Monday, 12 November 2018

Tip : Special Remedial Tips


Special Remedial Tips 

आज कल की बीमारियों की बढ़ती समस्याओं को देखते हुए हम कुछ अनोखे tips आप के साथ share करना चाह रहे हैं। ये सभी मेरे द्वारा आजमाए हुए हैं, आपको विश्वास नहीं होगा, पर ये कारगर सिद्ध होते हैं।

अगर आप भी बहुत परेशान हों तो, एक बार इन्हे आजमा कर देख जरूर लीजिएगा। अगर मेरी इन tips से किसी का भी दर्द कम हो जाएगा, तो लगेगा हम आपके काम आ गए।

आज की मेरी ये tip दाँतों के दर्द के लिए है  
दाँत का दर्द – चुटकी(mouth freshner)

दाँत का दर्द – आज कल आए दिन 
सबके ही दांतों में दर्द की परेशानी रहने लगी है, कभी कभी ये परेशानी रात में शुरू हो जाती है, और दर्द इतना ज्यादा होता है कि बर्दाश्त  करना संभव नहीं होता है, पर रात में डॉक्टर तो मिलते नहीं हैं। ऐसे समय के लिए आप 
अपने पास चुटकी (mouth freshner) रखें। जी हाँ “चुटकी” खाने से आपको तुरंत ही आराम मिल जाएगा।

दरअसल चुटकी में पाये जाने वाले mint की मात्रा दवा का काम करती हैं, पर mint बहुत कड़वा होता है, तो आप उसे ऐसे ही नहीं खा सकते हैं। पर इसमे मिले होने के कारण ये बहुत अच्छा स्वाद देता है। इसका भी पाउडर वाला भाग ज्यादा असरकारक होता है। कभी कभी ये इस हद तक दर्द ठीक कर देता है, कि डॉक्टर के पास जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती है।
पर डॉक्टर के पास जाने तक या दर्द ठीक होने तक ही खाएँ, उसके बाद खाना बंद कर दीजिये। इसे अपनी आदत ना बनाएँ।

डिस्क्लेमर: यह tip केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

Sunday, 11 November 2018

Story Of Life : क्यूँ नहीं वो स्वाद - (भाग -२)

क्यूँ नहीं वो स्वाद - (भाग -२)


अब तक आप ने पढ़ा,अनंत के घर खाना बनाने वाली खाना बनाती है, वो बहुत अच्छा खाना बनाती है, फिर भी अनंत को कुछ कमी सी लगती है..... अब आगे   
रात को अनंत माँ के कमरे में आ गया, और उनसे पूछने लगा। माँ आप ने भी तो वही सब डाला था, जो कुंता दीदी डालती है, तो स्वाद में अंतर क्यूँ था?

नहीं बेटा, खाना मसाले से नहीं भाव से बनते हैं। और हम दोनों के खाने में उसी का अंतर था।
माँ मैं कुछ समझा नहीं? देख बेटा जब मैं आटा गुँधती हूँ, तो जो तुम्हें पानी दिखता है, वहाँ मेरा प्यार होता है, जिससे मैं आटा गूँध रही होती हूँ।

जब सब्जी बनाती हूँ, तब मेरे मन में ये भाव रहते हैं इसे मेरा बच्चा खाएगा, तो ऐसी सब्जी बने कि वो उसे बहुत ही स्वादिष्ट लगे। उसके लिए चूल्हे की मद्धम आंच रखनी होती है और थोड़ी आंच अपने प्यार की देनी होती है। 

वो दो रोटी ज्यादा खा ले, पर भूखा नहीं रहे। और मेरा बनाया खाना ऐसा हो, कि इसे खाकर मेरा बच्चा सेहतमंद हो जाए। उसके लिए सही मात्रा में तेल मसाले डालेंगे। जो बच्चे को नहीं पसंद है, उसे नहीं डालेंगे।  

जबकि जो खाना बनाने आती हैं, वो इस सोच में आती हैं, कि जल्दी से खाना बने, और वो अपने घर जाएँ, अपने बच्चों के पास। उसके लिए वो जल्दी जल्दी तेज़ आंच पर खाना बनाएँगी, उसके लिए वो ज्यादा तेल मसाला डाल देती हैं। 
उससे खाना जल्दी बन जाता है, उन्हें सेहत की कोई परवाह नहीं रहती। और अगर उनसे एक भी ज्यादा रोटी बनाने को बोल दो तो, वो तुरंत टाइम देखेंगी। अब और नहीं बना पाऊँगी, कल जल्दी आकर करती हूँ। और वो कल आए, ऐसा ये कभी नहीं चाहती हैं। अनंत को कुछ समझ आया और कुछ नहीं। 

आज माँ को लेकर नीति हॉस्पिटल गयी थी। मैं घर पहुंचा, तो पाया, आज कुंता दीदी नहीं आयीं थी। फोन किया तो, वो बोली साहब, आज सिर्फ आपका ही खाना बनना है, माँजी और मेमसाहब तो वहीं खाएँगी, आप मेरे घर से खाना ले जाइए। आज मेरा मुन्ना बीमार है। रहने दीजिये, मैं मैनेज कर लूँगा। अरे साहब, आज हम गरीबों के घर का ही बना खा लीजिये, मैंने आपके लिए भी बना लिया है।

मैं वहाँ से खाना ले कर आ गया। आज के खाने में माँ के हाथ जैसा ही स्वाद था। मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था, कि ऐसा खाना ये घर में क्यूँ नहीं बनातीं हैं। उनके घर से ज्यादा अच्छे तेल-मसाले और सब्जी हम देते हैं।

तभी माँ भी आ गईं। क्या हुआ? तू इतने गुस्से में क्यूँ है? माँ आप खाना खाइये, आज मैं कुंता दीदी के घर से खाना लाया हूँ। इसमें बिलकुल आपके हाथ जैसा ही स्वाद है।

होगा ही बेटा, वो खाना उन्होंने अपने बेटे के लिए जो बनाया है, तो वो उसी भाव में बना होगा जिसमें मैं तुम्हारे लिए बनाती हूँ।

आज समझ आया, कि माँ क्या समझा रहीं थीं। माँ के हाथ के खाने जैसा स्वाद क्यूँ नहीं आता है। वैसे भी जहाँ भी प्यार होगा, हीं संतुष्टि और तृप्ति रहेगी।

Saturday, 10 November 2018

Story Of Life : क्यूँ नहीं वो स्वाद

क्यूँ नहीं वो स्वाद


अनंत और नीति दोनों ही job करते हैं। तो खाना बनाने के काम को manage करना बहुत difficult होता था। तभी पड़ोस की भाभी जी से नीति की बात हुई। वो बोली, कुंता मेरी खाना बनाने वाली अच्छा खाना नाती है, मैं उसे भेज दूँगी।
उन्होंने उसे भेज दिया। साफ-सुथरी सी अच्छे स्वभाव की थीं वो। उम्र में बड़ी थीं, तो हम उन्हें दीदी कह कर बुलाते थे। Time की बड़ी ही पाबंद थीं। खाना भी अच्छा ही बनाती थीं। पर ना जाने क्यूँ, वो स्वाद नहीं आता था।
समय यूं ही कट रहा था। एक दिन माँ ने बताया कि वो आ रही हैं। मैं उन्हें लेने station पहुंच गया। माँ देखते ही गले लग गयी। रास्ते भर माँ से घर की ही बात हो रही थी। वो बोली, बहू बता रही थी, अच्छी cook मिल गयी है। तब क्या हो गया रे? तू क्यूँ दुबला हो रहा है? वो अच्छा खाना नहीं बनाती है?
नहीं माँ, कुंता दीदी तो अच्छा खाना ही बनाती हैं। पर ना जाने क्यूँ वो स्वाद नहीं आता है। मन संतुष्ट नहीं होता है।
अच्छा चल, मैं आ गयी हूँ, मैं ही बना के कुछ दिन खिला दूँगी। अरे, नहीं माँ, आप यहाँ आराम करने के लिए आयीं हैं। मेरी तो छोड़ दीजिये, नीति भी आपको खाना नहीं बनाने देगी। हाँ घर तो चल, मैं बात कर लूँगी बहू से भी।
घर पहुंचे, तो नीति भी जल्दी ही आ गयी थी। उसकी मुझसे भी ज्यादा माँ से पटती थी। जब माँ ने उसे देखा, तो गुस्सा ही हो गईं। नीति तुम लोगों ने क्या हाल बना लिए हैं। कैसे लग रहे हो? अब जब तक मैं हूँ। खाना मैं ही बनाऊँगी। नीति बोली माँ, आप खाना बनाने के लिए हमें जबरदस्ती डांट ना लगाएं। हम बिलकुल ही ठीक हैं। अनंत तो हैं ही ऐसे, आपको देखेंगे और बस आपके हाथ का ही खाना चाहिए।
अच्छा एक दिन छोड़ के बना दूँगी, माँ ने कहा। नीति बोली-अच्छा आप तीन दिन के gap में बनाएँगी। और हाँ वो भी एक दम हल्की-फुलकी चीज़ें। ठीक है मेरी माँ, आराम ही कराती रहा कर मुझे, माँ ने प्यार से नीति के सिर पर हाथ फेरा।
तीन दिन बाद माँ ने रोटी और आलू- टमाटर की सब्जी बनाई। उस दिन अनंत ने दो और नीति ने एक रोटी ज्यादा ही खा ली। और तृप्ति तो ऐसी हुई, कि लगा ये स्वाद तो, 5 स्टार के खाने में भी नहीं आता है।
रात को अनंत माँ के कमरे में आ गया, और उनसे पूछने लगा। माँ आप ने भी तो वही सब डाला था, जो कुंता दीदी डालती है, तो स्वाद में अंतर क्यूँ था?
नहीं बेटा, खाना मसाले से नहीं, भाव,से बनाते हैं। और हम दोनों के खाने में उसी का अंतर था।
माँ मैं कुछ समझा नहीं?

माँ ने अनंत को क्या समझाया, जानते हैं, क्यूँ नहीं वो स्वाद भाग -२  में