Tuesday, 9 March 2021

Article : योगी जी, तुसी ग्रेट हो!

 योगी जी, तुसी ग्रेट हो!



हम थोड़े देर से प्रभावित होते हैं। हमारे संग ऐसा नहीं है कि, जिस तरफ सारी दुनिया चल रही है, हम भी बिना सोचे चल देंगे।

हम यूं ही नहीं किसी के गुणगान गाने लगते हैं, अगले को अपने काम को proof करना पड़ता है।

पर एक बात और भी है कि यदि कोई अपने कथन को ईमानदारी पूर्वक पूर्ण कर रहा है और वह बात देशहित से जुड़ी है।

तब ऐसे व्यक्ति की हम मुक्त कंठ से प्रशंसा करने से पीछे नहीं रहते हैं।

ऐसे व्यक्ति की प्रशंसा होनी भी चाहिए, क्योंकि प्रशंसा व्यक्ति को प्रोत्साहित करने का कार्य बखूबी करती है।

तो आज उस महान व्यक्ति, जिसके विषय में हम बात कर रहे हैं, वो कोई और नहीं, बल्कि हमारे योगी आदित्यनाथ जी ही हैं।

योगी जी ने उत्तर प्रदेश का कार्य भार सम्हालते हुए कहा था कि वो उत्तर प्रदेश से गुंडाराज ख़त्म कर देंगे। 

योगी जी के कार्यकाल का चौथा साल चल रहा है। 

अब देखते हैं कि उन्होंने अपने कथन को कितना पूर्ण किया।

उन्होंने इन चार सालों में, ना जाने कितने सालों से गुंडागर्दी में धाक जमाएं, गुंडों के शहंशाहों के पैर धरती से उखाड़ फेंके हैं।

फिर वो चाहे कानपुर के विकास दुबे हो, नोएडा के सुन्दर भाटी हो या ऐसे ही और भी....

और गुंडाराज ख़त्म करने की हद तो देखिए, कि अब उत्तर प्रदेश से ना केवल गुंडाराज ख़त्म हो रहा है, बल्कि गुंडे यहांँ आने से भी थर-थर कांपने लगे हैं।

मुख्तार अंसारी इसका जीता जागता उदाहरण है। वो पंजाब की जेल में रहने को तैयार है, दिल्ली आकर पेशी भी कर गया।

पर उत्तर प्रदेश में आने के नाम पर कोर्ट-कचहरी प्रारम्भ करवा दी गई है।

आखिर क्यों? 

जबकि जेल में ही तो पंजाब में भी है।

क्या कहेंगे आप, इसे? 

सालों पहले, जिस राज्य से गुंडों के सरताज बने थे, आज वहीं आने में घिग्गी क्यों बंध गई है?

सीधा सा मतलब है कि योगी जी ने अपनी कथनी पूर्णतया सिद्ध कर दी है। उत्तर प्रदेश में बहुत तेजी से गुंडाराज ख़त्म हो रहा है, साथ ही गुंडे लोग उत्तर प्रदेश में आने से भी कतराने लगे हैं।

गुंडाराज ख़त्म करने के साथ ही योगी जी, उत्तर प्रदेश को उसकी वो पहचान भी दिला रहे हैं, जिसका वो अधिकारी है। इस राज्य में काशी, अयोध्या, मथुरा, प्रयागराज, जैसे ना जाने कितने पवित्र स्थान हैं।

अर्थात् उत्तर प्रदेश जो कि तीर्थस्थानों का राज्य है, आज यह भी सार्थक होता जा रहा है।

इस बात के प्रत्यक्ष साक्षी हैं, प्रयागराज का अर्ध कुम्भ मेला, राममंदिर निर्माण और काशी, प्रयागराज, अयोध्या का कायाकल्प।

कोरोना जैसे महामारी में योगी जी की व्यवस्था देखते ही बनती है। इतनी बड़ी आबादी वाले राज्य को सम्हलना कोई हंसी-खेल नहीं था।

पर योगी जी ने उत्तर प्रदेश में कोरोना को control में रखा। 

गरीबों का, मजदूरों का और बाकी सब का भी पूर्णतया ध्यान रखा।

जहाँ सख्ती अनिवार्य थी, वहाँ सख़्ती रखी और जहाँ सहयोग आवश्यक था, वहाँ सहयोग।

हाँ, बहुत से सरकारी कर्मचारी, उनसे नाखुश भी हैं, क्योंकि उनकी छुट्टियों पर गाज गिरी है। जिनमें हमारे परिवार के सदस्य भी शामिल हैं। पर देश हित के लिए हम वह सहन कर लेंगे। 

जिसको नहीं देश प्यारा

उसका भविष्य नहीं उजियारा

देश हित पर सब कुर्बान

छुट्टियों का भी बलिदान

हम तो यही कहेंगे, योगी जी तुसी ग्रेट हो, उत्तर प्रदेश की hope हो। हमें सदैव आप जैसे संरक्षक की आवश्यकता है।

Monday, 8 March 2021

Poem : स्त्री

स्त्री 


टूटती है कई बार,

मगर टूट कर भी।

ना टूटती है जो,

स्त्री है वही तो।।


टूटती है वो, जब 

मायके की दहलीज,

छोड़ आती है।

अपना बचपन, अपने सपने,

जिन्हें अब तक कहती थी अपने,

वो सब बिसराती है।

पति ही नहीं, 

पूरे परिवार को अपनाती है।

एक परिवार की थी,

अब दो-दो को निभाती है।

स्त्री टूट कर भी,

कहाँ टूट पाती है।।


टूटती है वो, जब 

पहली प्रसव पीड़ा होती है,

अपने अन्दर असंख्य,

दर्द के बवंडर सहती है।

पहले सा शरीर फिर ना,

कभी पाती है।।

बन के वो माँ, 

अपने दर्द को।

बच्चे की मुस्कान में,

छिपाती है।

स्त्री टूट कर भी,

कहाँ टूट पाती है।।


टूटती है वो, जब

अपने संसार को बनाने में,

ख़ुद से ही बहुत दूर, 

होती चली जाती है।

अपना अस्तित्व खुद, 

अपने हाथों से मिटाती है।

एक कन्या से वो,

गृहणी बन,

पूरे गृह को,

ऋणी कर जाती है।

स्त्री टूट कर भी,

कहाँ टूट पाती है।।


वो टूटती है, 

बिखरती है,

पर पल भर में,

फिर संवर जाती है।

समेटकर अपनी टूटन,

वो फिर निखर जाती है।

उसमें शक्ति है सृजन की,

तभी तो वह स्त्री,

कहलाती है।।


💐अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ 💐

Friday, 5 March 2021

Satire : हमाय पूर्वज

 हमाय पूर्वज 




हाय दईया छिपकली की अपार सफलता के बाद से छिपकली देवी तो बन गई celebrity. 

अब Celebrity लोगों के तो दुश्मन भी हुआ करते हैं, तो आइए, आप को उनके दुश्मन से मिलवाते हैं। 

नाम था लल्लन सिंह, बड़े ही खुंखार हुआ करते थे, खास तौर से अपने कट्टर दुश्मन छिपकली देवी के लिए।

जहांँ कहीं उन्हें छिपकली दिख जाती, फिर तो उनको पास में जो भी अस्त्र दिखता, जैसे जूता-चप्पल , डंडा, झाड़ू या और कुछ भी......

लल्लन सिंह तैनात हो जाते, उसे लेकर, और शामत ही आ जाती, छिपकली देवी की।

आलम तो यह था कि छिपकली देवी को देखते ही वो ठान लेते थे कि आज घर में यह रहेगी या हम रहेंगे।

बस फिर क्या था,  बेचारी हमारी छिपकली देवी आगे आगे, और लल्लन सिंह पीछे पीछे होते। ये सर्र दौड़ती, वो सर्र दौड़ती.....

पर आखिरकार छिपकली देवी को ही घर से बाहर होना पड़ता था, क्योंकि घर तो ragister था लल्लन जी के नाम, और देवी जी थीं, बिन बुलाई मेहमान।

एक बार की बात थी। गांव से लल्लन सिंह की अम्मा आय रहीं। 

उन्हीं दिनों में लल्लन सिंह के घर पुताई भी हो रही थी।

पुताई के कारण, घर में अच्छे से साफ़ सफाई भी हो गई।

सारे मच्छर, कीड़े- मकोड़े सब भाग गए। 

पर नहीं भागी, तो एक छिपकली देवी ।  

एक कमरे में पुताई होती, तो दूसरे में छिप जाती और दूसरे में होती तो तीसरे में छिप जाती। क्योंकि हर कमरे में tube light जो थी ही उसके छिपने के लिए।

Location बदलती रहीं, पर घर छोड़ कर नहीं गयी।

एक दिन वो लल्लन सिंह को दिख ही गयीं।

बस फिर क्या था, लल्लन सिंह तैनात हो गये, उसको भगाने को।

पर वो भगा पाते, उससे पहले ही अम्मा आ गयीं।

जे का कर रय हो लल्ला?

कुछ नहीं अम्मा छिपकली को भगाय रये, खींसे निपौरते हुए लल्लन सिंह बोले।

अम्मा कुछ ज्यादा ही पुराने ख्यालात की थीं और अम्मा के सामने, लल्लन सिंह की कुछ चलती नहीं थी।

अम्मा, पूरा घर साफ़ हो गया। सारे कीड़े-मकोड़े भाज गए, पर एक यह है जो घर ना छोड़ रयी।

अरे, जाय दो बेटा, हमाय घर की पूर्वज होंगी, तबही नहीं गईं।

पूर्वज!!!!! ...गई भैंस पानी में.....

लल्लन सिंह, खिसिया के अम्मा को देख रहे थे और छिपकली देवी, लल्लन सिंह को देख देख मुस्काए रहीं, मानो कह रही हो, जै बात.....

तभी श्रीमती जी ने रेडियो चला दिया, जिसमें गाना आ रहा था

'यह तेरा घर, यह मेरा घर...'

बस अब क्या था, छिपकली देवी की चांदी हो गई। अब तो लल्लन सिंह को देख कर भी चौड़े में रहती छिपकली देवी। 

वो पूर्वज जो ठहरीं, तो अब लल्लन सिंह भी कुछ नहीं बिगाड़ सकते थे। तब तक तो कतई भी नहीं, जब तक अम्मा थीं।

एक दिन लल्लन सिंह दफ्तर जाने के लिए तैयार हो कर घर से निकले ही थे, कि लौट कर सीधे फिर बाथरूम में घुस गये।

का हुआ, लल्ला? अबहिं तो स्नान किए थे, फिर क्या भया? जो फिर नहाय रय।

का कहें अम्मा? तुम्हारे पूर्वज हमाय ऊपर ही गिर गये। जाय मारे ‌फिर से नहाय रय।

अब तो आए दिन यही होता, कभी पूर्वज, चौखट पर बैठ जाती और डराकर लोगों को घर के अन्दर आने नहीं देती। और कभी पूर्वज गिर जाती, तो नहाने धोने के कारण घर से बाहर निकलने नहीं देती। 

इस बात से लल्लन सिंह के हाथ तो बहुत सुरसुराते, पर कुछ ना कर पाते, बस मन मसोस के रह जाते।

पर अम्मा के गांव जाते ही लल्लन सिंह ने सबसे पहले छिपकली देवी को घर से निकाल बाहर किया।

लल्लन सिंह का लड़का चिल्लाया भी, पापा जी हमाय पूर्वज!!!