Sunday, 30 December 2018

Special Remedial Tip : Tongue Bite

We all experience the problem of tongue bite, once and more in a life time. Sometimes, it happens while talking and while chewing.
As our teeth are very sharp it causes pain and sometimes blood, too. So, here's a tip for you, which will give you an instant relief.

Melting chocolate

To get an instant relief in case of tongue bite, keep a small block of Cadbury Dairy Milk or any similar tasting chocolate (without nuts, caramel, etc.).
Now, don't chew the chocolate but let it melt. In this tip, do remember that the chocolate shouldn't be white chocolate, dark chocolate or of coffee taste.

If the flow of blood still persists, seek some medical help.

Friday, 28 December 2018

Story Of Life : कोख (भाग- २)


अब तक आपने पढ़ा कि.....  रधिया की माँ कैसे मासूम लड़कियों को अपना शिकार बनाती  थी, पर एक दिन उसे पुलिस पकड़ के ले गयी, माँ के जेल जाने से शातिर रधिया युक्ति सोचने लगती है........  

कोख (भाग- २)

अगले दिन भगवा वस्त्र पहन कर वो उस दंपति के घर पहुँच गयी। और उस स्त्री से मिल कर पूछने लगी, क्या हुआ? आपको बच्चे नहीं हुए हैं। वो बोली नहीं, कोख में तो आ जाते हैं, पर फिर संभाल नहीं पाते हैं। रधिया बोली, तो आपने किसी और की कोख क्यों नहीं ली? किस की लूँ? ये सब क्या इतना आसान है? रधिया बोली, मैं आपका दुख दूर करने ही आई हूँ। पर इन सब में कुछ पैसे खर्च होंगे। पर आपके पास पैसे की क्या कमी है। आपको अपना वारिस मिल जाएगा। रधिया की ऐसी बातें सुन कर वो तैयार हो गयी। रधिया बोली, मैं एक हफ्ते बाद आऊँगी। वहाँ से निकलते ही वो एक गरीब बस्ती में गयी। जहाँ औरतों के बच्चे तो थेपर उन्हें खिलाने को कुछ नहीं था।
रधिया ने रूपा को बोला, तेरे दो दो बच्चे हैं, पर तू उन्हें कुछ खिला तो पाती नहीं है। मेरे संग चल तुझे अमीर बना दूँगी। 
धंधा करवाएगी? रूपा बोली। अरे चल, कैसी गंदी बात कर रही है, तू? रधिया बोली। नहीं रे मैं तो पुण्य का काम करवाउंगी।
अच्छा वो क्या है, रूपा ने पूछा? तेरी कोख किराए पर चाहिए, बस।
फिर तू भी मालामाल, और वो भी खुश। पर सुन तू उनसे कुछ नहीं बोलेगी। मैं ही सारी बात करूंगी। रूपा अनपढ़ थी, फिर उसे पैसों की बहुत जरूरत भी थी। उसने हाँ कर दी।
रधिया दंपति से मिली, फिर उसने सौदा 10 लाख में तय किया। दस लाख उस दंपति के लिए कोई ज्यादा नहीं थे, इसलिए वो तुरंत मान गए।
रधिया ने पाँच लाख, डिलीवेरी के पहले रूपा के रख-रखाव के लिए ले लिए। उसमें से उसने रूपा को हर महीने के 8,000 देने शुरू कर दिये। जिससे रूपा और उसके बच्चों का पेट भरने लगा। और उसे कहा कि 2 लाख डिलिवरी होने के बाद दूँगी। रूपा के लिए 8हजार ही काफी थे। 2 लाख तो वो कभी सोच भी नहीं सकती थी। उसे रधिया भगवान लगने लगी। यही हाल उस दंपति का था। बच्चा मिलने की चाह में उन्होंने रधिया को 2 लाख और भी दे दिये, अब रधिया रूपा को 10,000 देने लगी। बहुत ही सफलता पूर्वक डिलिवरी हो गयी। दंपति बच्चा पा कर खुश थे। और रूपा अपने बच्चों की भूख मिटा कर।
दंपति की खुशियों की खबर जब उनके जानने वालों को लगी, तो उन्हें भी अपने दुख दूर करने का रास्ता मिल गया। रधिया के पास वैसी ही 4 दंपति और आ गयी उधर रूपा की बस्ती में भी रूपा के सुख का कारण पता चला, तो वहाँ से और औरतें भी आ गयीं।
अब तो रधिया का बिजनेस चल पड़ा। वो सभी को अच्छा पैसा देती। और खुद भी अच्छा कमाने लगी। अब तो उसने वारिस नाम से एक  अस्पताल भी खोल लिया, जिसमे प्रेग्नेंट लेडिज को सब सुविधा प्रदान होती थी। डॉक्टर भी रख लिए, तो डिलिवरी के लिए बाहर भी नहीं जाना पड़ता था। वो किसी भी औरत को 2 बार से ज्यादा बच्चे पैदा नहीं करने देती थी।
5 साल बाद जब उसकी माँ जेल से वापिस आई। तब तक तो रधिया का खूब नाम हो चुका था। सब बड़े लोगों में उसका उठना बैठना था। और पुलिस भी कभी उसे पकड़ने नहीं आई। रधिया की माँ उसके गले लग के बोली, बेटा मैं तो इतना बड़ा सोच ही नहीं पायी। तू तो मुझसे भी आगे निकल गयी। और सबमें तेरा नाम भी हो गया। मैं सोच ही नहीं पायी, औरत से महंगी तो उसकी कोख है। इसमें सम्मान भी है, और जो तेरे जैसा हो, वो पैसे भी कमा ले।

Thursday, 27 December 2018

Story Of Life : कोख

कोख


आज कल के लड़के-लड़कियां बहुत ही जल्दी तुनक जाते हैं, जिसका फायदा रधिया की माँ को उठाना खूब आता था। वो ऐसी ही लड़कियों की तलाश में रहा करती थी। वो ऐसी लड़कियों को जब पा जाती, तो उन्हें उनके माँ-पापा के खिलाफ खूब भड़काती। और साथ ही उनके खूब मज़े भी कराती जिसमें उन्हें खूब फिल्म दिखाना, होटलबाजीराना शामिल था
और जब वे अपने घर वालों से पूरी तरह से चि जातीं, और उसके चंगुल में पूरी तरह आ जातीं। तब उनसे धंधे का काम करवाती। उसके कर्जे में डूबी वो बेबस हो जातीं, उसकी बात मानने के लिए। कोई पुलिस कम्प्लेंट भी ना कर पाती। कोई कुछ बोलता भी तो, वो यही बोलती, मैई बोलीच क्या तुमसे, अपनी मर्ज़ी से आई थी ना तू। एक तो मैं तेरे काम आई, और तू मुझ कू ही बोलेगी। अपुन भी तो करती ना। फिर उसमें लगता कुछ नहीं है, खाली मिलताईच है। तेरे को नहीं मांगता तो मत कर। बस मेरे पैसे चुका दे। मेरे को क्या करना तेरे से। अपने पैसे मांगती है मैं तो बस। पैसा चुका दे, और निकल ले।
पर एक दिन पुलिस वालों को पता चल ही गया। और उसे पुलिस पकड़ के ले ही गयी। माँ के जेल जाने से धिया को पैसे की कमी पड़ने लगी। पर वो माँ से भी ज्यादा शातिर थी।
उसने सोचा, कोई ऐसा काम किया जाए जिसमें एक पैसे भी ना लगे, सबको पता भी रहे, पर ना पुलिस का लफड़ा हो ना ही शरम की बात हो।
एक दिन वो मंदिर में बैठी यही सब सोच ही रही थी, कि एक बड़ी सी गाड़ी से एक दंपति उतरे। प्रसाद, फूल- माला आदि ले कर भगवान से प्रार्थना करने लगे, हे प्रभु, इतना दिया है, तो एक संतान भी दे दें। उसके बिना सब अधूरा है।
ये प्रार्थना करके वे चले गए। तो राधिया ने पुजारी से पूछा ये कौन थे बाबा ? वे बोले, बहुत बड़े आदमी हैं। और ऐसे ही लोगों की संख्या बढ़ती भी जा रही है। बड़े घरों में हम लोगों के यहाँ जैसे जल्दी शादी तो होती नहीं है। फिर शादी करके भी 5-6 साल निकाल देंगे। इन सब में बच्चे पैदा करने की उम्र निकल जाती है। फिर भगवान के द्वार आएंगे, कि हे प्रभु एक बच्चा दे दें। अब इसमें भगवान क्या करें? देरी खुद करो, फिर भगवान को कोसो। यही करते हैं आजकल तो। पुजारी जी अपना बोलने में लगे थे, पर इससे रधिया को युक्ति मिल गयी कि कैसे बिना खर्चे के सम्मान का काम मिल सकता है।
वो बोली आप इनका पता जानते हैं, बाबा? अरे इन्हें कौन नहीं जानता? वो पीछे ही तो विशाल कोठी है। अच्छा बाबा, आपको पता है, मुझे भगवान जी ने कहा है, कि ऐसे जितने भी लोग हैं, मुझे सबका दुख दूर करना है। तो ऐसी कोई भी दंपति आए, तो मेरे पास भेज देना। सब के कष्ट दूर हो जाएँ शायद। और हाँ भेजना भूलना नहीं, आपके मंदिर का भी नाम होगा, ये कहते कहते वो चली गयी।
अगले दिन भगवा वस्त्र पहन कर वो उस दंपति के घर पहुँच गयी.....
आखिर रधिया को क्या युक्ति सूझी, जिससे वो उस दम्पति के घर पहुँच गयी, जानते हैं कोख के भाग-२ में.....