Wednesday, 7 October 2020

Recipe : Malabar Paratha

पराठे तो बहुत बनाएं होंगे आप ने, पर अगर Malabar Paratha (flaky Paratha) नहीं बनाया तो क्या बनाया।

आज कल यह  restaurant में most demanding बना हुआ है।

बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को मज़ा आ जाता है, इसे खाकर।

आप Shades of Life से जुड़े हों, और यह ना बनाना सीख पाएं तो, यह बात तो सही नहीं है।

तो चलिए आज Malabar Paratha की recipe ही बताते हैं। आज ही इसे try कीजिए और पूरे परिवार को खुश कर दीजिए।

 Malabar Paratha



INGREDIENTS

Maida / plain flour - 3cup

 Rava / semolina / suji, fine - 2tbsp.

 Sugar - 1tbsp.

Salt - 1 tsp

Ghee (clarified butter ) - 2tbsp and for roasting

Olive oil  for soaking 

Method

  1. Large mixing bowl में मैदा, रवा, sugar,  salt and 2 tbsp घी लें लेंगे।
  2. Mixture को अच्छे से rumble करेंगे, जिससे flour moist हो जाए Or मोयन  properly  पूरे flour में हो जाए।
  3. थोड़ा थोड़ा पानी डालते हुए, smooth and soft dough बना लीजिए।
  4. अब इस में 2 tbs olive oil डालकर Bowl, cover कर दीजिए और 1 hour rest करने के लिए छोड़ दीजिए। 
  5. 1 hour के बाद dough को दुबारा punch and knead कर लीजिए।
  6. हमें पूरे oil के absorbs होने तक  kneading करनी है।
  7. अब dough से ball sized के गोले तोड़कर Bowl में रख लें। 
  8. इस में ¼ cup olive oil डालकर cover कर दीजिए और 1hour के लिए soak करने के लिए छोड़ दीजिए।अब  ball लीजिए और उसे rolling pin(बेलन) से gently roll(बेल) कर लीजिए।
  9. फिर उसे spread and pull करके जितना thin हो सकता है, कर लीजिए।
  10. इसे japanese fan style में fold कर लीजिए।
  11. अब इन्हें slightly pull कर लीजिए।
  12. अब इन strips को spiral roll कर लीजिए।
  13. Loose roll कीजिएगा, ज़्यादा tightly roll करने से stripes आपस में चिपक जाती हैं और फिर layer अच्छे से नहीं आती हैं।
  14. अब greased hand से pat(थपथपाते हुए) करते हुए dough को spread कर लीजिए।
  15. slightly thick roll कर लीजिए, ध्यान रखिएगा layers intact रहें।
  16. अब rolled परांठे को  गर्म तवे पर डाल दीजिए।
  17. medium flame पर  एक तरफ से पक जाने पर पलट दें। दोनों तरफ से हल्का पक जाने पर इसमें ज्यादा सा घी डालकर दोनों तरफ से golden brown and crispy होने तक पका लें।
  18. पराठे को gently crush कर दीजिए, जिससे layer separate हो जाए।


आप इसे Malai kofta  और shahi paneer के साथ enjoy कीजिए।

Malai kofta  आप को link में click करने से blog में मिल जाएगी।

Shahi paneer recipe, हम जल्दी post करेंगे।

So stay tuned.....

Tuesday, 6 October 2020

Articles : Nepotism vs Talent

Nepotism vs Talent       


आज कल nepotism का बहुत शोर मचा हुआ है, पर ये बला क्या है, nepotism?

हम में से ना जाने कितनों को इसका मतलब भी नहीं पता होगा, पर भेड़चाल में झंडे हम ने भी उठा रखें हैं और आवाज भी बुलंद कर रखी हैं। भाया, हम किसी से कम हैं के? मतलब पता हो या ना हो, result जानते हों कि ना हों, पर आवाज़ हमारी भी कम नहीं होगी किसी से। पत्थर हमारा भी दूर तलक जाएगा, चोट वो भी ज़ोर की पहुँचायेगा।

चलिये तो सबसे पहले, मतलब समझ लें, nepotism का - इसका मतलब होता है, वंशावली, सामान्य भाषा में बोलें तो, अपने वंश को अपने क्षेत्र में आगे बढ़ाना, बेटे को, बेटी को, भाई को, भतीजे को अपने क्षेत्र में आगे बढ़ाना, भाई-भतीजा वाद करना।

तो अब बात करते हैं कि nepotism कहाँ नहीं है?

एक सफल Businessman अपना business आगे किसे देगा? अपने बेटे, भाई, भतीजे को ही ना?

कोई सफल Doctor, अपना clinic भी अपनों को ही देगा ना?

एक सफल coaching वाला भी अपने लोगों को ही ना?

ये तो सारी ही बात business field की हुई। अब ये बताइये, आप जो नाम, शोहरत, रुपए-पैसे कमा रहें हैं, किसके लिए? अपनों के लिए ही ना? उन्हीं को देंगे ना?

तो अगर नेता, अभिनेता भी यही करते हैं, तो क्या गलत है? वो जिस field की समझ रखते हैं, जिस मुकाम पर मेहनत से पहुँचे हैं, तो वो भी तो अपने लोगों को उसमें आगे बढ़ाएँगे।

Nepotism से लाभ क्या है? जिनके पास, उनके बड़े ने किसी क्षेत्र में मुक़ाम हासिल किया हुआ है, उन्हें सफलता की पहली सीढ़ी चढ़ने में संघर्ष नहीं करना है।

माना की सफलता की पहली सीढ़ी तक पहुँचने में कई दिन और सदियाँ लग जाती हैं।

पर आपको पता है, जीत हमेशा talent की होती है।

इसका साक्षात उदाहरण हमारे सामने सभी युग में रहा। जो मान सम्मान, प्रभु श्री राम का था, वो लव और कुश का नहीं, जो प्रभु श्री कृष्ण का था, उनके पुत्रों का नहीं। गुरुनानक, मोहम्मद साहब का था, क्या वही सम्मान उनके पुत्रों का था?.....नहीं।

रावण, कंस, कौरव,......  जैसे लोगों के पुत्रों का भी नहीं।

विक्रमादित्य, अशोक, अकबर....... जैसे राजाओं के पुत्रों का भी नहीं।

सदियों से चली आ रही, काँग्रेस में भी नहीं, सदी के नायक अमिताभ बच्चन के बेटे का नहीं.....

लालू यादव, मुलायम सिंह यादव के बेटों का नहीं.....

कहने का मतलब है, जब ईश्वर के पुत्रों को उन जैसा सम्मान नहीं मिला, तो मामूली इंसान की औकात क्या है।

सदियों से चली आ रही काँग्रेस, राहुल गांधी के नकारेपन के कारण ताश के पत्तों सी ढेर हो गयी। वहीं मोदी जी को उनके talent ने tagline दिला दी है, मोदी हैं तो मुमकिन है। 

अमिताभ बच्चन कितने ही सफल नायक हों, पर अभिषेक बच्चन को film industry में अपना जैसा establish नहीं कर पाये।

वहीं अजय देवगन, सलमान खान, ऋतिक रोशन इन्हें भी nepotism का लाभ मिला है, पर ये अपनी जगह, film industry में अपने talent से बना पाये हैं।

कहने का औचित्य ये है, कि nepotism आपको पहली सीढ़ी पर तो पहुँचा देगा, पर आगे सफलता मिलेगी, या औंधे मुँह गिर पड़ेंगे। ये आपका talent ही decide करता है।

अगर आप talented हो, आप में लगन है, ईश्वर की कृपा है, बड़ों का आशीर्वाद है, तो सफलता तो झक मार कर आएगी।

चाहे वो मोदी जी, योगी जी, कपिल देव, धोनी, सचिन, सानिया, साइना, टाटा, बिरला, अंबानी और भी जितने सफल नाम...... हों, सब ने अपने talent, मेहनत व लगन से वो मुकाम हासिल किया है।

अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, श्रीदेवी, माधुरी दीक्षित, शाहरुख ख़ान, अक्षय कुमार, यहाँ तक की nepotism के नाम पर इतना हल्ला मचाने वाली कंगना रनौत, सब ने अपने talent के दम पर film industry पर अपना मुकाम बनाया है। मतलब टिकता talent ही है।  

इसलिए nepotism का बहाना ना बनाएँ, ये competition तो सब जगह है,

अगर आप में है दम, तो साबित करेंगे हम।

Means यहाँ टिकता वही है, जो दिखता है। और दिखता केवल talent है, और टिकता भी केवल talent ही। और यह बात सभी क्षेत्रों के लिए लागू होती है।

बस हमें यह करना है, हमें साथ talent का ही देना है, अंधभक्त बनकर, वंशवाद का नहीं देना है। पर अगर talent वंशज में है, तो नाहक उसका विरोध भी नहीं करना है, क्योंकि किसी का वंशज होना कोई अपराध तो नहीं।


Monday, 5 October 2020

Satire : हाय दईया छिपकली

आज कल रुका रुका सा कठिन समय गुजर रहा है, जिससे लोगों के जीवन में नीरसता आ गई है। तो सोचा कुछ ऐसा लिखा जाए, जो सबको थोड़ा गुदगुदा जाए।

हम सभी के घर में कभी न कभी पाई जाने वाली प्राणी, जिससे अधिकांश लोग डरते भी हैं, आज उसी पर लिखा जाए।

तो प्रस्तुत है, आज की रचना द्वारा एक प्रयास, जो आपको कुछ पलों के लिए गुदगुदा देगा। कैसा लगा आपको, अवश्य बताएँ🙏🏻


हाय दईया छिपकली


 

हमारे रहे, एक शूरवीर भइया, बहुते ही निडर, किसी से भी नहीं डरने वाले।

किसी को भी कोई भी परेशानी हो, सब को वही याद आते।

एक दिन की बात, हमारे शूरवीर भइया को कब्ज हो गया था, बहुत दिनों से पेट साफ नहीं हो रहा था, तो भइया रहे परेशान, बहुत सारे घरेलू नुस्खे अपनाए, फिर एक दिन लगा, आज मुक्ति मिल जाएगी कब्ज से।

भइया गए बाथरूम, और कुछ होता, उसके पहले, दिख गई, हाय दईया छिपकली ।

यही ससुरी छिपकली ही तो है, जो भइया की वीरता के सारे सुर बिगाड़ देती है।

भइया डर डरकर के छिपकली को देखें और छिपकली घूर घूर कर उन्हें देखे। 

बस फिर क्या था, सारे नुस्खे धरे के धरे रह गए, और बस, कुछ भी नहीं हो रहा था।

जैसे तैसे राम-राम करते इस सेवा से निवृत हुए, पर तब तक छिपकली दरवाजे के एकदम पास आ गई। अब बाहर कैसे निकलें?

आज कल तो attached bathroom का जमाना है तो सोचा चलो नहा भी लिया जाए। श्रीमती जी से नहाकर कपड़े मांग लेंगे।

शायद तब तक छिपकली देवी को कुछ दया आ जाए और वो प्रस्थान कर जाएँ।

बस झटपट भइया बैठ गये, बाल्टी लोटा लेकर।

पर डर इस कदर विद्यमान था, कि पूरी बाल्टी का पानी खत्म हो गया, पर भइया रहे सूखे के सूखे। काहे कि, एक लोटा पानी भी सही से ना डाल पाए कि स्नान हो पाता, सारा पानी, इधर उधर ही डालते रह गये।

इस बीच मजाल कि, छिपकली देवी एक इंच भी हिलीं हो।

सोचा चलो साबुन भी लगा लिया जाए, पर सूखे बदन पर साबुन भी घिसने से क्या होगा? 

तभी उन्हें, एक उपाय सूझा, शरीर तो नहीं भिगा पाए, चलो साबुन ही भिगा लेते हैं। बस फिर क्या था, साबुन को लोटे में जल निमग्न कर दिया।

अब इस भीगे साबुन को रगड़ा, तो कुछ झाग कन्धों पर, कुछ झाग माथे पर और कुछ बड़ी सी तोंद पर लग गया।

इधर श्रीमती जी, घबरा रहीं कि शूरवीर जी बाहर क्यों नहीं आ रहे हैं?  तो वो जोर जोर से आवाजें देने लगीं और दरवाजा भड़भड़ाने लगीं।

इससे हुआ यह कि छिपकली देवी, गिर कर जमीन में विराजमान हो गई।

अब तो भइया की घिग्घी बंध गई, वो पूरे जोर से चिल्लाए, कि हमें बचाय लो, पर आवाज़ बाहर ना जाए।

छिपकली देवी भी नहाने वाली जगह की तरफ़ बढ़ने लगीं।

बस फिर क्या था, भईया ने आव देखा न ताव, लटक गये नल और शावर  की पाइप लाइन पर।

श्रीमती जी ने दरवाज़ा, भड़भड़ा भड़भड़ा कर खोल दिया। शूरवीर जी को ऐसा देखकर वो हक्की-बक्की रह गईं और शूरवीर जी लपक कर श्रीमती जी से चिपक गये, हाय दईया, हमें इस छिपकली से बचाय लो। श्रीमती जी बोलीं, कहाँ है, छिपकली?

क्योंकि, इस आपाधापी में छिपकली देवी सरक गईं थीं।

छिपकली देवी को नदारद देखकर शूरवीर जी की वीरता वापस आ गई, वस्त्र आदि धारण कर, वो बहुत प्यार से श्रीमती जी को देखने लगे, आखिर, आज उन्हीं के कारण वो, पुनः शूरवीर बन सके थे।