Thursday, 26 August 2021

Kids Story : माँ की दवाई

 माँ की दवाई




कुंदन रोज़ घर से 20 गुब्बारे लाता और चौराहों में दौड़-दौड़ कर बेचा करता। 

इससे मुश्किल से उसके पास इतना ही पैसा इकट्ठा हो पाता कि एक दिन खाना मिलता और एक दिन फांकों में गुजरते क्योंकि माँ की दवाई में बहुत पैसे लग जाते थे।

फिर भी कुंदन पूरे जोश से गुब्बारे बेचता रहता।

एक दिन कुंदन गुब्बारे बेचने के लिए, एक car के नज़दीक गया।

Car में एक समाजसेवी बैठा था। कुंदन को देखकर बोला...

 तुम गुब्बारे क्यों बेचते हो?

पढ़ाई क्यों नहीं करते हो?

यह बताइए, क्या होगा पढ़ाई कर के?

समाजसेवी बोला, तुम पढ़-लिख जाओगे तो बड़े होकर पैसे कमाओगे।

कुंदन बोला, वो तो मैं अभी भी कमा रहा हूँ।

समाजसेवी बोला, अरे, इतने कम नहीं और ज्यादा कमा सकते हो।

अच्छा, पर जब मैं पढ़ाई करुंगा, तब पैसे कहाँ से आएंगे और मेरी पढ़ाई के लिए... वो पैसे कहाँ से आएंगे। खाने-पीने के लिए भी तो पैसे चाहिए।

अरे, छोटी सी जान! अभी से तुझे पैसे की कितनी फ़िक्र है। मैं दूंगा तुझे पैसे, पढ़ने, खाने-पीने सब के लिए।

कुंदन बोला, मेरी माँ बहुत बीमार रहती हैं, उसकी दवाई के लिए ही मैं गुब्बारे बेचता हूँ। अगर मैं पढ़ने जाऊंगा तो वो बिना दवाई के नहीं बचेंगी।

मुझे नहीं पढ़ना।

समाजसेवी बोला -कुंदन, अगर मैं उसके लिए भी पैसे दे दूं तो?

कुंदन सुनकर खुशी से झूम उठा, बोला अगर आप मेरी माँ की दवाई के पैसे देंगे और मुझे सिर्फ एक time ही खाना देंगे तो भी चलेगा। मुझे बहुत सारा काम करना भी मंजूर है...

पर आप ने जिस दिन से मेरी माँ की दवाई के पैसे नहीं दिए, मैं सब छोड़कर आ जाउंगा।

समाजसेवी, कुंदन का माँ के प्रति प्रेम देखकर गदगद हो गया। वो बोला, बेटा ऐसा कभी नहीं होगा, अगर तुम मन लगाकर पढ़ोगे। 

आप जो कहेंगे, सब करुंगा...

कुंदन मन लगाकर पढ़ने लगा, उसे रोज़ खाना भी मिल रहा था और माँ का उचित इलाज भी हो रहा था। 

कुंदन का माँ के प्रति प्रेम और कर्तव्य उसे आगे बढ़ने को प्रेरित करता रहा क्योंकि वो माँ की दवाई के लिए कुछ भी करने को तैयार था।

Tuesday, 24 August 2021

Tips ; सूजी, बेसन, मैदा को कीड़े से बचाना

बरसात का मौसम जितना सुहावना होता है उतना ही कीड़े-मकोड़े से भरा हुआ भी होता है, ऐसे में घर में सूजी, मैदा, बेसन को store कर के रखना, अपने आप में बहुत बड़ी problem है।

पर कोरोना काल में रोज़-रोज़ सब लेने जाना भी आसान नहीं है, ऐसे में कैसे इस problem से बचा जाए। 

पर फ़िक्र की क्या बात, जब Shades of Life है साथ...

आज आप को इसी समाधान की tips and tricks बता रहे हैं.... 

सूजी, बेसन, मैदा को कीड़े से बचाना


1. Green cardamom -

4 to 6 साबुत (हरी या छोटी) इलायची, सूजी, बेसन, मैदा से कीड़े-मकोड़े को भगाने के लिए बहुत कारगर सिद्ध होती है।

2. Black cardamom -

अगर आप के पास (काली या बड़ी) इलायची है तो 3-4 साबुत बड़ी इलायची भी, सूजी, बेसन, मैदा से कीड़े-मकोड़े भगाने के लिए use कर सकते हैं।

3. Cinnamon stick -

दालचीनी की ½ inch की stick भी सूजी, बेसन, मैदा से कीड़े-मकोड़े भगाने में बहुत सहायक सिद्ध होती है।

4. Bay leaf -

तेज पत्ता सूजी, बेसन, मैदा से कीड़े-मकोड़े भगाने का बेहतरीन तरीका होता है। 2-3 तेजपत्ता डालने से आपको सूजी, बेसन, मैदा से कीड़े-मकोड़े free मिलेंगे। 

तो kitchen की परेशानी, kitchen के सामानों से ही दूर कर लीजिए।

Home remedies को use करना ही best होता है, क्योंकि उनको use करने से किसी भी तरह के ख़तरे और side effects का डर नहीं रहता है।

तो आप इन home remedies के द्वारा सूजी, बेसन, मैदा में लगने वाले कीड़े-मकोड़े से मुक्ति पाएं और पूरे परिवार के लिए बढ़िया-बढ़िया पकवान बनाकर उन्हें खुश करें।

Monday, 23 August 2021

Short Story : सौदा

 सौदा



Main market में बहुत बड़ा restaurant खुला था। वहाँ का ambience जितना soothing and relaxing था, खाना उतना ही tasty. 

जिसके कारण वो बहुत जल्दी, बहुत famous हो गया।

उस restaurant में रोज़ एक बुजुर्ग आता और हमेशा सिर्फ सब्जी-रोटी का order करता। 

खाना ख़त्म करने पर हमेशा कहता कि purse घर में भूल गया है, और बिना पैसे दिए restaurant से निकल जाता।

Restaurant का owner कभी भी उनके आने पर रोक नहीं लगाता।

किसी को समझ नहीं आता कि मालिक उसे free में क्यों खाना खिलाते हैं।

एक दिन एक waiter से नहीं रहा गया, उसने मालिक से कहा, आप एक-एक पैसे का हिसाब रखते हैं। किसी के bill में कोई भी concession नहीं करते हैं, फिर वो चाहे कितना भी powerful क्यों ना हो।

और इन बुजुर्ग का आप रोज़ पैसा छोड़ देते हैं, जबकि ना तो यह कोई powerful इंसान लगते हैं ना देखने में बहुत गरीब ही लगते हैं।

Restaurant का मालिक बोला, जब मैं गांव से शहर आया था तो मेरे पास रोज़ रोटी खाने के पैसे तक नहीं थे।

इन बुजुर्ग के घर के बाहर ही एक दिन, मैं बेहोश होकर गिर गया।

यह मुझे घर ले गए। इन्होंने और इनकी पत्नी ने मुझे खाना दिया। मुझे दवा दी, कुछ कपड़े भी पहनने को दिए। मैं उन्हें अंकल और आंटी बोलने लगा।

उन्होंने मुझे, कुछ पैसे भी दिए, जिससे मैंने  Tea stall लगा ली।

मेरी मेहनत रंग लाई और मैंने छोटा सा ढाबा खोल लिया।

मैं दिन-रात मेहनत करता रहा और ईश्वर मेरा साथ देता रहा।

मैं जब भी ऊंचे मुकाम पर पहुंचता, इन लोगों से मिलने जरूर जाता और मुझे वो लोग बहुत हौसला देते, आशीर्वाद देते।

जिस दिन मैंने यह restaurant ख़रीदा, उस दिन ही आंटी की सड़क दुघर्टना में मौत हो गई और अंकल जी ने अपनी याददाश्त खो दी। वो मुझे भी भूल गए...

जब कुछ दिन बाद, मैं उनके पास गया, वो बहुत दुखी थे और परेशान भी। तो मैंने उनसे कहा कि, एक restaurant खुला है, आप वहाँ जाकर रोज़ खाना खा सकते हैं।

तब से ही वो रोज़ खाना खाने आते हैं। पर वो सिर्फ उतना ही लेते हैं, जिससे उनका पेट भर जाए। उन्होंने कभी बहुत महंगा खाना order नहीं किया। ऐसे सज्जन पुरुष से मैं, कुछ भी कहकर उनको सोचने नहीं देना चाहता कि वो free में खाना खाते हैं। 

उनका यहाँ आना मेरे लिए सबसे बड़े ग्राहक का आना है। और यह सौदा मुझे संसार की सबसे बड़ी खुशी देता है।