर बिजली का बिल सरपट दौड़ लगाए...

घड़े, सुराही का पानी रास ना आए, उससे अब कहाँ प्यास बुझ पाए...

हाय-हाय गर्मी, तू जल्द चली जा, फिर लौट के ना आ, कुछ दिन तो सुख के बिताएँ, कोई तो हो ऐसा मौसम, कि चैन आ जाए।

इस पर बाबा जी और ओझा एक स्वर में बोले, "चैन इंसान को कहीं नहीं आता है, चंद दिनों का सुख, फिर दुःख ही दुःख नजर आता‌ है..."

Tuesday, 28 May 2024

India's Heritage : कुछ खेल सनातन के

किसी भी धर्म, सभ्यता और संस्कृति को बढ़ावा देना हो, तो उसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि वो इस तरह से frame किया जाए कि वो easily understandable हो, interesting हो और उसे सीखने-समझने के लिए बाध्यता ना की जाए।

वैसे तो सब धर्मों में सिर्फ और सिर्फ हिन्दू धर्म ही ऐसा है, जिसको अपनाने के लिए कभी, किसी को बाध्य नहीं किया जाता है। बाकी सभी धर्म अपने विस्तार के लिए लोगों को कभी विवश करके तो कभी प्रलोभन देकर अपने धर्म को मानने के लिए बाध्य करते हैं।

पर आखिर कब तक हिन्दुत्व का विस्तार करने के लिए, उसकी सर्वश्रेष्ठता का प्रचार करने के लिए कुछ नहीं किया जाएगा।

कुछ खेल सनातन के


सब धर्मों में आने वाली पीढ़ी को उसकी महत्ता, उसकी सर्वश्रेष्ठता का ज्ञान दिया जाता है। पर हम हिन्दू, हम पर तो आधुनिकता का‌ ऐसा चश्मा चढ़ा है कि हम तो अपने बच्चों को हिन्दुत्व के विषय में कुछ नहीं बताते हैं।

हमारी पीढ़ी ने तो फिर भी रामायण पढ़ी है और उसका पाठ भी कर लेते हैं। साथ ही धन्यवाद है दूरदर्शन का, कि उसमें मनोरंजन के नाम पर रामायण और महाभारत जैसे serials दिखाए गये थे। और तब channel भी एक ही था तो लोगों के पास option भी नहीं था, इसलिए सबने देखा भी।

आज कल ना तो बच्चे interested हैं ऐसे program देखने में, और ना parents सोचते हैं कि बच्चों को इस विषय में जानना चाहिए।

मतलब पीढ़ी-दर-पीढ़ी हिन्दुत्व का, सनातन का ज्ञान बड़ा सा zero होता जा रहा है।

अब अगर बच्चों का सनातन धर्म में रुझान बढ़ाना है तो एक कदम आगे का सोचना पड़ेगा। यह सोचा जा रहा है कि कैसे हम अपने बच्चों को सनातन धर्म के विषय से अवगत कराएं।

इसके लिए एक बेहद ही आकर्षक योजना बनाई जा रही है, और वो‌ है gaming : 🎮

Video games ऐसे game हैं, जो आज लगभग हर बच्चे की पहुंच तक आ गया है।

ऐसे में इस तरह के game plan किए जा रहे हैं, जो कि सनातन धर्म से जुड़े हुए हैं। जिसके hero हैं :

  • प्रभु श्रीराम
  • भगवान कृष्ण
  • गौतम बुद्ध
  • गुप्त साम्राज्य के सम्राट विक्रमादित्य
  • गुप्त साम्राज्य के सम्राट समुद्रगुप्त
  • मौर्य साम्राज्य के सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य
  • मौर्य साम्राज्य के सम्राट अशोक
  • चोला साम्राज्य के सम्राट राजेन्द्र

उनके शौर्य, उनके महान व्यक्तित्व, उनकी प्रतिभा का ज्ञान, बच्चों को खेल-खेल में ही हो जाएगा।

आप से अनुरोध है कि बच्चों तक सनातन धर्म का ज्ञान पहुंचे तो उसके लिए इतना तो कर ही सकते हैं कि बच्चों को ऐसे games provide कीजिए, प्रोत्साहित कीजिए।

हमारे बच्चे, chinese, japanese, american games को खेलें और वहां के virtual character को अपना idol समझें, उससे अच्छा है कि सनातन से जुड़ें, वास्तविकता से जुड़ें, अपनी देश की सभ्यता और संस्कृति से जुड़ें।

Gaming के through बच्चे easily, interesting way में, और बिना किसी ज़ोर-ज़बरदस्ती के सनातन से जुड़ते चले जाएंगे।

आप चाहें इसे मानें, या ना मानें, आगे सर्वत्र सनातन धर्म ही व्याप्त होगा, तो हमारे घरों में आज से ही क्यों नहीं?


जय सनातन, जय हिन्दुत्व, जय भारत 🇮🇳 🙏🏻 😊