Friday, 5 October 2018

Story Of Life : स्वाभिमान (भाग-३ )


अब तक आपने पढ़ा-रीना, बहुत ही हंसमुख, ज़िंदादिल व्यक्तित्व की स्वामिनी थी। साथ ही बहुत ज्यादा helpful भी थी।फिर भी उसकी कोई कद्र नहीं थी, बल्कि जब उसे साथ चाहिए होता था, तब कोई साथ भी नहीं देता था.....अब आगे .


स्वाभिमान (भाग-३ )   

उन्होंने वहाँ जा कर रीना के माँ- पापा से बात की, फिर रीना को बुलाया गया, जब रीना आई, तो उसके boss ने रीना से पूछा- मुझे अपना पापा बनाओगी? रीना के माँ- पापा ने भी यही पूछा, अपने boss को अपना पापा बनाओगी? रीना को कुछ समझ नहीं आ रहा था, तब उसकी माँ हँसते हुए बोली, भाईसाहब तुझे अपनी बहू बनाना चाहते हैं।
रीना हाँ करने से पहले मेरे बेटे से मिल लो, वो बाहर कार में है, साथ ही तुम्हें मेरी company भी मेरे बेटे के साथ चलानी होगी। पर जैसे मैं कहता हूँ वैसे। तुम जहाँ ना बोलना है वहाँ ना बोलोगी, दूसरों की मदद तो करोगी, पर अपने को व अपने काम को sufferराके नहीं।
रीना जब बाहर पहुंची, वहाँ उसका classmate राघव खड़ा था। उसे देखते ही रीना बोल उठी तुम?
हाँ, मैं ही तुम्हारे boss का बेटा हूँ, मुझे पापा ने तुम्हारे बारे में पहले ही सब बता दिया था, पर मैं भी पापा की शर्तों पर ही शादी करूंगा। अगर तुम्हें मैं पसंद हूँ? और पापा की शर्तें भी मान्य हों तो? राघव भी अपने पापा की तरह ही बहुत ही समझदार और सुलझा हुआ था। इतना अच्छा रिश्ता उसके लिए घर चल कर आया था। उसने हाँ कर दी। दोनों अंदर आ गए, और सबको अपनी रजामंदी, बता दी
रीना की माँ बोलीं- बेटा तुम अच्छी हो, इसलिए इतना अच्छा रिश्ता तुम्हारे लिए आया है, लेकिन हीरे की कद्र सिर्फ जौहरी को ही होती है। इसलिए अब से वही करना, जो भाईसहब तुमसे करने को बोल रहे हैं।
आगे से रीना ने सोच-समझ के लोगों की मदद करनी शुरू कर दी, और जहाँ ना कहना होता था, वहाँ ना भी बोलने लगी। अब वो सब के लिए हर समय free नहीं रहा करती थी। जब कुछ बुरा लगता था, तो वो उसे अच्छे से जाहिर करने लगी।
अब, सब लोग उसके साथ respectfully रहने लगे।

अब उसे अच्छे से समझ आ गया था, अगर आप अपने स्वाभिमान की रक्षा खुद करेंगे। तभी दुनिया भी आपको मान देगी।         

Thursday, 4 October 2018

Kids Story : कहीं भी अच्छा मिल सकता है

आज जब मैं बच्चों की कहानी लिख रही थी, तो मेरा बेटा अद्वय बोला, Mumma आज आप मेरी लिखी हुई कहानी ही blog में डालिएगा।
आज की kids' story उसी की लिखी हुई है। अगर आपके बच्चे भी कोई कहानी लिखेँ, तो हमे भेजिएगा। हम उन्हें भी डाल देंगे।

कहीं भी अच्छा मिल सकता है

अंकुर पने माँ-पापा के साथ दिल्ली में रहता था। उसे दिल्ली बहुत पसंद था। वहाँ उसके बहुत सारे दोस्त थे। स्कूल से आने के बाद, शाम को सारे बच्चे मिल के बहुत मस्ती किया करते थे।
वो हर weekend अपने माँ-पापा के साथ दिल्ली में घूमने भी जाया करता था। वो लोग कभी किसी monument में जातेकभी किसी mall में जाते, तो कभी park में या dine-out को जाया करते थे।
एक दिन पापा ने आकर बताया, कि उनका अगरतला में transfer हो गया है। जब ये बात अंकुर को पता चली, तो वो रोने लगा। वो कहने लगा, मैं दिल्ली से नहीं जाऊंगा। मुझे दिल्ली बहुत पसंद है। यहाँ Red Fort, Qutub Minar, India Gate, बहुत सारे parks, कितने सारे malls हैं। फिर यहाँ खाने की भी कितनी अच्छी चीज़ें मिलती हैंऔर....... और मेरे इतने सारे दोस्त.... वो भी तो नहीं होंगे वहाँ। मैं नहीं जाऊंगा अगरतला।
माँ ने समझाया, बेटा ऐसा नहीं कहते, पापा जहाँ job करेंगे, हमें वहीं रहना होगा, पापा के बिना तो हम नहीं रह पाएंगे। फिर पापा भी तो तुम्हारे बिना नहीं रह पाएंगे। क्या तुम पापा को अकेले जाने दोगे?
माँ ने कहा- बेटा कहीं भी अच्छा मिल सकता है। अच्छा चलो, तुम्हें वहाँ अच्छा नहीं लगेगा, तो हम लौट आएंगे। माँ के ऐसा कहने से अंकुर अगरतला चलने को तैयार हो गया।
वहाँ बहुत greenery थी, अंकुर को ये देखकर बहुत अच्छा लग रहा था। जब वो लोग अपने रहने की जगह पहुंचे तो, अंकुर ने देखा, वो एक bamboo house था।
उसे देख कर अंकुर खुशी से उछल पड़ा। वहीं पास में एक park भी था। घर के इतने पास park हो सकता है, ये तो कभी अंकुर सोच ही नहीं सकता था।
उसने माँ से कहा, माँ अब से हम यहीं रहेंगे। अंकुर बहुत ही खुश था, शाम को वहाँ बहुत सारे छोटे छोटे बच्चे आ गए थे। अंकुर सब के साथ खेलने लगा।
घर आकर अंकुर बोला, माँ आप ठीक कहती थीं। कहीं भी अच्छा मिल सकता है।माँ ने कहा-हाँ बेटा, हमे खुश होकर भविष्य को अपनाना चाहिए।
Advay Sahai  

Wednesday, 3 October 2018

Story Of Life : स्वाभिमान (भाग -२)

अब तक आपने पढ़ारीना, बहुत ही हंसमुख, ज़िंदादिल व्यक्तित्व की स्वामिनी थी। साथ ही बहुत ज्यादा helpful भी थी।फिर भी उसकी कोई कद्र नहीं थी, अब आगे....... 

स्वाभिमान (भाग -२)

Diamond ring की बात सुनते ही वो बोली मैं, उसको जाने के लिए बोल देती हूँ।
अरे उसे खराब लगेगा, अपना काम छोड़ के आई होगी। नीरज बोला।
अरे कोई नहीं, उसे कुछ बुरा नहीं लगेगा। वो तो हमेशा ही मुस्कुराती रहती है।
निशा ने बड़े ही रूखे तरीके से रीना को बोल दिया, कि तुम अब चली जाओ, नीरज आ गए हैं। पर तुम तो laptop देने वाली थी, मेरे computer job के लिए....... रीना ने कहा
अरे पर अब तुम्हें laptop की क्या जरूरत है, office ही तो जाओगी, वहीं कर लेना अपना काम। निशा ने रीना से बड़ी ही बदतमीजी से बोल दिया।
रीना office जाने के लिए auto लेने के लिए मुड़ी भी ना थी, कि निशा नीरज के साथ अंदर hospital में चली गयी।
Office लौटने में उसे इतना traffic मिला कि उसके 2 घंटे रास्ते में ही बर्बाद हो गए।
Office पहुँच कर उसने अपना काम निपटाने की बहुत कोशिश की, पर उसका काम खत्म नहीं हुआ। काम खत्म करने के लिए उसे अगले दिन सुबह जल्दी आना पड़ा।  
आज office में सुबह से ही कुछ अलग सी चहल-पहल थी। उसने निशा से पूछा, आज क्या है?
वो बड़े ही आश्चर्य भरी आवाज़ में बोली, तुम्हें नहीं पता,? आज तेरे मसीहा का retirement  है।
क्या .... आज बॉस retire हो रहे हैं? लो जी बड़ी भोली हैं, ये। इन्हें कुछ पता ही नहीं रहता है। फिर वो बाकी साथियों से खुसफुसाने लगी। अच्छा है जा रहे हैं, इसके तो बहुत ही हिमायती बने रहते थे।
boss की farewell party खत्म हुई तो उन्होंने रीना को अंदर बुलाया, और कहा- बेटा मुझे अपने retirement का अफसोस नहीं है, वो तो होना ही था। पर तुम जैसी अच्छी लड़की का साथ छूट जायेगा। मेरे जाने के बाद, तुम ऐसी ना रहना। सोच-समझ कर ही किसी की मदद करना। उसमे अपने काम को और अपने आप को suffer मत कराना, वरना जब तुम्हें जरूरत होगी, कोई भी साथ नहीं देगा। सब मतलबी हैं, तुमसे अपना कहा करवा लेंगें। पर जब तुम्हारे लिए करने की बारी आएगी, तो साफ मुकर जाएंगे।

नए boss आए, वो नहीं जानते थे कि रीना कैसी है? रीना का स्वभाव अभी भी दूसरों कि मदद का बना रहा। जिस के चलते आए दिन रीना का काम incomplete  रह जाता था। और आए दिन रीना अपने boss से डांट खाया करती। आखिरकार तंग आकर boss ने उसे inefficient worker के allegation के साथ job से निकाल दिया। जब boss उसको terminate कर रहे थे, तब एक भी उसकी सफाई देने के लिए आगे नहीं आया। बल्कि सब ने boss की ही हाँ में हाँ मिला दी।
जब ये बात उसके पुराने boss को पता चली, तो वे रीना के घर आ गए।. 

रीना के पुराने बॉस ने आकर क्या किया, जानते हैं...... स्वाभिमान (भाग -३)